Class 12, PHYSICS (Hindi)

Class 12 : Physics (Hindi) – अध्याय 2: स्थिरवैधुत विभव तथा धारिता

पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन


🔵 प्रस्तावना: विद्युत क्षेत्र से विभव की ओर
पिछले अध्याय में हमने विद्युत क्षेत्र की संकल्पना को समझा। अब हम उसी क्षेत्र के भीतर एक आवेश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किए गए कार्य के विचार से जुड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा सीखते हैं – वैद्युत विभव (Electric Potential)।
🌿 यह अध्याय विद्युत विभव, विभव अंतर, विभव ऊर्जा, धारिता और संधारित्र जैसे अवधारणाओं को स्पष्ट करता है।
✏️ नोट: यह अध्याय विद्युत ऊर्जा की अवधारणाओं को गहराई से समझने की नींव रखता है।

🟢 1. वैद्युत विभव (Electric Potential)
वैद्युत विभव किसी बिंदु पर वह कार्य है जो एकक धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में करना पड़ता है।
🧠 सूत्र:
V = W / q
जहाँ,
V = वैद्युत विभव
W = कार्य
q = परीक्षण आवेश
✔️ विभव एक अदिश राशि है।
✔️ इसका मात्रक वोल्ट (V) होता है।

🟡 2. वैद्युत विभव अंतर (Potential Difference)
विभव अंतर दो बिंदुओं के बीच कार्य का मापन है जो एकक परीक्षण आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक लाने में लगता है।
🧠 सूत्र:
ΔV = V₂ − V₁ = W / q
✔️ बैटरी, संधारित्र आदि उपकरण विभव अंतर पर कार्य करते हैं।

🔴 3. बिंदु आवेश के कारण विभव
यदि किसी बिंदु पर q आवेश स्थित है, तो दूरी r पर स्थित बिंदु पर वैद्युत विभव:
🧠 सूत्र:
V = (1 / 4πε₀) × (q / r)
✔️ यदि q धनात्मक है → विभव धनात्मक
✔️ यदि q ऋणात्मक है → विभव ऋणात्मक
✏️ नोट: r → ∞ होने पर विभव → 0

🟢 4. विभव और विद्युत क्षेत्र के मध्य संबंध
विद्युत क्षेत्र और विभव के मध्य गहरा संबंध है – विद्युत क्षेत्र, विभव के अंतराल से संबंधित होता है।
🧠 सूत्र:
E = − dV / dr
✔️ विद्युत क्षेत्र, विभव ढाल के विपरीत दिशा में होता है।
✏️ नोट: E अधिकतम होता है जहाँ विभव में तीव्र परिवर्तन हो।

🟡 5. वैद्युत विभव ऊर्जा
वैद्युत विभव ऊर्जा वह ऊर्जा है जो दो आवेशों के बीच अंतःक्रिया से उत्पन्न होती है।
🧠 सूत्र:
U = (1 / 4πε₀) × (q₁q₂ / r)
✔️ यदि q₁ और q₂ समान आवेश हैं → ऊर्जा धनात्मक
✔️ यदि विपरीत आवेश हैं → ऊर्जा ऋणात्मक

🔴 6. द्विध्रुव के लिए विभव
यदि दो विपरीत आवेश −q और +q, 2l दूरी पर स्थित हैं, तो उस द्विध्रुव से r दूरी पर विभव:
🧠 सूत्र:
V = (1 / 4πε₀) × (p cosθ / r²)
जहाँ,
p = द्विध्रुव आघूर्ण = q × 2l
θ = कोण जो r और p के बीच है
✏️ नोट: यह समीकरण दूरस्थ बिंदुओं के लिए मान्य है (r ≫ l)

🟢 7. विभव रेखाएँ (Equipotential Surfaces)
विभव रेखाएँ वे रेखाएँ या सतहें हैं जिनके हर बिंदु पर वैद्युत विभव समान होता है।
✔️ इन रेखाओं पर चलने पर कोई कार्य नहीं होता।
✔️ ये सदैव विद्युत क्षेत्र रेखाओं के लम्बवत होती हैं।
✔️ विभव रेखाएँ परस्पर नहीं कटतीं।
💡 उदाहरण: बिंदु आवेश के लिए – गोले जैसी सतहें।

🟡 8. विद्युत फ्लक्स की पुनरावृत्ति
⚡ विद्युत फ्लक्स का अर्थ है किसी सतह से होकर विद्युत क्षेत्र रेखाओं का प्रवाह।
🧠 सूत्र:
Φ = E ⋅ A = EA cosθ
✔️ यह धारिता में परोक्ष भूमिका निभाता है।

