Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 14: अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी: पदार्थ, युक्तियाँ एवं सरल परिपथ
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🌟 भाग 1: विस्तृत व्याख्या (≈1700 शब्द)
🔵 1. प्रस्तावना (परिचय)
यह अध्याय हमें यह समझाता है कि विद्युत धारा का प्रवाह पदार्थों में कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।
अर्धचालक (Semiconductor) आधुनिक युग की इलेक्ट्रॉनिक तकनीक की नींव हैं।
इन्हीं के आधार पर द्विपारक, अर्धवाहक युक्तियाँ, वृद्धक, नियामक तथा तार्किक परिपथ बनाए जाते हैं।
✏️ नोट: पदार्थों को उनकी चालकता के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा जाता है — चालक, कुचालक और अर्धचालक।
🟢 2. पदार्थों का वर्गीकरण (Classification of Materials)
चालक (Conductors):
इनमें मुक्त विद्युत कणों की संख्या अधिक होती है, जैसे ताँबा, चाँदी, एलुमिनियम।
➡️ विद्युत धारा का प्रवाह आसानी से होता है।
कुचालक (Insulators):
इनमें मुक्त विद्युत कण नहीं होते, जैसे रबर, काँच, लकड़ी।
➡️ इनमें धारा का प्रवाह नहीं हो पाता।
अर्धचालक (Semiconductors):
इनकी चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है।
जैसे – सिलिकॉन (Si) और जर्मेनियम (Ge)।
➡️ तापमान बढ़ने पर चालकता बढ़ जाती है।
💡 धारणा:
किसी पदार्थ की चालकता उसके ऊर्जा बैंड (Energy Band) पर निर्भर करती है —
संयोजक बैंड और चालक बैंड के बीच की ऊर्जा रिक्ति (E_g) जितनी कम होगी, चालकता उतनी अधिक होगी।
🔴 3. ऊर्जा बैंड सिद्धांत (Energy Band Theory)
संयोजक बैंड: इसमें वे इलेक्ट्रॉन होते हैं जो रासायनिक बंध बनाते हैं।
चालक बैंड: इसमें वे इलेक्ट्रॉन होते हैं जो स्वतंत्र होकर धारा वहन करते हैं।
ऊर्जा अंतर (E_g):
चालक पदार्थ → लगभग 0 eV
अर्धचालक → लगभग 1 eV
कुचालक → लगभग 3 eV से अधिक
➡️ इसलिए अर्धचालक को थोड़ी ऊर्जा देने पर उसके इलेक्ट्रॉन चालक बैंड में पहुँच जाते हैं।
🟡 4. शुद्ध अर्धचालक (Intrinsic Semiconductor)
शुद्ध अर्धचालक में कोई भी अशुद्धि नहीं मिलाई जाती।
सिलिकॉन या जर्मेनियम के प्रत्येक परमाणु के चार संयोजक इलेक्ट्रॉन होते हैं जो चार समीपस्थ परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाते हैं।
🌿 ताप प्रभाव:
ताप बढ़ने पर कुछ बंध टूटते हैं और इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र हो जाते हैं।
प्रत्येक मुक्त इलेक्ट्रॉन के साथ एक “रिक्त स्थान” (होल) भी बनता है।
इस प्रकार धारा दो प्रकार के वाहकों से प्रवाहित होती है —
✔️ इलेक्ट्रॉन (ऋण आवेशित)
✔️ होल (धन आवेशित)
🔵 5. बाह्य अर्धचालक (Extrinsic Semiconductor)
शुद्ध अर्धचालक की चालकता को बढ़ाने के लिए उसमें अशुद्धि मिलाई जाती है जिसे मिश्रण प्रक्रिया (डोपिंग) कहते हैं।
इससे दो प्रकार के अर्धचालक बनते हैं —
(a) N-प्रकार अर्धचालक
पंचसंयोजी तत्व (जैसे फॉस्फोरस, आर्सेनिक) मिलाए जाते हैं।
एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन मुक्त हो जाता है।
मुख्य वाहक: इलेक्ट्रॉन
अल्प वाहक: होल
(b) P-प्रकार अर्धचालक
त्रिसंयोजी तत्व (जैसे बोरॉन, गैलियम) मिलाए जाते हैं।
इलेक्ट्रॉन की कमी से “होल” उत्पन्न होते हैं।
मुख्य वाहक: होल
अल्प वाहक: इलेक्ट्रॉन
