Class 11 : BIology (In Hindi) – अध्याय 3: वनस्पति जगत
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔷 भूमिका
🌿 जीव जगत की विविधता को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने जीवों को विभिन्न वर्गों में बाँटा।
🌿 इस अध्याय में हम पादप जगत यानी पौधों के विविध समूहों का अध्ययन करते हैं।
🌿 यह अध्याय मुख्यतः पादप वर्गीकरण, उनके लक्षण, जनन विधियाँ और उनके जीवन चक्र पर आधारित है।
✏️ टिप्पणी: इस अध्याय का अध्ययन हमें पादप विकास की क्रमिक सीढ़ी को समझने में सहायता करता है।
🟢 शैवाल (शैवाल – Algae)
🌱 शैवाल सरल, थैलस शरीर वाले, स्वपोषी जीव होते हैं।
🌱 ये मुख्यतः जल में पाए जाते हैं।
🌱 इनमें क्लोरोफिल उपस्थित होता है, जिससे ये प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
💡 वर्गीकरण:
➡️ हरित शैवाल (क्लोरोफाइसी): मुख्य वर्णक क्लोरोफिल ‘a’ व ‘b’, कोशिका भित्ति में सेलुलोज।
➡️ भूरे शैवाल (फियोफाइसी): वर्णक फ्यूकोथैन्थिन, कोशिका भित्ति में सेल्यूलोज और एल्जिन।
➡️ लाल शैवाल (रोडोफाइसी): वर्णक फाइकोएरिथ्रिन, अधिकतर समुद्री।
✔️ जनन:
➤ अलैंगिक: चलनशील बीजाणुओं से
➤ लैंगिक: समगामी, विषमगामी व अन्य रूप
✏️ टिप्पणी: शैवाल में हाप्लॉन्टिक जीवन चक्र सामान्यतः देखा जाता है।

🔴 ब्रायोफाइटा (शैवाल और टेरिडोफाइटा के बीच की कड़ी)
🌿 इन्हें भूमि के अमीबा भी कहा जाता है क्योंकि ये न तो पूर्ण जलीय हैं न ही पूर्ण स्थलीय।
🌿 इनकी संरचना थोड़ी अधिक जटिल होती है।
🧠 विशेषताएँ:
✔️ शरीर में ध्रुवीयता होती है।
✔️ जड़, तना, पत्ती जैसे अंग नहीं होते, परंतु थैलस संरचना होती है।
✔️ इनमें कटिकायुक्त ऊतक नहीं होते।
🔵 विभाजन:
➡️ हेपेटोफाइटा (जैसे: मार्केन्शिया)
➡️ एन्थोसेरोप्सिडा (जैसे: एन्थोसेरोस)
➡️ ब्रायोप्सिडा (जैसे: फनारिया)
⚡ जनन:
➡️ लैंगिक अंग जटिल व बहुकोशिकीय होते हैं।
➡️ निषेचन जल पर निर्भर।
🟡 टेरिडोफाइटा (प्रथम वास्कुलर पौधे)
🌱 ये प्रथम भूमि पौधे हैं जिनमें वाहिका तंत्र पाया जाता है।
🌱 इनमें सही तना, पत्ती और जड़ की तरह के अंग होते हैं।
🧠 उदाहरण: सिलाजिनेला, इक्विसेटम, फर्न, ड्रायोप्टेरिस
✔️ जनन:
➡️ बीजाणुओं के द्वारा
➡️ लैंगिक जनन हेतु जल आवश्यक
🔎 जीवन चक्र: हाप्लोडिप्लॉन्टिक होता है।
🔁 स्पोरोफाइट प्रधान होता है, जबकि गैमेटोफाइट स्वतंत्र होता है।
🔵 जिम्नोस्पर्म्स (नग्नबीजी पौधे)
🌿 इनमें बीज नग्न होते हैं अर्थात् अंडाशय द्वारा सुरक्षित नहीं रहते।
🌿 इनमें वैस्कुलर ऊतक होते हैं, परंतु फूल या फल नहीं होते।
🌿 ये अधिकतर स्थलीय व शुष्क पर्यावरण में पाए जाते हैं।
🧠 उदाहरण: साइकस, पाइनस, नेटम
