Class 11 : BIology (In Hindi) – अध्याय 5: पुष्पी पादपों की आकारिकी
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🌱 प्रस्तावना
🧠 आकारिकी का अर्थ है — जीवों की बाह्य आकृति, संरचना तथा रूप का अध्ययन।
🌿 पुष्पी पादप (आवृतबीजी) वे हैं जिनमें फूल, फल और बीज बनते हैं।
🌾 इस अध्याय में हम पुष्पी पादपों के मुख्य अंगों — मूल, तना, पत्ती, पुष्प, फल और बीज की संरचना व परिवर्तन का अध्ययन करेंगे।
💡 अवधारणा:
आकारिकी से हम पौधों की पहचान, वर्गीकरण तथा पारिस्थितिक अनुकूलन समझ पाते हैं।

🔵 1️⃣ पुष्पी पादपों के अंग
🌿 पुष्पी पादपों का शरीर दो मुख्य भागों में विभाजित होता है —
पोषण अंग – मूल, तना, पत्ती
प्रजनन अंग – पुष्प, फल, बीज
🟢 2️⃣ मूल (Root)
🌱 परिभाषा
मूल पौधे का भूगर्भीय, गैर-हरित, आरोही विपरीत भाग है जो पोषण ग्रहण और आधार प्रदान करता है।
🧠 विशेषताएँ
भूमि की ओर वृद्धि (धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन)
जल व खनिजों का अवशोषण
पौधे को स्थिरता देना
🪴 मूल तंत्र के प्रकार

1️⃣ मुख्य मूल तंत्र (नलिका मूल तंत्र)
🌿 भ्रूण की मूल से विकसित, मुख्य मूल स्पष्ट, पार्श्व मूल शाखाएँ।
उदाहरण: सरसों 🌾
2️⃣ रेशेदार मूल तंत्र
🌿 तने के आधार से समान लंबाई की मूलें।
उदाहरण: गेहूँ 🌾
3️⃣ अपसारी मूल तंत्र
🌿 तने या पत्तियों से उत्पन्न।
उदाहरण: गन्ना, मीठा आलू 🍠
🧬 मूल के भाग
🔹 मूल शीर्ष – सुरक्षा हेतु मूल टोपी
🔹 कोशिका विभाजन क्षेत्र
🔹 विस्तार क्षेत्र
🔹 परिपक्वता क्षेत्र – यहाँ मूल रोम बनते हैं जो जल ग्रहण करते हैं 💧
🌿 मूल की आकृतिक विविधताएँ (परिवर्तन)
🌾 (क) संग्रहण हेतु
गाजर (शंक्वाकार)
मूली (सूजाकार)
शलजम (नाभिकाकार)
🪴 (ख) सहारा देने हेतु
बरगद में प्रपाद मूल
मक्का में स्तंभ मूल
💧 (ग) श्वसन हेतु
जलीय क्षेत्र के पौधों में श्वसन मूल (न्यूमैटोफोर) जैसे सुंदरी।
🌿 (घ) आरोहण हेतु
मनीप्लांट में आरोही मूल।
🧪 (ङ) पोषण हेतु
मिसेलटो में परपोषी मूल।
🟡 3️⃣ तना (Stem)
🌱 परिभाषा
तना पौधे का अभिवर्धित, हरित, ऊर्ध्वमुखी भाग है जो पत्तियों, पुष्पों, फल को वहन करता है और पोषक पदार्थों का परिवहन करता है।
⚙️ कार्य
आधार प्रदान करना
जल व खनिजों का ऊपर परिवहन
भोज्य पदार्थों का वितरण
कुछ तनों में प्रकाश संश्लेषण
🌾 तने के परिवर्तन
🧺 (क) भूमिगत
कन्द (आलू)
गाठिका (प्याज)
प्रकन्द (अदरक)
शल्ककन्द (अरबी)

🌿 (ख) उपभूमिगत
धावक (दूब)
स्तोलोन (जैस्मिन)
सकर (पुदीना)
