Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 6: वैधुत चुम्बकीय प्रेरण
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🌟 भाग 1 : विस्तृत व्याख्या (Explanation ~1700 शब्द)
🔵 1. परिचय : वैधुत चुम्बकीय प्रेरण का मूल सिद्धान्त
💡 जब किसी चालक परिपथ में चुम्बकीय फ्लक्स (Φ) में परिवर्तन होता है, तो उसमें एक प्रेरित वैधुत बल (e.m.f.) उत्पन्न होता है, जिसे वैधुत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) कहा जाता है।
✏️ यह घटना सबसे पहले माइकल फैराडे (Michael Faraday) द्वारा 1831 ई. में खोजी गई थी।
उन्होंने पाया कि —
➡️ यदि चुंबक को कुंडली के पास हिलाया जाए या
➡️ कुंडली को स्थिर चुंबक के पास हिलाया जाए,
तो परिपथ में विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
इसी को फैराडे का वैधुत चुम्बकीय प्रेरण का नियम कहा जाता है।
🟢 2. चुम्बकीय फ्लक्स (Magnetic Flux, Φ)
चुम्बकीय फ्लक्स किसी क्षेत्र से होकर गुजरने वाली चुम्बकीय रेखाओं की संख्या को दर्शाता है।
✏️ परिभाषा:
यदि किसी क्षेत्र A पर समान चुंबकीय क्षेत्र B लंबवत न होकर कोण θ पर कार्य कर रहा हो, तो
Φ = B·A·cosθ
जहाँ
➡️ Φ = चुम्बकीय फ्लक्स (वेबर, Wb)
➡️ B = चुम्बकीय क्षेत्र (टेस्ला, T)
➡️ A = क्षेत्रफल (m²)
➡️ θ = क्षेत्र की अभिलंब दिशा और चुंबकीय क्षेत्र के बीच कोण
💡 चुम्बकीय फ्लक्स एक अदिश राशि है।
🔴 3. फैराडे के वैधुत चुम्बकीय प्रेरण के नियम
✳️ (i) फैराडे का प्रथम नियम
जब किसी परिपथ में चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो परिपथ में एक प्रेरित वैधुत बल (e.m.f.) उत्पन्न होता है।
यदि परिपथ पूर्ण है तो प्रेरित धारा प्रवाहित होती है।
✳️ (ii) फैराडे का द्वितीय नियम
प्रेरित वैधुत बल का परिमाण उस दर के बराबर होता है, जिससे चुम्बकीय फ्लक्स बदलता है।
e = − dΦ / dt
यहाँ ऋण चिह्न लेन्ज के नियम को दर्शाता है।
💡 चिह्न “−” का अर्थ: प्रेरित धारा का दिशा इस प्रकार होती है कि वह फ्लक्स के परिवर्तन का विरोध करती है।
🟡 4. लेन्ज का नियम (Lenz’s Law)
💡 लेन्ज का सिद्धान्त:
“प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उत्पन्न करने वाले कारण का विरोध करे।”
उदाहरण:
➡️ यदि किसी कुंडली में चुंबक का उत्तर ध्रुव पास लाया जाए, तो कुंडली का निकटस्थ सिरा भी उत्तर ध्रुव जैसा हो जाएगा, जिससे वह चुंबक को प्रतिकर्षित करेगा।
✏️ गणितीय रूप: e = −dΦ/dt
यह नियम ऊर्जा संरक्षण सिद्धान्त (Law of Conservation of Energy) के अनुरूप है।
🔵 5. प्रेरित विद्युत बल उत्पन्न करने के प्रकार
(i) स्थिर चुंबक व गतिमान कुंडली (Relative Motion)
जब कुंडली को स्थिर चुंबक के पास हिलाया जाता है या चुंबक को कुंडली के पास हिलाया जाता है, तो फ्लक्स बदलता है।
(ii) परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र (Time-Varying Magnetic Field)
जब किसी कुंडली के पास समय के साथ B बदलता है, तो फ्लक्स भी बदलता है, और प्रेरित e.m.f. उत्पन्न होती है।
🟢 6. गतिज प्रेरण (Motional Electromotive Force)
यदि कोई चालक लंबाई l किसी चुंबकीय क्षेत्र B में वेग v से लंबवत चलता है, तो उसमें उत्पन्न प्रेरित e.m.f. होगी —
e = B·l·v
✏️ यदि गति B के समानांतर है, तो e = 0 क्योंकि कोण θ = 0° ⇒ sinθ = 0
💡 दिशा ज्ञात करने के लिए:
“दाएँ हाथ का नियम” — अंगूठा (v), तर्जनी (B), मध्यमा (e का दिशा)।
🔴 7. फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम (Fleming’s Right Hand Rule)
यह नियम प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
➡️ अंगूठा (Thumb) – चालक की गति (v)
➡️ तर्जनी (Forefinger) – चुंबकीय क्षेत्र (B)