🔴 9. संधारित्र (Capacitor)
संधारित्र एक ऐसा यंत्र है जो विद्युत आवेश को संचय करता है।
✔️ सामान्यतः दो चालक प्लेटों के बीच डाइलेक्ट्रिक होता है।
🧠 धारिता सूत्र:
C = q / V
जहाँ,
C = धारिता (फ़ैराड),
q = संचयित आवेश
V = विभव अंतर
✏️ नोट: संधारित्र का उद्देश्य आवेश को नियंत्रित तरीके से संचय करना है।

🟢 10. समानांतर पट्टिका संधारित्र
इस प्रकार के संधारित्र में दो समांतर चालक पट्टियाँ होती हैं।
🧠 सूत्र:
C = ε₀A / d
✔️ A = क्षेत्रफल,
✔️ d = पट्टियों के बीच की दूरी
💡 यदि डाइलेक्ट्रिक लगाया जाए →
C = εA / d
जहाँ, ε = डाइलेक्ट्रिक माध्यम की पारगम्यता

🟡 11. धारिता पर डाइलेक्ट्रिक का प्रभाव
डाइलेक्ट्रिक संधारित्र की धारिता बढ़ा देता है क्योंकि यह इलेक्ट्रिक क्षेत्र को आंशिक रूप से निष्क्रिय करता है।
🧠 सापेक्ष पारगम्यता (K):
C = K × C₀
✔️ K > 1
✔️ जल के लिए K ≈ 80
✏️ नोट: डाइलेक्ट्रिक में भी ध्रुवण उत्पन्न होता है।

🔴 12. संधारित्र की ऊर्जा
संधारित्र में संग्रहीत ऊर्जा:
🧠 सूत्र:
U = (1/2) C V²
या
U = (1/2) qV
या
U = q² / (2C)
✔️ यह ऊर्जा प्लेटों के बीच के विद्युत क्षेत्र में संग्रहीत होती है।

🌟 यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है? 🌟
(📦 Why This Lesson Matters Box)
➡️ यह अध्याय विद्युत ऊर्जा के रूपांतरण की नींव रखता है।
➡️ बैटरी, संधारित्र, परिपथ डिज़ाइन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में इसकी सीधी भूमिका है।
➡️ ऊर्जा की दक्षता और नियंत्रण के लिए यह अध्याय अनिवार्य है।

📝 Quick Recap: (स्मृति-पुनरावलोकन)
🔵 V = W/q – वैद्युत विभव की परिभाषा
🟢 ΔV = V₂ − V₁ – विभव अंतर
🟡 V = (1 / 4πε₀) × (q / r) – बिंदु आवेश
🔴 E = − dV/dr – क्षेत्र और विभव संबंध
🟢 संधारित्र: C = q/V
🟡 समानांतर पट्टियाँ: C = ε₀A/d
🔴 डाइलेक्ट्रिक: C बढ़ता है
🟢 ऊर्जा: U = (1/2)CV²



🔻 सारांश (Summary in ~300 Words) 🔻
🔹 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता अध्याय विद्युत क्षेत्र की उन्नत अवधारणाओं को प्रस्तुत करता है। इसमें हम किसी बिंदु पर एकक धनात्मक परीक्षण आवेश को ले जाने में किए गए कार्य को वैद्युत विभव के रूप में परिभाषित करते हैं।
🔸 विभव एक अदिश राशि है, जो किसी बिंदु पर विद्युत ऊर्जा की मात्रा दर्शाती है। दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर, एकक आवेश को स्थानांतरित करने में किए गए कार्य के बराबर होता है।


🔹 विद्युत क्षेत्र और विभव के मध्य घनिष्ठ संबंध है – विद्युत क्षेत्र, विभव में परिवर्तन की दर के विपरीत होता है। विभव रेखाएँ वे सतहें हैं जिन पर विभव समान रहता है और वे विद्युत क्षेत्र रेखाओं के लंबवत होती हैं।
🔸 संधारित्र एक यांत्रिक उपकरण है जो विद्युत आवेश को संचय करता है। समानांतर पट्टिका संधारित्र का सूत्र C = ε₀A/d है। यदि डाइलेक्ट्रिक पदार्थ हो तो धारिता बढ़ जाती है।


🔹 संधारित्र में ऊर्जा संग्रहीत होती है जिसका सूत्र U = (1/2)CV² है। यह ऊर्जा इलेक्ट्रॉनिक्स, सर्किट डिज़ाइन, ऊर्जा भंडारण आदि में अत्यंत उपयोगी होती है।
यह अध्याय विद्युत की अवधारणाओं को ऊर्जा और वास्तविक जीवन उपकरणों से जोड़ता है, और आधुनिक विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण नींव तैयार करता है।

