Class 11 : Physics (In Hindi) – अध्याय 13: दोलन
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔶 1️⃣ विस्तृत व्याख्या (~1700 शब्द)
🔵 परिचय (Introduction)
जब कोई वस्तु किसी निश्चित स्थिति के आस-पास आगे–पीछे या ऊपर–नीचे समानांतर गति दोहराती है, तो उसे दोलन (Oscillation) या स्पंदन (Vibration) कहा जाता है।
उदाहरण —
🌿 एक लटकन (Pendulum) का आगे-पीछे झूलना,
🌿 स्प्रिंग से जुड़ा द्रव्यमान ऊपर-नीचे गति करना,
🌿 ध्वनि उत्पन्न करने वाले तारों का कंपन आदि।
💡 मुख्य विचार:
दोलन गति एक प्रकार की आवर्त गति होती है जिसमें वस्तु अपनी स्थिति को बार-बार पार करती है।

🟢 दोलन के प्रकार (Types of Oscillations)
1️⃣ मुक्त दोलन (Free Oscillation):
यदि कोई वस्तु बिना बाहरी बल के अपने संतुलन बिंदु के चारों ओर गति करती है, तो यह मुक्त दोलन कहलाता है।
➡️ उदाहरण: बिना अवरोध के झूलता लटकन।
2️⃣ अनुनादी दोलन (Resonant Oscillation):
जब किसी वस्तु पर बाहरी बल समान आवृत्ति से लगाया जाए जिससे उसका आयाम बढ़ जाए।
3️⃣ नियत दोलन (Damped Oscillation):
यदि घर्षण या प्रतिरोध के कारण आयाम धीरे-धीरे घटता जाए।
4️⃣ प्रेरित दोलन (Forced Oscillation):
जब किसी वस्तु पर बाहरी आवधिक बल कार्य करता है।
🔴 सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion – SHM)
यदि किसी वस्तु पर संतुलन स्थिति से विस्थापन के समानुपाती और विपरीत दिशा में बल कार्य करता है, तो वस्तु सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion) करती है।
💡 परिभाषा:
“जब किसी वस्तु का त्वरण (a) संतुलन स्थिति से विस्थापन (x) के समानुपाती तथा विपरीत दिशा में हो, तो गति सरल आवर्त गति कहलाती है।”
✏️ समीकरण:
a ∝ −x
या, a = −ω²x
जहाँ, ω = कोणीय आवृत्ति (Angular frequency) है।

🟡 सरल आवर्त गति का समीकरण (Equation of SHM)
मान लीजिए एक कण सरल आवर्त गति कर रहा है —
🔹 विस्थापन (x):
x = A sin(ωt + φ)
जहाँ,
A = आयाम (Amplitude)
ω = कोणीय आवृत्ति
t = समय
φ = प्रारंभिक फेज (Initial phase)
🔹 वेग (v):
v = dx/dt = Aω cos(ωt + φ)
🔹 त्वरण (a):
a = dv/dt = −Aω² sin(ωt + φ) = −ω²x
🔵 वेग और त्वरण का सम्बन्ध
v² = ω²(A² − x²)
✔️ यह बताता है कि वेग अधिकतम तब होता है जब विस्थापन शून्य होता है (x = 0)।
🟢 कालावधि और आवृत्ति (Time Period & Frequency)
🔹 कालावधि (T):
एक पूर्ण दोलन में लगने वाला समय।
🔹 आवृत्ति (ν):
एक सेकंड में होने वाले दोलनों की संख्या।
संबंध: ν = 1/T
🔴 दोलन की कोणीय आवृत्ति (Angular Frequency)
ω = 2πν = 2π/T
यह मापता है कि कण एक सेकंड में कितने रेडियन घूमता है।
🟡 स्प्रिंग-दोलन (Spring Oscillation)
💡 Hooke का नियम:
स्प्रिंग के विस्तार या संकुचन में बल F विस्थापन x के समानुपाती होता है —
F = −kx
जहाँ, k = स्प्रिंग स्थिरांक।
✏️ समीकरण:
m(d²x/dt²) = −kx
⇒ d²x/dt² + (k/m)x = 0
🔹 अतः ω = √(k/m)
🔹 कालावधि T = 2π√(m/k)
✔️ भारी वस्तु (m बड़ा) = गति धीमी; कठोर स्प्रिंग (k बड़ा) = गति तेज।
🔵 ऊर्जा का परिवर्तन (Energy in SHM)
किसी SHM में कुल यांत्रिक ऊर्जा (E) = गतिज ऊर्जा (K) + स्थितिज ऊर्जा (U)
✏️ Kinetic Energy:
K = ½ mω²(A² − x²)
✏️ Potential Energy:
U = ½ mω²x²
✏️ Total Energy:
E = ½ mω²A² (स्थिर रहती है)
✔️ निष्कर्ष:
ऊर्जा दोलन के दौरान गतिज और स्थितिज के बीच रूपांतरित होती रहती है।
🟢 गुरुत्वाकर्षण लटकन (Simple Pendulum)
यह एक बिंदु-द्रव्यमान है जो हल्के, असंपीड्य धागे से जुड़ा है और समान गुरुत्व क्षेत्र में संतुलन स्थिति के चारों ओर दोलन करता है।
✏️ समीकरण:
T = 2π√(l/g)
जहाँ,
l = लटकन की लंबाई,
g = गुरुत्व त्वरण।
✔️ यदि g घटे (जैसे पहाड़ पर), तो T बढ़ता है।
🔴 लघु कोण सन्निकटन (Small Angle Approximation)
यदि कोण θ बहुत छोटा हो, तो sinθ ≈ θ (रेडियन में)।
इस स्थिति में लटकन की गति सरल आवर्त गति होती है।
🟡 दोलन में ऊर्जा का ग्राफ
स्थितिज ऊर्जा (U) का ग्राफ परवलयाकार होता है।
गतिज ऊर्जा (K) विस्थापन पर निर्भर करती है और अधिकतम होती है जब x = 0।