➡️ मध्यमा (Middle finger) – प्रेरित धारा (I)
🟡 8. प्रेरकत्व (Inductance)
✳️ (i) स्वप्रेरण (Self Induction)
जब किसी कुंडली में प्रवाहित धारा में परिवर्तन किया जाता है, तो उसी कुंडली में एक प्रेरित e.m.f. उत्पन्न होती है जो मूल परिवर्तन का विरोध करती है।
e = −L (dI/dt)
यहाँ L = स्वप्रेरकत्व (Self Inductance)
💡 इकाई: हेनरी (H)
यदि 1A/s की दर से धारा बदलने पर 1V e.m.f. उत्पन्न हो, तो L = 1H
✳️ (ii) पारस्परिक प्रेरण (Mutual Induction)
जब एक कुंडली में धारा में परिवर्तन किया जाए, तो उसके पास स्थित दूसरी कुंडली में e.m.f. उत्पन्न होती है।
e₂ = −M (dI₁/dt)
यहाँ M = पारस्परिक प्रेरकत्व (Mutual Inductance)
💡 इकाई: हेनरी (H)
🔵 9. प्रेरकत्व पर प्रभाव डालने वाले कारक
✔️ कुंडली के कुंडलों की संख्या (N)
✔️ माध्यम की चुंबकीय पारगम्यता (μ)
✔️ कुंडली का क्षेत्रफल (A)
✔️ कुंडली की लंबाई (l)
स्वप्रेरकत्व: L = (μ N² A) / l
🟢 10. प्रेरकत्व में ऊर्जा
यदि किसी प्रेरक (Inductor) में धारा I प्रवाहित हो रही है, तो उसमें संग्रहित ऊर्जा होती है —
U = (1/2) L I²
यह ऊर्जा चुंबकीय क्षेत्र में संग्रहित होती है।
🔴 11. प्रेरक परिपथ में धारा की वृद्धि और क्षय
जब किसी प्रेरक में बैटरी जोड़ी जाती है —
➡️ धारा धीरे-धीरे बढ़ती है क्योंकि प्रेरित e.m.f. परिवर्तन का विरोध करती है।
➡️ धारा का समयानुसार परिवर्तन:
I = I₀(1 − e^(−Rt/L))
जब बैटरी हटा दी जाए —
➡️ धारा धीरे-धीरे घटती है:
I = I₀ e^(−Rt/L)
यहाँ R = प्रतिरोध, L = प्रेरकत्व, t = समय।
🟡 12. प्रेरण के व्यावहारिक उदाहरण
✔️ बिजली के मीटरों में प्रयोग
✔️ ट्रांसफार्मर का कार्य सिद्धांत
✔️ डायनमो और जनित्र का सिद्धांत
✔️ विद्युत मोटर में ब्रेकिंग प्रभाव
✔️ वोल्टमीटर और गैल्वेनोमीटर के निर्माण में कुंडली का स्वप्रेरण
🔵 13. एड्डी धारा (Eddy Currents)
जब किसी ठोस चालक में चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उसके अंदर घूमने वाली परिपथीय धाराएँ उत्पन्न होती हैं जिन्हें एड्डी धारा कहते हैं।
✏️ ये धारा ऊर्जा हानि का कारण बनती हैं क्योंकि वे गर्मी उत्पन्न करती हैं।
💡 उपयोग:
✔️ विद्युत ब्रेक
✔️ ऊर्जा मीटर
✔️ चुंबकीय मंदक (Magnetic Damping)
✔️ धातु की परख
🟢 14. फूको धारा का नियंत्रण
एड्डी धारा की हानि को घटाने के लिए
➡️ ठोस लौहचुंबकीय कोर को पतली परतों (laminations) में काटा जाता है।
➡️ प्रत्येक परत को इन्सुलेट किया जाता है ताकि धारा का मार्ग लंबा हो जाए और हानि कम हो।
🔴 15. फैराडे की रिंग प्रयोग (Faraday’s Ring Experiment)
एक लोहे की वलयाकार रिंग पर दो कुंडलियाँ लपेटी जाती हैं —
➡️ एक को बैटरी से जोड़ने पर दूसरी में तुरंत गैल्वेनोमीटर विचलन दिखाता है।
➡️ जब स्विच बंद या खोला जाता है, तब ही धारा उत्पन्न होती है।
यह पारस्परिक प्रेरण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
🟡 16. प्रेरक अभिक्रिया (Inductive Reactance)
यदि ए.सी. (AC) धारा किसी प्रेरक से होकर गुजरती है तो वह धारा के परिवर्तन का विरोध करती है।
X_L = ωL = 2πfL
यह प्रेरक का विरोध है जिसे प्रेरक अभिक्रिया कहते हैं।
🔵 17. ऊर्जा संरक्षण के दृष्टिकोण से वैधुत चुम्बकीय प्रेरण
लेन्ज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धान्त को दर्शाता है —
➡️ प्रेरित धारा हमेशा ऐसे दिशा में उत्पन्न होती है जो ऊर्जा संरक्षण सुनिश्चित करे।
➡️ यह उत्पन्न धारा उसी कारण का विरोध करती है जिससे वह उत्पन्न हुई है।
🟢 18. निष्कर्ष : अध्याय का सार
✔️ चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन से e.m.f. उत्पन्न होती है।
✔️ प्रेरण के दो प्रकार — स्वप्रेरण और पारस्परिक प्रेरण।
