Class 12, Poltical Science (Hindi)

Class 12 : Poltical Science (Hindi) – Lesson 9.एक दल के प्रभुत्व का दौर

पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन


🌿 परिचय
भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 1947 से 1967 के समय को ‘एक दल के प्रभुत्व का दौर’ कहा जाता है। इस समय में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का देश की राजनीति पर व्यापक प्रभाव था। केंद्र ही नहीं, बल्कि अधिकांश राज्यों में भी कांग्रेस सत्ता में थी।
इस पाठ के माध्यम से हम समझते हैं कि लोकतंत्र होते हुए भी किस प्रकार एक ही दल लंबे समय तक सत्ता में बना रहा और उसका क्या प्रभाव भारत की राजनीति और समाज पर पड़ा।

🔴 कांग्रेस के प्रभुत्व के कारण
🔷 स्वतंत्रता संग्राम की विरासत
➡️ कांग्रेस पार्टी का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख भूमिका रही थी।
➡️ जनता कांग्रेस को राष्ट्रीय एकता और स्वाधीनता का प्रतीक मानती थी।


🔷 संगठनात्मक मजबूती
🧠 कांग्रेस का संगठन गाँव-गाँव तक फैला था।
➡️ जमीनी कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या और उनका जनसंपर्क कांग्रेस की ताकत थी।


🔷 सर्वसमावेशी चरित्र
🌿 कांग्रेस में हर जाति, धर्म, वर्ग और विचारधारा के लिए स्थान था।
✔️ यह न केवल राजनीतिक पार्टी थी, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का रूप भी थी।

🟢 प्रथम आम चुनाव 1952 : लोकतंत्र की असली परीक्षा
🔷 चुनाव की विशेषता
➡️ स्वतंत्र भारत का यह पहला आम चुनाव था।
➡️ बड़े स्तर पर अनपढ़ जनता, फिर भी शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव।


🔷 परिणाम
🧠 कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ।
✔️ विपक्षी पार्टियाँ कमजोर रहीं।
➡️ नेहरू जी के करिश्माई नेतृत्व को जनता का समर्थन मिला।
✏️ नोट : इस चुनाव ने भारत में लोकतंत्र की नींव और कांग्रेस के प्रभुत्व को एक साथ मजबूत किया।

🔵 कांग्रेस का प्रभुत्व : सत्ता के बाद
🔷 केंद्र और राज्यों में कांग्रेस
➡️ केंद्र के साथ-साथ राज्यों में भी कांग्रेस का बहुमत।
➡️ विपक्ष विखंडित और प्रभावहीन।


🔷 नेहरू का प्रभाव
🧠 नेहरू जी के नेतृत्व में कांग्रेस आधुनिक भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध दिखी।
➡️ वैज्ञानिक सोच, पंचवर्षीय योजनाएँ, गुटनिरपेक्षता जैसी नीतियाँ लोकप्रिय हुईं।

🔴 विपक्ष की स्थिति
🔷 कमजोर और बिखरा विपक्ष
➡️ स्वतंत्रता के तुरंत बाद अधिकांश विपक्षी दल छोटे और क्षेत्रीय थे।
➡️ विचारधारात्मक मतभेद, संसाधनों की कमी, संगठन का अभाव।


🔷 महत्वपूर्ण विपक्षी दल
🟢 भारतीय जनसंघ
🟢 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
🟢 प्रजा समाजवादी पार्टी
🟢 स्वतंत्र पार्टी
✏️ नोट : विपक्षी दल जनसमर्थन और संसाधनों के अभाव में कमजोर थे।

🟡 कांग्रेस का प्रभुत्व : लोकतंत्र पर प्रश्न या मजबूती?
🔷 लोकतंत्र के लिए सकारात्मक
✔️ संविधान के अनुरूप चुनाव होते रहे।
✔️ विपक्ष को बोलने का अधिकार था।
✔️ मीडिया स्वतंत्र था।


