Class 11 : Physics (In Hindi) – अध्याय 10: द्रव्य के तापीय गुण
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🌡️ अध्याय का परिचय
यह अध्याय द्रव्यों में तापीय परिवर्तन तथा ऊष्मा के प्रभाव से होने वाले विस्तार, ऊष्मा संचरण, तापमान मापन तथा ऊष्मीय गुणों के सिद्धांतों को समझाता है। ऊष्मा वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उपस्थित कणों की गति के कारण होती है। जब किसी वस्तु का ताप बढ़ता है, तो उसके अणु तीव्र गति से दोलन करने लगते हैं जिससे आयतन, लंबाई या क्षेत्रफल में वृद्धि होती है — इसे ही तापीय प्रसार (Thermal Expansion) कहा जाता है।
🔵 1. ताप और तापमान (Heat and Temperature)
💡 ताप (Heat) ऊर्जा का वह रूप है जो किसी वस्तु के कणों की गति से संबंधित है।
💡 तापमान (Temperature) किसी वस्तु की ऊष्मीय अवस्था को दर्शाता है।
➡️ ताप का प्रवाह उच्च ताप वाले पिण्ड से निम्न ताप वाले पिण्ड की ओर स्वतः होता है।
➡️ तापमान मापन के लिए थर्मामीटर का उपयोग किया जाता है।

🟢 2. ऊष्मीय प्रसार के प्रकार
जब किसी ठोस को ताप दिया जाता है तो वह फैलता है। यह प्रसार तीन प्रकार का होता है —
1️⃣ रेखीय प्रसार (Linear Expansion)
✏️ केवल लंबाई बढ़ती है।
सूत्र: ΔL = L₀ α ΔT
जहाँ α = रेखीय प्रसार गुणांक
2️⃣ क्षेत्रीय प्रसार (Areal Expansion)
✏️ केवल क्षेत्रफल बढ़ता है।
सूत्र: ΔA = A₀ β ΔT, जहाँ β = 2α
3️⃣ आयतन प्रसार (Volumetric Expansion)
✏️ पूरा आयतन बढ़ता है।
सूत्र: ΔV = V₀ γ ΔT, जहाँ γ = 3α
✔️ ठोस, द्रव एवं गैस सभी में प्रसार होता है परंतु गैसों में सर्वाधिक होता है।
🔴 3. तापीय प्रसार के अनुप्रयोग
💡 रेलवे पटरियों और पुलों में जोड़ (expansion joints) रखे जाते हैं ताकि ताप से बढ़ने पर धातु मुड़े नहीं।
💡 बायमेटलिक स्ट्रिप्स (Bimetallic strips) ताप-नियंत्रक उपकरणों में प्रयुक्त होती हैं।
💡 इलेक्ट्रिक आयरन और थर्मोस्टैट इन्हीं सिद्धांतों पर कार्य करते हैं।
🟡 4. विशिष्ट ऊष्मा धारिता (Specific Heat Capacity)
किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा वह ऊष्मा होती है जो 1 kg पदार्थ का ताप 1°C बढ़ाने हेतु आवश्यक होती है।
सूत्र:
Q = m c ΔT
✔️ जहाँ Q ऊष्मा, m द्रव्यमान, c विशिष्ट ऊष्मा धारिता, ΔT तापांतर है।
🔵 5. गुप्त ऊष्मा (Latent Heat)
वह ऊष्मा जो किसी पदार्थ को अवस्था परिवर्तन (जैसे ठोस → द्रव, द्रव → वाष्प) में लगती है बिना ताप में परिवर्तन के।
✏️ गलन गुप्त ऊष्मा (L_f) और वाष्पन गुप्त ऊष्मा (L_v) इसके प्रकार हैं।
सूत्र: Q = mL
उदाहरण: बर्फ पिघलने में L_f = 3.35×10⁵ J/kg,
जल के वाष्पन में L_v = 2.25×10⁶ J/kg
🟢 6. ऊष्मा का मापन (Calorimetry)
इस सिद्धांत पर आधारित है कि ऊष्मा का ह्रास = ऊष्मा की प्राप्ति।
m₁c₁(θ₁ − θ) = m₂c₂(θ − θ₂)
यह संतुलन ऊष्मा समीकरण कहलाता है।
🔴 7. गैसों में ऊष्मा धारिता
एक परमाणुक गैस के लिए —
C_v = (3/2)R
C_p = (5/2)R
और γ = C_p / C_v = 5/3
द्वि-परमाणुक गैस के लिए —
C_v = (5/2)R
C_p = (7/2)R
γ = 1.4
💡 C_p − C_v = R
🟡 8. ऊष्मा संचरण (Modes of Heat Transfer)
ऊष्मा का संचरण तीन तरीकों से होता है —
1️⃣ चालकता (Conduction): ठोसों में कणों के कंपन से ऊष्मा का स्थानांतरण।
➡️ सूत्र: Q/t = kA(ΔT / l)
2️⃣ संवहन (Convection): द्रव या गैस के कणों की गति द्वारा ऊष्मा का स्थानांतरण।
💡 उदाहरण: जल उबलने या वायु प्रवाह से ऊष्मा का आदान-प्रदान।
3️⃣ विकिरण (Radiation): ऊष्मा का तरंग रूप में निर्वात में संचरण।
✔️ उदाहरण: सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक इसी विधि से आती है।

🔵 9. कृष्णिका (Black Body) और किर्खोफ़ का नियम
💡 कृष्णिका: वह वस्तु जो सभी तरंगदैर्ध्यों की ऊर्जा को पूर्णतः अवशोषित करती है।
💡 किर्खोफ़ का नियम: किसी विशेष ताप और तरंगदैर्ध्य पर किसी वस्तु की उत्सर्जकता = अवशोषण-क्षमता होती है।
🟢 10. स्टीफन-बोल्ट्ज़मान नियम
कृष्णिका द्वारा प्रति सेकंड प्रति इकाई क्षेत्रफल उत्सर्जित ऊर्जा —
E = σT⁴
जहाँ σ = 5.67×10⁻⁸ W m⁻² K⁻⁴ (स्टीफन स्थिरांक) है।
🔴 11. न्यूटन का शीतन नियम (Newton’s Law of Cooling)
किसी पिण्ड के शीतन की दर उसके और परिवेश के तापांतर के समानुपाती होती है।
dT/dt ∝ (T − T₀)
या
T − T₀ = (T₁ − T₀)e^(−kt)
🟡 12. ऊष्मीय चालकता (Thermal Conductivity)
यह किसी पदार्थ की ऊष्मा संचारित करने की क्षमता का माप है।
सूत्र: Q = kA(ΔT / l) × t
✔️ धातुएँ ऊष्मा की उत्तम चालक होती हैं, जबकि लकड़ी व रबर निकृष्ट चालक।
🔵 13. हरित-गृह प्रभाव (Greenhouse Effect)
वायुमंडल के गैसें जैसे CO₂, CH₄, और जलवाष्प पृथ्वी की ऊष्मा को रोक कर रखती हैं।