✔️ e = −dΦ/dt मुख्य सूत्र।
✔️ प्रेरकत्व ऊर्जा का भंडारण करता है।
✔️ एड्डी धारा और उसकी हानियाँ तथा उपयोग व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
🌿 भाग 2 : सारांश (Summary ~300 शब्द)
🔹 वैधुत चुम्बकीय प्रेरण उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें किसी परिपथ में चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन से प्रेरित वैधुत बल उत्पन्न होता है।
🔹 फैराडे का नियम: e = −dΦ/dt
🔹 लेन्ज का नियम बताता है कि प्रेरित धारा हमेशा फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करती है।
🔹 गतिज प्रेरण में e = B·l·v
🔹 स्वप्रेरण में e = −L(dI/dt) और पारस्परिक प्रेरण में e₂ = −M(dI₁/dt)
🔹 प्रेरक में संचित ऊर्जा U = (1/2)L I²
🔹 प्रेरक अभिक्रिया X_L = ωL
🔹 एड्डी धारा ठोस चालकों में उत्पन्न वृत्तीय धाराएँ हैं जो ऊष्मा उत्पन्न करती हैं।
🔹 ए.सी. परिपथों में प्रेरक धारा का विलंब और क्षय e^(−Rt/L) के अनुसार होता है।
🔹 यह पूरा अध्याय चुंबकीय और विद्युत घटनाओं के परस्पर सम्बन्ध को समझाने का मूल आधार है।
🧠 भाग 3 : Quick Recap (त्वरित पुनरावृत्ति)
1️⃣ वैधुत चुम्बकीय प्रेरण का सूत्र: e = −dΦ/dt
2️⃣ स्वप्रेरण: e = −L(dI/dt) | पारस्परिक प्रेरण: e₂ = −M(dI₁/dt)
3️⃣ गतिज प्रेरण: e = B·l·v
4️⃣ प्रेरक में संग्रहित ऊर्जा: U = (1/2)L I²
5️⃣ एड्डी धारा से ऊर्जा हानि को कम करने हेतु लौह कोर को परतदार बनाया जाता है।
6️⃣ लेन्ज का नियम = ऊर्जा संरक्षण का प्रत्यक्ष उदाहरण।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
Question 6.1 चित्र 6.15 (a) से (f) में वर्णित स्थितियों के लिए प्रेरित धारा की दिशा का अनुमान कीजिए।
Answer
🔵 मूल नियम (लैंज का नियम): प्रेरित धारा की दिशा ऐसी होती है कि वह चुंबकीय फ्लक्स में हो रहे परिवर्तन का विरोध करे।
👉 मतलब:
यदि लूप में अंदर की ओर फ्लक्स बढ़ रहा है, तो लूप ऐसी धारा उत्पन्न करेगा जिससे बाहर की ओर अपना चुंबकीय क्षेत्र बने (धारा वामावर्त/anticlockwise दिखेगी जब आप सामने से देखें)।
यदि अंदर की ओर फ्लक्स घट रहा है, तो लूप अंदर की ओर क्षेत्र बनाने के लिए दक्षिणावर्त/clockwise धारा लेगा।
अब चित्र के प्रत्येक भाग के लिए दिशा:
🟢 (a) धारा पथ: q → r → p → q (लूप qrpq के अनुदिश)।
🟢 (b) धारा पथ: p → r → q → p (लूप prqp; भाग (a) के विपरीत)।
🟢 (c) धारा पथ: y → z → x → y (लूप yzxy; कुंजी बंद होते ही जैसा फ्लक्स बदलता है, उसके विरोध में)।
🟢 (d) धारा पथ: z → y → x → z (लूप zyxz; (c) की उलटी स्थिति)।
🟢 (e) धारा पथ: x → r → y → x (लूप xryx; धारा नियामक का समंजन बदलने पर फ्लक्स-परिवर्तन का विरोध)।
🟢 (f) कोई प्रेरित धारा नहीं — लूप से लिंक्ड फ्लक्स में शून्य परिवर्तन (dΦ/dt = 0), इसलिए emf = 0।
🔴 निष्कर्ष: ऊपर दी गई दिशाएँ सीधे लैंज के नियम/फ्लक्स-विरोध तर्क से निकाली गई हैं; जहाँ भी फ्लक्स बढ़ेगा वहाँ लूप विपरीत ध्रुव बनाते हुए वामावर्त, और जहाँ फ्लक्स घटेगा वहाँ दक्षिणावर्त धारा को चुनेगा।
Question 6.2
चित्र 6.16 में वर्णित स्थितियों के लिए लैंज के नियम का उपयोग करते हुए प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात कीजिए —
(a) जब अनियमित आकार का तार वृत्ताकार लूप में बदल रहा हो।
(b) जब एक वृत्ताकार लूप एक सीधी चालक तार में विकसित किया जा रहा हो।
Answer
🔵 सिद्धान्त (लैंज का नियम): प्रेरित धारा की दिशा हमेशा ऐसी होती है कि वह चुंबकीय फ्लक्स में हो रहे परिवर्तन का विरोध करे।
🟢 (a) जब तार का आकार अनियमित से वृत्ताकार हो रहा है:
