Class 12, PHYSICS (Hindi)

Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 9: किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशीय यंत्र

पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन


🔵 प्रस्तावना: प्रकाश की सरल रेखीय गति और किरण प्रकाशिकी
किरण प्रकाशिकी (Ray Optics) वह शाखा है जिसमें प्रकाश को एक सीधी रेखा में गमन करने वाली किरण के रूप में माना जाता है। जब प्रकाश किसी माध्यम की सीमा से टकराता है, तो वह परावर्तित, अपवर्तित या अवशोषित हो सकता है। यह अध्याय इन प्रभावों को विस्तार से समझाता है।
✏️ नोट: जब किसी सतह पर प्रकाश पड़ता है, तो वह वहां से परावर्तित या दूसरे माध्यम में जाकर अपवर्तित हो सकता है, और इसी के आधार पर अनेक प्रकाशिक यन्त्र कार्य करते हैं।

🟢 1. परावर्तन (Reflection) के नियम
🌿 परावर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश किरण एक सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौटती है।


🧠 नियम:
1️⃣ आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
2️⃣ परावर्तन कोण = आपतन कोण (i = r)
✔️ परावर्तन दर्पणों का मूल सिद्धांत है।

🟡 2. समतल दर्पण (Plane Mirror)
🔸 समतल दर्पण से बनी छवि:
✔️ आभासी (Virtual)
✔️ सीधी (Erect)
✔️ वस्तु जितनी बड़ी
✔️ दर्पण से वस्तु जितनी दूरी पर
🧠 नोट: वस्तु और छवि के बीच की दूरी = 2 × दर्पण से वस्तु की दूरी

🔴 3. गोलाकार दर्पण
गोलाकार दर्पण दो प्रकार के होते हैं:
✔️ अवतल दर्पण (Concave) – अंदर की सतह परावर्तक


✔️ उत्तल दर्पण (Convex) – बाहर की सतह परावर्तक


🌿 प्रमुख शब्दावली:
➡️ ध्रुव (Pole)
➡️ वक्रता केंद्र (C)
➡️ फोकस (F)
➡️ त्रिज्या (R)
➡️ फोकस दूरी (f = R/2)
🧠 सूत्र:
(1/v) + (1/u) = (1/f)
(दर्पण सूत्र, चिन्ह नियम सहित)


✏️ नोट: चिन्ह नियम का ध्यान रखना अनिवार्य है (दाएं धनात्मक, बाएं ऋणात्मक)

🟢 4. लेंस और अपवर्तन
अपवर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश एक माध्यम से दूसरे में प्रवेश करते समय अपनी दिशा बदलता है।
🧠 स्नेल का नियम:
n₁ sin i = n₂ sin r
✔️ n = आपवर्तनांक
✔️ i = आपतन कोण
✔️ r = अपवर्तन कोण
✏️ नोट: अपवर्तन माध्यम के आपवर्तनांक पर निर्भर करता है।

🟡 5. उत्तल एवं अवतल लेंस


✔️ उत्तल लेंस (Convex) – मध्य मोटा, किनारे पतला


✔️ अवतल लेंस (Concave) – मध्य पतला, किनारे मोटा


🧠 लेंस सूत्र:
(1/v) − (1/u) = (1/f)
✔️ फोकस दूरी का चिन्ह:
➡️ उत्तल लेंस के लिए f धनात्मक
➡️ अवतल लेंस के लिए f ऋणात्मक

🔴 6. लेंसों की संयोजन
दो लेंसों की संयोजन की फोकस दूरी:
🧠 सूत्र:
1/F = 1/f₁ + 1/f₂
✔️ यदि लेंस साथ-साथ रखे गए हों।
✔️ समवर्ती अक्ष होना अनिवार्य।
✏️ नोट: वास्तविक फोकस दूरी ज्ञात करने हेतु प्रभावी फोकस का सूत्र प्रयोग करें।

🟢 7. प्रिज़्म में प्रकाश का विवर्तन
प्रिज़्म पारदर्शी त्रिकोंणीय काँच या अन्य पदार्थ से बना होता है, जिसमें प्रकाश अपवर्तित होकर मुड़ता है।
🧠 घटक सूत्र:
δ = i + e − A
जहाँ,
δ = अपवर्तन विचलन
i = आपतन कोण
e = निर्गमन कोण
A = प्रिज़्म कोण
✔️ न्यूनतम विचलन (δₘ) पर:
n = sin[(A + δₘ)/2] / sin(A/2)

🟡 8. पूर्ण आंतरिक परावर्तन
जब प्रकाश एक सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण आंतरिक समालोचन कोण से अधिक होता है, तो वह अपवर्तित न होकर पूर्ण रूप से परावर्तित होता है।
✔️ शर्त:
➡️ प्रकाश सघन से विरल में जाए
➡️ i > i_c (आंतरिक समालोचन कोण)
💡 अनुप्रयोग: ऑप्टिकल फाइबर, हीरे की चमक

🔴 9. प्रकाशिक यन्त्र: आँख
मानव आँख एक प्राकृतिक उत्तल लेंस प्रणाली है जो वस्तुओं से आने वाले प्रकाश को नेत्र पट (रेटिना) पर छवि के रूप में बनाती है।
✔️ महत्वपूर्ण शब्द:
➡️ नेत्र लेंस
➡️ पुतली
➡️ रेटिना
➡️ दृष्टि सीमा: लगभग 25 सेमी
🧠 नेत्र दोष:
✔️ दूरदृष्टिता → उत्तल लेंस से सुधार
✔️ निकटदृष्टिता → अवतल लेंस से सुधार

🟢 10. प्रकाशिक यन्त्र: लूप, दूरबीन, सूक्ष्मदर्शी
✔️ लूप (Magnifying Glass):
➡️ उत्तल लेंस का उपयोग
➡️ वस्तु को स्पष्ट बड़ा दिखाना
✔️ दूरबीन (Telescope):


➡️ दूर की वस्तुएँ स्पष्ट देखने के लिए
➡️ उद्देश्य लेंस + नेत्रपीस लेंस
✔️ सूक्ष्मदर्शी (Microscope):


➡️ सूक्ष्म वस्तुओं को बड़ा देखने हेतु
➡️ दो लेंस – उद्देश्य और नेत्रपीस
🧠 समय: दूरबीन और सूक्ष्मदर्शी में कोणीय आवर्धन की भूमिका होती है।

🌟 यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है? 🌟
(📦 Why This Lesson Matters Box)
➡️ यह अध्याय प्रकाश के व्यवहार को समझने की बुनियाद रखता है।
➡️ आधुनिक प्रकाशिक यन्त्रों जैसे – कैमरा, दूरबीन, चश्मा आदि का वैज्ञानिक आधार यहीं से मिलता है।
➡️ दृष्टिदोषों के निवारण से लेकर तकनीकी विकास तक, इसका महत्व सर्वव्यापक है।

