Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 10: तरंग प्रकाशिकी
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔵 प्रस्तावना: प्रकाश – तरंग या कण?
प्रकाश की प्रकृति को लेकर शताब्दियों से वैज्ञानिक चर्चा होती रही है। कभी इसे कणात्मक (कणों के रूप में) तो कभी तरंगात्मक माना गया। यह अध्याय तरंग सिद्धांत के आधार पर प्रकाश की प्रकृति को समझाता है और हस्तक्षेप, विवर्तन और ध्रुवण जैसी घटनाओं को विस्तार से स्पष्ट करता है।
✏️ नोट: इस अध्याय में प्रकाश को विद्युत चुंबकीय तरंग के रूप में ग्रहण किया गया है जिसकी गति निर्वात में c = 3 × 10⁸ m/s होती है।
🟢 1. प्रकाश की तरंग प्रकृति
🌿 थॉमस यंग ने प्रयोगों से सिद्ध किया कि प्रकाश हस्तक्षेप और विवर्तन जैसी घटनाएं दिखाता है, जो केवल तरंग प्रकृति से ही समझी जा सकती हैं।
🧠 प्रकाश तरंग: अनुप्रस्थ तरंग होती है, जिसमें विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत तथा गति की दिशा के लम्बवत होते हैं।
✔️ यह तरंग बिना माध्यम के भी गति कर सकती है – जैसे निर्वात में।
🟡 2. यंग का द्वि-छिद्र प्रयोग
थॉमस यंग ने दो संकरे छिद्रों से होकर प्रकाश को गुजरने दिया और स्क्रीन पर अंध व उज्ज्वल धारियाँ (फ्रिंज) प्राप्त कीं।
🧠 प्रमुख सिद्धांत:
➡️ प्रकाश तरंगें यदि समान चरण में मिलती हैं तो सन्निवेश (constructive interference) होता है – उज्ज्वल धारी।
➡️ यदि विपरीत चरण में मिलती हैं तो विलोपन (destructive interference) – अंध धारी।
🧠 फ्रिंज दूरी सूत्र:
β = λD / d
जहाँ,
β = दो उज्ज्वल धारियों के बीच की दूरी
λ = प्रकाश की तरंगदैर्ध्य
D = स्रोत से स्क्रीन की दूरी
d = दोनों छिद्रों के बीच की दूरी
✏️ नोट: यह प्रयोग प्रकाश की तरंग प्रकृति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
🔴 3. सन्निवेशन की आवश्यक शर्तें
✔️ दो स्रोतों से निकलने वाली तरंगें सुसंगत (coherent) होनी चाहिए – अर्थात्, समान तरंगदैर्ध्य और स्थिर फेज अंतर।
✔️ तीव्रता बराबर या समान होनी चाहिए।
✔️ दूरी इतनी हो कि दोनों तरंगें एक-दूसरे से मिलने में सक्षम हों।
🌿 निष्कर्ष: सुसंगत स्रोतों से ही स्पष्ट सन्निवेशन संभव है।
🟢 4. विवर्तन (Diffraction)
विवर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश किसी संकीर्ण रुकावट या छिद्र से गुजरते समय मुड़ जाता है और छाया क्षेत्र में प्रवेश करता है।
🧠 फ्रैनहॉफर विवर्तन एक विशेष प्रकार है जिसमें स्रोत और स्क्रीन अनंत पर या समांतर किरणों के रूप में होते हैं।
✔️ एक छिद्र के लिए विवर्तन: केंद्रीय अधिकतम उज्ज्वल होता है और उसके दोनों ओर कम तीव्र अंध और उज्ज्वल पट्टियाँ होती हैं।
🧠 अंध बिंदु की स्थिति:
a sinθ = nλ
जहाँ,
a = छिद्र की चौड़ाई
θ = विवर्तन कोण
n = क्रम संख्या
🟡 5. विवर्तन एवं सन्निवेशन का अंतर
🔵 सन्निवेशन – दो या अधिक तरंग स्रोतों का संयोजन
🟢 विवर्तन – एक ही स्रोत की तरंग का मुड़ना
✔️ विवर्तन में केंद्रीय उज्ज्वल क्षेत्र चौड़ा होता है
✔️ सन्निवेशन में सभी धारियाँ लगभग समान होती हैं
✏️ महत्वपूर्ण: दो घटनाओं का एक साथ प्रयोग सीडी और डीवीडी जैसी सतहों के अध्ययन में किया जाता है।
🔴 6. प्रकाश का ध्रुवण
ध्रुवण (Polarisation) वह घटना है जिसमें अनुप्रस्थ तरंगों के कंपन एक ही तल में सीमित हो जाते हैं।
🧠 केवल अनुप्रस्थ तरंगें ही ध्रुवित हो सकती हैं, अनुदैर्ध्य नहीं।
