Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 13: नाभिक
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔵 भाग 1: व्याख्या (Explanation)
🔹 परिचय
नाभिक भौतिकी (Nuclear Physics) पदार्थ के मूलभूत घटकों में से एक — नाभिक (Nucleus) की संरचना, गुणधर्म और उसके अंदर होने वाली प्रक्रियाओं का अध्ययन है।
परमाणु का केन्द्रक नाभिक होता है, जिसमें धन आवेशित कण प्रोटॉन (Proton) तथा विद्युत-रहित कण न्यूट्रॉन (Neutron) उपस्थित रहते हैं। ये दोनों मिलकर न्यूक्लियॉन (Nucleon) कहलाते हैं।
💡 ध्यान दें:
नाभिक का आवेश केवल उसमें उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या पर निर्भर करता है।
🔹 परमाणु नाभिक के मुख्य गुण
🔵 (1) परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z):
यह नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या होती है।
उदाहरण: हाइड्रोजन (H) का Z = 1, हीलियम (He) का Z = 2।
🟢 (2) द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A):
यह नाभिक में कुल न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) की संख्या है।
➡️ A = Z + N
जहाँ N = न्यूट्रॉनों की संख्या।
🔴 (3) समस्थानिक (Isotopes):
वे तत्व जिनका Z समान परंतु N (अर्थात A) भिन्न हो, समस्थानिक कहलाते हैं।
उदाहरण: हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक — ¹H, ²H, ³H।
🟡 (4) समभारिक (Isobars):
वे नाभिक जिनका द्रव्यमान संख्या A समान, परंतु Z भिन्न हो।
उदाहरण: ¹⁴C और ¹⁴N।
🟢 (5) समरूपिक (Isotones):
वे नाभिक जिनमें न्यूट्रॉनों की संख्या समान हो।
उदाहरण: ¹³C और ¹⁴N में N = 7।
🔹 नाभिक का आकार (Size of Nucleus)
नाभिक का त्रिज्या निम्न समीकरण से दी जाती है —
➡️ R = R₀ A^(1/3)
जहाँ R₀ = 1.2 × 10⁻¹⁵ m।
💡 निष्कर्ष: नाभिक का आयतन द्रव्यमान संख्या (A) के समानुपाती होता है।
🔹 नाभिकीय घनत्व (Nuclear Density)
घनत्व ρ = द्रव्यमान / आयतन
➡️ ρ = (A × mₙ) / (4/3 π R³)
लेकिन R ∝ A^(1/3) ⇒ ρ ≈ स्थिर (constant)।
✔️ अतः सभी नाभिकों की घनत्व लगभग समान होती है (≈ 2.3 × 10¹⁷ kg/m³)।
🔹 नाभिकीय बल (Nuclear Force)
यह अत्यन्त शक्तिशाली बल है जो प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को एक साथ बाँधे रखता है।
मुख्य विशेषताएँ:
🔵 बहुत अल्प दूरी (≈ 10⁻¹⁵ m) तक प्रभावी।
🟢 अत्यन्त बलवान – गुरुत्वाकर्षण या विद्युत बल से लाखों गुना अधिक।
🔴 आवेश-स्वतंत्र – यह बल प्रोटॉन-न्यूट्रॉन, न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन, प्रोटॉन-प्रोटॉन पर समान रूप से कार्य करता है।
🟡 संतृप्ति गुण – प्रत्येक न्यूक्लियॉन केवल निकटस्थ न्यूक्लियॉनों से बल अनुभव करता है।
🔹 नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Binding Energy)
जब नाभिक बनता है तो उसका वास्तविक द्रव्यमान उसके अवयव कणों के कुल द्रव्यमान से कम होता है। इस कमी को द्रव्यमान अपघटन (Mass Defect) कहते हैं।
➡️ Δm = (Z m_p + N m_n) − M
यह Δm ऊर्जा में बदल जाती है —
➡️ E_b = Δm c²
जहाँ E_b = नाभिक की बंधन ऊर्जा।
💡 प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा (E_b/A):
यह नाभिक की स्थिरता को दर्शाती है।
✔️ Fe (लोहा) और Ni (निकल) के आसपास यह अधिकतम (≈ 8.8 MeV/nucleon) होती है — अतः ये सर्वाधिक स्थिर नाभिक हैं।
🔹 रेडियोधर्मिता (Radioactivity)
