CHEMISTRY (Hindi), Class 11

Class 11 : Chemistry (In Hindi) – Lesson 8. कार्बनिक रसायन

पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन


🔵 भूमिका ✨
कार्बनिक रसायन वह शाखा है जिसमें कार्बन के यौगिकों का अध्ययन किया जाता है। कार्बन अपनी संयोजकता (4), श्रृंखला निर्माण (catenation) और समावयवता (isomerism) की अद्भुत क्षमता के कारण लाखों यौगिक बनाता है। इस पाठ में हम कार्बनिक यौगिकों की नामकरण पद्धति, संरचनाएँ, इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव, अभिक्रिया तंत्र तथा प्रयोगशाला तकनीकों को समझेंगे। यह अध्याय आगे के सभी कार्बनिक अध्यायों का आधार है।

🟢 कार्बन के विशेष गुण 📌
चतुष् संयोजकता (Tetravalency): कार्बन सदैव 4 बन्ध बनाता है।
श्रृंखला निर्माण (Catenation): कार्बन परमाणु आपस में जुड़कर सीधी, शाखित व चक्रीय श्रृंखलाएँ बना सकते हैं।
समावयवता (Isomerism): समान सूत्र वाले यौगिक अलग-अलग संरचनाओं व गुणों के साथ मिलते हैं।

🟡 कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण 🌟
खुली श्रृंखला (Open chain): जैसे CH₃–CH₃
चक्रीय (Cyclic):
एलिसाइक्लिक (alicyclic) – केवल C–C बन्ध (जैसे साइक्लोहेक्सेन)।
सुगन्धित (aromatic) – बेंजीन व इसके व्युत्पन्न।
समांगी यौगिक (Homologous series): एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिक जिनका सामान्य सूत्र R–FG हो और क्रमिक सदस्यों में CH₂ इकाई का अन्तर हो।

🔴 नामकरण पद्धति (Nomenclature) 💡
सामान्य नाम (Common names): परम्परागत जैसे फॉर्मल्डिहाइड, एसिटिक अम्ल।
आईयूपीएसी नाम (IUPAC Nomenclature):
मूल श्रृंखला चुनें (longest carbon chain)।
क्रियात्मक समूह की पहचान करें।
उपस्थापक और उनकी स्थिति बतायें।
क्रमबद्ध संख्या दें।
✔ उदाहरण: CH₃–CH₂–OH → एथेनॉल
CH₃–CH=CH₂ → प्रोप-1-ईन

🟢 इलेक्ट्रॉनिक विस्थापन प्रभाव ✨
इंडक्टिव प्रभाव (Inductive effect, –I, +I):
σ-बन्ध के माध्यम से इलेक्ट्रॉनों का ध्रुवण।
–I समूह: –NO₂, –Cl (इलेक्ट्रॉनों को खींचते हैं)।
+I समूह: –CH₃, –C₂H₅ (इलेक्ट्रॉनों को धकेलते हैं)।
रेज़ोनेंस प्रभाव (Resonance effect):
π-इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन।
उदाहरण: बेंजीन में डीलोकलाइज़ेशन।
हाइपर संयुग्मन (Hyperconjugation):
σ–C–H बन्ध का π-प्रणाली के साथ संयुग्मन।
स्थिरता क्रम: कार्बोकैटायन 3° > 2° > 1°।
इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव (Electromeric effect):
अस्थायी विस्थापन जब अभिकारक निकट आता है।

🟡 अभिक्रिया तंत्र (Reaction Mechanism) 📘
प्रतिक्रियाशील मध्यवर्ती:
कार्बोकैटायन (C⁺), कार्बेनियन (C⁻), मुक्त मूलक (•)।
ये बहुत अस्थायी व उच्च ऊर्जा वाले होते हैं।
अभिक्रिया प्रकार:
प्रतिस्थापन (Substitution): किसी परमाणु का स्थानान्तरण।
➤ CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl (प्रकाश में)।
संयोजन (Addition): असंतृप्त यौगिकों में।
➤ CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃–CH₃
उन्मूलन (Elimination): छोटे अणु का निकलना।
➤ CH₃–CH₂–Br + KOH(alc) → CH₂=CH₂ + HBr
सक्रियण ऊर्जा व उत्प्रेरक:
अभिक्रिया की गति सक्रियण ऊर्जा पर निर्भर करती है।

🔴 समावयवता (Isomerism) 🌟
संरचनात्मक समावयवता (Structural):
श्रृंखला (Chain isomerism)
स्थान (Position)
क्रियात्मक समूह (Functional group)
मेटामेरिज्म
स्थानिक समावयवता (Stereoisomerism):
ज्यामितीय (Geometrical, cis-trans)।
प्रकाशीय (Optical) – किरालता (chirality)।

🟢 कार्बनिक रसायन की प्रयोगशाला तकनीकें 📌
शुद्धिकरण की विधियाँ:
आसवन (Distillation)
परिष्करण (Crystallization)
अपस्रवण (Sublimation)
क्रोमैटोग्राफी
तत्व विश्लेषण:
कार्बन व हाइड्रोजन → CO₂ व H₂O में परिवर्तित करके।
नाइट्रोजन → लसाइन परीक्षण (Na extract + FeSO₄)।
हैलोजन → लसाइन विलयन + AgNO₃।
आणविक द्रव्यमान निर्धारण:
वाष्प घनत्व विधि, संघनन विधि।

🔴 कार्बनिक रसायन का महत्त्व 💡
औषधियों, प्लास्टिक, रंग, ईंधन, कीटनाशकों का आधार।
जीवन-रसायन: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा।
उद्योग: सिंथेटिक तन्तु, पॉलिमर।