🔷 कांग्रेस के भीतर लोकतांत्रिक अभ्यास
➡️ कांग्रेस के भीतर भी मतभेद होते थे और विचार विमर्श होता था।
➡️ विभिन्न धड़ों के बीच संतुलन ने आंतरिक लोकतंत्र को बनाए रखा।
🧠 निष्कर्ष : कांग्रेस का प्रभुत्व लोकतांत्रिक प्रक्रिया के भीतर था, न कि उसे दबाने हेतु।

🔵 1967 के चुनाव : प्रभुत्व को चुनौती
🔷 परिणाम
➡️ केंद्र में कांग्रेस की सीटें घटीं।
➡️ कई राज्यों में कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई – पंजाब, बंगाल, तमिलनाडु आदि।
🔷 कारण
🟢 आर्थिक असंतोष, बेरोजगारी, महँगाई।
🟢 विपक्ष का धीरे-धीरे मजबूत होना।
🟢 जनता में कांग्रेस के खिलाफ असंतोष।

🟢 1967 के बाद गठबंधन सरकारों का दौर
🔷 गठबंधन सरकारें
➡️ गैर-कांग्रेस दलों ने मिलकर सरकार बनाई।
➡️ इसे ‘संयुक्त विधायक दल सरकार’ कहा गया।


🔷 नई राजनीति की शुरुआत
⚡ क्षेत्रीय दलों का उदय।
⚡ जातिगत और क्षेत्रीय मुद्दों का राजनीतिकरण।

💡 Why This Lesson Matters? (यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है?)
✔️ यह अध्याय समझाता है कि लोकतंत्र में भी कैसे एक दल लंबे समय तक सत्ता में बना रह सकता है।
✔️ कांग्रेस के प्रभुत्व के बावजूद भारत में लोकतांत्रिक संस्थाएँ मजबूत बनी रहीं।
✔️ 1967 के बाद भारत में राजनीति में नया युग आया जिसमें क्षेत्रीय और विपक्षी दलों को स्थान मिला।

📝 Quick Recap :
🔵 1947 से 1967 तक कांग्रेस का प्रभुत्व।
🟢 प्रथम आम चुनाव 1952 में भारी बहुमत।
🔴 कांग्रेस का सर्वसमावेशी और मजबूत संगठन।
🟡 विपक्ष की कमजोर स्थिति।
⚡ 1967 में कांग्रेस के प्रभुत्व को पहली चुनौती।

सारांश (300 शब्दों में)
इस अध्याय में भारत में 1947 से 1967 तक कांग्रेस पार्टी के प्रभुत्व की चर्चा की गई है।
🔷 स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस का प्रभुत्व स्वाभाविक था क्योंकि यह देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी सबसे बड़ी पार्टी थी। इसकी संगठनात्मक जड़ें गहरी थीं और इसका नेतृत्व पं. जवाहरलाल नेहरू जैसे लोकप्रिय नेता के हाथों में था।


🔷 1952 में हुए पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत दर्ज की और केंद्र के साथ-साथ अधिकांश राज्यों में भी सत्ता प्राप्त की। यह दौर भारतीय लोकतंत्र की नींव मजबूत करने का था।


🔷 विपक्षी पार्टियाँ इस दौर में कमजोर और बिखरी हुई थीं। जनसंघ, कम्युनिस्ट पार्टी, प्रजा समाजवादी पार्टी और स्वतंत्र पार्टी जैसे विपक्षी दल संघर्ष कर रहे थे, किंतु कांग्रेस के संगठन और जनाधार के सामने प्रभावहीन रहे।


🔷 कांग्रेस के भीतर भी लोकतांत्रिक प्रकिया कायम रही। वहाँ मतभेद और बहस के लिए स्थान था। इससे यह प्रभुत्व लोकतंत्र के भीतर बना रहा, न कि लोकतंत्र के विरुद्ध।