✔️ दो ध्रुवणित किरणों को यदि क्रॉस पोलराइज़र से पास किया जाए, तो कोई प्रकाश पार नहीं करता।
💡 प्रयोग: ध्रुवण चश्मों, 3D फिल्मों, तनाव विश्लेषण में
🟢 7. मलूस का नियम (Malus’ Law)
यदि दो ध्रुवक (polarisers) के बीच θ कोण है, तो पारित प्रकाश की तीव्रता:
🧠 सूत्र:
I = I₀ cos²θ
जहाँ,
I₀ = प्रारंभिक तीव्रता
I = पारित प्रकाश की तीव्रता
✏️ नोट: θ = 90° पर I = 0 होता है (पूर्ण अवरोधन)
🟡 8. ब्रूस्टर कोण
जब किसी माध्यम की सतह पर प्रकाश ब्रूस्टर कोण पर आपतित होता है, तो परावर्तित प्रकाश पूर्णत: ध्रुवित होता है।
🧠 सूत्र:
tan i_b = n
जहाँ,
i_b = ब्रूस्टर कोण
n = आपवर्तनांक
✔️ परावर्तित और अपवर्तित किरणों के बीच कोण = 90° होता है।
🔴 9. तरंगदैर्ध्य पर निर्भरता
✔️ सन्निवेशन और विवर्तन की स्थिति तरंगदैर्ध्य पर निर्भर होती है।
✔️ छोटी तरंगदैर्ध्य की तरंगें कम मोड़ती हैं।
🌿 अनुप्रयोग: लाल प्रकाश में फ्रिंज दूरियाँ नीले की अपेक्षा अधिक होती हैं।
🌟 यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है? 🌟
(📦 Why This Lesson Matters Box)
➡️ यह अध्याय प्रकाश के व्यवहार को तरंग दृष्टिकोण से समझाता है।
➡️ यह ऑप्टिकल फाइबर, लेज़र, इंटरफेरोमीटर जैसे आधुनिक उपकरणों की नींव है।
➡️ भौतिकी की गहरी समझ और तकनीकी नवाचार में यह अध्याय अत्यंत उपयोगी है।
📝 Quick Recap: (स्मृति-पुनरावलोकन)
🔵 सन्निवेशन – β = λD / d
🟢 विवर्तन – a sinθ = nλ
🟡 ध्रुवण – केवल अनुप्रस्थ तरंगें
🔴 मलूस नियम – I = I₀ cos²θ
🟢 ब्रूस्टर कोण – tan i_b = n
🟡 उज्ज्वल-अंध धारियाँ – फेज अंतर के कारण
🔴 तरंगदैर्ध्य पर निर्भर – विवर्तन और सन्निवेशन
🟢 यंग प्रयोग – तरंग सिद्धांत का प्रमाण



🔻 सारांश (Summary in ~300 Words) 🔻
🔹 तरंग प्रकाशिकी अध्याय प्रकाश की तरंग प्रकृति को सिद्ध करता है। इसमें हस्तक्षेप, विवर्तन और ध्रुवण जैसे परिघटनाओं को गहराई से समझाया गया है।
🔸 यंग का द्वि-छिद्र प्रयोग यह सिद्ध करता है कि प्रकाश तरंग है क्योंकि वह सुसंगत स्रोतों से सन्निवेशन उत्पन्न करता है। सुसंगतता, तरंगदैर्ध्य, दूरी और छिद्रों की स्थिति फ्रिंज दूरी को प्रभावित करती है।
🔹 विवर्तन के अंतर्गत प्रकाश का मुड़ना और छाया क्षेत्र में प्रवेश प्रमुख है। एकल छिद्र या संकीर्ण रुकावट से विवर्तन उत्पन्न होता है। इसमें मुख्य अधिकतम उज्ज्वल होता है और उसके दोनों ओर अंध व उज्ज्वल धारियाँ होती हैं।
🔸 ध्रुवण से यह स्पष्ट होता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है। ध्रुवक, विश्लेषक, मलूस नियम, ब्रूस्टर कोण – ये सभी घटनाएं ध्रुवण की विशेषताओं को उजागर करती हैं।
🔹 तरंग प्रकाशिकी की घटनाएँ – जैसे सन्निवेशन और विवर्तन – तरंगदैर्ध्य पर निर्भर होती हैं, जो हमें रंगों, फ्रिंज पैटर्न और प्रकाशिक उपकरणों के कार्य को समझने में सहायक होती हैं।
यह अध्याय विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और तकनीकी नवाचार में प्रयुक्त अनेक यन्त्रों और अवधारणाओं की नींव रखता है, जिससे विद्यार्थी भविष्य की भौतिकी के लिए तैयार होते हैं।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 10.1
589 nm तरंगदैर्घ्य का एकरंगी प्रकाश वायु से जल की सतह पर आपतित होता है।
(a) पृष्ठतल झुकाव (angle of incidence) पर अपवर्तित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति तथा चाल ज्ञात कीजिए। जल का अपवर्तनांक 1.33 है।
