Class 10, Social Science (Hindi)

Class 10 : Social Science (In Hindi) Political Science – Lesson 13 सत्ता की साझेदारी

पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन


इस अध्याय में लोकतंत्र के एक मूलभूत सिद्धांत “सत्ता की साझेदारी” की अवधारणा, कारण एवं रूपों पर विशद रूप से चर्चा की गई है। पाठ को चार मुख्य भागों में व्यवस्थित किया जा सकता है:

युक्तिपरक तर्क: जब विभिन्न सामाजिक, धार्मिक या भाषाई समूहों को शासन में हिस्सेदारी मिलती है, तो आपसी अविश्वास और हिंसक संघर्ष की आशंका कम होती है। बहुसंख्यक समुदाय द्वारा सत्ता का बेपरवाह उपयोग आगे चलकर राजनीतिक अस्थिरता और गृहयुद्ध का रूप ले सकता है, इसलिए टकराव को रोका जाना लोकतंत्र की स्थिरता के लिए लाभकारी है।

नैतिक तर्क: लोकतंत्र में सभी नागरिक ही शासन का स्रोत होते हैं। इसलिए सत्ता की साझेदारी नैतिक रूप से भी आवश्यक है, क्योंकि यह प्रत्येक समूह को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाती है और स्व-शासन की भावना को सशक्त करती है।

क्षैतिज विभाजन (Horizontal Division)

विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति का बँटवारा।

उदाहरण: भारत में संसद द्वारा बनाए कानूनों पर कार्यपालिका का क्रियान्वयन और न्यायपालिका द्वारा उन पर सुप्रीम कोर्ट तथा उच्च न्यायालयों की निगरानी।

ऊर्ध्वाधर विभाजन (Vertical Division/Federalism)

केंद्र और राज्यों/प्रांतों के बीच शक्तियों का बँटवारा।

उदाहरण: भारत में केंद्र–राज्य विभाजन, जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य आदि विषय राज्य सूची में आते हैं जबकि रक्षा, विदेश नीति केंद्र द्वारा संबोधित होती है।

सामाजिक समूहों के बीच साझेदारी (Community-based Power Sharing)

भाषा, धर्म या जाति आधारित समुदायों को संवैधानिक रूप से प्रतिनिधित्व देना।

उदाहरण: बेल्जियम में फ़्रेंच, फ़्लेमिश एवं जर्मन भाषी समुदायों के लिए अलग-अलग सामुदायिक सरकारें और समान प्रतिनिधित्व वाला संघीय ढाँचा।

राजनीतिक दलों एवं दबाव समूहों के माध्यम से (Party System and Pressure Groups)

बहु-दल व्यवस्था, गठबंधन सरकारें और विभिन्न हित-समूहों की सक्रिय भागीदारी।

उदाहरण: जर्मनी में सत्ता के लिए गठबंधन सरकारें बनाना और भारत में अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षित चुनाव क्षेत्र।

भाषाई आधार पर फ़्लेमिश (डच), वेलोनिया (फ़्रेंच) एवं जर्मन भाषी आबादी के बीच आर्थिक एवं सामाजिक असंतुलन हुआ। 1970–1993 में चार संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से संघीय व्यवस्था में सामुदायिक सरकारों, क्षेत्रीय सरकारों एवं केंद्रीय सरकार में सभी समूहों का बराबर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया। इससे गृहयुद्ध की आशंका टली और यूरोपीय संघ का मुख्यालय ब्रुसेल्स में सुगमता से स्थापित हुआ।

श्रीलंका

1948 में स्वतंत्रता के बाद सिंहलियों ने तमिलों को बहुसंख्यकवाद की नीति के तहत राजभाषा, नौकरियों और विश्वविद्यालयों में वरीयता दी। इससे तमिलों की नाराज़गी बढ़ी और अंततः 1983–2009 के गृहयुद्ध तक का हिंसक संघर्ष हुआ। गृहयुद्ध के अंत में व्यापक विनाश और विस्थापन ने दिखाया कि बहुसंख्यक प्रभुत्व अल्पसंख्यकों के साथ-साथ देश की समग्र एकता के लिए भी विनाशकारी हो सकता है।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1
आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या हैं? प्रत्येक तरीके का एक उदाहरण दें।