रेडियोधर्मिता एक स्वस्फूर्त प्रक्रिया है जिसमें अस्थिर नाभिक स्वतः कण या विकिरण उत्सर्जित करते हैं और अधिक स्थिर नाभिक में परिवर्तित हो जाते हैं।
तीन प्रकार की मुख्य रेडियोधर्मी किरणें होती हैं:
1️⃣ α-किरणें (Alpha rays):
➡️ ये हीलियम नाभिक (²He⁴) होती हैं।
➡️ इनका आवेश +2e होता है।
➡️ प्रवेश शक्ति बहुत कम।
2️⃣ β-किरणें (Beta rays):
➡️ ये इलेक्ट्रॉन या पॉज़िट्रॉन (e⁻ / e⁺) होती हैं।
➡️ इनकी प्रवेश शक्ति α से अधिक।
3️⃣ γ-किरणें (Gamma rays):
➡️ ये उच्च-ऊर्जा वाली विद्युतचुंबकीय तरंगें हैं।
➡️ इनकी कोई आवेश नहीं और प्रवेश शक्ति सर्वाधिक होती है।
🔹 रेडियोधर्मी अपघटन का नियम
रेडियोधर्मी पदार्थ के क्षय की दर नाभिकों की संख्या के समानुपाती होती है।
➡️ dN/dt = −λN
यहाँ λ = अपघटन नियतांक (decay constant)।
समाकलन के बाद,
➡️ N = N₀ e^(−λt)
जहाँ N₀ = प्रारंभिक नाभिकों की संख्या।
💡 अर्धायु (Half-Life, T₁/₂):
वह समय जिसमें प्रारंभिक रेडियोधर्मी नाभिकों की संख्या का आधा अपघटित हो जाता है।
➡️ T₁/₂ = 0.693 / λ
🔹 रेडियोधर्मी श्रृंखला (Decay Series)
कुछ भारी तत्व जैसे यूरेनियम (U), थोरियम (Th) आदि क्रमशः कई चरणों में अपघटित होते हैं और अंततः एक स्थिर तत्व (जैसे लेड, Pb) बनाते हैं।
🔹 नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
दो हल्के नाभिक अत्यधिक ताप और दाब पर मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं तथा ऊर्जा उत्सर्जित होती है।
उदाहरण:
➡️ ²H + ³H → ⁴He + n + 17.6 MeV
💡 सूर्य और तारों में ऊर्जा का स्रोत यही है।
🔹 नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)
भारी नाभिक (जैसे ²³⁵U या ²³⁹Pu) जब न्यूट्रॉन के आघात से दो या अधिक छोटे नाभिकों में टूट जाता है, तो ऊर्जा उत्पन्न होती है।
उदाहरण:
➡️ ²³⁵U + n → ¹⁴¹Ba + ⁹²Kr + 3n + 200 MeV
🧠 श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction):
उत्पन्न न्यूट्रॉन आगे अन्य नाभिकों को विभाजित करते रहते हैं, जिससे ऊर्जा का तीव्र विस्फोट (जैसे परमाणु बम) या नियंत्रित उत्पादन (जैसे परमाणु रिएक्टर) होता है।
🔹 नियंत्रित एवं अनियंत्रित अभिक्रिया
🔵 नियंत्रित अभिक्रिया:
नाभिकीय ऊर्जा का प्रयोग बिजली उत्पादन हेतु परमाणु रिएक्टरों में किया जाता है। यहाँ न्यूट्रॉन की गति को मॉडरेटर (जैसे भारी जल) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
🔴 अनियंत्रित अभिक्रिया:
यह बम विस्फोट जैसी स्थिति उत्पन्न करती है जहाँ ऊर्जा अत्यधिक मात्रा में क्षणिक रूप से मुक्त होती है।
🔹 अनुप्रयोग (Applications)
💡 1. चिकित्सा में: रेडियोआइसोटोप्स से कैंसर का उपचार।
💡 2. कृषि में: फसलों में उत्परिवर्तन व खाद-परीक्षण।
💡 3. उद्योग में: मोटाई मापन, रिसाव परीक्षण।
💡 4. ऊर्जा उत्पादन में: परमाणु रिएक्टरों से बिजली उत्पादन।
🟣 भाग 2: सारांश (Summary)
🔵 नाभिक में प्रोटॉन व न्यूट्रॉन होते हैं, जिन्हें न्यूक्लियॉन कहा जाता है।
🟢 नाभिक की त्रिज्या R = R₀ A^(1/3) से दी जाती है।
🔴 नाभिकीय घनत्व लगभग स्थिर होती है।
🟡 नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Δm c²) नाभिक की स्थिरता का माप है।
🔵 Fe और Ni सबसे अधिक स्थिर तत्व हैं।
🟢 रेडियोधर्मिता एक स्वस्फूर्त प्रक्रिया है — α, β, γ उत्सर्जन के साथ।
🔴 अपघटन नियम: N = N₀ e^(−λt); अर्धायु T₁/₂ = 0.693 / λ।
🟡 नाभिकीय विखंडन भारी नाभिकों को तोड़ता है; संलयन हल्के नाभिकों को जोड़ता है।
🔵 परमाणु रिएक्टरों में नियंत्रित विखंडन से बिजली उत्पन्न होती है।