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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न



प्रश्न 2.1
5 × 10⁻⁸ C तथा -3 × 10⁻⁸ C के दो आवेश 16 cm दूरी पर स्थित हैं। दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के किस बिंदु पर वैद्युत विभव शून्य होगा? उस पर विभव शून्य तात्त्विक अथवा वास्तविक होगा?
उत्तर:
मान लीजिए, बिंदु P, आवेश q₁ = 5 × 10⁻⁸ C और q₂ = -3 × 10⁻⁸ C के मध्य स्थित है, जहाँ वैद्युत विभव शून्य है।
दोनों आवेशों के बीच की दूरी = 16 cm = 0.16 m
मान लें, बिंदु P, q₁ से x दूरी पर है, तो q₂ से दूरी = (0.16 – x) m
किसी बिंदु पर कुल वैद्युत विभव शून्य होने के लिए:
V₁ + V₂ = 0
⇒ kq₁/x + kq₂/(0.16 – x) = 0
⇒ q₁/x = -q₂/(0.16 – x)
⇒ 5 × 10⁻⁸ / x = 3 × 10⁻⁸ / (0.16 – x)
क्रॉस गुणा करके:
5(0.16 – x) = 3x
0.8 – 5x = 3x
0.8 = 8x
x = 0.1 m = 10 cm
∴ बिंदु P, q₁ से 10 cm तथा q₂ से 6 cm की दूरी पर स्थित होगा।
चूँकि यह बिंदु दो वास्तविक आवेशों के बीच स्थित है, इसलिए विभव शून्य वास्तविक होगा।

प्रश्न 2.2
10 cm व्यास वाला एक समान-मस्यु का प्रवर्ध शारीर पर 5 µC का आवेश है। मस्यु के केंद्र पर विभव परिकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया गया: व्यास = 10 cm ⇒ त्रिज्या R = 5 cm = 0.05 m
केंद्र पर स्थित बिंदु, चालक गोले के भीतर स्थित है। चालक गोले के भीतर किसी बिंदु पर विभव = सतह पर विभव
V = (1 / 4πε₀) × (Q / R)
Q = 5 µC = 5 × 10⁻⁶ C
ε₀ = 8.854 × 10⁻¹² C²/N·m²
(1 / 4πε₀) = 9 × 10⁹ N·m²/C²
⇒ V = 9 × 10⁹ × (5 × 10⁻⁶ / 0.05)
= 9 × 10⁹ × 1 × 10⁻⁴
= 9 × 10⁵ V
∴ केंद्र पर वैद्युत विभव = 9 × 10⁵ वोल्ट

प्रश्न 2.3
6 cm की दूरी पर अवस्थित दो बिंदुओं A एवं B पर क्रमशः 2 µC तथा –2 µC के आवेश हैं।
(a) निम्नलिखित बिंदु पर वैद्युत विभव की पहचान कीजिए:
(i) A के ठीक बीच
(ii) इस रेखा के प्रत्येक बिंदु पर बिंदु के बीच में स्थित बिंदु के लिए
(b) इस युग्म के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा क्या होगी?
उत्तर:
(a) (i) चूँकि A एवं B के बीच की दूरी 6 cm है, दोनों विपरीत समान आवेश हैं।
बीच का बिंदु O से A और B की दूरी = 3 cm
⇒ दोनों से विभव का परिमाण बराबर परंतु संकेत विपरीत
⇒ कुल विभव = शून्य
(ii) रेखा के प्रत्येक बिंदु पर कुल विभव = V₁ + V₂
चूँकि एक धन और एक ऋण आवेश है, अतः दोनो के संकेत अलग होंगे। परन्तु अलग-अलग बिंदुओं पर परिमाण अलग होगा।
(b) विद्युत क्षेत्र की दिशा हमेशा ऋण आवेश की ओर होती है।
∴ बिंदु A से B की ओर।

