Class 10 : Science (In Hindi) – Lesson 6. नियंत्रण एवं समन्वय
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔵 प्रस्तावना
➡️ जीवधारियों को परिवर्तित वातावरण में बने रहने के लिए उद्दीपनों का सही अर्थ निकालकर त्वरित व उपयुक्त प्रतिक्रिया देनी होती है।
➡️ नियंत्रण एवं समन्वय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर की विविध क्रियाएँ सुव्यवस्थित ढंग से साथ–साथ संचालित रहती हैं।
➡️ पादपों में यह मुख्यतः रासायनिक नियमन (विकास–नियामक) से, जबकि जन्तुओं में तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र मिलकर करते हैं।
🟠 पादपों में नियंत्रण एवं समन्वय
🟡 पादप विकास–नियामक (हार्मोन)
💡 ये सूक्ष्म रसायन कोशिका विभाजन, वृद्धि, परिपक्वता और प्रतिक्रियाएँ नियंत्रित करते हैं।
🔵 ऑक्सिन – तने का प्रकाश की ओर झुकना, जड़ों का नीचे की ओर बढ़ना; पार्श्व कलिकाओं का दमन।
🟢 जिबरेलिन – तने की लंबाई बढ़ना, बीज अंकुरण में सहायता।
🟡 साइटोकाइनिन – कोशिका विभाजन को बढ़ावा, पत्तियों का हरा बने रहना।
🔴 एब्सिसिक अम्ल – वृद्धि अवरोध, बीज सुप्तावस्था, विपरीत परिस्थितियों में संरक्षण।
🟣 एथिलीन – फल पकना, कुछ ऊतकों में परिपक्वता लाना।
🟣 पादपों की अनुवर्ती गतियाँ
💡 अनुवर्ती गति = उद्दीपन की दिशा पर निर्भर झुकाव/वृद्धि।
🔵 प्रकाशानुवर्तन – तना प्रकाश की ओर झुकता; पत्ती का अभिमुखीकरण प्रकाश–ग्रहण बढ़ाता है।
🟢 गुरुत्वानुवर्तन – जड़ का नीचे की ओर बढ़ना (धनात्मक), तने का ऊपर की ओर बढ़ना (ऋणात्मक)।
🟡 स्पर्शानुवर्तन – लताओं में कुंडलन; सहारे के स्पर्श की दिशा में कुंडली बनना।
✏️ नोट: इन गतियों का आधार असम वृद्धि या कक्षीय तुगोर परिवर्तन होता है, जिससे अंग एक दिशा में मुड़ते/झुकते हैं।
🟢 जन्तुओं में नियंत्रण एवं समन्वय
🟡 तंत्रिका तंत्र की रचना और संकेत–संचरण
🔵 न्यूरॉन (स्नायु कोशिका) मूल इकाई है — इसके तीन भाग: कोशिका–काय, डेंड्राइट, अक्षतंतु।
🟢 संकेत–मार्ग: उद्दीपन → संवेदी न्यूरॉन → स्नायु संधि पर रासायनिक दूत → मध्यस्थ न्यूरॉन/मेरुरज्जु/मस्तिष्क → मोटर न्यूरॉन → कार्यकारी अंग।
🟡 विद्युत–रासायनिक संकेत क्षणों में पूरे शरीर में समन्वय स्थापित करते हैं।
🟣 मस्तिष्क और मेरुरज्जु — कार्य विभाजन
🔵 अग्र मस्तिष्क – विचार, स्मृति, निर्णय, स्वेच्छिक गतियाँ, संवेदन–समाकलन।
🟢 मध्य मस्तिष्क – दृष्टि व श्रवण से जुड़े त्वरित समन्वय।
🟡 पश्च मस्तिष्क –
✔️ सेरिबेलम: संतुलन व सूक्ष्म–गतियों का नियंत्रण।
✔️ मेडुला: श्वसन, हृदय–गति, रक्तचाप जैसी अनैच्छिक जीवन–क्रियाएँ।
🔴 मेरुरज्जु – त्वरित प्रतिवर्ती प्रतिक्रियाएँ संचालित करता है और ऊपर–नीचे संदेश–मार्ग उपलब्ध कराता है।
🟠 प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया (रिफ्लेक्स)
🔵 परिभाषा: तीव्र उद्दीपन पर स्वतः, त्वरित प्रतिक्रिया जो सामान्यतः मेरुरज्जु द्वारा संचालित होती है।
🟢 मार्ग: उद्दीपन → संवेदी तंतु → मेरुरज्जु → मोटर तंतु → पेशी/ग्रंथि।
🟡 उदाहरण: गर्म वस्तु छूते ही हथेली खींच लेना; धूल से आँख में जलन पर आँख का झपकना।
✔️ लाभ: समय की बचत, शरीर की सुरक्षा, उर्जा–व्यय में दक्षता।
🟣 अंतःस्रावी तंत्र (हार्मोनल नियंत्रण)