उत्तर:
(a)
दिया गया है:
तरंगदैर्घ्य (λ₁) = 589 nm = 589 × 10⁻⁹ m
जल का अपवर्तनांक (n) = 1.33
वायु में प्रकाश की चाल (c) = 3.0 × 10⁸ m/s
(i) जल में प्रकाश की चाल (v):
v = c / n = (3.0 × 10⁸ m/s) / 1.33 ≈ 2.26 × 10⁸ m/s
(ii) जल में तरंगदैर्घ्य (λ₂):
λ₂ = λ₁ / n = (589 × 10⁻⁹ m) / 1.33 ≈ 443 × 10⁻⁹ m = 443 nm
(iii) प्रकाश की आवृत्ति (ν):
ν = c / λ₁ = (3.0 × 10⁸ m/s) / (589 × 10⁻⁹ m) ≈ 5.09 × 10¹⁴ Hz
(आवृत्ति माध्यम परिवर्तन से नहीं बदलती।)
प्रश्न 10.2
निम्नलिखित घटनाओं में प्रकीर्ण प्रकाश की आकृति क्या है?
(a) किसी बिंदु छेद से अपवर्तित प्रकाश।
(b) उत्तल लेंस से निर्मित प्रकाश, जिसके फोकस बिंदु पर कोई बिंदु छेद रखा है।
(c) किसी दूरस्थ तारे से आने वाले प्रकाश तरंगों का सूर्य द्वारा अवरोधित (intercepted) भाग।
उत्तर:
(a) बिंदु छिद्र से अपवर्तित प्रकाश के लिए प्रकीर्णता पैटर्न एक केंद्रीय प्रबल दीप्ति (central bright spot) एवं चारों ओर वैकल्पिक उज्ज्वल एवं अंधकारमय पट्टियों वाला होता है, जिसे वायुहीन माध्यम में फ्रैनहोफर प्रकीर्णता कहा जाता है।
(b) जब एक उत्तल लेंस के फोकस पर बिंदु छिद्र रखा जाता है, तो लेंस के द्वारा समांतर प्रकाश तरंगें बनती हैं। ये तरंगें परदे पर प्रकीर्णता पैटर्न बनाती हैं जो कि वलयों के रूप में होता है — केंद्रीय दीप्ति से शुरू होकर वैकल्पिक उज्ज्वल एवं अंधकारमय वलय।
(c) दूरस्थ तारे से आने वाली समांतर तरंगें सूर्य द्वारा आंशिक रूप से अवरोधित की जाती हैं। इससे सूर्य के किनारे के चारों ओर प्रकीर्णता वलय उत्पन्न होते हैं, जिससे तारे की स्पष्ट सीमा दिखाई नहीं देती — जिसे फ्रेशनेल प्रकीर्णता कहते हैं।
प्रश्न 10.3
काँच का अपवर्तनांक 1.5 है। काँच में प्रकाश की चाल क्या होगी? (निर्वात में प्रकाश की चाल 3.0 × 10⁸ m s⁻¹ है।)
(b) क्या काँच में प्रकाश की चाल, प्रकाश के रंग पर निर्भर करती है? यदि हाँ, तो लाल तथा बैंगनी में से कौन-सा रंग काँच में अधिक तेज चलेगा?
उत्तर:
(a)
v = c / n
v = (3.0 × 10⁸ m/s) / 1.5 = 2.0 × 10⁸ m/s
अतः काँच में प्रकाश की चाल 2.0 × 10⁸ m/s होगी।
(b)
हाँ, प्रकाश की चाल काँच में रंग पर निर्भर करती है क्योंकि विभिन्न रंगों के लिए अपवर्तनांक भिन्न होता है।
लाल रंग की तरंगदैर्घ्य अधिक होती है तथा अपवर्तनांक कम होता है, अतः काँच में लाल रंग की चाल बैंगनी से अधिक होती है।
प्रश्न 10.4
यंग के द्विचिर प्रयोग में छिद्रों के बीच की दूरी 0.28 mm है तथा परदा 1.4 m की दूरी पर रखा गया है। केंद्रीय दीप्ति त्रिपुट एवं चतुर्थ दीप्ति त्रिपुट के बीच की दूरी 1.2 cm मापी गई है। प्रयोग में उपयोग किए गए प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया:
d = 0.28 mm = 0.28 × 10⁻³ m
D = 1.4 m
x = 1.2 cm = 0.012 m
n = 4 (चतुर्थ दीप्ति त्रिपुट)
प्रसरण दूरी सूत्र:
x = nλD / d
⇒ λ = xd / nD
= (0.012 × 0.28 × 10⁻³) / (4 × 1.4)
= (3.36 × 10⁻⁶) / 5.6
= 0.6 × 10⁻⁶ m
= 600 nm
अतः प्रयोग में प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 600 nm है।
प्रश्न 10.5
यंग के द्विचिर प्रयोग में, λ तरंगदैर्घ्य वाले एकरंगी प्रकाश प्रयोग किया गया है, परंतु वह बिंदु पर जहाँ पर्यवेक्षक A है, प्रकाश की तीव्रता K दर्शित है। उस बिंदु पर प्रकाश की तीव्रता कितनी होगी जहाँ पर्यवेक्षक λ/3 दूर है?