कुल ऊर्जा (E) हमेशा स्थिर रहती है।
🔵 नियत (Damped) दोलन
जब माध्यम के घर्षण या प्रतिरोध के कारण आयाम धीरे-धीरे घटता जाता है, तब दोलन नियत कहलाते हैं।
✏️ समीकरण:
A = A₀ e^(-bt/2m)
जहाँ b = damping constant
✔️ आयाम धीरे-धीरे घटता है लेकिन आवृत्ति लगभग समान रहती है।
🟢 प्रेरित (Forced) दोलन
जब किसी दोलन प्रणाली पर बाहरी आवर्त बल लगाया जाता है तो वह उसी बल की आवृत्ति पर दोलन करने लगती है।
💡 उदाहरण:
ध्वनि में अनुनाद का उत्पन्न होना।
🔴 अनुनाद (Resonance)
जब बाहरी बल की आवृत्ति किसी प्रणाली की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर हो जाती है, तो आयाम बहुत बढ़ जाता है — इस घटना को अनुनाद (Resonance) कहते हैं।
✔️ अनुनाद उपयोगी भी हो सकता है (वाद्य यंत्रों में), और हानिकारक भी (पुलों में कंप कंपन)।


🔶 2️⃣ सारांश (~300 शब्द)
🔹 दोलन का अर्थ है किसी वस्तु की आवर्त गति।
🔹 सरल आवर्त गति में पुनर्स्थापन बल विस्थापन के समानुपाती और विपरीत होता है।
🔹 SHM का सामान्य समीकरण: x = A sin(ωt + φ)
🔹 वेग: v = Aω cos(ωt + φ), त्वरण: a = −ω²x
🔹 कालावधि T = 2π/ω और आवृत्ति ν = 1/T
🔹 स्प्रिंग-दोलन में T = 2π√(m/k)
🔹 लटकन-दोलन में T = 2π√(l/g)
🔹 कुल ऊर्जा E = ½ mω²A² (स्थिर रहती है)।
🔹 नियत दोलन में आयाम धीरे-धीरे घटता है।
🔹 प्रेरित दोलन में बाहरी बल से दोलन होता है।
🔹 अनुनाद में बाहरी और प्राकृतिक आवृत्तियाँ समान होने पर आयाम अधिकतम होता है।
🧠 3️⃣ 📝 Quick Recap (त्वरित पुनरावृत्ति)
✔️ SHM की परिभाषा → a ∝ −x
✔️ समीकरण → x = A sin(ωt + φ)
✔️ कालावधि → T = 2π√(m/k) या 2π√(l/g)
✔️ ऊर्जा → E = ½ mω²A²
✔️ नियत दोलन → A = A₀ e^(-bt/2m)
✔️ अनुनाद → आवृत्तियाँ समान होने पर आयाम अधिकतम
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पाठ्यपुस्त के प्रश्न
🔷 प्रश्न 13.1
नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन आवर्ती गति को निरूपित करता है?
(i) किसी तेज़ इंजन गाड़ी के एक छोर से दूसरे छोर तक जाना और अपनी एक वापसी यात्रा पूरी करना।
(ii) किसी स्विंग/झूले पर बैठे बच्चे का आगे–पीछे झूलना।
(iii) किसी स्वतंत्र रूप से घूम रहे पृथ्वी के अक्षांश को उसका N–S दिशा में घूर्णन कर छोड़ देना।
(iv) अपने हाथों से पंखा घुमाना: पूरी गति का एक चक्कर लगाना।
उत्तर:
✏️ (i) इंजन गाड़ी की गति आवर्ती नहीं है क्योंकि वह समान समयांतराल पर दोहराई नहीं जाती।
🟢 (ii) झूले की गति आगे–पीछे समान समयांतराल पर दोहरती है, अतः यह आवर्ती गति है।
🔵 (iii) पृथ्वी का घूर्णन भी निश्चित समय (24 घंटे) में एक बार पूरा होता है, अतः यह भी आवर्ती गति है।
🟡 (iv) पंखा घुमाने पर उसके पंखों की गति हर घूर्णन में दोहरती है, अतः यह भी आवर्ती गति है।
✔️ निष्कर्ष: (ii), (iii) और (iv) — ये तीनों आवर्ती गतियाँ हैं।
🔷 प्रश्न 13.2
नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन-सी गति (दोलन) सरल आवर्त गति है तथा कौन-सी सरल आवर्त गति नहीं मानी जा सकती?
(i) घड़ी के पेंडुलम की गति
(ii) किसी U-ट्यूब में द्रवस्तर का ऊपर-नीचे दोलन
(iii) किसी स्प्रिंग से लटकते भार का ऊपर-नीचे दोलन
(iv) किसी बहुपरमाणुक अणु के अणु-अंतराल कम्पन की गति
उत्तर:
✏️ (i) पेंडुलम की गति बहुत छोटे कोणों (लगभग 5° से कम) पर सरल आवर्त गति होती है।
🟢 (ii) U-ट्यूब में द्रवस्तर का ऊपर-नीचे आना सरल आवर्त गति का उदाहरण है।
🔵 (iii) स्प्रिंग से लटकते भार का ऊपर-नीचे दोलन भी पुनर्स्थापन बल ∝ विस्थापन के कारण सरल आवर्त गति है।
🔴 (iv) बहुपरमाणुक अणु के अणु-अंतराल कम्पन की गति जटिल होती है, सभी परमाणु अलग-अलग दिशा में गति करते हैं, अतः यह सरल आवर्त गति नहीं है।
✔️ निष्कर्ष:
सरल आवर्त गतियाँ — (i), (ii), (iii)
सरल आवर्त नहीं — (iv)
प्रश्न 13.3
चित्र 13.18 में किसी कण की रेखीय गति के लिए चार x–t आरेख दिए हैं। इनमें से कौन-सा आरेख आवर्ती गति का निरूपण करता है? उस गति का आवर्तकाल क्या है (आवर्ती गति वाली का)?