✔️ जनन:
➡️ अंडाणु बीजपत्रों पर खुले होते हैं।
➡️ निषेचन वायु द्वारा परागण से होता है।
💡 लक्षण:
🌱 बहुकोशिकीय भ्रूण
🌱 सीधा जीवन चक्र – डिप्लॉन्टिक
🔴 एंजियोस्पर्म्स (आवृतबीजी पौधे)
🌺 ये सर्वाधिक उन्नत और विविधता वाले पौधे हैं।
🌺 इनमें फूल, फल, बीज, और विशेष प्रजनन संरचनाएँ होती हैं।
🌿 दो प्रमुख वर्ग:
➡️ एकबीजपत्री (जैसे: घास)
➡️ द्विबीजपत्री (जैसे: मटर, आम)
🧬 जनन के प्रमुख चरण:
✔️ द्वैध निषेचन की उपस्थिति
✔️ बीज अंडाशय में सुरक्षित रहते हैं
✔️ भ्रूणीय थैली में सात कोशिकाएँ और आठ नाभिक होते हैं
✏️ टिप्पणी: एंजियोस्पर्म्स में सबसे उन्नत जनन प्रणाली पाई जाती है।
💫 Why This Lesson Matters
🟢 यह अध्याय हमें पादपों के विकास, उनकी आंतरिक बनावट, जनन प्रणाली और पारिस्थितिक अनुकूलन को समझने में सहायता करता है।
🟢 यह ज्ञान कृषि, वानिकी, औषधि निर्माण, एवं पादप जैव विविधता संरक्षण में भी अत्यंत उपयोगी है।
📝 Quick Recap: स्मृति पुनरावलोकन
🔷 शैवाल: जल में रहने वाले सरल स्वपोषी पौधे
🔴 ब्रायोफाइटा: भूमि पर प्रथम पौधे, जिनमें जनन हेतु जल आवश्यक
🟡 टेरिडोफाइटा: वाहिका ऊतक से युक्त पौधे
🔵 जिम्नोस्पर्म्स: नग्नबीजी पौधे, बिना फूलों के
🔴 एंजियोस्पर्म्स: फूल, फल, बीज से युक्त उन्नत पौधे
🌿 द्वैध निषेचन: केवल एंजियोस्पर्म्स में पाया जाने वाला विशिष्ट लक्षण
📚 सारांश (300 शब्दों में)
🔷 पादप जगत में पाँच प्रमुख समूहों का वर्णन किया गया है: शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म्स और एंजियोस्पर्म्स।
🔷 शैवाल जल में पाए जाते हैं और प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। ये सरल थैलस संरचना वाले पौधे होते हैं।
🔷 ब्रायोफाइटा में अविकसित वाहिका तंत्र होता है और ये जनन हेतु जल पर निर्भर करते हैं। इनमें स्पोरोफाइट परजीवी होता है।
🔷 टेरिडोफाइटा में प्रथम बार वाहिका ऊतक देखे जाते हैं। इनमें स्पष्ट तना, पत्ती और जड़ जैसे अंग पाए जाते हैं।
🔷 जिम्नोस्पर्म्स में नग्न बीज होते हैं, ये बीजफल या अंडाशय में सुरक्षित नहीं होते। इनमें द्विलिंगी पुष्प और वायु द्वारा परागण होता है।
🔷 एंजियोस्पर्म्स सर्वाधिक विकसित पादप होते हैं, जिनमें द्वैध निषेचन पाया जाता है। बीज फल के भीतर सुरक्षित होते हैं।
🔷 पादप जीवन चक्र हाप्लॉन्टिक, डिप्लॉन्टिक या हाप्लोडिप्लॉन्टिक हो सकता है।
🔷 पाठ के अंत में, यह स्पष्ट होता है कि पादपों की विविधता उनके पर्यावरणीय अनुकूलन और विकास की गहराई को दर्शाती है।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
❓1. शैवाल के वर्गीकरण का क्या आधार है?