उत्तर:
प्रकाश की तीव्रता (I) अंतरपात (interference) के कारण इस पर निर्भर करती है कि दो तरंगों में कलांतर (phase difference) कितना है।
कलांतर φ = (2π/λ) × Δx
जहाँ Δx = λ/3
⇒ φ = (2π/λ) × (λ/3) = 2π/3
I = 4I₀ cos²(φ/2)
K = 4I₀ (क्योंकि अधिकतम तीव्रता)
अब,
I’ = 4I₀ cos²(π/3)
= 4I₀ × (1/2)²
= 4I₀ × 1/4 = I₀
I’ = K / 4
अतः उस बिंदु पर तीव्रता K/4 होगी।
प्रश्न 10.6
यंग के द्विचिर प्रयोग में व्यक्तिकरण चित्रों को प्राप्त करने के लिए, 650 nm तथा 520 nm तरंगदैर्घ्य के प्रकाश-युग्म का उपयोग किया गया।
(a) 650 nm तरंगदैर्घ्य के लिए परदे पर तीसरे दीप्त त्रिपुट को केंद्रीय उज्ज्वल से दूरी ज्ञात कीजिए।
(b) केंद्रीय उज्ज्वल से उस न्यूनतम दूरी को ज्ञात कीजिए जहाँ दोनों तरंगदैर्घ्य के कारण दीप्त त्रिपुट संलग्न (coincide) होते हैं।
उत्तर:
(a)
d = दूरी दो छिद्रों के बीच (माना जाए कि प्रयोग में पूर्ववर्ती प्रयोग के d = 0.28 mm एवं D = 1.4 m जैसे ही हैं)
xₙ = nλD / d
n = 3, λ = 650 nm = 650 × 10⁻⁹ m, D = 1.4 m, d = 0.28 × 10⁻³ m
x₃ = (3 × 650 × 10⁻⁹ × 1.4) / (0.28 × 10⁻³)
= (2.73 × 10⁻⁶) / (0.28 × 10⁻³) ≈ 9.75 mm
(b)
दीप्त त्रिपुट तब संलग्न होंगे जब n₁λ₁ = n₂λ₂
650n₁ = 520n₂
n₁/n₂ = 52/65 = 4/5
LCM of wavelengths = LCM(650, 520) = 3380 nm
तो संलग्न दीप्त त्रिपुट की न्यूनतम दूरी x = nλD/d
n = 3380/λ, जहाँ λ = 650 nm (या 520 nm दोनों पर लागू)
x = (3380 × 10⁻⁹ × 1.4) / (0.28 × 10⁻³)
= (4.732 × 10⁻⁶) / (0.28 × 10⁻³) ≈ 16.9 mm
अतः न्यूनतम दूरी ≈ 16.9 mm पर दोनों दीप्त त्रिपुट संलग्न होंगे।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
(CBSE MODEL प्रश्न पत्र)
सिर्फ इसी पाठ से निर्मित CBSE MODEL प्रश्न पत्र।
प्रश्न 1. एक पतली द्विचिरा में दो समान तरंगें तरंगदैर्घ्य वाली जब एक ही प्रावस्था में मिलती हैं, तो परिणामस्वरूप प्राप्त तरंग होगी —
(A) व्यतिकरणहीन
(B) न्यूनतम तीव्रता वाली
(C) अधिकतम तीव्रता वाली
(D) स्थिर तरंग
उत्तर: (C) अधिकतम तीव्रता वाली
प्रश्न 2. यंग के द्विचिरा प्रयोग में यदि फ्रिंजों की दूरी को दोगुना करना हो, तो किस राशि को दोगुना किया जाए?
