Class 8 : गणित – अध्याय 6 : जितना बाटेंगे उतना बढ़ेगा
व्याख्या और विवेचन
🟣 भूमिका
🔵 यह अध्याय गणित को केवल संख्याओं का विषय नहीं रहने देता, बल्कि उसे जीवन, समाज और साझेदारी से जोड़ देता है।
🟢 “जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा” नाम अपने आप में बहुत अर्थपूर्ण है। सामान्यतः हमें लगता है कि किसी वस्तु को बाँटने से वह कम हो जाती है, परन्तु ज्ञान, समझ, सहयोग, विचार, प्रेम, जिम्मेदारी और सहभागिता ऐसी चीज़ें हैं जो बाँटने से घटती नहीं, बल्कि बढ़ती हैं।
🟡 गणित में भी यही विचार अनेक रूपों में दिखाई देता है। जब हम किसी मात्रा को भागों में बाँटते हैं, तो हम उसके सम्बन्धों को अधिक स्पष्ट रूप से समझ पाते हैं।
🔴 इसी अध्याय में बराबर बाँटने, हिस्सों को समझने, अनुपात, भागीदारी, साझेदारी, तुलना और वितरण जैसी धारणाएँ बहुत महत्त्वपूर्ण बन जाती हैं।
🌸 इस अध्याय का मूल संदेश
🔹 बाँटना केवल अलग करना नहीं है।
🔸 बाँटना समझदारी से विभाजन करना है।
🔹 बाँटना निष्पक्षता से जुड़ा है।
🔸 बाँटना सम्बन्धों को स्पष्ट करता है।
🔹 बाँटना गणित को जीवन से जोड़ता है।
💠 1. बाँटने का अर्थ
🔵 जब किसी वस्तु, मात्रा, समय, दूरी, धन, भोजन या कार्य को कई व्यक्तियों अथवा भागों में बाँटा जाता है, तब मुख्य प्रश्न यह होता है कि बाँटना समान है या असमान।
🟢 यदि सभी को बराबर हिस्सा मिलता है, तो यह समान वितरण है।
🟡 यदि अलग-अलग हिस्से मिलते हैं, तो हमें यह समझना पड़ता है कि कौन-सा हिस्सा कितना है और क्यों है।
🔴 गणित हमें यही सिखाता है कि किसी भी बाँट को स्पष्ट, तर्कपूर्ण और मापनीय रूप में कैसे व्यक्त किया जाए।
✏️ ध्यान दें
🔹 “बराबर बाँटना” और “न्यायपूर्ण बाँटना” कई बार एक जैसे होते हैं।
🔸 पर कुछ स्थितियों में न्यायपूर्ण बाँट आवश्यकता, योगदान या परिस्थिति के अनुसार भी हो सकता है।
🔹 गणित इन स्थितियों को संख्या और सम्बन्ध की सहायता से समझने में मदद करता है।
🌼 2. भाग और पूरा
🔵 किसी भी बाँट को समझने के लिए “पूरा” और “भाग” का विचार सबसे मूलभूत है।
🟢 पूरा वह है जो सम्पूर्ण मात्रा को दर्शाता है।
🟡 भाग वह है जो उस पूरे का कोई हिस्सा हो।
🔴 यदि एक रोटी को 4 बराबर भागों में बाँटा जाए, तो प्रत्येक भाग पूरे का 1/4 होगा।
💡 अवधारणा
🔹 जब पूरा ज्ञात हो, तो भाग का अर्थ स्पष्ट होता है।
🔸 जब भाग ज्ञात हो, तो हम पूरे का अनुमान भी लगा सकते हैं।
🔹 यही विचार आगे भिन्नों, अनुपातों और हिस्सेदारी की समझ को मजबूत करता है।
🌿 3. समान बाँट और असमान बाँट
🔵 मान लीजिए 12 आम 4 बच्चों में बाँटे गए।
🟢 यदि प्रत्येक बच्चे को 3 आम मिलें, तो बाँट समान है।
🟡 यहाँ 12 ÷ 4 = 3
🔴 अतः प्रत्येक बच्चे का हिस्सा समान है।
अब दूसरी स्थिति देखें।
🔵 यदि किसी को 4 आम, किसी को 3, किसी को 3 और किसी को 2 आम मिले, तो बाँट असमान है।
🟢 इस स्थिति में कुल आम तो 12 ही हैं, पर हिस्से समान नहीं हैं।
🟡 इसलिए हमें केवल कुल मात्रा नहीं, बल्कि बाँट का प्रकार भी समझना पड़ता है।
🔴 यही इस अध्याय की सामाजिक और गणितीय गहराई है।
🌺 4. बाँटना और भाग
🔵 गणित में बाँटने की क्रिया को भाग कहते हैं।
🟢 भाग हमें बताता है कि कोई मात्रा कितने बराबर हिस्सों में बँट सकती है।
🟡 जैसे 20 ÷ 5 = 4
🔴 इसका अर्थ है कि 20 को 5 बराबर भागों में बाँटने पर प्रत्येक भाग 4 होगा।
✏️ यहाँ तीन बातें छिपी होती हैं
🔹 कुल मात्रा = 20
🔸 भागों की संख्या = 5
🔹 प्रत्येक भाग = 4
💡 यही सम्बन्ध अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि जीवन की अनेक समस्याएँ इसी ढाँचे पर हल होती हैं।
🌈 5. बाँटने से समझ बढ़ती है
🔵 जब किसी वस्तु को बाँटा जाता है, तो हम उसके अंशों को अलग-अलग देख पाते हैं।
🟢 इससे तुलना करना आसान हो जाता है।
🟡 जैसे 1 लीटर दूध को 2, 4 या 5 भागों में बाँटने पर अलग-अलग मात्राएँ मिलती हैं।
🔴 इस तरह बाँटना वस्तु को कम करने का नहीं, उसे अधिक स्पष्ट रूप से समझने का तरीका बन जाता है।
💡 जीवन से सम्बन्ध
🔹 ज्ञान बाँटने से बढ़ता है।
🔸 कार्य बाँटने से बोझ घटता है।
🔹 जिम्मेदारी बाँटने से सहयोग बढ़ता है।
🔸 वस्तुओं का उचित वितरण करने से निष्पक्षता बढ़ती है।
🌻 6. हिस्सों की तुलना
🔵 यदि दो व्यक्तियों को अलग-अलग हिस्से मिले हों, तो हम तुलना कर सकते हैं कि किसका हिस्सा अधिक है और किसका कम।
🟢 इसके लिए हमें केवल संख्या नहीं देखनी होती, बल्कि यह भी देखना होता है कि वह संख्या किस पूरे से सम्बन्धित है।
🟡 उदाहरण के लिए 1/2 और 1/3 की तुलना में दोनों के अंश 1 हैं, पर हर अलग है।
🔴 1/2, 1/3 से बड़ा है क्योंकि आधा, तिहाई से बड़ा हिस्सा है।
✏️ महत्त्वपूर्ण विचार
🔹 समान पूरे के बिना तुलना अधूरी हो सकती है।
🔸 भाग की समझ हमेशा पूरे से जुड़कर ही बनती है।
🌸 7. भिन्नों की भूमिका
🔵 किसी पूरे के बराबर भागों में से कुछ भागों को व्यक्त करने के लिए भिन्न का प्रयोग किया जाता है।
🟢 भिन्न हमें बाँट का गणितीय रूप देती है।
🟡 जैसे 3/4 का अर्थ है कि पूरा 4 बराबर भागों में बाँटा गया और उनमें से 3 भाग लिए गए।
🔴 इस अध्याय के विचारों को समझने में भिन्न बहुत उपयोगी होती है।
💡 भिन्न में
🔹 ऊपर की संख्या बताती है कि कितने भाग लिए गए।
🔸 नीचे की संख्या बताती है कि पूरा कितने बराबर भागों में बाँटा गया।
✏️ नोट
🔹 बराबर भाग होना बहुत ज़रूरी है।
🔸 यदि भाग बराबर नहीं हैं, तो उन्हें सीधे भिन्न के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
🌼 8. साझेदारी का विचार
🔵 कई बार बाँटना केवल चीज़ों का नहीं, बल्कि काम, समय, प्रयास और उत्तरदायित्व का भी होता है।
🟢 जब दो या अधिक व्यक्ति मिलकर कोई काम करते हैं, तो यह साझेदारी होती है।
🟡 साझेदारी में यह देखना पड़ता है कि किसने कितना योगदान दिया।
🔴 गणित इस योगदान को संख्यात्मक रूप में समझने में सहायता करती है।
उदाहरण
🔵 यदि 3 बच्चे मिलकर 24 पौधे लगाते हैं और सभी ने बराबर काम किया, तो प्रत्येक ने 8 पौधे लगाए।
🟢 यदि किसी ने अधिक और किसी ने कम लगाया, तो हमें उनके हिस्से अलग-अलग लिखने होंगे।
🟡 इस प्रकार साझेदारी और वितरण एक-दूसरे से जुड़े हैं।
🔴 यही अध्याय का मानवीय पक्ष है।
🌿 9. अनुपात का संकेत
🔵 जब दो राशियों की तुलना भाग देकर की जाती है, तो अनुपात का विचार सामने आता है।
🟢 जैसे यदि 2 बच्चों के पास क्रमशः 4 और 6 किताबें हैं, तो उनकी तुलना 4:6 या 2:3 के रूप में की जा सकती है।
🟡 यह दिखाता है कि बाँटना और तुलना करना केवल अलग-अलग विचार नहीं हैं।
🔴 वे आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
💡 अवधारणा
🔹 वितरण से हिस्से मिलते हैं।
