Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 11: विकिरण तथा द्रव्य की द्वैध प्रकृति
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
✳️ विस्तृत व्याख्या (≈1700 शब्द)
🔶 प्रस्तावना : प्रकाश और द्रव्य का रहस्य
प्राचीन वैज्ञानिक सदैव यह जानने का प्रयास करते रहे कि प्रकाश की वास्तविक प्रकृति क्या है।
कभी इसे तरंग कहा गया क्योंकि यह व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण जैसी तरंग-संबंधी घटनाएँ दिखाता था।
बाद में, कुछ प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ कि प्रकाश ऊर्जा को कणों के रूप में (फोटॉन) संचारित करता है।
इससे यह निष्कर्ष निकला कि प्रकाश में तरंग और कण — दोनों के गुण उपस्थित हैं।
इसी प्रकार, पदार्थ (Matter) भी तरंगीय व्यवहार दिखा सकता है।
यही विचार विकिरण और द्रव्य का द्वैध स्वभाव (Dual Nature of Radiation and Matter) कहलाता है।
🔷 1️⃣ प्रकाश का तरंग स्वभाव
थॉमस यंग के व्यतिकरण प्रयोग (Young’s Double Slit Experiment) से यह सिद्ध हुआ कि प्रकाश तरंग है।
जब एकल स्रोत से प्रकाश दो संकीर्ण छिद्रों से होकर गुजरता है, तो पर्दे पर व्यतिकरण धारियाँ बनती हैं।
यह तभी संभव है जब दो तरंगें एक-दूसरे के साथ जुड़कर रचनात्मक और विध्वंसात्मक हस्तक्षेप उत्पन्न करें।
इस प्रकार, प्रकाश का तरंगीय स्वभाव प्रमाणित हुआ।
🔷 2️⃣ प्रकाश का कण स्वभाव
मैक्स प्लैंक ने बताया कि ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण लगातार नहीं होता, बल्कि छोटे-छोटे क्वांटा (Quanta) या फोटॉन नामक ऊर्जा-पैकेटों के रूप में होता है।
प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा होती है
E = hν
जहाँ h = प्लैंक स्थिरांक = 6.626×10⁻³⁴ J·s
और ν = प्रकाश की आवृत्ति।
फोटॉन की ऊर्जा आवृत्ति पर निर्भर करती है।
आवृत्ति जितनी अधिक होगी, फोटॉन की ऊर्जा उतनी ही अधिक होगी।
यह सिद्धांत बाद में आइंस्टाइन द्वारा प्रकाश-विद्युत प्रभाव की व्याख्या में प्रयोग हुआ।
🔷 3️⃣ प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect)
इस प्रभाव की खोज हर्ट्ज़ ने 1887 में की, और इसका सैद्धांतिक स्पष्टीकरण आइंस्टाइन ने 1905 में दिया।
जब किसी धातु सतह पर उचित आवृत्ति का प्रकाश गिराया जाता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
इन्हें कहा जाता है प्रकाश-विद्युत इलेक्ट्रॉन (Photoelectrons)।
मुख्य अवलोकन:
इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन तभी होता है जब प्रकाश की आवृत्ति न्यूनतम आवृत्ति (ν₀) से अधिक हो।
उत्सर्जन का समय-अंतराल शून्य होता है।
इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है, न कि तीव्रता पर।
उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर करती है।
आइंस्टाइन का समीकरण:
जब एक फोटॉन धातु सतह पर गिरता है, तो उसकी ऊर्जा दो भागों में विभाजित होती है —
एक भाग इलेक्ट्रॉन को सतह से मुक्त करने में (कार्यफलन ϕ)
और दूसरा भाग इलेक्ट्रॉन को गतिज ऊर्जा (K_max) देने में।
hν = ϕ + K_max
या
K_max = hν − ϕ
जहाँ ϕ = hν₀ (कार्यफलन)
जब ν = ν₀ ⇒ K_max = 0
🔷 4️⃣ कार्य फलन (Work Function, ϕ)
किसी धातु सतह से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को कार्य फलन कहते हैं।
इसे प्रायः इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) में मापा जाता है।
1 eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ जूल
उदाहरण:
सोडियम – 2.3 eV