💡 हार्मोन रक्त द्वारा दूरस्थ अंगों तक पहुँचकर क्रियाओं का दीर्घकालिक, व्यापक नियमन करते हैं।
🔵 पिट्यूटरी ग्रंथि – “मास्टर ग्रंथि”, अन्य ग्रंथियों की क्रियाशीलता का नियंत्रण, वृद्धि नियमन।
🟢 थायरॉयड – थायरॉक्सिन स्रवित; चयापचय–दर नियंत्रित; आयोडीन आवश्यक।
🟡 अग्न्याशय – रक्त–शर्करा का संतुलन बनाए रखता है (अधिशर्करा/अल्पशर्करा से बचाव)।
🔴 अधिवृक्क – आपात–स्थिति में शरीर को तैयार करना, जल–लवण संतुलन।
🟣 लैंगिक ग्रंथियाँ – द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास, प्रजनन से संबंधित क्रियाओं का नियंत्रण।
🟠 पैराथायरॉयड – कैल्शियम–फॉस्फोरस संतुलन।
💡 तंत्रिका–हार्मोन समेकित समन्वय
🔵 तंत्रिका तंत्र त्वरित और अल्पकालिक उत्तर देता है (क्षणों में)।
🟢 हार्मोनल तंत्र धीमा पर दीर्घकालिक प्रभाव देता है (घंटों–दिनों तक)।
🟡 दोनों का समेकन आंतरिक संतुलन और पर्यावरण–अनुकूलन को सुनिश्चित करता है।
🌿 समन्वय का जैविक महत्त्व
🔵 आपात परिस्थितियों में त्वरित रक्षा (प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया)।
🟢 अंग–प्रणालियों का तालमेल: श्वसन–परिवहन–उत्सर्जन–पोषण।
🟡 संसाधनों का कुशल उपयोग: ऊर्जा–व्यय का अनुकूलन।
🔴 वृद्धि, विकास, प्रजनन और व्यवहार का सुव्यवस्थित संचालन।
🟣 परिवर्तित वातावरण में स्थिर आंतरिक दशाएँ बनाए रखना।
🟢 संक्षेप (~200 शब्द)
नियंत्रण एवं समन्वय वह प्रक्रिया है जिससे जीव बाह्य–आंतरिक उद्दीपनों के अनुकूल शीघ्र व उचित प्रतिक्रिया कर पाता है और उसकी अंग–प्रणालियाँ साथ–साथ सही तालमेल में चलती हैं।
पादपों में विकास–नियामक (ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल, एथिलीन) वृद्धि व प्रतिक्रियाएँ नियंत्रित करते हैं; अनुवर्ती गतियाँ जैसे प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन, स्पर्शानुवर्तन उद्दीपन की दिशा के अनुसार अंगों का झुकना/मुड़ना कराती हैं।
जन्तुओं में तंत्रिका तंत्र का न्यूरॉन–जाल उद्देश्यपूर्ण व तेज संकेत–संचरण करता है; अग्र/मध्य/पश्च मस्तिष्क का कार्य–विभाजन और मेरुरज्जु की प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया शरीर की सुरक्षा एवं दक्षता बढ़ाती है।
अंतःस्रावी तंत्र हार्मोनों के माध्यम से दीर्घकालिक, व्यापक नियमन करता है — चयापचय, जल–लवण संतुलन, तनाव–उत्तर, वृद्धि, प्रजनन आदि।
तंत्रिका और हार्मोन दोनों के समेकित समन्वय से जीव बदलते वातावरण में भी आंतरिक संतुलन बनाए रखकर प्रभावी ढंग से कार्य करता है।
📝 त्वरित दोहरान
🔵 पादप विकास–नियामक: ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल, एथिलीन
🟢 पादप अनुवर्ती गतियाँ: प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन, स्पर्शानुवर्तन
🟡 तंत्रिका तंत्र: न्यूरॉन, स्नायु संधि, अग्र–मध्य–पश्च मस्तिष्क
🔴 प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया: मेरुरज्जु–आधारित त्वरित सुरक्षा–क्रिया
🟣 अंतःस्रावी तंत्र: चयापचय, तनाव–उत्तर, प्रजनन का दीर्घकालिक नियमन
🟠 समेकन: तंत्रिका = त्वरित; हार्मोन = दीर्घकालिक — दोनों मिलकर समन्वय सुनिश्चित करते हैं
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन–सा पादप हार्मोन है?