🔸 हिस्सों की तुलना से अनुपात समझ में आता है।
🔹 अनुपात से सम्बन्धों की स्पष्टता बढ़ती है।
🌺 10. बाँटना और न्याय
🔵 यह अध्याय केवल गणना नहीं सिखाता, बल्कि निष्पक्षता की भावना भी विकसित करता है।
🟢 यदि 5 बच्चों के लिए 10 रोटियाँ हैं, तो प्रत्येक को 2 रोटियाँ मिल सकती हैं।
🟡 यह समान बाँट है।
🔴 पर यदि किसी बच्चे की आवश्यकता अधिक हो, तो वास्तविक जीवन में अलग वितरण भी सम्भव है।
✏️ इसलिए
🔹 गणित हमें बाँट का ढाँचा देती है।
🔸 जीवन हमें परिस्थिति देता है।
🔹 दोनों को साथ समझना ही परिपक्व सोच है।
🌈 11. शेष का विचार
🔵 हर बाँट पूरी तरह समान नहीं हो पाती।
🟢 कई बार भाग देने पर कुछ शेष बच जाता है।
🟡 जैसे 10 वस्तुएँ 3 बच्चों में बराबर बाँटें।
🔴 तब 10 ÷ 3 = 3 शेष 1
💡 इसका अर्थ
🔹 प्रत्येक को 3 वस्तुएँ मिलेंगी।
🔸 1 वस्तु शेष बचेगी।
✏️ यह शेष बताता है कि बाँट पूरा तो हुआ, परन्तु पूर्ण समानता नहीं मिली।
🔹 ऐसे प्रश्न बच्चों को भाग की वास्तविक समझ देते हैं।
🌻 12. चित्रों और स्थितियों से समझ
🔵 यदि एक वृत्त, आयत, डोरी, चॉकलेट या समय-रेखा को भागों में बाँटा जाए, तो बच्चे आसानी से समझ पाते हैं कि हिस्सा क्या होता है।
🟢 दृश्य रूप से देखना, संख्या से समझने से भी अधिक प्रभावी हो सकता है।
🟡 जैसे एक वृत्त का आधा, चौथाई या तीन-चौथाई तुरंत पहचाना जा सकता है।
🔴 इस कारण यह अध्याय केवल संख्यात्मक ही नहीं, दृश्यात्मक समझ भी विकसित करता है।
💡 अवधारणा
🔹 जब आकृति को बराबर भागों में बाँटते हैं, तो प्रत्येक भाग का माप समझ में आता है।
🔸 इससे भिन्न, बाँट और तुलना सभी एक साथ स्पष्ट होते हैं।
🌸 13. साझा करने से वृद्धि का अर्थ
🔵 शीर्षक “जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा” का एक गहरा शैक्षिक अर्थ है।
🟢 जब एक बच्चा अपनी विधि दूसरे को बताता है, तो दोनों की समझ बढ़ती है।
🟡 जब समूह में प्रश्न हल किए जाते हैं, तो नए विचार सामने आते हैं।
🔴 जब संसाधनों का सही वितरण होता है, तो सबकी भागीदारी बढ़ती है।
✏️ इसलिए यहाँ “बढ़ना” का अर्थ केवल संख्या का बढ़ना नहीं है।
🔹 यह समझ, सहयोग, न्याय और सहभागिता का बढ़ना है।
🔸 गणित का यही मानवीय सौन्दर्य इस अध्याय में दिखाई देता है।
🌼 14. दैनिक जीवन में उपयोग
🔵 भोजन बाँटना
🟢 समय बाँटना
🟡 जेब-खर्च का विभाजन
🔴 समूह-कार्य का बँटवारा
🟣 पानी, दूध, अनाज जैसी मात्राओं का वितरण
🟠 खेल में टीम बनाना
🟤 सीटों, टोकनों, पुस्तकों या कार्यों का बाँट
इन सब स्थितियों में यही अध्याय जीवित हो उठता है।
💡 उदाहरण
🔹 1 घण्टा 4 कामों में कैसे बाँटें?
🔸 20 पेंसिल 5 बच्चों में बराबर बाँटने पर प्रत्येक को कितनी मिलेंगी?
🔹 3/4 लीटर रस को 3 बराबर भागों में बाँटने पर प्रत्येक को कितना मिलेगा?
🌿 15. सामान्य भूलें
🔴 बराबर और असमान भागों में अन्तर न समझना
🔴 पूरे को ध्यान में रखे बिना केवल हिस्से की तुलना करना
🔴 शेष वाले भाग को गलत समझना
🔴 भिन्न में अंश और हर की भूमिका बदल देना
🔴 अनुपात और साधारण तुलना को एक ही मान लेना
✏️ बचाव के उपाय
🔹 पहले पूरा पहचानो
🔸 फिर बराबर भागों की संख्या देखो
🔹 फिर लिया गया भाग देखो
🔸 फिर तुलना करो
🔹 अन्त में सन्दर्भ को समझो कि प्रश्न वस्तु, समय, दूरी या कार्य में से किससे सम्बन्धित है
🌺 16. अध्याय की वैचारिक शक्ति
🔵 यह अध्याय बच्चों को संवेदनशील गणित की ओर ले जाता है।
🟢 यहाँ संख्या केवल गणना का साधन नहीं रहती, बल्कि सम्बन्धों को व्यक्त करने का माध्यम बनती है।
🟡 बाँटना, तुलना करना, हिस्सेदारी समझना और साझेदारी को मापना — ये सब आगे की गणित की तैयारी भी हैं।
🔴 इसी आधार पर छात्र भिन्न, दशमलव, अनुपात, प्रतिशत और आँकड़ों की दुनिया में अधिक आत्मविश्वास से प्रवेश करता है।
💡 अवधारणा
🔹 जो बच्चा हिस्सों को समझ लेता है, वह पूरी गणित को अधिक सरलता से समझने लगता है।
🔸 इसलिए यह अध्याय छोटा दिखाई देकर भी बहुत बुनियादी है।
🌈 17. सीखने की सही दिशा
🔵 इस अध्याय को रटकर नहीं, अनुभव करके पढ़ना चाहिए।
🟢 रोटी बाँटकर, फल बाँटकर, समय बाँटकर, चित्रों को भागों में बाँटकर और समूह-कार्य करके इसकी समझ और मजबूत होती है।
🟡 यदि बच्चा हर प्रश्न में यह पूछे — “पूरा क्या है?” “भाग कितने हैं?” “बराबर बाँट हुआ या नहीं?” — तो उसकी समझ स्वतः गहरी होती जाएगी।
🔴 यही वास्तविक गणितीय सोच है।
🧠 18. समापन विचार
🔵 “जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा” हमें सिखाता है कि बाँटना केवल संख्या का विभाजन नहीं, बल्कि विचार का विस्तार है।
🟢 इस अध्याय में बाँट, भाग, हिस्सेदारी, बराबरी, न्याय, भिन्न, तुलना और सहभागिता एक सूत्र में बँधे हुए दिखाई देते हैं।
🟡 गणित यहाँ जीवन का साथी बनती है।
🔴 इसलिए यह अध्याय केवल हल करने के लिए नहीं, जीने के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।
सारांश
🔵 इस अध्याय का मुख्य विचार यह है कि किसी मात्रा, वस्तु, समय या कार्य को बाँटने से हम उसके हिस्सों और सम्बन्धों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
🟢 बराबर बाँटने पर प्रत्येक हिस्सा समान होता है, जबकि असमान बाँट में हिस्सों की तुलना अलग ढंग से करनी पड़ती है।
🟡 “पूरा” और “भाग” की समझ इस अध्याय की नींव है। जब पूरा ज्ञात होता है, तभी भाग का अर्थ स्पष्ट होता है।
🔴 भाग की गणितीय अभिव्यक्ति भिन्न के रूप में की जाती है, जहाँ पूरा बराबर भागों में बाँटा जाता है।
🟣 इस अध्याय में साझा करने, साझेदारी, निष्पक्ष वितरण और तुलना जैसे विचार प्रमुख हैं।
🟠 समान बाँट से बराबरी का विचार विकसित होता है, जबकि साझेदारी से योगदान और हिस्सेदारी की समझ बनती है।
🟤 कई स्थितियों में शेष भी बचता है, जिससे यह समझ आता है कि हर बाँट पूर्ण समान नहीं हो सकती।
🌸 दैनिक जीवन में भोजन, समय, धन, वस्तुएँ, कार्य और जिम्मेदारियों का बँटवारा इसी अध्याय के विचारों से जुड़ता है।
🌿 इस अध्याय का शीर्षक यह बताता है कि ज्ञान, विचार, सहयोग और समझ बाँटने से बढ़ते हैं।
🌼 यह अध्याय आगे भिन्न, अनुपात, प्रतिशत और अन्य गणितीय धारणाओं की मजबूत आधारशिला तैयार करता है।
📝 त्वरित पुनरावृत्ति
🔹 बाँटना केवल अलग करना नहीं, बल्कि सम्बन्ध स्पष्ट करना है।
🔸 “पूरा” और “भाग” की समझ सबसे महत्त्वपूर्ण है।
🔹 बराबर बाँट से समान हिस्से मिलते हैं।
🔸 भिन्न बराबर भागों को व्यक्त करती है।
🔹 शेष बताता है कि बाँट पूरी तरह समान नहीं हो पाया।
🔸 बाँटना निष्पक्षता, साझेदारी और सहयोग से जुड़ा है।
🔹 ज्ञान, विचार और समझ बाँटने से बढ़ते हैं।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
🔒 ❓ प्रश्न 1.
