Class 11, PHYSICS (Hindi)

Class 11 : Physics (In Hindi) – अध्याय 7: गुरुत्वाकर्षण

पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन

🌿 1. परिचय (Introduction)
➡️ ब्रह्माण्ड की प्रत्येक वस्तु अन्य वस्तुओं को आकर्षित करती है। यह आकर्षण शक्ति गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force) कहलाती है।
🔹 यह बल सार्वभौमिक है — इसका प्रभाव ग्रहों, उपग्रहों, तारों, और हमारे शरीर तक पर पड़ता है।
🔹 यही बल पृथ्वी पर वस्तुओं को नीचे गिराता है और सौरमंडल में ग्रहों को उनकी कक्षा में बनाए रखता है।
💡 आविष्कार:
सन् 1687 में आइज़क न्यूटन ने इस बल को मात्रात्मक रूप में व्यक्त किया — इसे न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम कहा जाता है।


💡 2. न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम
➡️ प्रत्येक दो पिंड एक-दूसरे को ऐसे बल से आकर्षित करते हैं जो —
1️⃣ उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती होता है।
2️⃣ उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
✏️ सूत्र:
F = G (m₁ m₂) / r²
जहाँ,
🔹 F = गुरुत्वाकर्षण बल
🔹 G = सार्वत्रिक गुरुत्व स्थिरांक
🔹 m₁, m₂ = दोनों पिंडों के द्रव्यमान
🔹 r = उनके केन्द्रों के बीच की दूरी
💡 यह बल आकर्षण का होता है, सदैव दोनों पिंडों को एक-दूसरे की ओर खींचता है।

⚙️ 3. सार्वत्रिक गुरुत्व स्थिरांक (G)
➡️ इसका मान G = 6.67 × 10⁻¹¹ N·m²/kg² है।
🔹 G का मान पहली बार हेनरी कैवेंडिश (Henry Cavendish, 1798) ने टॉर्शन बैलेंस प्रयोग से मापा था।
💡 आयाम और इकाई:
🔸 SI इकाई: N·m²/kg²
🔸 आयाम: [M⁻¹ L³ T⁻²]

🧠 4. पृथ्वी पर गुरुत्वजनित त्वरण (g)
➡️ पृथ्वी द्वारा किसी द्रव्यमान m पर लगाया गया बल —
F = G (M m) / R²
जहाँ M = पृथ्वी का द्रव्यमान, R = पृथ्वी की त्रिज्या।
परंतु F = m g ⇒
g = G M / R²
✔️ यह पृथ्वी की सतह के समीप लगभग 9.8 m/s² होता है।

✏️ 5. g का ऊँचाई व गहराई के साथ परिवर्तन
(A) ऊँचाई (h) पर —
g_h = g (1 − 2h/R)
(जब h ≪ R हो)
(B) गहराई (d) पर —
g_d = g (1 − d/R)
💡 अर्थात ऊँचाई बढ़ने या गहराई में जाने पर g घटता है।

🟢 6. गुरुत्वीय क्षेत्र (Gravitational Field)
➡️ किसी बिंदु पर गुरुत्वीय क्षेत्र वह क्षेत्र होता है जहाँ किसी द्रव्यमान पर गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है।
✏️ गुरुत्वीय क्षेत्र तीव्रता (E):
E = F / m = G M / r²
✔️ यह बल की दिशा के समान होती है और सदैव आकर्षणात्मक होती है।

🔴 7. गुरुत्वीय विभव (Gravitational Potential)
➡️ किसी बिंदु पर गुरुत्वीय विभव वह कार्य होता है जो इकाई द्रव्यमान को अनन्त से उस बिंदु तक लाने में किया जाता है।
✏️ सूत्र:
V = − G M / r
✔️ ऋण चिह्न दर्शाता है कि यह आकर्षण बल है।

8. गुरुत्वीय विभव ऊर्जा (Potential Energy)
➡️ किसी द्रव्यमान m को r दूरी पर रखने में की गई ऊर्जा —
U = − G M m / r
💡 यह ऋणात्मक होती है क्योंकि वस्तु को अनन्त से लाने में कार्य “बल के विरुद्ध” होता है।

💡 9. उपग्रह की गति (Satellite Motion)
➡️ जब कोई पिंड पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, तो उसकी गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल उसे गुरुत्वाकर्षण बल प्रदान करता है।
✏️ संतुलन:
G M m / r² = m v² / r
v = √(G M / r)
✔️ यह उपग्रह की कक्षीय वेग (Orbital Velocity) है।

🧮 10. कक्षीय काल (Orbital Period)
➡️ उपग्रह का एक चक्कर लगाने में लगा समय —
T = 2πr / v = 2π √(r³ / G M)
✔️ इसे केपलर का तृतीय नियम भी कहते हैं।

🟡 11. भूस्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite)
➡️ वह उपग्रह जो पृथ्वी के साथ घूमते हुए सदैव एक ही स्थान के ऊपर दिखाई देता है।
✏️ शर्तें:
🔹 परिक्रमण काल = 24 घंटे
🔹 पृथ्वी के भूमध्य रेखा के ऊपर स्थित
🔹 पृथ्वी की दिशा में ही घूमता है
💡 इसका उपयोग संचार, मौसम पूर्वानुमान व प्रसारण में होता है।



💫 12. पलायन वेग (Escape Velocity)
➡️ किसी वस्तु को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम वेग —
v_e = √(2 G M / R)
✔️ पृथ्वी के लिए v_e ≈ 11.2 km/s।

🧠 13. केपलर के नियम (Kepler’s Laws)
(i) दीर्घवृत्तीय कक्षा का नियम:
प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर एक दीर्घवृत्त में घूमता है, जिसमें सूर्य एक नाभि पर स्थित होता है।
(ii) क्षेत्रीय वेग का नियम:
ग्रह से सूर्य को जोड़ने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल झाड़ती है।
✏️ यह कोणीय संवेग संरक्षण का परिणाम है।
(iii) आवर्त काल का नियम:
ग्रह के कक्षीय काल (T) का वर्ग उसकी कक्षा के अर्ध-दीर्घ-अक्ष (a) के घन के समानुपाती होता है।
T² ∝ a³