(A) प्रकाश की तरंगदैर्घ्य
(B) चिराओं के बीच की दूरी
(C) स्रोत से पर्दे की दूरी
(D) स्रोत की तीव्रता
उत्तर: (C) स्रोत से पर्दे की दूरी
प्रश्न 3. व्यतिकरण की फ्रिंजों के कारण पर आधारित कथन में से सही विकल्प चुनिए:
(A) प्रकाश का विभाजन आवश्यक नहीं है
(B) दो सुसंगत तरंगें आवश्यक हैं
(C) व्यतिकरण केवल परावर्तन द्वारा प्राप्त होता है
(D) यह केवल आवृत्तियों में अंतर पर निर्भर करता है
उत्तर: (B) दो सुसंगत तरंगें आवश्यक हैं
प्रश्न 4. यंग के प्रयोग में फिंजों की चौड़ाई है 0.3 मिमी, यदि प्रकाश का तरंगदैर्घ्य 600 nm है और चिराओं की दूरी 1 मिमी है, तो स्रोत से पर्दे की दूरी होगी:
(A) 0.5 m
(B) 0.3 m
(C) 0.6 m
(D) 0.1 m
उत्तर: (C) 0.5 m
प्रश्न 5. व्यतिकरण पैटर्न में गहरी व उजली फ्रिंजें प्राप्त होती हैं क्योंकि:
(A) दो तरंगें परस्पर स्वतंत्र होती हैं
(B) तीव्रताें में फर्क होता है
(C) दो तरंगें सुसंगत होती हैं
(D) वे भिन्न स्रोतों से आती हैं
उत्तर: (C) दो तरंगें सुसंगत होती हैं
प्रश्न 6. निम्नलिखित में से कौन-सी घटना सुसंगत स्रोत की आवश्यकता नहीं रखती?
(A) व्यतिकरण
(B) विवर्तन
(C) ध्रुवण
(D) प्रकाश का अपवर्तन
उत्तर: (D) प्रकाश का अपवर्तन
प्रश्न 7. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है?
(A) परावर्तन कोण सदा आपतन कोण से बड़ा होता है
(B) एक ही माध्यम में प्रकाश की चाल सभी रंगों के लिए समान होती है
(C) लाल प्रकाश की तरंगदैर्घ्य नीले से अधिक होती है
(D) सभी रंगों का विवर्तन समान होता है
उत्तर: (C) लाल प्रकाश की तरंगदैर्घ्य नीले से अधिक होती है
प्रश्न 8. फाइजो फ्रिंजें देखी जाती हैं:
(A) ध्वनि तरंगों के साथ
(B) प्रकाश तरंगों के साथ
(C) यांत्रिक तरंगों के साथ
(D) एक्स-रे तरंगों के साथ
उत्तर: (B) प्रकाश तरंगों के साथ
प्रश्न 9. Assertion (A): यंग का द्विचिरा प्रयोग व्यतिकरण का प्रमाण है।
Reason (R): दो सुसंगत तरंग स्रोतों से उत्पन्न तरंगें मिलने पर तीव्रता में अन्तर आता है।
उत्तर: (A) Assertion और Reason दोनों सही हैं और Reason, Assertion की सही व्याख्या है।
प्रश्न 10. यंग प्रयोग में यदि हरे प्रकाश की जगह नीला प्रकाश प्रयोग में लाया जाए तो फ्रिंजों की चौड़ाई:
(A) बढ़ेगी
(B) घटेगी
(C) अपरिवर्तित रहेगी
(D) पहले बढ़ेगी फिर घटेगी
उत्तर: (B) घटेगी
प्रश्न 11. दो तरंग स्रोतों के बीच सुसंगति के लिए आवश्यक है कि:
(A) उनके तीव्रता समान हो
(B) उनके तरंगदैर्घ्य समान हों
(C) उनके वेग समान हो
(D) दोनों एक ही माध्यम में हों
उत्तर: (B) उनके तरंगदैर्घ्य समान हों
प्रश्न 12. यदि किसी फ्रिंज की स्थिति x है और स्रोत की तरंगदैर्घ्य λ है, तो दो उजली फ्रिंजों के बीच की दूरी होगी:
(A) λ
(B) 2λ
(C) λ/2
(D) xλ
उत्तर: (A) λ
प्रश्न 13. विवर्तन के कारण प्रकाश तरंग:
(A) परावर्तित होती है
(B) अपवर्तित होती है
(C) विक्षिप्त होती है
(D) मोड़ती है और मोड़ के बाद फैलती है
उत्तर: (D) मोड़ती है और मोड़ के बाद फैलती है
प्रश्न 14. पतली परत के रंगीन दिखाई देने का कारण है:
(A) व्यतिकरण
(B) विवर्तन
(C) ध्रुवण
(D) वर्ण विकिरण
उत्तर: (A) व्यतिकरण
प्रश्न 15. प्रकाश की तरंग प्रकृति सिद्ध की जाती है:
(A) यंग के प्रयोग द्वारा
(B) फोटोन सिद्धांत द्वारा
(C) न्यूटन के नियम द्वारा
(D) रेडियोध्वनि प्रयोग द्वारा
उत्तर: (A) यंग के प्रयोग द्वारा
प्रश्न 16. दो तरंगें जब विपरीत प्रावस्थाओं में मिलती हैं, तब क्या होता है?