✅ उत्तर:
शैवाल के वर्गीकरण के प्रमुख आधार हैं:
🔹 प्रकाश-संश्लेषक वर्णक (रंजक) का प्रकार
🔸 संग्रहीत भोज्य पदार्थ का प्रकार
🔹 कोशिका भित्ति की संरचना
🔸 कोशिकीय संगठन (एककोशकीय/बहुकोशकीय)
📌 इसी आधार पर शैवाल को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है: हरित शैवाल, भूरे शैवाल, लाल शैवाल
❓2. लिवरवर्ट, मॉस, फ़र्न, जिम्नोस्पर्म तथा एंजियोस्पर्म के जीवन-चक्र में कहाँ और कब न्यूनीकरण विभाजन होता है?
✅ उत्तर:
🔹 लिवरवर्ट व मॉस – बीजाणु कोशिका में (स्पोरोफाइट में)
🔹 फ़र्न – बीजाणुधानी में
🔹 जिम्नोस्पर्म – परागकोष और बीजाणुजनन (megasporangium) में
🔹 एंजियोस्पर्म – परागकोष (पुंकेसर) और भ्रूणकोष (अंडप) में
📌 सभी में न्यूनीकरण विभाजन बीजाणु निर्माण के समय होता है।
❓3. पौधों के तीन वर्गों का नाम लिखें, जिनमें स्त्रीजननी होती है। इनमें से किसी एक के जीवन-चक्र का संक्षिप्त वर्णन करें।
✅ उत्तर:
स्त्रीजननी (archegonium) युक्त वर्ग:
1️⃣ ब्रायोफाइटा (जैसे मॉस)
2️⃣ टेरिडोफाइटा (जैसे फ़र्न)
3️⃣ जिम्नोस्पर्म
📌 फ़र्न का जीवन-चक्र:
– प्रमुख अवस्था: स्पोरोफाइट
– बीजाणु बनते हैं → जननांगधर (prothallus) बनता है
– इसमें अंडाणु व शुक्राणु बनते हैं
– निषेचन से युग्मज बनता है → नया स्पोरोफाइट
❓4. निम्नलिखित की संरचनात्मक विशेषताएँ बताइए:
📌 (i) मॉस के प्रथम तंतु कोशिकाएँ:
– हरे रंग की, रेशेदार, एककोशकीय → प्रोटोनिमा अवस्था
📌 (ii) द्विवर्षीयों के प्राथमिक भूणपोष का केंद्र:
– द्विबीजपत्री पौधों में भ्रूणकोष की द्विगुणित ध्रुवीय नाभिकों और एक शुक्राणु के युग्मन से बनने वाला → त्रैणिक (3n) भ्रूणपोष
📌 (iii) मॉस की पत्तियों की कोशिकाएँ:
– क्लोरोप्लास्ट युक्त, पतली भित्ति वाली
📌 (iv) फ़र्न के शोथवल की कोशिकाएँ:
– हरे रंग की, पत्ती जैसी, बीजाणुधानी युक्त
📌 (v) मार्चेन्टिया की जमा कोशिकाएँ:
– अपदीप्तिक अंगों में पाई जाने वाली → अस्थायी जनन कोशिकाएँ
📌 (vi) एकबीजपत्री की मेरिस्टम कोशिका:
– वृध्दि हेतु उत्तरदायी, तेजी से विभाजित होने वाली
📌 (vii) लिवरवर्ट के अंडाणु तथा फ़र्न के युग्मज:
– लिवरवर्ट में अंडाणु → archegonium में
– फ़र्न का युग्मज → निषेचन उपरांत, द्विगुणित (2n)
❓5. शैवाल तथा जिम्नोस्पर्म के आर्थिक महत्त्व पर टिप्पणी लिखो।
✅ उत्तर:
🔹 शैवाल:
– Chlorella जैसे शैवाल खाद्य में
– लाल शैवाल से ऐगर, कैरागीनिन
– जैव उर्वरक (नीली-हरित शैवाल)
– ऑक्सीजन उत्पादक
🔹 जिम्नोस्पर्म:
– Pinus से लकड़ी व रेज़िन
– Ephedra से औषधीय पदार्थ
– सजावटी उपयोग
❓6. जिम्नोस्पर्म तथा एंजियोस्पर्म दोनों में बीज होते हैं, फिर भी उनका वर्गीकरण अलग-अलग क्यों है?