सुझाई गई सर्वसमिका का उपयोग करके गुणनफलों की गणना कीजिए
(i) 46² का मान, (a + b)² के लिए सर्वसमिका 1A का उपयोग करते हुए
(ii) 397 × 403 का मान, (a + b) (a – b) के लिए सर्वसमिका 1C का उपयोग करते हुए
(iii) 91² का मान, (a – b)² के लिए सर्वसमिका 1B का उपयोग करते हुए
(iv) 43 × 45 का मान, (a + b) (a – b) के लिए सर्वसमिका 1C का उपयोग करते हुए
📌 ✅ उत्तर:
🔵 (i) 46² का मान
🔹 यहाँ
46 = 40 + 6
🔹 अब सर्वसमिका:
(a + b)² = a² + 2ab + b²
🔹 अतः
46² = (40 + 6)²
🔹 = 40² + 2 × 40 × 6 + 6²
🔹 = 1600 + 480 + 36
🔹 = 2116
✔️ अंतिम उत्तर:
46² = 2116
🔵 (ii) 397 × 403 का मान
🔹 यहाँ
397 = 400 – 3
403 = 400 + 3
🔹 अब सर्वसमिका:
(a + b)(a – b) = a² – b²
🔹 अतः
397 × 403 = (400 – 3)(400 + 3)
🔹 = 400² – 3²
🔹 = 160000 – 9
🔹 = 159991
✔️ अंतिम उत्तर:
397 × 403 = 159991
🔵 (iii) 91² का मान
🔹 यहाँ
91 = 100 – 9
🔹 अब सर्वसमिका:
(a – b)² = a² – 2ab + b²
🔹 अतः
91² = (100 – 9)²
🔹 = 100² – 2 × 100 × 9 + 9²
🔹 = 10000 – 1800 + 81
🔹 = 8281
✔️ अंतिम उत्तर:
91² = 8281
🔵 (iv) 43 × 45 का मान
⚠️ ध्यान दीजिए:
🔹 प्रश्न में यहाँ (a + b)(a – b) की सर्वसमिका लिखी है।
🔹 पर 43 और 45, किसी एक ही संख्या से समान अंतर पर नहीं हैं।
🔹 इसलिए यहाँ सीधे सर्वसमिका 1C लागू नहीं होती।
🔹 इस प्रश्न को वितरण गुणधर्म से हल करना उपयुक्त है।
🔹 43 × 45
= 43 × (40 + 5)
🔹 = 43 × 40 + 43 × 5
🔹 = 1720 + 215
🔹 = 1935
✔️ अंतिम उत्तर:
43 × 45 = 1935
🔒 ❓ प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रत्येक गुणनफल को ज्ञात करने के लिए उपयुक्त सर्वसमिका अथवा वितरण गुणधर्म का उपयोग कीजिए
(i) (p – 1) (p + 11)
(ii) (3a – 9b) (3a + 9b)
(iii) – (2y + 5) (3y + 4)
(iv) (6x + 5y)²
(v) (2x – 1/2)²
(vi) (7/p) × (3r) × (p + 2)
📌 ✅ उत्तर:
🔵 (i) (p – 1)(p + 11)
🔹 वितरण गुणधर्म से
(p – 1)(p + 11)
🔹 = p(p + 11) – 1(p + 11)
🔹 = p² + 11p – p – 11
🔹 = p² + 10p – 11
✔️ अंतिम उत्तर:
(p – 1)(p + 11) = p² + 10p – 11
🔵 (ii) (3a – 9b)(3a + 9b)
🔹 यह (a – b)(a + b) के रूप में है।
🔹 सर्वसमिका:
(a – b)(a + b) = a² – b²
🔹 अतः
(3a – 9b)(3a + 9b)
🔹 = (3a)² – (9b)²
🔹 = 9a² – 81b²
✔️ अंतिम उत्तर:
(3a – 9b)(3a + 9b) = 9a² – 81b²
🔵 (iii) – (2y + 5)(3y + 4)
🔹 पहले
(2y + 5)(3y + 4) का मान ज्ञात करते हैं।
🔹 = 2y(3y + 4) + 5(3y + 4)
🔹 = 6y² + 8y + 15y + 20
🔹 = 6y² + 23y + 20
🔹 अब ऋण चिह्न लगाएँ:
(2y + 5)(3y + 4)
🔹 = – (6y² + 23y + 20)
🔹 = -6y² – 23y – 20
✔️ अंतिम उत्तर:
(2y + 5)(3y + 4) = -6y² – 23y – 20
🔵 (iv) (6x + 5y)²
🔹 सर्वसमिका:
(a + b)² = a² + 2ab + b²
🔹 अतः
(6x + 5y)²
🔹 = (6x)² + 2 × 6x × 5y + (5y)²
🔹 = 36x² + 60xy + 25y²
✔️ अंतिम उत्तर:
(6x + 5y)² = 36x² + 60xy + 25y²
🔵 (v) (2x – 1/2)²
🔹 सर्वसमिका:
(a – b)² = a² – 2ab + b²
🔹 अतः
(2x – 1/2)²
🔹 = (2x)² – 2 × 2x × 1/2 + (1/2)²
🔹 = 4x² – 2x + 1/4
✔️ अंतिम उत्तर:
(2x – 1/2)² = 4x² – 2x + 1/4
🔵 (vi) (7/p) × (3r) × (p + 2)
🔹 पहले
(7/p) × (3r) = 21r/p
🔹 अब
21r/p × (p + 2)
🔹 = 21r/p × p + 21r/p × 2
🔹 = 21r + 42r/p
✔️ अंतिम उत्तर:
(7/p) × (3r) × (p + 2) = 21r + 42r/p
🔒 ❓ प्रश्न 3.
प्रत्येक कथन के लिए उपयुक्त बीजीय व्यंजक या व्यंजकों की पहचान कीजिए
(i) एक वर्ग संख्या से दो अधिकिक व्यंजक
2 + s, (s + 2)², s² + 2, s² + 4, 2s², 2²s
(ii) दो क्रमागत संख्याओं के वर्गों का योग
m² + n², (m + n)², m² + 1, m² + (m + 1)², m² + (m – 1)², (m + (m + 1))², (2m)² + (2m + 1)²
📌 ✅ उत्तर:
🔵 (i) एक वर्ग संख्या से दो अधिकिक व्यंजक
🔹 “एक वर्ग संख्या से दो अधिक” का अर्थ है:
किसी संख्या का वर्ग + 2
🔹 यदि संख्या s है, तो उसका वर्ग
= s²
🔹 अतः वांछित व्यंजक
= s² + 2
🔹 अब दिए गए विकल्पों में देखते हैं:
🔸 2 + s → यह केवल s में 2 जोड़ना है, वर्ग नहीं ✘
🔸 (s + 2)² → यह s + 2 का वर्ग है, “वर्ग संख्या से 2 अधिक” नहीं ✘
🔸 s² + 2 → सही ✔️
🔸 s² + 4 → यह वर्ग संख्या से 4 अधिक है ✘
🔸 2s² → यह वर्ग संख्या का दोगुना है ✘
🔸 2²s = 4s → यह भी सही नहीं ✘
✔️ अंतिम उत्तर:
उपयुक्त व्यंजक = s² + 2
🔵 (ii) दो क्रमागत संख्याओं के वर्गों का योग
🔹 यदि पहली संख्या m है, तो अगली क्रमागत संख्या
= m + 1
🔹 अतः उनके वर्गों का योग
= m² + (m + 1)²
🔹 अब विकल्प देखते हैं:
🔸 m² + n² → यहाँ n, m + 1 होना आवश्यक नहीं ✘
🔸 (m + n)² → यह योग का वर्ग है ✘
🔸 m² + 1 → यह वर्गों का योग नहीं ✘
🔸 m² + (m + 1)² → सही ✔️
🔸 m² + (m – 1)² → यह m और उससे पिछली संख्या के वर्गों का योग है, यद्यपि ये भी क्रमागत हैं ✔️
🔸 (m + (m + 1))² → यह योग का वर्ग है ✘
🔸 (2m)² + (2m + 1)² → यह भी दो क्रमागत संख्याओं के वर्गों का योग है ✔️
✔️ अंतिम उत्तर:
उपयुक्त व्यंजक हैं:
🔹 m² + (m + 1)²
🔹 m² + (m – 1)²
🔹 (2m)² + (2m + 1)²
🔒 ❓ प्रश्न 4.