जैसे ही तार वृत्ताकार रूप लेता है, उसमें से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स बढ़ने लगता है (क्योंकि क्षेत्रफल बढ़ रहा है)।
अतः प्रेरित धारा ऐसी दिशा में प्रवाहित होगी कि वह घटाने वाला (विपरीत) चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करे।
👉 इसलिए धारा की दिशा वामावर्त (anticlockwise) होगी जब क्षेत्र पृष्ठ के भीतर जा रहा हो।
🟢 (b) जब वृत्ताकार लूप एक सीधी तार में विकसित किया जा रहा है:
क्षेत्रफल घटता है, अतः चुंबकीय फ्लक्स घटता है।
लूप अब चुंबकीय क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में धारा प्रवाहित करेगा।
👉 इसलिए धारा की दिशा दक्षिणावर्त (clockwise) होगी जब क्षेत्र पृष्ठ के भीतर जा रहा हो।
🔴 निष्कर्ष:
(a) फ्लक्स बढ़ने पर प्रेरित धारा वामावर्त,
(b) फ्लक्स घटने पर प्रेरित धारा दक्षिणावर्त।
Question 6.3
एक लंबी परिसालिका के प्रत्येक सेंटीमीटर लंबाई में 15 फेरे हैं। उसके अन्दर 2.0 cm² का एक छोटा-सा लूप परिसालिका की अक्ष के लंबवत रखा गया है। यदि परिसालिका में बहने वाली धारा का मान 2.0 A से 4.0 A तक 0.1 s में कर दिया जाए, तो उस परिसालिका में प्रेरित विद्युत वाहक बल कितना होगा?
Answer
🔵 सूत्र: e = −N (dΦ/dt) = −N A (dB/dt)
और B = μ₀ n I, जहाँ n = फेरे/लंबाई।
🟢 दिए गए मान:
n = 15 cm⁻¹ = 1500 m⁻¹,
A = 2.0 cm² = 2.0 × 10⁻⁴ m²,
dI/dt = (4.0 − 2.0)/0.1 = 20 A/s,
μ₀ = 4π × 10⁻⁷ H/m, N = 1।
🧮 गणना:
e = A μ₀ n (dI/dt)
= (2.0 × 10⁻⁴)(4π × 10⁻⁷)(1500)(20)
= 2.0 × 10⁻⁴ × 4π × 10⁻⁷ × 3.0 × 10⁴
= 2.0 × 4π × 10⁻⁷ × 3.0 = 24π × 10⁻⁷ = 7.5 × 10⁻⁶ V
🔴 निष्कर्ष: प्रेरित विद्युत वाहक बल = 7.5 μV (माइक्रोवोल्ट)।
Question 6.4
एक आयताकार लूप जिसकी भुजाएँ 8 cm एवं 2 cm हैं, एक क्षेत्र में रखा हुआ है जहाँ चुंबकीय क्षेत्र 0.3 T का एकसमान क्षेत्र है जो लूप के तल के लम्बवत दिशा में है। यदि इस लूप को क्षेत्र से बाहर खींचा जाता है और यह 0.1 s में पूर्णतः क्षेत्र से बाहर आ जाता है, तो गणना कीजिए —
(a) लूप में प्रेरित औसत विद्युत वाहक बल,
(b) लूप में प्रेरित धारा यदि लूप का प्रतिरोध 1.0 Ω है।
Answer
🔵 सूत्र: e = ΔΦ / Δt = B ΔA / Δt
🟢 दिए गए: B = 0.3 T,
लूप का क्षेत्रफल A = l × b = (8 × 10⁻²)(2 × 10⁻²) = 1.6 × 10⁻³ m²,
Δt = 0.1 s, R = 1 Ω।
🧮 गणना:
(a) e = (0.3 × 1.6 × 10⁻³) / 0.1 = 4.8 × 10⁻³ V = 4.8 mV
(b) I = e / R = 4.8 × 10⁻³ / 1 = 4.8 × 10⁻³ A = 4.8 mA
🔴 निष्कर्ष:
✔️ औसत विद्युत वाहक बल = 4.8 mV
✔️ प्रेरित धारा = 4.8 mA
Question 6.5
1.0 m लंबी धातु की छड़ उसके एक सिरे से जाने वाले अभिलम्बवत् अक्ष के प्रति 400 rad·s⁻¹ की कोणीय आवृत्ति से घूम रही है। छड़ का दूसरा सिरा एक चालक वृत्त से संपर्क में है। अक्ष के अनुदिश समान क्षेत्र 0.5 T का एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उपस्थित है। वृत्तीय बलय तथा अक्ष के बीच स्थापित विद्युत वाहक बल की गणना कीजिए।
Answer
🔵 सिद्धान्त: जब एक धातु छड़ किसी चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है, तो उसके सिरों के बीच प्रेरित विद्युत वाहक बल होता है —
🧮 सूत्र: e = (1/2)·B·ω·l²
🟢 दिए गए:
B = 0.5 T,
ω = 400 rad·s⁻¹,
l = 1.0 m
🧮 गणना:
e = 0.5 × 0.5 × 400 × (1)²
= 0.25 × 400
= 100 V
🔴 निष्कर्ष: वृत्तीय बलय और अक्ष के बीच प्रेरित विद्युत वाहक बल = 100 V।
Question 6.6
पूर्व से पश्चिम दिशा में स्थित एक 10 m लंबी क्षैतिज सीधी तार 0.30 × 10⁻⁴ Wb·m⁻² तीव्रता वाले पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के क्षेत्रीय घटक के लंबवत् 5.0 m·s⁻¹ की चाल से गिर रही है।
(a) तार में प्रेरित विद्युत वाहक बल का तात्कालिक मान क्या होगा?