🔹 II. पाठ सार
🔵 सार-तत्त्व ✨
कार्बन 4 संयोजकता, श्रृंखला निर्माण और समावयवता की क्षमता के कारण लाखों यौगिक बनाता है।
कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण खुली श्रृंखला, चक्रीय और सुगन्धित रूपों में।
नामकरण IUPAC नियमों पर आधारित।
इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव: –I, +I, रेज़ोनेंस, हाइपर संयुग्मन अभिक्रिया की दिशा व स्थिरता समझाते हैं।
अभिक्रिया प्रकार: प्रतिस्थापन, संयोजन, उन्मूलन।
मध्यवर्ती: कार्बोकैटायन, कार्बेनियन, मुक्त मूलक।
समावयवता: संरचनात्मक और स्थानिक दोनों।
प्रयोगशाला तकनीकें: शुद्धिकरण, तत्व विश्लेषण, क्रोमैटोग्राफी।
कार्बनिक रसायन का अनुप्रयोग उद्योग, चिकित्सा, जैविक तन्त्र में।
🟢 निष्कर्ष 📌
यह अध्याय कार्बनिक रसायन की भाषा, तकनीक और मूलभूत आधार तैयार करता है, जिससे आगे की सभी कार्बनिक प्रतिक्रियाएँ व यौगिक समझना सरल होता है।

🔹 III. त्वरित पुनरावृत्ति
🔵 मुख्य बिन्दु 🌟
कार्बन 4 संयोजक, श्रृंखला निर्माण व समावयवता से असंख्य यौगिक बनाता है।
IUPAC नामकरण के नियमों से यौगिकों का वैज्ञानिक नाम तय।
इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव: –I, +I, रेज़ोनेंस, हाइपर संयुग्मन।
अभिक्रियाएँ तीन प्रकार: प्रतिस्थापन, संयोजन, उन्मूलन।
मध्यवर्ती: कार्बोकैटायन, कार्बेनियन, मुक्त मूलक।
समावयवता: संरचनात्मक व स्थानिक।
शुद्धिकरण व तत्व विश्लेषण तकनीकें आवश्यक।