प्रश्न 2.4
12 cm त्रिज्या वाले एक गोलाकार चालक के पृष्ठ पर 1.6 × 10⁻⁷ C का आवेश सममित रूप से वितरित है:
(a) गोले के अंदर
(b) गोले के ठीक बाहर
(c) गोले के केंद्र से 18 cm पर अवस्थित, किसी बिंदु पर विभव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
R = 12 cm = 0.12 m, Q = 1.6 × 10⁻⁷ C
(a) गोले के अंदर किसी बिंदु पर विभव = सतह पर विभव
V = (1 / 4πε₀) × Q / R
= 9 × 10⁹ × 1.6 × 10⁻⁷ / 0.12
= 1.2 × 10⁴ V
(b) ठीक बाहर भी R = 0.12 m ⇒ विभव = 1.2 × 10⁴ वोल्ट
(c) r = 18 cm = 0.18 m
V = 9 × 10⁹ × 1.6 × 10⁻⁷ / 0.18
= 8 × 10³ वोल्ट

प्रश्न 2.5
एक समतल धात्विक संधारित्र, जिसकी प्लेटों की परिभाषित सतह A = 100 cm² है, तथा 8 pF (1 pF = 10⁻¹² F) की धारिता है, यदि प्लेटों के बीच की दूरी 1 mm कर दी जाए, और स्थान में 6 डायइलेक्ट्रिक का उपयोग किया जाए, तो नई धारिता क्या होगी?
उत्तर:
धारिता सूत्र:
C = (Kϵ₀A)/d
प्रारंभिक धारिता C₁ = 8 pF
K₂ = 6
तो नई धारिता:
C₂ = K × C₁ = 6 × 8 = 48 pF

प्रश्न 2.6
9 pF धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है।
(a) संयोजन की कुल धारिता ज्ञात कीजिए।
(b) यदि संयोजन को 120 V के समांतर स्रोत से जोड़ा जाए, तो प्रत्येक संधारित्र पर क्या विभवांत होगा?
उत्तर:
(a) श्रेणीक्रम में:
1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + 1/C₃ = 3/9
⇒ C = 3 pF
(b) कुल विभव = 120 V
हर संधारित्र पर एक समान आवेश होगा
V = Q / C
Q = C × V = 3 × 10⁻¹² × 120 = 3.6 × 10⁻¹⁰ C
अब, V = Q / C_individual = 3.6 × 10⁻¹⁰ / 9 × 10⁻¹² = 40 V
⇒ प्रत्येक पर विभवांतर = 40 V

प्रश्न 2.7
2 pF, 3 pF और 4 pF धारिता वाले तीन संधारित्रों को समानांतर में जोड़ा गया है।
(a) संयोजन की कुल धारिता ज्ञात कीजिए।
(b) यदि संयोजन को 100 V के स्रोत से जोड़ा जाए, तो हर संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a) समानांतर में:
C_total = C₁ + C₂ + C₃ = 2 + 3 + 4 = 9 pF
(b) Q = CV
Q₁ = 2 × 10⁻¹² × 100 = 2 × 10⁻¹⁰ C
Q₂ = 3 × 10⁻¹² × 100 = 3 × 10⁻¹⁰ C
Q₃ = 4 × 10⁻¹² × 100 = 4 × 10⁻¹⁰ C

प्रश्न 2.8
परिभाषित क्षेत्र और वायु वाले एक समतल संधारित्र की प्लेटें 6 × 10⁻³ m² क्षेत्र की हैं और 3 mm दूरी पर स्थित हैं। प्लेटों के बीच 100 V का विभवांतर है। संधारित्र की धारिता तथा संचित आवेश ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
A = 6 × 10⁻³ m², d = 3 mm = 3 × 10⁻³ m
V = 100 V
धारिता: C = ϵ₀A / d
= (8.85 × 10⁻¹² × 6 × 10⁻³) / (3 × 10⁻³)
= 17.7 × 10⁻¹² F = 17.7 pF
Q = CV = 17.7 × 10⁻¹² × 100 = 1.77 × 10⁻⁹ C

प्रश्न 2.9
प्रश्न 2.8 में लिए गए संधारित्र की प्लेटों को 3 mm मोटी अयस्क की चादर से भरा जाए, जिसका K = 6:
(a) विभव (वोल्टेज) समान जुड़ा रहेगा
(b) संधारित्र को हटा दिया जाए
उत्तर:
(a) नई धारिता = K × पूर्व धारिता = 6 × 17.7 = 106.2 pF
Q = C × V = 106.2 × 10⁻¹² × 100 = 1.062 × 10⁻⁸ C
(b) यदि संधारित्र हटाया जाए, तो पूरी ऊर्जा → बाह्य कार्य द्वारा उपयोग हो जाएगी।

प्रश्न 2.10
12 pF का एक संधारित्र 50 V की बैटरी से जुड़ा है। संधारित्र में कितनी वैद्युत ऊर्जा संचित होगी?
उत्तर:
U = ½ CV²
= ½ × 12 × 10⁻¹² × (50)²
= 6 × 10⁻¹² × 2500
= 1.5 × 10⁻⁸ J
∴ ऊर्जा = 1.5 × 10⁻⁸ जूल