अवपाती (जलकुंभी)
🌳 (ग) वायवीय
आरोहण हेतु लता में कुंडल
संरक्षण हेतु काँटे
प्रकाश संश्लेषण हेतु फाइलोक्लेड (नागफनी)
🔴 4️⃣ पत्ती (Leaf)

🌿 परिभाषा
पत्ती पौधे का हरित, पार्श्विक, विस्तृत भाग है जो प्रकाश-संश्लेषण, वाष्पोत्सर्जन, गैस विनिमय के लिए उत्तरदायी है।
🌱 भाग
पर्णाधार
डंठल
पर्णफलक
🧬 शिराविन्यास
जालिका – द्विबीजपत्री
समांतर – एकबीजपत्री
🌾 पर्णविन्यास
वैकल्पिक
विपरीत
चक्राकार
🪴 पत्तियों के परिवर्तन
आरोहण हेतु कुंडल (मटर)
संरक्षण हेतु काँटे (नागफनी)
संग्रहण हेतु रसयुक्त पत्तियाँ (प्याज)
कीटभक्षी पत्तियाँ (नेपेंथीस)
🟢 5️⃣ पुष्प (Flower)

🌸 परिभाषा
पुष्प पौधे का प्रजनन अंग है जो बीज निर्माण के लिए उत्तरदायी है।
यह परिवर्तित तना है।
🌿 पुष्प के चक्र
1️⃣ पुष्पावरण
2️⃣ दलपुंज
3️⃣ केसरपुंज
4️⃣ अंडपुंज
🌺 सममिति
बहुपार्श्विक – सरसों

द्विपार्श्विक – मटर

🌸 अंडाशय की स्थिति
ऊर्ध्वस्थ – सरसों
अधस्थ – अमरूद
मध्यस्थ – गुलाब
🪷 पुष्पक्रम
मंझरी
गुच्छा
फलक
🟡 6️⃣ फल (Fruit)
🍈 परिभाषा
फल पुष्प के अंडाशय से निषेचन के बाद बनता है।
🌿 प्रकार
सच्चा फल – केवल अंडाशय से (आम)
असत्य फल – अन्य भागों से भी (सेब)
🔵 7️⃣ बीज (Seed)

🌱 परिभाषा
बीज = परिपक्व बीजांड
इसमें भ्रूण, बीजपत्र और बीजावरण होते हैं।
🌿 प्रकार
द्विबीजपत्री – दो बीजपत्र (राजमा)
एकबीजपत्री – एक बीजपत्र (मक्का)
💡✏️ अवधारणात्मक नोट
🌿 पौधों की पहचान, वर्गीकरण, कृषि एवं औषधीय महत्त्व के लिए आकारिकी का ज्ञान अनिवार्य है।
🧠 प्रत्येक अंग का विशिष्ट कार्य पौधे की अनुकूलता दर्शाता है।
🌍 8️⃣ महत्त्व
✔️ पौधों की पहचान
✔️ वर्गीकरण की आधारशिला
✔️ कृषि व बागवानी में उपयोगी
✔️ अनुकूलन की समझ
📝 त्वरित पुनरावृत्ति
🌿 अंग – मूल, तना, पत्ती, पुष्प, फल, बीज
🪴 मूल – संग्रहण, सहारा, श्वसन
🌱 तना – परिवहन, आधार, परिवर्तन
🍃 पत्ती – प्रकाश-संश्लेषण, परिवर्तन
🌸 पुष्प – प्रजनन अंग
🍈 फल – निषेचन उपरांत अंडाशय से
🌾 बीज – भ्रूण सहित संरचना
📘 सारांश
🧬 आकारिकी बाह्य संरचना का अध्ययन है।
🌿 प्रत्येक अंग का विशेष कार्य और अनुकूलन होता है।
🌱 पुष्पी पादपों के अंगों की विविधता पारिस्थितिक स्थितियों के अनुसार है।
🧠 यह अध्याय पौधों की वैज्ञानिक पहचान व वर्गीकरण की नींव रखता है।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
🔵 प्रश्न 1:
एक पृष्ठवक्र संयुक्त पत्ती हस्ताकार संयुक्त पत्ती से किस प्रकार भिन्न है?