💡 ध्यान दें: दोनों प्रकार के अर्धचालक विद्युत रूप से तटस्थ रहते हैं।
🔴 6. पी-एन संधि (PN Junction)
जब P-प्रकार और N-प्रकार अर्धचालकों को जोड़ा जाता है, तो पी-एन संधि बनती है।
इस संधि पर इलेक्ट्रॉनों और होलों का विसरण (Diffusion) होता है, जिससे रिक्तीकरण क्षेत्र (Depletion Region) बनता है।
👉 इस क्षेत्र में कोई मुक्त वाहक नहीं होता और इसके किनारों पर आंतरिक विभव (V₀) उत्पन्न होता है।
✏️ समीकरण:
V₀ ∝ (T/q) × ln(NₐN_d / nᵢ²)
🟢 7. द्विपारक (Diode)
द्विपारक एक पी-एन संधि उपकरण है जो धारा को एक ही दिशा में प्रवाहित होने देता है और दूसरी दिशा में रोकता है।
इसे एकदिश चालक कहते हैं।
(a) अग्रवर्ती संयोजन (Forward Bias)
P-पक्ष को बैटरी के धनात्मक छोर से जोड़ते हैं।
धारा सरलता से बहती है।
(b) विपरीत संयोजन (Reverse Bias)
P-पक्ष को ऋणात्मक छोर से जोड़ते हैं।
धारा बहुत कम या नगण्य होती है।
💡 उपयोग: धारा परिवर्तक, संकेतक, वोल्टता नियंत्रक।
🟡 8. धारा परिवर्तक (Rectifier)
यह उपकरण ए.सी. धारा को डी.सी. में परिवर्तित करता है।
अर्धतरंग परिवर्तक: एक द्विपारक उपयोग में आता है।
पूर्णतरंग परिवर्तक: दो द्विपारक; ए.सी. का दोनों भाग डी.सी. में बदलते हैं।
🔵 9. ज़ेनर द्विपारक (Zener Diode)
ज़ेनर द्विपारक एक विशेष प्रकार का उपकरण है जो विपरीत संयोजन में निश्चित विभव पर कार्य करता है और उस विभव को स्थिर रखता है।
➡️ इसका प्रयोग वोल्टता नियामक के रूप में किया जाता है।
🟢 10. त्रि–संयुक्त युक्ति (Trijunction Device / Transistor का शुद्ध हिन्दी रूप)
त्रि–संयुक्त युक्ति दो पी-एन संधियों से बनती है और इसके तीन भाग होते हैं —
उत्सर्जक (Emitter) – विद्युत वाहकों का उत्सर्जन करता है।
आधार (Base) – बहुत पतली परत जो वाहकों को नियंत्रित करती है।
संग्राहक (Collector) – उत्सर्जित वाहकों को ग्रहण करता है।
💡 कार्य सिद्धांत:
उत्सर्जक से निकलने वाले अधिकांश वाहक आधार से होकर संग्राहक तक पहुँचते हैं, जिससे छोटी धारा द्वारा बड़ी धारा नियंत्रित होती है।
➡️ यही वृद्धि (वृद्धन) का सिद्धांत कहलाता है।
🔴 11. त्रि–संयुक्त युक्ति के प्रकार
N-P-N युक्ति:
मुख्य वाहक: इलेक्ट्रॉन
अधिक दक्ष और सामान्यतः उपयोगी।
P-N-P युक्ति:
मुख्य वाहक: होल
कार्य विपरीत दिशा में होता है।
➡️ प्रयोग: वृद्धक, स्विच, कंपंनित्र, तर्क परिपथ।
🟡 12. द्वार (Logic Gates)
डिजिटल परिपथों में विभिन्न तर्क क्रियाएँ करने हेतु प्रयोग किए जाते हैं।
AND द्वार: सभी इनपुट ‘1’ हों तो आउटपुट ‘1’।
OR द्वार: किसी एक इनपुट ‘1’ हो तो आउटपुट ‘1’।
NOT द्वार: इनपुट का उल्टा देता है।
NAND द्वार: AND + NOT
NOR द्वार: OR + NOT
💡 इन द्वारों का उपयोग कंप्यूटर और डिजिटल परिपथों में होता है।
🔵 13. प्रकाश द्विपारक (Photo Diode)
विपरीत संयोजन में कार्य करता है।
जब उस पर प्रकाश गिरता है, तो धारा उत्पन्न होती है।
➡️ उपयोग: प्रकाश संवेदक, फोटोडिटेक्टर, दूरसंचार में।
🟢 14. प्रकाश उत्सर्जक द्विपारक (LED)
यह अग्रवर्ती संयोजन में कार्य करता है और विद्युत धारा प्रवाहित होने पर प्रकाश उत्सर्जित करता है।
रंग – लाल, हरा, नीला, पीला।
💡 उपयोग: संकेतक, डिस्प्ले, लैंप, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक युक्तियाँ।
🔴 15. सौर Cell(Solar Cell)
एक पी-एन संधि युक्ति जो प्रकाश ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है।