(a) इन्सुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकाइनिन
उत्तर 1.
🔵 सही उत्तर: (d) साइटोकाइनिन
🟢 कारण: साइटोकाइनिन पादप विकास–नियामक हार्मोन है, जो कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित करता है।
प्रश्न 2. दो तंत्रिका कोशिकाओं के मध्य खाली स्थान को कहते हैं—
(a) डेंड्राइट
(b) सिनैप्स
(c) एक्सॉन
(d) अक्षतंतु
उत्तर 2.
🔵 सही उत्तर: (b) सिनैप्स
🟢 कारण: सिनैप्स वह स्थान है जहाँ एक न्यूरॉन का अक्षतंतु दूसरे न्यूरॉन के डेंड्राइट से जुड़कर रासायनिक दूतों द्वारा संदेश पहुँचाता है।
प्रश्न 3. मस्तिष्क उत्तरदायी है—
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर 3.
🔵 सही उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी
🟢 कारण: मस्तिष्क का अग्र भाग सोचने, स्मृति और निर्णय के लिए, सेरिबेलम संतुलन के लिए तथा मेडुला हृदय स्पंदन और श्वसन जैसी क्रियाओं के लिए उत्तरदायी है।
प्रश्न 4. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसे किसी एक ग्राही पर विचार कीजिए, जहाँ ग्राही जीवित प्रकाश से कार्य नहीं कर सके तो क्या समस्या उत्पन्न हो सकती है?
उत्तर 4.
🔵 ग्राही (receptor) उद्दीपन ग्रहण करने का कार्य करते हैं।
🟢 उदाहरण: नेत्र प्रकाश–ग्राही हैं।
🟡 यदि नेत्र कार्य न करें तो मनुष्य प्रकाश उद्दीपन ग्रहण नहीं कर पाएगा और दृष्टिहीनता की समस्या हो जाएगी।
प्रश्न 5. पादप हार्मोन ऑक्सिन (Auxin) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर 5.

🔵 ऑक्सिन पादप का विकास–नियामक हार्मोन है।
🟢 कार्य:
✔️ तने का प्रकाश की ओर झुकना (प्रकाशानुवर्तन)।
✔️ जड़ का गुरुत्व की ओर झुकना (गुरुत्वानुवर्तन)।
✔️ पार्श्व कलिकाओं का दमन।
✔️ जड़ व तने की वृद्धि को नियंत्रित करना।
प्रश्न 6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?
उत्तर 6.
🔵 तने का प्रकाश की ओर झुकना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है।
🟢 कारण: प्रकाश की दिशा से विपरीत छोर पर ऑक्सिन अधिक एकत्रित होता है जिससे उस ओर वृद्धि अधिक होती है और तना प्रकाश की ओर झुकता है।
प्रश्न 7. मनुष्यों में एड्रेनालिन हार्मोन का स्रवण कब और क्यों बढ़ जाता है?
उत्तर 7.
🔵 एड्रेनालिन अधिवृक्क ग्रंथि से स्रवित होता है।
🟢 यह आपातकालीन हार्मोन है।
🟡 तनाव, भय, क्रोध, संकट की स्थिति में इसका स्रवण बढ़ जाता है।
🔴 प्रभाव: हृदयगति तेज, रक्तचाप बढ़ना, श्वसन तीव्र होना।
प्रश्न 8. मेरुरज्जु की प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया क्या होती है?
उत्तर 8.
🔵 प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया = आकस्मिक उद्दीपन पर मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित त्वरित क्रिया।
🟢 उदाहरण: गर्म वस्तु छूने पर हाथ तुरंत हटाना।
🟡 लाभ: समय की बचत, शरीर की सुरक्षा।
प्रश्न 9. एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय के तंत्र की क्या आवश्यकता है?