🟢 रेडियोधर्मिता के उपयोग — चिकित्सा, कृषि, उद्योग, ऊर्जा।
🧾 भाग 3: क्विक रिकैप (Quick Recap)
1️⃣ नाभिकीय बल अत्यंत शक्तिशाली, अल्प-दूरी और आवेश-स्वतंत्र होता है।
2️⃣ R = R₀ A^(1/3), और ρ = स्थिर (≈ 2.3 × 10¹⁷ kg/m³)।
3️⃣ बंधन ऊर्जा: E_b = Δm c²; प्रति न्यूक्लियॉन ऊर्जा स्थिरता बताती है।
4️⃣ रेडियोधर्मी अपघटन का नियम: N = N₀ e^(−λt)।
5️⃣ विखंडन → भारी नाभिक टूटते हैं; संलयन → हल्के नाभिक जुड़ते हैं।
6️⃣ उपयोग: चिकित्सा, उद्योग, कृषि एवं ऊर्जा उत्पादन।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
🔹 प्रश्न 13.1
नाइट्रोजन नाभिक (¹⁴₇N) को विघटन–ऊर्जा MeV में ज्ञात कीजिए।
दिया है:
mₙ = 14.00307 u
mₚ = 1.007825 u
mₙ = 1.008665 u
1 u = 931.5 MeV/c²
🟢 उत्तर :
➡️ ¹⁴₇N नाभिक में 7 प्रोटॉन और (14−7)=7 न्यूट्रॉन होते हैं।
✏️ कुल द्रव्यमान (स्वतंत्र कणों का) = 7mₚ + 7mₙ
= 7(1.007825 u) + 7(1.008665 u)
= 7(2.01649 u) = 14.11543 u
✏️ द्रव्यमान दोष (Δm) = (स्वतंत्र कणों का द्रव्यमान) − (वास्तविक नाभिकीय द्रव्यमान)
= 14.11543 u − 14.00307 u
= 0.11236 u
✏️ विघटन–ऊर्जा (E_b) = Δm × 931.5 MeV
= 0.11236 × 931.5
= 104.6 MeV
✔️ नाइट्रोजन नाभिक की विघटन–ऊर्जा ≈ 104.6 MeV
🔹 प्रश्न 13.2
निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर ²⁶₁₃Fe तथा ²⁰⁸₈₃Bi नाभिकों की बंधन–ऊर्जा MeV में ज्ञात कीजिए।
m(²⁶₁₃Fe) = 55.934939 u
m(²⁰⁸₈₃Bi) = 208.980388 u
🟢 उत्तर :
(i) ²⁶₁₃Fe नाभिक
➡️ Z = 26, A = 56 ⇒ न्यूट्रॉन संख्या = 30
✏️ स्वतंत्र कणों का द्रव्यमान = 26mₚ + 30mₙ
= 26(1.007825) + 30(1.008665)
= 26.20345 + 30.25995 = 56.46340 u
✏️ द्रव्यमान दोष (Δm) = 56.46340 − 55.934939
= 0.528461 u
✏️ बंधन–ऊर्जा = Δm × 931.5 = 0.528461 × 931.5 = 492.3 MeV
✔️ Fe (आयरन) नाभिक की बंधन–ऊर्जा = 492.3 MeV
(ii) ²⁰⁸₈₃Bi नाभिक
➡️ Z = 83, A = 209 ⇒ न्यूट्रॉन संख्या = 126
✏️ स्वतंत्र कणों का द्रव्यमान = 83mₚ + 126mₙ
= 83(1.007825) + 126(1.008665)
= 83.649475 + 127.09179 = 210.741265 u
✏️ द्रव्यमान दोष (Δm) = 210.741265 − 208.980388 = 1.760877 u
✏️ बंधन–ऊर्जा = Δm × 931.5 = 1.760877 × 931.5 = 1639.9 MeV
✔️ Bi नाभिक की बंधन–ऊर्जा = 1639.9 MeV
🔹 प्रश्न 13.3
यदि किसी तत्व के एक समस्थानिक के नाभिक का परमाणु द्रव्यमान ज्ञात है, तो उससे किसी अन्य समस्थानिक का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
उदाहरण: ⁶³₂₉Cu का नाभिक ⁶².९२९६० u है, तो ⁶⁵₂₉Cu का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
🟢 उत्तर :
➡️ ⁶³Cu और ⁶⁵Cu समस्थानिक हैं, दोनों के प्रोटॉन समान (29) परंतु न्यूट्रॉन में 2 का अंतर है।
✏️ अतः ⁶⁵Cu में 2 अतिरिक्त न्यूट्रॉन होंगे।
प्रत्येक न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.008665 u
✏️ द्रव्यमान वृद्धि = 2 × 1.008665 u = 2.01733 u
✏️ परंतु कुछ बंधन–ऊर्जा के कारण वास्तविक द्रव्यमान थोड़ा कम होगा, लगभग 0.02 u कम मान लेते हैं।
✏️ अतः ⁶⁵Cu का द्रव्यमान = 62.92960 + 2.01733 − 0.02
= 64.93 u (लगभग)
✔️ ⁶⁵Cu का नाभिकीय द्रव्यमान ≈ 64.93 u
🧠 अतिरिक्त उपयोगी मान:
1 u = 931.5 MeV/c²
mₚ = 1.007825 u
mₙ = 1.008665 u
1 MeV = 1.6×10⁻¹³ J
🔹 प्रश्न 13.4
स्वर्ण के समस्थानिक ¹⁹⁷₇₉Au तथा रजत के समस्थानिक ¹⁰⁷₄₇Ag की नाभिकीय त्रिज्या के अनुपात का सन्निकट मान ज्ञात कीजिए।