पोटैशियम – 2.25 eV
ताँबा – 4.7 eV
🔷 5️⃣ रोकने वाला विभव (Stopping Potential, V₀)
जब उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को रोकने के लिए ऋणात्मक विभव लगाया जाता है, तो एक विशेष विभव V₀ पर धारा रुक जाती है।
उस स्थिति में
eV₀ = K_max = hν − ϕ
इससे प्रयोगात्मक रूप से प्लैंक स्थिरांक (h) का मान ज्ञात किया जा सकता है।
🔷 6️⃣ फोटॉन की विशेषताएँ
प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा E = hν होती है।
फोटॉन का संवेग p = h/λ होता है।
फोटॉन का विश्राम द्रव्यमान शून्य होता है (m₀ = 0)।
फोटॉन प्रकाश की गति (c) से चलता है।
फोटॉन का संवेग दिशा में होता है और वह टकराव में संवेग का आदान-प्रदान कर सकता है।
🔷 7️⃣ पदार्थ का तरंग स्वभाव (de Broglie Hypothesis)
लुई द ब्रॉगली ने 1924 में बताया कि जैसे प्रकाश में कणीय स्वभाव है, वैसे ही द्रव्य में तरंगीय स्वभाव हो सकता है।
उसके अनुसार
λ = h/p = h/mv
यहाँ h = प्लैंक स्थिरांक, m = द्रव्यमान, v = वेग।
यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान अधिक है, तो उसकी तरंगदैर्ध्य बहुत छोटी होगी, जिससे उसका तरंगीय व्यवहार अप्रकट रहेगा।
परंतु सूक्ष्म कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन) के लिए यह तरंगदैर्ध्य मापन योग्य होती है।
🔷 8️⃣ इलेक्ट्रॉन विवर्तन (Electron Diffraction)
1927 में डेविसन और गेरमर ने निकेल क्रिस्टल पर इलेक्ट्रॉनों को टकराकर विवर्तन पैटर्न प्राप्त किया।
यह प्रमाण था कि इलेक्ट्रॉन में भी तरंगीय स्वभाव मौजूद है।
इससे द ब्रॉगली की परिकल्पना सिद्ध हुई।
अर्थात्, द्रव्य भी तरंग की तरह व्यवहार कर सकता है।
🔷 9️⃣ द्रव्य तरंग का महत्व
बोहर के परमाणु मॉडल में इलेक्ट्रॉन केवल उन कक्षाओं में रह सकते हैं जहाँ उसकी परिधि तरंगदैर्ध्य का पूर्णांक गुना हो।
2πr = nλ = nh/mv
यही क्वांटम स्थिरता की शर्त है, जो परमाणु की संरचना को समझाती है।
🔷 10️⃣ ऊर्जा और संवेग का संबंध
फोटॉन जैसे द्रव्यमान रहित कण के लिए
E = pc = hν = hc/λ
और द्रव्यमान वाले कण के लिए
E² = p²c² + m₀²c⁴
इससे ऊर्जा, संवेग और द्रव्यमान के बीच संबंध स्थापित होता है।
🔷 11️⃣ तरंग-कण द्वैत का सार
प्रकाश में तरंग और कण दोनों स्वभाव होते हैं —
प्रकाश के तरंगीय गुण: व्यतिकरण, विवर्तन, ध्रुवण।
प्रकाश के कणीय गुण: प्रकाश-विद्युत प्रभाव, संवेग हस्तांतरण।
इसी प्रकार, द्रव्य में भी तरंगीय (इलेक्ट्रॉन विवर्तन) और कणीय (संवेग) स्वभाव देखे गए।
इससे स्पष्ट हुआ कि द्रव्य और विकिरण दोनों में तरंग-कण द्वैत मौजूद है।
✏️ विशेष टिप्पणी
यह अध्याय शास्त्रीय भौतिकी से आगे बढ़कर क्वांटम भौतिकी की नींव रखता है।
यह सूक्ष्म जगत के व्यवहार को समझने की दिशा में पहला कदम है, जहाँ पारंपरिक नियम असफल हो जाते हैं।
✳️ भाग 2 — सारांश (≈300 शब्द)
🔹 प्रकाश तरंग की तरह व्यतिकरण और विवर्तन दिखाता है तथा कण की तरह ऊर्जा संचारित करता है।
🔹 फोटॉन ऊर्जा का परिमाण E = hν होता है।
🔹 प्रकाश-विद्युत प्रभाव में, धातु सतह पर उचित आवृत्ति का प्रकाश गिराने से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
🔹 अधिकतम गतिज ऊर्जा K_max = hν − ϕ, तथा eV₀ = hν − ϕ।
🔹 कार्य फलन (ϕ) वह न्यूनतम ऊर्जा है जो किसी धातु से इलेक्ट्रॉन निकालने हेतु आवश्यक होती है।
🔹 द ब्रॉगली के अनुसार, गतिमान कण का तरंगदैर्ध्य λ = h/mv होता है।
🔹 डेविसन और गेरमर के प्रयोग से पदार्थ की तरंगीय प्रकृति सिद्ध हुई।
