Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 4: गतिमान आवेश तथा चुंबकत्व
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔵 1. परिचय
जब कोई आवेश गतिमान होता है, तो वह केवल विद्युत क्षेत्र ही नहीं बल्कि चुंबकीय क्षेत्र भी उत्पन्न करता है। यह अध्याय बताता है कि गतिमान आवेश, चुंबकीय बल, तथा चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे से कैसे संबंधित हैं।
💡 सार:
➡️ स्थिर आवेश → केवल विद्युत क्षेत्र।
➡️ गतिमान आवेश → विद्युत तथा चुंबकीय दोनों क्षेत्र उत्पन्न करता है।
🟢 2. चुंबकीय बल (Magnetic Force on Moving Charge)
यदि कोई आवेश q किसी चुंबकीय क्षेत्र B में वेग v से गति करता है, तो उस पर लगने वाला बल —
F = q(v × B)
बल की दिशा दाएँ-हाथ के नियम (Right-hand Rule) से ज्ञात होती है।
🔴 3. चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति
यदि कोई आवेश समान चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करे, तो वह वृत्तीय पथ पर गति करता है —
qvB = mv²/r
➡️ r = mv / qB
💡 चाल नहीं बदलती, केवल दिशा बदलती है।
🟡 4. चुंबकीय बल से किया गया कार्य
बल चाल के लंबवत होने के कारण कार्य शून्य होता है।
W = 0
🔵 5. तिरछे प्रवेश पर कुंडलाकार गति (Helical Motion)
यदि कोई आवेशित कण तिरछा प्रवेश करे, तो उसका वेग दो घटकों में बँट जाता है —
वृत्तीय घटक तथा अक्षीय घटक।
इससे पथ कुंडलाकार (Helical) बनता है।
पिच = (2πmv∥)/(qB)
🟢 6. धारा वाहक चालक पर चुंबकीय बल
यदि L लंबाई के चालक में I धारा हो और वह चुंबकीय क्षेत्र B में कोण θ पर रखा हो —
F = BILsinθ
यदि θ = 90°, तो F अधिकतम होता है।
🔴 7. समानांतर धाराओं के बीच बल
दो समानांतर धाराओं के बीच प्रति-लंबाई बल —
F/L = μ₀I₁I₂ / (2πd)
➡️ समान दिशा → आकर्षण
➡️ विपरीत दिशा → विकर्षण
🟡 8. चुंबकीय क्षेत्र की इकाई और विमा
✔️ SI इकाई: टेस्ला (T)
✔️ CGS इकाई: गॉस (1T = 10⁴G)
✔️ आयाम: [M¹L⁰T⁻²A⁻¹]
🔵 9. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ
वे काल्पनिक रेखाएँ जो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा व तीव्रता दिखाती हैं।
✔️ बंद वक्र होती हैं।
✔️ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
✔️ सघनता क्षेत्र की तीव्रता दर्शाती है।
🟢 10. बायोट-सावार्ट नियम (Biot–Savart Law)
धारा I के सूक्ष्म तत्व dl द्वारा किसी बिंदु पर उत्पन्न क्षेत्र —
dB = (μ₀/4π)(I dl × r̂)/r²
पूर्ण क्षेत्र, B = ∫dB
🔴 11. वृत्तीय चालक लूप के केंद्र पर क्षेत्र
B = (μ₀I)/(2r)
दिशा दाएँ-हाथ के अंगूठा नियम से मिलती है।
🟡 12. दीर्घ कुंडल (Solenoid का हिन्दी रूप)
एक लंबा कसकर लपेटा हुआ तार जिससे समान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
B = μ₀nI
(n = प्रति इकाई लंबाई कुंडल संख्या)
💡 दीर्घ कुंडल के भीतर क्षेत्र समान रहता है और बाहर नगण्य।
🟢 13. वृत्ताकार कुंडल (Toroid)
यह एक गोलाकार कुंडल है जिसमें धारा प्रवाहित होती है।
B = (μ₀NI)/(2πr)
➡️ क्षेत्र केवल अंदर उपस्थित, बाहर शून्य।
🔵 14. धारा-लूप पर चुंबकीय बलाघूर्ण