🔵 14. दो-पिंड प्रणाली में द्रव्यमान केंद्र
➡️ दो पिंडों m₁, m₂ (दूरी r) के लिए द्रव्यमान केंद्र उस बिंदु पर होता है जहाँ —
m₁ r₁ = m₂ r₂
और
r₁ + r₂ = r
अतः
r₁ = (m₂ r) / (m₁ + m₂)
r₂ = (m₁ r) / (m₁ + m₂)

15. पृथ्वी के बाहर g का परिवर्तन (ऊँचाई पर)
g_h = g (R² / (R + h)²)
➡️ h बढ़ने पर g घटता है।
उदाहरण: यदि h = R हो, तो g_h = g/4।

🟢 16. पृथ्वी के अन्दर g का परिवर्तन (गहराई d पर)
g_d = g (1 − d/R)
➡️ जब d = R, तो g_d = 0
✔️ अतः पृथ्वी के केंद्र पर g शून्य होता है।

💡 17. ग्रहों की कक्षा और अभिकेन्द्र बल
➡️ ग्रह के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल गुरुत्व बल से मिलता है —
F_c = m v² / r = G M m / r²
✔️ इसलिए ग्रह लगातार अपनी कक्षा में बने रहते हैं।

🧠 18. उपग्रह की यांत्रिक ऊर्जा
➡️ कक्षा में उपग्रह की कुल ऊर्जा —
E = K + U = ½ m v² − G M m / r
और क्योंकि v² = G M / r ⇒
E = − G M m / (2r)
✔️ यह ऋणात्मक है, दर्शाता है कि उपग्रह पृथ्वी से बंधा है।

🔴 19. पलायन ऊर्जा (Escape Energy)
➡️ किसी वस्तु को पृथ्वी से अनन्त दूरी तक पहुँचाने के लिए आवश्यक ऊर्जा —
E = G M m / (2R)

🟣 20. उपग्रह का भारहीनता अनुभव
➡️ उपग्रह और उसमें स्थित वस्तुएँ समान गुरुत्वीय त्वरण से गिरती हैं, इसलिए एक-दूसरे पर बल नहीं लगातीं।
✔️ यह स्थिति भारहीनता (Weightlessness) कहलाती है।

💫 21. कृत्रिम उपग्रहों के उपयोग
🔹 संचार एवं प्रसारण
🔹 मौसम का पूर्वानुमान
🔹 पृथ्वी का मानचित्रण
🔹 रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान

🧮 22. पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र और उपग्रह की कक्षा का सम्बन्ध
➡️ उपग्रह की गति गुरुत्वीय बल और अभिकेन्द्र बल के संतुलन पर निर्भर करती है।
यदि यह संतुलन टूट जाए तो —
🔸 बल अधिक होने पर उपग्रह पृथ्वी पर गिरता है।
🔸 बल कम होने पर उपग्रह पृथ्वी से दूर चला जाता है।

🟡 भाग 2 : सारांश (Summary ~300 शब्द)
🔹 प्रत्येक दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षण का होता है।
🔹 न्यूटन का नियम: F = G m₁m₂ / r²
🔹 G = 6.67 × 10⁻¹¹ N·m²/kg²
🔹 पृथ्वी पर g = 9.8 m/s²
🔹 g = G M / R²
🔹 ऊँचाई पर g_h = g (1 − 2h/R), गहराई पर g_d = g (1 − d/R)
🔹 गुरुत्वीय क्षेत्र तीव्रता E = G M / r²
🔹 गुरुत्वीय विभव V = − G M / r
🔹 उपग्रह की कक्षीय वेग v = √(G M / r)
🔹 कक्षीय काल T = 2π √(r³ / G M)
🔹 पलायन वेग v_e = √(2 G M / R) ≈ 11.2 km/s
🔹 कुल ऊर्जा E = − G M m / (2r)
🔹 केपलर के तीन नियम ग्रहों की गति को नियंत्रित करते हैं।

📝 Quick Recap
1️⃣ F = G m₁m₂ / r²
2️⃣ g = G M / R²
3️⃣ g_h = g (1 − 2h/R), g_d = g (1 − d/R)
4️⃣ v = √(G M / r) और v_e = √(2 G M / R)
5️⃣ T² ∝ r³
6️⃣ E_total = − G M m / (2r)

————————————————————————————————————————————————————————————————————————————

पाठ्यपुस्त के प्रश्न

🔵🔵🔵

प्रश्न 7.1
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए :
(a) आप किसी आवेश का वैद्युत बलों से परिरक्षण उस आवेश को किसी खोखले चालक के भीतर रखकर कर सकते हैं। क्या आप किसी पिण्ड का परिरक्षण, निकट में रखे पिण्ड के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे किसी खोखले गोले में रखकर कर सकते हैं?
(b) पृथ्वी के बाहर परिक्रमण करते हुए किसी अन्तरिक्षयान में बैठा अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल को “न अनुभव” करता है — ऐसा क्यों? परिक्रमा करता अन्तरिक्ष स्टेशन पृथ्वी के गुरुत्व क्षेत्र में होते हुए भी “भारहीन” क्यों लगता है?
(c) यदि आप पृथ्वी की सतह पर खड़े व्यक्ति पर कार्यरत गुरुत्वीय बलों का विचार करें, तो सूर्य का गुरुत्वीय प्रभाव पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से अधिक क्यों नहीं दिखता? संक्षेप में कारण दीजिए।

उत्तर 7.1
(a) 🔹 नहीं। वैद्युत परिरक्षण चालक के भीतर मुक्त आवेशों के पुनर्विन्यास के कारण सम्भव होता है, पर गुरुत्वीय बल द्रव्यमान पर निर्भर है और इसके लिए कोई “ऋणात्मक द्रव्यमान” या परिरक्षण माध्यम उपलब्ध नहीं है। अतः किसी खोखले गोले से गुरुत्वीय परिरक्षण सम्भव नहीं।