उत्तर:
✏️ आरेख (a):
वक्र निरन्तर ऊपर की ओर बढ़ता है; कोई दोहराव नहीं।
✔️ आवर्ती नहीं।
✏️ आरेख (b):
दाँतेदार (सॉटूथ) रूप, हर समान समयांतराल पर वही पैटर्न दोहरता है।
✔️ आवर्ती (पर सरल आवर्त नहीं)।
➡️ ग्राफ से शिखर/दोहरे बिन्दु हर 1 s पर दोहरते दिखते हैं, अतः आवर्तकाल T ≈ 1 s।
✏️ आरेख (c):
अनियमित उतार-चढ़ाव; कोई निश्चित दोहराव नहीं।
✔️ आवर्ती नहीं।
✏️ आरेख (d):
शुद्ध साइन तरंग जैसा नियमित दोहराव।
✔️ आवर्ती और सरल आवर्त।
➡️ शिखर/गर्त प्रत्येक 2 s पर दोहरते दिखते हैं, अतः आवर्तकाल T ≈ 2 s।
✔️ निष्कर्ष:
आवर्ती: (b) और (d); इनमें (d) सरल आवर्त भी है।
T(b) ≈ 1 s, T(d) ≈ 2 s।
प्रश्न 13.4
नीचे दिए गए समय के फलनों में कौन-सा (a) सरल आवर्त गति, (b) आवर्ती पर सरल आवर्त नहीं, तथा (c) अनावर्ती गति का निरूपण करता है? प्रत्येक आवर्ती गति का आवर्तनकाल और कोणीय आवृत्ति भी लिखिए (ω > 0)।
(a) sin ωt − cos ωt
(b) sin³ ωt
(c) 3 cos(π/4 − 2ωt)
(d) cos ωt + cos 3ωt + cos 5ωt
(e) exp(−βt²)
(f) 1 + ωt + ω²t²
उत्तर:
🟢 (a) sin ωt − cos ωt
➡️ sin ωt − cos ωt = √2 sin(ωt − π/4)
✔️ सरल आवर्त; आयाम A = √2, आवर्तनकाल T = 2π/ω, कोणीय आवृत्ति ω।
🟡 (b) sin³ ωt
➡️ sin³ ωt = (3 sin ωt − sin 3ωt)/4
✔️ आवर्ती पर सरल आवर्त नहीं; मूल आवर्तनकाल T = 2π/ω।
🔵 (c) 3 cos(π/4 − 2ωt)
➡️ कोसाइन रूप; केवल चरण-परिवर्तन है।
✔️ सरल आवर्त; आयाम A = 3, T = π/ω, कोणीय आवृत्ति 2ω।
🟠 (d) cos ωt + cos 3ωt + cos 5ωt
➡️ कई हार्मोनिक आवृत्तियाँ; लघुत्तम समान आवर्तनकाल T = 2π/ω।
✔️ आवर्ती पर सरल आवर्त नहीं।
🔴 (e) exp(−βt²)
➡️ समय के साथ घटता रूप; कोई दोहराव नहीं।
✖️ अनावर्ती।
🟣 (f) 1 + ωt + ω²t²
➡️ बहुपद रूप; एकसार परिवर्तन, कोई आवृत्ति नहीं।
✖️ अनावर्ती।
✔️ सारांश:
(a) सरल आवर्त, T = 2π/ω
(b) आवर्ती पर सरल आवर्त नहीं, T = 2π/ω
(c) सरल आवर्त, T = π/ω
(d) आवर्ती पर सरल आवर्त नहीं, T = 2π/ω
(e) अनावर्ती
(f) अनावर्ती
प्रश्न 13.5
कोई कण एक-दूसरे से 10 cm दूरी पर स्थित दो बिंदुओं A तथा B के बीच रैखिक सरल आवर्त गति कर रहा है।
A से B की ओर दिशा को धनात्मक दिशा मानकर बताइए कि किसी क्षण पर कण का त्वरण शून्य कहाँ होगा:
(a) A सिरे पर है।
(b) B सिरे पर है।
(c) A की ओर जाते हुए AB के मध्य बिंदु पर है।
(d) A की ओर जाते हुए B से 2 cm दूर है।
(e) B की ओर जाते हुए A से 3 cm दूर है।
(f) A की ओर जाते हुए B से 4 cm दूर है।
उत्तर:
✏️ सिद्धांत:
सरल आवर्त गति में त्वरण a = −ω²x होता है।
अतः त्वरण तभी शून्य होगा जब x = 0, अर्थात संतुलन स्थिति (मध्य बिंदु) पर।
➡️ इसलिए कण का त्वरण शून्य तब होगा जब वह AB के मध्य बिंदु पर हो।
✔️ सही विकल्प: (c) A की ओर जाते हुए AB के मध्य बिंदु पर है।
प्रश्न 13.6
नीचे दिए गए किसी कण के त्वरण (a) तथा विस्थापन (x) के बीच संबंधों में से किससे सरल आवर्त गति संबंध है?
(a) a = 0.7x
(b) a = −200x²
(c) a = −10x
(d) a = 100x²
उत्तर:
✏️ सिद्धांत:
सरल आवर्त गति के लिए a ∝ −x अर्थात a = −ω²x होना चाहिए।
इसलिए a विस्थापन x के विपरीत चिन्ह वाला और रेखीय संबंध होना चाहिए।
🟢 (a) a = 0.7x → समान चिन्ह ⇒ नहीं।
🔵 (b) a = −200x² → x² पर निर्भर ⇒ नहीं।
🟡 (c) a = −10x → रेखीय और विपरीत चिन्ह ⇒ सरल आवर्त गति।
🔴 (d) a = 100x² → x² पर निर्भर ⇒ नहीं।
✔️ सही उत्तर: (c) a = −10x
🔷 प्रश्न 13.7
सरल आवर्त गति करने वाले किसी कण की गति का वर्णन नीचे दिए गए विस्थापन फलन द्वारा किया गया है —
x(t) = A cos (ωt + φ)
यदि कण को आरंभिक (t = 0) स्थिति 1 cm तथा उसका आरंभिक वेग π cm/s है, तो कण का आयाम तथा आरंभिक फेज कोण ज्ञात कीजिए। कण की कोणीय आवृत्ति ω = π s⁻¹ है।
कण के समान आवर्त गति समीकरण के लिए (cos) रूप तथा (sin) रूप x = B sin (ωt + α) दोनों ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
✏️ दिए गए हैं —