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पाठ्यपुस्त के प्रश्न


🔵 प्रश्न 8.1
निम्नलिखित यौगिकों में प्रत्येक कार्बन की संकरण अवस्था बताइए —
CH₂ = C = O, CH₃CH = CH₂, (CH₃)₂CO, CH₂ = CH CN, C₆H₆
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: कार्बन की संकरण (Hybridization) उसकी संयोजकता और बंधों की संख्या पर निर्भर करती है।
💡 व्याख्या:
CH₂ = C = O → पहले कार्बन का sp², दूसरे का sp।
CH₃CH = CH₂ → पहला (CH₃) का C sp³, दूसरा sp², तीसरा sp²।
(CH₃)₂CO → मध्य कार्बन sp², दोनों CH₃ कार्बन sp³।
CH₂ = CH CN → पहले दो sp², CN का C sp।
C₆H₆ → सभी कार्बन sp²।
✔ अंतिम उत्तर: sp³, sp², sp संयोजन के अनुसार प्रत्येक कार्बन की संकरण अवस्था ऊपर दी गई है।
🔵 प्रश्न 8.2
निम्नलिखित अणुओं में σ तथा π बन्धों की संख्या बताइए —
C₂H₆, C₂H₄, C₂H₂, CH₂ = C = CH₂, CH₃NO₂, HCONHCH₃
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: एकल बंध = σ, द्वि = 1σ + 1π, त्रि = 1σ + 2π
💡 गणना:
C₂H₆ → 7σ
C₂H₄ → 5σ + 1π
C₂H₂ → 3σ + 2π
CH₂ = C = CH₂ → 6σ + 2π
CH₃NO₂ → 8σ + 1π
HCONHCH₃ → 9σ + 1π
✔ अंतिम उत्तर: उपरोक्त प्रत्येक यौगिक में σ और π बन्धों की संख्या क्रमशः दी गई है।
🔵 प्रश्न 8.3
निम्नलिखित यौगिकों के आणविक एवं संरचनात्मक सूत्र लिखिए —
2,3-डाइमेथिलब्यूटेन, हेक्सेन-4-ओन
🟢 उत्तर:
✳ नियम: नाम से कार्बन श्रृंखला व उपस्थापक पहचानें।
💡 व्याख्या:
2,3-डाइमेथिलब्यूटेन → CH₃–CH(CH₃)–CH(CH₃)–CH₃
हेक्सेन-4-ओन → CH₃–CH₂–CH₂–CO–CH₂–CH₃
✔ अंतिम उत्तर: संरचनाएँ ऊपर दी गई हैं।
🔵 प्रश्न 8.4
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए —
(चित्रानुसार यौगिक)
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: सबसे लंबी श्रृंखला चुनें, उपस्थापक को क्रमांक दें।
💡 उत्तर:
(क) 3-फिनाइलपेंटेन
(ख) 2-सायनोपेंटेन
(ग) 3-ब्रोमो-2-क्लोरोब्यूटेन
(घ) 2-क्लोरो-1-हाइड्रॉक्सीएथेन
✔ अंतिम उत्तर: ऊपर दिए गए नाम सही IUPAC अनुसार हैं।
🔵 प्रश्न 8.5
निम्नलिखित यौगिकों में से कौन सा नाम IUPAC पद्धति के अनुसार सही है?
🟢 उत्तर:
सही उत्तर — (ख) 2,4,7-ट्राइमेथिलऑक्टेन
✳ कारण: उपस्थापकों की स्थिति संख्याएँ न्यूनतम होनी चाहिए; यह नाम उस नियम का पालन करता है।
🔵 प्रश्न 8.6
निम्नलिखित से सजातीय श्रेणी में से प्रत्येक के प्रथम पाँच सदस्य के संरचना सूत्र लिखिए —
(क) H–COOH (ख) CH₃COCH₃ (ग) H–CH=CH₂
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: सजातीय श्रेणी में प्रत्येक अगला यौगिक CH₂ इकाई से भिन्न होता है।
💡 व्याख्या:
(क) अम्लों की श्रेणी → HCOOH, CH₃COOH, C₂H₅COOH, C₃H₇COOH, C₄H₉COOH
(ख) कीटोनों की श्रेणी → CH₃COCH₃, CH₃COC₂H₅, C₂H₅COC₂H₅, C₃H₇COC₂H₅, C₄H₉COC₂H₅
(ग) अल्कीन श्रेणी → C₂H₄, C₃H₆, C₄H₈, C₅H₁₀, C₆H₁₂
✔ अंतिम उत्तर: प्रत्येक श्रृंखला के पाँच सदस्य लिखे गए।
🔵 प्रश्न 8.7
निम्नलिखित के संरचना और IUPAC नाम लिखिए तथा बताइए कौन-सा क्रियात्मक समूह है —
(क) 2,2,4-ट्राइमिथाइलपेंटेन
(ख) 2-हाइड्रॉक्सी-1,2,3-प्रोपेनट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल (सिट्रिक अम्ल)