किसी कालदर्शक में संख्याओं के 2 गुणा 2 वर्ग पर विचार कीजिए जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।
प्रत्येक विकर्ण पर स्थित संख्याओं के गुणनफल ज्ञात कीजिए — 4 × 12 = 48, 5 × 11 = 55
ऐसा ही अन्य 2 गुणा 2 वर्गों के लिए कीजिए। विकर्णों के गुणनफलों के विषय में आप क्या अवलोकित करते हैं? समझाइए कि ऐसा क्यों होता है।
संकेत — प्रत्येक 2 गुणा 2 वर्ग में संख्याओं को इस प्रकार नामांकित कीजिए
a (a + 1)
(a + 7) (a + 8)
📌 ✅ उत्तर:
🔹 मान लीजिए 2 गुणा 2 वर्ग की संख्याएँ इस प्रकार हैं:
a (a + 1)
(a + 7) (a + 8)
🔹 अब दोनों विकर्णों के गुणनफल ज्ञात करते हैं।
🔸 पहला विकर्ण:
➡️ a × (a + 8)
➡️ = a² + 8a
🔸 दूसरा विकर्ण:
➡️ (a + 1) × (a + 7)
➡️ = a(a + 7) + 1(a + 7)
➡️ = a² + 7a + a + 7
➡️ = a² + 8a + 7
🔹 अब दोनों विकर्णों के गुणनफलों का अंतर ज्ञात कीजिए:
➡️ (a² + 8a + 7) − (a² + 8a)
➡️ = 7
🔹 अतः दूसरे विकर्ण का गुणनफल पहले विकर्ण के गुणनफल से सदैव 7 अधिक होता है।
✏️ अवलोकन:
🔹 प्रत्येक 2 गुणा 2 कालदर्शक वर्ग में दोनों विकर्णों के गुणनफलों का अंतर सदैव 7 होता है।
💡 यह क्यों होता है?
🔹 क्योंकि कालदर्शक में एक ही पंक्ति में अगली संख्या 1 अधिक होती है।
🔹 और अगली पंक्ति की संख्या 7 अधिक होती है।
🔹 इसलिए 2 गुणा 2 वर्ग की संख्याएँ a, (a + 1), (a + 7), (a + 8) के रूप में लिखी जाती हैं।
🔹 इसी कारण विकर्णों के गुणनफलों का अंतर हर बार 7 प्राप्त होता है।
🔹 दिए गए उदाहरण में:
➡️ 4 × 12 = 48
➡️ 5 × 11 = 55
➡️ 55 − 48 = 7
📌 ✅ अंतिम उत्तर:
🔹 प्रत्येक 2 गुणा 2 कालदर्शक वर्ग में विकर्णों के गुणनफलों का अंतर सदैव 7 होता है।
🔒 ❓ प्रश्न 5.
सत्यापित कीजिए कि निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं।
(i) (K + 1)(K + 2) − (K + 3) का मान सदैव 2 होता है।
(ii) (2q + 1)(2q − 3) का मान 4 का गुणज है।
(iii) सम संख्याओं के वर्ग 4 के गुणज होते हैं और विषम संख्याओं के वर्ग 8 के गुणजों से 1 अधिक होते हैं।
(iv) (6n + 2)² − (4n + 3)² का मान एक वर्ग संख्या से 5 कम होता है।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 हम प्रत्येक कथन की अलग-अलग जाँच करेंगे।
🔒 ❓ (i) (K + 1)(K + 2) − (K + 3) का मान सदैव 2 होता है।
🔸 हल:
➡️ (K + 1)(K + 2) − (K + 3)
➡️ = (K² + 2K + K + 2) − K − 3
➡️ = K² + 3K + 2 − K − 3
➡️ = K² + 2K − 1
🔹 यह मान K पर निर्भर करता है।
🔹 अतः यह सदैव 2 नहीं हो सकता।
🔸 जाँच:
यदि K = 1,
➡️ (1 + 1)(1 + 2) − (1 + 3)
➡️ = 2 × 3 − 4
➡️ = 6 − 4
➡️ = 2
यदि K = 2,
➡️ (2 + 1)(2 + 2) − (2 + 3)
➡️ = 3 × 4 − 5
➡️ = 12 − 5
➡️ = 7
🔹 दोनों स्थितियों में मान अलग-अलग हैं।
🔹 इसलिए यह कथन सत्य नहीं है।
📌 ✅ निष्कर्ष:
🔹 कथन (i) असत्य है।
🔒 ❓ (ii) (2q + 1)(2q − 3) का मान 4 का गुणज है।
🔸 हल:
➡️ (2q + 1)(2q − 3)
➡️ = 2q(2q − 3) + 1(2q − 3)
➡️ = 4q² − 6q + 2q − 3
➡️ = 4q² − 4q − 3
➡️ = 4q(q − 1) − 3
🔹 4q(q − 1), 4 का गुणज है।
🔹 परन्तु उसमें से 3 घटाया गया है।
🔹 इसलिए पूरा व्यंजक 4 का गुणज नहीं होगा।
🔸 जाँच:
यदि q = 1,
➡️ (2 × 1 + 1)(2 × 1 − 3)
➡️ = 3 × (−1)
➡️ = −3
🔹 −3, 4 का गुणज नहीं है।
📌 ✅ निष्कर्ष:
🔹 कथन (ii) असत्य है।
🔒 ❓ (iii) सम संख्याओं के वर्ग 4 के गुणज होते हैं और विषम संख्याओं के वर्ग 8 के गुणजों से 1 अधिक होते हैं।
🔸 पहला भाग: सम संख्या
🔹 मान लीजिए सम संख्या = 2m
➡️ उसका वर्ग = (2m)²
➡️ = 4m²
🔹 4m², 4 का गुणज है।
🔹 अतः पहला भाग सत्य है।
🔸 दूसरा भाग: विषम संख्या
🔹 मान लीजिए विषम संख्या = 2m + 1
➡️ उसका वर्ग = (2m + 1)²
➡️ = 4m² + 4m + 1
➡️ = 4m(m + 1) + 1
🔹 m और (m + 1) में से एक संख्या अवश्य सम होगी।
🔹 इसलिए m(m + 1), सम होगा।
🔹 अतः 4m(m + 1), 8 का गुणज होगा।
➡️ इसलिए (2m + 1)² = 8k + 1 के रूप में लिखा जा सकता है।
🔹 अर्थात विषम संख्या का वर्ग, 8 के किसी गुणज से 1 अधिक होता है।
📌 ✅ निष्कर्ष:
🔹 कथन (iii) सत्य है।
🔒 ❓ (iv) (6n + 2)² − (4n + 3)² का मान एक वर्ग संख्या से 5 कम होता है।
🔸 हल:
➡️ (6n + 2)² − (4n + 3)²
➡️ = [(6n + 2) − (4n + 3)] [(6n + 2) + (4n + 3)]
➡️ = (2n − 1)(10n + 5)
➡️ = 5(2n − 1)(2n + 1)
➡️ = 5(4n² − 1)
➡️ = 20n² − 5
🔹 अब जाँचते हैं कि क्या यह हर बार किसी पूर्ण वर्ग संख्या से 5 कम है।
🔸 जाँच:
यदि n = 1,
➡️ (6 × 1 + 2)² − (4 × 1 + 3)²
➡️ = 8² − 7²
➡️ = 64 − 49
➡️ = 15
🔹 अब 15 को पूर्ण वर्ग संख्या से 5 कम के रूप में देखें:
➡️ 4² − 5 = 16 − 5 = 11
➡️ 5² − 5 = 25 − 5 = 20
🔹 15 इनमें से कोई नहीं है।
🔹 अतः यह कथन सत्य नहीं है।
📌 ✅ निष्कर्ष:
🔹 कथन (iv) असत्य है।
📌 ✅ अंतिम उत्तर:
🔹 सत्य कथन → (iii)
🔹 असत्य कथन → (i), (ii), (iv)
🔒 ❓ प्रश्न 6.