(b) 🔹 परिक्रमा में अन्तरिक्षयान तथा यात्री—दोनों पर समान केन्द्रीय त्वरण होता है और वे एक साथ मुक्त-पतन अवस्था में रहते हैं। शरीर, यान और भीतर की वस्तुएँ आपेक्षिक रूप से एक-दूसरे पर सहारा बल उत्पन्न नहीं करतीं, इसलिए “भार” का अनुभूति नहीं होती (भार = सहारा बल)। गुरुत्व बल अस्तित्व में है पर सब पर समान प्रकार से कार्य कर रहा है, इसलिए भारहीनता प्रतीत होती है।

(c) 🔹 सूर्य का द्रव्यमान बहुत बड़ा है, पर पृथ्वी की सतह पर किसी व्यक्ति पर पृथ्वी का गुरुत्व बल बहुत अधिक है क्योंकि व्यक्ति से पृथ्वी का केन्द्र बहुत निकट है (F ∝ 1/r²)। सूर्य–व्यक्ति दूरी अत्यधिक होने से सूर्य का बल अपेक्षाकृत बहुत छोटा हो जाता है; इसलिए प्रभाव स्पष्ट नहीं दिखता।

━━━━━━━━━━

प्रश्न 7.2
सही विकल्प/कथन चुनिए :
(a) बढ़ती ऊँचाई के साथ गुरुत्वीय त्वरण g बढ़ता/घटता है।
(b) बढ़ती गहराई (पृथ्वी को समान घनत्व का गोला मानकर) के साथ g बढ़ता/घटता है।
(c) गुरुत्वीय ध्रुवांक G का मान स्थान/समय पर निर्भर नहीं करता।
(d) पृथ्वी के केन्द्र से r₁ तथा r₂ दूर स्थित दो बिन्दुओं के बीच गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का अंतर ΔU के लिए
  सूत्र −G M m(1/r₂ − 1/r₁) तथा mg(r₂ − r₁) में कौन-सा सही है?

उत्तर 7.2
(a) 🔵 घटता है
➡️ कारण: r बढ़ने पर g = G M / r² ⇒ g ∝ 1/r², अतः ऊँचाई बढ़ने पर g कम।

(b) 🟢 घटता है (केन्द्र की ओर जाते हुए रैखिक रूप से) ।
➡️ समान घनत्व मानने पर g ∝ r (केन्द्र पर g = 0), अतः सतह से गहराई बढ़ाने पर g घटता है।

(c) 🔵 सही
➡️ G एक सर्वमान्य स्थिरांक है; यह स्थान, समय, माध्यम पर निर्भर नहीं करता।

(d) 🟡 सामान्यतः सही सूत्र:
➡️ 🔹 −G M m(1/r₂ − 1/r₁) — यह सटीक है, किसी भी r₁, r₂ के लिए मान्य।
➡️ 🔹 mg(r₂ − r₁) — यह केवल निकट-पृथ्वी (r ≈ R, g लगभग नियत) में लगभग सही है; सामान्य रूप से मान्य नहीं।

💡 सार: (a) घटता है, (b) घटता है, (c) सही, (d) पहला सूत्र सामान्य; दूसरा केवल निकटानुमान।

🔵🔵🔵

प्रश्न 7.3
मान लीजिए एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के परितः पृथ्वी की तुलना में दोगुनी चाल से गति करता है, तब पृथ्वी की कक्षा की तुलना में उसका कक्षीय आयाम क्या है?

उत्तर 7.3
✏️ चरण 1: वृत्ताकार कक्षा के लिए कक्षीय चाल
v = √(GM/r) ⇒ v ∝ r^(−1/2)

✏️ चरण 2: v₂ = 2 vₑ दिया है
2 = (rₑ / r₂)^(1/2) ⇒ (rₑ / r₂) = 4

✔️ निष्कर्ष: r₂ = rₑ / 4
🔵 अर्थात उस ग्रह की कक्षा की त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या का 1/4 है (कक्षीय आयाम 4 गुना छोटा)।

प्रश्न 7.4
बृहस्पति के एक उपग्रह आयो (Io) की कक्षीय अवधि 1.769 दिन तथा कक्षा की त्रिज्या 4.22 × 10^8 m है। दिखाइए कि बृहस्पति का द्रव्यमान, सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 1/1000 भाग है (क्रमानुमान पर्याप्त)।

उत्तर 7.4
✏️ चरण 1: उपग्रही गति से केन्द्रक द्रव्यमान (बृहस्पति)
M_J = 4π^2 a^3 / (G T^2)

जहाँ a = 4.22×10^8 m, T = 1.769 दिन = 1.5284×10^5 s

✏️ चरण 2: मान लगाने पर
a^3 ≈ 7.515×10^25 m^3
T^2 ≈ 2.336×10^10 s^2
M_J ≈ (4π^2 × 7.515×10^25) / (6.67×10^−11 × 2.336×10^10)
1.9 × 10^27 kg

✏️ चरण 3: सूर्य का द्रव्यमान M_☉ ≈ 1.99×10^30 kg
अनुपात: M_J / M_☉ ≈ (1.9×10^27) / (1.99×10^30) ≈ 9.6×10^−4

✔️ निष्कर्ष: बृहस्पति का द्रव्यमान ≈ 0.001 × M_☉
🟢 अर्थात लगभग 1/1000 भाग (क़रीबी अनुमान)।

🔵🔵🔵

प्रश्न 7.7
क्या किसी पिण्ड की पृथ्वी से पलायन चाल (a) पिण्ड के द्रव्यमान, (b) प्रक्षेपण बिन्दु की अवस्थिति, (c) प्रक्षेपण की दिशा, (d) पिण्ड के प्रक्षेपण की अवस्थिति की ऊँचाई पर निर्भर करती है?

