Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 7: प्रत्यावर्ती धारा
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🧭 विस्तृत व्याख्या (Explanation)
🔵 परिचय (Introduction):
जब किसी परिपथ में विद्युत धारा का परिमाण तथा दिशा दोनों समय के साथ निरन्तर बदलते रहते हैं, तो ऐसी धारा को प्रत्यावर्ती धारा (AC) कहा जाता है। इसके विपरीत, स्थिर धारा (DC) में धारा का परिमाण व दिशा स्थिर रहती है।
💡 प्रत्यावर्ती धारा का प्रयोग आज लगभग सभी घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक कार्यों में होता है क्योंकि इसे ट्रांसफार्मर द्वारा आसानी से उच्च या निम्न विभव में बदला जा सकता है और यह संचरण में ऊर्जा हानि को न्यूनतम करती है।
⚡ 1. प्रत्यावर्ती विभव और धारा का समीकरण
यदि एक परिपथ में धारा समय के साथ बदलती है, तो उसे इस प्रकार लिखा जा सकता है —
➡️ V = V₀ sin(ωt)
➡️ I = I₀ sin(ωt)
जहाँ,
V₀ = अधिकतम (शीर्ष) विभव
I₀ = अधिकतम (शीर्ष) धारा
ω = 2πf = कोणीय आवृत्ति
f = आवृत्ति (Hz में)
💡 एक आवर्तकाल (T) वह समय है जिसमें धारा या विभव का एक पूर्ण चक्र पूरा होता है।
➡️ T = 1/f
🟢 2. तत्क्षणिक, औसत और प्रभावी मान
✏️ (i) तत्क्षणिक मान (Instantaneous value):
किसी क्षण पर धारा या विभव का मान —
➡️ I = I₀ sin(ωt)
➡️ V = V₀ sin(ωt)
✏️ (ii) औसत मान (Average value):
पूरा चक्र लेने पर औसत मान शून्य होता है क्योंकि आधे चक्र में धारा +ve और शेष में −ve होती है।
परंतु आधे चक्र का औसत मान —
➡️ I_avg = (2/π)·I₀ ≈ 0.637·I₀
✏️ (iii) प्रभावी मान (RMS value):
वह स्थिर धारा का मान जो समान समय में समान ऊष्मा उत्पन्न करे।
➡️ I_rms = I₀ / √2 ≈ 0.707·I₀
➡️ V_rms = V₀ / √2 ≈ 0.707·V₀
✔️ अतः, RMS मान सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यंत्रों पर प्रायः यही लिखा होता है (जैसे 220 V AC)।
🔴 3. शुद्ध प्रतिरोध (Pure Resistance) में AC
यदि एक प्रतिरोध R में AC प्रवाहित हो तो —
➡️ V = V₀ sin(ωt)
➡️ I = (V₀/R) sin(ωt) = I₀ sin(ωt)
💡 धारा और विभव एक ही चरण (In phase) में होते हैं।
➡️ I और V के बीच कोण (phase difference) = 0°
औसत शक्ति —
➡️ P_avg = V_rms·I_rms = (V₀·I₀)/2
🟡 4. शुद्ध प्रेरकत्व (Pure Inductance) में AC
जब कुंडली में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है, तो धारा में परिवर्तन के कारण स्वप्रेरित e.m.f. उत्पन्न होती है जो धारा का विरोध करती है।
➡️ V = L(dI/dt)
➡️ यदि I = I₀ sin(ωt), तब V = LωI₀ cos(ωt)
💡 इसका अर्थ है —
धारा और विभव में 90° का चरण भेद (Phase difference) होता है।
➡️ विभव, धारा से 90° आगे (leads) होता है।
✔️ प्रेरक प्रतिरोध (Inductive Reactance):
➡️ X_L = ωL = 2πfL
RMS रूप में,
➡️ I_rms = V_rms / X_L
🟢 5. शुद्ध धारिता (Pure Capacitance) में AC
जब एक संधारित्र में AC प्रवाहित होती है, तो विभव और धारा के बीच चरण भेद होता है —