🟢 उत्तर :
✏️ किसी भी नाभिक की त्रिज्या सूत्र द्वारा दी जाती है —
r = r₀ A^(1/3)
जहाँ r₀ = 1.2 × 10⁻¹⁵ m
➡️ अतः,
r_Au / r_Ag = (A_Au / A_Ag)^(1/3)
= (197 / 107)^(1/3)
✏️ अब,
(197 / 107) = 1.841
(1.841)^(1/3) ≈ 1.22
✔️ अतः नाभिकीय त्रिज्याओं का अनुपात = 1.22 : 1
🔹 प्रश्न 13.5
किसी नाभिकीय अभिक्रिया A + b → C + d का Q-मूल्य निम्नलिखित समीकरण द्वारा परिभाषित होता है –
Q = [ (m_A + m_b) − (m_C + m_d) ] c²
जहाँ सभी द्रव्यमान विश्राम द्रव्यमान (rest mass) हैं।
दिए गए आँकड़ों के आधार पर निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए बताइए कि वे ऊष्माक्षेपी (exothermic) हैं या ऊष्माशोषी (endothermic)।
दिए गए द्रव्यमान:
m(²₁H) = 2.014102 u
m(³₁H) = 3.016049 u
m(¹²₆C) = 12.000000 u
m(²⁰₁₀Ne) = 19.992439 u
(i) ²₁H + ³₁H → ⁴₂He + ¹₀n
✏️ प्रारंभिक कुल द्रव्यमान = m(²₁H) + m(³₁H)
= 2.014102 + 3.016049 = 5.030151 u
✏️ अंतिम कुल द्रव्यमान = m(⁴₂He) + m(¹₀n)
= 4.002603 + 1.008665 = 5.011268 u
✏️ द्रव्यमान अंतर (Δm) = 5.030151 − 5.011268 = 0.018883 u
✏️ Q = Δm × 931.5 = 0.018883 × 931.5 = 17.6 MeV
✔️ Q धनात्मक है ⇒ यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (Exothermic) है।
(ii) ⁶₆C + ⁶₆C → ²⁰₁₀Ne + ⁴₂He
✏️ प्रारंभिक कुल द्रव्यमान = 2 × m(¹²₆C) = 24.000000 u
✏️ अंतिम कुल द्रव्यमान = m(²⁰₁₀Ne) + m(⁴₂He)
= 19.992439 + 4.002603 = 23.995042 u
✏️ Δm = 24.000000 − 23.995042 = 0.004958 u
✏️ Q = Δm × 931.5 = 0.004958 × 931.5 = 4.62 MeV
✔️ Q धनात्मक ⇒ अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (Exothermic) है।
🧠 अंतिम निष्कर्ष:
(i) ²₁H + ³₁H → ⁴₂He + ¹₀n ➡️ ऊष्माक्षेपी (17.6 MeV)
(ii) ¹²₆C + ¹²₆C → ²⁰₁₀Ne + ⁴₂He ➡️ ऊष्माक्षेपी (4.6 MeV)
🔹 प्रश्न 13.6
माना कि हम ⁵⁶₂₆Fe नाभिक को दो समान अवयवों ²⁸₁₃Al में विखंडित करें। क्या ऊर्जा की दृष्टि से यह विखंडन संभव है? इस प्रक्रिया का Q-मूल्य ज्ञात कर अपने तर्क प्रस्तुत कीजिए।
दिया है:
m(⁵⁶₂₆Fe) = 55.93494 u
m(²⁸₁₃Al) = 27.98191 u
🟢 उत्तर :
✏️ विखंडन समीकरण:
⁵⁶₂₆Fe → ²⁸₁₃Al + ²⁸₁₃Al
✏️ प्रारंभिक कुल द्रव्यमान = m(Fe) = 55.93494 u
✏️ अंतिम कुल द्रव्यमान = 2 × m(Al) = 2 × 27.98191 = 55.96382 u
✏️ द्रव्यमान अंतर (Δm) = m_initial − m_final
= 55.93494 − 55.96382 = −0.02888 u
✏️ Q = Δm × 931.5
= (−0.02888) × 931.5 = −26.9 MeV
✔️ Q ऋणात्मक (Negative) है, अतः इस प्रक्रिया में ऊर्जा शोषित होगी।
➡️ इसलिए यह विखंडन ऊर्जा की दृष्टि से संभव नहीं है।
🔹 प्रश्न 13.7
²³⁹₉₄Pu के विखंडन गुण लगभग ²³⁵₉₂U से मिलते-जुलते हैं। प्रति विखंडन विमुक्त औसत ऊर्जा 180 MeV है। यदि 1 kg शुद्ध ²³⁹₉₄Pu का सब विखंडन हो जाए, तो कुल कितनी MeV ऊर्जा विमुक्त होगी?
🟢 उत्तर :
✏️ 1 mol ²³⁹₉₄Pu = 239 g में 6.023×10²³ नाभिक होते हैं।
✏️ अतः 1 kg = 1000 g में
= (1000 / 239) × 6.023×10²³
= 2.52×10²⁴ नाभिक होंगे।
✏️ प्रति नाभिक विमुक्त ऊर्जा = 180 MeV
कुल ऊर्जा = 2.52×10²⁴ × 180 MeV
= 4.536×10²⁶ MeV
✏️ अब 1 MeV = 1.6×10⁻¹³ J
कुल ऊर्जा (J में) = 4.536×10²⁶ × 1.6×10⁻¹³
= 7.26×10¹³ J
✔️ अतः 1 kg ²³⁹₉₄Pu के पूर्ण विखंडन से 7.26×10¹³ जूल ऊर्जा विमुक्त होगी।
🔹 प्रश्न 13.8
2.0 kg ड्यूटीरियम के संलयन से एक 100 वाट का विद्युत लैम्प कितनी देर प्रज्वलित रखा जा सकता है?