x(0) = 1 cm, v(0) = π cm/s, ω = π s⁻¹
✏️ समीकरण:
x = A cos(ωt + φ)
v = dx/dt = −Aω sin(ωt + φ)
t = 0 पर,
x(0) = A cos φ = 1 …(i)
v(0) = −Aω sin φ = π …(ii)
(ii) से, sin φ = −π / (Aω) = −π / (Aπ) = −1/A
अब (i) व (ii) से —
cos²φ + sin²φ = 1
⇒ (1/A)² + (−1/A)² = 1
⇒ 2/A² = 1
⇒ A = √2 cm
अब cos φ = 1/A = 1/√2, sin φ = −1/√2
⇒ φ = −π/4
✔️ अतः
आयाम A = √2 cm
फेज कोण φ = −π/4
(cos रूप) x = √2 cos(πt − π/4)
(sin रूप) x = √2 sin(πt + π/4)
🔷 प्रश्न 13.8
किसी कम्पनशील द्रव्यमान m = 50 kg और स्प्रिंग की लंबाई 20 cm है। इसे 5 cm खींच कर छोड़ा गया, जिससे दोलन प्रारंभ हुआ। यदि यह दोलन 0.6 s के आवर्तनकाल से हो रहा है, तो अधिकतम वेग तथा अधिकतम त्वरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
✏️ दिए गए हैं —
A = 5 cm = 0.05 m
T = 0.6 s
m = 50 kg
✏️ कोणीय आवृत्ति, ω = 2π / T = 2π / 0.6 = 10.47 rad/s
🟢 अधिकतम वेग:
vₘₐₓ = ωA = 10.47 × 0.05 = 0.523 m/s
🟡 अधिकतम त्वरण:
aₘₐₓ = ω²A = (10.47)² × 0.05 = 5.48 m/s²
✔️ अतः
अधिकतम वेग = 0.523 m/s
अधिकतम त्वरण = 5.48 m/s²
🔷 प्रश्न 13.9
1200 N/m स्प्रिंग नियतांक वाली क्षैतिज स्प्रिंग (चित्र 13.19) से जुड़ा 3 kg द्रव्यमान का ब्लॉक है। यदि स्प्रिंग को 2.0 cm तक खींचकर छोड़ा जाए, तो ज्ञात कीजिए —
(i) पिंड के दोलन की आवृत्ति
(ii) अधिकतम त्वरण
(iii) पिंड का अधिकतम वेग तथा ऊर्जा
उत्तर:
✏️ दिए गए हैं —
k = 1200 N/m, m = 3 kg, A = 2.0 cm = 0.02 m
🟢 (i) कोणीय आवृत्ति:
ω = √(k/m) = √(1200/3) = √400 = 20 rad/s
आवृत्ति, f = ω / 2π = 20 / (2π) = 3.18 Hz
🟡 (ii) अधिकतम त्वरण:
aₘₐₓ = ω²A = (20)² × 0.02 = 400 × 0.02 = 8.0 m/s²
🔵 (iii) अधिकतम वेग:
vₘₐₓ = ωA = 20 × 0.02 = 0.4 m/s
🔴 (iv) कुल ऊर्जा:
E = (1/2) kA² = 0.5 × 1200 × (0.02)² = 0.5 × 1200 × 0.0004 = 0.24 J
✔️ निष्कर्ष:
आवृत्ति f = 3.18 Hz
अधिकतम त्वरण = 8.0 m/s²
अधिकतम वेग = 0.4 m/s
कुल ऊर्जा = 0.24 J
प्रश्न 13.10
(प्रश्न 13.9 वाले उसी स्प्रिंग–ब्लॉक तंत्र के लिए) अब समय की गणना t = 0 उस क्षण से की जाती है जब ब्लॉक संतुलन स्थिति x = 0 पर होकर गुजरता है। पहले भाग (13.9) के मान: k = 1200 N m⁻¹, m = 3 kg, A = 0.02 m ⇒ ω = √(k/m) = 20 s⁻¹, T = 2π/ω = π/10 ≈ 0.314 s.
(क) अधिकतम धनात्मक विस्थापन पर पहुँचना,
(ख) अधिकतम ऋणात्मक विस्थापन पर पहुँचना, तथा
(ग) अधिकतम वेग की स्थिति (x = 0) — इन सब के लिए समय तथा x(t) का रूप लिखिए।
उत्तर:
✏️ प्रारम्भिक दशा (t = 0): ब्लॉक x = 0 पर है और 13.9 के अनुसार वह +A से आकर 0 को पार करता है, अतः वेग ऋणात्मक है (बाएँ दिशा)।
🔵 उपयुक्त रूप: x(t) = −A sin(ωt) = −0.02 sin(20 t) (SI में)
🟢 (क) अधिकतम धनात्मक विस्थापन (+A) पर समय
शर्त: x = +A ⇒ −A sin(ωt) = +A ⇒ sin(ωt) = −1
⇒ ωt = 3π/2 (सबसे छोटा धनात्मक)
⇒ t = 3π/(2ω) = 3π/40 ≈ 0.235 s = 3T/4
🟡 (ख) अधिकतम ऋणात्मक विस्थापन (−A) पर समय
शर्त: x = −A ⇒ −A sin(ωt) = −A ⇒ sin(ωt) = +1
⇒ ωt = π/2
⇒ t = π/(2ω) = π/40 ≈ 0.0785 s = T/4
🔴 (ग) अधिकतम वेग की स्थिति
सरल आवर्त गति में अधिकतम वेग x = 0 पर होता है।
तुरन्त t = 0 पर तथा अगली बार t = T/2 = π/ω = π/20 ≈ 0.157 s पर।
वेग का अधिकतम परिमाण: v_max = ωA = 20 × 0.02 = 0.40 m s⁻¹.
✔️ संक्षेप:
• x(t) = −0.02 sin(20 t)
• +A पर: t = 3T/4 ≈ 0.235 s
• −A पर: t = T/4 ≈ 0.0785 s
• अधिकतम वेग: t = 0, T/2, … ; v_max = 0.40 m s⁻¹
प्रश्न 13.11
चित्र 13.20 में दिखी समान वृत्तीय गति के दो प्रकरणों के x-अक्ष पर प्रक्षेप की सरल आवर्त गति के लिए आयाम, आवर्तनकाल, कोणीय आवृत्ति तथा x(t) का समीकरण लिखिए (आरम्भ t = 0 पर चित्र में दिखे P बिंदु से माने)।
(क) चित्र 13.20(a): त्रिज्या = 3 cm, आवर्तनकाल T = 2 s.
(ख) चित्र 13.20(b): त्रिज्या = 2 m, आवर्तनकाल T = 4 s.