➡️ Q = C·V₀ sin(ωt)
➡️ I = dQ/dt = ωC·V₀ cos(ωt) = I₀ sin(ωt + 90°)
💡 अतः धारा विभव से 90° आगे होती है।
✔️ धारिता प्रतिरोध (Capacitive Reactance):
➡️ X_C = 1/(ωC) = 1/(2πfC)
RMS रूप में,
➡️ I_rms = V_rms / X_C
🔵 6. R–L–C श्रेणी परिपथ (Series Combination)
यदि प्रतिरोध R, प्रेरकत्व L और धारिता C श्रृंखला में जुड़े हों, तो —
➡️ V = √(V_R² + (V_L − V_C)²)
➡️ I_rms = V_rms / Z
जहाँ Z = प्रतिबाधा (Impedance) = √(R² + (X_L − X_C)²)
💡 चरण कोण (Phase angle):
➡️ tanφ = (X_L − X_C) / R
✔️ जब X_L = X_C, तो φ = 0°, तब V और I एक ही चरण में होंगे और प्रतिबाधा न्यूनतम (Z = R) होगी।
यह अवस्था अनुनाद (Resonance) कहलाती है।
🔴 7. अनुनाद की अवस्था (Condition of Resonance)
➡️ अनुनाद की आवृत्ति —
f_r = 1 / (2π√(LC))
इस अवस्था में —
प्रतिबाधा न्यूनतम होती है।
धारा अधिकतम होती है।
विभव और धारा एक ही चरण में होते हैं।
🟢 8. शक्ति (Power) में प्रत्यावर्ती धारा
💡 किसी AC परिपथ में तात्क्षणिक शक्ति —
➡️ P = V·I = V₀·I₀ sin(ωt)·sin(ωt − φ)
औसत शक्ति —
➡️ P_avg = V_rms·I_rms·cosφ
जहाँ cosφ = शक्ति गुणांक (Power Factor)
φ = 0° → शुद्ध प्रतिरोधी परिपथ (Power Factor = 1)
φ = 90° → शुद्ध प्रेरक या धारित परिपथ (Power Factor = 0)
🟡 9. वैधुत धारा का वैक्टर रूप (Phasor Representation)
💡 AC राशियाँ जैसे V और I को किसी वृत्त पर घूमते हुए सदिश (phasor) रूप में दर्शाया जाता है।
प्रतिरोधी परिपथ: V और I समान फेज में।
प्रेरक परिपथ: V, I से 90° आगे।
धारित परिपथ: I, V से 90° आगे।
🔵 10. प्रत्यावर्ती धारा का व्यावहारिक उपयोग
➡️ ट्रांसफार्मर: प्रत्यावर्ती धारा से वोल्टेज बदला जा सकता है।
➡️ जनित्र: यांत्रिक ऊर्जा से प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करता है।
➡️ मोटर: प्रत्यावर्ती धारा से यांत्रिक गति प्राप्त होती है।
➡️ घरेलू उपयोग: पंखा, फ्रिज, वॉशिंग मशीन आदि AC पर चलते हैं।
📘 भाग 2 : सारांश (Summary)
🟢 प्रत्यावर्ती धारा में धारा व विभव दोनों समय के साथ बदलते रहते हैं।
🔵 V = V₀ sin(ωt), I = I₀ sin(ωt)
🔴 औसत मान (आधा चक्र) = (2/π)I₀
🟡 प्रभावी मान (RMS) = I₀/√2
💡 प्रेरक व धारिता प्रतिरोध:
X_L = ωL और X_C = 1/ωC
⚡ श्रेणी परिपथ में प्रतिबाधा:
Z = √(R² + (X_L − X_C)²)
✔️ अनुनाद की आवृत्ति:
f_r = 1/(2π√(LC))
🔵 औसत शक्ति:
P_avg = V_rms·I_rms·cosφ
💡 शक्ति गुणांक (cosφ) = परिपथ का ऊर्जा उपयोग सूचक।
📝 भाग 3 : त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Recap)
1️⃣ I_rms = I₀ / √2 और V_rms = V₀ / √2
2️⃣ X_L = ωL , X_C = 1/(ωC)
3️⃣ Z = √(R² + (X_L − X_C)²)
4️⃣ tanφ = (X_L − X_C)/R
5️⃣ f_r = 1/(2π√(LC))
6️⃣ P_avg = V_rms·I_rms·cosφ
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
Question 7.1 एक 100 Ω का प्रतिरोधक 200 V, 50 Hz आपूर्ति से संयोजित है।
(a) परिपथ में धारा का rms मान कितना है?