💡 सिद्धांत: प्रकाश–विद्युत प्रभाव (Photovoltaic Effect)
उपयोग – सौर पैनल, उपग्रह, सौर कैलकुलेटर।
🟡 16. एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit)
यह एक सूक्ष्म चिप होती है जिसमें अनेकों द्विपारक और त्रि–संयुक्त युक्तियाँ होती हैं।
➡️ आकार छोटा, गति अधिक, ऊर्जा व्यय कम।
➡️ प्रयोग – कंप्यूटर, मोबाइल, रेडियो, स्वचालित यंत्र।
🔵 17. इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों के लाभ
✔️ आकार में छोटे
✔️ ऊर्जा की बचत
✔️ तीव्र क्रियाशील
✔️ स्वचालन में उपयोगी
✔️ विश्वसनीय एवं दीर्घकालिक
🌿 भाग 2: सारांश (≈300 शब्द)
पदार्थों को चालक, कुचालक, अर्धचालक तीन वर्गों में बाँटा गया।
अर्धचालक जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम में ताप बढ़ाने से चालकता बढ़ती है।
ऊर्जा बैंड सिद्धांत से समझ आता है कि E_g जितना कम, चालकता उतनी अधिक।
शुद्ध अर्धचालक में ताप के कारण इलेक्ट्रॉन–होल युग्म उत्पन्न होते हैं।
अशुद्धि मिलाने से N-प्रकार व P-प्रकार अर्धचालक बनते हैं।
दोनों को जोड़ने पर पी-एन संधि बनती है, जो एकदिश धारा प्रवाह कराती है।
द्विपारक का उपयोग धारा परिवर्तक (रेक्टिफ़ायर) में किया जाता है।
ज़ेनर द्विपारक स्थिर वोल्टता देता है।
त्रि–संयुक्त युक्ति (ट्रांजिस्टर) धारा वृद्धि व स्विचिंग में सहायक है।
तर्क द्वार डिजिटल तकनीक के आधार हैं।
प्रकाश द्विपारक, एल.ई.डी. तथा सौर कोशिका प्रकाश और विद्युत के बीच रूपांतरण करती हैं।
एकीकृत परिपथों से आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युग संभव हुआ।
🧠 भाग 3: Quick Recap (त्वरित पुनरावलोकन)
⚡ अर्धचालक की चालकता ताप के साथ बढ़ती है।
🧩 डोपिंग से N-प्रकार और P-प्रकार अर्धचालक बनते हैं।
🔋 पी-एन संधि → रीक्टीकरण क्षेत्र व अवरोध विभव।
💡 द्विपारक → एकदिश चालक, ज़ेनर → वोल्टता नियामक।
🌀 त्रि–संयुक्त युक्ति → धारा वृद्धि व स्विच।
🌞 सौर कोशिका, एल.ई.डी. → प्रकाश–विद्युत परिवर्तन।
🖥️ तर्क द्वार और एकीकृत परिपथ → डिजिटल परिपथों का मूल आधार।
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
🔹 प्रश्न 14.1
किसी n-प्रकार के सिलिकॉन में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a) इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अशुद्धियाँ हैं।
(b) इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अशुद्धियाँ हैं।
(c) होल (विवर) अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अशुद्धियाँ हैं।
(d) होल (विवर) बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अशुद्धियाँ हैं।
🟢 उत्तर :
➡️ n-प्रकार के अर्धचालक में अशुद्धि के रूप में पंचसंयोजी (Pentavalent) परमाणु मिलाए जाते हैं।
➡️ ये परमाणु एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन देते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक (Majority Carriers) बन जाते हैं, और होल (विवर) अल्पसंख्यक वाहक होते हैं।
✔️ सही उत्तर: (a)
इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अशुद्धियाँ हैं।
(नोट: पंचसंयोजी अशुद्धियों से n-प्रकार बनता है, जबकि त्रिसंयोजी से p-प्रकार बनता है।)
🔹 प्रश्न 14.2
अभ्यास 14.1 में दिए गए कथनों में से कौन-सा p-प्रकार के अर्धचालक के लिए सत्य है?