✅ उत्तर:
विशेषता जिम्नोस्पर्म एंजियोस्पर्म
बीज नग्न, फल में बंद नहीं फल में संलग्न
परागण वायु द्वारा वायु या जीवों द्वारा
पुष्प अनुपस्थित उपस्थित
निषेचन एकल द्वैधिक निषेचन (double fertilization)
📌 इसीलिए इनका वर्गीकरण अलग किया गया है।
❓7. विषय बीजाणु क्या है? इसकी सार्थकता पर टिप्पणी लिखो। इसके दो उदाहरण दो।
✅ उत्तर:
🔹 विषम बीजाणु (heterospory):
दो प्रकार के बीजाणु बनते हैं:
– लघु बीजाणु (microspore) → पुं जननांगधर
– विशाल बीजाणु (megaspore) → स्त्री जननांगधर
🔸 सार्थकता:
– बीज निर्माण की दिशा में पहला कदम
– पुं एवं स्त्री लक्षणों का पृथक्करण
✅ उदाहरण:
1️⃣ Selaginella
2️⃣ Salvinia
❓8. उदाहरण सहित निम्नलिखित शब्दावलियों का संक्षिप्त वर्णन करें:
✅ (i) प्रथम तंतु (protonema): मॉस का प्रारंभिक हरा तंतु
✅ (ii) पुं जननी (antheridium): शुक्राणु उत्पादक अंग
✅ (iii) स्त्रीजननी (archegonium): अंडाणु उत्पादक अंग
✅ (iv) द्विगुणित (diplontic): जीवन चक्र में द्विगुणित अवस्था प्रमुख
✅ (v) बीजाणुधानी (sporangium): बीजाणु उत्पन्न करने वाला अंग
✅ (vi) समयुग्मकी (isogamy): समान आकार के युग्मकों का संलयन
❓9. निम्नलिखित में अंतर करें:
(i) लाल शैवाल तथा भूरे शैवाल
विशेषता लाल शैवाल (Rhodophyceae) भूरे शैवाल (Phaeophyceae)
रंजक (pigments) फाइकोएरिथ्रिन (phycoerythrin) फ्यूकॉज़ेन्थिन (fucoxanthin)
संग्रहीत भोज्य फ्लोरिडियन स्टार्च लैमिनेरिन व मैनिटोल
रंग लाल/गुलाबी भूरे या जैतूनी हरे
आवास गहरे समुद्र में समुद्री, उथले जल में
(ii) लिवरवर्ट तथा मॉस
विशेषता लिवरवर्ट (Marchantiophyta) मॉस (Bryophyta)
संरचना थैलस (flatted thalloid) पत्तीदार व तने जैसे संरचना
वानस्पतिक जनन जेम्मा कप के द्वारा द्वितीयक तंतु से
राइजोइड्स एककोशकीय बहुकोशकीय
उदाहरण Marchantia Funaria
(iii) विषय बीजाणु तथा सम बीजाणु टेरिडोफाइट
विशेषता विषय बीजाणु (Heterospory) सम बीजाणु (Homosporous)
बीजाणु प्रकार दो – लघु एवं विशाल एक ही प्रकार के सभी बीजाणु
युग्मकों का विभाजन अलग-अलग लिंगीय युग्मकों में द्विलिंगी जननांगधर बनता है
उदाहरण Selaginella, Salvinia Pteris, Adiantum
❓10. स्तंभ I में दिए गए पादपों की स्तंभ II में दिए गए पादप वर्गों से मिलान करो:
स्तंभ I (पादप) स्तंभ II (वर्ग)
(अ) क्लैमाइडोमोनास (iii) शैवाल
(ब) सैल्वीनिया (ii) टेरिडोफाइट
(स) पिनस (iv) जिम्नोस्पर्म
(द) फनैरिया (i) मॉस
✅ सही मिलान:
(अ) → (iii)
(ब) → (ii)
(स) → (iv)
(द) → (i)
❓11. जिम्नोस्पर्म के महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन करो।
✅ उत्तर:
🔹 बीज नग्न होते हैं (फल में बंद नहीं)
🔸 द्विलिंगी (दोनों शंकु – पुं एवं स्त्री)
🔹 राल व टेरपेन्टिन जैसे उत्पाद प्रदान करते हैं
🔸 पुं जननांग परागकोष में होता है
🔹 स्त्री जननांग बीजांड में – फल नहीं बनता
🔸 उदाहरण: Cycas, Pinus, Ginkgo, Ephedra
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
(CBSE MODEL प्रश्न पत्र)
सिर्फ इसी पाठ से निर्मित CBSE MODEL प्रश्न पत्र।
🔹 Q1. पादप जगत को किस वैज्ञानिक ने सबसे पहले वर्गीकृत किया?