🔹 निष्कर्षतः, प्रकाश और द्रव्य दोनों में तरंग तथा कण दोनों स्वभाव मौजूद हैं, जो क्वांटम सिद्धांत की आधारशिला हैं।
✳️ भाग 3 — 🧠 Quick Recap (मुख्य बिंदु)
✔️ प्रकाश की ऊर्जा = hν
✔️ कार्य फलन = hν₀
✔️ अधिकतम गतिज ऊर्जा = hν − hν₀
✔️ फोटॉन संवेग = h/λ
✔️ द्रव्य तरंगदैर्ध्य = h/mv
✔️ इलेक्ट्रॉन विवर्तन = द्रव्य का तरंगीय स्वभाव सिद्ध
✔️ क्वांटम सिद्धांत = तरंग-कण द्वैत का परिणाम
🌟 निष्कर्ष:
यह अध्याय सिद्ध करता है कि प्रकाश और पदार्थ दोनों का स्वभाव द्वैध है — कभी कण जैसा और कभी तरंग जैसा।
यही विचार आधुनिक क्वांटम भौतिकी की नींव है और परमाणु, इलेक्ट्रॉनिकी, तथा विकिरणीय घटनाओं को समझने की कुंजी है।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
🔷 प्रश्न 11.1
30 kV इलेक्ट्रॉनों के द्वारा उत्पन्न X-किरणों की
(a) उच्चतम आवृत्ति तथा
(b) न्यूनतम तरंगदैर्ध्य प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
दिया गया:
V = 30 kV = 3 × 10⁴ V
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा = eV
= 1.6 × 10⁻¹⁹ × 3 × 10⁴
= 4.8 × 10⁻¹⁵ J
यह ऊर्जा X-किरण के एक फोटॉन की ऊर्जा के बराबर होगी:
E = hν = hc/λ
(a) उच्चतम आवृत्ति:
νₘₐₓ = eV / h
= (1.6 × 10⁻¹⁹ × 3 × 10⁴) / (6.63 × 10⁻³⁴)
= 7.24 × 10¹⁸ Hz
(b) न्यूनतम तरंगदैर्ध्य:
λₘᵢₙ = hc / eV
= (6.63 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸) / (1.6 × 10⁻¹⁹ × 3 × 10⁴)
= 4.1 × 10⁻¹¹ m
✔️ उत्तर:
νₘₐₓ = 7.24 × 10¹⁸ Hz, λₘᵢₙ = 4.1 × 10⁻¹¹ m
🔷 प्रश्न 11.2
सीज़ियम धातु का कार्य-फलन 2.14 eV है। जब 6 × 10¹⁴ Hz आवृत्ति का प्रकाश धातु पृष्ठ पर आपतित होता है, तो इलेक्ट्रॉनों का प्रकाशविद्युत उत्सर्जन होता है।
(a) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा,
(b) निरोधी विभव, और
(c) इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया:
h = 6.63 × 10⁻³⁴ J·s
ν = 6 × 10¹⁴ Hz
φ = 2.14 eV = 2.14 × 1.6 × 10⁻¹⁹ = 3.42 × 10⁻¹⁹ J
(a) Kₘₐₓ = hν – φ
= (6.63 × 10⁻³⁴ × 6 × 10¹⁴) – 3.42 × 10⁻¹⁹
= 3.98 × 10⁻¹⁹ – 3.42 × 10⁻¹⁹
= 0.56 × 10⁻¹⁹ J = 0.35 eV
(b) निरोधी विभव:
V₀ = Kₘₐₓ / e = 0.35 V
(c) उच्चतम चाल:
½ m v² = Kₘₐₓ
v = √(2Kₘₐₓ / m)
= √((2 × 0.56 × 10⁻¹⁹) / (9.1 × 10⁻³¹))
= 3.5 × 10⁵ m/s
✔️ उत्तर:
Kₘₐₓ = 0.35 eV, V₀ = 0.35 V, vₘₐₓ = 3.5 × 10⁵ m/s
🔷 प्रश्न 11.3
एक विशेष प्रयोग में प्रकाशविद्युत प्रभाव का अंतक विभव 1.5 V है। उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
Kₘₐₓ = eV₀ = 1.6 × 10⁻¹⁹ × 1.5 = 2.4 × 10⁻¹⁹ J = 1.5 eV
✔️ उत्तर: Kₘₐₓ = 2.4 × 10⁻¹⁹ J या 1.5 eV
🔷 प्रश्न 11.4
632.8 nm तरंगदैर्ध्य का प्रकाश एक हीलियम-नियॉन लेज़र से उत्सर्जित किया गया है जिसकी शक्ति 9.42 mW है।
(a) प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
(b) लेज़र द्वारा प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
(c) यदि लेज़र का उत्सर्जन वृत्ताकार छिद्र से हो जिसका व्यास 1 mm है, तो किरण का औसत तीव्रता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया:
λ = 632.8 nm = 632.8 × 10⁻⁹ m
P = 9.42 × 10⁻³ W
h = 6.63 × 10⁻³⁴ J·s
c = 3 × 10⁸ m/s
(a) प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा:
E = hc / λ
= (6.63 × 10⁻³⁴ × 3 × 10⁸) / (632.8 × 10⁻⁹)
= 3.14 × 10⁻¹⁹ J
(b) प्रति सेकंड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या:
n = P / E = (9.42 × 10⁻³) / (3.14 × 10⁻¹⁹)