🟢 उत्तर :
➡️ p-प्रकार के अर्धचालक में त्रिसंयोजी (Trivalent) अशुद्धि (जैसे – बोरॉन, एल्युमिनियम, इंडियम) मिलाई जाती है।
➡️ यह एक इलेक्ट्रॉन कम देती है जिससे होल (विवर) बहुसंख्यक वाहक बनते हैं और इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक वाहक होते हैं।
✔️ सही उत्तर: (d)
होल (विवर) बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अशुद्धियाँ हैं।
🔹 प्रश्न 14.3
कार्बन, सिलिकॉन और जर्मेनियम, प्रत्येक के चार संयोजक इलेक्ट्रॉन हैं। इनकी संयोजकता ऊर्जा बैंड अंतराल (Energy Band Gap) क्रमशः इस प्रकार हैं:
E_g(C), E_g(Si), E_g(Ge)
इनके मान क्रम से घटते जाते हैं:
E_g(C) > E_g(Si) > E_g(Ge)
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a) (E_g)_Si < (E_g)_Ge < (E_g)_C
(b) (E_g)_C < (E_g)_Si < (E_g)_Ge
(c) (E_g)_Ge < (E_g)_Si < (E_g)_C
(d) (E_g)_Ge > (E_g)_Si > (E_g)_C
🟢 उत्तर :
➡️ ऊर्जा बैंड गैप परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ घटता है।
➡️ अतः क्रम होता है —
(E_g)_C > (E_g)_Si > (E_g)_Ge
✔️ सही उत्तर: (c)
(E_g)_Ge < (E_g)_Si < (E_g)_C
🔹 प्रश्न 14.4
बिना वोल्टेज वाले p–n संधि से, होल p–क्षेत्र में n–क्षेत्र की ओर विसरित होते हैं, क्योंकि –
(a) n–क्षेत्र में मुक्त इलेक्ट्रॉनों उन्हें आकर्षित करते हैं।
(b) विभवांतर के कारण सीमा के पार गमन करते हैं।
(c) p–क्षेत्र में होल–सांद्रता, n–क्षेत्र में उनकी सांद्रता से अधिक है।
(d) उपर्युक्त सभी।
🟢 उत्तर :
➡️ जब p–n संधि (junction) बिना बाह्य वोल्टेज के रहती है, तब चार्ज कण सांद्रता अंतर (Concentration Gradient) के कारण विसरण (diffusion) करते हैं।
➡️ p–क्षेत्र में होल की संख्या अधिक होती है और n–क्षेत्र में कम।
➡️ इसलिए होल p–क्षेत्र से n–क्षेत्र की ओर विसरित होते हैं।
✔️ सही उत्तर: (c)
p–क्षेत्र में होल-सांद्रता, n–क्षेत्र में उनकी सांद्रता से अधिक है।
🔹 प्रश्न 14.5
जब p–n संधि पर अग्रवर्ती (forward) वोल्टेज अनुप्रयोजित किया जाता है, तब यह –
(a) विभव रोधक बढ़ाता है।
(b) बहुसंख्यक वाहक धारा को शून्य कर देता है।
(c) विभव रोधक को कम कर देता है।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
🟢 उत्तर :
➡️ अग्रवर्ती बायस में p–क्षेत्र धनात्मक और n–क्षेत्र ऋणात्मक वोल्टेज से जोड़ा जाता है।
➡️ इससे संधि पर निर्मित विभव रोधक (Potential Barrier) घट जाता है।
➡️ फलस्वरूप वाहक आसानी से संधि पार कर सकते हैं और धारा प्रवाहित होती है।
✔️ सही उत्तर: (c)
विभव रोधक को कम कर देता है।
🔹 प्रश्न 14.6
अर्ध–तरंग रेक्टिफायर में, यदि निष्पादन आवृत्ति 50 Hz है, तो निर्गम आवृत्ति क्या होगी?
समान निष्पादन आवृत्ति हेतु पूर्ण तरंग रेक्टिफायर की निर्गम आवृत्ति क्या है?