उत्तर 7.7
💡 मूल सूत्र (वायु प्रतिरोध तथा पृथ्वी के घूर्णन की उपेक्षा):
पलायन चाल v_esc = √(2 G M / r) (यहाँ r = पृथ्वी के केन्द्र से प्रक्षेपण बिन्दु तक दूरी)

🔹 (a) पिण्ड के द्रव्यमान पर ⇒ नहीं निर्भर करता।
🔹 (b) प्रक्षेपण बिन्दु की अवस्थिति (यदि पृथ्वी की सतह पर कहीं भी हो और r ≈ R रहे) ⇒ नहीं निर्भर करता; v_esc समान रहता है।
🔹 (c) प्रक्षेपण की दिशा पर ⇒ नहीं निर्भर करता (केवल r पर निर्भरता)।
🔹 (d) प्रक्षेपण की ऊँचाई पर ⇒ हाँ; क्योंकि r बदलता है, अतः v_esc बदलता है (ऊँचाई बढ़ने पर r बढ़ेगा और v_esc घटेगा)।

✅ सार: (a) नहीं, (b) नहीं, (c) नहीं, (d) हाँ — v_esc केवल r पर निर्भर।

प्रश्न 7.8
कोई उपग्रह सूर्य की परिक्रमा दीर्घवृत्ताकार कक्षा में कर रहा है। क्या अपनी कक्षा में उपग्रह के सूर्य से (a) रैखिक चाल, (b) कोणीय चाल, (c) कोणीय संवेग, (d) गतिज ऊर्जा, (e) स्थितिज ऊर्जा, (f) कुल ऊर्जा नियत रहती है? (सूर्य के अति निकट आने पर द्रव्यमान-हानि नगण्य मानी जाए।)

उत्तर 7.8
🧠 तर्क: सूर्य का गुरुत्व बल केंद्रीय है ⇒ बाह्य बलाघूर्ण शून्य ⇒ कोणीय संवेग संरक्षित। दीर्घवृत्त में r बदलता रहता है ⇒ v, ω, K, U बदलते हैं, पर कुल ऊर्जा E = K + U = −(G M m)/(2a) (a = अर्ध दीर्घ-अक्ष) नियत रहती है।

🔵 निष्कर्ष (एक-एक बिंदु):
(a) रैखिक चाल v — ❌ नियत नहीं (उपसौर पर अधिक, अपसौर पर कम)।
(b) कोणीय चाल ω — ❌ नियत नहीं (क्षेत्रफल-वेग नियत ⇒ r बदलने पर ω बदलता है)।
(c) कोणीय संवेग L = m r v — ✔️ नियत (केंद्रीय बल ⇒ बाह्य बलाघूर्ण 0)।
(d) गतिज ऊर्जा K = ½ m v² — ❌ नियत नहीं (v बदलता है)।
(e) स्थितिज ऊर्जा U = − G M m / r — ❌ नियत नहीं (r बदलता है)।
(f) कुल ऊर्जा E = K + U — ✔️ नियत (केवल कक्षा के अर्ध दीर्घ-अक्ष a पर निर्भर)।

🔵🔵🔵

प्रश्न 7.9
निम्नलिखित में से कौन से लक्षण अन्तरिक्ष में अन्तरिक्ष यात्रियों के लिए दुष्प्रभावी हो सकते हैं? (a) पैरों में सूजन, (b) चेहरे पर सूजन, (c) सिरदर्द, (d) दिग्भ्रमण समस्या

उत्तर 7.9
✔️ सही विकल्प: (b), (c), (d)
💡 कारण: सूक्ष्म-गुरुत्व में द्रव ऊपर की ओर खिसकता है ⇒ चेहरे पर सूजन, सिरदर्द, दिग्भ्रमण सामान्य हैं; पैरों में सूजन प्रायः नहीं होती।

प्रश्न 7.10
एकसमान द्रव्यमान घनत्व का अर्धगोलीय खोला (चित्र 7.11) — उसके वृत्ताकार मुख के केन्द्र C पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा (i) a, (ii) b, (iii) c, (iv) 0 में किस तीर द्वारा दर्शायी जाएगी?

उत्तर 7.10
✔️ सही विकल्प: (iii) c
💡 सममिति से क्षैतिज अवयव आपस में कटते हैं; योगफल की दिशा नीचे (खोल की ओर) होती है।

प्रश्न 7.11
उपरोक्त समस्या में किसी बाह्य बिन्दु P पर गुरुत्वीय तीव्रता किस तीर (i) d, (ii) e, (iii) f, (iv) g द्वारा दर्शायी जाएगी?

उत्तर 7.11
✔️ सही विकल्प: (ii) e
💡 P बाएँ किनारे के निकट है; निकट भाग का योगदान अधिक ⇒ परिणामी दिशा तिर्यक नीचे-बाएँ (e)।

प्रश्न 7.12
पृथ्वी–सूर्य प्रणाली हेतु: सूर्य का द्रव्यमान 2×10^30 kg, पृथ्वी का द्रव्यमान 6×10^24 kg, औसत दूरी r = 1.5×10^11 m है। G = 6.67×10^-11 SI.
(a) पृथ्वी व सूर्य के बीच गुरुत्वीय बल का मान ज्ञात कीजिए।
(b) सूर्य के कारण पृथ्वी की कक्षीय चाल ज्ञात कीजिए।

उत्तर 7.12
✏️ चरण 1: गुरुत्वीय बल
F = G M_☉ M_प / r^2
= (6.67×10^-11 × 2×10^30 × 6×10^24) / (1.5×10^11)^2
≈ 3.56×10^22 N

✏️ चरण 2: कक्षीय चाल
v = √(G M_☉ / r)
= √[(6.67×10^-11 × 2×10^30) / (1.5×10^11)]
≈ 2.98×10^4 m s^-1 ≈ 29.8 km s^-1

✔️ निष्कर्ष: F ≈ 3.56×10^22 N तथा v ≈ 29.8 km s^-1.