= 3 × 10¹⁶ फोटॉन/सेकंड
(c) औसत तीव्रता:
छिद्र का क्षेत्रफल A = πr² = π(0.5 × 10⁻³)² = 7.85 × 10⁻⁷ m²
I = P / A = (9.42 × 10⁻³) / (7.85 × 10⁻⁷)
= 1.2 × 10⁴ W/m²
✔️ उत्तर:
E = 3.14 × 10⁻¹⁹ J, n = 3 × 10¹⁶ s⁻¹, I = 1.2 × 10⁴ W/m²
🔷 प्रश्न 11.5
प्रकाश-विद्युत प्रभाव के एक प्रयोग में, प्रकाश आवृत्ति के विरुद्ध अंतक-विभव का ढाल 4.12 × 10⁻¹⁵ V·s प्राप्त होता है। प्लांक स्थिरांक का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
🔵 सूत्र ➤ dV₀/dν = h/e ⇒ h = e × (dV₀/dν)
➡️ h = (1.6 × 10⁻¹⁹) × (4.12 × 10⁻¹⁵)
= 6.59 × 10⁻³⁴ J·s
✔️ अतः h = 6.6 × 10⁻³⁴ J·s
🔷 प्रश्न 11.6
किसी धातु की दहलीज आवृत्ति ν₀ = 3.3 × 10¹⁴ Hz है। यदि ν = 8.2 × 10¹⁴ Hz की किरण उस पर आपतित हो, तो अंतक-विभव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
🔵 सूत्र ➤ eV₀ = h(ν – ν₀)
➡️ eV₀ = (6.63 × 10⁻³⁴)(8.2 – 3.3) × 10¹⁴
= 3.25 × 10⁻¹⁹ J
V₀ = (3.25 × 10⁻¹⁹) / (1.6 × 10⁻¹⁹)
= 2.0 V
✔️ अंतक-विभव = 2.0 V
🔷 प्रश्न 11.7
किसी धातु का कार्य-फलन φ = 4.2 eV है। क्या 330 nm तरंगदैर्ध्य का प्रकाश प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन देगा?
उत्तर:
🔵 Eₚₕ = 1240 / λ = 1240 / 330 = 3.76 eV
➡️ चूँकि Eₚₕ < φ
इसलिए प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन नहीं होगा।
✔️ दहलीज तरंगदैर्ध्य λ₀ = 1240 / 4.2 = 295 nm
(क्योंकि 330 nm > 295 nm, अतः उत्सर्जन नहीं होगा)
🔷 प्रश्न 11.8
ν = 7.21 × 10¹⁴ Hz का प्रकाश धातु-पृष्ठ पर आपतित है। यदि उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की चाल v = 6.0 × 10⁵ m/s है, तो धातु की दहलीज आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
🔵 सूत्र ➤ hν = hν₀ + ½mv² ⇒ ν₀ = ν – (mv² / 2h)
➡️ ½mv² = ½(9.1 × 10⁻³¹)(6.0 × 10⁵)²
= 1.64 × 10⁻¹⁹ J
mv² / 2h = (1.64 × 10⁻¹⁹) / (6.63 × 10⁻³⁴)
= 2.47 × 10¹⁴ Hz
ν₀ = 7.21 × 10¹⁴ – 2.47 × 10¹⁴
= 4.74 × 10¹⁴ Hz
✔️ दहलीज आवृत्ति = 4.74 × 10¹⁴ Hz
🔷 प्रश्न 11.9
488 nm तरंगदैर्ध्य का प्रकाश (आर्गन लेज़र) किसी धातु पर डाला गया जिससे अंतक-विभव 0.38 V मापा गया। कार्य-फलन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
🔵 Eₚₕ = 1240 / λ = 1240 / 488 = 2.54 eV
φ = Eₚₕ – eV₀
= 2.54 – 0.38
= 2.16 eV
✔️ कार्य-फलन = 2.16 eV
🔷 प्रश्न 11.10
नीचे दिये गए वस्तुओं के लिए de Broglie तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए 👇
(a) m = 0.040 kg, v = 1.0 km/s
(b) m = 0.060 kg, v = 1.0 km/s
(c) m = 1.0 × 10⁻⁹ kg, v = 2.2 m/s
उत्तर:
🔵 सूत्र ➤ λ = h / mv
🟢 (a) p = 0.04 × 1000 = 40
λ = (6.63 × 10⁻³⁴) / 40 = 1.66 × 10⁻³⁵ m
🟡 (b) p = 0.06 × 1000 = 60
λ = (6.63 × 10⁻³⁴) / 60 = 1.10 × 10⁻³⁵ m
🔴 (c) p = (1.0 × 10⁻⁹)(2.2) = 2.2 × 10⁻⁹
λ = (6.63 × 10⁻³⁴) / (2.2 × 10⁻⁹) = 3.0 × 10⁻²⁵ m
✔️ निष्कर्ष ➤ स्थूल वस्तुओं के लिए λ अत्यंत सूक्ष्म व अप्रेक्षणीय होता है।
🔷 प्रश्न 11.11
सिद्ध कीजिए कि विद्युतचुंबकीय विकिरण का तरंगदैर्ध्य उसके क्वांटम (फोटॉन) के de Broglie तरंगदैर्ध्य के बराबर होता है।
उत्तर:
🔵 फोटॉन का संवेग ➤ p = E / c = hν / c = h / λ
इससे λ = h / p
✔️ अतः फोटॉन का de Broglie तरंगदैर्ध्य = EM तरंग का तरंगदैर्ध्य
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
🌟 SECTION – A (Q1–18 : बहुविकल्पीय प्रश्न)
🔵 Question 1.