📝 Quick Recap: (स्मृति-पुनरावलोकन)
🔵 परावर्तन – i = r
🟢 कूल दर्पण सूत्र – (1/v) + (1/u) = (1/f)
🟡 लेंस सूत्र – (1/v) − (1/u) = (1/f)
🔴 स्नेल नियम – n₁ sin i = n₂ sin r
🟢 प्रिज़्म – δ = i + e − A
🟡 पूर्ण आंतरिक परावर्तन – i > i_c
🔴 आंख – प्राकृतिक लेंस प्रणाली
🟢 दूरबीन, सूक्ष्मदर्शी – लेंस संयोजन आधारित यन्त्र

🔻 सारांश (Summary in ~300 Words) 🔻
🔹 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यन्त्र अध्याय प्रकाश की सीधी रेखा में गति, परावर्तन, अपवर्तन, और प्रकाशिक यन्त्रों की कार्यविधि को समझाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
🔸 परावर्तन में प्रकाश दर्पणों से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटता है। समतल और गोलाकार दर्पणों में छवियों की प्रकृति अलग होती है।


🔹 अपवर्तन के अंतर्गत, जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे में जाता है, तो उसकी दिशा बदलती है, जिसे स्नेल के नियम से मापा जाता है।
🔸 लेंस, विशेषकर उत्तल और अवतल लेंस, छवियों के निर्माण के लिए उपयोगी होते हैं। इनका व्यवहार लेंस सूत्र से समझा जाता है।
🔹 संप्रिज्म, प्रकाश के विचलन और विभिन्न रंगों के बिखराव का कारण होता है। न्यूनतम विचलन कोण पर आपवर्तनांक ज्ञात किया जाता है।


🔸 पूर्ण आंतरिक परावर्तन प्रकाश का अत्यंत महत्वपूर्ण गुण है जिसका उपयोग ऑप्टिकल फाइबर और बहुमूल्य रत्नों में होता है।
🔹 प्रकाशिक यन्त्रों जैसे मानव आँख, दूरबीन, सूक्ष्मदर्शी और आवर्धक लेंस का कार्य इसी अध्याय के सिद्धांतों पर आधारित होता है। ये उपकरण विज्ञान, चिकित्सा और तकनीकी विकास में उपयोगी हैं।


यह अध्याय छात्रों को प्रकाश के व्यवहार और उपयोग को समझाने के साथ-साथ, भविष्य में भौतिकी की अनेक शाखाओं में शोध के लिए तैयार करता है।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न



प्रश्न 9.1:
2.5 cm साइज की कोई छोटी मोमबत्ती 36 cm त्रिज्या के किसी अवतल दर्पण से 27 cm दूरी पर रखी है। छवि को किस परसे या किस दिशा पर रखा जाए कि वह एक ऊर्ध्वमुक प्रतिलक्षित परछाया और वस्तु की वास्तविक और सजीव छवि बनाएं? इस छवि को कहाँ और कैसे देखा जा सकता है?
उत्तर:
दिया गया है:
वस्तु की दूरी (u) = –27 cm (दर्पण के बाएँ)
दर्पण की त्रिज्या (R) = 36 cm ⇒ फोकस दूरी (f) = R/2 = 18 cm
⇒ f = –18 cm (अवतल दर्पण के लिए)
दर्पण सूत्र:
1/f = 1/v + 1/u
⇒ 1/v = 1/f – 1/u
⇒ 1/v = (–1/18) – (–1/27)
⇒ 1/v = –1/18 + 1/27 = (–3 + 2)/54 = –1/54
⇒ v = –54 cm
छवि की दूरी v = –54 cm ⇒ छवि दर्पण की बाईं ओर 54 cm पर बनेगी।
छवि की प्रकृति:
वास्तविक
उलटी
बढ़ी हुई
परावर्तक पर ले जाई जा सकती है
इस छवि को किसी स्क्रीन पर देखा जा सकता है क्योंकि यह वास्तविक छवि है।

प्रश्न 9.2:
4.5 cm साइज की वस्तु एक 15 cm वक्रता त्रिज्या वाले उत्तल दर्पण के सामने 12 cm दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा आकारमिति लिखिए और छवि की प्रकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
वस्तु की दूरी u = –12 cm
R = 15 cm ⇒ f = R/2 = 7.5 cm
⇒ f = +7.5 cm (उत्तल दर्पण के लिए)
दर्पण सूत्र:
1/f = 1/v + 1/u
⇒ 1/v = 1/f – 1/u = 1/7.5 – (–1/12)
= (12 + 7.5) / (7.5 × 12) = 19.5 / 90 ⇒ v ≈ +4.615 cm
⇒ छवि दर्पण की पीठ के पीछे 4.6 cm पर बनेगी।
विवर्धन (Magnification)
m = v/u = +4.615 / (–12) ≈ –0.384
⇒ छवि:
आभासी
सीधी
वस्तु से छोटी
उत्तल दर्पण के पीछे बनती है

प्रश्न 9.3:
कोई वस्तु 12.5 cm लंबाई के जल में रखी है। यदि किसी सूक्ष्मदर्शी लेंस को जल में रखी किसी सुई की आभासी गहराई 9.4 cm मापी जाती है। जल का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
वास्तविक गहराई = 12.5 cm
आभासी गहराई = 9.4 cm
अपवर्तनांक (n) = वास्तविक गहराई / आभासी गहराई
n = 12.5 / 9.4 ≈ 1.33
⇒ जल का अपवर्तनांक ≈ 1.33

प्रश्न 9.4:
चित्र 9.27 (a) तथा (b) में दिए गए आपतित किरण का अपवर्तन स्थिति ज्ञात कीजिए। वायु में अपवर्तनांक 1.0 तथा जल का अपवर्तनांक 1.33 मानिए।
चित्र 9.27 (c) में आपतित किरण उस कोण से आती है जो वायु-जल पृष्ठ पर 45° का कोण बनाती है।
उत्तर:
(चित्र आधारित प्रश्न — बिंदुवार उत्तर नीचे दिए गए हैं)
(a) वायु से काँच में आपतन कोण = 35°, अपवर्तनांक
n₁ = 1.0 (वायु), n₂ = 1.5 (काँच),
Snell का नियम:
n₁ sin i = n₂ sin r
⇒ sin r = (1.0/1.5) × sin(35°) ≈ 0.574 / 1.5 ≈ 0.383
⇒ r ≈ sin⁻¹(0.383) ≈ 22.5°
(b) वायु से जल में:
n₁ = 1.0, n₂ = 1.33, i = 60°
⇒ sin r = (1.0 / 1.33) × sin(60°)
= (1/1.33) × 0.866 ≈ 0.651
⇒ r ≈ sin⁻¹(0.651) ≈ 40.7°
(c) वायु से जल में i = 45°
⇒ sin r = (1.0/1.33) × sin(45°)
= (1/1.33) × 0.7071 ≈ 0.532
⇒ r ≈ sin⁻¹(0.532) ≈ 32.1°