🟢 उत्तर :
💡 दिया गया:
इनपुट (निष्पादन) आवृत्ति = 50 Hz
➡️ अर्ध–तरंग रेक्टिफायर (Half-Wave Rectifier) में प्रत्येक इनपुट चक्र पर एक धारा चक्र निकलता है।
✏️ अतः निर्गम आवृत्ति = 50 Hz
➡️ पूर्ण–तरंग रेक्टिफायर (Full-Wave Rectifier) में प्रत्येक इनपुट चक्र से दो धारा चक्र बनते हैं।
✏️ अतः निर्गम आवृत्ति = 2 × 50 = 100 Hz
✔️ अर्ध–तरंग रेक्टिफायर की निर्गम आवृत्ति = 50 Hz
✔️ पूर्ण–तरंग रेक्टिफायर की निर्गम आवृत्ति = 100 Hz
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. अर्धचालक की चालकता तापमान बढ़ने पर —
🔵 (A) घटती है
🟢 (B) बढ़ती है
🟠 (C) समान रहती है
🔴 (D) शून्य हो जाती है
Answer: (B) बढ़ती है ✔️
Q2. सिलिकॉन का ऊर्जा अंतर (E_g) लगभग कितना होता है?
🔵 (A) 0.1 eV
🟢 (B) 1.1 eV
🟠 (C) 3 eV
🔴 (D) 5 eV
Answer: (B) 1.1 eV ✔️
Q3. अर्धचालक का उदाहरण है —
🔵 (A) ताँबा
🟢 (B) जर्मेनियम
🟠 (C) रबर
🔴 (D) लोहा
Answer: (B) जर्मेनियम ✔️
Q4. N-प्रकार अर्धचालक बनाने हेतु किस तत्व का प्रयोग किया जाता है?
🔵 (A) बोरॉन
🟢 (B) फॉस्फोरस
🟠 (C) एल्युमिनियम
🔴 (D) गैलियम
Answer: (B) फॉस्फोरस ✔️
Q5. P-प्रकार अर्धचालक में मुख्य वाहक कौन होते हैं?
🔵 (A) इलेक्ट्रॉन
🟢 (B) होल
🟠 (C) दोनों
🔴 (D) कोई नहीं
Answer: (B) होल ✔️
Q6. पी-एन संधि में “रिक्तीकरण क्षेत्र” का निर्माण किस कारण होता है?
🔵 (A) विसरण
🟢 (B) चालकता
🟠 (C) प्रकाश
🔴 (D) ताप
Answer: (A) विसरण ✔️
Q7. अग्रवर्ती संयोजन (Forward Bias) में संधि का आंतरिक विभव —
🔵 (A) घटता है
🟢 (B) बढ़ता है
🟠 (C) अपरिवर्तित रहता है
🔴 (D) शून्य हो जाता है
Answer: (A) घटता है ✔️
Q8. ज़ेनर द्विपारक का प्रयोग किया जाता है —
🔵 (A) वृद्धि हेतु
🟢 (B) वोल्टता नियामक हेतु
🟠 (C) धारा वृद्धि हेतु
🔴 (D) संकेतक हेतु
Answer: (B) वोल्टता नियामक हेतु ✔️
Q9. LED अग्रवर्ती संयोजन में कार्य करता है और —
🔵 (A) प्रकाश उत्सर्जित करता है
🟢 (B) प्रकाश अवशोषित करता है
🟠 (C) धारा रोकता है
🔴 (D) ताप बढ़ाता है
Answer: (A) प्रकाश उत्सर्जित करता है ✔️
Q10. सौर कोशिका कार्य करती है —
🔵 (A) अग्रवर्ती संयोजन में
🟢 (B) विपरीत संयोजन में
🟠 (C) दोनों संयोजनों में
🔴 (D) कोई नहीं
Answer: (B) विपरीत संयोजन में ✔️
Q11. त्रि–संयुक्त युक्ति में कितने पी-एन संधि होते हैं?
🔵 (A) एक
🟢 (B) दो
🟠 (C) तीन
🔴 (D) चार
Answer: (B) दो ✔️
Q12. त्रि–संयुक्त युक्ति के तीन भाग हैं —
🔵 (A) उत्सर्जक, आधार, संग्राहक
🟢 (B) एनोड, कैथोड, ग्रिड
🟠 (C) प्लेट, फिलामेंट, कैथोड
🔴 (D) स्रोत, प्रतिरोध, संधारित्र
Answer: (A) उत्सर्जक, आधार, संग्राहक ✔️
Q13. तर्क द्वार (Logic Gate) का उपयोग कहाँ किया जाता है?
🔵 (A) रेडियो में
🟢 (B) डिजिटल परिपथों में
🟠 (C) हीटर में
🔴 (D) पंखे में
Answer: (B) डिजिटल परिपथों में ✔️
Q14. NOT द्वार का कार्य है —
🔵 (A) इनपुट को यथावत देना
🟢 (B) इनपुट का उल्टा देना
🟠 (C) दोनों इनपुट जोड़ना
🔴 (D) शून्य बनाना
Answer: (B) इनपुट का उल्टा देना ✔️
Q15. पी-एन संधि में धारा किस दिशा में प्रवाहित होती है?