प्रश्न 2.11
200 V समांतर (स्रोत) से एक 600 pF के संधारित्र को जोड़ा गया। फिर इस संधारित्र को विश्रांत कर उसे दो अन्य संधारित्रों C₁ और C₂ से जोड़ा गया। C₁ = 300 pF और C₂ = 300 pF
प्रत्येक में कितना आवेश होगा और कुल ऊर्जा कितनी होगी?
उत्तर:
Q_initial = C × V = 600 × 10⁻¹² × 200 = 1.2 × 10⁻⁷ C
अब C₁ और C₂ को जोड़ने पर C_total = 600 pF (समानांतर में)
⇒ Q_total = Q_initial = 1.2 × 10⁻⁷ C
Q₁ = Q₂ = 1.2 × 10⁻⁷ / 2 = 6 × 10⁻⁸ C
ऊर्जा:
U = ½ × C_total × V²
= ½ × 600 × 10⁻¹² × (200)²
= 0.5 × 600 × 10⁻¹² × 40000
= 1.2 × 10⁻⁵ J

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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न



Q1. यदि किसी बिंदु पर वैद्युत विभव शून्य है, तो निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?
(A) वहाँ पर आवेश शून्य है
(B) वहाँ पर विद्युत क्षेत्र शून्य है
(C) वहाँ पर कार्य नहीं करना पड़ता
(D) आवश्यक नहीं कि विद्युत क्षेत्र भी शून्य हो
उत्तर: (D)

Q2. दो समान आवेशों के मध्य किसी बिंदु पर वैद्युत विभव शून्य हो सकता है क्या?
(A) हाँ, सदैव
(B) नहीं, कभी नहीं
(C) केवल उनके मध्य बिंदु पर
(D) केवल असमान दूरी पर
उत्तर: (B)

Q3. यदि संधारित्र की धारिता C है और विभव V है, तो संचित ऊर्जा होगी –
(A) CV
(B) ½ CV²
(C) C²/V
(D) V²/C
उत्तर: (B)

Q4. 4πϵ₀ का मात्रक क्या होता है?
(A) न्यूटन
(B) वोल्ट
(C) मीटर/फैराड
(D) कूलॉम्ब² / न्यूटन·मीटर²
उत्तर: (D)

Q5. यदि एक चालक गोला 10 cm त्रिज्या का है और उस पर 1 µC आवेश है, तो उसकी सतह पर वैद्युत विभव का परिमाण –
(A) 9 × 10⁴ V
(B) 9 × 10³ V
(C) 9 × 10² V
(D) 9 V
उत्तर: (A)

Q6. विधान (Assertion): चालक की सतह पर विद्युत क्षेत्र सतह के लम्बवत होता है।
कारण (Reason): चालक की सतह समविभव होती है।
(A) दोनों सही हैं, और कारण विधान की सही व्याख्या है।
(B) दोनों सही हैं, पर कारण विधान की व्याख्या नहीं है।
(C) विधान सही है, कारण गलत है।
(D) दोनों गलत हैं।
उत्तर: (A)

Q7. यदि दो संधारित्र समान धारिता वाले हों और श्रेणीक्रम में जोड़े जाएं, तो कुल धारिता होगी –
(A) C
(B) 2C
(C) C/2
(D) √C
उत्तर: (C)

Q8. यदि पृथ्वी को चालक गोला मानें, तो उसकी धारिता का मान होगा –
(A) 4πε₀R
(B) ε₀/R²
(C) R²/ε₀
(D) 1/4πε₀R
उत्तर: (A)

Q9. 1 µF = …
(A) 10⁻⁶ F
(B) 10⁻⁹ F
(C) 10⁻¹² F
(D) 10⁻³ F
उत्तर: (A)

Q10. एक संधारित्र को बैटरी से जोड़कर उसमें डाइइलेक्ट्रिक रखने पर धारिता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(A) घटेगी
(B) बढ़ेगी
(C) शून्य होगी
(D) कोई प्रभाव नहीं
उत्तर: (B)

Q11. संधारित्र की ऊर्जा का विमीय सूत्र क्या होगा?
(A) ML²T⁻²
(B) MLT⁻²A⁻²
(C) M⁻¹L⁻²T⁴A²
(D) ML²T⁻²A²
उत्तर: (A)