प्रकाश-विद्युत प्रभाव की खोज किसने की थी?
🔵 (A) आइंस्टाइन
🟢 (B) हर्ट्ज़
🟠 (C) प्लैंक
🔴 (D) द ब्रॉगली
Answer: (B) हर्ट्ज़
🟢 Question 2.
फोटॉन की ऊर्जा का सूत्र है —
🔵 (A) E = mc²
🟢 (B) E = hν
🟠 (C) E = ½ mv²
🔴 (D) E = eV
Answer: (B) E = hν
🟠 Question 3.
किसी धातु सतह से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा कहलाती है —
🔵 (A) गतिज ऊर्जा
🟢 (B) विभव ऊर्जा
🟠 (C) कार्य फलन
🔴 (D) संवेग
Answer: (C) कार्य फलन
🔴 Question 4.
यदि किसी धातु का कार्य फलन ϕ है, तो न्यूनतम आवृत्ति ν₀ का संबंध है —
🔵 (A) ϕ = hν₀
🟢 (B) ϕ = h/ν₀
🟠 (C) ϕ = ν₀/h
🔴 (D) ϕ = 1/hν₀
Answer: (A) ϕ = hν₀
🔵 Question 5.
प्रकाश-विद्युत प्रभाव में इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन कब होता है?
🔵 (A) जब ν < ν₀
🟢 (B) जब ν = ν₀
🟠 (C) जब ν > ν₀
🔴 (D) हमेशा
Answer: (C) जब ν > ν₀
🟢 Question 6.
यदि प्रकाश की आवृत्ति बढ़ाई जाए तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की —
🔵 (A) संख्या घटेगी
🟢 (B) अधिकतम गतिज ऊर्जा बढ़ेगी
🟠 (C) अधिकतम गतिज ऊर्जा घटेगी
🔴 (D) कोई परिवर्तन नहीं होगा
Answer: (B) अधिकतम गतिज ऊर्जा बढ़ेगी
🟠 Question 7.
यदि प्रकाश की तीव्रता बढ़ाई जाए तो —
🔵 (A) इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा बढ़ेगी
🟢 (B) इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ेगी
🟠 (C) कोई परिवर्तन नहीं होगा
🔴 (D) धारा घटेगी
Answer: (B) इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ेगी
🔴 Question 8.
आइंस्टाइन के अनुसार, प्रकाश-विद्युत समीकरण है —
🔵 (A) hν = ϕ + K_max
🟢 (B) hν = ϕ − K_max
🟠 (C) hν = eV₀
🔴 (D) eV₀ = ϕ + K_max
Answer: (A) hν = ϕ + K_max
🔵 Question 9.
फोटॉन का संवेग होता है —
🔵 (A) hν
🟢 (B) h/λ
🟠 (C) λ/h
🔴 (D) Eλ
Answer: (B) h/λ
🟢 Question 10.
द्रव्य तरंग की अवधारणा किसने दी थी?
🔵 (A) आइंस्टाइन
🟢 (B) द ब्रॉगली
🟠 (C) प्लैंक
🔴 (D) बोहर
Answer: (B) द ब्रॉगली
🟠 Question 11.
द्रव्य तरंग की तरंगदैर्ध्य का सूत्र है —
🔵 (A) λ = h/mv
🟢 (B) λ = mv/h
🟠 (C) λ = 2h/mv
🔴 (D) λ = hv/m
Answer: (A) λ = h/mv
🔴 Question 12.