🔵 (A) N से P
🟢 (B) P से N
🟠 (C) दोनों दिशा में
🔴 (D) किसी में नहीं
Answer: (B) P से N ✔️
Q16. फोटो द्विपारक में धारा उत्पन्न होती है जब —
🔵 (A) उस पर प्रकाश पड़ता है
🟢 (B) ताप घटता है
🟠 (C) वोल्टता शून्य होती है
🔴 (D) धारा बंद होती है
Answer: (A) उस पर प्रकाश पड़ता है ✔️
Q17. एकीकृत परिपथ (IC) में क्या समाहित होता है?
🔵 (A) बहुत से प्रतिरोधक
🟢 (B) बहुत से अर्धचालक घटक
🟠 (C) केवल एक द्विपारक
🔴 (D) केवल एक तर्क द्वार
Answer: (B) बहुत से अर्धचालक घटक ✔️
Q18. अर्धचालक उपकरणों में प्रयुक्त मुख्य तत्व हैं —
🔵 (A) सिलिकॉन और जर्मेनियम
🟢 (B) एल्युमिनियम और सोडियम
🟠 (C) लोहा और ताँबा
🔴 (D) गंधक और फॉस्फोरस
Answer: (A) सिलिकॉन और जर्मेनियम ✔️
✳️ Section B – लघु उत्तरीय प्रश्न
Q19. अर्धचालक की चालकता ताप के साथ क्यों बढ़ती है?
Answer:
🟢 ताप बढ़ने पर सहसंयोजक बंध टूटने लगते हैं जिससे मुक्त इलेक्ट्रॉन और “होल” उत्पन्न होते हैं।
🟢 मुक्त वाहकों की संख्या बढ़ने से चालकता (σ) बढ़ जाती है।
🟢 अतः अर्धचालक ऋणात्मक ताप गुणांक वाले पदार्थ होते हैं।
Q20. डोपिंग (Mishran) क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
Answer:
🔵 डोपिंग का अर्थ है — शुद्ध अर्धचालक में किसी अन्य तत्व की थोड़ी मात्रा मिलाना।
🔵 उद्देश्य: चालकता बढ़ाना तथा उसे नियंत्रित करना।
🔵 पंचसंयोजी अशुद्धि → N-प्रकार अर्धचालक
🔵 त्रिसंयोजी अशुद्धि → P-प्रकार अर्धचालक
Q21. N-प्रकार अर्धचालक में विद्युत प्रवाह कैसे होता है?
Answer:
🟢 N-प्रकार अर्धचालक में मुख्य वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं।
🟢 जब वोल्टता लगाई जाती है, ये इलेक्ट्रॉन चालक बैंड में स्वतंत्र रूप से गति करते हैं।
🟢 अल्प वाहक “होल” भी विपरीत दिशा में थोड़ी मात्रा में गति करते हैं।
Q22. पी-एन संधि क्या होती है?
Answer:
🔵 जब P-प्रकार और N-प्रकार अर्धचालक को आपस में जोड़ा जाता है, तो वह क्षेत्र जहाँ दोनों मिलते हैं, पी-एन संधि कहलाता है।
🔵 इसमें रिक्तीकरण क्षेत्र बनता है जिसमें कोई मुक्त वाहक नहीं रहता।
🔵 संधि पर एक आंतरिक विभव (V₀) विकसित होता है जो धारा के प्रवाह को नियंत्रित करता है।
Q23. अग्रवर्ती और विपरीत संयोजन में अंतर स्पष्ट करें।
Answer:
🟢 अग्रवर्ती संयोजन (Forward Bias):
P-पक्ष को बैटरी के धनात्मक और N-पक्ष को ऋणात्मक छोर से जोड़ते हैं — धारा प्रवाहित होती है।
🔴 विपरीत संयोजन (Reverse Bias):
P-पक्ष को ऋणात्मक और N-पक्ष को धनात्मक छोर से जोड़ते हैं — धारा बहुत कम होती है।
⚡ Section C – मध्यम उत्तरीय प्रश्न
Q24. ज़ेनर डायोड क्या है और इसका उपयोग बताइए।
Answer:
🔵 ज़ेनर डायोड एक विशेष प्रकार का डायोड है जो विपरीत संयोजन में कार्य करता है।
🔵 जब वोल्टता एक निश्चित मान (ज़ेनर विभव) से अधिक होती है, तब यह टूटकर स्थिर वोल्टता प्रदान करता है।