(b) विद्युत वाहक बल की दिशा क्या होगी?
(c) तार के कौन-से सिरे का विद्युत विभव अधिक होगा?
Answer
🔵 सिद्धान्त:
प्रेरित विद्युत वाहक बल (e) = B·v·l
🟢 दिए गए:
B = 0.30 × 10⁻⁴ T = 3.0 × 10⁻⁵ T,
v = 5.0 m·s⁻¹,
l = 10 m
🧮 गणना:
e = B·v·l = (3.0 × 10⁻⁵)(5)(10) = 1.5 × 10⁻³ V = 1.5 mV
(b) दाएँ हाथ का नियम:
क्षेत्रीय घटक (B) नीचे की ओर,
गति पश्चिम की ओर,
इसलिए धारा उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होगी।
(c) दाएँ हाथ के नियम से उत्तर दिशा वाला सिरा उच्च विभव पर होगा।
🔴 निष्कर्ष:
(a) e = 1.5 mV
(b) धारा की दिशा — उत्तर से दक्षिण
(c) उत्तर सिरा उच्च विभव पर।
Question 6.7
किसी परिपथ में 0.1 s में धारा 5.0 A से 0.0 A तक गिरती है। यदि औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल 200 V है, तो परिपथ का स्वप्रेरकत्व ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 सिद्धान्त: स्वप्रेरकत्व L = e·Δt / ΔI
🟢 दिए गए:
e = 200 V,
Δt = 0.1 s,
ΔI = 5.0 A
🧮 गणना:
L = (200 × 0.1) / 5 = 20 / 5 = 4 H
🔴 निष्कर्ष: परिपथ का स्वप्रेरकत्व 4 हेनरी है।
Question 6.8
पास-पास रखी कुंडलियों के एक युग्म का आपसी प्रेरकत्व 1.5 H है। यदि एक कुंडली में 0.5 s में धारा 0 से 20 A परिवर्तित होती है, तो दूसरी कुंडली में उत्पन्न विद्युत वाहक बल कितना परिवर्तित होगा?
Answer
🔵 सिद्धान्त: आपसी प्रेरकत्व के लिए e = M·(ΔI/Δt)
🟢 दिए गए:
M = 1.5 H,
ΔI = 20 A,
Δt = 0.5 s
🧮 गणना:
e = 1.5 × (20 / 0.5) = 1.5 × 40 = 60 V
🔴 निष्कर्ष: दूसरी कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल = 60 V।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
⚡ Section A : बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
Question 1. जब किसी कुंडली में चुम्बकीय फ्लक्स बदलता है, तब क्या उत्पन्न होता है?
🔵 (A) स्थिर धारा
🟢 (B) प्रेरित वैधुत बल
🟠 (C) ऊष्मा
🔴 (D) स्थायी चुंबकत्व
Answer: (B) प्रेरित वैधुत बल
Question 2. फैराडे के वैधुत चुम्बकीय प्रेरण का सूत्र है —
🔵 (A) e = dΦ/dt
🟢 (B) e = −dΦ/dt
🟠 (C) e = I·R
🔴 (D) e = −IR
Answer: (B) e = −dΦ/dt
Question 3. लेन्ज का नियम किस सिद्धान्त पर आधारित है?
🔵 (A) ऊर्जा संरक्षण
🟢 (B) द्रव्यमान संरक्षण
🟠 (C) आवेश संरक्षण
🔴 (D) संवेग संरक्षण
Answer: (A) ऊर्जा संरक्षण
Question 4. गतिज प्रेरण में उत्पन्न प्रेरित वैधुत बल का सूत्र है —
🔵 (A) e = B·l·v
🟢 (B) e = B/l·v
🟠 (C) e = B + v
🔴 (D) e = B·l/v
Answer: (A) e = B·l·v
Question 5. चुंबकीय फ्लक्स (Φ) का SI मात्रक है —
🔵 (A) वेबर
🟢 (B) टेस्ला
🟠 (C) एम्पीयर
🔴 (D) न्यूटन
Answer: (A) वेबर
Question 6. जब किसी कुंडली में धारा बढ़ाई जाती है, तो उसमें उत्पन्न e.m.f. —
🔵 (A) उसी दिशा में
🟢 (B) धारा के विपरीत दिशा में
🟠 (C) स्थिर रहती है
🔴 (D) शून्य
Answer: (B) धारा के विपरीत दिशा में
Question 7. किसी कुंडली का स्वप्रेरकत्व बढ़ाने के लिए क्या किया जाए?