(A) पूर्ण रचना
(B) पूर्ण विनाश
(C) नई तरंग उत्पन्न होती है
(D) कोई परिवर्तन नहीं होता
उत्तर: (B) पूर्ण विनाश
प्रश्न 17. किसी माध्यम में प्रकाश की गति कम हो जाती है क्योंकि:
(A) माध्यम में अपवर्तनांक अधिक होता है
(B) माध्यम पारदर्शी नहीं होता
(C) प्रकाश ध्रुवित होता है
(D) प्रकाश का वर्णक्रम भिन्न होता है
उत्तर: (A) माध्यम में अपवर्तनांक अधिक होता है
प्रश्न 18. केस आधारित प्रश्न:
एक प्रयोग में दो सुसंगत तरंग स्रोतों का उपयोग करते हुए पर्दे पर फ्रिंजों का पैटर्न प्राप्त किया गया। जब एक स्रोत की दूरी बढ़ाई गई तो उजली फ्रिंजों की स्थिति बदल गई।
इससे क्या निष्कर्ष निकलता है?
(A) केवल दूरी महत्वपूर्ण है
(B) सुसंगति समाप्त हो गई
(C) प्रावस्था में अंतर उत्पन्न हुआ
(D) कोई परिवर्तन नहीं हुआ
उत्तर: (C) प्रावस्था में अंतर उत्पन्न हुआ
🔷 Section B: प्रश्न 19 से 23 (प्रत्येक 2 अंक)
प्रश्न 19. सुसंगत तरंग स्रोतों की परिभाषा दीजिए और किसी एक उदाहरण का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वे स्रोत जो समान आवृत्ति, समान तरंगदैर्घ्य और स्थायी प्रावस्था अंतर रखते हैं, सुसंगत स्रोत कहलाते हैं।
उदाहरण: यंग के द्विचिरा प्रयोग में एक ही स्रोत से निकले दो स्रोत सुसंगत होते हैं।
प्रश्न 20. यंग के द्विचिरा प्रयोग में फ्रिंजों की चौड़ाई का सूत्र लिखिए और उसके घटकों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र:
β = λD / d
जहाँ,
λ = प्रकाश की तरंगदैर्घ्य,
D = पर्दे और चिरा के बीच की दूरी,
d = दोनों चिराओं के बीच की दूरी
प्रश्न 21. विवर्तन और व्यतिकरण में कोई दो मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर:
(1) व्यतिकरण में दो सुसंगत स्रोत होते हैं जबकि विवर्तन एक ही स्रोत से होता है।
(2) व्यतिकरण में स्पष्ट फ्रिंजें बनती हैं, जबकि विवर्तन में केंद्रीय फ्रिंज अधिक तीव्र और बाकी मंद होती हैं।
प्रश्न 22. यंग के द्विचिरा प्रयोग से प्रकाश की तरंग प्रकृति कैसे सिद्ध होती है?
उत्तर:
यंग के प्रयोग में दो सुसंगत तरंग स्रोतों से प्रकाश आने पर फ्रिंज पैटर्न बनता है। यह तभी संभव है जब प्रकाश तरंगों के रूप में हो और वे रचनात्मक व विध्वंसात्मक व्यतिकरण करें। इससे प्रकाश की तरंग प्रकृति सिद्ध होती है।
प्रश्न 23. यदि यंग के प्रयोग में प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य को आधा कर दिया जाए, तो फ्रिंज चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
फ्रिंज चौड़ाई β = λD / d
यदि λ को आधा कर दिया जाए, तो β भी आधी हो जाएगी।
अतः फ्रिंज चौड़ाई घट जाएगी।
🔶 Section C: प्रश्न 24 से 28 (प्रत्येक 3 अंक)
प्रश्न 24. पतली परत के रंगीन दिखाई देने की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जब प्रकाश किसी पारदर्शी पतली परत (जैसे साबुन की परत) पर पड़ता है, तो परावर्तन और अपवर्तन के कारण परत की ऊपरी और निचली सतहों से परावर्तित तरंगों में प्रावस्था अंतर उत्पन्न होता है। ये तरंगें एक-दूसरे के साथ व्यतिकरण करती हैं। अलग-अलग तरंगदैर्घ्य के लिए रचनात्मक और विध्वंसात्मक व्यतिकरण होता है जिससे विभिन्न रंग दिखाई देते हैं।