यदि क्षेत्रफल A वाले लूप में धारा I हो और चुंबकीय क्षेत्र B में θ कोण पर रखा हो —
τ = BIA sinθ
वेक्टर रूप: τ = m × B, जहाँ m = NIA।
🔴 15. विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र का संबंध
स्थिर आवेश → केवल विद्युत क्षेत्र।
गतिमान आवेश → चुंबकीय क्षेत्र भी।
दोनों परस्पर जुड़े हुए हैं।
🟡 16. कण त्वरक यंत्र (Cyclotron का हिन्दी रूप)
यह उपकरण आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा देता है।
सिद्धांत:
गतिमान आवेश चुंबकीय क्षेत्र में वृत्तीय गति करता है तथा वैकल्पिक विद्युत क्षेत्र उसकी चाल बढ़ाता है।
आवृत्ति:
f = qB / (2πm)
💡 प्रयोग: प्रोटॉन, ड्यूट्रॉन, α-कण को त्वरित करने हेतु।
🟢 17. चुंबकीय क्षेत्र के उपयोग
✔️ विद्युत मोटर
✔️ जनित्र (Generator)
✔️ गैल्वेनोमीटर
✔️ विद्युतमापी (अमीटर, वोल्टमीटर)
✔️ कण त्वरक यंत्र
🟡 18. गैल्वेनोमीटर
यह उपकरण सूक्ष्म धारा मापने हेतु प्रयोग होता है।
बलाघूर्ण τ = NIBA sinθ
धारा बढ़ने पर बलाघूर्ण तथा सूई का झुकाव बढ़ता है।
🔵 19. इकाइयाँ एवं विमाएँ
चुंबकीय प्रेरण (B): टेस्ला (T)
चुंबकीय बल (F): न्यूटन (N)
चुंबकीय आघूर्ण (m): A·m²
विमीय सूत्र: [M¹L⁰T⁻²A⁻¹]
🟢 20. दैनिक जीवन में प्रयोग
✔️ विद्युत मोटर: चुंबकीय बल से यांत्रिक कार्य।
✔️ लाउडस्पीकर: धारा से कंपन और ध्वनि।
✔️ एमआरआई यंत्र: शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र से शरीर की छवि बनाना।
✳️ सारांश (~300 शब्द)
➡️ गतिमान आवेश चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
➡️ बल का परिमाण F = qvBsinθ।
➡️ वृत्तीय गति की त्रिज्या r = mv/qB।
➡️ चालक पर बल F = BILsinθ।
➡️ समानांतर धाराएँ आकर्षित या विकर्षित करती हैं (F/L = μ₀I₁I₂/2πd)।
➡️ बायोट-सावार्ट नियम: dB = (μ₀/4π)(Idl×r̂)/r²।
➡️ वृत्तीय लूप पर क्षेत्र B = μ₀I/2r।
➡️ दीर्घ कुंडल में क्षेत्र B = μ₀nI।
➡️ बलाघूर्ण τ = BIA sinθ।
➡️ कण त्वरक यंत्र की आवृत्ति f = qB/2πm।
➡️ चुंबकीय बल कार्य नहीं करता, केवल दिशा बदलता है।
📝 Quick Recap (संक्षिप्त पुनरावलोकन)
🔹 गतिमान आवेश → चुंबकीय क्षेत्र।
🔹 बल: F = q(v × B)
🔹 त्रिज्या: r = mv/qB
🔹 चालक पर बल: F = BILsinθ
🔹 दीर्घ कुंडल में क्षेत्र: B = μ₀nI
🔹 कण त्वरक यंत्र की आवृत्ति: f = qB/2πm
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
Question 4.1 तार की एक वृत्ताकार कुंडली में 100 फेरे हैं, प्रत्येक की त्रिज्या 8.0 cm है और इनमें 0.40 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है?
Answer
🔵 सूत्र: B = μ₀ N I / (2 R)
🟢 दिए गए: N = 100, R = 0.08 m, I = 0.40 A, μ₀ = 4π × 10⁻⁷ H m⁻¹
🟡 गणना:
B = (4π × 10⁻⁷ × 100 × 0.40) / (2 × 0.08)
= (160π × 10⁻⁷) / 0.16 = 1000π × 10⁻⁷ = π × 10⁻⁴ T
= 3.14 × 10⁻⁴ T
🔴 निष्कर्ष: केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र 3.14 × 10⁻⁴ T (पृष्ठ के लम्बवत, धारा-दिशा पर दाहिने हाथ के नियम से दिशा निर्धारित)।
Question 4.2 एक लम्बी, सीधी तार में 35 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। तार से 20 cm दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है?