🔵🔵🔵

प्रश্ন 7.13
आप सूर्य को कैसे तौलेंगे, अर्थात उसके द्रव्यमान का आकलन कैसे करेंगे? सूर्य के परितः पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या 1.5×10^8 किलोमीटर है।

उत्तर 7.13
✏️ विधि (केपलर–न्यूटन):
T^2 = 4π^2 r^3 / (G M_सूर्य) ⇒ M_सूर्य = 4π^2 r^3 / (G T^2)

🔹 r = 1.5×10^8 किलोमीटर = 1.5×10^11 मीटर
🔹 T = 1 वर्ष = 3.15576×10^7 सेकण्ड
🔹 G = 6.67×10^-11

➡️ r^3 = 3.375×10^33, 4π^2 r^3 ≈ 1.33×10^35, G T^2 ≈ 6.65×10^4
👉 M_सूर्य ≈ 2.0×10^30 किलोग्राम

✔️ निष्कर्ष: सूर्य का द्रव्यमान लगभग 2.0×10^30 किलोग्राम।

प्रश्न 7.14
एक ग्रह का “पृथ्वी–वर्ष” पृथ्वी से 29.5 गुना है। यदि पृथ्वी सूर्य से 1.5×10^8 किलोमीटर दूर है, तो ग्रह सूर्य से कितनी दूर है?

उत्तर 7.14
✏️ नियम: (T/T_प)^2 = (r/r_प)^3
T/T_प = 29.5 ⇒ r = r_प × (29.5)^(2/3)

🔹 (29.5)^(2/3) ≈ 9.55, r_प = 1.5×10^8 किलोमीटर
👉 r ≈ 9.55 × 1.5×10^8 = 1.43×10^9 किलोमीटर

✔️ ग्रह की औसत दूरी ≈ 1.43×10^9 किलोमीटर।

प्रश्न 7.15
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 63 न्यूटन है। पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर पृथ्वी के कारण इस वस्तु पर गुरुत्वीय बल कितना है?

उत्तर 7.15
✏️ चरण 1: दिया है — सतह पर भार W₀ = 63 न्यूटन, ऊँचाई h = R/2।

✏️ चरण 2: पृथ्वी के केन्द्र से दूरी r = R + h = (3/2)R।

✏️ चरण 3: गुरुत्वीय बल F ∝ 1/r² ⇒ F_h / W₀ = (R²) / (r²)।

✏️ चरण 4: F_h = 63 × [ R² / ( (3R/2)² ) ] = 63 × (1 / (9/4)) = 63 × (4/9)।

✏️ चरण 5: 63 × 4/9 = 7 × 4 = 28।

✔️ परिणाम: उस ऊँचाई पर गुरुत्वीय बल = 28 न्यूटन।

प्रश्न 7.16
मान लें पृथ्वी समान घनत्व का गोला है तथा पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार 250 न्यूटन है। वही वस्तु चन्द्रमा की सतह पर कितने भार की होगी? (चन्द्रमा की त्रिज्या = पृथ्वी की त्रिज्या का 1/4)

उत्तर 7.16
💡 समान घनत्व ⇒ g ∝ R ⇒ g_चन्द्र / g_पृथ्वी = 1/4
➡️ W_चन्द्र = (1/4) W_पृथ्वी = (1/4)×250 = 62.5 न्यूटन

✔️ चन्द्रमा पर भार = 62.5 न्यूटन।

प्रश्न 7.17
पृथ्वी से ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर 5 किलोमीटर प्रति सेकण्ड के वेग से छोड़ा गया पिण्ड वापस आने से पहले अधिकतम कितनी दूर तक जाएगा? (M = 6.0×10^24 किलोग्राम, R = 6.4×10^6 मीटर, G = 6.67×10^-11)

उत्तर 7.17
✏️ ऊर्जा संरक्षण:
(1/2)u^2 − GM/R = − GM/r_max
⇒ 1/r_max = 1/R − u^2/(2GM)

🔹 u = 5×10^3 मीटर सेकण्ड^-1
🔹 GM = 4.002×10^14 मीटर^3 सेकण्ड^-2
🔹 1/R = 1.5625×10^-7, u^2/(2GM) ≈ 3.12×10^-8 (मीटर^-1)

👉 1/r_max ≈ 1.25×10^-7 ⇒ r_max ≈ 8.0×10^6 मीटर
👉 h = r_max − R ≈ (8.0−6.4)×10^6 = 1.6×10^6 मीटर

✔️ अधिकतम ऊँचाई ≈ 1.6×10^6 मीटर = 1600 किलोमीटर

🔵🔵🔵

प्रश्न 7.18
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी प्रक्षेप्य की पलायन चाल 11.2 किलोमीटर प्रति सेकण्ड है। किसी वस्तु को इस चाल की तीन गुनी चाल से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वी से अत्यन्त दूर जाने पर इस वस्तु की चाल क्या होगी? सूर्य तथा अन्य ग्रहों की उपस्थितियों को उपेक्षित कीजिए।

उत्तर 7.18
✏️ सूत्र (ऊर्जा संरक्षण):
(1/2) u^2 − (G M / R) = (1/2) v_अनन्त^2 , तथा v_पलायन^2 = 2 G M / R
👉 u = 3 v_पलायन ⇒ (1/2) v_अनन्त^2 = (1/2) [(3 v_पलायन)^2 − v_पलायन^2] = 4 v_पलायन^2
➡️ v_अनन्त = √8 × v_पलायन = 2√2 × 11.2 ≈ 31.6 किलोमीटर प्रति सेकण्ड
✔️ उत्तर: लगभग 31.6 किलोमीटर प्रति सेकण्ड।

प्रश्न 7.19
कोई उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से 400 किलोमीटर ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। इस उपग्रह के पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकलने के लिए कितनी ऊर्जा चाहिए? उपग्रह का द्रव्यमान 200 किलोग्राम; पृथ्वी का द्रव्यमान 6.0×10^24 किलोग्राम; पृथ्वी की त्रिज्या 6.4×10^6 मीटर; G = 6.67×10^-11 (एस.आई.)।