🔷 1967 के चुनाव कांग्रेस के लिए पहला बड़ा झटका साबित हुए। कांग्रेस केंद्र में सत्ता में तो रही पर कई राज्यों में हार गई। इससे भारत में क्षेत्रीय और विपक्षी दलों का उदय हुआ और लोकतांत्रिक राजनीति में विविधता आई।
निष्कर्ष : कांग्रेस के प्रभुत्व का यह दौर भारत के लोकतांत्रिक विकास में एक महत्वपूर्ण चरण था।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न



प्रश्न 1 :
सही विकल्प को चुनकर खाली स्थान को भरें –
(क) 1952 के पहले आम चुनाव में लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के लिए जो चुनाव कराए गए, वहाँ भारत के संविधान द्वारा निर्धारित शासन-व्यवस्था (सार्वभौम/प्रजासत्तात्मक/प्रजातांत्रिक) स्थापित हुई।
(ख) लोकतंत्र का पहला आम चुनाव 16 सप्ताह चलता और दूसरे स्थान पर रही (प्रजा समाजवादी पार्टी/भारतीय जनसंघ/भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी/भारतीय जनमत पार्टी)।
(ग) स्वतंत्र पार्टी का एक निर्देशित सिद्धांत था। (कमजोर वर्ग के हितों/वित्तीय बाजार के बचाव/राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था/सभी के भीतर राज्यों की स्वायत्तता)।
उत्तर 1 :
(क) प्रजातांत्रिक
(ख) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
(ग) राज्य के नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था

प्रश्न 2 :
यहाँ दो सूचियाँ दी गई हैं। पहले में नेताओं के नाम दिए हैं और दूसरे में दलों को। दोनों सूचियों को मिलान कीजिए –
(क) ए.के. गोपालन – (ii) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
(ख) श्यामा प्रसाद मुखर्जी – (i) भारतीय जनसंघ
(ग) मीनू मसानी – (iv) स्वतंत्र पार्टी
(घ) आचार्य कृपलानी – (iii) प्रजा समाजवादी पार्टी
उत्तर 2 :
(क) ए.के. गोपालन — भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
(ख) श्यामा प्रसाद मुखर्जी — भारतीय जनसंघ
(ग) मीनू मसानी — स्वतंत्र पार्टी
(घ) आचार्य कृपलानी — प्रजा समाजवादी पार्टी

प्रश्न 3 :
एक दल के प्रभुत्व के बारे में यहाँ चार कथन दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा सही या गलत का चिह्न लगाइए –
(क) विकल्प के रूप में किसी मजबूत राजनीतिक दल का अभाव एक दल प्रभुत्व का कारण था।
✔️ सही
(ख) समय की कठिनाइयों के कारण एक पार्टी का प्रभुत्व कायम हुआ।
✔️ सही
(ग) एक दल प्रभुत्व का संबंध राष्ट्र की औद्योगिकता अधिकता से है।
❌ गलत
(घ) एक दल प्रभुत्व से देश में लोकतांत्रिक आदर्शों के अभाव की झलक मिलती है।
❌ गलत

प्रश्न 4 :
भारत का एक राजनीतिक नक्शा लीजिए (जिसमें राज्यों की सीमाएँ दिखाई गई हों) और उसमें निम्नलिखित को चिह्नित कीजिए –
(क) ऐसे दो राज्य 1952-67 के दौरान कांग्रेस सत्ता में नहीं थीं।
(ख) दो ऐसे राज्य जहाँ इस पूरी अवधि में कांग्रेस सत्ता में रही।
उत्तर 4 :
(क) केरल, तमिलनाडु (जहाँ कांग्रेस का शासन नहीं रहा या बहुत कम रहा)।
(ख) उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश (जहाँ लगातार कांग्रेस सत्ता में रही)।