प्रश्न 25. न्यूनतम तीव्रता की स्थिति के लिए यंग के प्रयोग में प्रावस्था अंतर की शर्त सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
विनाशकारी व्यतिकरण के लिए प्रावस्था अंतर Δφ = (2n – 1)π होना चाहिए।
पथ अंतर Δx = (2n – 1)λ / 2
जहाँ n = 1, 2, 3,…
इस स्थिति में दोनों तरंगें विपरीत प्रावस्था में होती हैं और एक-दूसरे को निष्क्रिय कर देती हैं, जिससे न्यूनतम तीव्रता प्राप्त होती है।
प्रश्न 26. किसी विवर्तन जाल में तीसरे क्रम का उज्ज्वल फ्रिंज 30° के कोण पर दिखाई देता है। यदि प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 600 nm है, तो जाल स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विधान: d sinθ = nλ
d × sin(30°) = 3 × 600 × 10⁻⁹
⇒ d × 0.5 = 1800 × 10⁻⁹
⇒ d = 3600 × 10⁻⁹ = 3.6 × 10⁻⁶ मीटर
उत्तर: जाल स्थिरांक = 3.6 माइक्रोमीटर
प्रश्न 27. ध्रुवण क्या है? एक दैनिक जीवन से उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
ध्रुवण वह प्रक्रिया है जिसमें अनुदैर्ध्य तरंगों के दोलन केवल एक तल में सीमित हो जाते हैं।
उदाहरण: ध्रुवित चश्मा सूरज से आने वाली चमक को कम करता है क्योंकि वह केवल एक तल के दोलनों को पारित करता है।
प्रश्न 28. यंग के प्रयोग में यदि फ्रिंज चौड़ाई 0.4 mm, चिराओं की दूरी 0.8 mm और पर्दे की दूरी 1.6 m है, तो प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
β = λD / d
⇒ λ = βd / D
= (0.4 × 10⁻³ m) × (0.8 × 10⁻³ m) / 1.6
= (0.32 × 10⁻⁶) / 1.6 = 2 × 10⁻⁷ m = 200 nm
उत्तर: तरंगदैर्घ्य = 200 नैनोमीटर
🔷 Section D: प्रश्न 29 से 31 (प्रत्येक 4 अंक)
(केस आधारित प्रश्न)
प्रश्न 29.
स्थिति: एक यंग का द्विचिरा प्रयोग किया गया जिसमें चिराओं के बीच की दूरी 0.28 mm है और परदा 1.4 m दूर है। एक केंद्रीय दीप्त फ्रिंज एवं दो द्वितीयक दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी 1.2 cm मापी गई।
(क) फ्रिंज चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
(ख) प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(क) द्वितीयक दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी = 1.2 cm = 12 mm
⇒ इसमें 2 फ्रिंज चौड़ाई सम्मिलित है
⇒ फ्रिंज चौड़ाई β = 12 mm / 2 = 6 mm = 6 × 10⁻³ m
(ख) β = λD / d
⇒ λ = βd / D
= (6 × 10⁻³ m) × (0.28 × 10⁻³ m) / 1.4 m
= (1.68 × 10⁻⁶) / 1.4 = 1.2 × 10⁻⁶ m = 1200 nm
उत्तर: तरंगदैर्घ्य = 1200 नैनोमीटर
प्रश्न 30.
स्थिति: एक द्विचिरा प्रयोग में λ तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश का प्रयोग किया गया है। एक पर्दे पर केंद्र से D दूरी पर एक बिंदु P है, जहाँ पर प्रकाश की तीव्रता I है। ज्ञात है कि वहाँ पर व्यतिकरण न्यूनतम है।
(क) बिंदु P पर पथ अंतर कितना होगा?
(ख) यदि I₀ अधिकतम तीव्रता है, तो बिंदु P पर प्रकाश की तीव्रता क्या होगी?
उत्तर:
(क) न्यूनतम के लिए पथ अंतर = (2n – 1)λ / 2
अतः पथ अंतर = λ / 2, 3λ / 2, …
क्योंकि तीव्रता न्यूनतम है,
⇒ पथ अंतर = (2n – 1)λ / 2
(ख) न्यूनतम पर I = 0
(क्योंकि दोनों तरंगें विध्वंसात्मक व्यतिकरण करती हैं)
उत्तर:
पथ अंतर = (2n – 1)λ / 2
प्रकाश की तीव्रता I = 0
प्रश्न 31.