संलयन अभिक्रिया:
²₁H + ²₁H → ³₂He + n + 3.27 MeV
🟢 उत्तर :
✏️ प्रत्येक संलयन अभिक्रिया में 3.27 MeV ऊर्जा विमुक्त होती है।
✏️ 1 mol ड्यूटीरियम (D₂) का द्रव्यमान = 2 g में 6.023×10²³ परमाणु होते हैं।
अतः 2 kg = 2000 g ⇒ 1000 mol ड्यूटीरियम होंगे।
🔹 1 mol D में 6.023×10²³ D परमाणु,
तो संलयन युग्म = (6.023×10²³ / 2) प्रति mol = 3.011×10²³ युग्म।
✏️ कुल युग्म = 1000 × 3.011×10²³ = 3.011×10²⁶ युग्म
✏️ कुल विमुक्त ऊर्जा = 3.011×10²⁶ × 3.27 MeV
= 9.85×10²⁶ MeV
✏️ 1 MeV = 1.6×10⁻¹³ J
कुल ऊर्जा = 9.85×10²⁶ × 1.6×10⁻¹³ = 1.576×10¹⁴ J
✏️ यदि लैम्प 100 W = 100 J/s शक्ति का है,
तो समय = कुल ऊर्जा / शक्ति
= (1.576×10¹⁴) / 100 = 1.576×10¹² s
✏️ इसे वर्ष में बदलें:
= (1.576×10¹² / 3.154×10⁷) = 5.0×10⁴ वर्ष
✔️ अतः 2.0 kg ड्यूटीरियम के संलयन से 100 वाट का लैम्प लगभग 50,000 वर्ष तक जल सकता है।
🔹 प्रश्न 13.9
दो ड्यूटीरॉनों के आमने–सामने की टक्कर के लिए कूलॉम अवरोध की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
(संकेत: कूलॉम अवरोध की ऊँचाई वह ऊर्जा होती है जो उन दोनों ड्यूटीरॉनों को एक-दूसरे के संपर्क में लाने के लिए उनके बीच लगने वाले कूलॉम प्रतिकर्षण बल को पार कर सके। यह मान सकते हैं कि ड्यूटीरॉन का प्रभावी त्रिज्या 2.0 fm है।)
🟢 उत्तर :
💡 दिया गया:
प्रत्येक ड्यूटीरॉन का आवेश = +e = 1.6×10⁻¹⁹ C
प्रभावी दूरी (r) = 2.0 fm = 2.0×10⁻¹⁵ m
कूलॉम नियतांक (k) = 9×10⁹ N·m²/C²
✏️ कूलॉम अवरोध ऊर्जा (Potential Energy):
E = (k·e²) / r
= (9×10⁹ × (1.6×10⁻¹⁹)²) / (2.0×10⁻¹⁵)
= (9×10⁹ × 2.56×10⁻³⁸) / 2×10⁻¹⁵
= (2.304×10⁻²⁸) / 2×10⁻¹⁵
= 1.152×10⁻¹³ J
✏️ MeV में बदलें:
1 MeV = 1.6×10⁻¹³ J
E = (1.152×10⁻¹³) / (1.6×10⁻¹³) = 0.72 MeV
✔️ अतः कूलॉम अवरोध की ऊँचाई ≈ 0.72 MeV
➡️ अर्थात् दो ड्यूटीरॉनों को एक-दूसरे के संपर्क में लाने हेतु लगभग 0.72 MeV ऊर्जा आवश्यक है।
🔹 प्रश्न 13.10
समीकरण R = R₀A^(1/3) के आधार पर, सिद्ध कीजिए कि नाभिकीय द्रव का घनत्व लगभग स्थिर (A पर निर्भर नहीं) होता है।
यहाँ R₀ एक नियतांक है एवं A नाभिक का द्रव्यमान संख्या है।
🟢 उत्तर :
💡 दिया गया सूत्र: R = R₀A^(1/3)
✏️ नाभिक का आयतन:
V = (4/3)πR³
= (4/3)π(R₀A^(1/3))³
= (4/3)πR₀³A
✏️ घनत्व (ρ):
ρ = (नाभिक का द्रव्यमान) / (आयतन)
= (A·mₙ) / ((4/3)πR₀³A)
जहाँ mₙ = एक न्यूक्लॉन का औसत द्रव्यमान
✏️ A कट जाएगा:
ρ = (3·mₙ) / (4πR₀³)
➡️ इसमें A उपस्थित नहीं है, अर्थात ρ केवल R₀ और mₙ पर निर्भर करता है, A पर नहीं।
✔️ अतः नाभिकीय द्रव का घनत्व स्थिर होता है और A पर निर्भर नहीं करता।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
✳️ SECTION – A : बहुविकल्पी प्रश्न (Q1–Q18)
Question 1. नाभिक में कौन से कण पाए जाते हैं?
🔵 (A) केवल प्रोटॉन
🟢 (B) केवल न्यूट्रॉन
🟠 (C) प्रोटॉन और न्यूट्रॉन
🔴 (D) प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन
Answer: (C) प्रोटॉन और न्यूट्रॉन
Question 2. नाभिक की त्रिज्या R किस प्रकार द्रव्यमान संख्या A पर निर्भर करती है?
🔵 (A) R ∝ A
🟢 (B) R ∝ A^(1/3)
🟠 (C) R ∝ A^(2/3)
🔴 (D) R ∝ A²
Answer: (B) R ∝ A^(1/3)
Question 3. नाभिकीय घनत्व लगभग —
🔵 (A) द्रव्यमान संख्या पर निर्भर
🟢 (B) सभी नाभिकों के लिए समान
🟠 (C) नाभिक के त्रिज्या पर निर्भर
🔴 (D) तापमान पर निर्भर
Answer: (B) सभी नाभिकों के लिए समान
Question 4. नाभिकीय बंधन ऊर्जा की अभिव्यक्ति है —
🔵 (A) E = m c²
🟢 (B) E = Δm c²
🟠 (C) E = ½ m v²
🔴 (D) E = hν
Answer: (B) E = Δm c²
Question 5. यदि किसी नाभिक की बंधन ऊर्जा अधिक है, तो उसका अर्थ है —
🔵 (A) नाभिक अस्थिर है
🟢 (B) नाभिक अधिक स्थिर है
🟠 (C) नाभिक का द्रव्यमान अधिक है
🔴 (D) नाभिक का आकार बड़ा है
Answer: (B) नाभिक अधिक स्थिर है
Question 6. Fe (लोहा) का नाभिक सर्वाधिक स्थिर होता है क्योंकि —
🔵 (A) इसका द्रव्यमान न्यूनतम है
🟢 (B) प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा अधिकतम है
🟠 (C) इसमें न्यूट्रॉन नहीं हैं
🔴 (D) यह हल्का तत्व है
Answer: (B) प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा अधिकतम है
Question 7. α-कण किससे बने होते हैं?
🔵 (A) 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन
🟢 (B) 2 प्रोटॉन + 2 इलेक्ट्रॉन
🟠 (C) 2 न्यूट्रॉन + 2 पॉज़िट्रॉन
🔴 (D) 1 प्रोटॉन + 1 न्यूट्रॉन
Answer: (A) 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन
Question 8. β-किरणें क्या होती हैं?