(b) एक पूरे चक्र में कितनी नेट शक्ति व्यय होती है।
Answer
🔵 (a) सूत्र: I_rms = V_rms / R
🟢 मान: V_rms = 200 V (AC आपूर्ति को rms में व्यक्त किया जाता है), R = 100 Ω
🧮 गणना: I_rms = 200 / 100 = 2 A
🔵 (b) शुद्ध/औसत शक्ति (resistive लोड): P_avg = V_rms I_rms = I_rms² R
🧮 P = (2)² × 100 = 400 W
🔴 निष्कर्ष: (a) 2 A, (b) 400 W।
Question 7.2
(a) ac आपूर्ति का शिखर मान 300 V है। rms वोल्टता कितनी है?
(b) ac परिपथ में धारा का rms मान 10 A है। शिखर धारा कितनी है?
Answer
🔵 (a) सूत्र: V_rms = V_m / √2
🧮 V_rms = 300 / √2 = 2.12 × 10² V ≈ 212 V
🔵 (b) सूत्र: I_m = √2 I_rms
🧮 I_m = √2 × 10 = 14.14 A ≈ 14.1 A
Question 7.3 एक 44 mH का प्रेरक 220 V, 50 Hz आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 शुद्ध प्रेरक के लिए: X_L = 2π f L, I_rms = V_rms / X_L
🟢 L = 44 mH = 0.044 H, f = 50 Hz, V_rms = 220 V
🧮 X_L = 2π × 50 × 0.044 = 4.4π ≈ 13.82 Ω
🧮 I_rms = 220 / 13.82 ≈ 15.9 A
🔴 निष्कर्ष: परिपथ की धारा का rms मान ≈ 15.9 A।
Question 7.4 एक 60 μF का संधारित्र 110 V, 60 Hz ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 शुद्ध संधारित्र के लिए: X_C = 1 / (2π f C), I_rms = V_rms / X_C
🟢 C = 60 μF = 60 × 10⁻⁶ F = 6.0 × 10⁻⁵ F, f = 60 Hz, V_rms = 110 V
🧮 2π f C = 2π × 60 × 6.0 × 10⁻⁵ ≈ 0.02262
🧮 X_C = 1 / 0.02262 ≈ 44.2 Ω
🧮 I_rms = 110 / 44.2 ≈ 2.49 A
🔴 निष्कर्ष: परिपथ की धारा का rms मान ≈ 2.49 A।
Question 7.5
अभ्यास 7.3 व 7.4 में एक पूरे चक्र की अवधि में प्रत्येक परिपथ में कितनी नेट शक्ति व्यय होती है? अपने उत्तर का विवेचन दीजिए।
Answer
🔵 सिद्धान्त:
प्रेरक या संधारित्र पर शुद्ध शक्ति व्यय = 0
क्योंकि इन दोनों में ऊर्जा एक चक्र के दौरान संग्रहीत और पुनः लौटाई जाती है।
🟢 तर्क:
7.3 में परिपथ में केवल प्रेरकत्व था (शुद्ध प्रेरक)।
7.4 में परिपथ में केवल संधारित्र था (शुद्ध संधारित्र)।
दोनों ही स्थितियों में वोल्टता और धारा के बीच 90° का फेज अंतर होता है।
🧩 औसत शक्ति:
P_avg = V_rms I_rms cosφ
यहाँ φ = 90° ⇒ cosφ = 0
🔴 अतः P_avg = 0
✅ निष्कर्ष: एक पूर्ण चक्र में शुद्ध शक्ति व्यय = 0
Question 7.6
30 μF का एक संधारित्र प्रेरकत्व 27 mH के प्रेरक से जोड़ा गया है। परिपथ के प्राकृतिक दोलनों की कोणीय आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 सूत्र: ω = 1 / √(L C)