(A) व्हिटेकर
(B) लिनियस
(C) हुक
(D) अर्स्टोटल
✔️ उत्तर: (B) लिनियस
🔹 Q2. ब्रायोफाइटा को किस नाम से जाना जाता है?
(A) जल पौधे
(B) समुद्री शैवाल
(C) पादपों की उभयचर श्रेणी
(D) बीजधारी पौधे
✔️ उत्तर: (C) पादपों की उभयचर श्रेणी
🔹 Q3. थैलोफाइटा के उदाहरण हैं –
(A) पाइनस, साइकस
(B) नॉस्टॉक, क्लाडोफोरा
(C) ड्रायोप्टेरिस, सैल्विनिया
(D) क्लेमेटिस, रोज़
✔️ उत्तर: (B) नॉस्टॉक, क्लाडोफोरा
🔹 Q4. बीज रहित पादपों में किस वर्ग के पौधे आते हैं?
(A) ब्रायोफाइटा
(B) टेरिडोफाइटा
(C) जिम्नोस्पर्म
(D) दोनों A और B
✔️ उत्तर: (D) दोनों A और B
🔹 Q5. जिम्नोस्पर्म का मुख्य लक्षण है –
(A) बीज फल के भीतर होते हैं
(B) बीज नग्न रहते हैं
(C) फूलों का निर्माण होता है
(D) ये केवल जल में उगते हैं
✔️ उत्तर: (B) बीज नग्न रहते हैं
🔹 Q6. टेरिडोफाइटा की विशेषता है –
(A) बीजों की अनुपस्थिति
(B) संवहनी ऊतक की उपस्थिति
(C) स्पोरोफाइट पीढ़ी की प्रधानता
(D) उपरोक्त सभी
✔️ उत्तर: (D) उपरोक्त सभी
🔹 Q7. एल्गी की शारीरिक रचना होती है –
(A) जड़, तना, पत्तियाँ
(B) थैलस
(C) बीज
(D) केवल पत्तियाँ
✔️ उत्तर: (B) थैलस
🔹 Q8. निम्न में से कौन सा पादप संवहनी ऊतक नहीं दर्शाता?
(A) फर्न
(B) काई
(C) साइकस
(D) गुलमोहर
✔️ उत्तर: (B) काई
🔹 Q9. ब्रायोफाइटा में किस संरचना के द्वारा जल अवशोषण होता है?
(A) जड़
(B) स्टोमेटा
(C) राइजोइड
(D) स्पोरोफिल
✔️ उत्तर: (C) राइजोइड
🔹 Q10. कवक और शैवाल के सहजीवी संघ को क्या कहते हैं?
(A) लाइकेन
(B) काई
(C) बीजाणु
(D) स्पोरोफाइट
✔️ उत्तर: (A) लाइकेन
🔹 Q11. सबसे जटिल तथा पूर्ण विकसित संवहनी पादपों का समूह है –
(A) थैलोफाइटा
(B) ब्रायोफाइटा
(C) टेरिडोफाइटा
(D) जिम्नोस्पर्म
✔️ उत्तर: (D) जिम्नोस्पर्म
🔹 Q12. ‘स्पोरोफाइट’ और ‘गेमेटोफाइट’ पीढ़ियों की अदल-बदल कहलाती है –
(A) जनन
(B) जीवन चक्र
(C) पीढ़ियों का परावर्तन
(D) निषेचन
✔️ उत्तर: (C) पीढ़ियों का परावर्तन
🔹 Q13. पादप वर्गीकरण में सबसे सरल रूप कौन सा है?