🔵 (A) हीलियम नाभिक
🟢 (B) इलेक्ट्रॉन या पॉज़िट्रॉन
🟠 (C) फोटॉन
🔴 (D) न्यूट्रॉन
Answer: (B) इलेक्ट्रॉन या पॉज़िट्रॉन
Question 9. γ-किरणें होती हैं —
🔵 (A) इलेक्ट्रॉन
🟢 (B) विद्युतचुंबकीय तरंगें
🟠 (C) प्रोटॉन
🔴 (D) हीलियम नाभिक
Answer: (B) विद्युतचुंबकीय तरंगें
Question 10. रेडियोधर्मी अपघटन का नियम किस पर आधारित है?
🔵 (A) नाभिकीय बल
🟢 (B) नाभिकों की संख्या के समानुपाती दर
🟠 (C) तापमान
🔴 (D) विद्युत क्षेत्र
Answer: (B) नाभिकों की संख्या के समानुपाती दर
Question 11. अपघटन नियतांक λ और अर्धायु T₁/₂ के बीच संबंध है —
🔵 (A) T₁/₂ = λ / 0.693
🟢 (B) T₁/₂ = 0.693 / λ
🟠 (C) T₁/₂ = λ × 0.693
🔴 (D) T₁/₂ = 1 / λ²
Answer: (B) T₁/₂ = 0.693 / λ
Question 12. यदि किसी पदार्थ का अर्धायु 10 दिन है, तो 20 दिन बाद शेष अंश होगा —
🔵 (A) 1/2
🟢 (B) 1/4
🟠 (C) 1/8
🔴 (D) 3/4
Answer: (B) 1/4
Question 13. रेडियोधर्मी पदार्थ का अपघटन —
🔵 (A) स्वस्फूर्त और यादृच्छिक होता है
🟢 (B) प्रकाश पर निर्भर करता है
🟠 (C) तापमान पर निर्भर करता है
🔴 (D) दाब पर निर्भर करता है
Answer: (A) स्वस्फूर्त और यादृच्छिक होता है
Question 14. नाभिकीय संलयन के लिए आवश्यक स्थिति क्या है?
🔵 (A) अत्यल्प ताप और दाब
🟢 (B) उच्च ताप और उच्च दाब
🟠 (C) शून्य तापमान
🔴 (D) ठंडा वातावरण
Answer: (B) उच्च ताप और उच्च दाब
Question 15. निम्न में से कौन-सी अभिक्रिया संलयन है?
🔵 (A) ²³⁵U + n → ¹⁴¹Ba + ⁹²Kr + 3n
🟢 (B) ²H + ³H → ⁴He + n + 17.6 MeV
🟠 (C) ²³⁹Pu → ²⁰⁶Pb + 3α
🔴 (D) ¹⁴C → ¹⁴N + β⁻
Answer: (B) ²H + ³H → ⁴He + n + 17.6 MeV
Question 16. नियंत्रित नाभिकीय अभिक्रिया किसमें होती है?
🔵 (A) परमाणु बम
🟢 (B) परमाणु रिएक्टर
🟠 (C) सूर्य
🔴 (D) तारों में विस्फोट
Answer: (B) परमाणु रिएक्टर
Question 17. नाभिकीय बल की मुख्य विशेषता है —
🔵 (A) बहुत कम दूरी में कार्य करता है
🟢 (B) दीर्घ दूरी बल है
🟠 (C) विद्युत बल से कमजोर है
🔴 (D) केवल न्यूट्रॉन पर प्रभावी है
Answer: (A) बहुत कम दूरी में कार्य करता है
Question 18. रेडियोधर्मी श्रृंखला में अंतिम स्थिर तत्व होता है —
🔵 (A) यूरेनियम
🟢 (B) रेडियम
🟠 (C) सीसा (लेड, Pb)
🔴 (D) पोलोनियम
Answer: (C) सीसा (लेड, Pb)
✳️ SECTION – B : संक्षिप्त उत्तर प्रश्न (Q19–Q23)
Question 19. समस्थानिक (Isotopes) और समभारिक (Isobars) में क्या अंतर है?
Answer:
🔵 समस्थानिक (Isotopes): वे तत्व जिनका परमाणु क्रमांक (Z) समान परंतु द्रव्यमान संख्या (A) भिन्न होती है।
➡️ उदाहरण: ¹H, ²H, ³H
🔵 समभारिक (Isobars): वे तत्व जिनकी द्रव्यमान संख्या (A) समान, परंतु परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न होते हैं।
➡️ उदाहरण: ¹⁴C और ¹⁴N
🟢 निष्कर्ष: समस्थानिकों में समान रासायनिक गुण, समभारिकों में समान द्रव्यमान होता है।
Question 20. नाभिकीय बल की तीन मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
Answer:
🔵 यह अत्यन्त शक्तिशाली बल है जो प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को बाँधे रखता है।
🟢 यह बल अल्प-दूरी (~10⁻¹⁵ m) तक प्रभावी होता है।
🔴 यह बल आवेश-स्वतंत्र (Charge Independent) होता है।
🟡 इसमें संतृप्ति गुण (Saturation Property) पाया जाता है — प्रत्येक न्यूक्लियॉन केवल निकटस्थ न्यूक्लियॉनों से ही बल अनुभव करता है।
Question 21. रेडियोधर्मी अपघटन का नियम लिखिए।
Answer:
💡 किसी रेडियोधर्मी पदार्थ के नाभिकों का अपघटन दर उसकी शेष संख्या के समानुपाती होता है।
➡️ dN/dt = −λN
समाकलन करने पर,
➡️ N = N₀ e^(−λt)
जहाँ λ = अपघटन नियतांक, N₀ = प्रारंभिक नाभिकों की संख्या।
Question 22. अर्धायु (Half-life) का सूत्र प्राप्त कीजिए।
Answer:
✏️ रेडियोधर्मी अपघटन के नियम से:
➡️ N = N₀ e^(−λt)
अर्धायु पर, N = N₀/2
⇒ N₀/2 = N₀ e^(−λT₁/₂)
दोनों ओर लघुगणक लेने पर,
➡️ ln(2) = λT₁/₂
अतः,
✔️ T₁/₂ = 0.693 / λ
Question 23. बंधन ऊर्जा (Binding Energy) क्या है?