🟢 दिए गए:
L = 27 mH = 27 × 10⁻³ H
C = 30 μF = 30 × 10⁻⁶ F
🧮 गणना:
ω = 1 / √(27 × 10⁻³ × 30 × 10⁻⁶)
= 1 / √(8.1 × 10⁻⁷)
= 1 / (9.0 × 10⁻⁴) = 1.11 × 10³ rad·s⁻¹
🔴 निष्कर्ष: प्राकृतिक कोणीय आवृत्ति = 1.1 × 10³ rad/s (लगभग)
Question 7.7
एक श्रृंखलाबद्ध LCR परिपथ, जिसमें R = 20 Ω, L = 1.5 H तथा C = 35 μF, एक प्रत्यावर्ती आपूर्ति 200 V ac से जोड़ा गया है। जब आपूर्ति की कोणीय आवृत्ति ω = 300 rad·s⁻¹ है, तब परिपथ की धारा का rms मान तथा परिपथ की कुल शक्ति ह्रास ज्ञात कीजिए।
Answer
🔵 सूत्र:
प्रेरक रिएक्टेंस X_L = ωL
संधारित्र रिएक्टेंस X_C = 1 / (ωC)
कुल प्रतिबाधा Z = √[R² + (X_L − X_C)²]
I_rms = V_rms / Z, P = I_rms² R
🟢 दिए गए:
R = 20 Ω, L = 1.5 H, C = 35 μF = 35 × 10⁻⁶ F, ω = 300 rad·s⁻¹, V_rms = 200 V
🧮 गणना:
X_L = ωL = 300 × 1.5 = 450 Ω
X_C = 1 / (300 × 35 × 10⁻⁶) = 1 / (0.0105) ≈ 95.24 Ω
(X_L − X_C) = 450 − 95.24 = 354.76 Ω
Z = √(20² + 354.76²) ≈ √(126857) ≈ 356 Ω
I_rms = 200 / 356 = 0.562 A
P = (0.562)² × 20 = 0.316 × 20 = 6.32 W
🔴 निष्कर्ष:
✔️ धारा का rms मान = 0.56 A
✔️ शक्ति ह्रास = 6.3 W
Question 7.8
चित्र 7.17 में एक श्रृंखलाबद्ध LCR परिपथ दर्शाया गया है, जिसे प्रत्यावर्ती आपूर्ति 230 V से जोड़ा गया है। परिपथ में L = 5.0 H, C = 80 μF, R = 40 Ω हैं।
(a) फेज कोण ज्ञात कीजिए जो परिपथ में धारा और वोल्टता के बीच है।
(b) परिपथ की प्रतिबाधा तथा धारा का rms मान ज्ञात कीजिए।
(c) परिपथ के किसी बिंदु पर L और C के वोल्टता के rms मानों की तुलना कीजिए।
Answer
🟢 (a)
X_L = ωL = 2πfL = 2π(50)(5.0) = 1570.8 Ω
X_C = 1 / (2πfC) = 1 / (2π × 50 × 80 × 10⁻⁶) = 1 / (0.0251) = 39.8 Ω
φ = tan⁻¹((X_L − X_C)/R) = tan⁻¹((1570.8 − 39.8)/40) = tan⁻¹(1531/40) ≈ 88.5°
🔹 अतः परिपथ लगभग प्रेरक (inductive) है।
🟢 (b)
Z = √[R² + (X_L − X_C)²] = √(40² + 1531²) ≈ 1532 Ω
I_rms = V_rms / Z = 230 / 1532 = 0.15 A
🟢 (c)
V_L = I_rms X_L = 0.15 × 1570.8 = 235.6 V
V_C = I_rms X_C = 0.15 × 39.8 = 5.97 V
🔹 अतः V_L ≫ V_C ⇒ परिपथ प्रेरक गुण वाला है।
🔴 निष्कर्ष:
✔️ फेज कोण ≈ 88.5°
✔️ Z = 1532 Ω, I_rms = 0.15 A,
✔️ V_L ≫ V_C (स्पष्ट रूप से प्रेरक परिपथ)।
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