इससे पृथ्वी का औसत ताप स्थिर रहता है।
⚡ यदि ये गैसें न हों तो पृथ्वी का ताप बहुत कम हो जाएगा।
🟢 14. तापीय प्रसार के परिणाम और प्रयोग
✔️ तारों की लंबाई ताप से बदलती है, इसलिए विद्युत लाइनों में ढील छोड़ी जाती है।
✔️ तापमापक में द्रव के प्रसार पर आधारित सिद्धांत।
✔️ ताप-संवेदन यंत्रों में बायमेटलिक पट्टियाँ।
🧠 Summary (सारांश)
🔹 ऊष्मा और ताप दो अलग भौतिक राशियाँ हैं।
🔹 ताप देने से ठोस, द्रव, गैस — सभी में प्रसार होता है।
🔹 विशिष्ट ऊष्मा धारिता पदार्थ की ऊष्मा धारिता का माप है।
🔹 गुप्त ऊष्मा अवस्था परिवर्तन के दौरान प्रयुक्त ऊष्मा है।
🔹 ऊष्मा संचरण तीन विधियों से होता है — चालकता, संवहन, विकिरण।
🔹 कृष्णिका सभी तरंगदैर्ध्यों की ऊर्जा को अवशोषित करती है।
🔹 स्टीफन का नियम — E = σT⁴।
🔹 न्यूटन शीतन नियम — शीतन दर ∝ तापांतर।
📝 Quick Recap (त्वरित पुनरावृत्ति)
✅ ऊष्मा का सूत्र: Q = mcΔT
✅ गुप्त ऊष्मा: Q = mL
✅ ऊष्मा संतुलन: ह्रास = प्राप्ति
✅ C_p − C_v = R
✅ E = σT⁴ (स्टीफन-बोल्ट्ज़मान नियम)
✅ न्यूटन शीतन नियम: T − T₀ = (T₁ − T₀)e^(−kt)
✅ α, β, γ में सम्बन्ध: β = 2α, γ = 3α
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————
पाठ्यपुस्त के प्रश्न
🔵 प्रश्न 10.1
नाइट्रोजन तथा CO₂ के त्रिक बिन्दु क्रमशः 63.15 K तथा 216.55 K हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फॉरेनहाइट मापक्रम में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
✏️ परिवर्तन के सूत्र —
💡 T(°C) = T(K) − 273.15
💡 T(°F) = (9/5 × T(°C)) + 32
➡️ नाइट्रोजन के लिए:
T₁ = 63.15 K
T₁(°C) = 63.15 − 273.15 = −210°C
T₁(°F) = (9/5 × −210) + 32 = −346°F
➡️ CO₂ के लिए:
T₂ = 216.55 K
T₂(°C) = 216.55 − 273.15 = −56.6°C
T₂(°F) = (9/5 × −56.6) + 32 = −69.9°F
✔️ अतः नाइट्रोजन का त्रिक बिन्दु −210°C (−346°F) तथा CO₂ का त्रिक बिन्दु −56.6°C (−69.9°F) है।
🔵 प्रश्न 10.2
दो एस.एच. तापमापक A तथा B इस प्रकार क्रमांकित किये गये हैं कि जल के त्रिक बिन्दु को 200 A तथा 350 B द्वारा परिभाषित किया गया है। Tₐ तथा Tᵦ में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
✏️ दिया गया है:
जल का त्रिक बिन्दु = 273.16 K
A पैमाने पर = 200 A
B पैमाने पर = 350 B
➡️ सामान्य सम्बन्ध:
(T₁ − 0)/(100 − 0) = (T − 0)/(Tₜ्रिक − 0)
यहाँ दोनों पैमानों के लिए त्रिक बिन्दु का अनुपात समान रहेगा —
Tₐ / 273.16 = 200 / 273.16
Tᵦ / 273.16 = 350 / 273.16
अब सम्बन्ध निकालने हेतु:
Tₐ / Tᵦ = 200 / 350 = 4 / 7
✔️ अतः Tₐ = (4/7) Tᵦ
या Tᵦ = (7/4) Tₐ
🔵 प्रश्न 10.3
किसी तापमान θ के लिए विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ निम्नानुसार सम्बन्धित है —
R = R₀ [1 + α (T − T₀)]
यदि तापमान को जल के त्रिक बिन्दु (273.16 K) पर प्रतिरोध 101.6 Ω तथा सन्तृप्त वाष्प बिन्दु (600.5 K) पर 165.5 Ω हो, तो α तथा 123.4°C पर प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
✏️ दिए गए —
R₀ = 101.6 Ω, R₁ = 165.5 Ω
T₀ = 273.16 K, T₁ = 600.5 K
समीकरण:
R₁ = R₀ [1 + α (T₁ − T₀)]
➡️ 165.5 = 101.6 [1 + α (600.5 − 273.16)]
165.5 / 101.6 = 1 + α (327.34)
1.628 = 1 + 327.34 α
α = (0.628) / 327.34 = 1.92 × 10⁻³ K⁻¹
अब T₂ = 273.16 + 123.4 = 396.56 K पर प्रतिरोध —
R₂ = 101.6 [1 + 1.92×10⁻³ (396.56 − 273.16)]
R₂ = 101.6 [1 + 1.92×10⁻³ (123.4)]
R₂ = 101.6 [1 + 0.237] = 101.6 × 1.237 = 125.6 Ω
✔️ अतः α = 1.92 × 10⁻³ K⁻¹ तथा 123.4°C पर R = 125.6 Ω
🔵 प्रश्न 10.4
(a) तापमान के मानक निर्धारण के लिए मानक निश्चित बिन्दुओं का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
💡 क्योंकि तापमान का सही मापन किसी निश्चित प्राकृतिक घटना पर आधारित होना चाहिए जो हर स्थान पर समान हो।
✔️ मानक बिन्दु (जैसे जल का त्रिक बिन्दु) स्थिर और पुनरुत्पाद्य होते हैं, इसलिए तापमान के मानक निर्धारण में इन्हें प्रयोग किया जाता है।
(b) जैसे कि बताया गया है कि मूल सेल्सियस मापक्रम में दो नियत बिन्दु थे — जल का हिमांक 0°C तथा क्वथनांक 100°C। यदि नया केल्विन पैमाना जल के त्रिक बिन्दु को 273.16 K पर निर्धारित करता है, तो अन्य नियत बिन्दु क्या होगा?
उत्तर:
केल्विन पैमाने में 0°C = 273.15 K होता है।
त्रिक बिन्दु = 273.16 K है।
तो 100°C = 273.15 + 100 = 373.15 K
✔️ अतः जल का क्वथनांक 373.15 K होगा।
(c) केल्विन तापमान (T) और सेल्सियस तापमान (t_c) के बीच सम्बन्ध —
t_c = T − 273.15
प्रश्न में पूछा गया कि 273.15 क्यों लिखा जाता है, 273.16 क्यों नहीं?