उत्तर:
✏️ सिद्धांत: समान वृत्तीय गति का x-प्रक्षेप सरल आवर्त गति करता है।
x(t) = A cos(ωt + φ), जहाँ A = वृत्त की त्रिज्या, ω = 2π/T, φ प्रारम्भिक चरण (चित्र में P की स्थिति से निर्धारित)।
🟢 (क) 3 cm, T = 2 s
• A = 3 cm = 0.03 m
• ω = 2π/T = 2π/2 = π rad s⁻¹
• यदि P x-अक्ष के धनात्मक छोर पर है (चित्र के अनुरूप), तो φ = 0
➡️ x(t) = 0.03 cos(π t)
• v_max = ωA = π × 0.03 ≈ 0.094 m s⁻¹
🟡 (ख) 2 m, T = 4 s
• A = 2 m
• ω = 2π/T = 2π/4 = π/2 rad s⁻¹
• यदि P x-अक्ष के धनात्मक छोर पर है, तो φ = 0
➡️ x(t) = 2 cos((π/2) t)
• v_max = ωA = (π/2) × 2 = π ≈ 3.14 m s⁻¹
✔️ टिप्पणी: यदि आरम्भिक बिंदु P किसी अन्य कोण पर है, तो बस φ को उस कोण के बराबर शामिल कर दें — x(t) = A cos(ωt + φ)।
🔷 प्रश्न 13.12
नीचे दिए गए प्रत्येक सरल आवर्त गति के लिए विस्थापन–समय का आरेख खींचिए। सभी को आरंभिक क्षण (t = 0) स्थिति से शुरू मानिए, जब कण धनात्मक दिशा में चलता हुआ मूल स्थिति से गुजर रहा हो।
( x से cm में तथा t से s में नापी गई है। )
(a) x = −2 sin (3t + π/3)
(b) x = cos (πt/6 − π)
(c) x = 3 sin (2πt + π/4)
(d) x = 2 cos πt
उत्तर:
✏️ सिद्धांत:
सरल आवर्त गति का सामान्य समीकरण होता है —
x = A sin(ωt + φ) अथवा x = A cos(ωt + φ),
जहाँ A = आयाम, ω = कोणीय आवृत्ति, φ = प्रारंभिक फेज।
अब प्रत्येक के लिए:
🟢 (a)
x = −2 sin(3t + π/3)
⇒ आयाम (A) = 2 cm, ω = 3 rad/s, φ = π/3 + π (क्योंकि −sinθ = sin(θ + π))
➡️ गति का आरंभ π/3 फेज से है, आवर्तनकाल T = 2π/ω = 2π/3 s।
ग्राफ: साइन तरंग जो ऋणात्मक से शुरू होकर हर 2π/3 s पर दोहरती है।
🟡 (b)
x = cos(πt/6 − π)
⇒ A = 1 cm, ω = π/6 rad/s, φ = −π।
चूँकि cos(θ − π) = −cosθ, अतः यह तरंग ऋणात्मक दिशा से शुरू होती है।
T = 2π/ω = 12 s।
ग्राफ: ऋणात्मक कोसाइन तरंग।
🔵 (c)
x = 3 sin(2πt + π/4)
⇒ A = 3 cm, ω = 2π rad/s, φ = π/4।
T = 2π/ω = 1 s।
ग्राफ: साइन तरंग, जो π/4 अग्र चरण से शुरू होती है।
🔴 (d)
x = 2 cos(πt)
⇒ A = 2 cm, ω = π rad/s, φ = 0।
T = 2π/ω = 2 s।
ग्राफ: कोसाइन तरंग, जिसका आरंभ अधिकतम विस्थापन से होता है।
✔️ निष्कर्ष:
(a) आयाम 2 cm, T = 2π/3 s
(b) आयाम 1 cm, T = 12 s
(c) आयाम 3 cm, T = 1 s
(d) आयाम 2 cm, T = 2 s
🔷 प्रश्न 13.13
चित्र 13.21(a) में k बल-नियतांक वाली स्प्रिंग को किसी दिशा में खींचकर एक स्थिर बिंदु से जोड़ा गया है और द्रव्यमान m को उस स्प्रिंग से जोड़ दिया गया है।
चित्र 13.21(b) में वही स्प्रिंग दोनों सिरों से दो समान द्रव्यमानों से जुड़ी हुई है। दोनों ही अवस्थाएँ घर्षणरहित सतह पर हैं।
(a) दोनों प्रकरणों में कम्पन की आवृत्ति का व्यंजक क्या है?
(b) दोनों प्रकरणों में कम्पन की आवृत्तियों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
✏️ (a) पहले प्रकरण (a):
स्प्रिंग का एक सिरा स्थिर, दूसरा द्रव्यमान m से जुड़ा है।
सरल आवर्त गति का आवर्तनकाल —
T₁ = 2π√(m/k)
अतः कोणीय आवृत्ति, ω₁ = √(k/m)।
🟢 (b) दूसरे प्रकरण (b):
स्प्रिंग के दोनों सिरे दो समान द्रव्यमानों (m और m) से जुड़े हैं।
जब एक द्रव्यमान को बाएँ खींचा जाता है, दूसरा समान रूप से दाएँ खिंचता है —
प्रभावी पुनर्स्थापन बल दोगुना हो जाता है और प्रभावी द्रव्यमान = m/2।
अतः आवर्तनकाल —
T₂ = 2π√(m/(2k))
और कोणीय आवृत्ति, ω₂ = √(2k/m)।
🟡 (c) अनुपात:
आवृत्तियों का अनुपात —
ω₂ / ω₁ = √(2k/m) / √(k/m) = √2
✔️ निष्कर्ष:
पहले प्रकरण में ω₁ = √(k/m), दूसरे में ω₂ = √(2k/m),
अतः अनुपात ω₂ : ω₁ = √2 : 1.
🔷 प्रश्न 13.14
किसी रेल इंजन के पिस्टन हेड में पिस्टन का स्ट्रोक (आवागमन का कुल पथ) 1.0 m है।
यदि पिस्टन 200 rad/min की कोणीय आवृत्ति से सरल आवर्त गति करता है, तो उसका अधिकतम वेग कितना है?