एक संख्या को 7 से भाग करने पर शेषफल 3 प्राप्त होता है और दूसरी संख्या को 7 से भाग करने पर शेषफल 5 प्राप्त होता है। इनके योग, अंतर और गुणनफल को 7 से भाग देने पर शेषफल क्या प्राप्त होगा?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 मान लीजिए पहली संख्या = 7a + 3
🔹 मान लीजिए दूसरी संख्या = 7b + 5
🔹 क्योंकि पहली संख्या को 7 से भाग देने पर शेषफल 3 प्राप्त होता है।
🔹 और दूसरी संख्या को 7 से भाग देने पर शेषफल 5 प्राप्त होता है।
अब इनके योग, अंतर और गुणनफल का शेषफल ज्ञात करते हैं।
🔒 ❓ (i) योग
➡️ योग = (7a + 3) + (7b + 5)
➡️ = 7a + 7b + 8
➡️ = 7(a + b + 1) + 1
📌 ✅ अतः योग को 7 से भाग देने पर शेषफल 1 प्राप्त होगा।
🔒 ❓ (ii) अंतर
➡️ अंतर = (7a + 3) − (7b + 5)
➡️ = 7a − 7b − 2
➡️ = 7(a − b) − 2
➡️ = 7(a − b − 1) + 5
📌 ✅ अतः अंतर को 7 से भाग देने पर शेषफल 5 प्राप्त होगा।
✏️ ध्यान:
🔹 यहाँ अंतर से आशय पहली संख्या − दूसरी संख्या है।
🔒 ❓ (iii) गुणनफल
➡️ गुणनफल = (7a + 3)(7b + 5)
➡️ = 49ab + 35a + 21b + 15
➡️ = 7(7ab + 5a + 3b + 2) + 1
📌 ✅ अतः गुणनफल को 7 से भाग देने पर शेषफल 1 प्राप्त होगा।
🔒 ❓ प्रश्न 7.
तीन क्रमागत संख्याओं का चयन कीजिए। मध्य वाली संख्या का वर्ग कीजिए और शेष दो संख्याओं के गुणनफल को घटाइए। यही प्रक्रिया अन्य संख्याओं के समूहों के साथ भी दोहराइए। आपको कौन-सा प्रतिरूप दिखाई देता है? इसे बीजगणितीय समीकरण के रूप में किस प्रकार लिखेंगे? समीकरण के दोनों पक्षों का विस्तार करके जाँच कीजिए कि यह एक सही सर्वसमिका है।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 पहले कुछ उदाहरण लेकर प्रतिरूप देखते हैं।
🔸 उदाहरण 1:
तीन क्रमागत संख्याएँ → 4, 5, 6
➡️ मध्य वाली संख्या का वर्ग = 5² = 25
➡️ शेष दो संख्याओं का गुणनफल = 4 × 6 = 24
➡️ अंतर = 25 − 24 = 1
🔸 उदाहरण 2:
तीन क्रमागत संख्याएँ → 8, 9, 10
➡️ मध्य वाली संख्या का वर्ग = 9² = 81
➡️ शेष दो संख्याओं का गुणनफल = 8 × 10 = 80
➡️ अंतर = 81 − 80 = 1
🔸 उदाहरण 3:
तीन क्रमागत संख्याएँ → 14, 15, 16
➡️ मध्य वाली संख्या का वर्ग = 15² = 225
➡️ शेष दो संख्याओं का गुणनफल = 14 × 16 = 224
➡️ अंतर = 225 − 224 = 1
✏️ अवलोकन:
🔹 हर बार मध्य वाली संख्या के वर्ग और शेष दो संख्याओं के गुणनफल का अंतर 1 आता है।
💡 अब इसे बीजगणितीय रूप में लिखते हैं।
🔹 मान लीजिए तीन क्रमागत संख्याएँ हैं:
➡️ a − 1, a, a + 1
🔹 तब मध्य वाली संख्या = a
➡️ उसका वर्ग = a²
🔹 शेष दो संख्याओं का गुणनफल:
➡️ (a − 1)(a + 1)
अब माँगा गया अंतर:
➡️ a² − (a − 1)(a + 1)
अब (a − 1)(a + 1) का विस्तार कीजिए:
➡️ (a − 1)(a + 1) = a² − 1
अतः
➡️ a² − (a² − 1)
➡️ = a² − a² + 1
➡️ = 1
📌 ✅ सर्वसमिका:
➡️ a² − (a − 1)(a + 1) = 1
या
➡️ a² = (a − 1)(a + 1) + 1
✔️ निष्कर्ष:
🔹 तीन क्रमागत संख्याओं में मध्य संख्या का वर्ग, शेष दो संख्याओं के गुणनफल से सदैव 1 अधिक होता है।
🔹 यह एक सही सर्वसमिका है।
🔒 ❓ प्रश्न 8.
निम्नलिखित चरणों को दर्शाने वाला बीजगणितीय व्यंजक क्या है?
किन्हीं दो संख्याओं को जोड़िए। इस योगफल को दोनों संख्याओं के योगफल के आधे से गुणा कीजिए। सिद्ध कीजिए कि यह परिणाम दोनों संख्याओं के योग के वर्ग का आधा होगा।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 मान लीजिए दो संख्याएँ हैं a और b
🔹 दोनों संख्याओं का योग:
➡️ a + b
🔹 दोनों संख्याओं के योगफल का आधा:
➡️ (a + b)/2
अब प्रश्न के अनुसार,
🔹 योगफल को उसके आधे से गुणा करना है।
अतः वांछित बीजगणितीय व्यंजक होगा:
➡️ (a + b) × (a + b)/2
अब इसे सरल कीजिए:
➡️ (a + b)(a + b)/2
➡️ = (a + b)²/2
📌 ✅ सिद्ध हुआ:
🔹 दिया गया परिणाम दोनों संख्याओं के योग के वर्ग का आधा है।
अर्थात
➡️ (a + b) × (a + b)/2 = (a + b)²/2
अब चाहें तो इसे विस्तार करके भी देख सकते हैं:
➡️ (a + b)²/2 = (a² + 2ab + b²)/2
✔️ निष्कर्ष:
🔹 अभीष्ट बीजगणितीय व्यंजक (a + b)(a + b)/2 है।
🔹 इसका सरल रूप (a + b)²/2 है।
🔒 ❓ प्रश्न 9.
कौन-सा व्यंजक बड़ा है? गुणनफल की पूर्ण गणना किए बिना ज्ञात कीजिए।
(i) 14 × 26 या 16 × 24
(ii) 25 × 75 या 26 × 74
📌 ✅ उत्तर:
🔹 यहाँ पूर्ण गुणा किए बिना तुलना करनी है।
🔹 हम प्रतिरूप और बीजगणितीय तर्क का उपयोग करेंगे।
🔒 ❓ (i) 14 × 26 या 16 × 24
🔹 दोनों युग्मों का योग 40 है।
➡️ 14 + 26 = 40
➡️ 16 + 24 = 40
🔹 अब ध्यान दीजिए:
➡️ 14 = 20 − 6
➡️ 26 = 20 + 6
अतः
➡️ 14 × 26 = (20 − 6)(20 + 6)
➡️ = 20² − 6²
➡️ = 400 − 36
➡️ = 364
अब
➡️ 16 = 20 − 4
➡️ 24 = 20 + 4
अतः
➡️ 16 × 24 = (20 − 4)(20 + 4)
➡️ = 20² − 4²
➡️ = 400 − 16
➡️ = 384
🔹 क्योंकि 384 > 364
📌 ✅ अतः 16 × 24 बड़ा है।
💡 तर्क:
🔹 जब दो संख्याओं का योग समान हो, तब जिन संख्याओं का मान एक-दूसरे के अधिक निकट होता है, उनका गुणनफल अधिक होता है।
🔹 16 और 24, 14 और 26 की तुलना में एक-दूसरे के अधिक निकट हैं।
🔒 ❓ (ii) 25 × 75 या 26 × 74
🔹 दोनों युग्मों का योग 100 है।
➡️ 25 + 75 = 100
➡️ 26 + 74 = 100
अब 50 को मध्य मानकर लिखते हैं:
➡️ 25 × 75 = (50 − 25)(50 + 25)
➡️ = 50² − 25²
➡️ 26 × 74 = (50 − 24)(50 + 24)
➡️ = 50² − 24²
🔹 क्योंकि 24² < 25²
🔹 इसलिए
➡️ 50² − 24² > 50² − 25²
अतः
➡️ 26 × 74 > 25 × 75
📌 ✅ अतः 26 × 74 बड़ा है।
🔒 ❓ प्रश्न 10.