🔵 प्रयोग: वोल्टता नियामक, वोल्टता स्थिरीकरण परिपथों में।
💡 सिद्धांत:
V_Z = स्थिर वोल्टता (ब्रेकडाउन वोल्टेज)
I_Z बढ़ने पर भी V_Z लगभग स्थिर रहता है।
Q25. LED का कार्य सिद्धांत लिखिए।
Answer:
🟢 LED (प्रकाश उत्सर्जक डायोड) अग्रवर्ती संयोजन में कार्य करती है।
🟢 जैसे ही धारा प्रवाहित होती है, इलेक्ट्रॉन और होल पुनर्संयोजन करते हैं।
🟢 इस पुनर्संयोजन में ऊर्जा प्रकाश के रूप में उत्सर्जित होती है।
🟢 उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य उस अर्धचालक पदार्थ पर निर्भर करती है।
💡 उपयोग: संकेतक दीप, डिस्प्ले, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
Q26. फोटो डायोड क्या है और इसका सिद्धांत बताइए।
Answer:
🔵 फोटो डायोड एक पी-एन संधि युक्ति है जो विपरीत संयोजन में कार्य करती है।
🔵 जब प्रकाश उस पर गिरता है, तो संधि में इलेक्ट्रॉन–होल युग्म उत्पन्न होते हैं।
🔵 इससे संधि धारा बढ़ जाती है — इसे प्रकाश–धारा कहते हैं।
🔵 प्रयोग: प्रकाश संवेदक, स्वचालित लाइटिंग, ऑप्टिकल संचार प्रणाली।
Q27. सौर कोशिका (Solar Cell) की संरचना और कार्य सिद्धांत बताइए।
Answer:
🟢 सौर कोशिका एक विशेष पी-एन संधि होती है।
🟢 जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तो फोटॉन की ऊर्जा इलेक्ट्रॉन–होल युग्म उत्पन्न करती है।
🟢 यह प्रक्रिया प्रकाश–विद्युत प्रभाव कहलाती है।
🟢 इलेक्ट्रॉन N-पक्ष की ओर और होल P-पक्ष की ओर गति करते हैं जिससे धारा प्रवाहित होती है।
🟢 उपयोग: सौर पैनल, सौर कैलकुलेटर, उपग्रह ऊर्जा स्रोत।
🔶 Section D – दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Q28. पी-एन संधि डायोड का निर्माण, कार्यविधि और उसके अग्रवर्ती व विपरीत संयोजन का सिद्धांत समझाइए।
Answer:
🟢 निर्माण:
पी-एन संधि दो प्रकार के अर्धचालकों (P-प्रकार और N-प्रकार) को जोड़कर बनाई जाती है।
P-भाग में “होल” प्रमुख वाहक और N-भाग में “इलेक्ट्रॉन” प्रमुख वाहक होते हैं।
🟢 रिक्तीकरण क्षेत्र (Depletion Region):
जब दोनों प्रकार के अर्धचालक मिलते हैं, तो इलेक्ट्रॉन N से P भाग की ओर और होल P से N भाग की ओर विसरित होते हैं।
इससे संधि पर एक रिक्त क्षेत्र बनता है जिसमें कोई मुक्त वाहक नहीं होता और इसके दोनों सिरों पर आंतरिक विभव (V₀) उत्पन्न होता है।
🟢 अग्रवर्ती संयोजन (Forward Bias):
P-पक्ष को बैटरी के धनात्मक और N-पक्ष को ऋणात्मक छोर से जोड़ते हैं।
अवरोध विभव घटता है और धारा प्रवाहित होती है।
🟢 विपरीत संयोजन (Reverse Bias):
P-पक्ष को ऋणात्मक छोर से जोड़ते हैं।
अवरोध विभव बढ़ जाता है और धारा अत्यल्प हो जाती है।
💡 सारांश: पी-एन संधि डायोड एक एकदिश चालक है जो धारा को केवल एक दिशा में प्रवाहित होने देता है।
Q29. N-प्रकार और P-प्रकार अर्धचालक की तुलना कीजिए।
Answer:
🟢 (1) निर्माण विधि:
N-प्रकार → पंचसंयोजी अशुद्धि (फॉस्फोरस, आर्सेनिक)।
P-प्रकार → त्रिसंयोजी अशुद्धि (बोरॉन, गैलियम)।