(A) ब्रायोफाइटा
(B) टेरिडोफाइटा
(C) थैलोफाइटा
(D) जिम्नोस्पर्म
✔️ उत्तर: (C) थैलोफाइटा
🔹 Q14. थैलोफाइटा में किस प्रकार के युग्मक पाए जाते हैं?
(A) द्वि-कोशिकीय
(B) बहुकोशिकीय
(C) एककोशिकीय
(D) नग्न बीज
✔️ उत्तर: (C) एककोशिकीय
🔹 Q15. लाइकेन का महत्व किसमें है?
(A) वायुमंडलीय प्रदूषण के संकेतक
(B) भोजन स्रोत
(C) कवक नियंत्रण
(D) शुद्ध जल का स्रोत
✔️ उत्तर: (A) वायुमंडलीय प्रदूषण के संकेतक
🔹 Q16. निम्न में से कौन सा केवल स्पोरोफाइट पीढ़ी को दर्शाता है?
(A) मॉस
(B) ड्रायोप्टेरिस
(C) नॉस्टॉक
(D) क्लेमेटिस
✔️ उत्तर: (B) ड्रायोप्टेरिस
🔶 Q17. (कथन-कारक)
कथन (A): ब्रायोफाइटा में संवहनी ऊतक अनुपस्थित होते हैं।
कारक (R): ब्रायोफाइटा में जल तथा खनिजों का स्थानांतरण राइजोइड द्वारा होता है।
(A) दोनों कथन सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) दोनों कथन सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।
✔️ उत्तर: (A)
🔶 Q18. (कथन-कारक)
कथन (A): जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न होते हैं।
कारक (R): इनमें अंडाशय उपस्थित नहीं होता।
(A) दोनों कथन सही हैं और R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) दोनों कथन सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
(C) A सही है, R गलत है।
(D) A गलत है, R सही है।
✔️ उत्तर: (A)
🔸 Q19. लाइकेन क्या है? इसके घटक कौन होते हैं?
🧬 उत्तर:
लाइकेन एक सहजीवी संघ है जो शैवाल (क्लोरोफाइटा या सायनोबैक्टीरिया) और कवक (आसकोमायसीटीज या बेसिडियोमायसीटीज) के बीच होता है।
🔹 शैवाल प्रकाश संश्लेषण करता है जबकि कवक जल और खनिज प्रदान करता है।
🔸 Q20. ब्रायोफाइटा को ‘पादपों के उभयचर’ क्यों कहा जाता है?
🧬 उत्तर:
ब्रायोफाइटा को पादपों के उभयचर कहा जाता है क्योंकि वे जल में जनन क्रियाएँ करते हैं किंतु स्थलीय वातावरण में भी जीवित रहते हैं।
🔹 उनका जीवन चक्र जल पर निर्भर करता है।
🔸 Q21. जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न क्यों होते हैं?
🧬 उत्तर:
जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न होते हैं क्योंकि इनमें अंडाशय उपस्थित नहीं होता।
🔹 बीज अंडावरण (फल) से सुरक्षित नहीं होते बल्कि सीधे ओवुल के ऊपर विकसित होते हैं।
🧪 Section C (प्रश्न 22–28): लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक प्रति प्रश्न)
प्रत्येक उत्तर लगभग 60–70 शब्दों में दीजिए।
🔹 Q22. थैलोफाइटा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
🧬 उत्तर:
🔵 थैलोफाइटा सबसे सरल शरीर संरचना वाले पादप होते हैं।
🟢 इनका शरीर थैलस रूपी होता है – जड़, तना, पत्तियाँ अनुपस्थित होती हैं।
🔴 ये जल में निवास करते हैं।
🟡 इनमें प्रकाश-संश्लेषण करने की क्षमता होती है।
🔹 क्लोरोफिल A और B पाए जाते हैं।
🔹 Q23. ब्रायोफाइटा तथा टेरिडोफाइटा में दो भेद बताइए।
🧬 उत्तर:
🔹 ब्रायोफाइटा में संवहनी ऊतक नहीं होते जबकि टेरिडोफाइटा में होते हैं।
🔹 ब्रायोफाइटा में गैमेटोफाइट पीढ़ी प्रमुख होती है जबकि टेरिडोफाइटा में स्पोरोफाइट प्रमुख होता है।
🔹 ब्रायोफाइटा जल-निर्भर होते हैं जबकि टेरिडोफाइटा आंशिक रूप से जल-स्वतंत्र होते हैं।
🔹 Q24. जिम्नोस्पर्म में जनन कैसे होता है? संक्षेप में लिखिए।
🧬 उत्तर:
🔸 जिम्नोस्पर्म में द्विलिंगी पुष्पों की अनुपस्थिति होती है।
🔸 नर शंकु में सूक्ष्मबीजाणु (परागकण) बनते हैं और मादा शंकु में अंडाणु।
🔸 परागण वायु द्वारा होता है और निषेचन के बाद नग्न बीज बनते हैं।
🔸 निषेचन हेतु जल की आवश्यकता नहीं होती।
🔹 Q25. लाइकेन को प्रदूषण का सूचक क्यों माना जाता है?