धौली में एक छोटा पार्क बनाया जा रहा है। इसकी योजना चित्र में दर्शाई गई है। दो वर्गाकार भूखंडों में जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल g² वर्ग फुट है, वहाँ हरियाली होगी। शेष संपूर्ण क्षेत्र (w फुट चौड़ा) एक पैदल मार्ग है जिस पर टाइल्स लगाने की आवश्यकता है। इस क्षेत्र के लिए एक व्यंजक लिखिए जिस पर टाइल्स लगाने की आवश्यकता है।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 प्रत्येक वर्गाकार भूखंड का क्षेत्रफल = g² वर्ग फुट
🔹 अतः प्रत्येक वर्ग की भुजा = g फुट
🔹 चित्र से स्पष्ट है कि
🔸 ऊपर की ओर पैदल मार्ग की चौड़ाई = w फुट
🔸 नीचे की ओर पैदल मार्ग की चौड़ाई = w फुट
🔸 बाएँ किनारे की चौड़ाई = w फुट
🔸 दाएँ किनारे की चौड़ाई = w फुट
🔸 दोनों वर्गों के बीच का मार्ग = w फुट
अब पूरे बाहरी आयत की माप ज्ञात करते हैं।
🔹 बाहरी आयत की लंबाई
➡️ = बायाँ मार्ग + पहला वर्ग + बीच का मार्ग + दूसरा वर्ग + दायाँ मार्ग
➡️ = w + g + w + g + w
➡️ = 2g + 3w
🔹 बाहरी आयत की चौड़ाई
➡️ = ऊपर का मार्ग + वर्ग की भुजा + नीचे का मार्ग
➡️ = w + g + w
➡️ = g + 2w
🔹 अतः पूरे बाहरी आयत का क्षेत्रफल
➡️ = (2g + 3w)(g + 2w)
अब हरियाली वाले दोनों वर्गों का कुल क्षेत्रफल घटाएँगे।
🔹 दो वर्गों का कुल क्षेत्रफल
➡️ = g² + g²
➡️ = 2g²
इसलिए टाइल्स लगाने वाले भाग का क्षेत्रफल
➡️ = (2g + 3w)(g + 2w) − 2g²
अब इसका विस्तार करते हैं:
➡️ = 2g² + 4gw + 3gw + 6w² − 2g²
➡️ = 7gw + 6w²
📌 ✅ अभीष्ट व्यंजक:
➡️ (2g + 3w)(g + 2w) − 2g²
📌 ✅ सरल रूप:
➡️ 7gw + 6w²
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 जिस क्षेत्र पर टाइल्स लगाने की आवश्यकता है, उसका व्यंजक
➡️ (2g + 3w)(g + 2w) − 2g²
अथवा
➡️ 7gw + 6w²
है।
🔒 ❓ प्रश्न 11.
नीचे दर्शाए गए प्रत्येक प्रतिरूप के लिए—
(i) अनुक्रम में अगली आकृति बनाइए।
(ii) चरण 10 में कितनी मूल इकाइयाँ होंगी?
(iii) चरण y में मूल इकाइयों की संख्या का वर्णन करने के लिए एक व्यंजक लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 यहाँ दो अलग-अलग प्रतिरूप दिए गए हैं।
🔹 हम दोनों को अलग-अलग समझते हैं।
🔒 ❓ प्रतिरूप 1 (पीले रंग वाला)
🔹 चित्र से मूल इकाइयों की संख्या गिनते हैं:
🔸 चरण 1 → 9
🔸 चरण 2 → 16
🔸 चरण 3 → 25
🔹 ये संख्याएँ हैं:
➡️ 9 = 3²
➡️ 16 = 4²
➡️ 25 = 5²
✏️ अवलोकन:
🔹 यह वर्ग संख्याओं का प्रतिरूप है।
🔹 हर अगले चरण में इकाइयों की संख्या क्रमशः 3², 4², 5², … के रूप में बढ़ रही है।
🔸 (i) अगली आकृति
🔹 अगला चरण, अर्थात चरण 4 में मूल इकाइयों की संख्या होगी
➡️ 6² = 36
🔹 इसलिए अगली आकृति में 36 मूल इकाइयाँ होंगी।
🔸 (ii) चरण 10 में मूल इकाइयाँ
➡️ चरण 1 = 3²
➡️ चरण 2 = 4²
➡️ चरण 3 = 5²
अतः
➡️ चरण 10 = (10 + 2)²
➡️ = 12²
➡️ = 144
🔸 (iii) चरण y के लिए व्यंजक
🔹 चरण 1 पर 3²
🔹 चरण 2 पर 4²
🔹 चरण 3 पर 5²
अतः चरण y पर
➡️ मूल इकाइयों की संख्या = (y + 2)²
📌 ✅ प्रतिरूप 1 का अंतिम उत्तर:
🔹 अगली आकृति में 36 मूल इकाइयाँ होंगी।
🔹 चरण 10 में 144 मूल इकाइयाँ होंगी।
🔹 चरण y के लिए व्यंजक = (y + 2)²
🔒 ❓ प्रतिरूप 2 (नीले रंग वाला)
🔹 चित्र से मूल इकाइयों की संख्या गिनते हैं:
🔸 चरण 1 → 5
🔸 चरण 2 → 11
🔸 चरण 3 → 19
अब अंतर देखते हैं:
➡️ 11 − 5 = 6
➡️ 19 − 11 = 8
🔹 अंतर 2-2 से बढ़ रहा है, इसलिए यह द्विघात प्रतिरूप है।
अब एक उपयुक्त व्यंजक खोजते हैं।
🔹 देखें:
➡️ चरण 1 = 5 = 2 × 3 − 1
➡️ चरण 2 = 11 = 3 × 4 − 1
➡️ चरण 3 = 19 = 4 × 5 − 1
✏️ इससे प्रतिरूप मिलता है:
➡️ चरण n की मूल इकाइयाँ = (n + 1)(n + 2) − 1
अतः
🔸 (i) अगली आकृति
➡️ चरण 4 की मूल इकाइयाँ = (4 + 1)(4 + 2) − 1
➡️ = 5 × 6 − 1
➡️ = 30 − 1
➡️ = 29
🔹 इसलिए अगली आकृति में 29 मूल इकाइयाँ होंगी।
🔸 (ii) चरण 10 में मूल इकाइयाँ
➡️ = (10 + 1)(10 + 2) − 1
➡️ = 11 × 12 − 1
➡️ = 132 − 1
➡️ = 131
🔸 (iii) चरण y के लिए व्यंजक
➡️ मूल इकाइयों की संख्या = (y + 1)(y + 2) − 1
इसे चाहें तो विस्तार करके भी लिख सकते हैं:
➡️ = y² + 3y + 2 − 1
➡️ = y² + 3y + 1
📌 ✅ प्रतिरूप 2 का अंतिम उत्तर:
🔹 अगली आकृति में 29 मूल इकाइयाँ होंगी।
🔹 चरण 10 में 131 मूल इकाइयाँ होंगी।
🔹 चरण y के लिए व्यंजक = (y + 1)(y + 2) − 1
अथवा
➡️ y² + 3y + 1
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
🔒 ❓ प्रश्न 1.
“जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा” अध्याय का मुख्य सन्देश क्या है?
🟢1️⃣ बाँटने से वस्तु हमेशा नष्ट हो जाती है
🔵2️⃣ बाँटना केवल घटाने की क्रिया है
🟡3️⃣ बाँटने से समझ, सहयोग और सहभागिता बढ़ती है
🟣4️⃣ बाँटना गणित से सम्बन्धित नहीं है
✔️ उत्तर: 🟡3️⃣
📌 ✅ उत्तर:
🔹 इस अध्याय का मुख्य विचार यह है कि बाँटना केवल अलग करना नहीं है।
🔸 जब हम ज्ञान, कार्य, जिम्मेदारी और विचार बाँटते हैं, तो समझ और सहयोग बढ़ता है।
🔹 अतः सही उत्तर है — बाँटने से समझ, सहयोग और सहभागिता बढ़ती है।
🔒 ❓ प्रश्न 2.
यदि 20 पेंसिल 5 बच्चों में बराबर बाँटी जाएँ, तो प्रत्येक बच्चे को कितनी पेंसिलें मिलेंगी?
🟢1️⃣ 2
🔵2️⃣ 3
🟡3️⃣ 4
🟣4️⃣ 5
✔️ उत्तर: 🟡3️⃣
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल पेंसिलें = 20
🔸 बच्चों की संख्या = 5
🔹 प्रत्येक बच्चे की पेंसिलें = 20 ÷ 5
🔸 = 4
🔹 अतः प्रत्येक बच्चे को 4 पेंसिलें मिलेंगी।
🔒 ❓ प्रश्न 3.
यदि एक रोटी को 4 बराबर भागों में बाँटा जाए, तो एक भाग पूरे का कौन-सा भाग होगा?