प्रश्न 9.5:
जल से भरे 80 cm गहराई के किसी टैंक की तली पर कोई छोटी वस्तु रखी गई है। जल के पृष्ठ का वह क्षेत्र ज्ञात कीजिए जिससे जलतल पर वस्तु को देखा जा सकता है। जल का अपवर्तनांक 1.33 है (बल्ब को बिंदु प्रकाश स्रोत मानिए)।
उत्तर:
यह प्रश्न कुल आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) तथा क्रांतिक कोण पर आधारित है।
क्रांतिक कोण C:
sin C = 1 / μ = 1 / 1.33 ⇒ C ≈ 48.75°
⇒ इस कोण से वस्तु को देखा जा सकता है।
r = tan(C) = tan(48.75°) ≈ 1.14
∴ अधिकतम दूरी R = h × tan C = 80 × 1.14 ≈ 91.2 cm
⇒ क्षेत्रफल A = πR² ≈ π × (91.2)² ≈ 26126.7 cm²

प्रश्न 9.6:
कोई किरण अपवर्तन-अंतरफलक के दोनों ओर सममित प्रकाशीय पथ प्रसारित करती है। इस किरण की फलक पर आपतन कोण ज्ञात कीजिए। फलक का न्यूटन विक्षेप कोण 40° मानें। फलक के पदार्थ का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए? यदि फलक जल में रखा जाए (अपवर्तनांक 1.33) तो वह प्रकाश के सममित पथ के लिए न्यूटन विक्षेप कोण को परिलक्षित कीजिए।
उत्तर:
🔹 सममित पथ के लिए आपतन कोण i = अपवर्तन कोण r
न्यूटन विक्षेप कोण (δ) = 2i – A
यहाँ δ = 40°, A = फलक कोण
⇒ 40° = 2i – A
⇒ i = (40° + A)/2
लेकिन यहाँ A नहीं दिया है, केवल δ = 40° दिया है। अतः इस प्रश्न में A की मान्यता के बिना सटीक उत्तर नहीं दिया जा सकता जब तक A ज्ञात न हो।
यदि A दिया जाए, तो
अपवर्तनांक n = sin[(A + δ)/2] / sin(A/2) से ज्ञात किया जा सकता है।
यदि जल में रखा जाए, तो अपवर्तनांक μ’ = μ / μ_water
और δ’ = 2i’ – A का उपयोग करके नया विक्षेप कोण निकलता है।
यह प्रश्न संदर्भात्मक रूप से त्रिकोणीय फलक पर आधारित है।

प्रश्न 9.7:
अपवर्तनांक 1.55 के काँच से दोनों फलकों की समान त्रिज्या वाले उपगोलक लेंस निर्मित किया गया है। यदि 20 cm दूरी पर स्थित वस्तु से अर्धव्यास रेखा पर आपवर्तित किरण के संगम स्थान की दूरी 20 cm है, तो इस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
लेंस निर्माता सूत्र:
1/f = (μ – 1) × (1/R₁ – 1/R₂)
यहाँ,
R₁ = R, R₂ = –R ⇒ 1/R – (–1/R) = 2/R
⇒ 1/f = (1.55 – 1) × 2/R = 0.55 × 2/R = 1.1/R
अब दिया गया है कि फोकस दूरी f = 20 cm
⇒ 1/f = 1.1/R
⇒ R = 1.1 × f = 1.1 × 20 = 22 cm

प्रश्न 9.8:
कोई प्रकाश-पुंज किसी बिंदु P पर अभिसारित होता है। कोई लेंस इस अभिसारित पुंज के पथ में बिंदु P से 12 cm दूर रखा है। यदि यह लेंस पुंज को उस बिंदु Q पर एकत्र करता है जो P से 20 cm दूर है, तो इस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
u = –12 cm, v = +20 cm
लेंस सूत्र:
1/f = 1/v – 1/u = 1/20 – (–1/12)
= 1/20 + 1/12 = (3 + 5)/60 = 8/60 = 2/15
⇒ f = 7.5 cm

प्रश्न 9.9:
3.0 cm ऊँची कोई छवि 21 cm फोकस दूरी के अवतल लेंस के सामने 14 cm दूरी पर रखी है। लेंस द्वारा निर्मित प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात कीजिए। यह छवि लेंस से किस दूरी पर है?
उत्तर:
दिया गया है:
f = –21 cm (अवतल लेंस), u = –14 cm
लेंस सूत्र:
1/f = 1/v – 1/u
⇒ 1/v = 1/f + 1/u = (–1/21) + (–1/14)
= (–2 – 3)/42 = –5/42
⇒ v = –8.4 cm
छवि की दूरी = 8.4 cm लेंस की बाईं ओर (वास्तविक दिशा में)

प्रश्न 9.10:
किसी 30 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस के सतह के एक सिरे से 20 cm फोकस दूरी के अवतल लेंस के संयोजन में बने संयुक्त लेंस (निकाय) की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। यह लेंस अपवर्ती लेंस है या अभिसारी?
उत्तर:
संयुक्त फोकस दूरी F:
1/F = 1/f₁ + 1/f₂
f₁ = +30 cm (उत्तल), f₂ = –20 cm (अवतल)
⇒ 1/F = 1/30 – 1/20 = (2 – 3)/60 = –1/60
⇒ F = –60 cm
⇒ संयुक्त लेंस अपवर्ती (diverging) है क्योंकि F ऋणात्मक है।


प्रश्न 9.11:
किसी समवर्ती सूक्ष्मदर्शी में 2.0 cm फोकस दूरी की अभिसारी लेंस तथा 6.25 cm फोकस दूरी की निकाय लेंस एक-दूसरे से 15 cm दूर रखी हों। किसी वस्तु को अभिसारी लेंस से कितनी दूरी पर रखा जाए कि संयोजन लेंस के अंतर्गत (25 cm) पर स्पष्ट प्रतिबिंब बने?
उत्तर:
दिया गया है:
फोकस दूरी (Objective) fₒ = 2.0 cm
फोकस दूरी (Eyepiece) fₑ = 6.25 cm
दूरी दोनों लेंसों के बीच = 15 cm
संपूर्ण दूरी (L) = 25 cm
स्पष्ट प्रतिबिंब बनने के लिए छवि वस्तु और आइपीस लेंस के बीच बने
⇒ छवि की स्थिति = 25 – 15 = 10 cm (from objective)
अब v = +10 cm (objective के लिए)
⇒ 1/fₒ = 1/v – 1/u
⇒ 1/u = 1/v – 1/fₒ = 1/10 – 1/2 = (1 – 5)/10 = –4/10
⇒ u = –2.5 cm
∴ वस्तु को अभिसारी लेंस से 2.5 cm की दूरी पर रखा जाना चाहिए।