Answer
🔵 सूत्र (लम्बी सीधी धारा): B = μ₀ I / (2π r)
🟢 I = 35 A, r = 0.20 m
🟡 गणना:
B = (4π × 10⁻⁷ × 35) / (2π × 0.20)
= (140π × 10⁻⁷) / (0.4π) = 350 × 10⁻⁷ = 3.5 × 10⁻⁵ T
🔴 दिशा: दाहिने हाथ के नियम से — तार के चारों ओर स्पर्शरेखीय।
Question 4.3 क्षैतिज तल में रखे एक लम्बे सीधे तार में 50 A विद्युत धारा उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित हो रही है। तार के पूर्व में 2.5 m दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र B का परिमाण और उसकी दिशा ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 परिमाण के लिए: B = μ₀ I / (2π r)
🟢 I = 50 A, r = 2.5 m
🟡 गणना:
B = (4π × 10⁻⁷ × 50) / (2π × 2.5)
= (200π × 10⁻⁷) / (5π) = 40 × 10⁻⁷ = 4.0 × 10⁻⁶ T
🔴 दिशा: दाहिने हाथ का नियम— धारा उत्तर → दक्षिण है, अतः तार के पूर्व बिंदु पर क्षेत्र ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर (पृष्ठ से बाहर) होगा।
Question 4.4 व्यायामशाला (जिम्नेशियम) के ऊपर बिजली के तार में 90 A विद्युत धारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। तार के 1.5 m नीचे विद्युत धारा के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण और दिशा क्या है?
Answer
🔵 परिमाण: B = μ₀ I / (2π r)
🟢 I = 90 A, r = 1.5 m
🟡 गणना:
B = (4π × 10⁻⁷ × 90) / (2π × 1.5)
= (360π × 10⁻⁷) / (3π) = 120 × 10⁻⁷ = 1.2 × 10⁻⁵ T
🔴 दिशा: धारा पूर्व → पश्चिम (−x) और बिंदु तार के नीचे (−z) है; I × r के अनुसार क्षेत्र दक्षिण दिशा की ओर होगा।
Question 4.5 एक तार जिसमें 8 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, 0.15 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र से 30° का कोण बनाते हुए रखा है। इसकी एकक लंबाई पर लगने वाले बल का परिमाण और दिशा क्या है?
Answer
🔵 प्रति-एकक-लंबाई बल: f = I B sinθ
🟢 I = 8 A, B = 0.15 T, θ = 30° (sinθ = 0.5)
🟡 गणना: f = 8 × 0.15 × 0.5 = 0.60 N m⁻¹
🔴 दिशा: I × B की दिशा— धारा और क्षेत्र दोनों के लम्बवत (फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम से पृष्ठ के भीतर/बाहर का संकेत निर्धारित)।
Question 4.6 एक 3.0 cm लम्बा तार जिसमें 10 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है, एक एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लम्बवत रखा गया है। यदि तार पर कार्य करने वाले बल का मान 0.27 N है, तो चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 सूत्र: F = B I L sin90° = B I L
🟢 L = 3.0 cm = 0.030 m, I = 10 A, F = 0.27 N
🟡 गणना: B = F / (I L) = 0.27 / (10 × 0.030) = 0.27 / 0.30 = 0.90 T
🔴 निष्कर्ष: चुंबकीय क्षेत्र 0.90 T।
Question 4.7 एक–दूसरे से 4.0 cm की दूरी पर रखे दो, लम्बे, सीधे, समान्तर तार A एवं B में क्रमशः 8.0 A और 5.0 A की विद्युत धाराएँ एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। तार A के 10 cm खंड पर लगने वाले बल का परिमाण और उसकी दिशा ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 दो समांतर धाराओं के बीच प्रति-एकक-लंबाई बल: (F/L) = μ₀ I₁ I₂ / (2π d)
🟢 I₁ = 8.0 A, I₂ = 5.0 A, d = 0.040 m, L = 0.10 m
🟡 गणना:
F = [ (4π × 10⁻⁷ × 8 × 5) / (2π × 0.040) ] × 0.10
= [ (160π × 10⁻⁷) / (0.08π) ] × 0.10
= (2000 × 10⁻⁷) × 0.10 = 2.0 × 10⁻⁵ N
🔴 दिशा: धाराएँ एक ही दिशा में हैं ⇒ आकर्षण। अतः तार A पर बल तार B की ओर।
Question 4.8 पास–पास फेरों वाली एक परिसालिका 80 cm लंबी है और इसमें 5 सर्तें हैं जिनमें से प्रत्येक में 400 फेरे हैं। परिसालिका का व्यास 1.8 cm है। यदि इसमें 8.0 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है तो परिसालिका के भीतर केंद्र के पास चुंबकीय क्षेत्र B के परिमाण परिकलित कीजिए।
Answer
🔵 सिद्धान्त (लंबी, सघन परिसालिका): B = μ₀ n I, जहाँ n = N/L (प्रति m फेरे)
🟢 कुल फेरे: N = 5 × 400 = 2000
🟡 लंबाई: L = 80 cm = 0.80 m ⇒ n = N/L = 2000 / 0.80 = 2500 m⁻¹
🔵 धारा: I = 8.0 A, μ₀ = 4π × 10⁻⁷ H m⁻¹
🧮 गणना:
B = μ₀ n I = (4π × 10⁻⁷) × (2500) × (8.0)
= 4π × 10⁻⁷ × 20000
= 80000π × 10⁻⁷ T
= 8π × 10⁻³ T
= 2.51 × 10⁻² T (लगभग 0.025 T)
🔴 निष्कर्ष: परिसालिका के भीतर केंद्र के पास चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ≈ 2.5 × 10⁻² T है (दिशा दाहिने-हाथ के नियम से परिसालिका की धुरी के अनुदिश)।
Question 4.9
एक वर्गाकार कुंडली जिसका प्रत्येक भुजा 10 cm है, में 20 फेरे हैं और उसमें 12 A विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। कुंडली ऊर्ध्वाधर लटकी हुई है और इसके तल पर क्षैतिज रूप में 0.80 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र की दिशा से 30° का कोण बनाते हुए एक बलाघूर्ण उत्पन्न होता है। कुंडली पर लगने वाले बलाघूर्ण का परिमाण क्या है?
