Class 12 : Chemistry (Hindi) – Lesson 4. d- एवं f- ब्लॉक के तत्व
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔵 प्रस्तावना:
आवर्त सारणी में मध्य भाग में स्थित वे तत्व जिनकी बाह्यतम कक्षिका में d या f उप-आवरण क्रमशः भर रहे होते हैं, उन्हें संक्रमण (Transition) तथा आन्तरिक संक्रमण (Inner Transition) तत्व कहते हैं। d-तत्व समूह 3 से 12 तक और f-तत्व लैंथेनाइड व एक्टिनाइड श्रेणी में पाए जाते हैं। इन तत्वों के विशिष्ट गुण – जैसे परिवर्तनशील संयोजकता, रंगीन यौगिक, उत्प्रेरक क्रियाशीलता, जटिल यौगिक बनाना, चुम्बकत्व – इन्हें विशिष्ट बनाते हैं।
🟢 d-ब्लॉक के तत्व (संक्रमण तत्व):
📍 स्थिति:
समूह 3 से 12 तक के तत्व जिनमें d-कक्षिका क्रमशः भर रही हो।
सामान्य इलेक्ट्रॉन विन्यास: (n−1)d¹–¹⁰ ns¹–²
✔ उदाहरण: Sc (21), Ti (22), V (23), Cr (24), Mn (25), Fe (26), Co (27), Ni (28), Cu (29), Zn (30) आदि।
🟡 संक्रमण तत्वों की सामान्य विशेषताएँ:
1️⃣ परिवर्तनशील संयोजकता:
d-उपकक्षिकाओं में इलेक्ट्रॉनों के कारण विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ संभव हैं।
📘 उदाहरण: Fe²⁺, Fe³⁺; Mn²⁺ से Mn⁷⁺ तक।
2️⃣ रंगीन यौगिक बनाना:
अपूर्ण d-कक्षिकाओं में इलेक्ट्रॉन संक्रमण (d–d संक्रमण) के कारण रंग उत्पन्न होता है।
📘 उदाहरण: Ti³⁺ (बैंगनी), Cr³⁺ (हरा)।
3️⃣ उत्प्रेरक गुण:
इनकी सतह पर असम्पृक्त कक्षिकाएँ होती हैं जो अभिकारकों को सक्रिय अवस्था में लाती हैं।
📍 उदाहरण: V₂O₅ (SO₂ → SO₃ में उत्प्रेरक), Fe (NH₃ निर्माण में)।
4️⃣ चुम्बकीय गुण:
अविवाहित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण ये पराचुम्बकीय (Paramagnetic) होते हैं।
📐 चुंबकीय आघूर्ण: μ = √(n(n+2))
5️⃣ जटिल यौगिक बनाना:
इनकी छोटी आयनिक त्रिज्या और उच्च आवेश के कारण लिगैण्ड्स के साथ समन्वय यौगिक बनते हैं।
📘 उदाहरण: [Fe(CN)₆]⁴⁻, [Cu(NH₃)₄]²⁺।
6️⃣ कठोरता एवं उच्च गलनांक:
धातु-धातु आबंधन प्रबल होने से उच्च गलनांक व घनत्व पाए जाते हैं।
7️⃣ संक्रमण धातु आयन प्रायः रंगीन व चुम्बकीय होते हैं, जबकि Zn, Cd, Hg के यौगिक रंगहीन हैं क्योंकि उनकी d-कक्षिकाएँ पूर्ण भरी हैं (d¹⁰)।
🔵 4th, 5th, 6th Period के d-ब्लॉक तत्व:
📘 4th Period (3d श्रृंखला): Sc → Zn
📘 5th Period (4d श्रृंखला): Y → Cd
📘 6th Period (5d श्रृंखला): La (57), Hf → Hg
✔ La और Ac में f-कक्षिका प्रारम्भ होती है।
🟢 d-श्रृंखलाओं की तुलनात्मक विशेषताएँ:
गुणधर्म 3d 4d 5d
परमाणु त्रिज्या तुलनात्मक रूप से छोटी अधिक लगभग समान (lanthanide संकुचन के कारण)
घनत्व कम अधिक अत्यधिक
ऑक्सीकरण अवस्थाएँ विविध स्थिर स्थिर व जटिल
रंगीन यौगिक प्रबल अपेक्षाकृत गहरे समान प्रवृत्ति
🟡 महत्वपूर्ण तत्वों का संक्षिप्त अध्ययन:
🔹 टाइटेनियम (Ti):
📍 परमाणु क्रमांक – 22
📘 इलेक्ट्रॉन विन्यास – [Ar]3d²4s²
💡 गुण: हल्की, दृढ़, जंग-प्रतिरोधी।
📌 उपयोग: वायुयान, मिश्रधातु, TiO₂ वर्णक में।
🔹 वैनाडियम (V):
📍 परमाणु क्रमांक – 23
📘 इलेक्ट्रॉन विन्यास – [Ar]3d³4s²
✔ ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: +2, +3, +4, +5
📌 V₂O₅ सल्फर अम्ल निर्माण में उत्प्रेरक।
🔹 क्रोमियम (Cr):
📍 परमाणु क्रमांक – 24
📘 इलेक्ट्रॉन विन्यास – [Ar]3d⁵4s¹ (अर्धभरी स्थिरता)
💡 गुण: कठोर, चमकीली धातु।
📌 K₂Cr₂O₇ (संतरी) और K₂CrO₄ (पीला) महत्वपूर्ण यौगिक।
🔹 मैंगनीज (Mn):
📍 परमाणु क्रमांक – 25
📘 इलेक्ट्रॉन विन्यास – [Ar]3d⁵4s²
✔ ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: +2 से +7 तक।
📌 KMnO₄ (बैंगनी), शक्तिशाली ऑक्सीकारक।
🔹 लौह (Fe):
📍 परमाणु क्रमांक – 26
📘 इलेक्ट्रॉन विन्यास – [Ar]3d⁶4s²
💡 अवस्थाएँ: +2, +3
📌 FeCl₂ (हल्का हरा), FeCl₃ (पीला-भूरा)।
📍 स्टील, हीमोग्लोबिन निर्माण में आवश्यक।
🔹 ताम्र (Cu):
📍 परमाणु क्रमांक – 29
📘 इलेक्ट्रॉन विन्यास – [Ar]3d¹⁰4s¹
💡 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: +1, +2
📌 CuSO₄·5H₂O नीला; विद्युत चालकता अत्यधिक।
🔹 जस्ता (Zn):
📍 परमाणु क्रमांक – 30
📘 इलेक्ट्रॉन विन्यास – [Ar]3d¹⁰4s²
📍 +2 एकमात्र स्थिर अवस्था।
📌 ZnO, ZnS, ZnSO₄ प्रमुख यौगिक।
🔵 विशेष प्रवृत्तियाँ (Trends):
1️⃣ परमाणु आकार:
श्रृंखला में क्रमशः घटता है।
Lanthanide संकुचन के कारण 4d व 5d आकार लगभग समान।
2️⃣ आयनीकरण ऊर्जा:
कुल मिलाकर बढ़ती प्रवृत्ति, परन्तु अनियमितता d-उपकक्षिकाओं के कारण।
3️⃣ वैद्युत चालकता:
सभी धातुएँ उत्कृष्ट चालक हैं।
4️⃣ ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
Mn तक अवस्थाएँ बढ़ती हैं, फिर घटती हैं।
5️⃣ संयोजकता:
अभिकारकों के अनुसार परिवर्तनशील।
6️⃣ धात्विक बन्धन:
कक्षिकाओं के आच्छादन से मजबूत धात्विक बन्धन।
🟢 f-ब्लॉक तत्व (आन्तरिक संक्रमण तत्व):
📘 दो श्रृंखलाएँ –
1️⃣ लैंथेनाइड श्रृंखला (Z = 58–71): 4f भरती है।
2️⃣ ऐक्टिनाइड श्रृंखला (Z = 90–103): 5f भरती है।
🔹 लैंथेनाइड तत्व (Ce से Lu):
📍 सामान्य विन्यास: [Xe]4f¹–¹⁴5d⁰–¹6s²
📌 लैंथेनाइड संकुचन:
4f इलेक्ट्रॉनों का कम शील्डिंग प्रभाव होने से परमाणु आकार धीरे-धीरे घटता है।
✔ परिणाम: 5d श्रृंखला के आकार 4d के समान, घनत्व व कठोरता बढ़ती है।
📘 गुण:
स्थिर ऑक्सीकरण अवस्था +3
कुछ में +2, +4 भी
रंगीन आयन (f–f संक्रमण)
पराचुम्बकीय गुण
जटिल यौगिक बनाना कठिन
सभी प्रायः अभिक्रियाशील
📍 प्रयोग:
CeO₂ – उत्प्रेरक कन्वर्टर
Eu³⁺, Tb³⁺ – फ्लोरोसेंट पदार्थों में
Nd³⁺ – लेज़र निर्माण में
🔹 ऐक्टिनाइड तत्व (Th से Lr):
📍 सामान्य विन्यास: [Rn]5f¹–¹⁴6d⁰–¹7s²
✔ स्थिर ऑक्सीकरण अवस्थाएँ +3, +4, +5, +6
📘 गुण:
रेडियोधर्मी
परमाणु आकार घटता है (ऐक्टिनाइड संकुचन)
रासायनिक रूप से लैंथेनाइड समान
जटिल यौगिक बनाते हैं
सभी धात्विक, उच्च घनत्व वाले
📍 मुख्य तत्व:
Th (थोरियम), U (यूरेनियम), Pu (प्लूटोनियम)
💡 परमाणु ऊर्जा स्रोत में उपयोगी।
🟣 लैंथेनाइड बनाम ऐक्टिनाइड तुलना:
गुणधर्म लैंथेनाइड ऐक्टिनाइड
भरण उप-आवरण 4f 5f
रेडियोधर्मिता सामान्यतः नहीं सभी रेडियोधर्मी
ऑक्सीकरण अवस्था मुख्यतः +3 +3 से +6 तक
रासायनिक क्रियाशीलता कम अधिक
यौगिकों की स्थिरता अधिक कम
🟡 संक्रमण और आन्तरिक संक्रमण के उपयोग:
📘 संक्रमण तत्व:
उत्प्रेरक: V₂O₅, Fe, Ni
मिश्रधातु: स्टील (Fe, Cr, Ni)
विद्युत चालक: Cu, Ag
वर्णक: TiO₂, Cr₂O₃
औद्योगिक उत्प्रेरक: Pt, Pd
📘 f-तत्व:
यूरेनियम: परमाणु ऊर्जा
थोरियम: प्रकाश गैस में
सीरियम: घर्षक पदार्थों में
🔵 महत्त्वपूर्ण प्रवृत्तियाँ सारांश रूप में:
1️⃣ परमाणु आकार में कमी: लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड संकुचन के कारण।
2️⃣ धात्विक स्वभाव: सभी धातुएँ, अच्छे चालक।
3️⃣ रंग: अपूर्ण d/f-कक्षिका संक्रमण के कारण।
4️⃣ चुम्बकत्व: अविवाहित इलेक्ट्रॉन उपस्थित।
5️⃣ ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: विविध और परिवर्तनशील।
6️⃣ जटिल यौगिक: अधिक आवेश, छोटी त्रिज्या के कारण।
🔹 II. पाठ का सारांश
🔵 d-ब्लॉक तत्व समूह 3 से 12 तक पाए जाते हैं जिनमें (n−1)d उपकक्षिका क्रमशः भरती है। ये संक्रमण तत्व कहलाते हैं। f-ब्लॉक तत्व लैंथेनाइड (Ce–Lu) और ऐक्टिनाइड (Th–Lr) हैं, जिनमें क्रमशः 4f और 5f कक्षिकाएँ भरती हैं।
🟢 d-तत्वों की प्रमुख विशेषताएँ हैं – परिवर्तनशील संयोजकता, रंगीन यौगिक, उत्प्रेरक क्रियाशीलता, पराचुम्बकत्व और जटिल यौगिक निर्माण। Zn, Cd, Hg अपूर्ण संक्रमण तत्व हैं क्योंकि उनकी d-कक्षिका पूर्ण (d¹⁰) होती है।
🟡 लैंथेनाइड संकुचन के कारण 4f तत्वों के आकार में क्रमिक कमी होती है जिससे 5d व 4d श्रृंखला के आकार लगभग समान हो जाते हैं। ऐक्टिनाइड संकुचन भी इसी प्रकार होता है, परन्तु सभी ऐक्टिनाइड रेडियोधर्मी हैं।
🔴 लैंथेनाइड मुख्यतः +3 ऑक्सीकरण अवस्था में स्थिर यौगिक बनाते हैं, जबकि ऐक्टिनाइड +3 से +6 तक विविध अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
🟢 d-तत्वों के उपयोग – औद्योगिक उत्प्रेरक, मिश्रधातु निर्माण, रंगद्रव्य, विद्युत चालकता आदि।
f-तत्व – परमाणु ऊर्जा, लेज़र, फ्लोरोसेंट पदार्थ, अभिक्रियाशील धातुएँ।
🌟 d और f-ब्लॉक तत्व आधुनिक उद्योग, ऊर्जा व तकनीकी विकास के आधार हैं।
🔹 III. त्वरित पुनरावलोकन
🔵 d-ब्लॉक = समूह 3–12, f-ब्लॉक = लैंथेनाइड व ऐक्टिनाइड।
🟢 d-तत्वों में अपूर्ण d-कक्षिका, परिवर्तनशील संयोजकता, रंगीन यौगिक।
🟡 f-तत्वों में अपूर्ण 4f या 5f कक्षिका, रेडियोधर्मिता व संकुचन।
🔴 लैंथेनाइड संकुचन → आकार घटता, 5d–4d समान।
🟣 ऐक्टिनाइड संकुचन → सभी रेडियोधर्मी, +3 से +6 अवस्थाएँ।
🌟 d,f-तत्व उत्प्रेरक, मिश्रधातु, ऊर्जा स्रोतों और तकनीकी पदार्थों में अत्यन्त उपयोगी।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
🔴 प्रश्न 4.1
निम्नलिखित के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए—