प्रश्न 5 :
निम्नलिखित अवधारणा को पढ़कर उसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
कांग्रेस के नेतृत्वकर्ता वर्ग हमेशा अपने हाथ में सत्ता सुरक्षित रखने के लिए विपक्षी दलों को बाहर रखने की कोशिश करते रहे। उन्होंने विपक्षी दलों को स्वाभाविक रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानने के बजाय उसे चुनौती के रूप में देखा। लेखक के अनुसार यह प्रवृत्ति कांग्रेस पार्टी के भीतर भी रही। लेखक के अनुसार कांग्रेस के प्रभुत्व का यह दौर लोकतंत्र के लिए अनुकूल नहीं था क्योंकि इससे विपक्ष कमजोर हुआ और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को क्षति पहुँची।
(क) लेखक क्या सोच रहा है कि कांग्रेस को एक स्वाभाविक तथा अनुकूल पार्टी नहीं होनी चाहिए?
उत्तर :
लेखक का विचार है कि कांग्रेस को अपने प्रभुत्व के साथ-साथ विपक्ष को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में स्थान देना चाहिए था। विपक्ष की उपेक्षा लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए हानिकारक थी।
(ख) शून्यकाल में जो कांग्रेस द्वारा निभाई गई सत्ताधारी भूमिका के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
कांग्रेस ने संसद में विपक्ष की बातों को कम महत्व दिया, विपक्षी नेताओं को नजरअंदाज किया और कभी-कभी प्रशासनिक तंत्र का भी दुरुपयोग किया। इससे कांग्रेस का प्रभुत्व तो बढ़ा पर लोकतंत्र कमजोर हुआ।

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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

SECTION – A | प्रश्न 1 से 18 (प्रत्येक प्रश्न 1 अंक)

प्रश्न 1 :
कांग्रेस पार्टी का प्रभुत्व किस कालखंड में स्पष्ट रूप से देखा गया?
(अ) 1947 से 1952
(ब) 1952 से 1967
(स) 1967 से 1977
(द) 1980 से 1990
उत्तर : (ब) 1952 से 1967

प्रश्न 2 :
भारत में प्रथम आम चुनाव कब हुए?
(अ) 1947
(ब) 1950
(स) 1951-52
(द) 1957
उत्तर : (स) 1951-52

प्रश्न 3 :
कांग्रेस पार्टी के प्रभुत्व का एक मुख्य कारण क्या था?
(अ) संगठनात्मक मजबूती
(ब) विदेश नीति
(स) सेना की सहायता
(द) औद्योगीकरण
उत्तर : (अ) संगठनात्मक मजबूती

प्रश्न 4 :
विपक्षी दलों में से किसने कांग्रेस के विरोध में कार्य किया?
(अ) भारतीय जनसंघ
(ब) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
(स) स्वतंत्र पार्टी
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर : (द) उपरोक्त सभी

प्रश्न 5 :
ए. के. गोपालन किस राजनीतिक दल से जुड़े थे?
(अ) भारतीय जनसंघ
(ब) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
(स) स्वतंत्र पार्टी
(द) प्रजा समाजवादी पार्टी
उत्तर : (ब) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

प्रश्न 6 :
कांग्रेस का कौन-सा नेता करिश्माई नेतृत्व का उदाहरण था?
(अ) जवाहरलाल नेहरू
(ब) सरदार पटेल
(स) महात्मा गांधी
(द) डॉ. भीमराव आंबेडकर
उत्तर : (अ) जवाहरलाल नेहरू

प्रश्न 7 :
किस चुनाव में कांग्रेस के प्रभुत्व को पहली बार चुनौती मिली?
(अ) 1952
(ब) 1957
(स) 1962
(द) 1967
उत्तर : (द) 1967

प्रश्न 8 :
1952 से 1967 के दौरान भारत में विपक्ष की स्थिति कैसी थी?
(अ) मजबूत
(ब) कमजोर
(स) बराबरी में
(द) सत्ता में
उत्तर : (ब) कमजोर

प्रश्न 9 :
नेहरू के समय में भारत ने किस मार्ग का अनुसरण किया?
(अ) समाजवाद
(ब) पूंजीवाद
(स) साम्यवाद
(द) अधिनायकवाद
उत्तर : (अ) समाजवाद