उत्तर 9.
🔵 विभिन्न अंग–प्रणालियों की क्रियाओं में तालमेल।
🟢 पर्यावरणीय परिवर्तन के अनुरूप शरीर को ढालना।
🟡 वृद्धि, विकास, प्रजनन, व्यवहार का नियमन।
प्रश्न 10. प्रतिवर्ती क्रियाओं एवं ऐच्छिक क्रियाओं एक–दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर 10.
🔵 प्रतिवर्ती क्रिया: आकस्मिक उद्दीपन पर स्वतः घटित होती है, मेरुरज्जु नियंत्रित करता है।
🟢 ऐच्छिक क्रिया: सोच–विचार के बाद मस्तिष्क नियंत्रित करता है, जैसे पढ़ना–लिखना।
प्रश्न 11. अंगों में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हार्मोन तंत्र की तुलना तथा भिन्नता (contrast) कीजिए।
उत्तर 11.
🔵 तंत्रिका तंत्र – त्वरित, विद्युत–रासायनिक संकेत, अल्पकालिक प्रभाव।
🟢 हार्मोन तंत्र – धीमा, रासायनिक संदेशवाहक, दीर्घकालिक प्रभाव।
🟡 दोनों मिलकर शरीर की सभी क्रियाओं में संतुलन व समन्वय सुनिश्चित करते हैं।
प्रश्न 12. दुर्गंधयुक्त गंध तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीकों में क्या अंतर है?
उत्तर 12.
🔵 दुर्गंधयुक्त गंध = प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया (संवेदी ग्राही → मेरुरज्जु → त्वरित क्रिया)।
🟢 टाँग की गति = ऐच्छिक क्रिया (मस्तिष्क के आदेश से नियंत्रित)।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
🔵 खंड A (Q1–Q20, 1 अंक प्रत्येक)
Q1. पादपों में कोशिका विभाजन को बढ़ावा देने वाला हार्मोन है—
जिबरेलिन
साइटोकाइनिन
एब्सिसिक अम्ल
एथिलीन
उत्तर: 2
Q2. मानव शरीर का संतुलन कौन नियंत्रित करता है?
सेरिबेलम
मेडुला
थायरॉक्सिन
सेरिब्रम
उत्तर: 1
Q3. नेत्र किस प्रकार के ग्राही हैं?
यांत्रिक ग्राही
प्रकाश ग्राही
रासायनिक ग्राही
ऊष्मा ग्राही
उत्तर: 2
Q4. मस्तिष्क का कौन–सा भाग हृदय गति व श्वसन को नियंत्रित करता है?
सेरिब्रम
मेडुला
थायरॉइड
पिट्यूटरी
उत्तर: 2
Q5. एड्रेनालिन हार्मोन किस ग्रंथि से स्रवित होता है?
थायरॉइड
अधिवृक्क
पिट्यूटरी
अग्न्याशय
उत्तर: 2
Q6. न्यूरॉन का वह भाग जो संदेश को अगले न्यूरॉन तक पहुँचाता है—
डेंड्राइट
अक्षतंतु
कोशिकाद्रव्य
केन्द्रक
उत्तर: 2
Q7. पादपों में फल पकने वाला हार्मोन है—
जिबरेलिन
साइटोकाइनिन
एब्सिसिक अम्ल
एथिलीन
उत्तर: 4
Q8. मनुष्यों में ऐच्छिक क्रियाओं को कौन नियंत्रित करता है?
सेरिब्रम
मेडुला
मेरुरज्जु
सेरिबेलम
उत्तर: 1
Q9. थायरॉक्सिन हार्मोन का निर्माण किसके लिए आयोडीन आवश्यक है?
अग्न्याशय
अधिवृक्क
थायरॉइड
पिट्यूटरी
उत्तर: 3′
Q10. ऑक्सिन हार्मोन का एक कार्य है—
फल पकाना
जड़ों का गुरुत्व की ओर झुकना
बीज अंकुरण
पत्तियों का झड़ना
उत्तर: 2
🟡 कथन–कारण (Q11–Q20)
👉 विकल्प:
दोनों कथन और कारण सही हैं; कारण कथन की सही व्याख्या है
दोनों कथन और कारण सही हैं; कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है
कथन सही है; कारण गलत है
कथन गलत है; कारण सही है
Q11.