उत्तर:
लोकतंत्र में सत्ता बाँटने के चार प्रमुख रूप हैं:

क्षैतिज विभाजन (विभिन्न अंगों के बीच): विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति संतुलन सुनिश्चित करना (जैसे भारत में संसद, प्रधानमंत्री एवं सर्वोच्च न्यायालय का अलग-अलग कार्य).

उर्ध्वाधर वितरण (सरकारों के बीच): केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों के अधिकारों का विभाजन (जैसे भारत में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच).

सामुदायिक/सामाजिक साझेदारी: भाषायी, धार्मिक या जनजातीय समूहों को कानून में आरक्षण देकर भागीदारी (जैसे भारत में आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र).

राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन: दो या अधिक दल मिलकर सरकार बनाना (जैसे जर्मनी में CDU–SPD गठबंधन).

प्रश्न 2
भारतीय संदर्भ में सत्ता की हिस्सेदारी का एक उदाहरण देते हुए एक युक्तिपरक और एक नैतिक कारण बताएँ।

उत्तर:

उदाहरण: स्थानीय स्वायत्त संस्थाएँ—पंचायतों एवं नगरपालिकाओं को अधिकार देना।

युक्तिपरक कारण: विकास योजनाओं पर स्थानीय जनता की सक्रिय भागीदारी से कार्यकुशलता बढ़ती है तथा भ्रष्‍टाचार घटता है।

नैतिक कारण: स्थानीय लोगों को अपने निर्णयों में हिस्सा देकर उन्हें समान अवसर एवं अधिकार मिलते हैं, जिससे न्याय और समावेशिता सुनिश्चित होती है.

प्रश्न 3
इस अध्याय को पढ़ने के बाद तीन छात्रों के निष्कर्ष दिए गए हैं। आप इनमें से किससे सहमत हैं और क्यों? (लगभग 50 शब्द)

थम्मन – विभाजित समाजों में ही सत्ता की साझेदारी जरूरी है।

मथाई – केवल बड़े या क्षेत्रीय विभाजित देशों में ही लागू हो सकती है।

औसेफ – हर समाज में जरूरी है, चाहे छोटा हो या कोई विभाजन न हो।

उत्तर:
मैं औसेफ से सहमत हूँ क्योंकि सत्ता का विकेंद्रण लोकतंत्र की आत्मा है। इससे सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होती है, निर्णय में पारदर्शिता आती है तथा किसी भी प्रकार के एकतरफा प्रभुत्व से बचा जा सकता है.

प्रश्न 4
बेल्जियम के मर्चटेम शहर में फ़्रेंच बोलने पर स्कूलों में रोक लगाना सत्ता की साझेदारी की मूल भावना का उल्लंघन है या नहीं? (लगभग 50 शब्द)

उत्तर:
यह रोक व्यवस्था की साझा भावना के विपरीत है। सत्ता की साझेदारी का मूल उद्देश्य सामाजिक विविधता का सम्मान करना है। भाषा पर प्रतिबंध अल्पसंख्यक समूह को अलग-थलग करता है, जबकि साझेदारी में सबकी भाषायी पहचान को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाता है.

प्रश्न 5
निम्न उद्धरण पढ़ें और इसमें सत्ता की साझेदारी के युक्तिपरक कारणों में से किसी एक का चयन करें:

“महात्मा गांधी के सपनों को साकार करने और अपने संविधान निर्माताओं की उम्मीदों को पूरा करने के लिए हमें पंचायतों को अधिकार देने की ज़रूरत है। पंचायती राज ही वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना करता है… भ्रष्‍टाचार कम करने और प्रशासनिक कुशलता को बढ़ाने का एक उपाय पंचायतों को अधिकार देना भी है…”

उत्तर:
इस उद्धरण में पंचायतों को अधिकार देने का युक्तिपरक कारण ‘भ्रष्‍टाचार में कमी और प्रशासनिक कुशलता में वृद्धि’ बताया गया है.