उत्तर:
✏️ क्योंकि 273.15 K वह ताप है जो 0°C (जल का हिमांक) के बराबर है, जबकि 273.16 K जल के त्रिक बिन्दु का ताप है।
✔️ अतः सेल्सियस पैमाने को त्रिक बिन्दु नहीं बल्कि हिमांक के सापेक्ष परिभाषित किया गया है।
(d) यदि किसी गैस के तापमापक में आयतन में परिवर्तन तापमान के समानुपाती है, तो जल के त्रिक बिन्दु के ताप 273.16 K पर नियत बिन्दु निर्धारित किया गया है। उस मापक्रम पर जल का हिमांक कितना होगा?
उत्तर:
त्रिक बिन्दु (273.16 K) = 0.01°C के समतुल्य है।
तो हिमांक = 273.16 − 0.01 = 273.15 K
✔️ अतः उस पैमाने पर जल का हिमांक 273.15 K होगा।
🔵 प्रश्न 10.5
दो आदर्श गैस तापमापियों A और B में क्रमशः ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयुक्त की गई हैं। इनके प्रयोगों से प्राप्त आंकड़े निम्न हैं —
जल के त्रिक बिन्दु पर दाब (A में) = 1.250×10⁵ Pa
जल के त्रिक बिन्दु पर दाब (B में) = 0.200×10⁵ Pa
सल्फर के सामान्य क्वथनांक पर दाब (A में) = 1.797×10⁵ Pa
सल्फर के सामान्य क्वथनांक पर दाब (B में) = 0.287×10⁵ Pa
गणना कीजिए कि दोनों तापमापियों द्वारा सल्फर के क्वथनांक के लिए क्या ताप दिखाया जाएगा?
उत्तर:
समीकरण:
(T₂ / T₁) = (P₂ / P₁)
केल्विन तापमान पर —
T₁ = 273.16 K
➡️ तापमापी A के लिए:
T₂(A) = 273.16 × (1.797×10⁵ / 1.250×10⁵)
T₂(A) = 273.16 × 1.4376 = 392.6 K
➡️ तापमापी B के लिए:
T₂(B) = 273.16 × (0.287×10⁵ / 0.200×10⁵)
T₂(B) = 273.16 × 1.435 = 392.3 K
✔️ अतः दोनों तापमापी लगभग समान ताप दिखाएँगे (≈ 392 K)।
🔵 प्रश्न 10.6
किसी 1 m लम्बे स्टील के फीते का यथार्थ अंशांकन 27.0 °C पर किया गया है। किसी तत दिन जब ताप 45 °C था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लम्बाई 63.0 cm मापी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लम्बाई क्या थी? जिस दिन ताप 27.0 °C होगा उस दिन उसी छड़ की लम्बाई क्या होगी? स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.20 × 10⁻⁵ K⁻¹।
उत्तर:
✏️ डेटा: L_पठन = 63.0 cm, ΔT = 45 − 27 = 18 K, α_स्टील = 1.20×10⁻⁵ K⁻¹
➡️ फीते का 1-से.मी. 18 K पर = 1×(1 + αΔT) = 1×(1 + 1.20×10⁻⁵×18) = 1.000216 cm
➡️ वास्तविक लम्बाई (45 °C पर):
L_वास्तविक(45) = 63.0 × 1.000216 = 63.014 cm (लगभग)
➡️ 27 °C पर उसी छड़ की लम्बाई:
L(27) = L_वास्तविक(45) × (1 − αΔT) = 63.014 × (1 − 1.20×10⁻⁵×18) ≈ 63.0 cm
✔️ निष्कर्ष: 45 °C पर वास्तविक लम्बाई ≈ 63.014 cm; 27 °C पर लम्बाई = 63.0 cm.
🔵 प्रश्न 10.7
किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठाना है। 27 °C पर धुरी का बाहरी व्यास 8.70 cm तथा पहिए के केन्द्रीय छिद्र का व्यास 8.69 cm है। सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठंडा किया गया है। धुरी के किस ताप पर पहिया धुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक नियत रहता है: α_स्टील = 1.20×10⁻⁵ K⁻¹।
उत्तर:
✏️ शर्त: D(धुरी, T) = 8.70[1 + α(T − 27)] = 8.69
➡️ 1 + α(T − 27) = 8.69/8.70 = 0.9988506
➡️ α(T − 27) = −0.0011494
➡️ T − 27 = −0.0011494 / (1.20×10⁻⁵) = −95.8 K
➡️ T ≈ 27 − 95.8 = −68.8 °C
✔️ धुरी को लगभग −69 °C तक ठंडा करने पर पहिया चढ़ जाएगा।
🔵 प्रश्न 10.8
ताँबे की चादर में एक छिद्र किया गया है। 27.0 °C पर छिद्र का व्यास 4.24 cm है। इस धातु की चादर को 227 °C तक ताप करने पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.70×10⁻⁵ K⁻¹।
उत्तर:
✏️ ΔT = 227 − 27 = 200 K, α_ताँबा = 1.70×10⁻⁵ K⁻¹
➡️ छिद्र का व्यास भी उसी अनुपात में बढ़ता है: ΔD = D₀ α ΔT = 4.24×(1.70×10⁻⁵)×200
➡️ ΔD = 4.24×0.0034 = 0.0144 cm = 0.144 mm
➡️ नया व्यास: D = 4.24 + 0.0144 = 4.2544 cm (लगभग)
✔️ परिवर्तन ≈ 0.144 mm (वृद्धि)।
🔵 प्रश्न 10.9
27 °C पर 1.8 cm लम्बे किसी पीतल के तार को दो दृढ़ टेकों के बीच अल्प तनाव रखकर थोड़ा कसा गया है। यदि तार को −39 °C ताप तक शीतित करें तो तार में कितना तनाव उत्पन्न हो जाएगा? तार का व्यास 2.0 mm है। पीतल का रेखीय प्रसार गुणांक = 2.0×10⁻⁵ K⁻¹, पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक = 0.91×10¹¹ Pa।
उत्तर:
✏️ स्थिर सिरों पर तापीय संपीडन ⇒ तनाव (σ) = Y α ΔT
➡️ ΔT = 27 − (−39) = 66 K
➡️ σ = 0.91×10¹¹ × 2.0×10⁻⁵ × 66 = 1.20×10⁸ Pa (लगभग)
✔️ तार में उत्पन्न तनाव ≈ 1.2×10⁸ Pa (तन्यता)।
(नोट: यदि बल चाहिए हो तो T = σ × क्षेत्रफल = 1.20×10⁸ × (πd²/4) ≈ 3.77×10² N)
🔵 प्रश्न 10.10
50 cm लम्बी तथा 3.0 mm व्यास की किसी पीतल की छड़ को उसी लम्बाई तथा व्यास की किसी स्टील की छड़ से जोड़ा गया है। यदि ये मूल लम्बाइयाँ 40 °C पर हैं, तो 250 °C पर संयुक्त छड़ की लम्बाई में क्या परिवर्तन होगा? क्या संधि पर कोई तापीय प्रतिवल उत्पन्न होगा? छड़ के सिरे को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है। (ताँबे तथा स्टील के रेखीय प्रसार गुणांक क्रमशः = 2.0×10⁻⁵ K⁻¹, स्टील = 1.2×10⁻⁵ K⁻¹ हैं।)
उत्तर:
✏️ ΔT = 250 − 40 = 210 K
➡️ पीतल भाग का प्रसार: ΔL_पीतल = 0.50 × 2.0×10⁻⁵ × 210 = 0.00210 m = 2.10 mm
➡️ स्टील भाग का प्रसार: ΔL_स्टील = 0.50 × 1.2×10⁻⁵ × 210 = 0.00126 m = 1.26 mm
➡️ कुल परिवर्तन: ΔL_कुल = 2.10 + 1.26 = 3.36 mm
➡️ प्रतिवल? सिरे मुक्त हैं ⇒ कोई तापीय प्रतिवल/तनाव नहीं।
✔️ समाधान: संयुक्त छड़ 3.36 mm बढ़ेगी; संधि पर तनाव शून्य।
🔵 प्रश्न 10.11
ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक 49×10⁻⁵ K⁻¹ है। ताप में 30 °C की वृद्धि होने पर इसके घनत्व में क्या आंशिक परिवर्तन होगा?