(i) Cr³⁺, (ii) Pm³⁺, (iii) Cu⁺, (iv) Ce⁴⁺, (v) Co²⁺, (vi) Lu²⁺, (vii) Mn²⁺, (viii) Th⁴⁺
🔵 उत्तर:
➡ (i) Cr (Z = 24): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁵ 4s¹
Cr³⁺ = 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d³
➡ (ii) Pm (Z = 61): 1s² 2s² 2p⁶ … 4f⁵ 6s²
Pm³⁺ = [Xe] 4f⁴
➡ (iii) Cu (Z = 29): 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d¹⁰ 4s¹
Cu⁺ = [Ar] 3d¹⁰
➡ (iv) Ce (Z = 58): [Xe] 4f¹ 5d¹ 6s²
Ce⁴⁺ = [Xe]
➡ (v) Co (Z = 27): [Ar] 3d⁷ 4s²
Co²⁺ = [Ar] 3d⁷
➡ (vi) Lu (Z = 71): [Xe] 4f¹⁴ 5d¹ 6s²
Lu²⁺ = [Xe] 4f¹⁴ 6s¹
➡ (vii) Mn (Z = 25): [Ar] 3d⁵ 4s²
Mn²⁺ = [Ar] 3d⁵
➡ (viii) Th (Z = 90): [Rn] 6d² 7s²
Th⁴⁺ = [Rn]
✔ Final: सभी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमशः ऊपर दिये गये।
🔴 प्रश्न 4.2:
+3 ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकरण होने के संदर्भ में Mn³⁺ के यौगिक Fe³⁺ के यौगिकों की तुलना में अधिक स्थायी क्यों हैं?
🔵 उत्तर:
➡ Mn³⁺ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d⁴ होता है।
➡ Fe³⁺ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d⁵ होता है।
➡ d⁵ विन्यास अर्ध-भरा हुआ होता है, जो अधिक स्थायित्व देता है।
➡ इसलिए Fe³⁺ की तुलना में Mn³⁺ आयन ऑक्सीकरण अवस्था में कम स्थायी होता है।
✔ Final: Fe³⁺ का यौगिक अधिक स्थायी है क्योंकि उसका विन्यास अर्ध-भरा हुआ है।
🔴 प्रश्न 4.3:
संक्रमण से स्पष्ट कोईफिक की प्रथम संक्रमण श्रेणी के बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ +2 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थायित्व क्यों बढ़ती जाती है?
🔵 उत्तर:
➡ परमाणु क्रमांक बढ़ने पर 3d उपखण्ड में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है।
➡ यह इलेक्ट्रॉन बन्धन ऊर्जा में वृद्धि करता है।
➡ d-ब्लॉक के तत्वों में +2 ऑक्सीकरण अवस्था स्थायी होती जाती है।
✔ Final: d-ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉन भरने से +2 अवस्था की स्थायित्व बढ़ती जाती है।
🔴 प्रश्न 4.4:
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों की इलेक्ट्रॉनिक संरचना किस प्रकार के ऑक्सीकरण अवस्थाओं को निर्धारित करती है?
🔵 उत्तर:
➡ इलेक्ट्रॉनिक संरचना के अनुसार तत्वों में d और s इलेक्ट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है।
➡ ये इलेक्ट्रॉन हटने पर विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ उत्पन्न होती हैं।
➡ उदाहरण: Mn (Z=25) का [Ar] 3d⁵ 4s² से Mn²⁺, Mn³⁺, Mn⁴⁺, Mn⁷⁺ तक ऑक्सीकरण संभव है।
✔ Final: इलेक्ट्रॉनिक संरचना से ही बहु-ऑक्सीकरण अवस्थाओं का निर्धारण होता है।
🔴 प्रश्न 4.5:
तत्त्वों V (Z=23), Cr (Z=24) तथा Mn (Z=25) के लिए उनके d इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को नीचे दिए गए में से कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करेगी?
3d², 3d³, 3d⁵ तथा 3d⁴
🔵 उत्तर:
➡ V³⁺ : [Ar] 3d²
➡ Cr³⁺ : [Ar] 3d³
➡ Mn²⁺ : [Ar] 3d⁵
➡ Cr²⁺ : [Ar] 3d⁴
✔ Final: V³⁺ (3d²), Cr³⁺ (3d³), Mn²⁺ (3d⁵), Cr²⁺ (3d⁴)
🔴 प्रश्न 4.6:
प्रथम संक्रमण श्रेणी के ऑक्सीकरण-ह्रास अभिक्रियाओं के नाम लिखिए; किसमें धातु तत्व की वर्ग संख्या के बदलाव ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती है?
🔵 उत्तर:
➡ उदाहरण:
Fe²⁺ → Fe³⁺ + e⁻ (ऑक्सीकरण)
Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu (ह्रास)
➡ वर्ग संख्या में वृद्धि ऑक्सीकरण और कमी ह्रास दर्शाती है।
✔ Final: वर्ग संख्या के बढ़ने पर ऑक्सीकरण, घटने पर ह्रास।
🔴 प्रश्न 4.7:
लैंथेनाइड संकुचन क्या है? लैंथेनाइड संकुचन के परिणाम क्या हैं?
🔵 उत्तर:
➡ 4f कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों के भरने से इलेक्ट्रॉनों की ढालने की क्षमता कम होती है।
➡ नाभिकीय आवेश बढ़ने से परमाणु आकार घटता है।
➡ इसे ही लैंथेनाइड संकुचन कहते हैं।
➡ परिणाम:
(i) आयनिक आकार घटता है
(ii) यौगिकों की घनता बढ़ती है
(iii) जटिल निर्माण क्षमता बढ़ती है
✔ Final: 4f इलेक्ट्रॉनों की कमजोर शील्डिंग के कारण आकार घटता है — यही लैंथेनाइड संकुचन है।
🔴 प्रश्न 4.8:
संक्रमण धातुओं की विभिन्न d इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ उत्पन्न होती हैं?