कथन: साइटोकाइनिन पादप कोशिकाओं में विभाजन को प्रेरित करता है।
कारण: साइटोकाइनिन पत्तियों को हरा बनाए रखने में भी सहायक है।
उत्तर: 1
Q12.
कथन: सेरिबेलम शरीर का संतुलन बनाए रखता है।
कारण: यह ऐच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
उत्तर: 2
Q13.
कथन: मेरुरज्जु प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया का संचालन करता है।
कारण: प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया सोच–विचार पर आधारित होती है।
उत्तर: 3
Q14.
कथन: एब्सिसिक अम्ल पत्तियों के झड़ने में सहायक है।
कारण: यह वृद्धि अवरोधक हार्मोन है।
उत्तर: 1
Q15.
कथन: एड्रेनालिन हार्मोन आपातकालीन हार्मोन है।
कारण: यह भय, क्रोध या तनाव की स्थिति में रक्त–संचार व हृदयगति को तीव्र करता है।
उत्तर: 1
Q16.
कथन: थायरॉक्सिन हार्मोन अग्न्याशय से स्रवित होता है।
कारण: यह रक्त शर्करा को संतुलित करता है।
उत्तर: 4
Q17.
कथन: न्यूरॉन की संरचना में कोशिका–काय, डेंड्राइट और अक्षतंतु होते हैं।
कारण: अक्षतंतु संकेतों को अगले न्यूरॉन तक पहुँचाता है।
उत्तर: 1
Q18.
कथन: जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाने में सहायक है।
कारण: जिबरेलिन बीज अंकुरण में भी सहायक होता है।
उत्तर: 1
Q19.
कथन: प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया का संचालन मस्तिष्क द्वारा होता है।
कारण: यह आकस्मिक उद्दीपन पर स्वतःस्फूर्त होती है।
उत्तर: 3
Q20.
कथन: पिट्यूटरी ग्रंथि “मास्टर ग्रंथि” कहलाती है।
कारण: यह अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों की क्रियाओं को नियंत्रित करती है।
उत्तर: 1
🟢 खंड B (Q21–Q26, 2 अंक प्रत्येक)
Q21. ग्राही (receptors) क्या हैं? उदाहरण सहित लिखो।
उत्तर 21.
🔵 उद्दीपन ग्रहण करने वाली संरचनाएँ।
🟢 उदाहरण: नेत्र = प्रकाश ग्राही, कान = ध्वनि ग्राही, त्वचा = स्पर्श व ऊष्मा ग्राही।
Q22. ऐच्छिक व अनैच्छिक क्रियाओं में अंतर बताओ।
उत्तर 22.
🔵 ऐच्छिक क्रियाएँ सोच–विचार पर आधारित, मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित।
🟢 अनैच्छिक क्रियाएँ स्वतःस्फूर्त, मेडुला/मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित।
Q23. जिबरेलिन हार्मोन के दो कार्य लिखो।
उत्तर 23.
🔵 तने की लंबाई बढ़ाना।
🟢 बीज अंकुरण कराना।
Q24. प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया क्यों आवश्यक है?
उत्तर 24.
🔵 यह त्वरित प्रतिक्रिया देती है।
🟢 आकस्मिक परिस्थितियों में शरीर को सुरक्षा प्रदान करती है।
Q25. पिट्यूटरी ग्रंथि को “मास्टर ग्रंथि” क्यों कहते हैं?
उत्तर 25.
🔵 यह अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों की क्रियाओं को नियंत्रित करती है।
Q26. थायरॉक्सिन हार्मोन का कार्य बताओ।
उत्तर 26.
🔵 चयापचय को नियंत्रित करना।
🟢 वृद्धि व विकास में सहायक।
🟡 खंड C (Q27–Q33, 3 अंक प्रत्येक)
Q27. न्यूरॉन की संरचना और कार्य समझाओ।
उत्तर 27.
🔵 संरचना – कोशिका–काय, डेंड्राइट, अक्षतंतु।
🟢 कार्य – उद्दीपन को ग्रहण करना, संदेश का संचार।
Q28. मेरुरज्जु की प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया का मार्ग लिखो।
उत्तर 28.