Q12. यदि संधारित्र के प्लेटों की दूरी d कर दी जाए और क्षेत्रफल A हो, तो धारिता का सूत्र होगा –
(A) C = A/d
(B) C = ϵ₀A/d
(C) C = d/A
(D) C = ϵ₀d/A
उत्तर: (B)

Q13. दो समानांतर प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र की दिशा होती है –
(A) धन आवेश से ऋण आवेश की ओर
(B) ऋण आवेश से धन आवेश की ओर
(C) समांतर
(D) रेखा के लम्बवत
उत्तर: (A)

Q14. यदि वैद्युत विभव का ग्रेडिएंट बढ़ रहा है, तो विद्युत क्षेत्र –
(A) घटेगा
(B) बढ़ेगा
(C) शून्य रहेगा
(D) नकारात्मक होगा
उत्तर: (B)

Q15. किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र शून्य हो सकता है जबकि वहाँ विभव शून्य न हो, यह –
(A) संभव है
(B) असंभव है
(C) हमेशा होता है
(D) केवल चालक के भीतर होता है
उत्तर: (A)

Q16. विधान: चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
कारण: चालक के भीतर समविभव सतहें होती हैं।
(A) A व R दोनों सही व R, A की सही व्याख्या है
(B) A व R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं
(C) A सही, R गलत
(D) A गलत, R सही
उत्तर: (A)

Q17. केस आधारित:
एक चालक गोले पर 5 × 10⁻⁶ C आवेश है और त्रिज्या 0.1 m है।
बिंदु P, गोले के 0.05 m अंदर स्थित है।
Q: बिंदु P पर वैद्युत विभव का मान होगा –
(A) 4.5 × 10⁵ V
(B) 0 V
(C) 1 × 10⁵ V
(D) गोले की सतह के बराबर
उत्तर: (D)

Q18. एक संधारित्र की ऊर्जा 5 × 10⁻⁶ J है और धारिता 10 µF है। विभव होगा –
(A) 100 V
(B) 10 V
(C) 1000 V
(D) 500 V
उत्तर: (A)

🔷 खंड B – प्रश्न 19 से 23 (प्रत्येक 2 अंक)

Q19. एक चालक गोले की त्रिज्या 10 cm है और उस पर 2 µC आवेश है। गोले की सतह पर वैद्युत विभव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया:
त्रिज्या R = 10 cm = 0.10 m
आवेश Q = 2 µC = 2 × 10⁻⁶ C
ϵ₀ = 8.854 × 10⁻¹² C²/N·m²
(1/4πε₀) = 9 × 10⁹ N·m²/C²
सतह पर विभव:
V = (1 / 4πε₀) × (Q / R)
V = 9 × 10⁹ × (2 × 10⁻⁶ / 0.10)
V = 9 × 10⁹ × 2 × 10⁻⁵
V = 1.8 × 10⁵ V
अंतिम उत्तर:
V = 1.8 × 10⁵ वोल्ट

Q20. 6 µF धारिता वाले संधारित्र को 100 V बैटरी से जोड़ा गया। इसमें संचित ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया:
C = 6 µF = 6 × 10⁻⁶ F
V = 100 V
ऊर्जा सूत्र:
U = ½ CV²
U = ½ × 6 × 10⁻⁶ × (100)²
U = 3 × 10⁻⁶ × 10⁴
U = 3 × 10⁻² J
अंतिम उत्तर:
U = 0.03 जूल

Q21. 2 µC और -2 µC के दो बिंदु आवेशों के बीच बिंदु O पर वैद्युत विभव क्यों शून्य होता है?
उत्तर:
दोनों आवेश समान परिमाण के परंतु विपरीत संकेत के हैं।
O बिंदु यदि उनके मध्य हो, तो –
V₁ = kq/r
V₂ = k(-q)/r
⇒ कुल विभव V = V₁ + V₂ = 0
इसलिए:
विपरीत समान आवेशों के मध्य बिंदु पर विभव शून्य होता है।

Q22. यदि किसी संधारित्र को चार्ज करके बैटरी से अलग कर दिया जाए, और फिर प्लेटों के बीच डाइइलेक्ट्रिक रखा जाए, तो विभव पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
Q = नियत रहेगा (बैटरी हट चुकी है)
C = बढ़ेगी (K > 1)
V = Q / C
⇒ जब C बढ़ेगा, तो V घटेगा।
अंतिम निष्कर्ष:
विभव घट जाएगा।

Q23. यदि किसी संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए, पर बैटरी जुड़ी रहे, तो ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
V = नियत (बैटरी जुड़ी है)
C ∝ 1/d ⇒ जब d बढ़ेगा, C घटेगा
U = ½ CV² ⇒ C घटेगा तो U घटेगा
अंतिम निष्कर्ष:
ऊर्जा घट जाएगी।