Answer:
🔵 जब स्वतंत्र न्यूक्लियॉन मिलकर नाभिक बनाते हैं, तो उनका कुल द्रव्यमान घट जाता है।
🟢 यह द्रव्यमान कमी (Δm) ऊर्जा में बदल जाती है, जिसे नाभिकीय बंधन ऊर्जा कहते हैं।
➡️ सूत्र: E_b = Δm c²
💡 यह ऊर्जा नाभिक की स्थिरता का माप होती है।
✳️ SECTION – C : मध्यम उत्तर / संख्यात्मक प्रश्न (Q24–Q27)
Question 24. यदि किसी नाभिक में 84 प्रोटॉन और 128 न्यूट्रॉन हैं, तो उसकी द्रव्यमान संख्या क्या होगी?
Answer:
✏️ दिए गए:
Z = 84, N = 128
द्रव्यमान संख्या, A = Z + N
➡️ A = 84 + 128 = 212
✔️ अतः द्रव्यमान संख्या 212 होगी।
Question 25. किसी रेडियोधर्मी पदार्थ का अर्धायु 10 दिन है। यदि प्रारंभिक सक्रियता 1000 Bq है, तो 30 दिन बाद सक्रियता कितनी होगी?
Answer:
✏️ सूत्र: A = A₀ e^(−λt)
और λ = 0.693 / T₁/₂
➡️ λ = 0.693 / 10 = 0.0693 day⁻¹
t = 30 दिन
अब,
A = 1000 × e^(−0.0693 × 30)
A = 1000 × e^(−2.079)
A = 1000 × 0.125 ≈ 125 Bq
✔️ अंतिम उत्तर: 30 दिन बाद सक्रियता 125 Bq होगी।
Question 26. यदि किसी तत्व का अपघटन नियतांक 1.155 × 10⁻³ s⁻¹ है, तो उसका अर्धायु ज्ञात कीजिए।
Answer:
✏️ सूत्र: T₁/₂ = 0.693 / λ
➡️ T₁/₂ = 0.693 / (1.155 × 10⁻³)
T₁/₂ = 600 s
✔️ अंतिम उत्तर: अर्धायु = 600 सेकंड।
Question 27. एक रेडियोधर्मी तत्व की प्रारंभिक नाभिक संख्या 2×10¹⁰ है और 2 घंटे बाद यह घटकर 1×10¹⁰ रह जाती है। इसका अपघटन नियतांक और अर्धायु ज्ञात कीजिए।
Answer:
✏️ सूत्र: N = N₀ e^(−λt)
N/N₀ = e^(−λt)
ln(N₀/N) = λt
➡️ ln(2×10¹⁰ / 1×10¹⁰) = λ × (2 hr × 3600 s)
ln(2) = λ × 7200
λ = 0.693 / 7200 = 9.625 × 10⁻⁵ s⁻¹
अब, T₁/₂ = 0.693 / λ
➡️ T₁/₂ = 0.693 / (9.625 × 10⁻⁵)
= 7200 s = 2 hr
✔️ अपघटन नियतांक = 9.63 × 10⁻⁵ s⁻¹
✔️ अर्धायु = 2 घंटे।
✳️ SECTION – D : दीर्घ उत्तर प्रश्न (Q28–Q31)
Question 28. नाभिकीय बंधन ऊर्जा का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए और समझाइए कि यह नाभिक की स्थिरता से कैसे संबंधित है।
Answer:
✏️ जब स्वतंत्र प्रोटॉन और न्यूट्रॉन मिलकर नाभिक बनाते हैं, तो उनका कुल द्रव्यमान उनके सम्मिलित नाभिक के द्रव्यमान से थोड़ा अधिक होता है।
🔵 (1) द्रव्यमान अपघटन (Mass Defect):
➡️ Δm = (Z m_p + N m_n) − M
जहाँ
Z = प्रोटॉन की संख्या,
N = न्यूट्रॉन की संख्या,
M = नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान।
🟢 (2) बंधन ऊर्जा (Binding Energy):
द्रव्यमान का यह अंतर ऊर्जा में बदलता है —
➡️ E_b = Δm c²
🔴 (3) प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा:
➡️ E_b/A = (Δm c²)/A
यह नाभिक की स्थिरता को दर्शाती है।
💡 निष्कर्ष:
यदि प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा अधिक है → नाभिक अधिक स्थिर।
Fe (लोहा) और Ni (निकल) के लिए यह अधिकतम (~8.8 MeV/nucleon) होती है।
✔️ इस प्रकार नाभिकीय बंधन ऊर्जा नाभिक की स्थिरता का प्रत्यक्ष माप है।
Question 29. रेडियोधर्मी अपघटन का नियम व्युत्पन्न कीजिए तथा इसका ग्राफ बनाइए (वर्णनात्मक रूप में)।
Answer:
✏️ मान लीजिए कि किसी समय t पर N रेडियोधर्मी नाभिक उपस्थित हैं।
अपघटन दर dN/dt, नाभिकों की संख्या N के समानुपाती होती है —
➡️ dN/dt = −λN
जहाँ λ = अपघटन नियतांक।
🟢 समाकलन करने पर:
∫(dN/N) = −λ ∫dt
ln(N) = −λt + constant
जब t = 0, N = N₀ ⇒ constant = ln(N₀)
अतः,
➡️ ln(N) = ln(N₀) − λt
➡️ N = N₀ e^(−λt)
🔵 ग्राफिक व्याख्या:
यदि समय को x-अक्ष पर और N को y-अक्ष पर लें, तो यह एक घटता हुआ घातीय वक्र (exponential decay curve) देता है, जो t बढ़ने पर धीरे-धीरे शून्य की ओर अग्रसर होता है।
✔️ अर्थ:
रेडियोधर्मी अपघटन स्वस्फूर्त, यादृच्छिक और ताप/दाब से स्वतंत्र होता है।
Question 30. नाभिकीय विखंडन क्या है? प्रक्रिया समझाइए तथा उत्पन्न ऊर्जा की गणना का सूत्र दीजिए।
Answer:
🔵 परिभाषा:
जब किसी भारी नाभिक (जैसे ²³⁵U) पर एक धीमे न्यूट्रॉन का आघात किया जाता है, तो वह दो छोटे नाभिकों में विभाजित हो जाता है तथा ऊर्जा और अतिरिक्त न्यूट्रॉन उत्पन्न करता है।
🟢 उदाहरण:
➡️ ²³⁵U + n → ¹⁴¹Ba + ⁹²Kr + 3n + 200 MeV
🔴 ऊर्जा गणना:
इस प्रक्रिया में द्रव्यमान का थोड़ा भाग ऊर्जा में बदलता है —
➡️ ΔE = Δm c²
यदि 1 विखंडन में औसतन 200 MeV ऊर्जा उत्पन्न होती है, तो
💡 1 g ²³⁵U में लगभग 2.56×10²¹ नाभिक होते हैं।
कुल ऊर्जा ≈ 200 × 2.56×10²¹ eV ≈ 8.2×10¹⁰ J
🟡 श्रृंखला अभिक्रिया:
उत्पन्न 3 न्यूट्रॉन अन्य नाभिकों में विखंडन प्रारंभ करते हैं, जिससे लगातार ऊर्जा उत्पन्न होती रहती है।
✔️ नियंत्रित स्थिति में यही प्रक्रिया परमाणु रिएक्टर में प्रयुक्त होती है।
Question 31. नाभिकीय संलयन क्या है? यह सूर्य में ऊर्जा का स्रोत क्यों है?
Answer:
🔵 परिभाषा:
दो या अधिक हल्के नाभिक अत्यधिक ताप (~10⁷ K) और दाब की स्थिति में मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं और अत्यधिक ऊर्जा मुक्त करते हैं।
🟢 उदाहरण:
➡️ ²H + ³H → ⁴He + n + 17.6 MeV
🔴 प्रक्रिया का कारण:
संलयन में बने नाभिक का प्रति न्यूक्लियॉन बंधन ऊर्जा प्रारंभिक नाभिकों से अधिक होती है, इसलिए ऊर्जा उत्सर्जित होती है।
🟡 सूर्य में संलयन:
सूर्य में हाइड्रोजन नाभिक (प्रोटॉन) मिलकर हीलियम नाभिक बनाते हैं —
➡️ 4¹H → ⁴He + 2e⁺ + 2ν + ऊर्जा (~26.7 MeV)
💡 निष्कर्ष:
सूर्य और तारों की चमक और ताप का प्रमुख स्रोत यही नाभिकीय संलयन है।
✳️ SECTION – E : केस / अनुप्रयोग आधारित प्रश्न (Q32–Q33)
Question 32. एक रेडियोधर्मी पदार्थ की प्रारंभिक सक्रियता 400 Bq है। 20 दिन बाद सक्रियता 100 Bq रह जाती है। इसका अपघटन नियतांक एवं अर्धायु ज्ञात कीजिए।
Answer:
✏️ सूत्र: A = A₀ e^(−λt)
➡️ 100 = 400 e^(−λ × 20)
⇒ 1/4 = e^(−20λ)
ln(1/4) = −20λ
➡️ λ = (ln4)/20 = 1.386 / 20 = 0.0693 day⁻¹
अब, T₁/₂ = 0.693 / λ
➡️ T₁/₂ = 0.693 / 0.0693 = 10 days
✔️ अपघटन नियतांक = 0.0693 day⁻¹
✔️ अर्धायु = 10 दिन।
Question 33. समझाइए कि नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन में “नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया” क्यों आवश्यक है।
Answer:
🔵 व्याख्या:
नाभिकीय विखंडन में एक नाभिक के टूटने पर 2–3 न्यूट्रॉन उत्पन्न होते हैं। यदि ये सभी तुरंत अन्य नाभिकों को विखंडित कर दें, तो ऊर्जा बहुत तेजी से बढ़ेगी — यह अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया कहलाती है (जैसे परमाणु बम)।
🟢 नियंत्रित अभिक्रिया:
परमाणु रिएक्टर में न्यूट्रॉनों की गति को मॉडरेटर (moderator) और कंट्रोल रॉड (control rods) द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जिससे विखंडन दर संतुलित रहती है।
🔴 उद्देश्य:
ऊर्जा उत्पादन को सुरक्षित, निरंतर और उपयोगी बनाना।
✔️ निष्कर्ष:
नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया से परमाणु रिएक्टरों में बिजली उत्पादन संभव होता है, जबकि अनियंत्रित स्थिति में विस्फोट हो जाता है।
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