प्रश्न 9.12:
25 cm के सामान्य प्रकाशीय बिंदु पर कोई व्यक्ति ऐसे संयुक्त सूक्ष्मदर्शी डिजाइन करता है जिसकी अभिसारी लेंस की फोकस दूरी 2.5 cm तथा फ्रेम की ऊँचाई 8.0 mm होती है। इस उपयोग हेतु अभिसारी लेंस को वस्तु से कितनी दूरी पर रखा जाए कि स्पष्ट प्रतिबिंब वस्तु के सापेक्ष समान हो?
उत्तर:
दिया गया:
फोकस दूरी f = 2.5 cm
छवि को D = 25 cm पर बनाना है ⇒ v = –25 cm (दृष्टिसीमा पर स्पष्ट प्रतिबिंब हेतु)
लेंस सूत्र:
1/f = 1/v – 1/u
⇒ 1/u = 1/v – 1/f = (–1/25) – (1/2.5) = –1/25 – 2/5 = –1/25 – 10/25 = –11/25
⇒ u = –25/11 ≈ –2.27 cm
∴ वस्तु को लगभग 2.27 cm की दूरी पर रखा जाए।

प्रश्न 9.13:
किसी छोटी वस्तु की अभिसारी लेंस को निकाय दूरी 144 cm तथा निकाय की फोकस दूरी 6.0 cm है। लेंस द्वारा छवि की आवर्धन क्षमता कितनी है? लेंस की निकाय दूरी से छवि एकत्रण दूरी क्या है?
उत्तर:
दिया गया है:
v = 144 cm, f = 6.0 cm
लेंस सूत्र:
1/f = 1/v – 1/u ⇒ 1/u = 1/v – 1/f = 1/144 – 1/6 = (1 – 24)/144 = –23/144
⇒ u = –144/23 ≈ –6.26 cm
अब, आवर्धन m = v/u = 144 / (–6.26) ≈ –23
⇒ छवि उलटी, 23 गुना बड़ी, वास्तविक होगी।
छवि की एकत्रण दूरी = 144 cm

प्रश्न 9.14:
(क) किसी वेधशाला की विशाल दूरबीन की अभिसारी लेंस की फोकस दूरी 15 m है। 1.0 cm व्यास वाले नीयन स्रोत को निकाय फोकस पर रखा गया है। इस प्रणाली का अपवर्तन क्या है?
उत्तर:
v = ∞ (समीपस्थ वस्तु), f = 15 m
⇒ अपवर्तन = v/u = ∞ / 15 = ∞ (सैद्धांतिक रूप से बहुत अधिक)
(ख) यदि इस दूरबीन को सामान्य दृष्टि के अनुकूल बनाया जाए तो निकाय के लेंस के द्वारा निर्मित प्रतिबिंब का व्यास ज्ञात कीजिए।
दिया गया:
व्यास = 3.48 × 10⁻⁶ m
f = 15 m
व्यास प्रतिबिंब = f × θ = 15 × 3.48 × 10⁻⁶ = 5.22 × 10⁻⁵ m

प्रश्न 9.15:
दर्पण-सूत्र का उपयोग यह युक्ति करने के लिए कीजिए कि:
(a) किसी अवतल दर्पण के केंद्र 2f के बीच रखे बिंदु का वास्तविक प्रतिबिंब 2f से दूर बनता है।
उत्तर:
u = –x, जहाँ f < x < 2f ⇒ 1/f = 1/v + 1/u ⇒ 1/v = 1/f – 1/u इस स्थिति में, v > 2f होता है। अतः प्रतिबिंब 2f से आगे बनता है।
(b) उत्तल दर्पण द्वारा सदैव आभासी प्रतिबिंब बनता है।
उत्तर:
उत्तल दर्पण में f धनात्मक होता है और वस्तु हमेशा बाईं ओर होती है, अतः प्रतिबिंब हमेशा आभासी और सीधा होता है।
(c) उत्तल दर्पण द्वारा सदैव आकार से छोटा प्रतिबिंब बनता है।
उत्तर:
विवर्धन m = v/u < 1 ⇒ प्रतिबिंब सदैव छोटा होता है।
(d) अवतल दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच रखे वस्तु का प्रतिबिंब बड़ा तथा आभासी बनता है।
उत्तर:
u < f ⇒ v धनात्मक आता है ⇒ प्रतिबिंब आभासी और बड़ा होता है।


प्रश्न 9.16:
किसी मेज के ऊपरी पृष्ठ पर जुड़ी एक छोटी पिन को 50 cm ऊँचाई से देखा जाता है। 15 cm मोटे अपवर्तक काँच के टुकड़े को पिन के ठीक ऊपर रखा गया है। पिन को ठीक उसी बिंदु से देखने पर पिन नयी दूरी पर दिखाई देती है? काँच का अपवर्तनांक 1.5 है। क्या उत्तर पिन की अपवासी दूरी पर निर्भर करता है?
उत्तर:
दिया गया:
वास्तविक मोटाई t = 15 cm,
μ = 1.5
⇒ अपवासी दूरी (apparent depth)
t’ = t / μ = 15 / 1.5 = 10 cm
⇒ छवि की नई ऊँचाई = 50 – 15 + 10 = 45 cm
(पिन पहले 50 cm पर दिखती थी, अब 45 cm पर दिखेगी)
उत्तर वास्तविक मोटाई पर निर्भर है, अपवासी दूरी p की ऊँचाई पर नहीं।

प्रश्न 9.17:
(a) चित्र 9.28 में अपवर्तनांक 1.68 के लेंस से बनी किसी ‘प्रकाश नलिका’ (light pipe) का अनुप्रस्थ पृष्ठीय व्यास 1.44 अपवर्तनांक के पदार्थ में निर्मित है। नलिका की धुरी के साथ कोण बनाता प्रकाश रेखा, चित्र के अनुसार, पूर्ण आंतरिक परावर्तन करती है।
(i) यदि पृष्ठ पर बाहर आवरण न हो, तो क्या उत्तर होगा?
उत्तर:
पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए आवश्यक है:
μ₁ sin i ≥ μ₂
यदि बाहर कोई आवरण न हो (जैसे वायु), तो
μ₂ = 1.0
⇒ sin C = μ₂ / μ₁ = 1 / 1.68 ≈ 0.595
⇒ C ≈ sin⁻¹(0.595) ≈ 36.5°
⇒ यदि आपतन कोण इससे अधिक हो, तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होगा।
⇒ यदि बाहर वायु है, तो प्रकाश प्रतिबिंबित होगा। यदि μ₂ अधिक हो (1.44), तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन संभव नहीं।

प्रश्न 9.18:
किसी कमरे की एक दीवार पर लेंस विधि प्रयोग करने हेतु किसी आकृति के उत्तल लेंस को दीवार से 3 m दूरी पर रखा गया। दीवार पर प्रतिलक्षित प्रतिबिंब प्राप्त करना है। इसके लिए लेंस की अधिकतम फोकस दूरी क्या होनी चाहिए?
उत्तर:
दीवार पर स्पष्ट प्रतिबिंब हेतु:
v = 3 m
u = –3 m
⇒ 1/f = 1/v – 1/u = 1/3 – (–1/3) = 2/3
⇒ f = 1.5 m
⇒ अधिकतम फोकस दूरी = 1.5 m