स्थिति: एक विवर्तन जाल में 650 nm तथा 520 nm तरंगदैर्घ्य की प्रकाश पुंजों का उपयोग किया गया है।
(क) तीसरे क्रम के विवर्तन फ्रिंज के लिए कोण ज्ञात कीजिए जहाँ 650 nm तरंगदैर्घ्य के लिए रचनात्मक व्यतिकरण होगा।
(ख) वह न्यूनतम क्रम ज्ञात कीजिए जिसमें दोनों तरंगदैर्घ्य की मुख्य फ्रिंजें एक साथ संयोग करती हैं।
उत्तर:
(क)
विधान: d sinθ = nλ
मान लें कि d ज्ञात है,
⇒ sinθ = (3 × 650 × 10⁻⁹) / d
θ को d के अनुपात में व्यक्त किया जा सकता है।
(ख)
संयोग के लिए,
n₁λ₁ = n₂λ₂
तो न्यूनतम सामान्य गुणज (LCM) लें:
LCM of 650 and 520 = 3380 nm
तो n = LCM / λ = 3380 / 650 = 5.2 → नहीं हो सकता
3380 / 130 = 26 →
अतः 650 nm के लिए n = 3380 / 650 = 5.2 (नहीं चलेगा)
LCM = 2600 nm
n₁ = 4 (for 650), n₂ = 5 (for 520)
उत्तर:
न्यूनतम क्रम जिसमें संयोग होगा = 2600 nm
क्रम: 4 (650 nm), 5 (520 nm)
🔶 Section E: प्रश्न 32 से 35 (प्रत्येक 5 अंक)
प्रश्न 32.
विवर्तन की परिघटना क्या है? एकल चिरा से विवर्तन के लिए तीव्रता वितरण का गणितीय विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
जब प्रकाश एक संकीर्ण चिरा से होकर गुजरता है और एक परदे पर फैलता है, तो यह विवर्तन कहलाता है।
एकल चिरा से विवर्तन के लिए:
तीव्रता I(θ) = I₀ (sin β / β)²
जहाँ, β = (πa sinθ) / λ
a = चिरा की चौड़ाई
θ = कोणीय विस्थापन
I₀ = केंद्रीय अधिकतम तीव्रता
रचनात्मक व्यतिकरण के लिए: β = nπ ⇒ sinθ = nλ / a
⇒ उपकेंद्रक अधिकतम नहीं होते
पहला न्यूनतम: sinθ = λ / a
निष्कर्ष: केवल केंद्रीय फ्रिंज तेज होता है, बाकी मंद।
प्रश्न 33.
यंग का द्विचिरा प्रयोग सिद्ध कीजिए और फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
यंग का प्रयोग: दो सुसंगत चिराओं S₁ और S₂ से प्रकाश निकलकर परदे पर मिलते हैं और व्यतिकरण करते हैं।
फ्रिंज की चौड़ाई:
β = x₂ – x₁
पथ अंतर = d sinθ ≈ d x / D
व्यतिकरण की स्थिति:
rचनात्मक: d x / D = nλ
⇒ x = nλ D / d
⇒ β = λ D / d
जहाँ,
λ = तरंगदैर्घ्य
D = चिराओं और परदे के बीच दूरी
d = चिराओं के बीच की दूरी
उत्तर:
फ्रिंज चौड़ाई β = λ D / d
प्रश्न 34.
ध्रुवण की घटना समझाइए। यह कैसे प्रकाश की तरंग प्रकृति को सिद्ध करता है? एक प्रयोग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ध्रुवण वह प्रक्रिया है जिसमें अनुदैर्ध्य दोलनों वाली तरंगें केवल एक तल में दोलित होती हैं।
ध्रुवण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होता है।
यदि प्रकाश ध्रुवित हो सकता है, तो यह तरंग स्वरूप को सिद्ध करता है।
प्रयोग: निकोल प्रिज्म
अप्रकाशित प्रकाश पहले प्रिज्म से गुजरकर आंशिक रूप से ध्रुवित होता है। दूसरा प्रिज्म घुमाते हैं तो तीव्रता घटती-बढ़ती है।
निष्कर्ष: यह सिद्ध करता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है।
प्रश्न 35.
विवर्तन जाल क्या है? इसके कार्य सिद्धांत को समझाइए एवं तरंगदैर्घ्य मापन में उपयोग समझाइए।
उत्तर:
विवर्तन जाल में बहुत सी संकीर्ण चिराएं एक समान दूरी पर होती हैं।
प्रत्येक चिरा से निकलने वाली तरंगें परदे पर मिलती हैं और व्यतिकरण करती हैं।
सिद्धांत:
d sinθ = nλ
जहाँ,
d = जाल स्थिरांक
n = क्रम संख्या
λ = तरंगदैर्घ्य
θ = विवर्तन कोण
यदि θ और n ज्ञात हैं, तो λ = d sinθ / n
प्रयोग: स्पेक्ट्रोमीटर द्वारा λ ज्ञात किया जाता है।
निष्कर्ष: विवर्तन जाल प्रकाश के स्पेक्ट्रा विश्लेषण हेतु अत्यंत सटीक यंत्र है।
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