उत्तर 7.19
✏️ कक्षा त्रिज्या: r = R + h = 6.4×10^6 + 0.4×10^6 = 6.8×10^6 मीटर
✏️ कक्षीय विशिष्ट ऊर्जा: ε = − G M / (2 r)
➡️ अतिरिक्त विशिष्ट ऊर्जा (शून्य तक पहुँचाने हेतु) = G M / (2 r)
➡️ ΔE = m × [G M / (2 r)]

मान रखते हुए:
G M = 6.67×10^-11 × 6.0×10^24 = 4.002×10^14
G M / (2 r) = 4.002×10^14 / (2×6.8×10^6) ≈ 2.944×10^7 जूल प्रति किलोग्राम
ΔE = 200 × 2.944×10^7 ≈ 5.89×10^9 जूल

✔️ उत्तर: लगभग 5.9×10^9 जूल ऊर्जा।

प्रश्न 7.20
दो तारे, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 2×10^30 किलोग्राम है, गुरुत्वाकर्षण के कारण एक–दूसरे की ओर आ रहे हैं। जब उनके बीच की दूरी 10^9 किलोमीटर है, तब (मानिए वे बहुत दूर से विराम से चले थे) उनकी आपेक्षिक चाल क्या होगी?

उत्तर 7.20
✏️ ऊर्जा संरक्षण (सममिति से दोनों तारों की चाल समान = v):
कुल गतिज ऊर्जा = m v^2 ; गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा = − G m^2 / r
0 = m v^2 − G m^2 / r ⇒ v^2 = G m / r
आपेक्षिक चाल u = 2 v

मान: r = 10^9 किलोमीटर = 1.0×10^12 मीटर
v = √(6.67×10^-11 × 2×10^30 / 1.0×10^12) ≈ 1.155×10^4 मीटर प्रति सेकण्ड
u = 2 v ≈ 2.31×10^4 मीटर प्रति सेकण्ड = 23.1 किलोमीटर प्रति सेकण्ड

✔️ उत्तर: आपेक्षिक चाल लगभग 23 किलोमीटर प्रति सेकण्ड।

प्रश्न 7.21
दो छोटे ठोस गोले, प्रत्येक का द्रव्यमान 100 किलोग्राम तथा त्रिज्या 0.10 मीटर, एक क्षैतिज सतह पर 1.0 मीटर दूरी पर रखे हैं।
(a) उनके बीच गुरुत्वीय बल कितना है?
(b) किस बिन्दु पर किसी सूक्ष्म कण को रखने पर गुरुत्वीय क्षेत्र शून्य होगा?
(c) क्या वह संतुलन स्थायी होगा?

उत्तर 7.21
(a) ✏️ F = G m^2 / r^2 = 6.67×10^-11 × (100)^2 / (1.0)^2 = 6.67×10^-7 न्यूटन

(b) ✏️ दोनों द्रव्यमान समान ⇒ रेखा पर मध्य बिन्दु (दोनों से 0.50 मीटर) पर गुरुत्वीय क्षेत्र शून्य।

(c) ✏️ यह बिन्दु अस्थिर संतुलन है (संभावित ऊर्जा अधिकतम); हल्का सा विचलन किसी एक गोले की ओर खींच लेता है

————————————————————————————————————————————————————————————————————————————

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

(Section A – MCQs)

Question 1.
दो पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल किसके समानुपाती होता है?
🔵 (A) उनके द्रव्यमानों के वर्ग के
🟢 (B) उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के
🟠 (C) उनकी दूरी के
🔴 (D) उनकी दूरी के वर्ग के
Answer: (B) उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के

Question 2.
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम किस पर लागू होता है?
🔵 (A) केवल पृथ्वी और चंद्रमा पर
🟢 (B) केवल स्थिर वस्तुओं पर
🟠 (C) ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं पर
🔴 (D) केवल ग्रहों पर
Answer: (C) ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं पर

Question 3.
सार्वत्रिक गुरुत्व स्थिरांक (G) का आयाम क्या है?
🔵 (A) [M⁰ L² T⁻²]
🟢 (B) [M⁻¹ L³ T⁻²]
🟠 (C) [M¹ L³ T⁻²]
🔴 (D) [M⁰ L⁰ T⁰]
Answer: (B) [M⁻¹ L³ T⁻²]

Question 4.
यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी आधी कर दी जाए, तो उनके बीच का गुरुत्वाकर्षण बल —
🔵 (A) दोगुना हो जाएगा
🟢 (B) चार गुना हो जाएगा
🟠 (C) आधा हो जाएगा
🔴 (D) घट जाएगा
Answer: (B) चार गुना हो जाएगा

Question 5.
पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार किसके समानुपाती होता है?
🔵 (A) केवल पृथ्वी के त्रिज्या के
🟢 (B) पृथ्वी के द्रव्यमान के
🟠 (C) वस्तु के द्रव्यमान और g के गुणनफल के
🔴 (D) गुरुत्व स्थिरांक के
Answer: (C) वस्तु के द्रव्यमान और g के गुणनफल के

Question 6.
यदि किसी ग्रह का द्रव्यमान दोगुना और त्रिज्या समान रहे, तो उस ग्रह पर g —
🔵 (A) आधा हो जाएगा
🟢 (B) दोगुना हो जाएगा
🟠 (C) चार गुना हो जाएगा
🔴 (D) अपरिवर्तित रहेगा
Answer: (B) दोगुना हो जाएगा

Question 7.
पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वजनित त्वरण (g) का मान लगभग कितना होता है?
🔵 (A) 8.9 m/s²
🟢 (B) 9.8 m/s²
🟠 (C) 10.8 m/s²
🔴 (D) 11.8 m/s²
Answer: (B) 9.8 m/s²

Question 8.
पृथ्वी की सतह से ऊँचाई बढ़ने पर g का मान —
🔵 (A) बढ़ता है
🟢 (B) घटता है
🟠 (C) समान रहता है
🔴 (D) पहले बढ़ता फिर घटता
Answer: (B) घटता है