उत्तर:
✏️ सिद्धान्त: ρ ∝ 1/V ⇒ Δρ/ρ = −ΔV/V = −βΔT
➡️ Δρ/ρ = −(49×10⁻⁵)×30 = −0.0147
✔️ घनत्व में आंशिक परिवर्तन = −1.47% (अर्थात घनत्व 1.47% घटेगा)।
🔵 प्रश्न 10.12
8.0 kg द्रव्यमान के किसी ऐल्युमिनियम के छोटे ब्लॉक में छिद्र करने के लिए किसी 10 kW की बत्ती का उपयोग किया गया है। 2.5 मिनट में ब्लॉक के ताप में कितनी वृद्धि हो जाएगी? यह मानिए कि 50% शक्ति तो स्वयं बत्ती को गर्म करने में खर्च हो जाती है अथवा परिवेश में लुप्त हो जाती है। ऐल्युमिनियम की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.91 J g⁻¹ K⁻¹ है।
उत्तर:
✏️ प्रभावी ऊष्मा: Q = (0.50)×(शक्ति)×(समय) = 0.5×(10×10³ J s⁻¹)×(2.5 min = 150 s) = 7.5×10⁵ J
✏️ c_Al = 0.91 J g⁻¹ K⁻¹ = 910 J kg⁻¹ K⁻¹
➡️ ΔT = Q/(m c) = (7.5×10⁵)/(8.0×910) = ≈ 1.03×10² K = 103 °C
✔️ ताप में वृद्धि ≈ 103 °C।
🔵 प्रश्न 10.13
2.5 kg द्रव्यमान के ताँबे के गुटके को किसी भट्ठी में 500 °C तक तत करने के पश्चात किसी बड़े हिम-ब्लॉक पर रख दिया जाता है। गलित हो सकने वाली हिम की अधिकतम मात्रा क्या है? ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.39 J g⁻¹ K⁻¹; बर्फ की गलन ऊष्मा = 335 J g⁻¹।
उत्तर:
✏️ ताँबा 500 °C से 0 °C तक ठंडा होगा
✏️ c_Cu = 0.39 J g⁻¹ K⁻¹ = 390 J kg⁻¹ K⁻¹
➡️ Q_ताँबा = m c ΔT = 2.5×390×500 = 4.875×10⁵ J
➡️ पिघलने वाली हिम, m_हिम = Q/L = (4.875×10⁵)/(335×10³) = 1.46 kg (लगभग)
✔️ अधिकतम पिघली हिम ≈ 1.46 kg।
🔵 प्रश्न 10.14
किसी धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के प्रयोग में 0.20 kg के धातु के गुटके को 150 °C पर तत करके, किसी ताँबे के ऊष्मामापी (जल तुल्यांक = 0.025 kg), जिसमें 27 °C का 150 cm³ जल भरा है, में गिराया जाता है। अंतिम ताप 40 °C है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता परिकलित कीजिए। यदि परिक्षण में क्षय ऊष्मा उपेक्षणीय न मानकर परिकलन किया जाता है, तब क्या आपका उत्तर धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के वास्तविक मान से अधिक मान दर्शाएगा अथवा कम?
उत्तर:
✏️ m_धातु = 0.20 kg, T_धातु(प्रारम्भ) = 150 °C, T_अन्तिम = 40 °C
✏️ m_जल = 150 cm³ ⇒ 0.150 kg, m_ऊष्मामापी (जल तुल्यांक) = 0.025 kg
✏️ m_समतुल्य = 0.150 + 0.025 = 0.175 kg, c_जल = 4.2×10³ J kg⁻¹ K⁻¹
➡️ ऊष्मा संतुलन (क्षय ऊष्मा उपेक्षित):
m_धातु c_धातु (150 − 40) = m_समतुल्य c_जल (40 − 27)
0.20 c_धातु × 110 = 0.175 × 4.2×10³ × 13
c_धातु = [0.175 × 4200 × 13]/[0.20 × 110] = ≈ 4.34×10² J kg⁻¹ K⁻¹
💡 दूसरा भाग (विचार): वास्तविक प्रयोग में कुछ ऊष्मा परिवेश में नष्ट होती है जिससे T_अन्तिम कम हो जाता है। इस कम T_अन्तिम को लेकर यदि क्षय ऊष्मा को अनदेखा कर गणना करें तो हर हाल में प्राप्त c_धातु वास्तविक मान से कम निकलेगा।
✔️ उत्तर: c_धातु ≈ 4.34×10² J kg⁻¹ K⁻¹; और क्षय ऊष्मा को नज़रअंदाज़ करने पर परिकलित मान कम पड़ता है।
🔵 प्रश्न 10.15
कुछ सामान्य गैसों के कक्ष ताप पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं के प्रेक्षण नीचे दिए गए हैं —
हाइड्रोजन → 4.87 cal mol⁻¹ K⁻¹
नाइट्रोजन → 4.97 cal mol⁻¹ K⁻¹
ऑक्सीजन → 5.02 cal mol⁻¹ K⁻¹
नाइट्रस ऑक्साइड → 4.99 cal mol⁻¹ K⁻¹
कार्बन मोनोऑक्साइड → 5.01 cal mol⁻¹ K⁻¹
क्लोरीन → 6.17 cal mol⁻¹ K⁻¹
इन गैसों की मापी गई मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएं एक परमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं से स्पष्ट रूप से भिन्न हैं। सैद्धांतिक रूप से किसी एक परमाणुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता 2.92 cal mol⁻¹ K⁻¹ होती है। इस अंतर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
✏️ एक परमाणुक गैस में केवल अनुवाद गति (translational motion) होती है, इसलिए उसके पास 3 स्वतंत्रता डिग्रियाँ होती हैं।
➡️ सैद्धांतिक मान:
C_v = (3/2)R = (3/2) × 1.987 = 2.98 cal mol⁻¹ K⁻¹ (लगभग 2.92)
✏️ द्वि-परमाणुक या बहु-परमाणुक गैसों में केवल अनुवाद गति ही नहीं बल्कि घूर्णन (rotational) और कभी-कभी कंपन (vibrational) ऊर्जा रूप भी शामिल होते हैं।
➡️ अतः इनके लिए स्वतंत्रता डिग्रियाँ 5 या अधिक होती हैं।