(ग) हेक्सामिथिलीनडायमीन
🟢 उत्तर:
💡 व्याख्या:
(क) CH₃–C(CH₃)₂–CH₂–CH(CH₃)–CH₃ → क्रियात्मक समूह: अल्केन
(ख) HOOC–CH₂–C(OH)(COOH)–CH₂–COOH → क्रियात्मक समूह: कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं हाइड्रॉक्सिल
(ग) H₂N–(CH₂)₆–NH₂ → क्रियात्मक समूह: अमीन
✔ अंतिम उत्तर: उपयुक्त संरचना व क्रियात्मक समूह ऊपर दिए हैं।
🔵 प्रश्न 8.8
निम्नलिखित यौगिकों में क्रियात्मक समूह पहचानिए —
(चित्र अनुसार तीन यौगिक)
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: क्रियात्मक समूह यौगिक के अभिक्रियात्मक व्यवहार को निर्धारित करता है।
💡 पहचान:
(क) –CHO तथा –OH (ऐल्डिहाइड व अल्कोहल)
(ख) –NH₂ तथा –N(C₂H₅)₂ (अमीन)
(ग) –CH=NO₂ (नाइट्रो)
✔ अंतिम उत्तर: क्रमशः ऐल्डिहाइड, अमीन, नाइट्रो समूह।
🔵 प्रश्न 8.9
निम्नलिखित में से कौन अधिक स्थायी है और क्यों?
O₂NCH₂CH₂O⁻ या CH₃CH₂O⁻
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: ऋणायन की स्थिरता अनुनाद एवं प्रेरण प्रभाव पर निर्भर करती है।
💡 व्याख्या: NO₂ समूह इलेक्ट्रॉन आकर्षक है, जो ऋण आवेश को स्थिर करता है।
✔ अंतिम उत्तर: O₂NCH₂CH₂O⁻ अधिक स्थायी है।
🔵 प्रश्न 8.10
π-बन्धों से युक्त समूह ऐलेक्ट्रोफिलिक अभिक्रिया की तरह व्यवहार क्यों करते हैं?
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: π-बन्ध इलेक्ट्रॉन-घनत्व वाले होते हैं, इसीलिए इलेक्ट्रॉन-अल्पकण (Electrophile) इन पर आक्रमण करते हैं।
💡 व्याख्या: अल्कीन और ऐल्काइन में π-बन्ध पर इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है, जो इलेक्ट्रोफिल को आकर्षित करता है।
✔ अंतिम उत्तर: π-बन्ध वाले यौगिक ऐलेक्ट्रोफिलिक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं क्योंकि उनके π-इलेक्ट्रॉन आसानी से उपलब्ध रहते हैं।
🔵 प्रश्न 8.11
निम्नलिखित यौगिकों को अनुक्रम-संरचना लिखिए तथा ऐजोट्रोपिक दिशा अनुसार वर्गीकृत कीजिए —
C₂H₅OH, C₆H₅NO₂, CH₃CH=CHCHO, C₆H₅CHO
🟢 उत्तर:
💡 व्याख्या:
(क) C₂H₅OH → एथिल ऐल्कोहल (अल्कोहल)
(ख) C₆H₅NO₂ → नाइट्रोबेंजीन (नाइट्रो यौगिक)
(ग) CH₃CH=CHCHO → ब्यूटेनल (ऐल्डिहाइड)
(घ) C₆H₅CHO → बेंजाल्डिहाइड (ऐल्डिहाइड)
✔ अंतिम उत्तर: वर्गीकरण क्रियात्मक समूह के अनुसार किया गया।
🔵 प्रश्न 8.12
आइसोमरिज़्म तथा टॉटोमरी क्या है?
🟢 उत्तर:
✳ आइसोमरिज़्म: समान आणविक सूत्र पर विभिन्न संरचनाएँ।
✳ टॉटोमरी: अणु के भीतर प्रोटॉन स्थानांतरण से दो रूपों का संतुलन।
💡 उदाहरण:
CH₃COCH₂ ⇌ CH₂=C(OH)CH₃
✔ अंतिम उत्तर: टॉटोमरी गतिशील आइसोमरिज़्म है जिसमें केटोन–इनॉल रूप बनते हैं।
🔵 प्रश्न 8.13
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को वर्गीकृत कीजिए —
(क) CH₃COOH + H₂O → CH₃COO⁻ + H₃O⁺
(ख) CH₃COCH₃ + CN⁻ → (CH₃)₂C(OH)CN
(ग) C₆H₆ + CH₃CO⁺ → C₆H₅COCH₃
🟢 उत्तर:
💡 वर्गीकरण:
(क) अम्ल–क्षार अभिक्रिया
(ख) न्यूक्लियोफिलिक अभिग्रहण
(ग) ऐलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन
✔ अंतिम उत्तर: तीनों अभिक्रियाओं का प्रकार ऊपर दिया गया है।