🟢1️⃣ 1/2
🔵2️⃣ 1/3
🟡3️⃣ 1/4
🟣4️⃣ 1/5
✔️ उत्तर: 🟡3️⃣
📌 ✅ उत्तर:
🔹 रोटी को 4 बराबर भागों में बाँटा गया है।
🔸 एक भाग पूरे का 1/4 होगा।
🔹 अतः सही उत्तर 1/4 है।
🔒 ❓ प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति समान बाँट को दर्शाती है?
🟢1️⃣ 12 आम 4 बच्चों में, प्रत्येक को 3 आम
🔵2️⃣ 12 आम 4 बच्चों में, किसी को 5 और किसी को 1
🟡3️⃣ 12 आम 4 बच्चों में, किसी को 4 और किसी को 2
🟣4️⃣ 12 आम 4 बच्चों में, सबको अलग-अलग संख्या
✔️ उत्तर: 🟢1️⃣
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समान बाँट में प्रत्येक व्यक्ति को बराबर हिस्सा मिलता है।
🔸 12 ÷ 4 = 3
🔹 इसलिए प्रत्येक को 3 आम मिलने पर बाँट समान है।
🔒 ❓ प्रश्न 5.
यदि 10 वस्तुएँ 3 बच्चों में बराबर बाँटी जाएँ, तो क्या होगा?
🟢1️⃣ प्रत्येक को 4 वस्तुएँ मिलेंगी
🔵2️⃣ प्रत्येक को 3 वस्तुएँ मिलेंगी और 1 शेष बचेगी
🟡3️⃣ प्रत्येक को 2 वस्तुएँ मिलेंगी और 4 शेष बचेंगी
🟣4️⃣ कोई शेष नहीं बचेगा
✔️ उत्तर: 🔵2️⃣
📌 ✅ उत्तर:
🔹 10 ÷ 3 = 3 शेष 1
🔸 प्रत्येक बच्चे को 3 वस्तुएँ मिलेंगी।
🔹 1 वस्तु शेष बचेगी।
🔸 अतः सही उत्तर है — प्रत्येक को 3 वस्तुएँ मिलेंगी और 1 शेष बचेगी।
🔒 ❓ प्रश्न 6.
भिन्न 3/4 में 4 क्या दर्शाता है?
🟢1️⃣ लिए गए भागों की संख्या
🔵2️⃣ पूरे के बराबर भागों की संख्या
🟡3️⃣ बचा हुआ भाग
🟣4️⃣ कुल वस्तुओं की संख्या
✔️ उत्तर: 🔵2️⃣
📌 ✅ उत्तर:
🔹 भिन्न में नीचे की संख्या बताती है कि पूरा कितने बराबर भागों में बाँटा गया है।
🔸 3/4 में 4 बताता है कि पूरा 4 बराबर भागों में बाँटा गया है।
🔹 अतः सही उत्तर है — पूरे के बराबर भागों की संख्या।
🔒 ❓ प्रश्न 7.
“भाग” और “पूरा” की अवधारणा क्यों महत्त्वपूर्ण है?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 किसी भी बाँट को समझने के लिए पहले यह जानना आवश्यक है कि पूरा क्या है।
🔸 फिर यह देखा जाता है कि उसका कौन-सा हिस्सा लिया या बाँटा गया है।
🔹 बिना पूरे को जाने भाग का सही अर्थ स्पष्ट नहीं होता।
🔸 इसलिए “भाग” और “पूरा” की अवधारणा बहुत महत्त्वपूर्ण है।
🔒 ❓ प्रश्न 8.
समान बाँट और असमान बाँट में अन्तर लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समान बाँट में प्रत्येक व्यक्ति या प्रत्येक भाग को बराबर हिस्सा मिलता है।
🔸 इसमें सभी को एक-सी मात्रा प्राप्त होती है।
🔹 उदाहरण:
🔸 12 आम 4 बच्चों में बराबर बाँटे जाएँ
🔸 12 ÷ 4 = 3
🔸 अतः प्रत्येक बच्चे को 3 आम मिलेंगे।
🔸 यह समान बाँट है।
🔹 असमान बाँट में प्रत्येक व्यक्ति या प्रत्येक भाग को बराबर हिस्सा नहीं मिलता।
🔸 इसमें किसी को अधिक और किसी को कम मात्रा मिलती है।
🔹 उदाहरण:
🔸 12 आम 4 बच्चों में इस प्रकार बाँटे जाएँ — 4, 3, 3, 2
🔸 यहाँ सबको बराबर आम नहीं मिले।
🔸 इसलिए यह असमान बाँट है।
🔹 निष्कर्ष:
🔸 समान बाँट ⟶ सबको बराबर हिस्सा
🔸 असमान बाँट ⟶ सबको अलग-अलग हिस्सा
🔒 ❓ प्रश्न 9.
यदि 24 पौधे 3 बच्चों ने बराबर-बराबर लगाए, तो प्रत्येक ने कितने पौधे लगाए?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल पौधे = 24
🔸 बच्चों की संख्या = 3
🔹 प्रत्येक बच्चे के पौधे = 24 ÷ 3
🔸 = 8
🔹 अतः प्रत्येक बच्चे ने 8 पौधे लगाए।
🔒 ❓ प्रश्न 10.
1/2 और 1/3 में कौन-सा बड़ा है? कारण सहित लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 1/2 और 1/3 दोनों एक ही पूरे के भाग हैं।
🔸 आधा भाग, तिहाई भाग से बड़ा होता है।
🔹 इसलिए 1/2 > 1/3
🔸 अतः 1/2, 1/3 से बड़ा है।
🔒 ❓ प्रश्न 11.
यदि 1 लीटर दूध 4 बराबर भागों में बाँटा जाए, तो प्रत्येक भाग कितना होगा?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 पूरा दूध = 1 लीटर
🔸 बराबर भागों की संख्या = 4
🔹 प्रत्येक भाग = 1/4 लीटर
🔸 अतः प्रत्येक भाग 1/4 लीटर होगा।
🔒 ❓ प्रश्न 12.
साझेदारी से आप क्या समझते हैं?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 जब दो या अधिक व्यक्ति मिलकर किसी कार्य, वस्तु, समय, उत्तरदायित्व अथवा संसाधन में भाग लेते हैं, तो उसे साझेदारी कहते हैं।
🔸 साझेदारी में मिलकर काम करना, मिलकर बाँटना और मिलकर उत्तरदायित्व निभाना शामिल होता है।
🔹 उदाहरण:
🔸 यदि 3 बच्चे मिलकर 24 पौधे लगाएँ,
🔸 और सभी बराबर काम करें,
🔸 तो प्रत्येक बच्चे की हिस्सेदारी = 24 ÷ 3 = 8 पौधे होगी।
🔹 इससे स्पष्ट है कि साझेदारी में
🔸 सहयोग होता है
🔸 हिस्सेदारी होती है
🔸 उत्तरदायित्व बाँटा जाता है
🔸 कार्य आसान हो जाता है
🔹 निष्कर्ष:
🔸 साझेदारी का अर्थ है — मिलकर भाग लेना, सहयोग करना और जिम्मेदारी बाँटना।
🔒 ❓ प्रश्न 13.
यदि 4 बच्चों के बीच 16 पुस्तकें बराबर बाँटी जाएँ, तो प्रत्येक को कितनी पुस्तकें मिलेंगी?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल पुस्तकें = 16
🔸 बच्चों की संख्या = 4
🔹 प्रत्येक बच्चे की पुस्तकें = 16 ÷ 4
🔸 = 4
🔹 अतः प्रत्येक बच्चे को 4 पुस्तकें मिलेंगी।
🔒 ❓ प्रश्न 14.
“शेष” से क्या समझते हैं? उदाहरण सहित लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 जब किसी वस्तु या मात्रा को बराबर-बराबर बाँटने पर कुछ भाग बच जाता है, तो उसे शेष कहते हैं।
🔸 अर्थात् जो हिस्सा बराबर बाँट के बाद बच जाए, वही शेष कहलाता है।
🔹 उदाहरण:
🔸 10 ÷ 3 = 3 शेष 1
🔹 इसका अर्थ:
🔸 10 वस्तुओं को 3 बच्चों में बराबर बाँटा गया।
🔸 प्रत्येक बच्चे को 3 वस्तुएँ मिलीं।
🔸 कुल बाँटी गई वस्तुएँ = 3 × 3 = 9
🔸 10 – 9 = 1
🔹 इसलिए 1 वस्तु बच गई।
🔸 यही बची हुई 1 वस्तु शेष है।
🔹 निष्कर्ष:
🔸 शेष वह भाग है जो बराबर बाँट के बाद बच जाता है।
🔒 ❓ प्रश्न 15.