🟢 उत्तर:
🌿 पृष्ठवक्र संयुक्त पत्ती — इसमें पर्णक मध्य तने (रैचिस) के दोनों ओर पंक्तिबद्ध रूप से व्यवस्थित होते हैं।
💡 उदाहरण: नीम, गुलमोहर।
🌿 हस्ताकार संयुक्त पत्ती — इसमें सभी पर्णक एक ही बिंदु से निकलकर हथेली की उँगलियों के समान फैले रहते हैं।
💡 उदाहरण: कास्टर, कपास।
➡️ अतः अंतर यह है कि पृष्ठवक्र पत्ती में पर्णक रैचिस के दोनों ओर पंक्तिबद्ध रहते हैं, जबकि हस्ताकार पत्ती में सभी पर्णक एक ही बिंदु से निकलते हैं।
🔵 प्रश्न 2:
विभिन्न प्रकार के पर्णविन्यास का उदाहरण सहित वर्णन करो।
🟢 उत्तर:
पर्णविन्यास (Phyllotaxy) का तात्पर्य है — तने या शाखा पर पत्तियों की व्यवस्था। इसके तीन मुख्य प्रकार हैं:
🌿 (क) वैकल्पिक (Alternate): प्रत्येक गाँठ पर एक पत्ती होती है।
💡 उदाहरण: सरसों, सूर्यमुखी।
🌿 (ख) विपरीत (Opposite): प्रत्येक गाँठ पर दो पत्तियाँ एक-दूसरे के आमने-सामने होती हैं।
💡 उदाहरण: तुलसी, गूगल।
🌿 (ग) वलयाकार (Whorled): एक गाँठ पर तीन या अधिक पत्तियाँ वृत्ताकार रूप में लगी होती हैं।
💡 उदाहरण: अल्स्टोनिया।
✔️ ये पर्णविन्यास प्रकाश ग्रहण व पोषक वितरण में सहायक होते हैं।
🔵 प्रश्न 3:
निम्नलिखित की परिभाषा लिखो —
(क) पुष्प दल विन्यास (ख) बीजांडासन (ग) त्रिवृत्त सममिति (घ) एकव्यास सममिति (ङ) उर्द्वस्थ (च) अधःस्थ (छ) मध्यस्थ (ज) दलपुंज एकवृत्त
🟢 उत्तर:
🌿 (क) पुष्प दल विन्यास: पुष्पांगों (दलदल, दलपुंज आदि) की सर्पिल या वलयी व्यवस्था को दल विन्यास कहते हैं।
🌿 (ख) बीजांडासन (Placentation): बीजांडों का अंडाशय में विन्यास।
💡 उदाहरण: अक्षीय, परिधीय, आधारज, मुक्तस्थ आदि।
🌿 (ग) त्रिवृत्त सममिति (Actinomorphic): पुष्प जिसे कई सममिति तल बराबर बाँट सकें।
💡 उदाहरण: सरसों, डटूरा।
🌿 (घ) एकव्यास सममिति (Zygomorphic): पुष्प जिसमें केवल एक सममिति तल हो।
💡 उदाहरण: मटर, गुलमोहर।
🌿 (ङ) उर्द्वस्थ अंडाशय: अन्य पुष्पांग अंडाशय के नीचे स्थित।
💡 उदाहरण: सरसों।
🌿 (च) अधःस्थ अंडाशय: अंडाशय पुष्पांगों के नीचे स्थित।
💡 उदाहरण: ककड़ी।
🌿 (छ) मध्यस्थ अंडाशय: अंडाशय आंशिक रूप से आवृत्त।
💡 उदाहरण: आलूबुखारा।
🌿 (ज) दलपुंज एकवृत्त: पुष्पदल की एक वलयी व्यवस्था।
🔵 प्रश्न 4:
निम्नलिखित में अंतर लिखो —
(क) असममित तथा सममित पुष्पक्रम
(ख) द्विवृत्तीय तथा एकवृत्तीय अंडाशय
🟢 उत्तर:
🌿 (क) असममित पुष्पक्रम: पुष्प बिना किसी सममिति के लगे होते हैं।
🌿 सममित पुष्पक्रम: पुष्प निश्चित क्रम या रूप से लगे होते हैं।
💡 उदाहरण: रैसीमोज़ सममित है, साइमोज़ असममित।
🌿 (ख) द्विवृत्तीय अंडाशय: बीजांड दो वृत्तों में व्यवस्थित।
🌿 एकवृत्तीय अंडाशय: बीजांड एक ही वृत्त में व्यवस्थित।