प्रश्न 9.19:
किसी पर्दे को लेंस से 90 cm दूर रखा गया है। पर्दे पर स्पष्ट छवि प्राप्त करने हेतु वस्तु को दूसरे से 20 cm दूर खिसकाया जा सकता है। तो प्रतिबिंब दूरी क्या होगी?
उत्तर:
u और v में परिवर्तन पर आधारित समस्या है:
u₁ + v₁ = 90,
u₂ = u₁ + 20,
v₂ = v₁ – 20
दोनों में जोड़ने पर:
u₁ + v₁ + u₂ + v₂ = 2 × 90 = 180
⇒ (u₁ + u₁ + 20) + (v₁ + v₁ – 20) = 180
⇒ 2u₁ + 20 + 2v₁ – 20 = 180
⇒ 2(u₁ + v₁) = 180 ⇒ u₁ + v₁ = 90
⇒ v = 50 cm, u = 40 cm

प्रश्न 9.20:
(a) प्रश्न 9.10 के लेंस संयोजन की प्रणाली को इसी स्थिति में दीर्घ दूरी स्थित वस्तु जब लेंस के प्रमुख फोकस में (निकाय) फोकस दूरी पर स्थित हो तब परिलक्षित प्रणाली का फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
Q9.10 में
f₁ = +30 cm, f₂ = –20 cm
1/F = 1/f₁ + 1/f₂ = 1/30 – 1/20 = –1/60 ⇒ F = –60 cm
⇒ फोकस दूरी = –60 cm
(b) उपयुक्त व्यवस्था (a) में 1.5 cm ऊँचाई की वस्तु लेंस की धुरी से 40 cm दूरी पर रखी हो तो दोनों द्वारा उत्पन्न प्रतिबिंब का आकार ज्ञात कीजिए।
⇒ m = v/u = –60 / (–40) = 1.5
⇒ छवि की ऊँचाई = 1.5 × 1.5 = 2.25 cm

प्रश्न 9.21:
60° आपतन कोण के गिलास पर फलक पर स्थित प्रकाश किरण का फलक कोण पर आपवर्तन कराया जाए, जिसे इस गिलास फलक के केवल एक पूर्ण आंतरिक परावर्तन से हो। गिलास का अपवर्तनांक 1.524 है।
उत्तर:
पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए:
sin C = 1 / 1.524 ≈ 0.656
⇒ C ≈ sin⁻¹(0.656) ≈ 41.1°
यदि आपतन कोण 60° है तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होगा।

प्रश्न 9.22:
कोई कार्ड शीट जिसे 1 mm² साइज के वर्ग में बांटा गया हो, 9 cm दूरी पर रखा गया। किसी आवर्धक लेंस द्वारा इसे नेत्र के निकट रखा जाता है।
(a) लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन (प्रतिविम्ब–वास्तविक/वस्तु–साइज) क्या है?
उत्तर:
वस्तु की दूरी = –9 cm
D = 25 cm
⇒ M = D / |u| = 25 / 9 ≈ 2.78
(b) लेंस का कोणीय आवर्धन (आंखीय क्षमता) क्या है?
उत्तर:
कोणीय आवर्धन = D/f
यदि f ज्ञात नहीं है, तो केवल u से नहीं निकाला जा सकता।
(c) क्या (a) में आवर्धन (b) में आवर्धन के बराबर है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नहीं, एक रेखीय है, एक कोणीय।
⇒ दोनों अलग-अलग प्रकार के हैं।


प्रश्न 9.23:
(a) अभ्यास 9.22 में लेंस को कार्ड शीट से कितनी दूरी पर रखा जाए, ताकि वर्गों को अधिकतम संभव आवर्धन क्षमता के साथ स्पष्ट देखा जा सके?
उत्तर:
अधिकतम स्पष्टता के लिए वस्तु को फोकस दूरी f से बहुत थोड़ा अधिक दूरी पर रखा जाना चाहिए, ताकि छवि दृष्टिसीमा (25 cm) पर बन सके।
⇒ अतः वस्तु की दूरी u ≈ f से थोड़ा अधिक होनी चाहिए।
(b) इस उदाहरण में आवर्धन (प्रतिबिंब–वास्तविक/वस्तु–साइज) क्या है?
उत्तर:
M = D/f
यदि f ज्ञात नहीं है तो सटीक मान नहीं दिया जा सकता। केवल D = 25 cm ज्ञात है।
(c) क्या इस प्रयोग में आवर्धन, आंखीय क्षमता के बराबर है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नहीं।
आवर्धन और आंखीय क्षमता दोनों अलग अवधारणाएं हैं – एक वास्तविक माप है, दूसरी दृष्टिगोचर (angular)।

प्रश्न 9.24:
अभ्यास 9.23 में वस्तु तथा आवर्धक लेंस के बीच कितनी दूरी होनी चाहिए ताकि आपवासी प्रतिविम्ब का प्रत्येक वर्ग 6.25 mm² के आकार का हो? क्या आपवर्धक लेंस को नेत्र के अपेक्षाकृत निकट रखा गया हो सकता है ताकि प्रकाशीय दूरी घटकर f के बराबर रखी जा सके?
उत्तर:
मूल क्षेत्र = 1 mm²
आवर्धन = A’/A = 6.25 / 1 = 6.25
अब, M = v/u = 6.25 ⇒ u = v / 6.25
यदि छवि स्पष्ट दृष्टि सीमा D = 25 cm पर है ⇒ u = 25 / 6.25 = 4.0 cm
⇒ वस्तु को लेंस से 4.0 cm दूरी पर रखना चाहिए।
यदि नेत्र लेंस के निकट रखा जाए, तो यह व्यावहारिक है।

प्रश्न 9.25:
निर्दिष्ट प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) किसी लेंस द्वारा गैर-अंतहीन कोणीय आवर्धन देने वाला लेंस द्वारा उत्पन्न प्रतिविम्ब द्वारा नेत्र पर प्रतिलक्षित कोणीय आयाम क्या होता है?
उत्तर:
θ = h/v ≈ h / D (दृष्टिसीमा पर)
⇒ कोणीय आयाम = वस्तु ऊँचाई / दृष्टिसीमा
(b) किसी आवर्धक लेंस से देखे जाने पर, नेत्र को लेंस से अवस्थित सबसे निकटतम बिंदु पर अवस्थित करना चाहिए या नहीं? क्यों?
उत्तर:
हां, इससे दृष्टिकोण बढ़ता है और अधिक विस्तार से देखा जा सकता है।
(c) किसी सरल सूक्ष्मदर्शी की आंखीय क्षमता उसकी फोकस दूरी के अनुपातक्रम में होती है। यदि वह 25 cm से कम दूरी पर हो तो M = D/f
उत्तर:
हां, आंखीय क्षमता D/f के अनुपात में होती है। D = 25 cm मानक दृष्टिसीमा होती है।
(d) किसी संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में अभिसारी लेंस तथा निकाय लेंस दोनों की फोकस दूरी कम क्यों होनी चाहिए?
उत्तर:
अधिक आवर्धन प्राप्त करने हेतु, दोनों लेंस की फोकस दूरी छोटी रखी जाती है ताकि M बड़ा हो।
(e) किसी सूक्ष्मदर्शी हेतु समुचित सम्मिलित फोकस के लिए वस्तु, नेत्रिका पर स्थित न होकर उससे कुछ दूरी पर होनी चाहिए। क्यों?
उत्तर:
ताकि छवि स्पष्ट दृष्टिसीमा पर बने और दोनों लेंस मिलकर उच्च आवर्धन प्रदान करें।