🔵 उत्तर:
➡ 3d⁵ विन्यास से स्थायी अवस्था
➡ d¹ से d⁹ तक विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ सम्भव
➡ अधिक इलेक्ट्रॉनों के हटने से उच्च अवस्था
✔ Final: d-ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉनों की संख्या जितनी, उतनी संभावित ऑक्सीकरण अवस्थाएँ।
🔴 प्रश्न 4.9:
Cu⁺ आयन जल में अस्थायी क्यों होता है?
🔵 उत्तर:
➡ Cu⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d¹⁰ है।
➡ जल में ऑक्सीकरण होकर Cu²⁺ में परिवर्तित हो जाता है।
➡ Cu²⁺ अधिक स्थायी है।
✔ Final: Cu⁺ जल में अस्थायी क्योंकि यह Cu²⁺ में ऑक्सीकरण हो जाता है।
🔴 प्रश्न 4.10:
5d संक्रमण धातुओं में कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित होती हैं?
🔵 उत्तर:
➡ 5d संक्रमण धातुओं में +2 से +6 तक की अवस्थाएँ मिलती हैं।
➡ उदाहरण: Os (+2 से +8), Ir (+3 से +6)
✔ Final: 5d तत्व अनेक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
🔴 प्रश्न 4.11:
कारण सहित उत्तर दीजिए –
(i) संक्रमण धातुएँ अच्छे उत्प्रेरक क्यों होती हैं?
(ii) संक्रमण धातुओं के यौगिक रंगीन क्यों होते हैं?
(iii) संक्रमण धातुओं के यौगिक पराचुंबकीय क्यों होते हैं?
(iv) संक्रमण धातुओं की आयनीकरण एन्थैलपी ऊँची क्यों होती है?
🔵 उत्तर:
➡ (i) संक्रमण धातुओं में विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ होती हैं जिससे ये अभिक्रियाओं में मध्यवर्ती यौगिक बनाकर गति बढ़ाती हैं। इनके पास रिक्त कक्षक भी होते हैं जिन पर अभिकारक अणु अवशोषित होते हैं।
➡ (ii) इन यौगिकों में d-कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का d-d संक्रमण होता है, जिससे दृश्य प्रकाश का अवशोषण होता है और शेष परावर्तित होकर रंग उत्पन्न करता है।
➡ (iii) संक्रमण धातुओं के यौगिकों में अपूर्ण युग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वे चुंबकीय क्षेत्र में आकर्षित होते हैं।
➡ (iv) इनका नाभिकीय आवेश अधिक तथा परमाणु आकार छोटा होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन हटाना कठिन होता है।
✔ Final: उपरोक्त सभी गुण अपूर्ण d-कक्षकों की उपस्थिति से उत्पन्न होते हैं।
🔴 प्रश्न 4.12:
संक्रमण धातुएँ अच्छे उत्प्रेरक क्यों होती हैं?
🔵 उत्तर:
➡ इनके पास रिक्त कक्षक होते हैं जिन पर अभिकारक अणु अवशोषित होकर सक्रिय अवस्था में आते हैं।
➡ विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं के कारण ये मध्यवर्ती यौगिक बनाती हैं जिससे अभिक्रिया की गति बढ़ती है।
✔ Final: रिक्त कक्षकों और बहु-ऑक्सीकरण अवस्थाओं के कारण उत्प्रेरक क्रिया संभव होती है।
🔴 प्रश्न 4.13:
संक्रमण धातुओं के यौगिक रंगीन क्यों होते हैं?
🔵 उत्तर:
➡ संक्रमण धातु यौगिकों में d-कक्षकों में ऊर्जा का अंतर होता है।
➡ जब दृश्य प्रकाश पड़ता है तो इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च स्तर पर जाते हैं (d-d संक्रमण)।
➡ अवशोषित प्रकाश का पूरक रंग दिखाई देता है।
✔ Final: d-d संक्रमण के कारण रंग दिखाई देता है।
🔴 प्रश्न 4.14:
पोटेशियम डाइक्रोमेट विलयन का रंग pH घटाने पर कैसे बदलता है?
🔵 उत्तर:
➡ क्षारीय या कम अम्लीय माध्यम में प्रमुख आयन CrO₄²⁻ होता है जिसका रंग पीला होता है।
➡ जब माध्यम अम्लीय किया जाता है, तो CrO₄²⁻ आयन मिलकर Cr₂O₇²⁻ आयन बनाता है जिसका रंग नारंगी होता है।
➡ समीकरण: 2CrO₄²⁻ + 2H⁺ ⇌ Cr₂O₇²⁻ + H₂O
✔ Final: pH घटाने पर विलयन का रंग पीले से नारंगी में बदलता है।
🔴 प्रश्न 4.15:
पोटेशियम डाइक्रोमेट की ऑक्सीकरण क्रियाएँ (आयनिक समीकरण सहित) लिखिए –
(i) आयोडाइड आयन
(ii) अमोनिया
(iii) हाइड्रोजन सल्फाइड
🔵 उत्तर:
➡ (i) Cr₂O₇²⁻ + 6I⁻ + 14H⁺ → 2Cr³⁺ + 3I₂ + 7H₂O
➡ (ii) Cr₂O₇²⁻ + 2NH₃ + 8H⁺ → 2Cr³⁺ + N₂ + 7H₂O
➡ (iii) Cr₂O₇²⁻ + 3H₂S + 8H⁺ → 2Cr³⁺ + 3S + 7H₂O
✔ Final: सभी क्रियाओं में Cr⁶⁺ का अपचयन होकर Cr³⁺ बनता है।
🔴 प्रश्न 4.16:
पोटेशियम परमैंगनेट की ऑक्सीकरण क्रियाएँ (आयनिक समीकरण सहित) लिखिए –
(i) ऑक्सालिक अम्ल
(ii) सल्फर डाइऑक्साइड
(iii) सल्फाइड आयन
🔵 उत्तर:
➡ (i) 2MnO₄⁻ + 5C₂O₄²⁻ + 16H⁺ → 2Mn²⁺ + 10CO₂ + 8H₂O
➡ (ii) 2MnO₄⁻ + 5SO₂ + 2H₂O → 2Mn²⁺ + 5SO₄²⁻ + 4H⁺
➡ (iii) 2MnO₄⁻ + 5S²⁻ + 16H⁺ → 2Mn²⁺ + 5S + 8H₂O
✔ Final: Mn⁷⁺ का अपचयन होकर Mn²⁺ बनता है।
🔴 प्रश्न 4.17:
दिए गए इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर Cr²⁺, Mn²⁺, Fe²⁺ की स्थिरता की तुलना कीजिए –
Cr³⁺/Cr²⁺ = −0.4 V, Mn³⁺/Mn²⁺ = +1.5 V, Fe³⁺/Fe²⁺ = +0.8 V
🔵 उत्तर:
➡ Mn³⁺/Mn²⁺ युग्म का E° = +1.5 V ⇒ Mn³⁺ आसानी से Mn²⁺ में अपचयित होता है ⇒ Mn²⁺ स्थिर।
➡ Cr³⁺/Cr²⁺ युग्म का E° = −0.4 V ⇒ Cr²⁺ का ऑक्सीकरण होकर Cr³⁺ बनना अनुकूल ⇒ Cr³⁺ स्थिर।
➡ Fe³⁺/Fe²⁺ युग्म का E° = +0.8 V ⇒ Fe³⁺ का अपचय होकर Fe²⁺ बनना अनुकूल ⇒ Fe²⁺ स्थिर।
✔ Final: Mn²⁺ और Cr³⁺ अधिक स्थिर, Fe²⁺ जल में अपेक्षाकृत स्थिर।
🔴 प्रश्न 4.18:
संक्रमण धातुएँ अच्छे उत्प्रेरक क्यों हैं?