प्रश्न 10 :
कांग्रेस पार्टी की सफलता का आधार क्या था?
(अ) संगठन, नेतृत्व और लोकप्रियता
(ब) सैनिक शक्ति
(स) विदेशी सहायता
(द) धार्मिक आधार
उत्तर : (अ) संगठन, नेतृत्व और लोकप्रियता

प्रश्न 11 :
निम्नलिखित में से कौन-सा विपक्षी दल नहीं था?
(अ) भारतीय जनसंघ
(ब) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
(स) प्रजा समाजवादी पार्टी
(द) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
उत्तर : (द) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

प्रश्न 12 :
नेहरू किस नीति के समर्थक थे?
(अ) गुटनिरपेक्षता
(ब) साम्यवाद
(स) पूंजीवाद
(द) साम्राज्यवाद
उत्तर : (अ) गुटनिरपेक्षता

प्रश्न 13 :
स्वतंत्र पार्टी किस विचारधारा से जुड़ी थी?
(अ) उदार पूंजीवाद
(ब) समाजवाद
(स) साम्यवाद
(द) फासीवाद
उत्तर : (अ) उदार पूंजीवाद

प्रश्न 14 :
विपक्षी दलों की सबसे बड़ी समस्या क्या थी?
(अ) संसाधनों की कमी
(ब) एकता का अभाव
(स) जनसमर्थन की कमी
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर : (द) उपरोक्त सभी

प्रश्न 15 :
Assertion (कथन) : कांग्रेस का प्रभुत्व लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप था।
Reason (कारण) : कांग्रेस के भीतर भी लोकतांत्रिक चर्चा होती थी।
(अ) दोनों सही और Reason सही व्याख्या है।
(ब) दोनों सही लेकिन Reason सही व्याख्या नहीं।
(स) Assertion सही, Reason गलत।
(द) दोनों गलत।
उत्तर : (अ) दोनों सही और Reason सही व्याख्या है।

प्रश्न 16 :
CASE BASED MCQ
1952 से 1967 के दौरान कांग्रेस का प्रभुत्व भारत में लोकतंत्र को किस प्रकार प्रभावित करता था?
(अ) लोकतंत्र मजबूत
(ब) लोकतंत्र समाप्त
(स) तानाशाही
(द) सैन्य शासन
उत्तर : (अ) लोकतंत्र मजबूत

प्रश्न 17 :
CASE BASED MCQ
1967 के चुनावों के बाद क्या परिवर्तन आया?
(अ) क्षेत्रीय दलों का उदय
(ब) कांग्रेस और मजबूत
(स) विपक्ष समाप्त
(द) सैन्य शासन लागू
उत्तर : (अ) क्षेत्रीय दलों का उदय

प्रश्न 18 :
एक दल के प्रभुत्व के बावजूद भारत में क्या बना रहा?
(अ) लोकतंत्र
(ब) तानाशाही
(स) सैन्य शासन
(द) साम्राज्यवाद
उत्तर : (अ) लोकतंत्र


SECTION – B (प्रश्न 19 से 23, प्रत्येक प्रश्न 2 अंक)

प्रश्न 19 :
भारत में कांग्रेस के लंबे समय तक प्रभुत्व के क्या दो प्रमुख कारण थे?
उत्तर 19 :
🔵 कांग्रेस का स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा ऐतिहासिक गौरव।
🟢 संगठनात्मक शक्ति, जो गाँव-गाँव तक फैली थी।

प्रश्न 20 :
नेहरू के समय में भारत की विदेश नीति का मुख्य आधार क्या था?
उत्तर 20 :
🔵 गुटनिरपेक्षता की नीति।
🟢 शीत युद्ध के समय किसी भी गुट में शामिल न होना।