✳️ Section A – बहुविकल्पीय प्रश्न (Q1–Q18)
Question 1. प्रत्यावर्ती धारा वह है जिसमें —
🔵 (A) धारा का परिमाण और दिशा दोनों समय के साथ बदलते हैं
🟢 (B) केवल परिमाण बदलता है
🟠 (C) केवल दिशा बदलती है
🔴 (D) न परिमाण न दिशा बदलती है
Answer: (A) [धारा का परिमाण और दिशा दोनों समय के साथ बदलते हैं]
Question 2. प्रत्यावर्ती धारा का सामान्य समीकरण है —
🔵 (A) I = I₀ sin(ωt)
🟢 (B) I = I₀ cos(ωt)
🟠 (C) I = I₀ e^(−ωt)
🔴 (D) I = I₀ tan(ωt)
Answer: (A) [I = I₀ sin(ωt)]
Question 3. प्रत्यावर्ती धारा की कोणीय आवृत्ति ω का सूत्र है —
🔵 (A) ω = 2πf
🟢 (B) ω = πf
🟠 (C) ω = 4πf
🔴 (D) ω = f/2π
Answer: (A) [ω = 2πf]
Question 4. RMS मान और अधिकतम मान का अनुपात है —
🔵 (A) 1 : √2
🟢 (B) 1 : 2
🟠 (C) √2 : 1
🔴 (D) 2 : 1
Answer: (A) [1 : √2]
Question 5. किसी AC धारा का प्रभावी मान (RMS) 10 A है, तो I₀ = ?
🔵 (A) 14.14 A
🟢 (B) 7.07 A
🟠 (C) 5 A
🔴 (D) 20 A
Answer: (A) [14.14 A]
Question 6. 220 V का अर्थ है —
🔵 (A) RMS मान 220 V
🟢 (B) अधिकतम मान 220 V
🟠 (C) औसत मान 220 V
🔴 (D) न्यूनतम मान 220 V
Answer: (A) [RMS मान 220 V]
Question 7. औसत धारा का मान (आधा चक्र के लिए) = ?
🔵 (A) (2/π) I₀
🟢 (B) (1/√2) I₀
🟠 (C) I₀
🔴 (D) (π/2) I₀
Answer: (A) [(2/π) I₀]
Question 8. प्रतिरोधी परिपथ में धारा और विभव के बीच चरण कोण है —
🔵 (A) 0°
🟢 (B) 90°
🟠 (C) 45°
🔴 (D) 180°
Answer: (A) [0°]
Question 9. प्रेरक परिपथ में विभव और धारा का संबंध —
🔵 (A) विभव धारा से 90° आगे होता है
🟢 (B) धारा विभव से 90° आगे होती है
🟠 (C) दोनों एक चरण में होते हैं
🔴 (D) कोई संबंध नहीं
Answer: (A) [विभव धारा से 90° आगे होता है]
Question 10. धारिता परिपथ में धारा विभव से —
🔵 (A) 90° आगे होती है
🟢 (B) 90° पीछे होती है
🟠 (C) समान चरण में होती है
🔴 (D) 45° आगे होती है
Answer: (A) [90° आगे होती है]
Question 11. प्रेरक प्रतिरोध (X_L) = ?
🔵 (A) ωL
🟢 (B) 1/ωL
🟠 (C) L/ω
🔴 (D) ω²L
Answer: (A) [ωL]
Question 12. धारिता प्रतिरोध (X_C) = ?
🔵 (A) 1/ωC
🟢 (B) ωC
🟠 (C) 2πfC
🔴 (D) 1/fC
Answer: (A) [1/ωC]
Question 13. यदि R = 3 Ω, X_L = 4 Ω, X_C = 2 Ω, तो प्रतिबाधा (Z) = ?
🔵 (A) 3.61 Ω
🟢 (B) 4 Ω
🟠 (C) 5 Ω
🔴 (D) 2 Ω
Answer: (C) [5 Ω]
(क्योंकि Z = √(R² + (X_L − X_C)²) = √(9 + 4) = 5 Ω)
Question 14. शक्ति गुणांक (cosφ) = ?