🔵 (A) कुंडलों की संख्या घटाई जाए
🟢 (B) वायु माध्यम रखा जाए
🟠 (C) कुंडलों की संख्या बढ़ाई जाए
🔴 (D) कुंडली का क्षेत्रफल घटाया जाए
Answer: (C) कुंडलों की संख्या बढ़ाई जाए
Question 8. प्रेरकत्व (L) का SI मात्रक है —
🔵 (A) टेस्ला
🟢 (B) हेनरी
🟠 (C) वेबर
🔴 (D) वोल्ट
Answer: (B) हेनरी
Question 9. पारस्परिक प्रेरण का सूत्र है —
🔵 (A) e₂ = −M(dI₁/dt)
🟢 (B) e₁ = −L(dI₂/dt)
🟠 (C) e₂ = −L(dΦ/dt)
🔴 (D) e₂ = I·R
Answer: (A) e₂ = −M(dI₁/dt)
Question 10. फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम बताता है —
🔵 (A) बल की दिशा
🟢 (B) प्रेरित धारा की दिशा
🟠 (C) चुंबकीय क्षेत्र की दिशा
🔴 (D) यांत्रिक ऊर्जा की दिशा
Answer: (B) प्रेरित धारा की दिशा
Question 11. प्रेरक में संचित ऊर्जा का सूत्र है —
🔵 (A) U = (1/2)L I²
🟢 (B) U = L I
🟠 (C) U = L² I
🔴 (D) U = L/I
Answer: (A) U = (1/2)L I²
Question 12. यदि किसी चालक में e = 2V, B = 0.5T और l = 0.5m है, तो वेग v होगा —
🔵 (A) 2 m/s
🟢 (B) 4 m/s
🟠 (C) 6 m/s
🔴 (D) 8 m/s
Answer: (B) 4 m/s
Question 13. किसी प्रेरक परिपथ में धारा की वृद्धि का समीकरण है —
🔵 (A) I = I₀ e^(−Rt/L)
🟢 (B) I = I₀(1 − e^(−Rt/L))
🟠 (C) I = I₀(1 + e^(−Rt/L))
🔴 (D) I = I₀ e^(Rt/L)
Answer: (B) I = I₀(1 − e^(−Rt/L))
Question 14. किसी प्रेरक परिपथ में धारा का क्षय होता है —
🔵 (A) I = I₀ e^(−Rt/L)
🟢 (B) I = I₀(1 − e^(−Rt/L))
🟠 (C) I = I₀ e^(Rt/L)
🔴 (D) I = I₀(1 + e^(−Rt/L))
Answer: (A) I = I₀ e^(−Rt/L)
Question 15. एड्डी धाराएँ उत्पन्न होती हैं —
🔵 (A) चालक के अंदर
🟢 (B) कुंडली के बाहर
🟠 (C) धारा स्रोत में
🔴 (D) बैटरी में
Answer: (A) चालक के अंदर
Question 16. एड्डी धाराओं से उत्पन्न ऊष्मा को कम करने के लिए —
🔵 (A) चालक को ठंडा किया जाता है
🟢 (B) ठोस लौह को पतली परतों में काटा जाता है
🟠 (C) धारा बढ़ाई जाती है
🔴 (D) क्षेत्र घटाया जाता है
Answer: (B) ठोस लौह को पतली परतों में काटा जाता है
Question 17. स्वप्रेरण की दिशा निर्धारित होती है —
🔵 (A) लेन्ज के नियम से
🟢 (B) ओम के नियम से
🟠 (C) फैराडे के नियम से
🔴 (D) किरचॉफ के नियम से
Answer: (A) लेन्ज के नियम से
Question 18. प्रेरक अभिक्रिया (Inductive Reactance) का सूत्र है —
🔵 (A) X_L = ωL = 2πfL
🟢 (B) X_L = L/f
🟠 (C) X_L = f/L
🔴 (D) X_L = L²/f
Answer: (A) X_L = ωL = 2πfL
⚡ Section B : बहुत लघु / लघु उत्तरीय प्रश्न (Q19–Q23)
Question 19. वैधुत चुम्बकीय प्रेरण से आप क्या समझते हैं?