Answer
🔵 सूत्र: τ = N I A B sinθ
🟢 N = 20, I = 12 A, B = 0.80 T, θ = 30°, भुजा = 10 cm = 0.10 m ⇒ A = (0.10)² = 0.01 m²
🧮 गणना:
τ = 20 × 12 × 0.01 × 0.80 × sin30°
= 20 × 12 × 0.01 × 0.80 × 0.5
= 20 × 12 × 0.004 = 0.96 N·m
🔴 निष्कर्ष: बलाघूर्ण का परिमाण 0.96 N·m।
Question 4.10
दो चल कुंडली गैल्वेनोमीटर मीटरों M₁ एवं M₂ के विवर नीचे दिए गए हैं:
R₁ = 10 Ω, N₁ = 30, A₁ = 3.6 × 10⁻³ m², B₁ = 0.25 T
R₂ = 14 Ω, N₂ = 42, A₂ = 1.8 × 10⁻³ m², B₂ = 0.50 T
(दोनों मीटरों के लिए स्प्रिंग नियतांक समान है।)
(a) M₂ एवं M₁ की धारा-संवेदनशीलताएँ ज्ञात कीजिए।
(b) M₂ एवं M₁ की वोल्टता-संवेदनशीलताओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 (a) धारा-संवेदनशीलता S₁ = N₁ B₁ A₁ / k, S₂ = N₂ B₂ A₂ / k
🧮 अनुपात S₂/S₁ = (N₂ B₂ A₂) / (N₁ B₁ A₁)
= (42 × 0.50 × 1.8 × 10⁻³) / (30 × 0.25 × 3.6 × 10⁻³)
= (37.8 × 10⁻³) / (27.0 × 10⁻³) = 1.4
🔴 निष्कर्ष: S₂/S₁ = 1.4 ⇒ M₂, M₁ की अपेक्षा 1.4 गुना अधिक धारा-संवेदनशील है।
🟢 (b) वोल्टता-संवेदनशीलता ∝ S/R
⇒ (V₂/V₁) = (S₂/S₁) × (R₁/R₂) = 1.4 × (10/14) = 1.4 × 0.714 = 1.0
🔴 निष्कर्ष: वोल्टता-संवेदनशीलता का अनुपात 1:1 है।
Question 4.11
एक फ्रिज में 6.5 G (1 G = 10⁻⁴ T) का एकसमान चुंबकीय क्षेत्र बनाया गया है। इस चुंबकीय क्षेत्र में एक इलेक्ट्रॉन 4.8 × 10⁶ m/s की वेग से क्षेत्र के लम्बवत चल रहा है। इलेक्ट्रॉन के इस वृत्तीय पथ का त्रिज्या क्या होगी? वृत्ताकार पथ की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
(e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C, mₑ = 9.1 × 10⁻³¹ kg)
Answer
🔵 सूत्र: qvB = m v² / r ⇒ r = m v / (e B)
🟢 B = 6.5 G = 6.5 × 10⁻⁴ T, v = 4.8 × 10⁶ m/s
🧮 गणना:
r = (9.1 × 10⁻³¹ × 4.8 × 10⁶) / (1.6 × 10⁻¹⁹ × 6.5 × 10⁻⁴)
= (4.368 × 10⁻²⁴) / (1.04 × 10⁻²²)
= 0.042 m = 4.2 cm
🔴 निष्कर्ष: इलेक्ट्रॉन के वृत्ताकार पथ की त्रिज्या 4.2 cm।
Question 4.12
प्रश्न 4.11 में, चुंबकीय क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन की परिक्रमा अवधि ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 सूत्र: T = 2πm / (e B)
🟢 m = 9.1 × 10⁻³¹ kg, e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C, B = 6.5 × 10⁻⁴ T
🧮 गणना:
T = (2π × 9.1 × 10⁻³¹) / (1.6 × 10⁻¹⁹ × 6.5 × 10⁻⁴)
= (5.72 × 10⁻³⁰) / (1.04 × 10⁻²²) = 5.5 × 10⁻⁸ s
🔴 निष्कर्ष: इलेक्ट्रॉन की परिक्रमा अवधि 5.5 × 10⁻⁸ s।
Question 4.13
30 फेरे वाली एक वृत्ताकार कुंडली जिसकी त्रिज्या 8.0 cm है और जिसमें 6.0 A धारा प्रवाहित हो रही है, 1.0 T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखी गई है। जब कुंडली का तल क्षेत्र के लम्बवत है तो लगने वाला बलाघूर्ण क्या होगा? जब कुंडली का तल क्षेत्र के समानांतर है तो बलाघूर्ण क्या होगा?