उत्तर:
✏️ दिए गए हैं —
स्ट्रोक = 1.0 m ⇒ आयाम A = 0.5 m
ω = 200 rad/min = (200 / 60) rad/s = 3.33 rad/s
🔵 अधिकतम वेग का सूत्र:
vₘₐₓ = ωA
➡️ vₘₐₓ = 3.33 × 0.5 = 1.665 m/s
✔️ अतः अधिकतम वेग = 1.67 m/s
🔷 प्रश्न 13.15
चंद्रमा के पृष्ठ पर एक पेंडुलम लंबाई 1.7 m है। इसका दोलन काल पृथ्वी पर 3.5 s है।
तो चंद्रमा के पृष्ठ पर इसका आवर्तनकाल कितना होगा? (पृथ्वी पर g = 9.8 m/s², चंद्रमा पर gₘ = 1/6 g)
उत्तर:
✏️ सूत्र:
T = 2π√(l/g)
🟢 पृथ्वी पर, T₁ = 3.5 s
T₁ = 2π√(l/g)
⇒ l/g = (T₁ / 2π)² …(i)
🟡 चंद्रमा पर,
T₂ = 2π√(l/gₘ) = 2π√(l / (g/6)) = 2π√(6l/g) = √6 × T₁
➡️ T₂ = √6 × 3.5 = 8.57 s
✔️ अतः चंद्रमा पर आवर्तनकाल = 8.6 s (लगभग)
🔷 प्रश्न 13.16
किसी क्षैतिज पटल पर रखे द्रव्यमान m वाले ब्लॉक को एक हल्की स्प्रिंग से जोड़ा गया है, जिसकी बल नियतांक k है।
स्प्रिंग को खींचकर छोड़ दिया गया और ब्लॉक दोलन करने लगा।
यदि ब्लॉक का अधिकतम वेग vₘₐₓ है, तो ब्लॉक का विस्थापन x उस समय क्या होगा जब उसकी गतिज ऊर्जा उसकी स्थितिज ऊर्जा का ½ है?
उत्तर:
✏️ सिद्धांत:
सरल आवर्त गति में कुल ऊर्जा —
E = (1/2)kA² = KE + PE
जब KE = (1/2) PE,
⇒ (1/2)k(A² − x²) = (1/2) × (1/2)k x²
⇒ 2(A² − x²) = x²
⇒ 2A² = 3x²
⇒ x = A√(2/3)
🟢 कण का विस्थापन:
x = A√(2/3)
🔷 प्रश्न 13.17
किसी तार में स्थायी तरंग के निर्माण के लिए नीचे दिया गया सूत्र है —
T = 2π √(l p / A B g)
जहाँ p = द्रव का घनत्व, B = द्रव का बल्क मॉड्यूलस, A = क्रॉस-सेक्शनल क्षेत्रफल, l = लंबाई, g = गुरुत्व त्वरण।
तब बताइए कि इस सूत्र में परिमाणों के आधार पर आयामी विश्लेषण के अनुसार क्या यह समीकरण सही है?
उत्तर:
✏️ प्रत्येक राशि की आयाम इकाई:
[l] = L
[p] = M L⁻³
[A] = L²
[B] = M L⁻¹ T⁻²
[g] = L T⁻²
🟢 अब सूत्र के भीतर का भाग:
(lp / ABg) = (L × M L⁻³) / (L² × M L⁻¹ T⁻² × L T⁻²)
= (M L⁻²) / (M L⁻² T⁻⁴) = T⁴
T = 2π√(T⁴) = 2πT² — जो गलत है, क्योंकि समय के वर्ग से समय नहीं प्राप्त होता।
✔️ अतः यह सूत्र आयामी रूप से असंगत (dimensionally incorrect) है।
🔷 प्रश्न 13.18
एक स्प्रिंग ब्लॉक प्रणाली का आवर्तनकाल T है। यदि स्प्रिंग का बल नियतांक दोगुना कर दिया जाए और ब्लॉक का द्रव्यमान आधा कर दिया जाए,
तो नया आवर्तनकाल क्या होगा?
उत्तर:
✏️ मूल सूत्र:
T = 2π√(m/k)
नया आवर्तनकाल:
T′ = 2π√(m′/k′) = 2π√((m/2)/(2k)) = 2π√(m/4k) = (1/2)(2π√(m/k))
🟢 अतः T′ = T/2
✔️ नया आवर्तनकाल = मूल आवर्तनकाल का आधा।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
(CBSE MODEL प्रश्न पत्र)
सिर्फ इसी पाठ से निर्मित CBSE MODEL प्रश्न पत्र।
Section A – बहुविकल्पीय प्रश्न (Q1–Q18)
Question 1. किसी सरल आवर्त गति (SHM) में पुनर्स्थापन बल (F) और विस्थापन (x) का सम्बन्ध क्या है?
🔵 (A) F ∝ x
🟢 (B) F ∝ −x
🟠 (C) F ∝ x²
🔴 (D) F ∝ √x
Answer: (B) F ∝ −x
Question 2. यदि किसी दोलन का विस्थापन समीकरण x = A sin(ωt + φ) हो, तो वेग (v) होगा —
🔵 (A) Aω cos(ωt + φ)
🟢 (B) −Aω cos(ωt + φ)
🟠 (C) Aω sin(ωt + φ)
🔴 (D) −Aω sin(ωt + φ)
Answer: (A) Aω cos(ωt + φ)
Question 3. किसी दोलन की कालावधि (T) और कोणीय आवृत्ति (ω) का सम्बन्ध —
🔵 (A) ω = 2πT
🟢 (B) ω = 2π/T
🟠 (C) ω = T/2π
🔴 (D) ω = π/T²
Answer: (B) ω = 2π/T
Question 4. सरल लटकन के लिए कालावधि का सूत्र है —
🔵 (A) T = 2π√(l/g)
🟢 (B) T = 2π√(g/l)
🟠 (C) T = π√(l/g)
🔴 (D) T = 4π√(l/g)
Answer: (A) T = 2π√(l/g)
Question 5. यदि किसी दोलन की आवृत्ति दुगुनी हो जाए तो कालावधि —
🔵 (A) आधी होगी
🟢 (B) दुगुनी होगी
🟠 (C) चार गुनी होगी
🔴 (D) अपरिवर्तित रहेगी
Answer: (A) आधी होगी
Question 6. सरल आवर्त गति का समीकरण x = A sin(ωt + φ) हो, तो त्वरण (a) होगा —
🔵 (A) −Aω² sin(ωt + φ)
🟢 (B) Aω² sin(ωt + φ)
🟠 (C) Aω cos(ωt + φ)
🔴 (D) −Aω cos(ωt + φ)
Answer: (A) −Aω² sin(ωt + φ)
Question 7. यदि विस्थापन A/2 है, तो वेग का मान होगा —
🔵 (A) ωA/2
🟢 (B) (√3/2)ωA
🟠 (C) ωA
🔴 (D) शून्य
Answer: (B) (√3/2)ωA
Question 8. सरल आवर्त गति की कुल ऊर्जा (E) होती है —
🔵 (A) ½ mω²A²
🟢 (B) ½ kA²
🟠 (C) ½ mA²
🔴 (D) ½ ωA²
Answer: (A) ½ mω²A²
Question 9. यदि द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए और स्प्रिंग स्थिरांक k अपरिवर्तित रहे, तो कालावधि —
🔵 (A) √2 गुनी होगी
🟢 (B) आधी होगी
🟠 (C) दुगुनी होगी
🔴 (D) समान रहेगी
Answer: (A) √2 गुनी होगी
Question 10. सरल आवर्त गति में वेग अधिकतम कब होता है?