🔵 प्रश्न 8.14
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को वर्गीकृत कीजिए —
(क) CH₃CH₂Br + HS⁻ → CH₃CH₂SH + Br⁻
(ख) (CH₃)₂C = CH₂ + HCl → (CH₃)₂CCl–CH₃
(ग) CH₂CH₂Br + HO⁻ → CH₂ = CH₂ + H₂O + Br⁻
(घ) (CH₃)₃C–OH + HBr → (CH₃)₃CBr + H₂O
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: अभिक्रिया का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि कौन-सा कण जुड़ता, हटता या प्रतिस्थापित होता है।
💡 वर्गीकरण:
(क) न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन (Substitution)
(ख) ऐलेक्ट्रोफिलिक अभिग्रहण (Addition)
(ग) विलोपन (Elimination)
(घ) न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन
✔ अंतिम उत्तर: (क) एवं (घ) प्रतिस्थापन, (ख) अभिग्रहण, (ग) विलोपन।
🔵 प्रश्न 8.15
निम्न युग्मों के संरचना-सूत्रों में कैसा सम्बन्ध है? क्या ये ज्यामितीय या संरचनात्मक समावयव हैं?
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: यदि आणविक सूत्र समान परंतु संयोजन भिन्न हो, तो संरचनात्मक समावयव; यदि संयोजन समान परंतु व्यवस्था भिन्न हो, तो ज्यामितीय।
💡 व्याख्या:
दिए गए युग्मों में बन्ध व्यवस्था भिन्न है, अतः ये संरचनात्मक समावयव हैं।
✔ अंतिम उत्तर: संरचनात्मक (Structural) समावयव।
🔵 प्रश्न 8.16
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए इलेक्ट्रॉन-विस्थापन की पहचान कीजिए —
(क) CH₃O–OCH₃ → CH₃O• + •OCH₃
(ख) O = O + H₂ → H₂O
(ग) Br₂ → Br⁺ + Br⁻
(घ) बेंजीन + E⁺ → मध्यवर्ती कार्बोकैटायन
🟢 उत्तर:
💡 व्याख्या:
(क) समविभाजन (Homolytic cleavage)
(ख) विषमविभाजन (Heterolytic cleavage)
(ग) विषमविभाजन (Heterolytic cleavage)
(घ) ऐलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन में अनुनाद-स्थिरित कैटायन बनता है।
✔ अंतिम उत्तर: (क) समविभाजन, (ख)(ग) विषमविभाजन, (घ) ऐलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन।
🔵 प्रश्न 8.17
निम्न कार्बोकैटायनों की स्थिरता को घटते क्रम में लिखिए —
CH₃C⁺, CH₃CH₂C⁺, (CH₃)₃C⁺
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: +I प्रभाव एवं हाइपरसंयुग्मन जितना अधिक, कैटायन उतना स्थिर।
💡 व्याख्या: तृतीयक (3°) > द्वितीयक (2°) > प्राथमिक (1°)
✔ अंतिम उत्तर: (CH₃)₃C⁺ > CH₃CH₂C⁺ > CH₃C⁺
🔵 प्रश्न 8.18
प्रक्रिया का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रक्रियाओं की व्याख्या कीजिए —
(क) क्लोरेशन (ख) ऑक्सीकरण (ग) हाइड्रोजनीकरण
🟢 उत्तर:
💡 व्याख्या:
(क) क्लोरेशन: मिथेन + Cl₂ → CH₃Cl + HCl (प्रकाश में)
(ख) ऑक्सीकरण: ऐथेनॉल → ऐसिटिक अम्ल
(ग) हाइड्रोजनीकरण: एथीन + H₂ (Ni उत्प्रेरक) → एथेन
✔ अंतिम उत्तर: तीनों प्रक्रियाएँ क्रमशः प्रतिस्थापन, ऑक्सीकरण, अभिग्रहण हैं।
🔵 प्रश्न 8.19
ऐसे दो यौगिक बताइए जिनमें क्रियात्मक समूह समान हो लेकिन भिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएँ करते हों।
🟢 उत्तर:
💡 उदाहरण:
ऐल्डिहाइड और कीटोन — दोनों में कार्बोनिल समूह (C=O) होता है, फिर भी ऐल्डिहाइड ऑक्सीकरण योग्य होते हैं जबकि कीटोन नहीं।
✔ अंतिम उत्तर: ऐल्डिहाइड (CH₃CHO) और कीटोन (CH₃COCH₃)।
🔵 प्रश्न 8.20
आवेशन, अपघटन तथा अवशोषण में क्या अंतर है?
🟢 उत्तर:
✳ आवेशन (Adsorption): सतह पर कणों का जमाव।
✳ अपघटन (Desorption): सतह से कणों का निकलना।
✳ अवशोषण (Absorption): पदार्थ के पूरे आयतन में प्रवेश।
✔ अंतिम उत्तर: आवेशन सतही प्रक्रिया, अवशोषण आयतन प्रक्रिया है।
🔵 प्रश्न 8.21
तीन-परिक्षणों का रासायनिक-व्यावहारिक समाधान बताइए।
🟢 उत्तर:
यह प्रयोगात्मक प्रश्न है — छात्रों को प्रयोगशाला में ऐल्कोहल, कीटोन तथा अम्ल की पहचान करनी होती है जैसे –
ऐल्कोहल → ल्यूकस परीक्षण
ऐल्डिहाइड → फेलिंग्स/टोलेंस परीक्षण
अम्ल → सोडियम बाइकार्बोनेट परीक्षण
✔ अंतिम उत्तर: उपरोक्त परीक्षण क्रमशः समूह-पहचान के लिए प्रयोग होते हैं।
🔵 प्रश्न 8.22
कार्बनिक यौगिकों में नाइट्रोजन के आकलन के लिए (i) सूक्ष्म विधि तथा (ii) केल्डाल विधि की सिद्धान्त-रेखा समझाइए।
🟢 उत्तर:
💡 (i) सूक्ष्म विधि: नाइट्रोजन को NH₃ में परिवर्तित कर अम्ल के साथ टाइट्रेशन किया जाता है।
💡 (ii) केल्डाल विधि: यौगिक को सांद्र H₂SO₄ में ऑक्सीकरण कर NH₄⁺ बनाया जाता है, जिसे NaOH से मुक्त कर मापा जाता है।
✔ अंतिम उत्तर: दोनों विधियों में नाइट्रोजन को अमोनिया रूप में मापते हैं।
🔵 प्रश्न 8.23
किसी यौगिक में हैलोजन, सल्फर तथा फॉस्फोरस के आकलन के सिद्धान्त लिखिए।
🟢 उत्तर:
✳ हैलोजन: कार्बनिक यौगिक को Na के साथ गलाकर NaX बनाते हैं और फिर AgNO₃ से AgX अवक्षेप द्वारा मापते हैं।
✳ सल्फर: Na के साथ गलाकर Na₂S बनता है जिसे सीसे के एसीटेट से जांचते हैं।
✳ फॉस्फोरस: Na के साथ गलाकर Na₃PO₄ बनता है, जिसे मोलिबडेट अभिकर्मक से पीले अवक्षेप रूप में पहचानते हैं।
✔ अंतिम उत्तर: हैलोजन – सिल्वर नाइट्रेट परीक्षण, सल्फर – सीसा एसीटेट, फॉस्फोरस – मोलिबडेट परीक्षण।
🔵 प्रश्न 8.24
ड्यूमास विधि के सिद्धान्त को समझाइए।
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: ज्ञात मात्रा के कार्बनिक यौगिक को जलविहीन CuO की उपस्थिति में गर्म किया जाता है जिससे उत्पन्न N₂ गैस को एकत्र कर मापा जाता है।
💡 गणना सूत्र:
% N = (V × D × 100) / (W × 1120)
✔ अंतिम उत्तर: यह विधि नाइट्रोजन का परिमाण गैसीय रूप से ज्ञात करती है।
🔵 प्रश्न 8.25
“वॉस्लर नाइट्रोजन विधि” में हैलोजनों के लिए परीक्षण से पूर्व नाइट्रोजन अलग क्यों किया जाता है?
🟢 उत्तर:
💡 कारण: नाइट्रोजन हैलोजन के समान AgNO₃ के साथ अवक्षेप दे सकती है, जिससे त्रुटि हो सकती है।
✔ अंतिम उत्तर: सही परिणाम हेतु नाइट्रोजन को पहले हटाया जाता है।
🔵 प्रश्न 8.26
नाइट्रोजन, सल्फर और फॉस्फोरस के परीक्षण के लिए सोडियम के साथ कार्बनिक यौगिक का संलयन क्यों किया जाता है?
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: तत्वों को अकार्बनिक जल-घुलनशील यौगिकों (NaCN, Na₂S, Na₃PO₄) में बदलने हेतु।
✔ अंतिम उत्तर: ताकि आगे की पहचान अभिक्रियाएँ आसानी से कर सकें।
🔵 प्रश्न 8.27
केल्डाल पद्धति द्वारा नमूने में उपस्थित नाइट्रोजन की मात्रा ज्ञात करने के लिए प्रयोगात्मक क्रियाओं का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
🟢 उत्तर:
💡 चरणबद्ध विवरण:
1️⃣ कार्बनिक नमूना H₂SO₄ में गर्म किया जाता है (ऑक्सीकरण)।
2️⃣ NH₄HSO₄ बनता है।
3️⃣ इसे NaOH से गर्म कर NH₃ गैस निकाली जाती है।
4️⃣ NH₃ को मानक अम्ल में अवशोषित कर टाइट्रेट किया जाता है।
✔ अंतिम उत्तर: इस प्रकार अमोनिया की मात्रा से नाइट्रोजन प्रतिशत ज्ञात किया जाता है।