Answer
🔵 सूत्र: τ = N I A B sinθ
🟢 N = 30, I = 6.0 A, R = 8.0 cm = 0.08 m ⇒ A = πR² = 3.14 × (0.08)² = 0.0201 m²
B = 1.0 T
(1) जब तल क्षेत्र के लम्बवत है ⇒ θ = 0°, sin0° = 0 ⇒ τ = 0
(2) जब तल क्षेत्र के समानांतर है ⇒ θ = 90°, sin90° = 1
🧮 τ = 30 × 6.0 × 0.0201 × 1.0 = 3.6 N·m
🔴 निष्कर्ष:
✔️ लम्बवत स्थिति में बलाघूर्ण = 0
✔️ समानांतर स्थिति में बलाघूर्ण = 3.6 N·m
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1–18 (बहुविकल्पीय प्रश्न — MCQs)
🔵 Question 1:
किसी गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल का परिमाण अधिकतम कब होता है?
🔵 (A) जब v और B समान दिशा में हों
🟢 (B) जब v और B विपरीत दिशा में हों
🟠 (C) जब v और B परस्पर लंब हों
🔴 (D) जब θ = 0°
Answer: (C) जब v और B परस्पर लंब हों
🟢 Question 2:
चुंबकीय बल का सूत्र है —
🔵 (A) F = qE
🟢 (B) F = qvBsinθ
🟠 (C) F = mv²/r
🔴 (D) F = qB/v
Answer: (B) F = qvBsinθ
🔴 Question 3:
यदि चुंबकीय क्षेत्र B = 2T और आवेश q = 1C है तथा कण 3 m/s की चाल से लंबवत प्रवेश करता है, तो बल होगा —
🔵 (A) 6 N
🟢 (B) 3 N
🟠 (C) 2 N
🔴 (D) 1 N
Answer: (A) 6 N
🟡 Question 4:
चुंबकीय बल सदैव किसके लंबवत होता है?
🔵 (A) केवल वेग के
🟢 (B) केवल चुंबकीय क्षेत्र के
🟠 (C) वेग तथा चुंबकीय क्षेत्र दोनों के
🔴 (D) उपरोक्त में कोई नहीं
Answer: (C) वेग तथा चुंबकीय क्षेत्र दोनों के
🔵 Question 5:
यदि कोई आवेश चुंबकीय क्षेत्र में समानांतर गति करे तो उस पर लगने वाला बल होगा —
🔵 (A) अधिकतम
🟢 (B) न्यूनतम
🟠 (C) शून्य
🔴 (D) अपरिवर्तित
Answer: (C) शून्य
🟢 Question 6:
वृत्तीय गति की त्रिज्या r = mv/qB का अर्थ है कि —
🔵 (A) अधिक B से त्रिज्या बढ़ेगी
🟢 (B) अधिक B से त्रिज्या घटेगी
🟠 (C) B से कोई प्रभाव नहीं
🔴 (D) v घटने पर r घटेगा
Answer: (B) अधिक B से त्रिज्या घटेगी
🔴 Question 7:
यदि चुंबकीय बल चाल के लंबवत है तो —
🔵 (A) कार्य अधिकतम
🟢 (B) कार्य शून्य
🟠 (C) चाल बढ़ती है
🔴 (D) चाल घटती है
Answer: (B) कार्य शून्य
🟡 Question 8:
धारा I, लंबाई L, क्षेत्र B और कोण θ पर चालक पर बल —
🔵 (A) F = ILBsinθ
🟢 (B) F = B/L
🟠 (C) F = I/L
🔴 (D) F = BILcosθ
Answer: (A) F = ILBsinθ
🔵 Question 9:
दो समानांतर धारा वाहक चालकों में समान दिशा की धाराएँ प्रवाहित हों तो —
🔵 (A) बल आकर्षण का होता है
🟢 (B) बल विकर्षण का होता है
🟠 (C) कोई बल नहीं
🔴 (D) चुंबकीय क्षेत्र समाप्त हो जाता है
Answer: (A) बल आकर्षण का होता है
🟢 Question 10:
दो धाराओं के बीच प्रति इकाई लंबाई बल —
🔵 (A) F/L = μ₀I₁I₂ / (2πd)
🟢 (B) F/L = μ₀I₁I₂ / (4πd²)
🟠 (C) F/L = μ₀I₁I₂ / (d)
🔴 (D) F/L = μ₀I₁I₂ / (2πd²)
Answer: (A) F/L = μ₀I₁I₂ / (2πd)