🔵 उद्दीपन → संवेदी न्यूरॉन → मेरुरज्जु → मोटर न्यूरॉन → अंग।
Q29. साइटोकाइनिन हार्मोन की भूमिका समझाओ।
उत्तर 29.
🔵 कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित करना।
🟢 पत्तियों को हरा बनाए रखना।
Q30. एड्रेनालिन हार्मोन का प्रभाव लिखो।
उत्तर 30.
🔵 हृदय गति तेज होना।
🟢 रक्तचाप बढ़ना।
🟡 श्वसन तीव्र होना।
Q31. पादपों की अनुवर्ती गतियों के दो उदाहरण दो।
उत्तर 31.
🔵 प्रकाशानुवर्तन – तना प्रकाश की ओर झुकना।
🟢 गुरुत्वानुवर्तन – जड़ नीचे की ओर बढ़ना।
Q32. सेरिबेलम और सेरिब्रम के कार्यों में अंतर लिखो।
उत्तर 32.
🔵 सेरिबेलम – संतुलन और सूक्ष्म गतियों का नियंत्रण।
🟢 सेरिब्रम – सोच, स्मृति, ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण।
Q33. पादपों में एब्सिसिक अम्ल का कार्य बताओ।
उत्तर 33.
🔵 वृद्धि अवरोधक हार्मोन।
🟢 पत्तियों का झड़ना।
🟡 बीज सुप्तावस्था बनाए रखना।
🔴 खंड D (Q34–Q36, 5 अंक प्रत्येक)
Q34. मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्य समझाओ।
उत्तर 34.
🔵 अग्र मस्तिष्क – सोच, स्मृति, निर्णय।
🟢 मध्य मस्तिष्क – दृष्टि व श्रवण का समन्वय।
🟡 पश्च मस्तिष्क – सेरिबेलम (संतुलन), मेडुला (जीवन क्रियाएँ)।
Q35. तंत्रिका तंत्र और हार्मोन तंत्र की तुलना करो।
उत्तर 35.
🔵 तंत्रिका तंत्र – त्वरित संदेश, अल्पकालिक प्रभाव।
🟢 हार्मोन तंत्र – धीमा, दीर्घकालिक प्रभाव।
🟡 दोनों मिलकर अंग–प्रणालियों का सामंजस्य बनाए रखते हैं।
Q36. पादप विकास–नियामकों का वर्णन करो।
उत्तर 36.
🔵 ऑक्सिन – प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन।
🟢 जिबरेलिन – तना लंबा करना, अंकुरण।
🟡 साइटोकाइनिन – कोशिका विभाजन, पत्तियों का हरा रहना।
🔴 एब्सिसिक अम्ल – वृद्धि अवरोध, पत्तियाँ झड़ना।
🟣 एथिलीन – फल पकाना।
🟣 खंड E (Q37–Q39, 4 अंक प्रत्येक)
Q37.
एक छात्र ने गर्म बर्तन छू लिया और तुरंत हाथ खींच लिया।
(i) यह किस प्रकार की प्रतिक्रिया है?
(ii) इसका नियंत्रण कहाँ होता है?
(iii) यह शरीर के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर 37.
🔵 यह प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया है।
🟢 नियंत्रण मेरुरज्जु द्वारा।
🟡 आवश्यकता – आकस्मिक परिस्थितियों में शरीर की सुरक्षा।
Q38.
एक रोगी में आयोडीन की कमी पाई गई।
(i) इससे कौन–सा हार्मोन प्रभावित होगा?
(ii) इसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(iii) इस स्थिति से बचाव का एक उपाय लिखो।
उत्तर 38.
🔵 हार्मोन – थायरॉक्सिन।
🟢 प्रभाव – गलगंड रोग, चयापचय में गड़बड़ी।
🟡 उपाय – आयोडीन युक्त नमक का सेवन।
Q39.
एक किसान ने देखा कि उसकी लताओं के तने सहारे की ओर मुड़कर कुंडली बना रहे हैं।
(i) यह किस प्रकार की गति है?
(ii) इसमें कौन–सा हार्मोन प्रमुख है?
(iii) इसका पौधे को क्या लाभ है?
उत्तर 39.
🔵 यह स्पर्शानुवर्तन है।
🟢 प्रमुख हार्मोन – ऑक्सिन।
🟡 लाभ – पौधा सहारे से ऊपर चढ़कर सूर्यप्रकाश प्राप्त करता है।
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