डेविसन और गेरमर ने किस कण के विवर्तन का अवलोकन किया?
🔵 (A) प्रोटॉन
🟢 (B) इलेक्ट्रॉन
🟠 (C) न्यूट्रॉन
🔴 (D) फोटॉन
Answer: (B) इलेक्ट्रॉन
🔵 Question 13.
इलेक्ट्रॉन विवर्तन से क्या सिद्ध हुआ?
🔵 (A) प्रकाश की तरंग प्रकृति
🟢 (B) द्रव्य की तरंग प्रकृति
🟠 (C) फोटॉन की ऊर्जा
🔴 (D) द्रव्य की कणीय प्रकृति
Answer: (B) द्रव्य की तरंग प्रकृति
🟢 Question 14.
फोटॉन का विश्राम द्रव्यमान क्या होता है?
🔵 (A) 9.1×10⁻³¹ kg
🟢 (B) 1.67×10⁻²⁷ kg
🟠 (C) शून्य
🔴 (D) 1 kg
Answer: (C) शून्य
🟠 Question 15.
किसी फोटॉन की ऊर्जा 3.2 eV है, उसकी आवृत्ति होगी —
🔵 (A) 7.7×10¹⁴ Hz
🟢 (B) 4.8×10¹⁴ Hz
🟠 (C) 6.3×10¹⁴ Hz
🔴 (D) 8.2×10¹⁴ Hz
Answer: (A) 7.7×10¹⁴ Hz
🔴 Question 16.
यदि फोटॉन की ऊर्जा बढ़े तो उसकी तरंगदैर्ध्य —
🔵 (A) बढ़ेगी
🟢 (B) घटेगी
🟠 (C) समान रहेगी
🔴 (D) पहले बढ़े फिर घटे
Answer: (B) घटेगी
🔵 Question 17.
फोटॉन का संवेग और ऊर्जा का संबंध है —
🔵 (A) E = pc
🟢 (B) E = p²c
🟠 (C) E = p/c
🔴 (D) E = p²/2m
Answer: (A) E = pc
🟢 Question 18.
निम्न में से किसका तरंगदैर्ध्य सबसे कम होता है?
🔵 (A) रेडियो तरंगें
🟢 (B) एक्स-किरणें
🟠 (C) पराबैंगनी किरणें
🔴 (D) गामा किरणें
Answer: (D) गामा किरणें
🌟 SECTION – B (Q19–Q23 : बहुत लघु / लघु उत्तर प्रश्न)
🔵 Question 19.
प्रकाश-विद्युत प्रभाव क्या है?
Answer:
जब किसी धातु सतह पर उचित आवृत्ति का प्रकाश डाला जाता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं।
इसे ही प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) कहा जाता है।
➡️ उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन को प्रकाश-विद्युत इलेक्ट्रॉन (Photoelectron) कहा जाता है।
🟢 Question 20.
कार्य फलन (Work Function) से क्या अभिप्राय है?
Answer:
किसी धातु सतह से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को कार्य फलन (ϕ) कहा जाता है।
➡️ इसे इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) में मापा जाता है।
✏️ उदाहरण:
सोडियम – 2.3 eV, पोटैशियम – 2.25 eV, ताँबा – 4.7 eV।
🟠 Question 21.
द्रव्य तरंग (Matter Wave) क्या है?
Answer:
💡 लुई द ब्रॉगली के अनुसार, गतिशील कण में भी तरंगीय गुण होते हैं।
उसकी तरंगदैर्ध्य होती है —
➡️ λ = h/p = h/mv
जहाँ h = प्लैंक स्थिरांक, m = द्रव्यमान, v = वेग।
इसे द्रव्य तरंग या द ब्रॉगली तरंगदैर्ध्य कहा जाता है।
🔴 Question 22.
इलेक्ट्रॉन विवर्तन से क्या सिद्ध हुआ?
Answer:
1927 में डेविसन और गेरमर ने निकेल क्रिस्टल पर इलेक्ट्रॉन टकराए और विवर्तन पैटर्न पाया।
✔️ इससे यह सिद्ध हुआ कि इलेक्ट्रॉन में भी तरंगीय स्वभाव होता है।
अर्थात् पदार्थ भी तरंग की तरह व्यवहार कर सकता है।
🔵 Question 23.
फोटॉन की ऊर्जा और संवेग के बीच क्या संबंध है?
Answer:
फोटॉन के लिए —
E = hν और p = h/λ
चूंकि c = νλ
➡️ E = pc या p = E/c
✔️ यह समीकरण फोटॉन की ऊर्जा और संवेग के बीच सीधा संबंध दर्शाता है।
⚡ SECTION – C (Q24–Q28 : मध्यम / संख्यात्मक प्रश्न)
🟢 Question 24.