🔴 Question 11:
दीर्घ कुंडल में चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र —
🔵 (A) B = μ₀nI
🟢 (B) B = μ₀I/2πr
🟠 (C) B = μ₀I²/r
🔴 (D) B = μ₀n²I
Answer: (A) B = μ₀nI
🟡 Question 12:
वृत्ताकार कुंडल के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र —
🔵 (A) B = μ₀I/4r
🟢 (B) B = μ₀I/2r
🟠 (C) B = μ₀I/r
🔴 (D) B = μ₀I/πr
Answer: (B) B = μ₀I/2r
🔵 Question 13:
चुंबकीय बल की दिशा ज्ञात करने हेतु प्रयोग होता है —
🔵 (A) दाएँ हाथ का नियम
🟢 (B) बाँए हाथ का नियम
🟠 (C) फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम
🔴 (D) फ्लेमिंग का बाँए हाथ का नियम
Answer: (A) दाएँ हाथ का नियम
🟢 Question 14:
यदि चुंबकीय क्षेत्र B बढ़ाया जाए तो कण की त्रिज्या —
🔵 (A) बढ़ेगी
🟢 (B) घटेगी
🟠 (C) अपरिवर्तित
🔴 (D) पहले बढ़ेगी फिर घटेगी
Answer: (B) घटेगी
🔴 Question 15:
कण त्वरक यंत्र में कणों की आवृत्ति —
🔵 (A) f = qB/2πm
🟢 (B) f = 2πm/qB
🟠 (C) f = qB/m
🔴 (D) f = m/qB
Answer: (A) f = qB/2πm
🟡 Question 16:
चुंबकीय बलाघूर्ण (Torque) का सूत्र —
🔵 (A) τ = BIA sinθ
🟢 (B) τ = BIA cosθ
🟠 (C) τ = BIA tanθ
🔴 (D) τ = BIA
Answer: (A) τ = BIA sinθ
🔵 Question 17:
कण यदि चुंबकीय क्षेत्र में तिरछा प्रवेश करे तो उसका पथ —
🔵 (A) सीधा
🟢 (B) वृत्ताकार
🟠 (C) कुंडलाकार (Helical)
🔴 (D) तरंगाकार
Answer: (C) कुंडलाकार (Helical)
🟢 Question 18:
किसी चालक में प्रवाहित धारा के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए —
🔵 (A) दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम
🟢 (B) फ्लेमिंग का बाँया हाथ नियम
🟠 (C) लेंज का नियम
🔴 (D) किर्चॉफ का नियम
Answer: (A) दाएँ हाथ के अंगूठे का नियम
✳️ Section B — बहुत छोटे/संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न (Q19–Q23)
🔵 Question 19:
चुंबकीय बल किसी गतिमान आवेश पर कब शून्य होता है?
Answer:
✔️ जब गतिमान आवेश का वेग चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर (θ = 0°) या विपरीत दिशा में हो।
➡️ उस स्थिति में sinθ = 0, अतः
F = qvBsinθ = 0
🟢 Question 20:
बायोट–सावार्ट नियम का कथन लिखिए।
Answer:
💡 कथन:
धारा के एक सूक्ष्म तत्व Idl से दूरी r पर स्थित किसी बिंदु पर चुंबकीय प्रेरण का तत्व —
dB = (μ₀/4π)(Idl × r̂)/r²
👉 दिशा दाएँ हाथ के अंगूठा नियम से ज्ञात होती है।
🔴 Question 21:
दीर्घ कुंडल के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र लिखिए।
Answer:
✔️ यदि n = प्रति इकाई लंबाई कुंडलों की संख्या हो तथा I धारा प्रवाहित हो, तो —
B = μ₀nI
➡️ यहाँ B समान होता है और कुंडल के भीतर एकसमान चुंबकीय क्षेत्र बनता है।
🟡 Question 22:
चुंबकीय बल कार्य क्यों नहीं करता?