Question 9.
यदि पृथ्वी का त्रिज्या दोगुना हो जाए और द्रव्यमान समान रहे, तो g का मान —
🔵 (A) ¼ हो जाएगा
🟢 (B) दोगुना
🟠 (C) चार गुना
🔴 (D) अपरिवर्तित
Answer: (A) ¼ हो जाएगा

Question 10.
गुरुत्वीय विभव का चिन्ह क्या होता है?
🔵 (A) धनात्मक
🟢 (B) ऋणात्मक
🟠 (C) शून्य
🔴 (D) अनिश्चित
Answer: (B) ऋणात्मक

Question 11.
गुरुत्वीय क्षेत्र तीव्रता का सूत्र —
🔵 (A) E = G M / r²
🟢 (B) E = G M r²
🟠 (C) E = G M r
🔴 (D) E = M / r²
Answer: (A) E = G M / r²

Question 12.
पृथ्वी की सतह से बाहर जाने के लिए आवश्यक न्यूनतम वेग क्या कहलाता है?
🔵 (A) कक्षीय वेग
🟢 (B) पलायन वेग
🟠 (C) केन्द्राभिमुख वेग
🔴 (D) कोणीय वेग
Answer: (B) पलायन वेग

Question 13.
पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान लगभग है —
🔵 (A) 8.9 km/s
🟢 (B) 9.8 km/s
🟠 (C) 11.2 km/s
🔴 (D) 12.5 km/s
Answer: (C) 11.2 km/s

Question 14.
उपग्रह का कक्षीय वेग (orbital velocity) किसके बराबर होता है?
🔵 (A) √(G M / r)
🟢 (B) √(2 G M / R)
🟠 (C) G M / r²
🔴 (D) √(R / G M)
Answer: (A) √(G M / r)

Question 15.
कक्षीय काल (T) का सूत्र —
🔵 (A) T = 2πr / v
🟢 (B) T² ∝ r³
🟠 (C) दोनों (A) और (B)
🔴 (D) कोई नहीं
Answer: (C) दोनों (A) और (B)

Question 16.
पृथ्वी के केंद्र पर g का मान होता है —
🔵 (A) अधिकतम
🟢 (B) शून्य
🟠 (C) न्यूनतम पर शून्य नहीं
🔴 (D) अपरिवर्तित
Answer: (B) शून्य

Question 17.
पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाला उपग्रह भारहीन क्यों होता है?
🔵 (A) क्योंकि वह घूर्णन नहीं करता
🟢 (B) क्योंकि g = 0
🟠 (C) क्योंकि वह और उपग्रह समान त्वरण से गिरते हैं
🔴 (D) क्योंकि वहाँ हवा नहीं होती
Answer: (C) क्योंकि वह और उपग्रह समान त्वरण से गिरते हैं

Question 18.
यदि किसी ग्रह का द्रव्यमान और त्रिज्या दोनों दोगुने कर दिए जाएँ, तो g का मान —
🔵 (A) दोगुना
🟢 (B) आधा
🟠 (C) समान
🔴 (D) चार गुना
Answer: (B) आधा

Question 19.
न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम को लिखिए।
Answer:
🔹 प्रत्येक दो पिंड एक-दूसरे को आकर्षण बल से खींचते हैं जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
✏️ सूत्र: F = G (m₁ m₂) / r²
जहाँ,
➡️ F = आकर्षण बल
➡️ G = सार्वत्रिक गुरुत्व स्थिरांक
➡️ m₁, m₂ = दोनों पिंडों के द्रव्यमान
➡️ r = उनके बीच की दूरी

Question 20.
गुरुत्वजनित त्वरण (g) का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:
पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु पर बल —
➡️ F = G (M m) / R²
परंतु, F = m g
अतः,
m g = G (M m) / R²
g = G M / R²
✔️ यह पृथ्वी पर गुरुत्वजनित त्वरण का सूत्र है।

Question 21.
ऊँचाई (h) पर g का मान कैसे बदलता है?
Answer:
➡️ पृथ्वी की सतह से ऊँचाई h पर गुरुत्वजनित त्वरण —
g_h = g (R² / (R + h)²)
यदि h बहुत छोटा हो (h ≪ R), तब
g_h ≈ g (1 − 2h/R)
💡 अतः ऊँचाई बढ़ने पर g घटता है।

Question 22.
गहराई (d) पर g का मान कैसे बदलता है?
Answer:
➡️ पृथ्वी के अंदर गहराई d पर गुरुत्वजनित त्वरण —
g_d = g (1 − d/R)
✔️ गहराई बढ़ने पर g रैखिक रूप से घटता है और केंद्र पर शून्य हो जाता है।

Question 23.
गुरुत्वीय विभव और गुरुत्वीय विभव ऊर्जा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer:
💡 गुरुत्वीय विभव (V):
किसी बिंदु पर इकाई द्रव्यमान को अनन्त से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य।
V = − G M / r
💡 गुरुत्वीय विभव ऊर्जा (U):
किसी वास्तविक द्रव्यमान m को अनन्त से r दूरी तक लाने में किया गया कार्य।
U = − G M m / r
✔️ विभव एकक द्रव्यमान के लिए है जबकि विभव ऊर्जा सम्पूर्ण द्रव्यमान के लिए।

Question 24.
गुरुत्वीय क्षेत्र तीव्रता (E) क्या है? इसका सूत्र दीजिए।
Answer:
➡️ किसी बिंदु पर गुरुत्वीय क्षेत्र तीव्रता वह बल है जो इकाई द्रव्यमान पर कार्य करता है।
E = F / m = G M / r²
💡 यह दिशा में आकर्षणात्मक होती है (पिंड के केंद्र की ओर)।

Question 25.
ग्रहों की गति के केपलर के तीनों नियम लिखिए।
Answer:
1️⃣ दीर्घवृत्तीय कक्षा का नियम:
प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा में घूमता है, जहाँ सूर्य एक नाभि पर होता है।
2️⃣ क्षेत्रीय वेग का नियम:
ग्रह से सूर्य को जोड़ने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल झाड़ती है।
3️⃣ आवर्त काल का नियम:
ग्रह के आवर्त काल (T) का वर्ग उसकी कक्षा के अर्ध-दीर्घ-अक्ष (a) के घन के समानुपाती होता है —
T² ∝ a³