C_v = (5/2)R = 4.97 cal mol⁻¹ K⁻¹
✔️ यही मान नाइट्रोजन, ऑक्सीजन आदि के लिए दिया गया है, जो 4.9–5.0 के आसपास है।
➡️ क्लोरीन जैसी भारी बहु-परमाणुक गैसों में कम्पन ऊर्जा भी सक्रिय हो जाती है, जिससे C_v का मान और बढ़कर लगभग 6 cal mol⁻¹ K⁻¹ हो जाता है।
✔️ निष्कर्ष:
मापन में पाया गया अधिक मान गैसों की अतिरिक्त स्वतंत्रता डिग्रियों (घूर्णन व कंपन) के कारण होता है।
🔵 प्रश्न 10.16
101°F ताप व्याप्त से पीड़ित व्यक्ति में ऐल्यूमिनियम (पसीने के वाष्पन के रूप में) ऊष्मा ह्रास के कारण शरीर ठंडा हो जाता है। यदि व्यक्ति के शरीर से 20 मिनट में 98 g जल वाष्पित हो जाए, तो पसीने के वाष्पन द्वारा शरीर से निकलने वाली ऊष्मा की मात्रा ज्ञात कीजिए। जल का वाष्पन गुप्त ऊष्मा 580 cal g⁻¹ है।
उत्तर:
✏️ दिया गया:
m = 98 g, L = 580 cal g⁻¹, समय = 20 min
➡️ ऊष्मा की कुल मात्रा:
Q = m × L = 98 × 580 = 56840 cal
➡️ जूल में बदलते हैं:
1 cal = 4.186 J ⇒ Q = 56840 × 4.186 = 2.38 × 10⁵ J
✔️ निष्कर्ष:
पसीने के वाष्पन से लगभग 2.38×10⁵ J ऊष्मा शरीर से निकल जाती है, जिससे ताप घटता है।
🔵 प्रश्न 10.17
एक व्यक्ति जिसका द्रव्यमान 60 kg है, 45 °C ताप पर “हम बाथ” (भाप स्नान) करता है। भाप शरीर को घेरती है और 6 h के बाद उसका शरीर उसी तापमान पर रह जाता है। यदि इस व्यक्ति की औसत विशिष्ट ऊष्मा धारिता 0.83 cal g⁻¹ K⁻¹ है, तो शरीर की कुल ऊष्मा में कितनी वृद्धि हुई होगी?
उत्तर:
✏️ दिया गया:
m = 60 kg = 60000 g,
c = 0.83 cal g⁻¹ K⁻¹,
ΔT = 45 − 37 = 8 °C (सामान्य ताप 37°C से बढ़कर 45°C)
➡️ Q = m c ΔT
Q = 60000 × 0.83 × 8 = 3.984 × 10⁵ cal
➡️ जूल में: Q = 3.984×10⁵ × 4.186 = 1.67 × 10⁶ J
✔️ शरीर में कुल ऊष्मा वृद्धि ≈ 1.7 × 10⁶ J
🔵 प्रश्न 10.18
एक टैंक की भीतरी सतह का क्षेत्रफल 8.0 m² है तथा उसमें 10.0 cm मोटाई का बर्फ का परत है। यदि बर्फ की बाहरी सतह 10 °C पर है और अंदरूनी सतह 0 °C पर है, तो बर्फ के परत में ऊष्मा प्रवाह की दर ज्ञात कीजिए। बर्फ का ऊष्मीय चालकता गुणांक 2.2×10⁻³ cal cm⁻¹ s⁻¹ °C⁻¹ है।
उत्तर:
✏️ दिया गया:
A = 8.0 m² = 8×10⁴ cm²,
ΔT = 10 − 0 = 10°C,
l = 10 cm,
k = 2.2×10⁻³ cal cm⁻¹ s⁻¹ °C⁻¹
➡️ ऊष्मा प्रवाह की दर का सूत्र:
Q/t = kA(ΔT / l)
Q/t = 2.2×10⁻³ × 8×10⁴ × (10 / 10)
Q/t = 2.2×10⁻³ × 8×10⁴ = 176 cal s⁻¹
➡️ जूल में: 176 × 4.186 = 737 J s⁻¹ = 737 W
✔️ ऊष्मा प्रवाह की दर = 737 W
🔵 प्रश्न 10.19
स्पष्ट कीजिए कि क्यों –
(a) अधिक परावर्तकता वाले पृष्ठ अल्प उत्सर्जक होते हैं।
(b) कंपकपी वाले दिन लकड़ी की देह के दे की अपेक्षा पीतल का गिलास कहीं अधिक शीतल प्रतीत होता है।
(c) कोई प्रकाशिक उष्मामापी (उच्च तापों के मापन की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है, खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफ़ी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्ठी में रखते हैं, तो वह ताप का सही मान मापता है।
(d) बिना वातावरण के पृथ्वी असाधारण रूप से शीतल हो जाएगी।
(e) भाप के परिसंचालन पर आधारित ताप-निकाय जल के परिसंचालन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को उष्ण बनाने में अधिक द्रुत होते हैं।
उत्तर:
(a) ✏️ किर्खोफ़ का नियम: एक ही ताप पर किसी तरंगदैर्ध्य के लिये उत्सर्जकता = अवशोषण-क्षमता।
➡️ अधिक परावर्तकता ⇒ अवशोषण-क्षमता कम ⇒ उत्सर्जकता भी कम।
✔️ अतः ऐसे पृष्ठ अल्प उत्सर्जक होते हैं।
(b) ✏️ पीतल उच्च ऊष्मीय चालक है, लकड़ी निकृष्ट चालक।
➡️ समान ताप पर स्पर्श करने पर पीतल त्वचा से ऊष्मा शीघ्र खींच लेता है ⇒ त्वचा का ताप घटता है ⇒ अधिक शीतल अनुभव होता है।
✔️ लकड़ी ऊष्मा का प्रवाह रोके रखती है ⇒ इतना शीतल नहीं लगता।
(c) ✏️ प्रकाशिक उष्मामापी चमक-तीव्रता की तुलना आदर्श कृष्णिका से करता है (चमक-ताप की धारणा)।
➡️ खुले में लोहे का उत्सर्जकता गुणांक ε < 1 ⇒ प्रत्यक्ष चमक कम ⇒ मापा ताप कम।
➡️ भट्ठी के भीतर दीवारों से अनेक परावर्तन होते हैं ⇒ वस्तु का प्रभावी ε → 1 (कृष्णिका-जैसा कक्ष) ⇒ सही ताप मापा जाता है।
(d) ✏️ पृथ्वी दीर्घ-तरंग अवरक्त विकिरण द्वारा अन्तरिक्ष में ऊष्मा छोड़ती है।
➡️ वातावरण (विशेषतः जलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड) इन विकिरणों को अवशोषित व पुनः प्रेषित करता है (हरित-गृह प्रभाव) ⇒ शीतन धीमा।