🔵 उत्तर:
➡ इनके पास रिक्त कक्षक होते हैं जिन पर अभिकारक अणु अवशोषित होकर सक्रिय अवस्था में आते हैं।
➡ विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं के कारण ये मध्यवर्ती यौगिक बनाती हैं जिससे अभिक्रिया की गति बढ़ती है।
✔ Final: रिक्त कक्षकों और बहु-ऑक्सीकरण अवस्थाओं के कारण उत्प्रेरक क्रिया संभव।
🔴 प्रश्न 4.19:
संक्रमण धातुओं के यौगिक पराचुंबकीय क्यों होते हैं?
🔵 उत्तर:
➡ पराचुंबकत्व अपूर्ण युग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति से उत्पन्न होता है।
➡ अधिकांश संक्रमण धातु यौगिकों में अपूर्ण d-कक्षक होते हैं।
✔ Final: अपूर्ण युग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति से पराचुंबकत्व।
🔴 प्रश्न 4.20:
संक्रमण धातुओं के रासायनिक गुणों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन-से हैं?
🔵 उत्तर:
➡ इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
➡ आयनिक आकार
➡ ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
➡ आयनीकरण एन्थैलपी
✔ Final: उपरोक्त सभी कारक रासायनिक गुणों को प्रभावित करते हैं।
🔴 प्रश्न 4.21:
निम्न कथनों में से कौन-से सही हैं –
(i) d⁴ संरचना वाली प्रजातियाँ कम स्थिर होती हैं।
(ii) Fe³⁺ जल में Fe²⁺ में अपचयित होता है।
(iii) Cu²⁺ का विभव धनात्मक होता है।
🔵 उत्तर:
➡ (i) सही – d⁴ प्रजातियाँ (Cr²⁺, Mn³⁺) सामान्यतः कम स्थिर होती हैं।
➡ (ii) सही – Fe³⁺ जल में Fe²⁺ में अपचयित होकर स्थिर होता है।
➡ (iii) सही – Cu²⁺ का विभव धनात्मक होता है।
✔ Final: तीनों कथन सही हैं।
🔴 प्रश्न 4.22:
असमायोजकता से आप क्या समझते हैं? जलीय विलयन में असमायोजक अभिक्रियाओं के दो उदाहरण दीजिए।
🔵 उत्तर:
➡ असमायोजकता वह प्रक्रिया है जिसमें एक ही तत्व की दो भिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ एक साथ परिवर्तन करती हैं — एक का ऑक्सीकरण और दूसरे का अपचयन होता है।
➡ परिणामस्वरूप एक मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है।
🧪 उदाहरण:
2Fe³⁺ + Fe → 3Fe²⁺
3MnO₄²⁻ + 4H⁺ → 2MnO₄⁻ + MnO₂ + 2H₂O
✔ Final: यह प्रक्रिया असमायोजक अभिक्रिया कहलाती है।
🔴 प्रश्न 4.23:
प्रथम संक्रमण श्रेणी में कौन से धातु आयन केवल +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं?
🔵 उत्तर:
➡ संक्रमण धातुओं में Cu⁺ (ताम्र) ऐसा आयन है जो केवल +1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
➡ कारण: 3d¹⁰ संरचना स्थिर होती है, इसलिए अन्य अवस्था नहीं बनती।
✔ Final: केवल Cu⁺ आयन +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है।
🔴 प्रश्न 4.24:
निम्नलिखित में से किसमें अधिकतम पराचुंबकत्व होगा – Mn²⁺, Cr³⁺, V³⁺, Ti³⁺?
🔵 उत्तर:
➡ पराचुंबकत्व अनियोजित इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है।
➡ Mn²⁺: 3d⁵ (5 अनियोजित इलेक्ट्रॉन)
➡ Cr³⁺: 3d³
➡ V³⁺: 3d²
➡ Ti³⁺: 3d¹
✔ Final: अधिकतम पराचुंबकत्व Mn²⁺ में होगा।
🔴 प्रश्न 4.25:
टाइटेनियम की उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ स्थिर नहीं होतीं। कारण बताइए।
🔵 उत्तर:
➡ Ti की उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं में इलेक्ट्रॉन ह्रास अधिक होता है जिससे स्थायित्व घटता है।
➡ Ti⁴⁺ की संरचना [Ar] होती है जिसमें d-इलेक्ट्रॉन नहीं रहते, अतः स्थिरीकरण ऊर्जा नहीं मिलती।
✔ Final: उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ अस्थिर होती हैं क्योंकि d-कक्षकों की CFSE ऊर्जा नहीं मिलती।
🔴 प्रश्न 4.26:
क्रोमियम व परमैंगनेट आयनों को बनाने हेतु प्रयुक्त पदार्थों को लिखिए।
🔵 उत्तर:
➡ क्रोमियम यौगिक के लिए: K₂Cr₂O₇
➡ परमैंगनेट यौगिक के लिए: KMnO₄
✔ Final: K₂Cr₂O₇ तथा KMnO₄ प्रयुक्त होते हैं।
🔴 प्रश्न 4.27:
निस्पंदक क्या है? लेन्थेनाइड धातुओं में प्रमुख निस्पंदक तथा प्रासायोजक का उदाहरण दीजिए।
🔵 उत्तर:
➡ निस्पंदक (Reducing Agent) वह होता है जो स्वयं ऑक्सीकरण होकर दूसरे पदार्थ का अपचयन कराता है।
➡ लेन्थेनाइड में प्रमुख निस्पंदक: Eu²⁺ (तथा Sm²⁺)
➡ प्रमुख प्रासायोजक (Oxidising Agent): Ce⁴⁺
✔ Final: Eu²⁺ निस्पंदक, Ce⁴⁺ प्रासायोजक है।
🔴 प्रश्न 4.28:
अधिकार संक्रमण तत्व क्या हैं? दिए गए में से कौन से तत्व अधिकार संक्रमण तत्व हैं — 29, 59, 74, 95, 102, 104?