Question 26.
पलायन वेग (Escape Velocity) का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:
पलायन वेग वह न्यूनतम वेग है जिससे वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर जा सके।
🔹 पृथ्वी पर ऊर्जा संरक्षण के अनुसार —
½ m v_e² = G M m / R
v_e = √(2 G M / R)
✔️ पृथ्वी के लिए v_e ≈ 11.2 km/s

Question 27.
उपग्रह की कक्षीय वेग (Orbital Velocity) क्या होती है? सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:
उपग्रह पर गुरुत्वाकर्षण बल = अभिकेन्द्र बल
➡️ G M m / r² = m v² / r
v = √(G M / r)
✔️ यही उपग्रह का कक्षीय वेग है।
पृथ्वी की सतह के निकट v ≈ 7.9 km/s।

(Section D + Section E – दीर्घ एवं केस आधारित प्रश्न)

Question 28.
ऊँचाई पर गुरुत्वजनित त्वरण (gₕ) का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:
➡️ पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वजनित त्वरण —
g = G M / R²
➡️ पृथ्वी की सतह से ऊँचाई h पर, वस्तु पृथ्वी के केंद्र से (R + h) दूरी पर होगी।
अतः वहाँ का गुरुत्वीय बल —
F = G M m / (R + h)²
और F = m gₕ ⇒
m gₕ = G M m / (R + h)²
gₕ = G M / (R + h)²
यदि h ≪ R, तब (R + h)² ≈ R² (1 + 2h/R)
अतः
gₕ ≈ g (1 − 2h/R)
✔️ यह दर्शाता है कि ऊँचाई बढ़ने पर g का मान घटता है।

Question 29.
गहराई (d) पर गुरुत्वजनित त्वरण (g_d) का सूत्र सिद्ध कीजिए।
Answer:
➡️ पृथ्वी के केंद्र पर g = 0 तथा सतह पर g = G M / R²।
गहराई d पर, केवल अंदर का भाग कार्य करता है —
M’ = M ( (R − d)³ / R³ )
अब g_d = G M’ / (R − d)²
= G M (R − d)³ / (R³ (R − d)²)
= G M (R − d) / R³
परंतु, g = G M / R²
अतः
g_d = g (1 − d/R)
✔️ इसका अर्थ है कि गहराई बढ़ने पर g रैखिक रूप से घटता है और केंद्र पर शून्य हो जाता है।

Question 30.
पलायन वेग (vₑ) का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
Answer:
➡️ किसी वस्तु को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम वेग को पलायन वेग कहते हैं।
ऊर्जा संरक्षण के अनुसार —
सतह पर कुल ऊर्जा = अनन्त दूरी पर कुल ऊर्जा
½ m vₑ² − G M m / R = 0
vₑ = √(2 G M / R)
यदि g = G M / R² ⇒
vₑ = √(2 g R)
✔️ पृथ्वी के लिए:
R = 6.4 × 10⁶ m, g = 9.8 m/s²
vₑ = √(2 × 9.8 × 6.4 × 10⁶) ≈ 11.2 km/s

Question 31.
केपलर के नियमों से ग्रहों की गति का विश्लेषण कीजिए।
Answer:
🔹 (i) दीर्घवृत्तीय कक्षा का नियम:
प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा में घूमता है, जिसमें सूर्य एक नाभि पर होता है।
🔹 (ii) क्षेत्रीय वेग का नियम:
ग्रह और सूर्य को जोड़ने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल झाड़ती है।
➡️ यह कोणीय संवेग संरक्षण का परिणाम है।
🔹 (iii) आवर्त काल का नियम:
ग्रह के आवर्त काल (T) का वर्ग उसकी कक्षा के अर्ध-दीर्घ-अक्ष (a) के घन के समानुपाती होता है —
T² ∝ a³
✔️ इन तीनों नियमों से स्पष्ट है कि ग्रहों की गति पूरी तरह गुरुत्व बल पर निर्भर करती है और इसका स्वरूप सार्वभौमिक है।

Question 32.
एक उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा कर रहा है। उसकी ऊर्जा का विश्लेषण कीजिए और कुल यांत्रिक ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer:
उपग्रह पर गुरुत्वाकर्षण बल = अभिकेन्द्र बल
G M m / r² = m v² / r ⇒ v² = G M / r
🔹 गतिज ऊर्जा (K):
K = ½ m v² = ½ G M m / r
🔹 स्थितिज ऊर्जा (U):
U = − G M m / r
🔹 कुल यांत्रिक ऊर्जा (E):
E = K + U = ½ G M m / r − G M m / r = − G M m / (2r)
✔️ यह ऋणात्मक है, दर्शाता है कि उपग्रह पृथ्वी से बंधा है।

Question 33.
केस आधारित प्रश्न — एक कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी की सतह से 36000 km ऊपर भूस्थिर कक्षा में है।
(क) इसका कक्षीय काल ज्ञात कीजिए।
(ख) क्यों इसे “भूस्थिर उपग्रह” कहा जाता है?
Answer:
➡️ पृथ्वी की त्रिज्या R = 6400 km, ऊँचाई h = 36000 km
अतः कुल दूरी r = R + h = 42400 km = 4.24 × 10⁷ m
✏️ सूत्र:
T = 2π √(r³ / G M)
G = 6.67 × 10⁻¹¹, M = 5.97 × 10²⁴ kg
T = 2π √((4.24 × 10⁷)³ / (6.67 × 10⁻¹¹ × 5.97 × 10²⁴)) ≈ 8.64 × 10⁴ s = 24 घंटे
✔️ यह पृथ्वी के घूर्णन काल के बराबर है।
इसलिए उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर प्रतीत होता है — इसे भूस्थिर उपग्रह कहते हैं।

————————————————————————————————————————————————————————————————————————————

Leave a Reply