प्रश्न 21 :
1967 के चुनावों में कांग्रेस के प्रभुत्व को किस प्रकार चुनौती मिली?
उत्तर 21 :
🔵 कई राज्यों में कांग्रेस की हार हुई।
🟢 विपक्षी दलों ने मिलकर गठबंधन सरकार बनाई।

प्रश्न 22 :
कांग्रेस के अंदर भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया कैसे कार्य करती थी?
उत्तर 22 :
🔵 विभिन्न नेताओं और गुटों के बीच मतभेद और बहस होती थी।
🟢 फैसले संवाद और बहस के माध्यम से लिए जाते थे।

प्रश्न 23 :
एक दल के प्रभुत्व के दौरान भारत में विपक्ष की क्या स्थिति थी?
उत्तर 23 :
🔵 विपक्ष कमजोर, विभाजित और संसाधनों की कमी से जूझ रहा था।
🟢 धीरे-धीरे विपक्ष मजबूत होता गया।

SECTION – C (प्रश्न 24 से 28, प्रत्येक प्रश्न 3 अंक)

प्रश्न 24 :
भारत में कांग्रेस के प्रभुत्व के तीन प्रमुख परिणाम बताइए।
उत्तर 24 :
🔵 लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुईं।
🟢 विपक्ष कमजोर बना रहा।
🔴 कांग्रेस के भीतर भी लोकतांत्रिक चर्चाएँ होती रहीं।

प्रश्न 25 :
प्रथम आम चुनाव की तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर 25 :
🔵 विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव।
🟢 बड़े पैमाने पर अनपढ़ जनता ने भाग लिया।
🔴 शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव।

प्रश्न 26 :
1967 के बाद क्षेत्रीय दलों के उदय के तीन कारण लिखिए।
उत्तर 26 :
🔵 कांग्रेस के खिलाफ जनता में असंतोष।
🟢 आर्थिक, सामाजिक मुद्दों का क्षेत्रीयकरण।
🔴 स्थानीय नेताओं की लोकप्रियता।

प्रश्न 27 :
कांग्रेस के संगठनात्मक ढाँचे की तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर 27 :
🔵 देशव्यापी नेटवर्क।
🟢 अनुभवी कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या।
🔴 हर स्तर पर मजबूत ढांचा।

प्रश्न 28 :
कांग्रेस के प्रभुत्व का भारतीय लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ा? तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर 28 :
🔵 लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्थिरता मिली।
🟢 विपक्ष धीरे-धीरे सशक्त हुआ।
🔴 लोकतांत्रिक परंपराएँ विकसित हुईं।

SECTION – D (प्रश्न 29 से 31, प्रत्येक प्रश्न 4 अंक)
(Case-based Questions)

प्रश्न 29 :
निम्न अंश को पढ़िए और उत्तर दीजिए –
“स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में लोकतंत्र की जड़ें गहरी करने में कांग्रेस का योगदान महत्वपूर्ण रहा। लेकिन 1967 के बाद कांग्रेस को कई राज्यों में पराजय का सामना करना पड़ा और विपक्षी दलों ने मिलकर सरकार बनाई।”
(क) 1967 के बाद किस नई राजनीतिक प्रवृत्ति की शुरुआत हुई? (2 अंक)
(ख) इस प्रवृत्ति के दो प्रभाव लिखिए। (2 अंक)
उत्तर 29 :
(क)
🔵 गठबंधन सरकारों की शुरुआत।
🟢 क्षेत्रीय दलों का उदय।
(ख)
🔵 केंद्र और राज्य के बीच संतुलन का नया दौर।
🟢 लोकतंत्र में विविधता और विकल्पों का विस्तार।

प्रश्न 30 :
निम्न अंश को पढ़िए और उत्तर दीजिए –
“1952 से 1967 के बीच कांग्रेस का प्रभुत्व भारत के राजनीतिक इतिहास में विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्थायित्व मिला।”
(क) कांग्रेस के प्रभुत्व के दो कारण बताइए। (2 अंक)
(ख) लोकतंत्र को इससे क्या लाभ हुआ? (2 अंक)
उत्तर 30 :
(क)
🔵 कांग्रेस का स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा होना।
🟢 मजबूत संगठनात्मक आधार।
(ख)
🔵 लोकतंत्र की संस्थाएँ मजबूत हुईं।
🟢 जनता को राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिला।