किसी धातु का कार्य फलन 2.5 eV है। यदि उस पर 300 nm तरंगदैर्ध्य की प्रकाश किरणें गिरें, तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिया गया —
ϕ = 2.5 eV
λ = 300 nm = 300×10⁻⁹ m
फोटॉन की ऊर्जा,
E = hc/λ
✏️ गणना:
E = (6.63×10⁻³⁴ × 3×10⁸) / (300×10⁻⁹)
E = 6.63 eV
अब,
K_max = E − ϕ
➡️ K_max = 6.63 − 2.5 = 4.13 eV
✔️ अतः अधिकतम गतिज ऊर्जा = 4.13 eV
🟠 Question 25.
यदि किसी फोटॉन की ऊर्जा 5 eV है, तो उसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer:
E = hν
ν = E/h
✏️ गणना:
ν = (5 × 1.6×10⁻¹⁹) / (6.63×10⁻³⁴)
ν = 1.21×10¹⁵ Hz
✔️ अतः फोटॉन की आवृत्ति = 1.21×10¹⁵ Hz
🔴 Question 26.
एक इलेक्ट्रॉन को 54 V विभवांतर से प्रवेगित किया गया है। उसकी द ब्रॉगली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।
Answer:
λ = h / √(2meV)
✏️ गणना:
λ = (6.63×10⁻³⁴) / √(2×9.1×10⁻³¹×1.6×10⁻¹⁹×54)
= (6.63×10⁻³⁴) / √(1.57×10⁻¹⁶)
= (6.63×10⁻³⁴) / (3.96×10⁻⁸)
➡️ λ = 1.67×10⁻¹⁰ m
✔️ अतः इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य = 1.67 Å (Angstrom)
🔵 Question 27.
किसी धातु की न्यूनतम आवृत्ति 4×10¹⁴ Hz है। उस पर 6×10¹⁴ Hz का प्रकाश डाला गया है।
इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
Answer:
K_max = h(ν − ν₀)
✏️ गणना:
K_max = 6.63×10⁻³⁴ × (6×10¹⁴ − 4×10¹⁴)
= 6.63×10⁻³⁴ × 2×10¹⁴
= 1.326×10⁻¹⁹ J
अब eV में,
K_max = (1.326×10⁻¹⁹) / (1.6×10⁻¹⁹)
➡️ K_max = 0.83 eV
✔️ अतः अधिकतम गतिज ऊर्जा = 0.83 eV
🌟 SECTION – D (Q29–31 : दीर्घ उत्तर प्रश्न)
🔵 Question 28.
आइंस्टाइन के प्रकाश-विद्युत समीकरण का सिद्धांत समझाइए।
Answer:
💡 आइंस्टाइन ने 1905 में बताया कि प्रकाश में ऊर्जा छोटे-छोटे कणों के रूप में होती है जिन्हें फोटॉन कहा जाता है।
प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा होती है —
➡️ E = hν
जब कोई फोटॉन किसी धातु सतह पर गिरता है, तो वह अपनी ऊर्जा धातु के इलेक्ट्रॉन को देता है।
यह ऊर्जा दो भागों में विभाजित होती है —
1️⃣ धातु से इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने में (कार्य फलन ϕ)
2️⃣ इलेक्ट्रॉन को गतिज ऊर्जा (K_max) देने में
इस प्रकार,
➡️ hν = ϕ + K_max
जहाँ,
ϕ = hν₀ (धातु का कार्य फलन)
K_max = अधिकतम गतिज ऊर्जा
eV₀ = hν − hν₀
प्रयोगात्मक प्रमाण:
यह संबंध लेनार्ड और अन्य वैज्ञानिकों द्वारा सत्यापित किया गया।
इससे प्लैंक के सिद्धांत की पुष्टि हुई और प्रकाश की कणीय प्रकृति सिद्ध हो गई।
🟢 Question 29.
लुई द ब्रॉगली के द्रव्य तरंग सिद्धांत को समझाइए।
Answer:
💡 1924 में लुई द ब्रॉगली ने यह परिकल्पना दी कि प्रत्येक गतिशील कण में तरंगीय गुण भी निहित होते हैं।
उसके अनुसार —
➡️ λ = h/p = h/mv
जहाँ,
λ = द्रव्य तरंग की तरंगदैर्ध्य
h = प्लैंक स्थिरांक
m = कण का द्रव्यमान
v = कण का वेग
✏️ मुख्य बिंदु:
यह तरंगदैर्ध्य सूक्ष्म कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन) के लिए मापन योग्य होती है।
बड़े द्रव्यमान वाले कणों के लिए λ बहुत छोटी होती है, अतः तरंगीय व्यवहार नहीं दिखता।
यह परिकल्पना प्रकाश की तरह द्रव्य के भी द्वैध स्वभाव को दर्शाती है।
✔️ महत्व:
द ब्रॉगली सिद्धांत से परमाणु मॉडल की व्याख्या संभव हुई और बोहर के स्थिर कक्षा सिद्धांत को क्वांटम रूप मिला।
🟠 Question 30.