🔷 खंड C – प्रश्न 24 से 28 (प्रत्येक 3 अंक)

Q24. एक समतल संधारित्र की प्लेटों का क्षेत्रफल 0.01 m² है तथा वे 1 mm की दूरी पर हैं। यदि डाइइलेक्ट्रिक न हो, तो धारिता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया:
A = 0.01 m²
d = 1 mm = 0.001 m
ϵ₀ = 8.854 × 10⁻¹² C²/N·m²
सूत्र:
C = (ϵ₀ × A) / d
= (8.854 × 10⁻¹² × 0.01) / 0.001
= 8.854 × 10⁻¹³ / 10⁻³
= 8.854 × 10⁻¹² F
अंतिम उत्तर:
C = 8.854 pF

Q25. यदि 3 µF, 6 µF और 9 µF धारिता वाले संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाए, तो कुल धारिता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
श्रृंखलाबद्ध संधारित्र:
1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + 1/C₃
⇒ 1/C = 1/3 + 1/6 + 1/9
= (6 + 3 + 2)/18 = 11/18
C = 18/11 µF ≈ 1.64 µF
अंतिम उत्तर:
C = 1.64 µF (लगभग)

Q26. एक संधारित्र 120 V बैटरी से जुड़ा है और उसमें कुल 2.4 × 10⁻⁴ C आवेश संचित है। धारिता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
Q = 2.4 × 10⁻⁴ C
V = 120 V
C = Q / V
= 2.4 × 10⁻⁴ / 120
= 2 × 10⁻⁶ F = 2 µF
अंतिम उत्तर:
C = 2 µF

Q27. दो संधारित्रों की धारिता 4 µF और 6 µF है। यदि वे समानांतर क्रम में जोड़े जाएं, तो:
(a) कुल धारिता
(b) 100 V बैटरी से जुड़ने पर कुल ऊर्जा
उत्तर:
(a) C_total = C₁ + C₂ = 4 + 6 = 10 µF
(b) U = ½ CV² = ½ × 10 × 10⁻⁶ × (100)² = 5 × 10⁻⁶ × 10⁴ = 0.05 J
उत्तर:
धारिता = 10 µF, ऊर्जा = 0.05 J

Q28. एक संधारित्र की ऊर्जा 0.04 J है और उसका विभव 200 V है। धारिता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
U = ½ CV²
⇒ C = 2U / V² = 2 × 0.04 / (200)²
= 0.08 / 40000 = 2 × 10⁻⁶ F
अंतिम उत्तर:
C = 2 µF


🔶 खंड D – केस आधारित प्रश्न (प्रत्येक 4 अंक)
प्रश्न 29 से 31

Q29.
स्थिति: एक चालक गोले की त्रिज्या 10 cm है और उस पर 4 µC का आवेश है।
(a) गोले की सतह पर वैद्युत विभव ज्ञात कीजिए।
(b) गोले के केंद्र पर विभव और विद्युत क्षेत्र क्या होंगे?
उत्तर:
(a)
R = 10 cm = 0.1 m
Q = 4 µC = 4 × 10⁻⁶ C
V = (1 / 4πε₀) × (Q / R)
= 9 × 10⁹ × 4 × 10⁻⁶ / 0.1
= 3.6 × 10⁵ V
(b)
केंद्र पर विद्युत क्षेत्र = 0 (क्योंकि चालक के भीतर E = 0)
केंद्र पर विभव = सतह के बराबर = 3.6 × 10⁵ V

Q30.
स्थिति: एक संधारित्र की प्लेटों के मध्य की दूरी 2 mm है और क्षेत्रफल 0.02 m² है। संधारित्र वायु से भरा है और 100 V से जुड़ा है।
(a) धारिता ज्ञात कीजिए।
(b) ऊर्जा और संचित आवेश ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a)
C = ϵ₀A / d
= (8.854 × 10⁻¹² × 0.02) / 0.002
= 8.854 × 10⁻¹² × 10 = 8.854 × 10⁻¹¹ F
(b)
Q = CV = 8.854 × 10⁻¹¹ × 100 = 8.854 × 10⁻⁹ C
U = ½ CV² = ½ × 8.854 × 10⁻¹¹ × 10000
= 4.427 × 10⁻⁷ J