🔵 (A) R/Z
🟢 (B) Z/R
🟠 (C) X_L/Z
🔴 (D) X_C/Z
Answer: (A) [R/Z]
Question 15. RLC श्रेणी परिपथ में अनुनाद की स्थिति में —
🔵 (A) X_L = X_C
🟢 (B) X_L > X_C
🟠 (C) X_L < X_C
🔴 (D) R = 0
Answer: (A) [X_L = X_C]
Question 16. अनुनाद की आवृत्ति का सूत्र है —
🔵 (A) f_r = 1/(2π√(LC))
🟢 (B) f_r = 1/(2πLC)
🟠 (C) f_r = 2π√(LC)
🔴 (D) f_r = π/√(LC)
Answer: (A) [f_r = 1/(2π√(LC))]
Question 17. शुद्ध प्रेरक परिपथ में औसत शक्ति = ?
🔵 (A) 0
🟢 (B) अधिकतम
🟠 (C) आधी
🔴 (D) √2 गुना
Answer: (A) [0]
Question 18. प्रत्यावर्ती धारा के लिए औसत शक्ति का समीकरण है —
🔵 (A) P_avg = V_rms·I_rms·cosφ
🟢 (B) P_avg = V₀·I₀
🟠 (C) P_avg = V_rms·I_rms
🔴 (D) P_avg = V₀·I₀/2
Answer: (A) [P_avg = V_rms·I_rms·cosφ]
✳️ Section B – लघु उत्तरी प्रश्न (Q19–23)
Question 19. प्रत्यावर्ती धारा का तत्क्षणिक समीकरण लिखिए तथा उसका ग्राफ समझाइए।
Answer:
➡️ प्रत्यावर्ती धारा का तत्क्षणिक मान होता है —
I = I₀ sin(ωt)
जहाँ,
I₀ = अधिकतम धारा (peak current)
ω = 2πf = कोणीय आवृत्ति
➡️ इसका ग्राफ साइन वक्र जैसा होता है, जो +I₀ से −I₀ तक दोलित होता रहता है।
💡 एक आवर्तकाल (T) में यह एक पूर्ण चक्र पूरा करता है।
Question 20. प्रत्यावर्ती धारा का प्रभावी मान (RMS value) क्या होता है?
Answer:
➡️ प्रभावी धारा (RMS current) वह स्थिर धारा होती है जो समान प्रतिरोध में समान समय में उतनी ही ऊष्मा उत्पन्न करे जितनी AC उत्पन्न करती है।
➡️ सूत्र: I_rms = I₀ / √2
इसी प्रकार, V_rms = V₀ / √2
💡 RMS मान व्यावहारिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यही उपकरणों पर लिखा होता है।
Question 21. प्रेरक प्रतिरोध (Inductive Reactance) क्या है?
Answer:
➡️ जब प्रत्यावर्ती धारा किसी प्रेरक कुंडली से प्रवाहित होती है, तो उसमें उत्पन्न स्वप्रेरित e.m.f. धारा का विरोध करती है।
➡️ इसका विरोध प्रदर्शित करने वाला परिमाण प्रेरक प्रतिरोध (X_L) कहलाता है।
➡️ सूत्र: X_L = ωL = 2πfL
💡 जहाँ L = प्रेरकत्व और f = आवृत्ति।
ध्यान दें कि विभव धारा से 90° आगे होता है।
Question 22. धारिता प्रतिरोध (Capacitive Reactance) क्या है?
Answer:
➡️ जब प्रत्यावर्ती धारा किसी संधारित्र से गुजरती है, तो संधारित्र के प्लेटों पर आवेश लगातार बदलता रहता है।
➡️ इसका विरोध करने वाला परिमाण धारिता प्रतिरोध (X_C) कहलाता है।
➡️ सूत्र: X_C = 1 / (ωC) = 1 / (2πfC)
💡 इसमें धारा विभव से 90° आगे होती है।
Question 23. किसी RLC श्रेणी परिपथ में प्रतिबाधा (Impedance) का सूत्र क्या है?