🔵 प्रश्न 5:
निम्नलिखित के स्पष्ट चित्र बनाओ —
(क) चने के बीज (ख) मक्के के बीज का अनुदैर्ध्य कटाव
🟢 उत्तर:
💡 इन चित्रों में दर्शाना है —
चना (डाइकोट) में भ्रूण के दो दल (cotyledons), भ्रूणवृन्त, बीजावरण।
मक्का (मोनोकॉट) में एक दल, एन्डोस्पर्म, एलेयूरोन परत, स्क्यूटेलम, कोलीऑप्टाइल, कोलियोराइजा।
📘 आरेख में सभी भागों का नाम हिन्दी में अंकित करें।
🔵 प्रश्न 6:
सोलेनेसी कुल के एक पुष्प को उदाहरण के रूप में लो तथा उसका अंडाशयी विवरण प्रस्तुत करो और पुष्पीय चित्र भी बनाओ।
🟢 उत्तर:
🌿 कुल: सोलेनेसी
💡 उदाहरण: डटूरा
पुष्प: द्विलिंगी, सममित, पूर्ण
दलदल: (5) संयुक्त
दलपुंज: (5) संयुक्त
पुंकेसर: 5
अंडाशय: 2 खण्डीय, अक्षीय बीजांडासन
📘 आरेख में सभी पुष्पांग हिन्दी में अंकित करें।
🔵 प्रश्न 7:
पुष्पी पादपों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के बीजांडासनों का वर्णन करो।
🟢 उत्तर:
मुख्य बीजांडासन प्रकार:
🌿 (क) अक्षीय (Axile): अंडाशय के मध्य में प्लेसेंटा।
💡 उदाहरण: टमाटर।
🌿 (ख) परिधीय (Parietal): अंडाशय की भीतरी भित्ति पर प्लेसेंटा।
💡 उदाहरण: सरसों।
🌿 (ग) आधारज (Basal): आधार पर बीजांड।
💡 उदाहरण: सूर्यमुखी।
🌿 (घ) मुक्तस्थ (Free central): अंडाशय के केंद्र में स्तंभ पर बीजांड।
💡 उदाहरण: प्राइमुला।
🔵 प्रश्न 8:
पत्तियों के विभिन्न स्वरूपों को कौन-से कार्यों में सहायक कहा जा सकता है?
🟢 उत्तर:
🌿 पत्तियाँ केवल प्रकाश संश्लेषण नहीं करतीं, अन्य कार्यों हेतु रूपांतरित भी होती हैं:
काँटे: सुरक्षा हेतु (उदा. बबूल)
क्लाइम्बर्स (कुंडल): चढ़ने हेतु (उदा. मटर)
भंडारण पत्तियाँ: पोषण संचयन हेतु (उदा. प्याज)
🔵 प्रश्न 9:
पुष्पक्रम की परिभाषा करो। पुष्पी पादपों में विभिन्न प्रकार के पुष्पक्रमों का आधार बताओ।
🟢 उत्तर:
🌿 पुष्पक्रम = पुष्पों की व्यवस्था।
प्रकार:
रैसीमोज़: मुख्य धुरी अनिश्चित बढ़ती रहती है।
साइमोज़: मुख्य धुरी सीमित।
📘 आधार — मुख्य धुरी की वृद्धि प्रकृति।
🔵 प्रश्न 10:
पुष्पासन पर स्थिति के अनुसार लगे पुष्पांगों का वर्णन करो।
🟢 उत्तर:
🌿 पुष्पासन पर पुष्पांगों की स्थिति तीन प्रकार की होती है —
उर्द्वस्थ पुष्प: अंडाशय ऊपरी स्थिति में (सरसों)।
अधःस्थ पुष्प: अंडाशय नीचे स्थित (ककड़ी)।
मध्यस्थ पुष्प: अंडाशय आंशिक रूप से आवृत्त (आलूबुखारा)।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
🔴 प्रश्न 1:
पादप शरीर के अध्ययन को क्या कहा जाता है?
🔵 1️⃣ शारीरिकी
🟢 2️⃣ आकारिकी
🟡 3️⃣ शरीर क्रिया विज्ञान
🔴 4️⃣ वर्गिकी
🟢 उत्तर: 2️⃣ आकारिकी
🔴 प्रश्न 2:
पुष्पी पादपों के दो मुख्य अंग प्रणाली कौन-सी हैं?