🧬 उत्तर:
लाइकेन अत्यधिक संवेदनशील होते हैं वायुमंडलीय प्रदूषण, विशेषकर सल्फर डाइऑक्साइड गैस के प्रति।
🔹 यदि किसी क्षेत्र में लाइकेन नहीं पाए जाएँ, तो यह प्रदूषण का संकेत होता है।
🔹 अतः यह जैव-संकेतक (bioindicator) के रूप में कार्य करता है।
🔹 Q26. टेरिडोफाइटा के जीवन चक्र की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
🧬 उत्तर:
🔹 स्पोरोफाइट पीढ़ी प्रमुख और स्वतंत्र होती है।
🔹 इनमें बीज नहीं बनते बल्कि बीजाणु द्वारा जनन होता है।
🔹 इनमें भी पीढ़ियों का परावर्तन होता है – स्पोरोफाइट और गैमेटोफाइट दोनों।
🔹 Q27. शैवाल के तीन प्रमुख वर्ग कौन-कौन से हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण लिखिए।
🧬 उत्तर:
🟢 क्लोरोफाइटा (हरा शैवाल) – उदाहरण: वोल्वॉक्स
🔴 रोडोफाइटा (लाल शैवाल) – उदाहरण: पॉलीसाइफोनिया
🟡 फियोफाइटा (भूरा शैवाल) – उदाहरण: एकमिया
🔹 Q28. पादपों में पीढ़ियों के परावर्तन की संकल्पना समझाइए।
🧬 उत्तर:
पीढ़ियों का परावर्तन (alternation of generations) वह प्रक्रिया है जिसमें एक पादप का जीवनचक्र दो पीढ़ियों – स्पोरोफाइट (डिप्लॉयड) और गैमेटोफाइट (हैप्लॉयड) में विभाजित होता है।
🔹 दोनों पीढ़ियाँ एक के बाद एक आती हैं और जनन प्रक्रिया को संचालित करती हैं।
🔶 Q29. केस आधारित प्रश्न – शैवाल
नीचे दी गई जानकारी पढ़िए:
“शैवाल प्राथमिक उत्पादक होते हैं और जल के पारितंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ शैवाल जैसे स्पाइरोगायरा तथा वोल्वॉक्स जल में बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ते हैं जिससे जलजीवों को जीवन मिलता है। लाल शैवाल में गाढ़ा रंगद्रव्य होने से ये गहराई में भी प्रकाश-संश्लेषण कर सकते हैं।”
📌 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(क) शैवाल को प्राथमिक उत्पादक क्यों कहा जाता है?
✍️ उत्तर: क्योंकि ये प्रकाश-संश्लेषण करके कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करते हैं।
(ख) वोल्वॉक्स और स्पाइरोगायरा का पारितंत्र में क्या योगदान होता है?
✍️ उत्तर: ये जल में ऑक्सीजन छोड़कर जलजीवों के लिए जीवनदायिनी वातावरण बनाते हैं।
(ग) लाल शैवाल को समुद्र की गहराई में जीवित रहने योग्य कौन-सा गुण बनाता है?
✍️ उत्तर: इनमें फाइकोबिलिन रंगद्रव्य होता है जो नीली और हरी रोशनी को अवशोषित करता है, जिससे गहराई में भी प्रकाश-संश्लेषण संभव होता है।
(घ) शैवाल के कौन-कौन से उपयोग व्यावसायिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं?