Answer:
➡️ परिपथ में यदि R, L और C श्रेणीक्रम में जुड़े हों तो,
Z = √(R² + (X_L − X_C)²)
जहाँ,
X_L = प्रेरक प्रतिरोध और X_C = धारिता प्रतिरोध।
💡 प्रतिबाधा Z ही उस परिपथ का कुल विरोध है जो धारा के प्रवाह को रोकता है।
✳️ Section C – मध्यम/संख्यात्मक प्रश्न (Q24–27)
Question 24. एक प्रत्यावर्ती धारा का RMS मान 5 A है। इसका अधिकतम मान ज्ञात कीजिए।
Answer:
➡️ सूत्र: I₀ = √2 × I_rms
➡️ I₀ = 1.414 × 5 = 7.07 A
✔️ अधिकतम धारा = 7.07 A
Question 25. एक कुंडली का प्रेरकत्व 0.5 H है। यदि आवृत्ति 50 Hz हो, तो प्रेरक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer:
➡️ सूत्र: X_L = 2πfL
➡️ X_L = 2 × 3.14 × 50 × 0.5
➡️ X_L = 157 Ω
✔️ प्रेरक प्रतिरोध = 157 Ω
Question 26. यदि किसी परिपथ में R = 6 Ω, L = 0.02 H और C = 100 μF हो, तो प्रतिबाधा ज्ञात कीजिए (f = 50 Hz)।
Answer:
➡️ पहले X_L = 2πfL = 2 × 3.14 × 50 × 0.02 = 6.28 Ω
➡️ फिर X_C = 1 / (2πfC) = 1 / (2 × 3.14 × 50 × 100×10⁻⁶) = 31.8 Ω
➡️ अब Z = √(R² + (X_L − X_C)²)
Z = √(6² + (6.28 − 31.8)²)
Z = √(36 + 661.6) = √697.6 = 26.4 Ω
✔️ प्रतिबाधा = 26.4 Ω
Question 27. एक संधारित्र 100 μF को 50 Hz पर प्रत्यावर्ती स्रोत से जोड़ा गया है। उसका धारिता प्रतिरोध ज्ञात करें।
Answer:
➡️ सूत्र: X_C = 1 / (2πfC)
➡️ X_C = 1 / (2 × 3.14 × 50 × 100×10⁻⁶)
➡️ X_C = 1 / (0.0314) = 31.8 Ω
✔️ धारिता प्रतिरोध = 31.8 Ω
✳️ Section D – दीर्घ उत्तरी प्रश्न (Q28–31)
Question 28. प्रत्यावर्ती धारा के लिए औसत शक्ति का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:
➡️ मान लीजिए परिपथ में धारा और विभव क्रमशः
V = V₀ sin(ωt) और I = I₀ sin(ωt − φ)
➡️ तात्क्षणिक शक्ति,
P = V·I = V₀ I₀ sin(ωt) sin(ωt − φ)
➡️ सूत्र प्रयोग करें: sinA·sinB = ½[cos(A−B) − cos(A+B)]
इससे,
P = (V₀ I₀ / 2)[cosφ − cos(2ωt − φ)]
➡️ अब औसत शक्ति = एक आवर्तकाल पर औसत मान
क्योंकि cos(2ωt − φ) का औसत मान = 0,
इसलिए,
P_avg = (V₀ I₀ / 2) cosφ
➡️ RMS मानों में:
V_rms = V₀ / √2, I_rms = I₀ / √2
अतः,
P_avg = V_rms I_rms cosφ
✔️ यह समीकरण दर्शाता है कि औसत शक्ति धारा, विभव तथा शक्ति गुणांक पर निर्भर करती है।
Question 29. शुद्ध प्रेरक और शुद्ध धारिता परिपथों में शक्ति शून्य क्यों होती है?