🔵 प्रश्न 8.28
क्या CCl₄ विलयन नाइट्रेट के साथ गर्म करने पर AgCl का श्वेत अवक्षेप देता है? अपने उत्तर का कारण लिखिए।
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: CCl₄ एक सहसंयोजक यौगिक है, आयनिक नहीं।
💡 व्याख्या: इसमें क्लोरीन स्वतंत्र रूप में नहीं होता जो AgNO₃ से AgCl अवक्षेप दे सके।
✔ अंतिम उत्तर: नहीं, क्योंकि CCl₄ में क्लोरीन रासायनिक रूप से बंधित है, आयनिक नहीं।
🔵 प्रश्न 8.29
किसी कार्बनिक यौगिक में क्लोरीन की मात्रात्मक उपस्थिति ज्ञात करने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाती है?
🟢 उत्तर:
✳ विधि: Carius पद्धति
💡 सिद्धांत: ज्ञात मात्रा का यौगिक फ्यूमिंग नाइट्रिक अम्ल और सिल्वर नाइट्रेट के साथ सीलबंद ट्यूब में गर्म किया जाता है।
AgCl का अवक्षेप बनता है, जिसे छानकर सुखाकर तौलते हैं।
✔ अंतिम उत्तर: क्लोरीन की मात्रा AgCl के भार से गणना की जाती है।
🔵 प्रश्न 8.30
नाइट्रोजन, सल्फर एवं फॉस्फोरस की उपस्थिति की जांच के लिए “सोडियम फ्यूजन निष्कर्ष” का सिद्धांत बताइए।
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: कार्बनिक यौगिक में उपस्थित तत्व सोडियम के साथ संलयन कर जल-घुलनशील लवणों (NaCN, Na₂S, Na₃PO₄) में बदल जाते हैं।
💡 उदाहरण:
Na + C + N → NaCN
✔ अंतिम उत्तर: इन अकार्बनिक लवणों की रासायनिक जांच से तत्वों की पहचान की जाती है।
🔵 प्रश्न 8.31
कार्बनिक यौगिकों में हाइड्रोजन की मात्रात्मक उपस्थिति ज्ञात करने के लिए कौन-सी विधि प्रयोग की जाती है?
🟢 उत्तर:
✳ विधि: लीबिग (Liebig) विधि
💡 सिद्धांत: ज्ञात भार के यौगिक को CuO के साथ जलाकर CO₂ और H₂O बनाते हैं।
H₂O को शोषक पदार्थ (CaCl₂) द्वारा सोख लिया जाता है और उसका भार ज्ञात किया जाता है।
✔ अंतिम उत्तर: H₂O के भार से हाइड्रोजन प्रतिशत की गणना की जाती है।
🔵 प्रश्न 8.32
किसी नमूने में 69.96 mg यौगिक जलाकर 4.8% हाइड्रोजन प्राप्त हुआ। ऑक्सीजन का प्रतिशत ज्ञात कीजिए, यदि उसमें 20% कार्बन है।
🟢 उत्तर:
💡 गणना:
कुल = 100%
C = 20%, H = 4.8%
O = 100 – (20 + 4.8) = 75.2%
✔ अंतिम उत्तर: ऑक्सीजन का प्रतिशत = 75.2%
🔵 प्रश्न 8.33
0.5 g कार्बनिक यौगिक को 50 mL 0.5 M H₂SO₄ में ऑक्सीकरण कर 50 mL NaOH से टाइट्रेशन किया गया। NaOH का अतिरेक 25 mL H₂SO₄ से उदासीन किया गया। नाइट्रोजन प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
🟢 उत्तर (संक्षेप में):
💡 सिद्धांत: केल्डाल विधि का प्रयोग।
NaOH और H₂SO₄ की अभिक्रिया से मुक्त अमोनिया की मात्रा ज्ञात की जाती है।
🧮 गणना सूत्र:
% N = (1.4 × N × (V₁ – V₂)) / W
✔ अंतिम उत्तर: परिणाम प्रयोगात्मक मानों के अनुसार प्राप्त किया जा सकता है।
🔵 प्रश्न 8.34
0.3780 g कार्बनिक यौगिक के दहन से 0.5740 g CO₂ और 0.2930 g H₂O प्राप्त हुए। कार्बन व हाइड्रोजन प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
🟢 उत्तर:
✳ गणना सूत्र:
% C = (12/44) × (CO₂ का भार / यौगिक का भार) × 100
% H = (2/18) × (H₂O का भार / यौगिक का भार) × 100
💡 गणना:
% C = (12/44) × (0.5740 / 0.3780) × 100 ≈ 41.1%
% H = (2/18) × (0.2930 / 0.3780) × 100 ≈ 8.6%
✔ अंतिम उत्तर: C = 41.1%, H = 8.6%
🔵 प्रश्न 8.35
यदि 0.468 g यौगिक के दहन से 0.668 g CO₂ तथा 0.204 g H₂O प्राप्त हुए तो कार्बन और हाइड्रोजन का प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
🟢 उत्तर:
💡 गणना:
% C = (12/44) × (0.668 / 0.468) × 100 ≈ 38.4%
% H = (2/18) × (0.204 / 0.468) × 100 ≈ 4.8%
✔ अंतिम उत्तर: C = 38.4%, H = 4.8%
🔵 प्रश्न 8.36
CH₂ = CH–CH₂–CH₂–C ≡ CH में C₂–C₃ बन्ध का संकरण ज्ञात कीजिए।
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: एकल बन्ध = sp³, द्वि = sp², त्रि = sp
💡 व्याख्या:
C₂ = CH का C → sp²
C₃ – CH₂ का C → sp³
✔ अंतिम उत्तर: C₂–C₃ बन्ध में sp²–sp³ संकरण।
🔵 प्रश्न 8.37
किसी यौगिक में यदि σ और π बन्धों की कुल संख्या दी हो, तो कौन-सा बन्ध मज़बूत होता है और क्यों?
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: σ बन्ध सिर-से-सिर आच्छादन से बनता है जबकि π बन्ध पार्श्व आच्छादन से।
💡 व्याख्या: σ बन्ध का आच्छादन अधिक, अतः वह अधिक मजबूत।
✔ अंतिम उत्तर: σ बन्ध π बन्ध से अधिक मज़बूत होता है।
🔵 प्रश्न 8.38
निम्नलिखित कार्बोकैटायनों में से कौन-सा सर्वाधिक स्थायी है?
(क) (CH₃)₃C⁺ (ख) (CH₃)₂CH⁺ (ग) CH₃CH₂⁺ (घ) CH₃⁺
🟢 उत्तर:
💡 व्याख्या:
हाइपरसंयुग्मन और +I प्रभाव के कारण तृतीयक कार्बोकैटायन सबसे स्थिर होता है।
✔ अंतिम उत्तर: (क) (CH₃)₃C⁺ सर्वाधिक स्थिर।
🔵 प्रश्न 8.39
कार्बनिक यौगिकों के वाष्पन या अवशोषण की स्थायीता का अनुक्रम किस पर निर्भर करता है?
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: अंतर-अणुक बल, आणविक भार और संरचना पर निर्भर।
💡 व्याख्या:
जिन यौगिकों में हाइड्रोजन बन्धन या ध्रुवीयता अधिक होती है, उनका वाष्पन कम होता है।
✔ अंतिम उत्तर: स्थायीता ∝ हाइड्रोजन बन्धन एवं आणविक भार।
🔵 प्रश्न 8.40
CH₃CH₂I + KOH (aq) → CH₃CH₂OH + KI अभिक्रिया किस प्रकार की है?
🟢 उत्तर:
✳ सिद्धांत: जब एक समूह दूसरे से प्रतिस्थापित हो तो यह न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रिया होती है।
💡 व्याख्या: OH⁻ (न्यूक्लियोफाइल) आयोडीन को विस्थापित कर अल्कोहल बनाता है।
✔ अंतिम उत्तर: यह न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन (SN2) अभिक्रिया है।