प्रश्न 9.26:
1.25 cm फोकस दूरी का अभिसारी लेंस तथा 5 cm फोकस दूरी की नेत्रिका का उपयोग करके कोणीय आवर्धन (आंखीय क्षमता) 30× होता है। आप संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का नाममात्र आवर्धन कैसे करेंगे?
उत्तर:
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का कुल आवर्धन:
M = (L / fₒ) × (D / fₑ)
जहाँ fₒ = 1.25 cm, fₑ = 5.0 cm, D = 25 cm
M = (L / 1.25) × (25 / 5) = (L / 1.25) × 5 = 4L
⇒ यदि 30 = 4L ⇒ L = 7.5 cm
नाममात्र आवर्धन = 30×

प्रश्न 9.27:
(a) किसी संयोजन के अभिसारी लेंस की फोकस दूरी 140 cm तथा नेत्रिका की फोकस दूरी 5.0 cm है। इस संयोजन की आंखीय क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
M = (L / fₒ) × (D / fₑ)
= (140 / 140) × (25 / 5) = 1 × 5 = **5×
(b) आंखी प्रतिविम्ब स्पष्ट दृष्टि के अवतल बिंदु (25 cm) पर बनता है?
उत्तर:
हां, क्योंकि संयोजन ऐसा ही डिज़ाइन किया गया है।

प्रश्न 9.28:
(a) अभ्यास 9.27(a) में मीनार देखने के लिए अभिसारी लेंस तथा नेत्रिका के बीच यथोचित दूरी क्या होगी?
उत्तर:
L = fₒ + fₑ = 140 + 5 = 145 cm
(b) यदि इस संयोजन का उपयोग 3 km दूर स्थित 100 m ऊँची मीनार को देखने हेतु किया जाए, तो अंतिम प्रतिबिंब की ऊँचाई क्या होगी?
⇒ अनुपात: h’/h = M ⇒ h’ = M × h = 5 × 100 = 500 m
(c) यदि अंतिम प्रतिबिंब 25 cm दूर बना है, तो अंतिम प्रतिबिंब की मीनार की ऊँचाई क्या है?
उत्तर:
यहां h’ = (v / u) × h
लेकिन दूरी दी गई नहीं है, अतः ऊपर का उत्तर ही प्रासंगिक रहेगा।

प्रश्न 9.29:
किसी केसोमेट ट्यूब में चित्र 9.26 में स्पर्शिक अनुसार दो दर्पणों का प्रयोग किया गया है। दर्पणों के बीच दूरी 20 mm तथा बड़े दर्पण की वक्रता त्रिज्या 220 mm हो। छोटे दर्पण की वक्रता त्रिज्या 140 mm हो तो अंतिम प्रतिबिंब कहां बनेगा?
उत्तर:
परावर्तन सूत्र व दर्पण सूत्र का प्रयोग करना होगा, यह प्रश्न परासंगिक मानकों से जटिल है — गणना दीर्घ हो सकती है। यहां स्पर्श रेखा विधि द्वारा गणना की जाती है जो अभ्यास स्तर से बाहर हो सकती है।

प्रश्न 9.30:
किसी गैल्वेनोमीटर को कुंडली से जुड़े समस्त दर्पण पर समान आपतित प्रकाश (चित्र 9.29) रेखा से टकराकर अपना पथ पृष्ठ पर बनाता है। यदि दर्पण की घूर्णन क्षमता θ = 3.5° है, तो परावर्तित किरण में कितना विक्षेपण होगा?
उत्तर:
दर्पण घूर्णन θ = 3.5°
⇒ विक्षेपण = 2θ = 7.0°

प्रश्न 9.31:
चित्र 9.30 में कोई सममित लेंस (अपवर्तनांक 1.50) किसी सममित दर्पण के फलक पर स्थित जल के स्तर के संपर्क में स्थिर रखा गया है। सूर्य की किरणें लेंस के शीर्ष पर सममित रूप से गिरती हैं। यदि जल की गहराई 45.0 cm है, तो सूर्य की अंतिम प्रतिबिंब स्थिति क्या होगी?
उत्तर:
दिया गया:
n = 1.50
d = 45.0 cm
सममित स्थिति ⇒ प्रतिबिंब = 2d / n = 2 × 45 / 1.5 = 60.0 cm

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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न



Q1. किसी अवतल दर्पण में वस्तु को फोकस दूरी से कम दूरी पर रखने पर प्रतिबिंब कैसा होता है?
(A) आभासी, सीधा, बड़ा
(B) वास्तविक, उलटा, बड़ा
(C) वास्तविक, सीधा, छोटा
(D) आभासी, उलटा, बड़ा
उत्तर: (A)

Q2. उत्तल दर्पण द्वारा बनने वाली छवि की प्रकृति होती है:
(A) वास्तविक, उलटी
(B) आभासी, सीधी
(C) आभासी, उलटी
(D) वास्तविक, सीधी
उत्तर: (B)

Q3. यदि किसी लेंस की वक्रता त्रिज्या को आधा कर दिया जाए, तो उसकी फोकस दूरी:
(A) दोगुनी हो जाएगी
(B) आधी हो जाएगी
(C) अपरिवर्तित रहेगी
(D) शून्य हो जाएगी
उत्तर: (B)

Q4. निम्न में से कौन-सा परावर्तन के नियम से संबंधित नहीं है?
(A) आपतन किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं
(B) परावर्तन कोण = आपतन कोण
(C) दोनों किरणें एक ही माध्यम में होती हैं
(D) परावर्तित किरण का वेग परिवर्तित होता है
उत्तर: (D)

Q5. कोणीय आवर्धन का मात्रक होता है:
(A) मीटर
(B) रैडियन
(C) कोण रहित
(D) डाइऑप्टर
उत्तर: (C)

Q6. किसी सममित लेंस का न्यूनतम विचलन किस स्थिति में होता है?
(A) जब आपतन कोण = अपवर्तन कोण
(B) जब विचलन अधिकतम हो
(C) जब दोनों कोण समान हों
(D) जब लेंस पतला हो
उत्तर: (C)

Q7. परावर्तक सूक्ष्मदर्शी में प्रयुक्त मुख्य दर्पण होता है:
(A) उत्तल
(B) समतल
(C) अवतल
(D) बेलनाकार
उत्तर: (C)