Answer:
💡 (i) शुद्ध प्रेरक परिपथ:
➡️ V = V₀ sin(ωt), I = I₀ sin(ωt − 90°)
➡️ दोनों के बीच φ = 90°
➡️ P_avg = V_rms I_rms cosφ = V_rms I_rms cos90° = 0
💡 (ii) शुद्ध धारिता परिपथ:
➡️ V = V₀ sin(ωt), I = I₀ sin(ωt + 90°)
➡️ यहाँ भी φ = 90°
➡️ अतः औसत शक्ति = 0
✔️ निष्कर्ष — प्रेरक और धारिता परिपथ केवल ऊर्जा को संग्रहित व वापस करते हैं; वे ऊष्मा के रूप में ऊर्जा नष्ट नहीं करते।
Question 30. RLC श्रेणी परिपथ में अनुनाद (Resonance) की अवस्था समझाइए।
Answer:
➡️ परिपथ में प्रतिबाधा,
Z = √(R² + (X_L − X_C)²)
➡️ जब X_L = X_C,
Z = R (न्यूनतम मान)
💡 अनुनाद की अवस्था (Resonance condition):
फेज कोण φ = 0°, विभव व धारा एक ही चरण में होते हैं।
➡️ धारा अधिकतम होती है क्योंकि प्रतिबाधा न्यूनतम है।
➡️ अनुनाद की आवृत्ति:
f_r = 1 / (2π√(LC))
✔️ यह स्थिति ट्रांसफार्मर, रेडियो-ट्यूनिंग और परिपथ अनुकूलन में अत्यंत उपयोगी होती है।
Question 31. फेजर आरेख (Phasor Diagram) द्वारा प्रेरक और धारिता परिपथों में फेज अंतर समझाइए।
Answer:
➡️ (i) प्रेरक परिपथ:
धारा I = I₀ sin(ωt − 90°)
विभव V = V₀ sin(ωt)
💡 यहाँ विभव, धारा से 90° आगे (leads) होता है।
➡️ (ii) धारिता परिपथ:
धारा I = I₀ sin(ωt + 90°)
💡 यहाँ धारा, विभव से 90° आगे (leads) होती है।
✔️ फेजर आरेख में:
• प्रेरक परिपथ में V को I पर 90° आगे खींचा जाता है।
• धारिता परिपथ में I को V पर 90° आगे दर्शाया जाता है।
✳️ Section E – केस आधारित / अनुप्रयोग प्रश्न (Q32–Q33)
Question 32. एक प्रत्यावर्ती परिपथ में R = 10 Ω, L = 0.1 H और C = 100 μF हैं। स्रोत का विभव 220 V (RMS) और आवृत्ति 50 Hz है।
धारा का प्रभावी मान (I_rms) ज्ञात करें।
Answer:
➡️ X_L = 2πfL = 2 × 3.14 × 50 × 0.1 = 31.4 Ω
➡️ X_C = 1 / (2πfC) = 1 / (2 × 3.14 × 50 × 100×10⁻⁶) = 31.8 Ω
➡️ Z = √(R² + (X_L − X_C)²)
Z = √(10² + (31.4 − 31.8)²) = √(100 + 0.16) = 10.008 Ω ≈ 10 Ω
➡️ अब I_rms = V_rms / Z = 220 / 10 = 22 A
✔️ धारा का प्रभावी मान = 22 A
Question 33. एक परिपथ में R = 20 Ω और L = 0.2 H श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। यदि धारा का RMS मान 5 A है और f = 50 Hz है, तो औसत शक्ति ज्ञात कीजिए।
Answer:
➡️ X_L = 2πfL = 2 × 3.14 × 50 × 0.2 = 62.8 Ω
➡️ Z = √(R² + X_L²) = √(20² + 62.8²) = √(400 + 3940) = √4340 = 65.9 Ω
➡️ शक्ति गुणांक: cosφ = R/Z = 20 / 65.9 = 0.303
➡️ औसत शक्ति: P_avg = V_rms I_rms cosφ
अब V_rms = I_rms × Z = 5 × 65.9 = 329.5 V
अतः, P_avg = 329.5 × 5 × 0.303 = 499 W ≈ 500 W
✔️ औसत शक्ति = 500 W
————————————————————————————————————————————————————————————————————————————