✔️ बिना वातावरण ⇒ विकिरण-ह्रास निरावरोध ⇒ पृथ्वी असाधारण रूप से शीतल हो जाएगी।
(e) ✏️ भाप का ताप जल से अधिक होता है तथा संघनन पर गुप्त ऊष्मा मुक्त करती है।
➡️ समान द्रव्यमान पर भाप द्वारा दी गई ऊष्मा mL + mcΔT जल से अधिक होती है; साथ ही संघनन से ऊष्मा-हस्तांतरण गुणांक भी बड़ा।
✔️ अतः भाप-परिसंचालन निकाय भवनों को अधिक तीव्रता से उष्ण बनाते हैं।
🔵 प्रश्न 10.20
किसी पिण्ड का ताप 5 मिनट में 80 °C से 50 °C हो जाता है। यदि परिवेश का ताप 20 °C है, तो उस समय का परिकलन कीजिए जिसमें उसका ताप 60 °C से 30 °C हो जाएगा।
उत्तर (न्यूटन शीतन नियम):
✏️ नियम: (T − T_परिवेश) = (T₀ − T_परिवेश) e^(−kt)
✏️ पहला चरण (5 मिनट):
T₀ = 80 °C, T = 50 °C, T_परिवेश = 20 °C
(T − T_परिवेश)/(T₀ − T_परिवेश) = 30/60 = 1/2 = e^(−k×5)
➡️ e^(−5k) = 1/2 ⇒ k = (ln 2)/5
✏️ दूसरा चरण (आवश्यक समय t):
T₀ = 60 °C, T = 30 °C, T_परिवेश = 20 °C
(T − T_परिवेश)/(T₀ − T_परिवेश) = 10/40 = 1/4 = e^(−kt)
➡️ e^(−kt) = 1/4 = (1/2)² ⇒ −kt = −2 ln 2
➡️ t = (2 ln 2)/k = (2 ln 2)/[(ln 2)/5] = 10 मिनट
✔️ अतः 60 °C से 30 °C होने में समय = 10 मिनट।
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
(CBSE MODEL प्रश्न पत्र)
सिर्फ इसी पाठ से निर्मित CBSE MODEL प्रश्न पत्र।
🔵 Section A – वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
Question 1.
किसी ठोस पिंड की लंबाई ताप बढ़ाने पर क्यों बढ़ती है?
🔵 (A) अणुओं का कंपन बढ़ता है
🟢 (B) अणु आपस में दूर हो जाते हैं
🟠 (C) अणुओं की स्थितिज ऊर्जा घटती है
🔴 (D) अणु स्थिर रहते हैं
Answer: (B) अणु आपस में दूर हो जाते हैं
Question 2.
रेखीय प्रसार गुणांक की SI इकाई क्या है?
🔵 (A) K
🟢 (B) K⁻¹
🟠 (C) J K⁻¹
🔴 (D) m² K⁻¹
Answer: (B) K⁻¹
Question 3.
यदि किसी धातु की लंबाई 1°C ताप बढ़ने पर 0.01% बढ़ती है, तो उसका रेखीय प्रसार गुणांक कितना होगा?
🔵 (A) 1×10⁻⁵ K⁻¹
🟢 (B) 1×10⁻⁴ K⁻¹
🟠 (C) 1×10⁻³ K⁻¹
🔴 (D) 1×10⁻² K⁻¹
Answer: (A) 1×10⁻⁵ K⁻¹
Question 4.
किसी ठोस के क्षेत्रीय प्रसार गुणांक और रेखीय प्रसार गुणांक में सम्बन्ध है —
🔵 (A) β = α
🟢 (B) β = 2α
🟠 (C) β = 3α
🔴 (D) β = ½ α
Answer: (B) β = 2α
Question 5.
किसी गैस का आयतन प्रसार गुणांक γ = ?
🔵 (A) α/2
🟢 (B) 2α
🟠 (C) 3α
🔴 (D) α³
Answer: (C) 3α
Question 6.
कौन-सा उपकरण ताप मापने के लिए प्रयुक्त होता है?
🔵 (A) बैरोमीटर
🟢 (B) थर्मामीटर
🟠 (C) मैनोमीटर
🔴 (D) गैल्वेनोमीटर
Answer: (B) थर्मामीटर
Question 7.
विशिष्ट ऊष्मा धारिता की SI इकाई क्या है?
🔵 (A) J kg⁻¹ K⁻¹
🟢 (B) cal g⁻¹
🟠 (C) W m⁻²
🔴 (D) K⁻¹
Answer: (A) J kg⁻¹ K⁻¹
Question 8.
जब किसी पदार्थ का ताप बदलता है पर अवस्था नहीं बदलती, तब प्रयुक्त ऊष्मा क्या कहलाती है?
🔵 (A) गुप्त ऊष्मा
🟢 (B) विशिष्ट ऊष्मा
🟠 (C) बाह्य ऊष्मा
🔴 (D) आंतरिक ऊष्मा
Answer: (B) विशिष्ट ऊष्मा
Question 9.
गलन गुप्त ऊष्मा किस अवस्था परिवर्तन से संबंधित है?
🔵 (A) ठोस से द्रव
🟢 (B) द्रव से गैस
🟠 (C) गैस से ठोस
🔴 (D) द्रव से ठोस
Answer: (A) ठोस से द्रव
Question 10.
कौन-सा पदार्थ ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक है?
🔵 (A) लकड़ी
🟢 (B) तांबा
🟠 (C) काँच
🔴 (D) जल
Answer: (B) तांबा
Question 11.
गुप्त ऊष्मा की इकाई क्या है?
🔵 (A) J kg⁻¹
🟢 (B) J s⁻¹
🟠 (C) W m⁻¹
🔴 (D) J K⁻¹
Answer: (A) J kg⁻¹
Question 12.
ऊष्मा संचरण का कौन-सा तरीका निर्वात में भी कार्य करता है?
🔵 (A) चालकता
🟢 (B) संवहन
🟠 (C) विकिरण
🔴 (D) सब
Answer: (C) विकिरण
Question 13.
किर्खोफ़ के नियम के अनुसार —
🔵 (A) उत्सर्जकता = परावर्तकता
🟢 (B) उत्सर्जकता = अवशोषण-क्षमता
🟠 (C) उत्सर्जकता ∝ ताप
🔴 (D) कोई नहीं
Answer: (B) उत्सर्जकता = अवशोषण-क्षमता
Question 14.
स्टीफन का नियम बताता है कि उत्सर्जन शक्ति ∝
🔵 (A) T
🟢 (B) T²
🟠 (C) T³
🔴 (D) T⁴
Answer: (D) T⁴
Question 15.
कृष्णिका क्या है?
🔵 (A) जो सभी किरणों को परावर्तित करे
🟢 (B) जो सभी किरणों को पार कर दे
🟠 (C) जो सभी किरणों को अवशोषित करे
🔴 (D) जो कोई किरण न अवशोषित करे
Answer: (C) जो सभी किरणों को अवशोषित करे
Question 16.