Answer:
✔️ चुंबकीय बल सदैव वेग के लंबवत होता है।
F ⊥ v
➡️ अतः चाल नहीं बदलती, केवल दिशा बदलती है।
W = F·s·cos90° = 0
✅ इसलिए चुंबकीय बल कोई कार्य नहीं करता।
🔵 Question 23:
कण त्वरक यंत्र का सिद्धांत लिखिए।
Answer:
💡 सिद्धांत:
आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र में वृत्तीय गति करता है तथा वैकल्पिक विद्युत क्षेत्र उसकी चाल बढ़ाता है।
➡️ आवृत्ति: f = qB / (2πm)
➡️ इससे कण उच्च ऊर्जा तक त्वरित होता है।
✳️ Section C — मध्यम प्रश्न / संख्यात्मक प्रश्न (Q24–Q27)
🟢 Question 24:
एक प्रोटॉन (q = 1.6×10⁻¹⁹ C, m = 1.67×10⁻²⁷ kg) 1T चुंबकीय क्षेत्र में 10⁵ m/s की चाल से लंबवत प्रवेश करता है। उसकी वृत्तीय त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
Answer:
➤ सूत्र: r = mv / qB
= (1.67×10⁻²⁷ × 10⁵) / (1.6×10⁻¹⁹ × 1)
= (1.67×10⁻²²) / (1.6×10⁻¹⁹)
= 1.04×10⁻³ m
✅ अंतिम उत्तर: r = 1.04×10⁻³ m
🔴 Question 25:
5 A धारा वाले 2 m लंबे चालक पर, 0.4 T चुंबकीय क्षेत्र में 30° कोण पर रखा गया हो, तो बल ज्ञात करें।
Answer:
➤ सूत्र: F = BILsinθ
= 0.4 × 5 × 2 × sin30°
= 4 × 0.5
= 2 N
✅ उत्तर: 2 N (लंबवत दिशा में)
🟡 Question 26:
दो समानांतर चालकों में I₁ = 4 A, I₂ = 6 A की धाराएँ 3 cm दूरी पर प्रवाहित हैं। प्रति इकाई लंबाई बल ज्ञात करें।
Answer:
➤ सूत्र: F/L = μ₀I₁I₂ / (2πd)
= (4π×10⁻⁷ × 4 × 6) / (2π × 0.03)
= (96×10⁻⁷) / 0.06
= 1.6×10⁻⁴ N/m
✅ उत्तर: F/L = 1.6×10⁻⁴ N/m (आकर्षण)
🔵 Question 27:
यदि दीर्घ कुंडल में 500 कुंडल/मीटर हैं और धारा 2 A है, तो चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करें।
Answer:
➤ सूत्र: B = μ₀nI
= 4π×10⁻⁷ × 500 × 2
= 4π×10⁻⁴ T
= 1.26×10⁻³ T
✅ उत्तर: B = 1.26×10⁻³ T (दीर्घ कुंडल के भीतर)
📘 STUDYZONE PRO — CODE 3 (Response 3 : प्रश्न 28–33)
(Section D + Section E)
✳️ Section D — दीर्घ उत्तर वाले प्रश्न (Q28–Q31)
🔵 Question 28:
बायोट–सावार्ट नियम का व्युत्पादन कीजिए तथा इसे एक वृत्ताकार चालक लूप पर लागू करके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
Answer:
💡 सिद्धांत:
किसी धारा–वाहक चालक के एक सूक्ष्म तत्व dl से दूरी r पर स्थित बिंदु पर चुंबकीय प्रेरण —
dB = (μ₀/4π)(I dl × r̂)/r²
➡️ यहाँ दिशा दाएँ हाथ के अंगूठा नियम से निर्धारित होती है।
अब वृत्ताकार लूप के लिए:
त्रिज्या = r,
प्रत्येक तत्व का क्षेत्र केंद्र की ओर समान होता है।
अतः
B = ∫dB cosθ = (μ₀I/4πr²)∫dl = (μ₀I/4πr²)×2πr
⇒ B = μ₀I / 2r
💡 निष्कर्ष:
वृत्तीय लूप के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र —
B = μ₀I / 2r
➡️ दिशा लूप के तल के लंबवत होती है।
🟢 Question 29:
दीर्घ कुंडल (Solenoid) में चुंबकीय क्षेत्र की व्युत्पत्ति कीजिए।
Answer:
मान लें:
प्रति इकाई लंबाई में n कुंडल हैं, प्रत्येक से I धारा प्रवाहित है।
बायोट–सावार्ट नियम से प्रत्येक कुंडल छोटे क्षेत्र में समान दिशा का क्षेत्र देता है।
केंद्रीय अक्ष पर कुल क्षेत्र —
B = μ₀nI