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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

सिर्फ इसी पाठ से निर्मित CBSE MODEL प्रश्न पत्र।



खंड A — बहुविकल्पीय प्रश्न (Q1–Q16, प्रत्येक 1 अंक)
प्रश्न 1. कार्बनिक रसायन मुख्यतः किस तत्त्व के यौगिकों का अध्ययन है?
हाइड्रोजन
कार्बन
ऑक्सीजन
नाइट्रोजन
Answer: 2
प्रश्न 2. कार्बन की संयोजकता सामान्यतः होती है:
2
3
4
5
Answer: 3
प्रश्न 3. कार्बनिक यौगिकों में कार्बन–कार्बन बन्ध का प्रकार हो सकता है:
केवल एकल
केवल द्वि
केवल त्रि
एकल, द्वि, त्रि सभी
Answer: 4
प्रश्न 4. समावयवता का कारण है:
उच्च इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता
बहु-परमाण्विकता
कार्बन की चतुर्मूलकता एवं श्रृंखला बनाने की क्षमता
धात्विक गुण
Answer: 3
प्रश्न 5. संरचना CH₃–CH₂–OH किस प्रकार का कार्बनिक यौगिक है?
ऐल्केन
ऐल्कोहल
ईथर
ऐल्डिहाइड
Answer: 2
कथन–कारण हेतु विकल्प-कुंजी
कथन (A) एवं कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा R, A का सही कारण है
कथन (A) एवं कारण (R) दोनों सत्य हैं परन्तु R, A का सही कारण नहीं
कथन (A) सत्य है परन्तु R असत्य
कथन (A) असत्य है परन्तु R सत्य
प्रश्न 6 (A/R).
कथन (A): कार्बन परमाणु चारों ओर सहसंयोजक बन्ध बना सकता है।
कारण (R): कार्बन की संयोजकता 4 होती है।
Answer: 1
प्रश्न 7. समावयव CH₃–O–CH₃ किस प्रकार का यौगिक है?
ऐल्कोहल
ईथर
ऐल्डिहाइड
कीटोन
Answer: 2
प्रश्न 8. समावयवता का वह प्रकार जिसमें आणविक सूत्र समान परन्तु संरचना अलग हो:
संरचनात्मक
स्थानिक
प्रकाशीय
भूमितीय
Answer: 1
प्रश्न 9. भूमितीय समावयवता का कारण है:
एकल बन्ध
द्वि बन्ध
त्रि बन्ध
हाइड्रोजन बन्ध
Answer: 2
प्रश्न 10 (A/R).
कथन (A): CH₃–CH=CH₂ में “cis–trans” समावयवता सम्भव है।
कारण (R): द्वि बन्ध में घूर्णन अवरुद्ध होता है।
Answer: 1
प्रश्न 11. यदि किसी यौगिक का आणविक सूत्र C₂H₆O है, तो कितने संरचनात्मक समावयव सम्भव हैं?
1
2
3
4
Answer: 2
प्रश्न 12. प्रकाशीय समावयवता का कारण है:
असममित कार्बन
चतुर्मूलकता
श्रृंखला निर्माण
द्वि बन्ध
Answer: 1
प्रश्न 13. टेट्राक्लोरोमीथेन (CCl₄) का आकार है:
रेखीय
त्रिकोणीय
चतुष्फलकीय
वक्राकार
Answer: 3
प्रश्न 14. CH₃–CH₂–Cl में कौन-सा बन्ध विद्यमान है?
सहसंयोजक
आयनिक
धात्विक
हाइड्रोजन
Answer: 1
प्रश्न 15 (A/R).
कथन (A): कार्बनिक यौगिकों का शोधन आसवन, परिष्करण, क्रिस्टलीकरण आदि से किया जाता है।
कारण (R): इन यौगिकों का गलनांक व क्वथनांक प्रायः भिन्न होते हैं।
Answer: 1
प्रश्न 16. किसी कार्बनिक यौगिक में कार्बन का प्रतिशत निकालने हेतु कौन-सी विधि प्रयुक्त होती है?
कजेल्डाल
ड्यूमास
लाइबिग
कैरीयस
Answer: 3

खंड B — अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Q17–Q21, प्रत्येक 2 अंक)
प्रश्न 17. समावयवता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
🟦 जब दो या अधिक यौगिकों का आणविक सूत्र समान हो किन्तु संरचना या गुणधर्म भिन्न हों तो इसे समावयवता कहते हैं।
🟩 उदाहरण: C₂H₆O (ऐल्कोहल और ईथर)।
प्रश्न 18. असममित कार्बन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
🟦 वह कार्बन जो चार विभिन्न समूहों से जुड़ा हो, असममित कार्बन कहलाता है।
🟩 यह प्रकाशीय समावयवता का कारण बनता है।
प्रश्न 19. समावयवता के दो प्रकार लिखिए।
उत्तर:
🟦 संरचनात्मक समावयवता।
🟩 स्थानिक (भूमितीय एवं प्रकाशीय) समावयवता।
प्रश्न 20. कार्बनिक यौगिकों के शोधन की दो विधियाँ लिखिए।
उत्तर:
🟦 आसवन।
🟩 क्रिस्टलीकरण।
प्रश्न 21. ड्यूमास विधि किस तत्व के परिमाण निर्धारण हेतु प्रयुक्त होती है?
उत्तर:
🟦 नाइट्रोजन।
🟩 यह गैस आयतन पर आधारित विधि है।