🟢 (2) मुख्य वाहक:
N-प्रकार → इलेक्ट्रॉन।
P-प्रकार → होल।
🟢 (3) आवेश:
N-प्रकार → ऋणात्मक वाहक प्रधान।
P-प्रकार → धनात्मक वाहक प्रधान।
🟢 (4) अल्प वाहक:
N-प्रकार में होल,
P-प्रकार में इलेक्ट्रॉन।
🟢 (5) चालकता:
दोनों में चालकता ताप व डोपिंग पर निर्भर करती है।
Q30. त्रि–संयुक्त युक्ति (Transistor) का निर्माण, संरचना और कार्य सिद्धांत लिखिए।
Answer:
🔵 संरचना:
त्रि–संयुक्त युक्ति दो पी-एन संधियों से बनती है। यह दो प्रकार की होती है —
N–P–N
P–N–P
इसमें तीन क्षेत्र होते हैं —
उत्सर्जक (Emitter): वाहक उत्पन्न करता है।
आधार (Base): बहुत पतली और हल्की डोप्ड परत, जो वाहकों को नियंत्रित करती है।
संग्राहक (Collector): वाहकों को ग्रहण करता है।
🔵 कार्य सिद्धांत:
उत्सर्जक से निकलने वाले इलेक्ट्रॉन आधार से होकर संग्राहक तक पहुँचते हैं।
आधार बहुत पतली होती है, इसलिए अधिकतर वाहक पार हो जाते हैं।
छोटी आधार धारा बड़ी संग्राहक धारा को नियंत्रित करती है।
💡 प्रयोग:
धारा वृद्धि (वृद्धक)
स्विचिंग
दोलन परिपथ
Q31. तर्क द्वार (Logic Gates) क्या हैं? इनके प्रकार तथा सत्य सारणी (Truth Table) सहित समझाइए।
Answer:
🟢 परिभाषा:
तर्क द्वार वे इलेक्ट्रॉनिक परिपथ हैं जो बूलियन तर्क (0 और 1) के अनुसार कार्य करते हैं।
प्रत्येक द्वार का आउटपुट इनपुट संकेतों पर निर्भर करता है।
🔵 मुख्य प्रकार:
AND द्वार:
आउटपुट ‘1’ केवल तब जब सभी इनपुट ‘1’ हों।
सारणी:
0,0 → 0
1,0 → 0
1,1 → 1
OR द्वार:
कोई भी एक इनपुट ‘1’ हो तो आउटपुट ‘1’।
0,0 → 0
1,0 → 1
1,1 → 1
NOT द्वार:
आउटपुट = इनपुट का उल्टा।
0 → 1
1 → 0
NAND द्वार: AND + NOT
सभी इनपुट ‘1’ हों तो आउटपुट ‘0’।
NOR द्वार: OR + NOT
सभी इनपुट ‘0’ हों तो आउटपुट ‘1’।
💡 प्रयोग: डिजिटल कंप्यूटर, स्वचालित नियंत्रण परिपथ, कैलकुलेटर।
🔶 Section E – अनुप्रयोग/स्थितिगत प्रश्न
Q32. एक परिपथ में LED को 3 V की बैटरी से जोड़ा गया है। यदि LED अग्रवर्ती संयोजन में जुड़ी है और उसका अवरोध विभव 2 V है, तो प्रवाहित धारा कितनी होगी जब परिपथ में 100 Ω प्रतिरोध श्रेणी में जुड़ा हो?
Answer:
🟢 दिए गए:
V = 3 V, V_d = 2 V, R = 100 Ω
🟢 सूत्र:
I = (V – V_d) / R
🟢 गणना:
I = (3 – 2) / 100 = 1 / 100 = 0.01 A = 10 mA
✔️ परिणाम: प्रवाहित धारा = 10 मिलीएम्पीयर
Q33. एक सौर कोशिका की दक्षता ज्ञात कीजिए यदि 10 सेमी² क्षेत्रफल की कोशिका 0.02 W विद्युत शक्ति उत्पन्न करती है और उस पर पड़ने वाली प्रकाश ऊर्जा का घनत्व 200 W/m² है।
Answer:
🟢 दिया गया:
क्षेत्रफल A = 10 सेमी² = 10 × 10⁻⁴ m² = 1×10⁻³ m²
आउटपुट शक्ति Pₒ = 0.02 W
प्रविष्ट शक्ति Pᵢ = I × A = 200 × 1×10⁻³ = 0.2 W
🟢 दक्षता (η):
η = (Pₒ / Pᵢ) × 100
η = (0.02 / 0.2) × 100 = 10%
✔️ परिणाम: सौर कोशिका की दक्षता = 10 प्रतिशत
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————