न्यूटन के शीतन नियम के अनुसार —
🔵 (A) शीतन दर तापांतर पर निर्भर नहीं करती
🟢 (B) शीतन दर तापांतर के समानुपाती होती है
🟠 (C) शीतन दर तापांतर के वर्ग के समानुपाती होती है
🔴 (D) कोई नहीं
Answer: (B) शीतन दर तापांतर के समानुपाती होती है
Question 17.
पृथ्वी का ताप स्थिर रखने में कौन-सा प्रभाव मुख्य है?
🔵 (A) हरितगृह प्रभाव
🟢 (B) चुंबकीय प्रभाव
🟠 (C) प्रकाशीय प्रभाव
🔴 (D) वायुगतिक प्रभाव
Answer: (A) हरितगृह प्रभाव
Question 18.
निम्नलिखित में कौन ऊष्मा का निकृष्ट चालक है?
🔵 (A) लोहा
🟢 (B) तांबा
🟠 (C) लकड़ी
🔴 (D) चाँदी
Answer: (C) लकड़ी
(Section B & C: Q19–Q27 — संक्षिप्त एवं मध्यम उत्तर वाले प्रश्न)
🟢 Section B – Very Short / Short Answer Questions (Q19–Q23)
Question 19.
रेखीय प्रसार, क्षेत्रीय प्रसार और आयतन प्रसार में क्या अन्तर है?
Answer:
✏️ रेखीय प्रसार: केवल लंबाई में वृद्धि होती है।
➡️ ΔL = L₀ α ΔT
✏️ क्षेत्रीय प्रसार: केवल क्षेत्रफल बढ़ता है।
➡️ ΔA = A₀ β ΔT, जहाँ β = 2α
✏️ आयतन प्रसार: पूरे आयतन में वृद्धि होती है।
➡️ ΔV = V₀ γ ΔT, जहाँ γ = 3α
✔️ अंतर: रेखीय प्रसार एक आयाम का, क्षेत्रीय प्रसार दो आयाम का और आयतन प्रसार तीन आयाम का प्रसार होता है।
Question 20.
गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) को परिभाषित कीजिए और इसके प्रकार बताइए।
Answer:
✏️ गुप्त ऊष्मा वह ऊष्मा है जो किसी पदार्थ को अवस्था परिवर्तन करने में लगती है जबकि ताप अपरिवर्तित रहता है।
💡 प्रकार:
1️⃣ गलन गुप्त ऊष्मा (L_f): ठोस से द्रव बनने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
2️⃣ वाष्पन गुप्त ऊष्मा (L_v): द्रव से गैस बनने हेतु आवश्यक ऊष्मा।
➡️ सूत्र: Q = mL
Question 21.
ऊष्मीय चालकता (Thermal Conductivity) क्या होती है?
Answer:
✏️ ऊष्मीय चालकता किसी पदार्थ की ऊष्मा संचरण करने की क्षमता है।
➡️ सूत्र: Q/t = kA(ΔT / l)
जहाँ k = ऊष्मीय चालकता गुणांक।
✔️ उच्च चालकता वाले पदार्थ जैसे ताँबा, चाँदी ऊष्मा के उत्तम चालक हैं, जबकि लकड़ी, काँच निकृष्ट चालक हैं।
Question 22.
विशिष्ट ऊष्मा धारिता और मोलर ऊष्मा धारिता में क्या अन्तर है?
Answer:
💡 विशिष्ट ऊष्मा धारिता (c): 1 kg पदार्थ का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा।
➡️ Q = mcΔT
💡 मोलर ऊष्मा धारिता (C): 1 mol पदार्थ का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा।
➡️ Q = nCΔT
✔️ अन्तर: c द्रव्यमान पर निर्भर है, जबकि C मोल पर।
Question 23.
किर्खोफ़ का नियम क्या है?
Answer:
✏️ किसी निश्चित ताप और तरंगदैर्ध्य पर किसी पदार्थ की उत्सर्जकता (emissivity) उसकी अवशोषण क्षमता (absorptivity) के बराबर होती है।
➡️ ε = a
✔️ इसका प्रयोग कृष्णिका विकिरणों और वास्तविक वस्तुओं की उत्सर्जक शक्ति ज्ञात करने में होता है।
🔴 Section C – Mid-length Questions / Numericals (Q24–Q27)
Question 24.
एक 1 m लम्बी लोहे की छड़ का ताप 20°C से 120°C तक बढ़ाया जाता है। यदि α = 1.2×10⁻⁵ K⁻¹ है, तो छड़ की लंबाई में वृद्धि ज्ञात कीजिए।
Answer:
✏️ दिए गए — L₀ = 1 m, ΔT = 120 − 20 = 100 K, α = 1.2×10⁻⁵ K⁻¹
➡️ ΔL = L₀ α ΔT = 1 × 1.2×10⁻⁵ × 100
➡️ ΔL = 1.2×10⁻³ m = 1.2 mm
✔️ लंबाई में वृद्धि = 1.2 mm।
Question 25.
0°C से 100°C तक ताप बढ़ाने पर 1 L जल में कितना प्रसार होगा, यदि जल का आयतन प्रसार गुणांक 0.000214 K⁻¹ है?
Answer:
✏️ दिए गए — V₀ = 1 L = 1000 cm³, ΔT = 100 K, γ = 0.000214 K⁻¹
➡️ ΔV = V₀ γ ΔT = 1000 × 0.000214 × 100 = 21.4 cm³
✔️ आयतन में वृद्धि = 21.4 cm³।
Question 26.
0°C पर बर्फ को 50°C तक जल में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा ज्ञात कीजिए।
(m = 200 g, L_f = 80 cal g⁻¹, c = 1 cal g⁻¹ K⁻¹)
Answer:
✏️ चरण 1: बर्फ को पिघलाना
Q₁ = mL_f = 200 × 80 = 16000 cal
✏️ चरण 2: जल को 0°C से 50°C तक गर्म करना
Q₂ = mcΔT = 200 × 1 × 50 = 10000 cal
➡️ Q_कुल = Q₁ + Q₂ = 16000 + 10000 = 26000 cal
✔️ आवश्यक कुल ऊष्मा = 2.6×10⁴ cal।
Question 27.
एक धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता ज्ञात कीजिए यदि 0.2 kg धातु का ताप 150°C से 40°C होने पर जल (0.15 kg, c = 4200 J/kg K) और पात्र (जल तुल्यांक 0.025 kg) का ताप 27°C से 40°C तक बढ़ जाता है।
Answer:
✏️ दिए गए —
m₁ = 0.2 kg, T₁ = 150°C, T₃ = 40°C
m₂ = 0.175 kg, c₂ = 4200 J/kg K, T₂ = 27°C
➡️ ऊष्मा ह्रास = ऊष्मा प्राप्ति
m₁ c₁ (150 − 40) = m₂ c₂ (40 − 27)
0.2 c₁ × 110 = 0.175 × 4200 × 13
c₁ = (0.175 × 4200 × 13) / (0.2 × 110)
c₁ = 434 J/kg K (लगभग)
✔️ धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 4.34×10² J/kg K।
🔵 Section D – दीर्घ उत्तर वाले प्रश्न (Q28–Q31)
Question 28.