🔵 (A) जब x = 0
🟢 (B) जब x = ±A
🟠 (C) जब a = 0
🔴 (D) (A) और (C) दोनों सही हैं
Answer: (D) (A) और (C) दोनों सही हैं
Question 11. यदि विस्थापन x = 0 हो, तो स्थितिज ऊर्जा —
🔵 (A) अधिकतम
🟢 (B) न्यूनतम (0)
🟠 (C) मध्यम
🔴 (D) अपरिभाषित
Answer: (B) न्यूनतम (0)
Question 12. यदि x = A हो, तो गतिज ऊर्जा —
🔵 (A) अधिकतम
🟢 (B) शून्य
🟠 (C) आधी
🔴 (D) अपरिभाषित
Answer: (B) शून्य
Question 13. यदि किसी स्प्रिंग में k = 200 N/m और m = 0.5 kg हो, तो कालावधि T = ?
🔵 (A) 0.22 s
🟢 (B) 0.31 s
🟠 (C) 0.44 s
🔴 (D) 1.0 s
Answer: (C) 0.44 s
Question 14. अनुनाद की स्थिति तब होती है जब —
🔵 (A) बाहरी बल की आवृत्ति प्रणाली की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर हो
🟢 (B) बल अधिकतम हो
🟠 (C) आयाम न्यूनतम हो
🔴 (D) घर्षण अधिकतम हो
Answer: (A) बाहरी बल की आवृत्ति प्रणाली की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर हो
Question 15. नियत दोलन में आयाम समय के साथ —
🔵 (A) बढ़ता है
🟢 (B) घटता है
🟠 (C) अपरिवर्तित रहता है
🔴 (D) पहले बढ़ता फिर घटता है
Answer: (B) घटता है
Question 16. यदि सरल लटकन की लंबाई चार गुनी कर दी जाए, तो कालावधि —
🔵 (A) दुगुनी होगी
🟢 (B) चार गुनी होगी
🟠 (C) आधी होगी
🔴 (D) समान रहेगी
Answer: (A) दुगुनी होगी
Question 17. सरल आवर्त गति का वेग-विस्थापन ग्राफ कैसा होता है?
🔵 (A) रैखिक
🟢 (B) परवलयाकार
🟠 (C) वृत्ताकार
🔴 (D) साइन तरंग के समान
Answer: (B) परवलयाकार
Question 18. यदि कोणीय आवृत्ति ω = 10 rad/s और आयाम A = 0.05 m हो, तो अधिकतम वेग vₘₐₓ = ?
🔵 (A) 0.25 m/s
🟢 (B) 0.5 m/s
🟠 (C) 1.0 m/s
🔴 (D) 2.0 m/s
Answer: (B) 0.5 m/s
⚡ खंड-B (संक्षिप्त एवं मध्यम उत्तर वाले प्रश्न)
प्रश्न 19. किसी सरल आवर्त गति (SHM) में विस्थापन, वेग और त्वरण के बीच क्या संबंध होता है?
उत्तर:
🔵 सरल आवर्त गति में किसी भी समय पर –
➡️ विस्थापन: x = A sin(ωt + φ)
➡️ वेग: v = dx/dt = Aω cos(ωt + φ)
➡️ त्वरण: a = dv/dt = -Aω² sin(ωt + φ) = -ω²x
✔️ अतः, a = -ω²x, अर्थात् त्वरण हमेशा संतुलन स्थिति की ओर और विस्थापन के अनुपाती होता है।
प्रश्न 20. सरल आवर्त गति की दो मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
🟢 विशेषताएँ:
1️⃣ बल या त्वरण सदैव संतुलन स्थिति की ओर निर्देशित होता है।
2️⃣ बल या त्वरण विस्थापन के समानुपाती होता है, अर्थात् F ∝ -x।
प्रश्न 21. यदि किसी दोलन का आयाम दोगुना कर दिया जाए, तो उसकी आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
🔵 आवर्तकाल T = 2π√(m/k) पर निर्भर करता है।
➡️ T का A से कोई संबंध नहीं है।
✔️ अतः आयाम दोगुना करने पर आवर्तकाल अपरिवर्तित रहता है।
प्रश्न 22. किसी सरल लोलक की आवर्तकाल किस पर निर्भर करता है?
उत्तर:
🟠 लोलक का आवर्तकाल —
T = 2π√(L/g)
जहाँ,
L = डोरी की लंबाई
g = गुरुत्वजनित त्वरण
✔️ अतः T ∝ √L और T ∝ 1/√g
💡 यह आयाम या द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
प्रश्न 23. एक द्रव्यमान-स्प्रिंग प्रणाली का आवर्तकाल T = 2π√(m/k) से दिया गया है। यदि स्प्रिंग स्थिरांक k को 4 गुना कर दिया जाए तो नया आवर्तकाल क्या होगा?
उत्तर:
🔵 दिया है: T₁ = 2π√(m/k)
नया स्थिरांक k’ = 4k
➡️ T₂ = 2π√(m/4k) = (1/2)×2π√(m/k) = T₁/2
✔️ अतः नया आवर्तकाल आधा हो जाएगा।
प्रश्न 24. SHM का अधिकतम वेग और अधिकतम त्वरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
🟢 सरल आवर्त गति के लिए —
विस्थापन: x = A sin(ωt)
➡️ वेग: v = Aω cos(ωt)
➡️ त्वरण: a = -Aω² sin(ωt)
अधिकतम मान होंगे —
v_max = Aω
a_max = Aω²
✔️ अतः अधिकतम वेग और त्वरण आयाम एवं कोणीय आवृत्ति पर निर्भर करते हैं।
प्रश्न 25. यदि एक सरल लोलक का आवर्तकाल पृथ्वी की सतह पर 2 s है, तो चंद्रमा पर, जहाँ g = gₑ/6 है, इसका आवर्तकाल क्या होगा?