💡 मुख्य बिंदु:
✔️ कुंडल लंबा हो, ताकि किनारे का प्रभाव नगण्य हो।
✔️ क्षेत्र रेखाएँ समानांतर व समान दूरी पर होती हैं।
निष्कर्ष:
दीर्घ कुंडल के भीतर चुंबकीय क्षेत्र समान होता है —
B = μ₀nI
और बाहर नगण्य।
🔴 Question 30:
दो समानांतर धाराओं के बीच आकर्षण/विकर्षण बल की व्युत्पत्ति कीजिए।
Answer:
मान लें दो अनन्त समानांतर चालकों में धाराएँ I₁ और I₂ प्रवाहित हैं, उनके बीच की दूरी d है।
चालक 1 के कारण चालक 2 पर चुंबकीय क्षेत्र —
B₁ = μ₀I₁ / (2πd)
अब चालक 2 पर प्रति इकाई लंबाई बल —
F/L = I₂B₁ = μ₀I₁I₂ / (2πd)
💡 निष्कर्ष:
✔️ यदि धाराएँ समान दिशा में हों → बल आकर्षण का होगा।
✔️ यदि धाराएँ विपरीत दिशा में हों → बल विकर्षण का होगा।
✅ यही परिभाषा 1 एम्पीयर की आधारभूत इकाई देती है।
🟡 Question 31:
कण त्वरक यंत्र (Cyclotron) का सिद्धांत, कार्यविधि और समीकरण व्याख्यायित कीजिए।
Answer:
💡 सिद्धांत:
आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र में वृत्तीय गति करता है।
वैकल्पिक विद्युत क्षेत्र उसकी चाल बढ़ाता है।
आवृत्ति:
f = qB / (2πm)
संरचना:
➡️ दो अर्धवृत्तीय ‘D’ आकार के खोखले पात्र — जिन्हें डी कहा जाता है।
➡️ इनके बीच वैकल्पिक विद्युत विभव लगाया जाता है।
➡️ चुंबकीय क्षेत्र D के तल के लंबवत रहता है।
कार्यविधि:
1️⃣ कण को वैकल्पिक विद्युत क्षेत्र से त्वरित किया जाता है।
2️⃣ वह चुंबकीय क्षेत्र में वृत्ताकार पथ में घूमता है।
3️⃣ हर चक्कर में उसकी चाल और ऊर्जा बढ़ती है।
ऊर्जा:
E = qV × N (जहाँ N चक्करों की संख्या है)
निष्कर्ष:
✔️ कणों को उच्च ऊर्जा देने वाला यंत्र।
✔️ प्रयोग: प्रोटॉन, ड्यूट्रॉन, α-कणों के त्वरण हेतु।
✳️ Section E — प्रकरणात्मक / अनुप्रयोग आधारित प्रश्न (Q32–Q33)
🔵 Question 32 (Case Study):
एक इलेक्ट्रॉन चुंबकीय क्षेत्र 0.5T में 3×10⁶ m/s की चाल से लंबवत प्रवेश करता है।
(1) बल का परिमाण ज्ञात कीजिए।
(2) वृत्तीय पथ की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
Answer:
➡️ (1) F = qvBsin90°
= 1.6×10⁻¹⁹ × 3×10⁶ × 0.5
= 2.4×10⁻¹³ N
✅ बल = 2.4×10⁻¹³ N
➡️ (2) r = mv/qB
= (9.1×10⁻³¹ × 3×10⁶) / (1.6×10⁻¹⁹ × 0.5)
= 3.41×10⁻⁵ m
✅ त्रिज्या = 3.41×10⁻⁵ m
💡 निष्कर्ष:
इलेक्ट्रॉन का पथ वृत्तीय है; बल चाल को नहीं बदलता, केवल दिशा बदलता है।
🟢 Question 33 (Application):
एक दीर्घ कुंडल में प्रति मीटर 1000 कुंडल हैं तथा 3A धारा प्रवाहित है।
(1) कुंडल के भीतर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करें।
(2) यदि लोहे का कोर लगाया जाए और सापेक्ष पारगम्यता μᵣ = 5000 हो, तो नया क्षेत्र ज्ञात करें।
Answer:
➡️ (1) B = μ₀nI
= 4π×10⁻⁷ × 1000 × 3
= 3.77×10⁻³ T
➡️ (2) B’ = μᵣμ₀nI
= 5000 × 4π×10⁻⁷ × 1000 × 3
= 18.8 T
✅ अंतिम उत्तर:
(1) बिना कोर के B = 3.77×10⁻³ T
(2) कोर के साथ B’ = 18.8 T
💡 अवलोकन:
✔️ कोर डालने से क्षेत्र अत्यधिक बढ़ जाता है।
✔️ यही सिद्धांत विद्युतचुंबकों में प्रयुक्त होता है।
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