प्रश्न 6
निम्न में से सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दिए तर्कों की पहचान कर कोड चुनें:
(क) विभिन्न समुदायों के बीच टकराव को कम करती है।
(ख) पक्षपात का अंदेशा कम करती है।
(ग) निर्णय लेने की प्रक्रिया को अटका देती है।
(घ) विविधताओं को समेट लेती है।
(ङ) अस्थिरता बढ़ाती है।
(च) जनता की भागीदारी बढ़ाती है।
(छ) देश की एकता कमजोर करती है।

उत्तर विकल्प:

(सा) क, ख, घ, च

(रे) क, ग, ङ, च

(गा) क, ख, घ, छ

(मा) ख, ग, घ, छ

उत्तर: (सा) क, ख, घ, च.

प्रश्न 7
बेल्जियम और श्रीलंका की व्यवस्था पर आधारित निम्न बयानों में से सही चुनें:
(क) बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने फ़्रेंच-भाषी अल्पसंख्यकों पर प्रभुत्व जमाया।
(ख) श्रीलंका में सिंहली-भाषी बहुसंख्यकों ने तमिल अल्पसंख्यकों का राजभाषा व आरक्षण हनन किया।
(ग) तमिलों ने संघीय ढाँचे पर स्वायत्तता की मांग की।
(घ) बेल्जियम में संघीय व्यवस्था अपनाकर भाषा-आधारित विभाजन टाला।

उत्तर विकल्प:

(सा) क, ख, ग, घ

(रे) क, ख, घ

(गा) ग, घ

(मा) ख, ग, घ

उत्तर: (मा) ख, ग, घ.

प्रश्न 8
सूची I [सत्ता के बँटवारे के स्वरूप] एवं सूची II [शासन के स्वरूप] मिलाएँ:

सूची I नं. स्वरूप सूची II कोड
1 विभिन्न अंगों के बीच बँटवारा (ख) अधिकारों का वितरण
2 विभिन्न सरकारों के बीच अधिकार (घ) संघीय सरकार
3 सामाजिक समूहों के बीच साझेदारी (क) सामुदायिक सरकार
4 दो या अधिक दलों के बीच साझेदारी (ग) गठबंधन सरकार
उत्तर विकल्प:

(सा) ख, घ, क, ग

(रे) घ, ख, क, ग

(गा) ख, क, घ, ग

(मा) ग, घ, क, ख

उत्तर: (सा) ख, घ, क, ग.

प्रश्न 9
निम्न दो बयानों में से कौन सही है?
(अ) सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए लाभकर है।
(ब) इससे सामाजिक समूहों में टकराव घटता है।

उत्तर विकल्प:

(क) अ सही, ब गलत

(ख) अ एवं ब दोनों सही

(ग) अ एवं ब दोनों गलत

(घ) अ गलत, ब सही

उत्तर: (ख) अ एवं ब दोनों सही.

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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न



🟩 10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) उत्तर सहित)
प्रश्न 1: बेल्जियम की राजधानी क्या है?
(अ) ब्रसेल्स
(ब) एंटवर्प
(स) जिनेवा
(द) वियना
उत्तर: (अ) ब्रसेल्स

प्रश्न 2: श्रीलंका में बहुसंख्यक समुदाय कौन-सा है?
(अ) तमिल
(ब) सिंहली
(स) मुस्लिम
(द) बौद्ध
उत्तर: (ब) सिंहली