Q31.
स्थिति: तीन संधारित्रों की धारिता क्रमशः 2 µF, 3 µF और 6 µF है। उन्हें समानांतर में जोड़ा गया है और 100 V बैटरी से जोड़ा गया है।
(a) कुल धारिता और कुल संचित आवेश ज्ञात कीजिए।
(b) प्रत्येक संधारित्र पर विभव और संचित आवेश ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a)
C_total = 2 + 3 + 6 = 11 µF
Q_total = C × V = 11 × 10⁻⁶ × 100 = 1.1 × 10⁻³ C
(b)
V = 100 V (सभी पर समान)
Q₁ = 2 × 10⁻⁶ × 100 = 2 × 10⁻⁴ C
Q₂ = 3 × 10⁻⁶ × 100 = 3 × 10⁻⁴ C
Q₃ = 6 × 10⁻⁶ × 100 = 6 × 10⁻⁴ C

🔷 खंड E – दीर्घ उत्तर प्रश्न (प्रत्येक 5 अंक)
प्रश्न 32 से 35

Q32.
प्रश्न:
स्थिर वैद्युत क्षेत्र में किसी आवेशित कण को अनन्त पर ले जाने के लिए किए गए कार्य को परिभाषित कीजिए। एक बिंदु आवेश Q के कारण किसी बिंदु P पर वैद्युत विभव का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
परिभाषा:
किसी बिंदु पर वैद्युत विभव वह कार्य है, जो एकात्मक धन आवेश को अनन्त से उस बिंदु तक लाने में करना पड़े, बिना त्वरण के।
व्युत्पत्ति:
Q बिंदु आवेश है, P उस से r दूरी पर है।
एकात्मक धन आवेश q = 1 C को अनन्त से P तक लाना है।
V = कार्य / q = ∫∞^r (F·dr)/q
F = (1/4πε₀) × (Qq / r²)
V = (1/4πε₀) × ∫∞^r (Q / r²) dr
V = (1/4πε₀) × [–Q/r]∞^r
V = (1/4πε₀) × Q / r
अंतिम उत्तर:
V = (1 / 4πε₀) × (Q / r)

Q33.
प्रश्न:
डाइइलेक्ट्रिक पदार्थ का संधारित्र की धारिता पर क्या प्रभाव पड़ता है? यदि K उसका डाइइलेक्ट्रिक नियतांक हो, तो नवीन धारिता का व्यंजक दीजिए।
उत्तर:
डाइइलेक्ट्रिक पदार्थ, विद्युत क्षेत्र को कम करता है और संधारित्र की धारिता को बढ़ाता है।
विवरण:
शून्य माध्यम में धारिता: C₀ = ϵ₀A / d
डाइइलेक्ट्रिक माध्यम में: C = Kϵ₀A / d
⇒ C = K × C₀
जहाँ:
K > 1 ⇒ धारिता बढ़ती है
K = 1 ⇒ वायु या निर्वात
K < 1 ⇒ असंभव (भौतिक रूप से)
अंतिम व्यंजक:
C = K × C₀

Q34.
प्रश्न:
यदि एक संधारित्र की ऊर्जा 0.05 J है और उसमें 5 × 10⁻⁵ C आवेश है, तो
(a) धारिता ज्ञात कीजिए
(b) विभव ज्ञात कीजिए
उत्तर:
(a) ऊर्जा सूत्र:
U = Q² / (2C)
⇒ C = Q² / (2U)
= (25 × 10⁻¹⁰) / (2 × 0.05)
= 25 × 10⁻¹⁰ / 0.1
= 2.5 × 10⁻⁹ F = 2.5 nF
(b) V = Q / C = 5 × 10⁻⁵ / 2.5 × 10⁻⁹ = 2 × 10⁴ V = 20000 V
अंतिम उत्तर:
C = 2.5 nF, V = 20000 V

Q35.
प्रश्न:
विस्तृत रूप में समझाइए कि संधारित्र को बैटरी से जोड़ कर और अलग करके उसमें डाइइलेक्ट्रिक डालने पर विभव, ऊर्जा और धारिता कैसे बदलती है?
उत्तर:
स्थिति 1: बैटरी जुड़ी है
V = नियत
C → C’ = K × C
Q = CV → बढ़ता है
ऊर्जा U = ½ CV² → बढ़ती है
स्थिति 2: बैटरी हटाई गई है
Q = नियत
C → K × C
V = Q / C → घटता है
U = Q² / (2C) → घटती है
सारांश:
डाइइलेक्ट्रिक धारिता को बढ़ाता है। बैटरी जुड़ी हो तो ऊर्जा और आवेश दोनों बढ़ते हैं, पर यदि बैटरी हटा दी जाए तो विभव और ऊर्जा घटते हैं।

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