Answer:
➡️ जब किसी चालक परिपथ में चुम्बकीय फ्लक्स (Φ) में परिवर्तन होता है, तब उसमें एक प्रेरित वैधुत बल (e.m.f.) उत्पन्न होता है।
➡️ यही घटना वैधुत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) कहलाती है।
➡️ इसका सूत्र है: e = −dΦ/dt, जहाँ ऋण चिह्न लेन्ज के नियम का प्रतीक है।
Question 20. चुम्बकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) का सूत्र लिखिए और प्रत्येक राशियों का अर्थ बताइए।
Answer:
✔️ सूत्र: Φ = B·A·cosθ
जहाँ —
🔹 B = चुम्बकीय क्षेत्र (Tesla)
🔹 A = क्षेत्रफल (m²)
🔹 θ = चुंबकीय क्षेत्र और अभिलंब के बीच कोण
➡️ चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक वेबर (Weber) है।
Question 21. फैराडे के वैधुत चुम्बकीय प्रेरण के दो नियम लिखिए।
Answer:
🔵 पहला नियम: जब किसी परिपथ में चुम्बकीय फ्लक्स बदलता है, तो उसमें एक प्रेरित e.m.f. उत्पन्न होती है।
🟢 दूसरा नियम: प्रेरित e.m.f. का परिमाण फ्लक्स परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
➡️ गणितीय रूप: e = −dΦ/dt
Question 22. लेन्ज का नियम क्या है? इसका भौतिक महत्व बताइए।
Answer:
💡 लेन्ज का नियम: प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उत्पन्न करने वाले कारण का विरोध करे।
✔️ भौतिक महत्व: यह ऊर्जा संरक्षण के सिद्धान्त के अनुरूप है, क्योंकि प्रेरित धारा द्वारा किया गया कार्य सदैव मूल परिवर्तन का प्रतिरोध करता है।
Question 23. प्रेरकत्व (Inductance) की SI इकाई क्या है और इसे परिभाषित कीजिए।
Answer:
🔹 SI इकाई = हेनरी (Henry)
✏️ परिभाषा: यदि किसी कुंडली में 1 A/s की दर से धारा बदलने पर 1 V का प्रेरित e.m.f. उत्पन्न होता है, तो उस कुंडली का प्रेरकत्व 1 हेनरी होता है।
➡️ e = −L(dI/dt)
⚙️ Section C : मध्यम उत्तरीय प्रश्न (Q24–Q27)
Question 24. स्वप्रेरण (Self Induction) और पारस्परिक प्रेरण (Mutual Induction) में अंतर बताइए।
Answer:
🔵 स्वप्रेरण (Self Induction):
➡️ जब किसी कुंडली में प्रवाहित धारा बदलती है, तो उसी कुंडली में प्रेरित e.m.f. उत्पन्न होती है।
➡️ सूत्र: e = −L(dI/dt)
🟢 पारस्परिक प्रेरण (Mutual Induction):
➡️ जब एक कुंडली में धारा बदलती है, तो निकट स्थित दूसरी कुंडली में प्रेरित e.m.f. उत्पन्न होती है।
➡️ सूत्र: e₂ = −M(dI₁/dt)
💡 मुख्य अंतर: स्वप्रेरण एक ही कुंडली की विशेषता है जबकि पारस्परिक प्रेरण दो कुंडलियों की पारस्परिक क्रिया पर निर्भर करता है।
Question 25. गतिज प्रेरण (Motional e.m.f.) को परिभाषित कीजिए और उसका सूत्र दीजिए।
Answer:
➡️ जब कोई चालक लंबाई l किसी समान चुम्बकीय क्षेत्र B में वेग v से लंबवत चलता है, तो उसमें प्रेरित वैधुत बल उत्पन्न होता है।
✏️ सूत्र: e = B·l·v
✔️ यदि चालक की गति क्षेत्र के समानांतर है, तो e = 0, क्योंकि sinθ = 0.
💡 दिशा ज्ञात करने हेतु: फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम प्रयोग किया जाता है।
Question 26. किसी प्रेरक परिपथ में धारा की वृद्धि का समीकरण सिद्ध कीजिए।
Answer:
धारा बढ़ने पर प्रेरित e.m.f. विरोध करती है, अतः:
E = L(dI/dt) + IR
प्रारंभिक शर्त: t = 0 ⇒ I = 0
समाकलन करने पर:
I = I₀(1 − e^(−Rt/L))
जहाँ I₀ = E/R अधिकतम धारा है।
Question 27. एड्डी धाराएँ क्या हैं? इनके लाभ और हानि बताइए।
Answer:
➡️ जब किसी ठोस चालक में चुम्बकीय फ्लक्स बदलता है, तो उसमें परिपथीय धाराएँ उत्पन्न होती हैं जिन्हें एड्डी धाराएँ (Eddy Currents) कहते हैं।
💡 हानियाँ:
✔️ ऊष्मा उत्पन्न कर ऊर्जा की हानि करती हैं।
🌿 लाभ:
✔️ विद्युत ब्रेक, मीटर, और चुंबकीय मंदक में प्रयोग होती हैं।
✔️ इनके प्रभाव को घटाने हेतु लौह कोर को परतदार बनाया जाता है।
⚡ Section D : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Q28–Q31)
Question 28. फैराडे के वैधुत चुम्बकीय प्रेरण के नियमों को समझाइए।