प्रश्न 3: बेल्जियम में कितने प्रकार के समुदाय हैं?
(अ) एक
(ब) दो
(स) तीन
(द) चार
उत्तर: (ब) दो (फ्रेंच और डच भाषी)

प्रश्न 4: तमिल लोग श्रीलंका की कुल जनसंख्या का लगभग कितना प्रतिशत हैं?
(अ) 18%
(ब) 54%
(स) 74%
(द) 29%
उत्तर: (अ) 18%

प्रश्न 5: श्रीलंका में तमिलों की भाषा को किस वर्ष आधिकारिक दर्जा नहीं दिया गया?
(अ) 1956
(ब) 1948
(स) 1965
(द) 1972
उत्तर: (अ) 1956

प्रश्न 6: सत्ता विभाजन का सिद्धांत किस लोकतांत्रिक सिद्धांत पर आधारित है?
(अ) केंद्रीकरण
(ब) समानता
(स) जन भागीदारी
(द) तानाशाही
उत्तर: (स) जन भागीदारी

प्रश्न 7: सत्ता का क्षैतिज विभाजन किसके बीच होता है?
(अ) केंद्र और राज्य
(ब) विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका
(स) राज्य और पंचायत
(द) केंद्र और जनता
उत्तर: (ब) विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका

प्रश्न 8: बेल्जियम में किस वर्ष नई शक्ति साझा व्यवस्था लागू की गई?
(अ) 1990
(ब) 1993
(स) 2001
(द) 1985
उत्तर: (ब) 1993

प्रश्न 9: तमिलों द्वारा स्थापित अलगाववादी संगठन का क्या नाम था?
(अ) तमिल शक्ति
(ब) लिट्टे (LTTE)
(स) तमिल जनमोर्चा
(द) सशस्त्र तमिल संघ
उत्तर: (ब) लिट्टे (LTTE)

प्रश्न 10: सत्ता का ऊर्ध्वाधर विभाजन किसके बीच होता है?
(अ) सरकार और विपक्ष
(ब) केंद्र, राज्य, स्थानीय स्तर
(स) राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री
(द) सांसद और न्यायपालिका
उत्तर: (ब) केंद्र, राज्य, स्थानीय स्तर

🟨 10 लघु उत्तरीय प्रश्न (1–2 वाक्य में उत्तर सहित)
प्रश्न 1: सत्ता विभाजन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सत्ता विभाजन का अर्थ है – शासन शक्ति को विभिन्न स्तरों या अंगों में बाँटना, ताकि शक्ति का दुरुपयोग न हो।

प्रश्न 2: बेल्जियम की प्रमुख भाषाएं कौन-सी हैं?
उत्तर: डच और फ्रेंच।

प्रश्न 3: श्रीलंका के तमिल किस प्रकार के दो वर्गों में विभाजित हैं?
उत्तर: श्रीलंकाई तमिल और भारतीय तमिल।

प्रश्न 4: बहुसंख्यकवाद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: जब एक समुदाय दूसरे समुदायों को दरकिनार कर केवल स्वयं के हितों को प्राथमिकता देता है, तो उसे बहुसंख्यकवाद कहते हैं।

प्रश्न 5: सत्ता के क्षैतिज विभाजन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति विभाजन।

प्रश्न 6: बेल्जियम ने किस तरह सत्ता को विभाजित किया?
उत्तर: केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा सामुदायिक सरकारें बनाकर।

प्रश्न 7: श्रीलंका में तमिलों की मांग क्या थी?
उत्तर: उन्हें समान नागरिक अधिकार और स्वायत्त क्षेत्र चाहिए था।

प्रश्न 8: सत्ता विभाजन लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर: इससे शक्ति का केंद्रीकरण नहीं होता और जनता की सहभागिता सुनिश्चित होती है।

प्रश्न 9: बेल्जियम में सामुदायिक सरकार किस लिए बनाई गई?
उत्तर: सांस्कृतिक, भाषायी और शैक्षिक विषयों पर नियंत्रण हेतु।