यदि 15 रोटियाँ 5 व्यक्तियों में बराबर बाँटी जाएँ, तो प्रत्येक व्यक्ति को कितनी रोटियाँ मिलेंगी?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल रोटियाँ = 15
🔸 व्यक्तियों की संख्या = 5
🔹 प्रत्येक व्यक्ति की रोटियाँ = 15 ÷ 5
🔸 = 3
🔹 अतः प्रत्येक व्यक्ति को 3 रोटियाँ मिलेंगी।
🔒 ❓ प्रश्न 16.
यदि 18 फल 6 बच्चों में बराबर बाँटे जाएँ, तो प्रत्येक बच्चे को कितने फल मिलेंगे?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल फल = 18
🔸 बच्चों की संख्या = 6
🔹 प्रत्येक बच्चे के फल = 18 ÷ 6
🔸 = 3
🔹 अतः प्रत्येक बच्चे को 3 फल मिलेंगे।
🔒 ❓ प्रश्न 17.
यदि किसी पूरे को 8 बराबर भागों में बाँटा जाए, तो एक भाग पूरे का कौन-सा भाग होगा?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 पूरा 8 बराबर भागों में बाँटा गया है।
🔸 एक भाग पूरे का 1/8 होगा।
🔹 अतः एक भाग = 1/8
🔸 अर्थात् एक-आठवाँ भाग।
🔒 ❓ प्रश्न 18.
यदि 2 घण्टे का समय 4 बराबर भागों में बाँटा जाए, तो प्रत्येक भाग कितना होगा?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल समय = 2 घण्टे
🔸 भागों की संख्या = 4
🔹 प्रत्येक भाग = 2 ÷ 4
🔸 = 1/2 घण्टा
🔹 अतः प्रत्येक भाग 1/2 घण्टा होगा।
🔸 अर्थात् आधा घण्टा।
🔒 ❓ प्रश्न 19.
असमान बाँट से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 जब किसी वस्तु, मात्रा अथवा सामग्री को इस प्रकार बाँटा जाए कि सभी को बराबर हिस्सा न मिले, तो उसे असमान बाँट कहते हैं।
🔸 इसमें किसी को अधिक और किसी को कम हिस्सा मिलता है।
🔹 उदाहरण:
🔸 16 बिस्कुट 4 बच्चों में इस प्रकार बाँटे जाएँ — 5, 4, 4, 3
🔹 यहाँ सभी बच्चों को बराबर बिस्कुट नहीं मिले।
🔸 इसलिए यह असमान बाँट है।
🔹 निष्कर्ष:
🔸 असमान बाँट वह है जिसमें हिस्से बराबर नहीं होते।
🔒 ❓ प्रश्न 20.
यदि 21 पुस्तकें 7 बच्चों में बराबर बाँटी जाएँ, तो प्रत्येक बच्चे को कितनी पुस्तकें मिलेंगी?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल पुस्तकें = 21
🔸 बच्चों की संख्या = 7
🔹 प्रत्येक बच्चे की पुस्तकें = 21 ÷ 7
🔸 = 3
🔹 अतः प्रत्येक बच्चे को 3 पुस्तकें मिलेंगी।
🔒 ❓ प्रश्न 21.
2/3 और 2/5 में कौन-सी भिन्न बड़ी है? कारण सहित लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 दोनों भिन्नों में अंश समान है, अर्थात् 2।
🔸 जब अंश समान होता है, तब छोटी हर वाली भिन्न बड़ी होती है।
🔹 यहाँ 3 < 5
🔸 इसलिए 2/3 > 2/5
🔹 अतः 2/3, 2/5 से बड़ी है।
🔒 ❓ प्रश्न 22.
यदि 14 खिलौने 4 बच्चों में बराबर बाँटे जाएँ, तो भागफल और शेष ज्ञात कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल खिलौने = 14
🔸 बच्चों की संख्या = 4
🔹 14 ÷ 4 = 3 शेष 2
🔹 इसलिए
🔸 भागफल = 3
🔹 शेष = 2
🔒 ❓ प्रश्न 23.
बराबर भागों में बाँटना क्यों आवश्यक है?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 बराबर भागों में बाँटने से प्रत्येक हिस्से का सही माप ज्ञात होता है।
🔸 इससे निष्पक्षता बनी रहती है।
🔹 भिन्नों को समझने के लिए भी बराबर भाग बहुत आवश्यक हैं।
🔸 यदि भाग बराबर न हों, तो सही तुलना नहीं की जा सकती।
🔹 अतः बराबर भागों में बाँटना आवश्यक है क्योंकि इससे
🔸 समानता मिलती है
🔸 स्पष्टता मिलती है
🔸 सही समझ विकसित होती है।
🔒 ❓ प्रश्न 24.
यदि 3 लीटर रस 6 बराबर भागों में बाँटा जाए, तो प्रत्येक भाग कितना होगा?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल रस = 3 लीटर
🔸 भागों की संख्या = 6
🔹 प्रत्येक भाग = 3 ÷ 6
🔸 = 1/2 लीटर
🔹 अतः प्रत्येक भाग 1/2 लीटर होगा।
🔸 अर्थात् आधा लीटर।
🔒 ❓ प्रश्न 25.
किसी वस्तु को बाँटते समय “पूरा” जानना क्यों आवश्यक है?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 किसी भी भाग का सही अर्थ तभी समझ में आता है, जब पूरा ज्ञात हो।
🔸 यदि पूरा ज्ञात नहीं होगा, तो यह नहीं बताया जा सकेगा कि दिया गया हिस्सा कितना बड़ा या कितना छोटा है।
🔹 भिन्न, तुलना और हिस्सेदारी — सभी “पूरा” जानने पर निर्भर करते हैं।
🔹 अतः किसी वस्तु को बाँटते समय “पूरा” जानना आवश्यक है।
🔒 ❓ प्रश्न 26.
यदि 5 बच्चे मिलकर 25 पौधे लगाएँ और सभी की हिस्सेदारी बराबर हो, तो प्रत्येक बच्चे ने कितने पौधे लगाए?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल पौधे = 25
🔸 बच्चों की संख्या = 5
🔹 प्रत्येक बच्चे की हिस्सेदारी = 25 ÷ 5
🔸 = 5
🔹 अतः प्रत्येक बच्चे ने 5 पौधे लगाए।
🔒 ❓ प्रश्न 27.
1/4 और 1/8 में कौन-सी भिन्न बड़ी है? कारण सहित लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 दोनों भिन्नों में अंश 1 है।
🔸 जब अंश समान होता है, तब छोटी हर वाली भिन्न बड़ी होती है।
🔹 यहाँ 4 < 8
🔸 इसलिए 1/4 > 1/8
🔹 अतः 1/4, 1/8 से बड़ी है।
🔒 ❓ प्रश्न 28.
यदि 17 टॉफ़ियाँ 5 बच्चों में बराबर बाँटी जाएँ, तो प्रत्येक बच्चे को कितनी टॉफ़ियाँ मिलेंगी और कितनी शेष बचेंगी?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 कुल टॉफ़ियाँ = 17
🔸 बच्चों की संख्या = 5
🔹 17 ÷ 5 = 3 शेष 2
🔹 अतः
🔸 प्रत्येक बच्चे को 3 टॉफ़ियाँ मिलेंगी
🔹 2 टॉफ़ियाँ शेष बचेंगी
🔒 ❓ प्रश्न 29.
साझेदारी और समान बाँट में सम्बन्ध लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 साझेदारी में दो या अधिक व्यक्ति मिलकर कार्य, वस्तु, समय अथवा उत्तरदायित्व में भाग लेते हैं।
🔸 जब यह भागीदारी बराबर रूप में होती है, तब समान बाँट का विचार सामने आता है।
🔹 अर्थात् समान बाँट, साझेदारी का एक रूप हो सकता है।
🔸 इसमें सभी को बराबर हिस्सा मिलता है।
🔹 निष्कर्ष:
🔸 साझेदारी और समान बाँट का सम्बन्ध बराबर हिस्सेदारी, सहयोग और न्याय से है।
🔒 ❓ प्रश्न 30.
“जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा” शीर्षक का गणितीय और जीवन-संबंधी अर्थ लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 गणितीय अर्थ यह है कि किसी मात्रा को बाँटने से उसके भागों, हिस्सों और सम्बन्धों को अधिक स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।
🔸 इससे भिन्न, भाग, शेष और तुलना जैसी धारणाएँ स्पष्ट होती हैं।
🔹 जीवन-संबंधी अर्थ यह है कि ज्ञान, सहयोग, जिम्मेदारी और विचार बाँटने से समझ बढ़ती है।
🔸 मिलकर काम करने से कार्य सरल होता है और सहभागिता बढ़ती है।
🔹 अतः इस शीर्षक का अर्थ है:
🔸 बाँटना केवल कम करना नहीं है
🔹 बाँटना समझ को बढ़ाना है
🔸 बाँटना सहयोग को बढ़ाना है
🔹 बाँटना सहभागिता को बढ़ाना है
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