प्रश्न 31 :
निम्न अंश को पढ़िए और उत्तर दीजिए –
“कांग्रेस के भीतर विभिन्न धड़े और नेता थे जिनमें नीति और नेतृत्व को लेकर मतभेद होते रहते थे, लेकिन यह संगठन लोकतांत्रिक परंपरा के भीतर कार्य करता था।”
(क) कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र के दो उदाहरण दीजिए। (2 अंक)
(ख) इससे संगठन को क्या लाभ हुआ? (2 अंक)
उत्तर 31 :
(क)
🔵 विचार विमर्श और बहस के माध्यम से निर्णय लेना।
🟢 विभिन्न नेताओं और धड़ों को महत्व देना।
(ख)
🔵 संगठन में स्थायित्व और व्यापक स्वीकार्यता बनी रही।
🟢 आंतरिक मतभेदों के बावजूद पार्टी एकजुट रही।

SECTION – E (प्रश्न 32 से 35, प्रत्येक प्रश्न 5 अंक)

प्रश्न 32 :
कांग्रेस के प्रभुत्व के प्रमुख कारणों को विस्तार से समझाइए।
उत्तर 32 :
🔵 ऐतिहासिक भूमिका : स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस की भागीदारी ने इसे जनता में लोकप्रिय बनाया।
🟢 संगठनात्मक शक्ति : कांग्रेस का नेटवर्क गाँव-गाँव तक फैला था।
🔴 नेतृत्व : नेहरू जैसे करिश्माई और दूरदर्शी नेताओं का मार्गदर्शन।
⚡ लोकतांत्रिक अभ्यास : संगठन के भीतर बहस और मतभेद को स्थान।
💡 सर्वसमावेशी प्रवृत्ति : हर वर्ग और विचारधारा को समाहित करना।

प्रश्न 33 :
1952 से 1967 तक कांग्रेस के प्रभुत्व के दौरान विपक्ष की स्थिति और भूमिका पर प्रकाश डालिए।
उत्तर 33 :
🔵 विपक्ष कमजोर और विखंडित था।
🟢 संसाधनों और जनसमर्थन की कमी थी।
🔴 भारतीय जनसंघ, कम्युनिस्ट पार्टी, प्रजा समाजवादी पार्टी, स्वतंत्र पार्टी जैसी विपक्षी ताकतें धीरे-धीरे उभर रही थीं।
⚡ विपक्ष ने लोकतंत्र को विकल्प देने का प्रयास किया।
💡 1967 के बाद विपक्ष ने कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी।

प्रश्न 34 :
1967 के चुनावों के बाद भारतीय राजनीति में आए परिवर्तनों को विस्तार से समझाइए।
उत्तर 34 :
🔵 कांग्रेस कई राज्यों में सत्ता से बाहर हुई।
🟢 गैर-कांग्रेस गठबंधन सरकारों का उदय।
🔴 क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ा।
⚡ लोकतंत्र में विविधता और प्रतिस्पर्धा का विस्तार।
💡 जनता के मुद्दों पर आधारित राजनीति को बल मिला।

प्रश्न 35 :
कांग्रेस के प्रभुत्व के बावजूद भारत में लोकतंत्र कैसे मजबूत हुआ? विस्तार से लिखिए।
उत्तर 35 :
🔵 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होते रहे।
🟢 संसद, न्यायपालिका, मीडिया जैसी संस्थाएँ स्वतंत्र रहीं।
🔴 कांग्रेस के भीतर भी लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन।
⚡ विपक्षी दलों का अस्तित्व और धीरे-धीरे उनकी मजबूती।
💡 जनता को मतदान और राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिला।

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प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न



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