प्रश्न 10: लिट्टे का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: स्वतंत्र तमिल राष्ट्र की स्थापना करना।

🟧 5 मध्यम दीर्घ उत्तर प्रश्न (3–5 वाक्य में उत्तर सहित)
प्रश्न 1: बेल्जियम की शक्ति साझा नीति की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर:
बेल्जियम ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियाँ बाँटी।
फ्रेंच और डच भाषियों को समान प्रतिनिधित्व मिला।
सभी भाषायी समुदायों को सांस्कृतिक अधिकार दिए गए।
सामुदायिक सरकार का गठन भी किया गया।

प्रश्न 2: श्रीलंका में तमिलों के साथ कैसा व्यवहार हुआ?
उत्तर:
1956 में सिंहली को एकमात्र आधिकारिक भाषा घोषित किया गया।
तमिलों को शिक्षा व नौकरियों में भेदभाव का सामना करना पड़ा।
वे खुद को उपेक्षित और असमान महसूस करने लगे।

प्रश्न 3: सत्ता के ऊर्ध्वाधर विभाजन को समझाइए।
उत्तर:
इसमें सत्ता केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर बाँटी जाती है।
प्रत्येक स्तर के पास अपने-अपने अधिकार होते हैं।
यह संघात्मक व्यवस्था का हिस्सा है।

प्रश्न 4: लोकतंत्र में शक्ति विभाजन के दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
(1) शक्ति के दुरुपयोग की संभावना कम होती है।
(2) सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व और भागीदारी मिलती है।

प्रश्न 5: श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद के क्या परिणाम हुए?
उत्तर:
तमिलों में असंतोष बढ़ा और उन्होंने लिट्टे जैसी अलगाववादी संगठन बनाए।
देश में गृहयुद्ध आरंभ हो गया और शांति भंग हुई।

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एक पृष्ठ में पुनरावृत्ति


🔷 1. सत्ता विभाजन क्या है?
यह वह व्यवस्था है जिसमें सरकार की शक्ति को विभिन्न अंगों या स्तरों में बाँटा जाता है ताकि सत्ता का दुरुपयोग न हो और लोकतंत्र मजबूत हो।

🔶 2. सत्ता विभाजन के दो प्रमुख रूप:
🟢 क्षैतिज विभाजन:
विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच – सभी स्वतंत्र और समान स्तर पर।
उदाहरण: भारत की तीनों शक्तियाँ।
🔵 ऊर्ध्वाधर विभाजन:
केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकार के बीच – सत्ता को स्तरों पर बाँटा जाता है।
उदाहरण: भारत में पंचायत व्यवस्था।

🔷 3. बेल्जियम की शक्ति साझा व्यवस्था:
✅ केंद्र और राज्य सरकार दोनों को समान शक्ति।
✅ भाषायी प्रतिनिधित्व संतुलित।
✅ ‘सामुदायिक सरकार’ – सांस्कृतिक और शैक्षिक मामलों के लिए।
👉 नतीजा: एकता बनी रही, सभी समुदाय संतुष्ट रहे।

🔶 4. श्रीलंका और बहुसंख्यकवाद:
🔴 सिंहली समुदाय को विशेष अधिकार मिले।
🔴 तमिल समुदाय के साथ भेदभाव हुआ।
🔴 तमिलों ने अलग राष्ट्र की मांग की।
👉 नतीजा: गृहयुद्ध, अस्थिरता और हिंसा।

🎯 5. निष्कर्ष (संदेश):
✅ सत्ता बाँटना = सत्ता मजबूत करना
✅ शक्ति की साझेदारी से लोकतंत्र में विश्वास बढ़ता है
✅ बहुसंख्यकवाद के बजाय भागीदारी का रास्ता अपनाना चाहिए

📝 एक पंक्ति में सार:
“सत्ता का विभाजन ही लोकतंत्र की असली सुरक्षा है।”

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