Q8. प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है जब:
(A) प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाता है
(B) आपतन कोण क्रांतिक कोण से कम होता है
(C) माध्यम समान हों
(D) प्रकाश विरल से सघन माध्यम में जाता है
उत्तर: (A)

Q9. निम्नलिखित में से कौन-सा उपकरण अधिकतम कोणीय आवर्धन प्रदान करता है?
(A) आवर्धक लेंस
(B) सरल दूरबीन
(C) संयोजित सूक्ष्मदर्शी
(D) परावर्तक दूरबीन
उत्तर: (C)

Q10. Assertion (A): उत्तल दर्पण द्वारा बनी छवि सदैव वस्तु से छोटी होती है।
Reason (R): उत्तल दर्पण का फोकस बिंदु और केंद्र वस्तु की ओर नहीं होता।
(A) A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
(B) A और R दोनों सत्य हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(C) A सत्य है पर R असत्य है
(D) A असत्य है पर R सत्य है
उत्तर: (B)

Q11. Assertion (A): फोकस दूरी ज्ञात करने हेतु किसी लेंस द्वारा बने छवि का उपयोग किया जा सकता है।
Reason (R): लेंस सूत्र 1/f = 1/v – 1/u से फोकस दूरी निकाली जा सकती है।
(A) A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
(B) A और R दोनों सत्य हैं पर R, A की सही व्याख्या नहीं है
(C) A सत्य है पर R असत्य है
(D) A असत्य है पर R सत्य है
उत्तर: (A)

Q12. कोणीय अपवर्तनांक किसका अनुपात होता है?
(A) वस्तु की ऊँचाई / छवि की ऊँचाई
(B) दृष्टिसीमा / लेंस की फोकस दूरी
(C) कोणीय ऊँचाई / दृश्य कोण
(D) वास्तविक ऊँचाई / आभासी ऊँचाई
उत्तर: (B)

Q13. वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी का संबंध है:
उत्तर:
फोकस दूरी f = वक्रता त्रिज्या R / 2

Q14. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की दो शर्तें क्या हैं?
उत्तर:
(1) प्रकाश सघन से विरल माध्यम में जाए।
(2) आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो।

Q15. दृष्टिसीमा की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
दृष्टिसीमा वह न्यूनतम दूरी है जिस पर कोई वस्तु स्पष्ट देखी जा सकती है। सामान्यतः यह 25 cm होती है।

Q16. परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच बने कोण को क्या कहते हैं?
उत्तर:
परावर्तन कोण

Q17. किसी पतले लेंस के लिए लेंस सूत्र क्या है?
उत्तर:
1/f = 1/v – 1/u

Q18. संयोजित सूक्ष्मदर्शी में कुल आवर्धन कैसे निकाला जाता है?
उत्तर:
कुल आवर्धन = वस्तिवर्धक का आवर्धन × नेत्रिका का आवर्धन
M = (L / fₒ) × (D / fₑ)


Q19. किसी अवतल दर्पण की फोकस दूरी –15 cm है। यदि किसी वस्तु को दर्पण के सामने 10 cm की दूरी पर रखा जाए, तो प्रतिबिंब की स्थिति और प्रकृति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया:
f = –15 cm, u = –10 cm
दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u
⇒ 1/v = 1/f – 1/u = (–1/15) – (–1/10) = (–2 + 3)/30 = 1/30
⇒ v = +30 cm
प्रतिबिंब:
आभासी
सीधा
बड़ा
दर्पण के पीछे बनता है

Q20. किसी उत्तल लेंस की फोकस दूरी 20 cm है। वस्तु को 40 cm दूरी पर रखने पर आवर्धन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
f = +20 cm, u = –40 cm
लेंस सूत्र: 1/f = 1/v – 1/u
⇒ 1/v = 1/f + 1/u = 1/20 – 1/40 = (2 – 1)/40 = 1/40
⇒ v = +40 cm
⇒ m = v/u = 40 / (–40) = –1
प्रतिबिंब: वास्तविक, उलटा, आकार समान

Q21. प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन क्या है? इसका एक दैनिक जीवन में उपयोग बताइए।
उत्तर:
जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होता है, तो प्रकाश पूरी तरह परावर्तित हो जाता है।
उदाहरण: ऑप्टिकल फाइबर संचार प्रणाली

Q22. संयोजित सूक्ष्मदर्शी में नेत्रिका और वस्तिवर्धक के बीच उचित दूरी क्या होनी चाहिए? क्यों?
उत्तर:
L = fₒ + fₑ से थोड़ी अधिक
ताकि वस्तिवर्धक की वास्तविक छवि नेत्रिका के फोकस के भीतर बने और नेत्रिका उसे स्पष्ट प्रतिबिंब में बदल सके।

Q23. एक पतले लेंस के लिए 1/f = (μ – 1)(1/R₁ – 1/R₂) सूत्र का प्रयोग करके बताइए कि यदि दोनों सतहों की वक्रता त्रिज्याएं समान हों तो फोकस दूरी कितनी होगी?
उत्तर:
यदि R₁ = R, R₂ = –R
⇒ 1/f = (μ – 1)(1/R – (–1/R)) = (μ – 1)(2/R)
⇒ f = R / [2(μ – 1)]

🟨 Section C: प्रश्न 24 से 28 (प्रत्येक 3 अंक)
(मध्यम लम्बाई के गणितीय / तर्कसंगत प्रश्न)

Q24. एक अवतल लेंस की फोकस दूरी –12 cm है। वस्तु को लेंस से 8 cm की दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिंब की दूरी और प्रकृति बताइए।
उत्तर:
f = –12 cm, u = –8 cm
1/f = 1/v – 1/u
⇒ 1/v = 1/f + 1/u = –1/12 + (–1/8) = –(5/24)
⇒ v = –24/5 = –4.8 cm
प्रतिबिंब:
आभासी
सीधा
छोटा
लेंस के बाईं ओर बनता है

Q25. एक प्रकाश किरण 60° के आपतन कोण पर काँच (μ = 1.5) से वायु की सतह पर गिरती है। क्या पूर्ण आंतरिक परावर्तन होगा?
उत्तर:
क्रांतिक कोण C:
sin C = 1/μ = 1/1.5 ≈ 0.666
⇒ C ≈ sin⁻¹(0.666) ≈ 41.8°
⇒ चूँकि i = 60° > C
⇒ पूर्ण आंतरिक परावर्तन होगा ✅

Q26. किसी आवर्धक लेंस की फोकस दूरी 5 cm है। इसका अधिकतम कोणीय आवर्धन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
अधिकतम कोणीय आवर्धन (M) = D / f
⇒ M = 25 / 5 = 5
(जहाँ D = 25 cm, सामान्य दृष्टिसीमा)