🔵 उत्तर:
➡ अधिकार संक्रमण तत्व वे हैं जिनमें (n−2)f कक्षकों का पूरकन होता है।
➡ ये f-ब्लॉक में आते हैं — लैंथेनाइड व ऐक्टिनाइड।
➡ दिए गए में f-ब्लॉक तत्व: 59 (Pr), 95 (Am), 102 (No)
✔ Final: 59, 95, 102 अधिकार संक्रमण तत्व हैं।
🔴 प्रश्न 4.29:
ऐक्टिनाइड तत्वों का समय निर्धारण कठिन क्यों है?
🔵 उत्तर:
➡ ऐक्टिनाइड अधिकांश रेडियोधर्मी होते हैं और अल्पायु समस्थानिक होते हैं।
➡ उनके विखंडन उत्पाद मिश्रण बनाते हैं जिससे पृथक्करण कठिन होता है।
✔ Final: रेडियोधर्मिता व समस्थानिक मिश्रण के कारण समय निर्धारण कठिन है।
🔴 प्रश्न 4.30:
लैंथेनाइड सिकुड़न के कारण उत्पन्न प्रभाव बताइए।
🔵 उत्तर:
➡ d-ब्लॉक तत्वों की त्रिज्या में कमी,
➡ रासायनिक गुणों में समानता,
➡ उच्च घनत्व व कठोरता में वृद्धि।
✔ Final: लैंथेनाइड सिकुड़न रासायनिक समानता व त्रिज्या कमी का कारण है।
🔴 प्रश्न 4.31:
Ce³⁺ के चुंबकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
🔵 उत्तर:
➡ Ce³⁺ : [Xe] 4f¹
➡ अनियोजित इलेक्ट्रॉन = 1
➡ f-ब्लॉक में spin-orbit युग्मन महत्त्वपूर्ण ⇒ μ_eff ≈ 2.54 BM
✔ Final: Ce³⁺ का चुंबकीय आघूर्ण 2.54 BM है।
🔴 प्रश्न 4.32:
लैंथेनाइड जो +4 ऑक्सीकरण अवस्था दिखाते हैं उनके नाम लिखिए।
🔵 उत्तर:
➡ Ce (+4), Pr (+4), Tb (+4)
✔ Final: Ce⁴⁺, Pr⁴⁺, Tb⁴⁺ +4 अवस्था प्रदर्शित करते हैं।
🔴 प्रश्न 4.33:
लैंथेनाइड व ऐक्टिनाइड के तुलनात्मक गुण लिखिए।
🔵 उत्तर:
➡ दोनों f-ब्लॉक में आते हैं।
➡ दोनों में बहु ऑक्सीकरण अवस्थाएँ,
➡ ऐक्टिनाइड अधिक रेडियोधर्मी,
➡ लैंथेनाइड अधिक स्थिर।
✔ Final: लैंथेनाइड स्थिर, ऐक्टिनाइड रेडियोधर्मी व बहु अवस्थाएँ।
🔴 प्रश्न 4.34:
61, 91, 101, 109 परमाणु क्रमांक वाले तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
🔵 उत्तर:
➡ 61 (Pm): [Xe] 4f⁵ 6s²
➡ 91 (Pa): [Rn] 5f² 6d¹ 7s²
➡ 101 (Md): [Rn] 5f¹³ 7s²
➡ 109 (Mt): [Rn] 5f¹⁴ 6d⁷ 7s²
✔ Final: विन्यास ऊपर अनुसार हैं।
🔴 प्रश्न 4.35:
प्रथम, द्वितीय व तृतीय संक्रमण श्रेणी की तुलना के चार प्रमुख बिंदु लिखिए।
🔵 उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
(iii) आयनिक आकार
(iv) पराचुंबकता
✔ Final: तुलना के प्रमुख बिंदु ऊपर चार हैं।
🔴 प्रश्न 4.36:
Ti²⁺, V²⁺, Cr³⁺, Mn²⁺, Fe²⁺, Co²⁺, Ni²⁺, Cu²⁺ के 3d इलेक्ट्रॉनों की संख्या लिखिए।
🔵 उत्तर:
Ti²⁺ → 3d²
V²⁺ → 3d³
Cr³⁺ → 3d³
Mn²⁺ → 3d⁵
Fe²⁺ → 3d⁶
Co²⁺ → 3d⁷
Ni²⁺ → 3d⁸
Cu²⁺ → 3d⁹
✔ Final: संख्या ऊपर दी गई है।
🔴 प्रश्न 4.37:
इन आयनों में पराचुंबकत्व का कारण बताइए।
🔵 उत्तर:
➡ अनियोजित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण पराचुंबकत्व होता है।
✔ Final: d-कक्षकों में अनियोजित इलेक्ट्रॉन होने से पराचुंबकत्व।
🔴 प्रश्न 4.38:
K₄[Mn(CN)₆], [Fe(H₂O)₆]²⁺, K₂[MnCl₄] के चुंबकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
🔵 उत्तर:
➡ K₄[Mn(CN)₆]: 2.2 BM
➡ [Fe(H₂O)₆]²⁺: 5.3 BM
➡ K₂[MnCl₄]: 5.9 BM
✔ Final: चुंबकीय आघूर्ण क्रमशः 2.2, 5.3, 5.9 BM।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
(CBSE MODEL प्रश्न पत्र)
सिर्फ इसी पाठ से निर्मित CBSE MODEL प्रश्न पत्र।
✳ खण्ड – A (बहुविकल्पीय प्रश्न: 1 × 16 = 16 अंक
प्रश्न 1. d-ब्लॉक तत्वों को और किस नाम से जाना जाता है?
संक्रमण तत्व
प्रतिनिधि तत्व
अधातु
निष्क्रिय गैसें
उत्तर: 1
प्रश्न 2. संक्रमण तत्वों के आंशिक रूप से भरे होते हैं —
s-कक्षक
p-कक्षक
d-कक्षक
f-कक्षक
उत्तर: 3
प्रश्न 3. संक्रमण तत्वों के सामान्य गुणों में कौन-सा सम्मिलित नहीं है?
परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
रंगीन यौगिक
चुंबकीय गुण
अधात्विक व्यवहार
उत्तर: 4
प्रश्न 4. Fe³⁺ आयन का चुंबकीय आघूर्ण (μ) किस पर निर्भर करता है?
बाह्य कक्षकों की संख्या पर
अप्रविष्ट इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर
ऑक्सीकरण अवस्था पर
आयन के आकार पर
उत्तर: 2
प्रश्न 5. मैंगनीज (Mn) की अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था है —
+2
+3
+4
+7
उत्तर: 4
प्रश्न 6. क्रोमियम (Cr) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है —
[Ar]3d⁴4s²
[Ar]3d⁵4s¹
[Ar]3d³4s²
[Ar]3d⁶4s¹
उत्तर: 2
प्रश्न 7. कौन-सा d-ब्लॉक तत्व रंगहीन आयन बनाता है?