Answer:
🔵 फैराडे का प्रथम नियम:
➡️ जब किसी परिपथ में चुम्बकीय फ्लक्स (Φ) में परिवर्तन होता है, तो उसमें एक प्रेरित वैधुत बल (e.m.f.) उत्पन्न होता है।
➡️ यदि परिपथ बंद है तो प्रेरित धारा प्रवाहित होती है।
🟢 फैराडे का द्वितीय नियम:
➡️ प्रेरित e.m.f. का परिमाण उस दर के समानुपाती होता है, जिससे फ्लक्स में परिवर्तन होता है।
✏️ सूत्र: e = −dΦ/dt
💡 ऋण चिह्न का अर्थ: यह लेन्ज के नियम का प्रतीक है, जो बताता है कि प्रेरित धारा सदैव फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करती है।
🌿 महत्त्व:
✔️ यही सिद्धान्त विद्युत जनित्र (Generator) और ट्रांसफार्मर के कार्य का आधार है।
Question 29. प्रेरक (Inductor) में संचित ऊर्जा का व्यंजक सिद्ध कीजिए।
Answer:
मान लीजिए किसी प्रेरक में धारा I प्रवाहित हो रही है।
जब धारा बढ़ती है तो उसमें प्रेरित e.m.f. उत्पन्न होती है:
e = L(dI/dt)
प्रेरित e.m.f. के विरुद्ध धारा स्थापित करने हेतु किया गया कार्य:
dW = e·I·dt = L I (dI/dt)·dt = L I·dI
अब कुल कार्य (0 से I तक):
W = ∫₀ᴵ L I·dI = (1/2) L I²
💡 यही कार्य प्रेरक में संग्रहित ऊर्जा के रूप में संग्रहित होता है।
✔️ अतः:
U = (1/2) L I²
➡️ यह ऊर्जा चुंबकीय क्षेत्र में संग्रहित रहती है।
Question 30. लेन्ज के नियम को समझाइए और सिद्ध कीजिए कि यह ऊर्जा संरक्षण सिद्धान्त के अनुरूप है।
Answer:
💡 लेन्ज का नियम: प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उत्पन्न करने वाले कारण का विरोध करे।
🌿 व्याख्या:
यदि किसी कुंडली के पास चुंबक का उत्तर ध्रुव पास लाया जाए, तो कुंडली का पास वाला सिरा भी उत्तर ध्रुव बन जाता है, जिससे वह चुंबक को प्रतिकर्षित करता है।
✏️ सिद्धान्तिक दृष्टिकोण से:
➡️ यह विरोधात्मक क्रिया ऊर्जा संरक्षण को सुनिश्चित करती है।
➡️ प्रेरित धारा द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र बाहरी कार्य के विरुद्ध बल उत्पन्न करता है, जिससे कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।
✔️ निष्कर्ष:
लेन्ज का नियम सीधे-सीधे ऊर्जा संरक्षण का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
Question 31. एड्डी धाराओं (Eddy Currents) की व्याख्या कीजिए और उनके दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
Answer:
➡️ जब किसी ठोस चालक में चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो चालक के भीतर वृत्ताकार धारा उत्पन्न होती है जिन्हें एड्डी धाराएँ कहते हैं।
➡️ ये धारा ऊष्मा उत्पन्न करती हैं जिससे ऊर्जा की हानि होती है।
💡 उदाहरण:
✔️ विद्युत ब्रेकों में,
✔️ ऊर्जा मीटरों में,
✔️ चुंबकीय मंदक में,
✔️ धातुओं की गुणवत्ता जाँच में।
🌿 हानि घटाने हेतु: ठोस लौह कोर को पतली इन्सुलेट परतों (laminations) में काटा जाता है।
🧠 Section E : अनुप्रयोग / केस आधारित प्रश्न (Q32–Q33)
Question 32. एक चालक लंबाई l = 0.5 m, चुंबकीय क्षेत्र B = 0.4 T में वेग v = 6 m/s से लंबवत गति करता है।
प्रेरित वैधुत बल ज्ञात कीजिए।
Answer:
सूत्र: e = B·l·v
अब,
e = 0.4 × 0.5 × 6
➡️ e = 1.2 V
✔️ अतः प्रेरित वैधुत बल = 1.2 वोल्ट
💡 दिशा ज्ञात करने हेतु: फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम प्रयोग किया जाएगा।
Question 33. किसी परिपथ में L = 2 H और R = 10 Ω है। बैटरी वोल्टेज E = 20 V है।
(i) धारा का समीकरण लिखिए।
(ii) अधिकतम धारा एवं समय नियतांक ज्ञात कीजिए।
Answer:
(i) प्रेरक परिपथ में धारा का समीकरण:
I = I₀(1 − e^(−Rt/L))
(ii) अधिकतम धारा:
I₀ = E / R = 20 / 10 = 2 A
समय नियतांक (τ):
τ = L / R = 2 / 10 = 0.2 s
✔️ अतः धारा का समीकरण:
I = 2(1 − e^(−t/0.2)) A
💡 यह दर्शाता है कि प्रेरक में धारा धीरे-धीरे बढ़ती है और समय के साथ 2 A तक पहुँचती है।
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