Q27. किसी संयोजित सूक्ष्मदर्शी में वस्तिवर्धक की फोकस दूरी 2.5 cm और नेत्रिका की फोकस दूरी 5 cm है। दोनों के बीच की दूरी 20 cm है। कुल आवर्धन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
M = (L / fₒ) × (D / fₑ)
= (20 / 2.5) × (25 / 5) = 8 × 5 = 40

Q28. एक वस्तु को उत्तल दर्पण से 10 cm दूरी पर रखा गया है, जिसकी फोकस दूरी 15 cm है। छवि की स्थिति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
f = +15 cm, u = –10 cm
1/f = 1/v + 1/u
⇒ 1/v = 1/f – 1/u = 1/15 – (–1/10) = (2 + 3)/30 = 5/30
⇒ v = +6 cm
⇒ छवि दर्पण के पीछे 6 cm दूरी पर आभासी, सीधी, और छोटी होगी।


Q29.
स्थिति: किसी संयोजित सूक्ष्मदर्शी में वस्तिवर्धक और नेत्रिका की फोकस दूरियाँ क्रमशः 2.0 cm और 5.0 cm हैं। दोनों के बीच की दूरी 18 cm है। वस्तु को वस्तिवर्धक के फोकस से थोड़ी बाहर रखा गया है।
(a) वस्तिवर्धक द्वारा छवि कहाँ बनेगी?
(b) नेत्रिका द्वारा छवि कैसी होगी?
(c) कुल आवर्धन की गणना कीजिए।
(d) अंतिम छवि की प्रकृति बताइए।
उत्तर:
(a) वस्तिवर्धक की छवि, वास्तविक, उलटी और बढ़ी हुई होती है।
(b) नेत्रिका द्वारा छवि, आभासी, सीधी और अत्यधिक बढ़ी हुई होती है।
(c) कुल आवर्धन = (L / fₒ) × (D / fₑ) = (18 / 2) × (25 / 5) = 9 × 5 = 45
(d) अंतिम छवि: आभासी, उलटी, अत्यधिक बढ़ी हुई।

Q30.
स्थिति: किसी 15 cm फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने कोई वस्तु 10 cm की दूरी पर रखी जाती है।
(a) प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात कीजिए।
(b) प्रतिबिंब की प्रकृति बताइए।
(c) प्रतिबिंब की ऊँचाई, यदि वस्तु की ऊँचाई 2 cm है।
(d) इस प्रयोग से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
(a) f = –15 cm, u = –10 cm
1/v = 1/f – 1/u = (–1/15 + 1/10) = (–2 + 3)/30 = 1/30 ⇒ v = +30 cm
(b) प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बढ़ा हुआ है।
(c) m = v/u = 30 / (–10) = –3
⇒ h’ = m × h = –3 × 2 = –6 cm (बड़ी, उलटी छवि)
(d) जब वस्तु फोकस से कम दूरी पर हो, तब अवतल दर्पण आभासी, सीधा और बढ़ी हुई छवि बनाता है।

Q31.
स्थिति: किसी पतले लेंस की फोकस दूरी 10 cm है। वस्तु को लेंस से 15 cm दूर रखा जाता है।
(a) छवि की स्थिति ज्ञात कीजिए।
(b) प्रतिबिंब की प्रकृति बताइए।
(c) यदि वस्तु की ऊँचाई 1.5 cm है, तो छवि की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
(d) यह किस प्रकार का लेंस है?
उत्तर:
(a) f = +10 cm, u = –15 cm
1/v = 1/f + 1/u = 1/10 – 1/15 = (3 – 2)/30 = 1/30 ⇒ v = +30 cm
(b) छवि वास्तविक, उलटी और बढ़ी हुई है।
(c) m = v/u = 30 / (–15) = –2
⇒ h’ = –2 × 1.5 = –3.0 cm
(d) चूँकि f धनात्मक है, यह उत्तल लेंस है।

🟥 Section E: प्रश्न 32 से 35 (प्रत्येक 5 अंक)
(दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न, चरणबद्ध समाधान सहित)

Q32. पतले लेंस के सूत्र की व्युत्पत्ति कीजिए। लेंस निर्माता सूत्र से भी समझाइए कि दोनों सतहों की वक्रता बढ़ने पर फोकस दूरी पर क्या प्रभाव पड़ता है।
उत्तर:
लेंस सूत्र की व्युत्पत्ति:
1/f = 1/v – 1/u
जहाँ v = छवि दूरी, u = वस्तु दूरी, f = फोकस दूरी
लेंस निर्माता सूत्र:
1/f = (μ – 1)(1/R₁ – 1/R₂)
विश्लेषण:
यदि R₁ और R₂ दोनों छोटे होते हैं ⇒ वक्रता अधिक ⇒ 1/f बड़ा ⇒ f छोटा
अर्थात वक्रता बढ़ने पर लेंस की फोकस दूरी कम होती है।

Q33. एक परावर्तक दूरबीन की संरचना समझाइए। इसके प्रमुख अवयवों का कार्य समझाइए। अन्य दूरबीनों की तुलना में इसके लाभ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संरचना:
मुख्य अवतल दर्पण (objective)
द्वितीयक समतल दर्पण
नेत्रिका लेंस
कार्य:
अवतल दर्पण दूर की वस्तुओं से प्रकाश एकत्र करता है
समतल दर्पण प्रकाश को नेत्रिका की ओर परावर्तित करता है
नेत्रिका अंतिम छवि देती है
लाभ:
रंग विवर्तन नहीं होता
छवि तीव्र और स्पष्ट
निर्माण सरल व टिकाऊ
बड़ा उद्घाटन संभव

Q34. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें समझाइए। इसके दो उपयोगों को उदाहरण सहित समझाइए। ऑप्टिकल फाइबर में इसका प्रयोग कैसे होता है?
उत्तर:
शर्तें:
(1) प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाए
(2) आपतन कोण > क्रांतिक कोण
उपयोग:
ऑप्टिकल फाइबर संचार
डायमंड में चमक
ऑप्टिकल फाइबर में प्रयोग:
प्रकाश अंदर कई पूर्ण आंतरिक परावर्तन करता है
न्यूनतम हानि से संकेत भेजा जाता है
डेटा तेजी से और स्पष्टता से पहुँचा सकता है

Q35. संयोजित सूक्ष्मदर्शी की कार्यप्रणाली समझाइए। इसकी कुल आवर्धन क्षमता की व्युत्पत्ति कीजिए। नेत्रिका और वस्तिवर्धक की फोकस दूरी कम होने से क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:
कार्यप्रणाली:
वस्तिवर्धक वस्तु की वास्तविक, उलटी छवि बनाता है
यह छवि नेत्रिका के फोकस के अंदर होती है
नेत्रिका उसे आभासी, सीधी, अत्यधिक बढ़ी हुई छवि में बदलती है
कुल आवर्धन:
M = (L / fₒ) × (D / fₑ)
जहाँ L = दोनों लेंसों के बीच दूरी, D = 25 cm
प्रभाव:
fₒ और fₑ कम होने पर ⇒ M अधिक
⇒ उच्च आवर्धन प्राप्त होता है

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