ऊष्मीय प्रसार (Thermal Expansion) का सिद्धांत समझाइए। इसके प्रकार और गणितीय व्यंजक दीजिए।
Answer:
✏️ जब किसी ठोस, द्रव या गैस को ताप दिया जाता है तो उनके कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है और कणों के बीच की दूरी बढ़ने लगती है। इस कारण वस्तु का आकार या आयतन बढ़ जाता है। इस घटना को ऊष्मीय प्रसार कहा जाता है।
💡 ऊष्मीय प्रसार के तीन प्रकार:
1️⃣ रेखीय प्रसार (Linear Expansion): केवल लंबाई में वृद्धि होती है।
➡️ ΔL = L₀ α ΔT
2️⃣ क्षेत्रीय प्रसार (Areal Expansion): केवल क्षेत्रफल बढ़ता है।
➡️ ΔA = A₀ β ΔT, जहाँ β = 2α
3️⃣ आयतन प्रसार (Volumetric Expansion): आयतन बढ़ता है।
➡️ ΔV = V₀ γ ΔT, जहाँ γ = 3α
✔️ निष्कर्ष: प्रसार ताप के साथ बढ़ता है और प्रत्येक पदार्थ का प्रसार गुणांक (α, β, γ) भिन्न होता है।
Question 29.
विशिष्ट ऊष्मा धारिता (Specific Heat Capacity) का सिद्धांत समझाइए तथा ऊष्मामापी (Calorimeter) का उपयोग लिखिए।
Answer:
✏️ विशिष्ट ऊष्मा धारिता (c): किसी पदार्थ की वह ऊष्मा जो 1 kg पदार्थ का ताप 1°C बढ़ाने हेतु आवश्यक हो।
➡️ सूत्र: Q = mcΔT
💡 सिद्धांत:
ऊष्मा की प्राप्ति और ह्रास के सिद्धांत पर आधारित —
ऊष्मा ह्रास = ऊष्मा प्राप्ति
m₁c₁(θ₁ − θ) = m₂c₂(θ − θ₂)
💡 ऊष्मामापी का प्रयोग:
1️⃣ धातुओं की विशिष्ट ऊष्मा ज्ञात करने में।
2️⃣ गुप्त ऊष्मा के निर्धारण में।
3️⃣ अज्ञात ताप ज्ञात करने में।
✔️ निष्कर्ष: ऊष्मामापी एक ऐसा उपकरण है जिससे ऊष्मा संबंधी गणनाएँ सटीक रूप में की जा सकती हैं।
Question 30.
विकिरण (Radiation) की व्याख्या कीजिए। विकिरण के नियमों का वर्णन कीजिए।
Answer:
✏️ जब ऊष्मा तरंगों के रूप में माध्यम के बिना ही एक पिण्ड से दूसरे पिण्ड में प्रवाहित होती है, तो उसे विकिरण कहा जाता है।
💡 विकिरण के मुख्य नियम:
1️⃣ किर्खोफ़ का नियम: उत्सर्जकता (ε) = अवशोषण क्षमता (a)।
2️⃣ स्टीफन-बोल्ट्ज़मान नियम:
कृष्णिका द्वारा प्रति सेकंड प्रति इकाई क्षेत्रफल उत्सर्जित ऊर्जा
➡️ E = σT⁴
जहाँ σ = 5.67×10⁻⁸ W m⁻² K⁻⁴
3️⃣ वीन विस्थापन नियम:
λₘT = स्थिरांक (2.9×10⁻³ m·K)
4️⃣ प्लांक का नियम:
किसी निश्चित तरंगदैर्ध्य पर विकिरण तीव्रता ताप पर निर्भर करती है।
✔️ निष्कर्ष: विकिरण ऊष्मा संचरण की सबसे तेज विधि है और सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक इसी प्रकार पहुँचती है।
Question 31.
न्यूटन के शीतन नियम (Newton’s Law of Cooling) को समझाइए और उसका व्युत्पादन दीजिए।
Answer:
✏️ नियम: किसी वस्तु के ताप घटने की दर उस वस्तु के ताप और उसके परिवेश के तापांतर के समानुपाती होती है।
➡️ dT/dt ∝ (T − T₀)
या
dT/dt = −k(T − T₀)
💡 व्युत्पादन:
इस अवकल समीकरण को हल करने पर —
∫dT/(T − T₀) = −k ∫dt
ln(T − T₀) = −kt + C
⇒ (T − T₀) = (T₁ − T₀)e^(−kt)
✔️ निष्कर्ष:
यह नियम तापीय विकिरण के प्रारंभिक चरणों में लागू होता है जब तापांतर बहुत बड़ा न हो।
🟢 Section E – अनुप्रयोगात्मक / विस्तृत प्रश्न (Q32–Q33)
Question 32.
स्टीफन-बोल्ट्ज़मान नियम का विवरण दीजिए तथा इसका व्यावहारिक महत्व बताइए।
Answer:
✏️ नियम:
कृष्णिका द्वारा प्रति सेकंड प्रति इकाई क्षेत्रफल उत्सर्जित ऊर्जा उसके पूर्ण ताप (T) की चौथी घात के समानुपाती होती है —
➡️ E = σT⁴
जहाँ
E = उत्सर्जित ऊर्जा,
σ = स्टीफन स्थिरांक (5.67×10⁻⁸ W m⁻² K⁻⁴)।
💡 महत्व:
1️⃣ तारों के ताप निर्धारण में।
2️⃣ सूर्य की सतह का ताप ज्ञात करने में।
3️⃣ औद्योगिक भट्टियों के ताप मापन में।
4️⃣ ऊर्जा ह्रास का अनुमान लगाने में।
✔️ निष्कर्ष: यह नियम ऊष्मा विकिरण के मात्रात्मक अध्ययन का आधार है।
Question 33.
हरितगृह प्रभाव (Greenhouse Effect) क्या है? यह पृथ्वी के जीवन के लिए क्यों आवश्यक है?
Answer:
✏️ सूर्य की ऊष्मा लघु तरंगों के रूप में पृथ्वी तक पहुँचती है। पृथ्वी इसे अवशोषित कर दीर्घ तरंगों में पुनः उत्सर्जित करती है।
वायुमंडल में उपस्थित गैसें — CO₂, CH₄, H₂O — इन दीर्घ तरंगों को अवशोषित कर पुनः पृथ्वी की ओर भेज देती हैं।
यह ऊष्मा का फँसना ही हरितगृह प्रभाव कहलाता है।
💡 महत्व:
1️⃣ पृथ्वी का औसत ताप लगभग 15°C बनाए रखता है।
2️⃣ जीवन के लिए अनुकूल तापीय परिस्थितियाँ बनती हैं।
3️⃣ बिना इस प्रभाव के पृथ्वी का ताप −18°C तक घट सकता था।
✔️ निष्कर्ष:
हरितगृह प्रभाव आवश्यक तो है, परंतु गैसों की अत्यधिक वृद्धि से यह जलवायु असंतुलन और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बन सकता है।
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————