खंड C — लघु उत्तरीय प्रश्न (Q22–Q28, प्रत्येक 3 अंक)
प्रश्न 22. कार्बन की चतुर्मूलकता तथा श्रृंखला निर्माण क्षमता समझाइए।
उत्तर:
🟦 कार्बन 4 संयोजक इलेक्ट्रॉनों वाला है ⇒ 4 बन्ध बना सकता है।
🟩 कार्बन–कार्बन बन्ध मजबूत होने से श्रृंखलाएँ, चक्रीय संरचनाएँ बनाता है।
🟪 यही कार्बनिक रसायन की विविधता का कारण है।
प्रश्न 23. हाइड्रोकार्बनों में संरचनात्मक समावयवता का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
🟦 C₄H₁₀ : n-ब्यूटेन (CH₃–CH₂–CH₂–CH₃)।
🟩 आइसो-ब्यूटेन (CH₃–CH(CH₃)–CH₃)।
🟪 दोनों का सूत्र समान, संरचना अलग।
प्रश्न 24. भूमितीय (cis-trans) समावयवता को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
🟦 कारण: द्वि बन्ध में घूर्णन अवरुद्ध।
🟩 उदाहरण: CH₃–CH=CH–CH₃
cis: दोनों CH₃ एक ही ओर।
trans: दोनों विपरीत ओर।
प्रश्न 25. प्रकाशीय समावयवता को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
🟦 कारण: असममित कार्बन।
🟩 उदाहरण: CH₃–CH(OH)–COOH (लैक्टिक अम्ल)।
🟪 दाएँ व बाएँ घुमाने वाले समावयव प्रकाशीय सक्रिय होते हैं।
प्रश्न 26. कार्बनिक यौगिकों की शुद्धता जाँचने की एक विधि लिखिए।
उत्तर:
🟦 गलनांक/क्वथनांक का निर्धारण।
🟩 शुद्ध यौगिक का मान निश्चित होता है; अशुद्ध होने पर विचलन आता है।
प्रश्न 27. कैरीयस विधि किस तत्व के निर्धारण हेतु प्रयुक्त होती है?
उत्तर:
🟦 हैलोजन।
🟩 यह विधि AgNO₃ के साथ AgX अवक्षेप बनाकर मात्रा ज्ञात करती है।
प्रश्न 28. कार्बनिक यौगिकों में कार्बन व हाइड्रोजन की प्रतिशत मात्रा लाइबिग विधि से कैसे ज्ञात की जाती है?
उत्तर:
🟦 यौगिक को O₂ की उपस्थिति में जलाया जाता है।
🟩 C → CO₂ (KOH द्वारा अवशोषित)
🟪 H → H₂O (CaCl₂ द्वारा अवशोषित)
✅ इनके द्रव्यमान से C व H का प्रतिशत निकाला जाता है।

खंड D — प्रकरण आधारित प्रश्न (Q29–Q30, प्रत्येक 4 अंक)
प्रश्न 29.
“C₂H₆O का आणविक सूत्र दो विभिन्न यौगिकों का प्रतिनिधित्व करता है।”
(i) इन दोनों समावयवों के नाम व संरचना लिखिए। (2)
(ii) इनमें से किसका क्वथनांक अधिक होगा और क्यों? (2)
उत्तर:
🟦 (i) समावयव:
एथेनॉल (CH₃–CH₂–OH)
डाईमेथाइल ईथर (CH₃–O–CH₃)
🟩 (ii) एथेनॉल का क्वथनांक अधिक होता है क्योंकि इसमें हाइड्रोजन बन्धन होता है जबकि ईथर में नहीं।

प्रश्न 30.
“लैक्टिक अम्ल (CH₃–CH(OH)–COOH) में एक असममित कार्बन होता है।”
(i) असममित कार्बन की पहचान कीजिए। (1)
(ii) इसके कारण किस प्रकार की समावयवता उत्पन्न होती है? (1)
(iii) प्रकाशीय समावयवता का अर्थ लिखिए। (2)
उत्तर:
🟦 (i) मध्य कार्बन (CH) असममित है क्योंकि यह चार भिन्न समूहों से जुड़ा है।
🟩 (ii) इसके कारण प्रकाशीय समावयवता होती है।
🟪 (iii) जब यौगिक समतल ध्रुवीकृत प्रकाश को दाएँ अथवा बाएँ घुमा सके तो इसे प्रकाशीय समावयवता कहते हैं।

खंड E — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Q31–Q33, प्रत्येक 5 अंक)
प्रश्न 31.
कार्बनिक यौगिकों में उपस्थित तत्त्वों की गुणात्मक पहचान की विधियाँ लिखिए।
उत्तर:
🟦 नाइट्रोजन की पहचान: लासेन परीक्षण – Na के साथ पिघलाकर NaCN बनता है, FeSO₄ और FeCl₃ से Prussian blue अवक्षेप।
🟩 गन्धक की पहचान: Na₂S बनता है, Pb(CH₃COO)₂ से PbS (काला अवक्षेप)।
🟪 हैलोजन की पहचान: NaX बनता है, AgNO₃ से AgX अवक्षेप (सफेद, हल्का पीला, पीला क्रमशः Cl, Br, I के लिए)।
✅ निष्कर्ष: लासेन पिघलन परीक्षण से सभी अधात्वों की पहचान सम्भव है।
या
लासेन पिघलन परीक्षण का सिद्धान्त व चरणबद्ध विधि लिखिए।

प्रश्न 32.
समावयवता के विभिन्न प्रकार लिखिए और प्रत्येक का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
🟦 संरचनात्मक समावयवता: आणविक सूत्र समान, संरचना भिन्न।
उदाहरण: C₄H₁₀ (n-ब्यूटेन, आइसो-ब्यूटेन)।
🟩 भूमितीय समावयवता: द्वि बन्ध के कारण cis-trans रूप।
उदाहरण: CH₃–CH=CH–CH₃ (cis व trans-ब्यूटीन)।
🟪 प्रकाशीय समावयवता: असममित कार्बन के कारण।
उदाहरण: लैक्टिक अम्ल।
✅ निष्कर्ष: समावयवता कार्बनिक यौगिकों की विविधता का आधार है।
या
प्रकाशीय समावयवता की परिभाषा दीजिए तथा Lactic acid को उदाहरण बनाकर समझाइए।

प्रश्न 33.
लाइबिग विधि द्वारा कार्बन व हाइड्रोजन की मात्रात्मक पहचान की विधि समझाइए।
उत्तर:
🟦 सिद्धान्त: कार्बनिक यौगिक का O₂ में दहन कराकर C → CO₂ तथा H → H₂O में परिवर्तित किया जाता है।
🟩 प्रयोग:
CO₂ को KOH द्वारा अवशोषित किया जाता है।
H₂O को CaCl₂ द्वारा अवशोषित किया जाता है।
🟪 गणना:
CO₂ के द्रव्यमान से C की मात्रा।
H₂O के द्रव्यमान से H की मात्रा।
✅ परिणाम: प्रतिशत C और H ज्ञात किए जाते हैं।
या
कजेल्डाल विधि द्वारा नाइट्रोजन का मात्रात्मक निर्धारण समझाइए।

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