डेविसन और गेरमर का प्रयोग विस्तार से लिखिए।
Answer:
📘 प्रयोग का उद्देश्य:
इलेक्ट्रॉन के तरंगीय स्वभाव की पुष्टि करना।
प्रयोग की रूपरेखा:
1️⃣ निकेल क्रिस्टल को लक्ष्य के रूप में लिया गया।
2️⃣ इलेक्ट्रॉन गन से 54 V विभवांतर द्वारा इलेक्ट्रॉन निकाले गए।
3️⃣ ये इलेक्ट्रॉन निकेल सतह से टकराकर परावर्तित हुए और डिटेक्टर पर धारियाँ बनीं।
परिणाम:
टकराव के बाद विवर्तन (Diffraction) पैटर्न प्राप्त हुआ, जो केवल तरंगों के लिए संभव है।
इससे सिद्ध हुआ कि —
➡️ इलेक्ट्रॉन में तरंगीय गुण मौजूद हैं।
गणना:
प्रयोग में विवर्तन कोण से प्राप्त λ का मान लगभग 1.65 Å था, जो द ब्रॉगली सूत्र λ = h/mv से प्राप्त मान के समान था।
✔️ निष्कर्ष:
डेविसन और गेरमर का प्रयोग द्रव्य के तरंगीय स्वभाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
🔴 Question 31.
प्रकाश-विद्युत प्रभाव से प्रकाश के कणीय स्वभाव को कैसे सिद्ध किया जा सकता है?
Answer:
💡 मुख्य विचार:
यदि प्रकाश केवल तरंग होता, तो उसकी ऊर्जा सतत रूप में वितरित होती और तीव्रता बढ़ाने पर ही इलेक्ट्रॉन निकलने चाहिए थे।
परंतु प्रयोग से पाया गया कि —
1️⃣ इलेक्ट्रॉन केवल तब उत्सर्जित होते हैं जब प्रकाश की आवृत्ति न्यूनतम (ν₀) से अधिक हो।
2️⃣ उत्सर्जन तुरंत होता है, किसी विलंब के बिना।
3️⃣ इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा केवल आवृत्ति पर निर्भर करती है, तीव्रता पर नहीं।
➡️ यह सब केवल तभी संभव है जब प्रकाश ऊर्जा कणों (फोटॉन) के रूप में संचारित करता हो।
प्रत्येक फोटॉन ऊर्जा = hν
और यदि hν > ϕ तो इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित हो जाता है।
✔️ निष्कर्ष:
यह प्रभाव स्पष्ट रूप से बताता है कि प्रकाश में कणीय स्वभाव मौजूद है।
💠 SECTION – E (Q32–Q33 : केस / अनुप्रयोग आधारित प्रश्न)
🔵 Question 32.
Case Study:
एक धातु की न्यूनतम आवृत्ति 5×10¹⁴ Hz है। यदि उस पर 6×10¹⁴ Hz का प्रकाश गिराया जाए, तो —
(i) क्या प्रकाश-विद्युत प्रभाव होगा?
(ii) यदि होगा, तो अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिए गए —
ν₀ = 5×10¹⁴ Hz
ν = 6×10¹⁴ Hz
h = 6.63×10⁻³⁴ J·s
(i) चूंकि ν > ν₀
✔️ अतः प्रकाश-विद्युत प्रभाव होगा।
(ii)
K_max = h(ν − ν₀)
= 6.63×10⁻³⁴ (6×10¹⁴ − 5×10¹⁴)
= 6.63×10⁻³⁴ × 1×10¹⁴
= 6.63×10⁻²⁰ J
या
K_max = 6.63×10⁻²⁰ / 1.6×10⁻¹⁹ = 0.414 eV
✔️ उत्तर: अधिकतम गतिज ऊर्जा = 0.414 eV
🟢 Question 33.
Application Based:
एक इलेक्ट्रॉन को 150 V विभवांतर से प्रवेगित किया गया है। उसकी द ब्रॉगली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।
Answer:
λ = h / √(2meV)
= (6.63×10⁻³⁴) / √(2×9.1×10⁻³¹×1.6×10⁻¹⁹×150))
= (6.63×10⁻³⁴) / √(4.37×10⁻¹⁶)
= (6.63×10⁻³⁴) / (6.61×10⁻⁸)
➡️ λ = 1.00×10⁻¹⁰ m
✔️ अतः द ब्रॉगली तरंगदैर्ध्य = 1.00 Å (Angstrom)
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