🔵 1️⃣ मूल व पुष्प
🟢 2️⃣ मूल व प्ररोह
🟡 3️⃣ पुष्प व फल
🔴 4️⃣ तना व पर्ण
🟢 उत्तर: 2️⃣ मूल व प्ररोह
🔴 प्रश्न 3:
मूल का प्रमुख कार्य क्या है?
🔵 1️⃣ प्रकाश-संश्लेषण
🟢 2️⃣ स्थिरीकरण व जल अवशोषण
🟡 3️⃣ परागण
🔴 4️⃣ फलन
🟢 उत्तर: 2️⃣ स्थिरीकरण व जल अवशोषण
🔴 प्रश्न 4:
गाजर व मूली में मूल का कौन-सा कार्य होता है?
🔵 1️⃣ परिवहन
🟢 2️⃣ भोजन संचय
🟡 3️⃣ समर्थन
🔴 4️⃣ अवशोषण
🟢 उत्तर: 2️⃣ भोजन संचय
🔴 प्रश्न 5:
तने का प्रमुख कार्य है —
🔵 1️⃣ जल अवशोषण
🟢 2️⃣ समर्थन व परिवहन
🟡 3️⃣ भोजन निर्माण
🔴 4️⃣ पुष्प निर्माण
🟢 उत्तर: 2️⃣ समर्थन व परिवहन
🔴 प्रश्न 6:
पर्णविन्यास किसे कहते हैं?
🔵 1️⃣ पुष्पों की व्यवस्था
🟢 2️⃣ पर्णों की व्यवस्था
🟡 3️⃣ शाखाओं की व्यवस्था
🔴 4️⃣ बीजों की व्यवस्था
🟢 उत्तर: 2️⃣ पर्णों की व्यवस्था
🔴 प्रश्न 7:
संधिपर्ण किसे कहते हैं?
🔵 1️⃣ पर्ण जिसमें पुष्प जुड़ा हो
🟢 2️⃣ पर्ण का डंठल पर्णाभ बन जाए
🟡 3️⃣ संयुक्त पर्ण
🔴 4️⃣ परवलय पर्ण
🟢 उत्तर: 2️⃣ पर्ण का डंठल पर्णाभ बन जाए
🔴 प्रश्न 8:
संशोधित तने का उदाहरण है —
🔵 1️⃣ प्याज
🟢 2️⃣ आलू
🟡 3️⃣ मूली
🔴 4️⃣ गाजर
🟢 उत्तर: 2️⃣ आलू
🔴 प्रश्न 9:
एकबीजी व द्विबीज पत्र में प्रमुख अंतर क्या है?
🔵 1️⃣ भ्रूणपत्रों की संख्या
🟢 2️⃣ पुष्पदल की संख्या
🟡 3️⃣ बीजकोष की संख्या
🔴 4️⃣ परागकण की संख्या
🟢 उत्तर: 1️⃣ भ्रूणपत्रों की संख्या
🔴 प्रश्न 10:
फल किससे बनता है?
🔵 1️⃣ बीजांड
🟢 2️⃣ अंडाशय
🟡 3️⃣ वर्तिकाग्र
🔴 4️⃣ बाह्यदल
🟢 उत्तर: 2️⃣ अंडाशय
🔴 प्रश्न 11:
मूल के प्रकार बताइए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ अविकसित मूल (Tap root): बीज से निकलने वाली मुख्य मूल व पार्श्व मूलें।
2️⃣ रज्जुमूल (Fibrous root): तने के आधार से निकलने वाली समान मूलें।
3️⃣ अपसारी मूल (Adventitious root): किसी भी भाग से निकलने वाली मूलें।
🔴 प्रश्न 12:
पुष्प के चार प्रमुख चक्र कौन-से हैं?