उत्तर:
दिया है: T₁ = 2 s, g₂ = gₑ/6
T ∝ 1/√g
➡️ T₂/T₁ = √(g₁/g₂) = √(6/1) = √6
➡️ T₂ = 2√6 = 4.9 s (लगभग)
✔️ अतः चंद्रमा पर आवर्तकाल लगभग 4.9 s होगा।
प्रश्न 26. यदि किसी स्प्रिंग की लंबाई में 5 cm का विस्तार हो जब 0.5 kg का द्रव्यमान लटकाया जाता है, तो इस प्रणाली का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s²)
उत्तर:
दिया है: m = 0.5 kg, x = 0.05 m, g = 9.8 m/s²
➡️ F = kx = mg
➡️ k = mg/x = (0.5×9.8)/0.05 = 98 N/m
अब, T = 2π√(m/k)
➡️ T = 2π√(0.5/98) = 2π√(0.0051) = 2π×0.071 = 0.45 s (लगभग)
✔️ आवर्तकाल 0.45 सेकंड होगा।
प्रश्न 27. 1 m लंबाई के लोलक का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए यदि g = 9.8 m/s² है।
उत्तर:
T = 2π√(L/g)
➡️ T = 2π√(1/9.8) = 2π(0.319) = 2.01 s (लगभग)
✔️ अतः लोलक का आवर्तकाल 2 सेकंड के लगभग है।
⚡ खंड-C एवं खंड-D (दीर्घ एवं अनुप्रयोग आधारित प्रश्न)
प्रश्न 28. सरल लोलक के आवर्तकाल का व्युत्पादन कीजिए।
उत्तर:
🟢 मान लीजिए एक द्रव्यमान m को लंबाई L की डोरी से लटकाया गया है।
जब यह संतुलन स्थिति से कोण θ पर विस्थापित होता है —
➡️ पुनर्स्थापक बल F = -mg sinθ
छोटे कोण के लिए, sinθ ≈ θ = x/L
➡️ F = -mg(x/L)
अतः F = – (mg/L) x
💡 यह बल विस्थापन के समानुपाती और संतुलन स्थिति की ओर होता है।
अब, F = ma = m d²x/dt² = – (mg/L) x
➡️ d²x/dt² + (g/L) x = 0
यह सरल आवर्त गति का समीकरण है जिसमें
ω² = g/L
अतः आवर्तकाल,
➡️ T = 2π√(L/g)
✔️ यह आवर्तकाल केवल L और g पर निर्भर करता है।
प्रश्न 29. सरल आवर्त गति में ऊर्जा के विभिन्न रूपों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
🔵 मान लीजिए कि SHM में विस्थापन x = A sin(ωt) है।
1️⃣ गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy):
K = (1/2) m v² = (1/2) m ω² (A² – x²)
➡️ अधिकतम x = 0 पर, Kₘₐₓ = (1/2) m ω² A²
2️⃣ स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy):
U = (1/2) k x² = (1/2) m ω² x²
➡️ अधिकतम x = A पर, Uₘₐₓ = (1/2) m ω² A²
3️⃣ कुल यांत्रिक ऊर्जा (Total Energy):
E = K + U = (1/2) m ω² A²
✔️ यह स्थिर रहती है और समय के साथ नहीं बदलती।
💡 ऊर्जा का आदान-प्रदान केवल K और U के बीच होता है।
प्रश्न 30. एक स्प्रिंग में 0.25 kg द्रव्यमान जुड़ा है, जिससे दोलन का आवर्तकाल 0.6 s है। यदि द्रव्यमान 1 kg हो जाए, तो नया आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
T ∝ √m ⇒ T₁/T₂ = √(m₁/m₂)
दिया है: T₁ = 0.6 s, m₁ = 0.25 kg, m₂ = 1 kg
➡️ T₂ = 0.6 × √(1/0.25) = 0.6 × 2 = 1.2 s
✔️ नया आवर्तकाल 1.2 सेकंड होगा।
प्रश्न 31. एक स्प्रिंग-ब्लॉक प्रणाली में m = 0.1 kg और k = 100 N/m है। यदि प्रारंभिक विस्थापन A = 0.05 m है, तो (a) आवर्तकाल (b) अधिकतम वेग (c) अधिकतम त्वरण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
➡️ (a) T = 2π√(m/k) = 2π√(0.1/100) = 2π√(0.001) = 2π(0.0316) = 0.198 s
➡️ (b) vₘₐₓ = Aω = A(√(k/m)) = 0.05×√(100/0.1) = 0.05×√1000 = 0.05×31.6 = 1.58 m/s
➡️ (c) aₘₐₓ = Aω² = A(k/m) = 0.05×(100/0.1) = 0.05×1000 = 50 m/s²
✔️ अतः T = 0.198 s, vₘₐₓ = 1.58 m/s, और aₘₐₓ = 50 m/s²।
प्रश्न 32. एक द्रव्यमान-स्प्रिंग प्रणाली में कुल यांत्रिक ऊर्जा का व्यंजक ज्ञात कीजिए और इसका ग्राफ बनाइए।
उत्तर:
🟢 SHM में कुल ऊर्जा —
E = (1/2)kA²
किसी स्थिति पर —
U = (1/2)kx²
K = (1/2)k(A² – x²)
💡 अतः E = U + K = (1/2)kA² (सदैव स्थिर)
ग्राफ़:
K और U के मान x = 0 पर अदल-बदल होते हैं।
कुल ऊर्जा का ग्राफ x के साथ समान्तर रेखा (constant) होता है।
✔️ यह दर्शाता है कि दोलन में ऊर्जा संरक्षण होता है।
प्रश्न 33. एक लोलक को पृथ्वी की सतह पर 2 s का आवर्तकाल है। यदि उसे किसी ऐसे ग्रह पर रखा जाए जहाँ g = 4gₑ है, तो नया आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
T ∝ 1/√g
दिया है T₁ = 2 s, g₂ = 4gₑ
➡️ T₂/T₁ = √(g₁/g₂) = √(1/4) = 1/2
➡️ T₂ = 2 × 1/2 = 1 s
✔️ अतः नए ग्रह पर लोलक का आवर्तकाल 1 सेकंड होगा।
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