Zn²⁺
Cu²⁺
Fe²⁺
Ni²⁺
उत्तर: 1
प्रश्न 8. संक्रमण धातुएँ प्रायः उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती हैं क्योंकि —
वे अस्थिर होती हैं
उनका आयतन अधिक होता है
उनकी अपूर्ण d-कक्षक अवस्थाएँ होती हैं
वे निष्क्रिय होती हैं
उत्तर: 3
प्रश्न 9. Ti³⁺ आयन का रंग किसके कारण होता है?
d–d संक्रमण
f–f संक्रमण
चार्ज स्थानांतरण
हाइड्रोजन बन्धन
उत्तर: 1
प्रश्न 10. Zn को संक्रमण तत्व नहीं माना जाता क्योंकि —
उसका परमाणु क्रमांक अधिक है
उसके सभी d-कक्षक पूर्ण भरे हैं
वह रंगहीन है
वह ठोस है
उत्तर: 2
प्रश्न 11. f-ब्लॉक तत्वों में इलेक्ट्रॉन भरते हैं —
(n-1)d कक्षकों में
(n-2)f कक्षकों में
(n-1)p कक्षकों में
(n-1)s कक्षकों में
उत्तर: 2
प्रश्न 12. लैन्थेनाइड संकुचन (Lanthanide contraction) का कारण है —
बाह्य इलेक्ट्रॉनों की वृद्धि
f-कक्षकों की अपूर्ण ढाल क्षमता
नाभिकीय आवेश में कमी
इलेक्ट्रॉन ह्रास
उत्तर: 2
प्रश्न 13. लैन्थेनाइड संकुचन का एक परिणाम है —
परमाणु आकार में वृद्धि
परमाणु आकार में कमी
स्थायित्व घट जाना
रंगहीन यौगिक बनना
उत्तर: 2
प्रश्न 14. एक्टिनाइड शृंखला आरम्भ होती है —
थोरियम (Th)
एक्टिनियम (Ac)
यूरेनियम (U)
प्लूटोनियम (Pu)
उत्तर: 2
Options (A/R प्रकार के प्रश्नों हेतु)
A और R दोनों सत्य हैं तथा R, A का सही व्याख्यान है।
A और R दोनों सत्य हैं परन्तु R, A का सही व्याख्यान नहीं है।
A सत्य है, R असत्य है।
A असत्य है, R सत्य है।
प्रश्न 15.
A: Zn, Cd और Hg को d-ब्लॉक में रखते हैं किन्तु वे संक्रमण तत्व नहीं हैं।
R: इनके d-कक्षक पूर्ण भरे रहते हैं।
उत्तर: 1
प्रश्न 16.
A: लैन्थेनाइड संकुचन के कारण Zr और Hf का आकार लगभग समान होता है।
R: f-कक्षकों की ढाल क्षमता अत्यन्त कमजोर होती है।
उत्तर: 1
✳ खण्ड – B (अति लघु उत्तर प्रश्न: 2 × 5 = 10 अंक)
प्रश्न 17. संक्रमण तत्वों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाओं की विशेषता बताइए।
🟩 संक्रमण तत्व परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाते हैं।
🟦 ऐसा d-कक्षकों में इलेक्ट्रॉन की उपलब्धता और समान ऊर्जा स्तरों के कारण होता है।
प्रश्न 18. लैन्थेनाइड संकुचन क्या है?
🟦 लैन्थेनाइड तत्वों में परमाणु आकार का क्रमिक घटाव लैन्थेनाइड संकुचन कहलाता है।
🧪 यह f-कक्षकों की अपूर्ण ढाल क्षमता के कारण होता है।
प्रश्न 19. Zn संक्रमण तत्व क्यों नहीं है?
🟩 Zn के d-कक्षक पूर्ण भरे (3d¹⁰) होते हैं।
🎯 अतः यह परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ नहीं दिखाता।
प्रश्न 20. Fe²⁺ आयन पैरामैग्नेटिक क्यों होता है?
🧪 Fe²⁺ में 4 अप्रविष्ट इलेक्ट्रॉन होते हैं।
🎯 अतः यह चुंबकीय आघूर्ण रखता है।
प्रश्न 21. संक्रमण धातुओं के रंगीन यौगिक बनने का कारण क्या है?
🟦 उनके अपूर्ण d-कक्षकों में इलेक्ट्रॉन d–d संक्रमण करते हैं।
🎯 इससे दृश्य प्रकाश का अवशोषण होकर रंग उत्पन्न होता है।
✳ खण्ड – C (संक्षिप्त उत्तर प्रश्न: 3 × 7 = 21 अंक)
प्रश्न 22. क्रोमियम के यौगिकों में +3 ऑक्सीकरण अवस्था सर्वाधिक स्थिर क्यों है?
🟩 Cr³⁺ में 3d³ विन्यास होता है जो अर्ध-भरे कक्षक स्थिरता प्रदान करता है।
🧪 Cr⁶⁺ ऑक्सीकरण अवस्था जल में अस्थिर होती है और शीघ्र अपचयित हो जाती है।
🎯 अतः Cr³⁺ अवस्था सर्वाधिक स्थिर मानी जाती है।
प्रश्न 23. संक्रमण तत्व अच्छे उत्प्रेरक क्यों होते हैं?
🧪 इनके अपूर्ण d-कक्षक इलेक्ट्रॉनों का अस्थायी आदान-प्रदान सम्भव बनाते हैं।
🟩 इनकी सतह पर अभिकारक अणु अवशोषित होकर सक्रिय होते हैं।
🎯 इससे सक्रियण ऊर्जा घट जाती है और गति बढ़ती है।
प्रश्न 24. कॉपर (Cu) के दो यौगिकों Cu⁺ और Cu²⁺ की स्थिरता की तुलना कीजिए।
🧪 Cu²⁺ में 3d⁹ विन्यास है जो तुलनात्मक रूप से स्थिर है।
🟦 Cu⁺ जल में अस्थिर होता है और स्वस्फूर्त अपचयन से Cu²⁺ बन जाता है।
🎯 अतः Cu²⁺ अधिक स्थिर है।
प्रश्न 25. लैन्थेनाइड संकुचन के दो परिणाम लिखिए।
🟦 (1) परमाणु और आयनिक आकार घटते हैं।
🟩 (2) समान आकार वाले तत्वों (Zr, Hf) के गुण समान हो जाते हैं।
प्रश्न 26. एक्टिनाइड संकुचन क्या है?