🟢 उत्तर:
1️⃣ बाह्यदलमंडल
2️⃣ दलमंडल
3️⃣ पुंकेसरमंडल
4️⃣ स्त्रीकेसरमंडल
🔴 प्रश्न 13:
मूल के कार्य लिखिए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ स्थिरीकरण: पादप को भूमि में स्थिर रखना।
2️⃣ अवशोषण: मिट्टी से जल व खनिजों का अवशोषण करना।
3️⃣ परिवहन: अवशोषित द्रव्यों को प्ररोह भागों तक पहुँचाना।
4️⃣ भोजन संचय: गाजर, मूली आदि में भोजन का संचय।
5️⃣ संशोधन: विशेष कार्य हेतु जैसे सहारा, आरोहण, श्वसन।
🔴 प्रश्न 14:
मूल के प्रमुख प्रकारों का वर्णन कीजिए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ अविकसित मूल (Tap root): बीज से विकसित मुख्य मूल, पार्श्व मूलों के साथ (जैसे मटर)।
2️⃣ रज्जुमूल (Fibrous root): तने के आधार से निकलने वाली समान आकार की मूलें (जैसे गेहूँ)।
3️⃣ अपसारी मूल (Adventitious root): तने, पत्ते आदि से उत्पन्न (जैसे मनी प्लांट)।
🔴 प्रश्न 15:
मूल के संशोधन के दो उदाहरण लिखिए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ भोजन संचय हेतु: गाजर, मूली।
2️⃣ सहारा देने हेतु: मक्का, पांडानस में आधार मूल।
3️⃣ आरोहण हेतु: मनी प्लांट में आरोही मूल।
🔴 प्रश्न 16:
तने के दो कार्य लिखिए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ समर्थन: पत्तियों, पुष्पों और फलों को सहारा देना।
2️⃣ परिवहन: जल, खनिज एवं भोजन का प्रवाह।
3️⃣ संशोधन: संचयन (आलू), आरोहण (मटर), प्रकाश-संश्लेषण (कैक्टस)।
🔴 प्रश्न 17:
पत्तियों का कार्य लिखिए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ प्रकाश-संश्लेषण: भोजन निर्माण।
2️⃣ वाष्पोत्सर्जन: जल का निष्कासन।
3️⃣ श्वसन: गैसों का आदान-प्रदान।
4️⃣ संशोधन: कांटे (रक्षा), कुंडल (आरोहण), संचयन (प्याज)।
🔴 प्रश्न 18:
पर्णविन्यास के प्रकार लिखिए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ विकल्पी: प्रत्येक ग्रंथि पर एक पर्ण (जैसे सूरजमुखी)।
2️⃣ विपरीत: एक ग्रंथि पर दो पर्ण विपरीत दिशा में (जैसे तुलसी)।
3️⃣ वृत्तीय: एक ग्रंथि पर तीन या अधिक पर्ण (जैसे अल्स्टोनिया)।
🔴 प्रश्न 19:
पुष्प की परिभाषा दीजिए और इसके भाग लिखिए।
🟢 उत्तर:
परिभाषा: पुष्प एक संशोधित प्ररोह है जो बीज निर्माण के लिए उत्तरदायी होता है।
भाग:
1️⃣ बाह्यदलमंडल
2️⃣ दलमंडल
3️⃣ पुंकेसरमंडल
4️⃣ स्त्रीकेसरमंडल
🔴 प्रश्न 20:
पुष्पक्रम (Inflorescence) के प्रकार बताइए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ नियत पुष्पक्रम (Cymose): शीर्षस्थ पुष्प पहले खिलता है।
2️⃣ अनियत पुष्पक्रम (Racemose): आधार से पुष्प खिलते हैं, शीर्षस्थ नव।
3️⃣ विशेष पुष्पक्रम: जैसे संयोजित पुष्पक्रम (Head)।
🔴 प्रश्न 21:
फल की परिभाषा व प्रकार लिखिए।
🟢 उत्तर:
परिभाषा: अंडाशय के परिपक्व होने से बना संरचना फल कहलाती है।
प्रकार:
1️⃣ सही फल: केवल अंडाशय से बना (जैसे मटर)।