🧪 एक्टिनाइड तत्वों में परमाणु आकार का क्रमिक घटाव एक्टिनाइड संकुचन कहलाता है।
🎯 यह f-कक्षकों की कमजोर ढाल क्षमता के कारण होता है।
🟩 परिणामतः इन तत्वों के रासायनिक गुण अत्यधिक समान होते हैं।
प्रश्न 27. संक्रमण तत्वों के यौगिकों के चुंबकीय गुणों का कारण बताइए।
🧪 अपूर्ण d-कक्षकों में अप्रविष्ट इलेक्ट्रॉन होते हैं।
🎯 इनके घूर्णन से चुंबकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है।
🟩 चुंबकीय आघूर्ण (μ) = √(n(n+2)) B.M.
प्रश्न 28. Fe²⁺ और Fe³⁺ के चुंबकीय आघूर्णों की तुलना कीजिए।
🧪 Fe²⁺ में 4 अप्रविष्ट इलेक्ट्रॉन ⇒ μ = √(4×6) = 4.90 B.M.
🟩 Fe³⁺ में 5 अप्रविष्ट इलेक्ट्रॉन ⇒ μ = √(5×7) = 5.92 B.M.
🎯 अतः Fe³⁺ का चुंबकीय आघूर्ण अधिक है।
✳ खण्ड – D (प्रकरण-आधारित प्रश्न: 4 × 2 = 8 अंक)
प्रश्न 29.
नीचे दिया गया अनुच्छेद पढ़िए और उत्तर दीजिए —
आयरन (Fe) के यौगिक विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं जैसे Fe²⁺ और Fe³⁺। Fe²⁺ के यौगिक हल्के हरे रंग के तथा Fe³⁺ के यौगिक भूरे रंग के होते हैं। दोनों आयन पैरामैग्नेटिक होते हैं, किन्तु Fe³⁺ में अधिक अप्रविष्ट इलेक्ट्रॉन होते हैं।
(क) Fe³⁺ का रंग किस कारण से होता है?
🧪 अपूर्ण d-कक्षकों में d–d संक्रमण के कारण।
(ख) कौन-सा आयन अधिक चुंबकीय आघूर्ण रखता है?
🎯 Fe³⁺, क्योंकि इसमें 5 अप्रविष्ट इलेक्ट्रॉन हैं।
(ग) Fe²⁺ और Fe³⁺ की स्थिरता में अंतर क्यों है?
🟩 Fe³⁺ में 3d⁵ अर्ध-भरे कक्षक के कारण अधिक स्थिरता होती है।
(घ) Fe²⁺ के यौगिक का रंग हरा क्यों होता है?
🧪 दृश्य प्रकाश के कुछ भागों के अवशोषण से शेष हरा रंग परिलक्षित होता है।
प्रश्न 30.
नीचे दिए आँकड़ों से ज्ञात कीजिए —
Ti³⁺ (3d¹) का चुंबकीय आघूर्ण (μ) कितना होगा?
🧮 सूत्र — μ = √(n(n+2)) B.M.
जहाँ n = अप्रविष्ट इलेक्ट्रॉनों की संख्या
➤ Ti³⁺ में n = 1
✅ μ = √(1×3) = √3 = 1.73 B.M.
(क) यह कौन-सा गुण दर्शाता है?
🎯 पैरामैग्नेटिक गुण।
(ख) यदि n = 0 हो, तो तत्व —
🟪 डायमैग्नेटिक होगा।
✳ खण्ड – E (दीर्घ उत्तर प्रश्न: 5 × 3 = 15 अंक)
प्रश्न 31.
लैन्थेनाइड संकुचन का कारण एवं परिणाम स्पष्ट कीजिए।
🟦 कारण — f-कक्षकों की अपूर्ण ढाल क्षमता के कारण नाभिकीय आवेश का प्रभाव बाह्य इलेक्ट्रॉनों पर अधिक पड़ता है।
🧪 फलस्वरूप परमाणु आकार क्रमिक रूप से घटता है।
🟩 परिणाम —
1️⃣ परमाणु आकार में कमी।
2️⃣ Zr तथा Hf का आकार लगभग समान।
3️⃣ यौगिकों की स्थिरता एवं जटिलता बढ़ जाती है।
🎯 निष्कर्ष — लैन्थेनाइड संकुचन संक्रमण एवं पश्च संक्रमण तत्वों के रासायनिक गुणों को प्रभावित करता है।
या (OR)
एक्टिनाइड संकुचन का वर्णन कीजिए।
🧪 एक्टिनाइड तत्वों में परमाणु आकार का क्रमिक घटाव एक्टिनाइड संकुचन कहलाता है।
🟦 कारण — 5f कक्षकों की कमजोर ढाल क्षमता।
🎯 परिणाम — रासायनिक गुणों में समानता, परन्तु उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ और रेडियोधर्मिता।
प्रश्न 32.
संक्रमण तत्वों की परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए।
🧪 संक्रमण तत्वों में (n-1)d और ns कक्षकों की ऊर्जा में अंतर बहुत कम होता है।
🟩 अतः वे विभिन्न संख्या में इलेक्ट्रॉन खो सकते हैं और अनेक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाते हैं।
🎯 उदाहरण —
Fe: +2, +3
Mn: +2, +4, +7
Cr: +2, +3, +6
या (OR)
संक्रमण तत्व रंगीन यौगिक क्यों बनाते हैं?
🟦 अपूर्ण d-कक्षक में इलेक्ट्रॉन होते हैं।
🧪 दृश्य प्रकाश के अवशोषण से d–d संक्रमण होता है।
🎯 परिणामस्वरूप शेष प्रकाश परावर्तित होकर यौगिक रंगीन दिखते हैं।
प्रश्न 33.
Zn, Cd और Hg को संक्रमण तत्व क्यों नहीं माना जाता, जबकि वे d-ब्लॉक में आते हैं?
🟩 इनके d-कक्षक पूर्ण भरे (d¹⁰) होते हैं।
🧪 ये परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ नहीं दिखाते।
🟦 इनसे बने यौगिक रंगहीन और डायमैग्नेटिक होते हैं।
🎯 इसलिए इन्हें “d-ब्लॉक तत्व” तो माना जाता है, परंतु “संक्रमण तत्व” नहीं।
या (OR)
संक्रमण तत्वों के उत्प्रेरक गुणों का कारण स्पष्ट कीजिए।
🧪 इनकी सतह पर अभिकारक अणु अवशोषित होकर सक्रिय हो जाते हैं।
🟩 इनके अपूर्ण d-कक्षक इलेक्ट्रॉन प्रदान कर या स्वीकार कर अस्थायी जटिल यौगिक बनाते हैं।
🎯 इससे सक्रियण ऊर्जा घटती है और अभिक्रिया की गति बढ़ती है।
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