2️⃣ कृत्रिम फल: अन्य भाग भी सम्मिलित (जैसे सेब)।
3️⃣ बहुफल: पुष्पक्रम से बना (जैसे अंजीर)।
🔴 प्रश्न 22:
बीज के मुख्य भाग लिखिए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ बीजावरण: बीज की सुरक्षा।
2️⃣ बीजाण्डपत्र (Cotyledon): भोजन संचयन।
3️⃣ भ्रूण: भ्रूणीय मूल, तना, भ्रूणपर्ण।
4️⃣ हिलम व सूक्ष्मद्वार: संलग्न बिंदु और जल प्रवेश मार्ग।
🔴 प्रश्न 23:
मूल के संशोधन का वर्णन कीजिए।
🟢 उत्तर:
मूल का मुख्य कार्य अवशोषण और स्थिरीकरण है, परन्तु अनेक पादपों में मूल विशेष कार्यों के लिए संशोधित होती है —
1️⃣ भोजन संचय हेतु संशोधन:
कुछ पादपों में मूल में अन्न पदार्थ (भोजन) संचित होकर मोटी हो जाती है।
उदाहरण — गाजर, मूली, शलजम, रतनजोत।
इनमें परिपोषी पदार्थ संचय कर भविष्य की वृद्धि हेतु ऊर्जा प्रदान करते हैं।
2️⃣ सहारा देने हेतु संशोधन:
मक्का, पांडानस जैसे पादपों में तने को स्थिर रखने हेतु आधार मूल निकलती हैं जो धरती में प्रवेश कर तने को सहारा देती हैं।
3️⃣ आरोहण हेतु संशोधन:
मनीप्लांट में आरोही मूल तने को सहारा देकर ऊपर चढ़ने में सहायता करती है।
4️⃣ श्वसन हेतु संशोधन:
दलदली पादप जैसे एवेसीनिया में वायवीय मूल (न्यूमैटॉफोर) ऊपर की ओर बढ़ती हैं जो गैसों के आदान-प्रदान हेतु सहायक होती हैं।
5️⃣ परजीवी कार्य हेतु संशोधन:
कसकूटा जैसे पादप में चूषण मूल विकसित होती हैं जो परपोषी से पोषण प्राप्त करती हैं।
✔️ निष्कर्ष: मूल केवल अवशोषण के लिए नहीं होती, बल्कि पादप की आवश्यकताओं के अनुसार रूपांतरित होकर विविध कार्य करती है।
🔴 प्रश्न 24:
तने के संशोधन का वर्णन कीजिए।
🟢 उत्तर:
तना सामान्यतः पत्तियों, पुष्पों और फलों को सहारा देता है तथा जल और खनिजों का परिवहन करता है। परन्तु कई पादपों में तना विशिष्ट कार्यों के लिए रूपांतरित हो जाता है —
1️⃣ भोजन संचय हेतु:
आलू (कंद), अदरक (भूमिगत शाखा), हल्दी, शकरकंद इत्यादि में तना पोषक पदार्थ संचित करता है।
2️⃣ प्रकाश-संश्लेषण हेतु:
कैक्टस जैसे मरुस्थलीय पौधों में पत्तियाँ कांटे में रूपांतरित हो जाती हैं, अतः प्रकाश-संश्लेषण तना करता है।
3️⃣ रक्षा हेतु:
बेर, नींबू में तना काँटे के रूप में रूपांतरित होकर रक्षा का कार्य करता है।
4️⃣ आरोहण हेतु:
मटर, कद्दू में कुंडलाकार तना सहारे के लिए प्रयुक्त होता है।
5️⃣ प्रसार हेतु:
स्ट्रॉबेरी में धावक, पुदीना में शंखिका तना पादप के प्रसार में सहायक है।
✔️ निष्कर्ष: तना पर्यावरणीय अनुकूलता हेतु विविध रूपों में रूपांतरित होकर विभिन्न कार्यों में भाग लेता है।
🔴 प्रश्न 25:
पत्तियों के संशोधन का वर्णन कीजिए।
🟢 उत्तर:
पत्तियाँ सामान्यतः प्रकाश-संश्लेषण, वाष्पोत्सर्जन व श्वसन का कार्य करती हैं, परन्तु कई बार ये अन्य कार्यों के लिए रूपांतरित होती हैं —
1️⃣ कांटे:
रक्षा हेतु पत्तियाँ काँटे का रूप ले लेती हैं (बेर)।
2️⃣ कुंडल:
मटर में पत्तियाँ कुंडलाकार होकर आरोहण में सहायक होती हैं।
3️⃣ भोजन संचयन:
प्याज, लहसुन की पत्तियाँ पोषक पदार्थ संचित करती हैं।
4️⃣ पोषण हेतु:
पिचर पादप (नेपेन्थिस) में पत्तियाँ कीट पकड़ने वाले पात्र में बदल जाती हैं।
5️⃣ संतानोत्पत्ति हेतु:
ब्रायोफिलम की पत्तियों के किनारों से नए पौधे उत्पन्न होते हैं।
✔️ निष्कर्ष: पत्तियाँ विभिन्न पर्यावरणीय स्थितियों में विशेष कार्यों के लिए संशोधित होती हैं।
🔴 प्रश्न 26:
पुष्पक्रम के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
🟢 उत्तर:
पुष्पक्रम उस व्यवस्था को कहते हैं जिसमें पुष्प तने पर लगे होते हैं। यह दो मुख्य प्रकार का होता है —
1️⃣ अनियत पुष्पक्रम (रेसीमोस):
आधार के पुष्प पहले खिलते हैं, शीर्षस्थ पुष्प बाद में। वृद्धि अनिश्चित रहती है।
उदाहरण — सूरजमुखी, सरसों।
2️⃣ नियत पुष्पक्रम (सायमोस):
शीर्ष पुष्प पहले खिलता है, वृद्धि निश्चित रहती है।
उदाहरण — जास्मीन, तुलसी।
3️⃣ विशेष पुष्पक्रम:
संयुक्त पुष्पक्रम जैसे मस्तकाकार पुष्पक्रम (सूरजमुखी)।
✔️ निष्कर्ष: पुष्पक्रम पुष्पों की व्यवस्था व विकास क्रम को दर्शाता है।
🔴 प्रश्न 27:
फल के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
🟢 उत्तर:
फल अंडाशय के परिपक्व होने पर बनता है और बीज की रक्षा करता है। इसके प्रकार हैं —
1️⃣ सही फल:
केवल अंडाशय से बनते हैं, जैसे मटर।
2️⃣ कृत्रिम फल:
अंडाशय के साथ अन्य भाग सम्मिलित होते हैं, जैसे सेब।
3️⃣ बहुफल:
पुष्पक्रम से बनने वाले फल, जैसे अंजीर।
✔️ निष्कर्ष: फल बीज की रक्षा और प्रसार में सहायक होते हैं।
🔴 प्रश्न 28:
बीज की संरचना का वर्णन कीजिए।
🟢 उत्तर:
बीज परिपक्व अंडाशय से बनता है। इसके मुख्य भाग —
1️⃣ बीजावरण: बाहरी आवरण, सुरक्षा प्रदान करता है।
2️⃣ बीजाण्डपत्र: भोजन संचित करता है।
3️⃣ भ्रूण: भ्रूणीय मूल, भ्रूणीय तना व भ्रूणपर्ण होते हैं।
4️⃣ हिलम व सूक्ष्मद्वार: संलग्न बिंदु व जल प्रवेश स्थान।
✔️ निष्कर्ष: बीज भावी पौधे के विकास का स्रोत है।
🔴 प्रश्न 29:
द्विबीजपत्री बीज का वर्णन कीजिए।
🟢 उत्तर:
द्विबीजपत्री बीज के दो बीजाण्डपत्र होते हैं। इसके भाग —
1️⃣ बीजावरण
2️⃣ भ्रूणीय मूल
3️⃣ भ्रूणीय तना
4️⃣ भ्रूणपर्ण
5️⃣ हिलम व सूक्ष्मद्वार
कार्य — भ्रूण को पोषण व सुरक्षा प्रदान करना।
✔️ निष्कर्ष: यह बीज अंकुरण द्वारा नया पौधा उत्पन्न करता है।
🔴 प्रश्न 30:
बीज के कार्य लिखिए।
🟢 उत्तर:
1️⃣ अंकुरण: उपयुक्त परिस्थितियों में नया पौधा उत्पन्न होता है।
2️⃣ प्रसार: बीज विभिन्न माध्यमों से दूर स्थानों तक फैलते हैं।
3️⃣ सुरक्षा: कठोर बीजावरण भ्रूण की रक्षा करता है।
4️⃣ सुप्तावस्था: प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहना।
✔️ निष्कर्ष: बीज पौधों की प्रजनन, प्रसार व उत्तरजीविता का मुख्य साधन है।
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