✍️ उत्तर: शैवाल से ऐगर, खाद्य पूरक, आयोडीन, और दवाइयाँ प्राप्त होती हैं।
🔶 Q30. केस आधारित प्रश्न – ब्रायोफाइटा और जिम्नोस्पर्म
पढ़िए:
“ब्रायोफाइटा भूमि पर पाए जाने वाले पहले पौधों में से हैं। इनमें संवहनी ऊतक नहीं होते और ये अपने जीवनचक्र के लिए जल पर निर्भर होते हैं। जिम्नोस्पर्म विकसित पादप होते हैं जिनमें बीज नग्न रूप में पाए जाते हैं तथा बीजाणु वायु द्वारा फैलते हैं।”
📌 प्रश्न:
(क) ब्रायोफाइटा को ‘प्रकृति के उभयचर’ क्यों कहा जाता है?
✍️ उत्तर: क्योंकि वे जल में जनन करते हैं किंतु भूमि पर निवास करते हैं।
(ख) ब्रायोफाइटा में संवहन किस प्रकार होता है?
✍️ उत्तर: इनका संवहन विसरण और परासरण के द्वारा होता है क्योंकि इनमें संवहनी ऊतक नहीं होते।
(ग) जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न क्यों होते हैं?
✍️ उत्तर: क्योंकि इनमें अंडाशय नहीं होता, जिससे बीज फल के अन्दर नहीं बनते।
(घ) वायु द्वारा बीजाणु फैलाव का क्या लाभ होता है?
✍️ उत्तर: इससे जनन क्षेत्र विस्तृत होता है और विविध पर्यावरणीय स्थितियों में भी जनन संभव होता है।
Q31. पादप जगत के प्रमुख वर्गों का वर्णन कीजिए।
🧬 उत्तर:
पादप जगत को मुख्यतः निम्नलिखित वर्गों में बाँटा गया है:
🔵 थैलोफाइटा: सबसे सरल, जल में पाए जाने वाले थैलस पादप (उदाहरण: स्पाइरोगायरा)।
🟢 ब्रायोफाइटा: स्थलीय पादप, परंतु जल पर निर्भर (उदाहरण: मार्चैंशिया)।
🔴 टेरिडोफाइटा: प्रथम संवहनी पादप (उदाहरण: फर्न)।
🟡 जिम्नोस्पर्म: नग्न बीज वाले पादप (उदाहरण: साइकस)।
🔶 एंजियोस्पर्म: आवृत बीजधारी पादप, फूल और फल होते हैं (उदाहरण: आम)।
🔹 इन सभी वर्गों का विकास क्रमशः जल से भूमि की ओर अनुकूलन दर्शाता है।
🔷 Q32. शैवाल के वर्गीकरण का वर्णन कीजिए। उनके आधार और उदाहरणों सहित।
🧬 उत्तर:
🔸 शैवाल को उनके वर्णक, भंडारण उत्पाद और कोशिका भित्ति की संरचना के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा गया है:
🟢 क्लोरोफाइटा (हरा शैवाल):
✔️ क्लोरोफिल A और B
✔️ स्टार्च भंडारण
✔️ उदाहरण: वोल्वॉक्स, क्लैमीडोमोनास
🟡 फियोफाइटा (भूरा शैवाल):
✔️ क्लोरोफिल A, C और फुकोजैंथिन
✔️ लामीनारिन और मैनिटोल भंडारण
✔️ उदाहरण: लैमिनेरिया, एकमिया
🔴 रोडोफाइटा (लाल शैवाल):
✔️ क्लोरोफिल A, D और फाइकोबिलिन
✔️ फ्लोरिडियन स्टार्च
✔️ उदाहरण: पॉलीसाइफोनिया, ग्रेसिलेरिया
🔷 Q33. ब्रायोफाइटा के जीवनचक्र को समझाइए।
🧬 उत्तर:
ब्रायोफाइटा में जीवनचक्र द्विअवस्थीय होता है –
🔸 गैमेटोफाइट चरण (हैप्लॉयड):
✔️ यह प्रमुख चरण होता है।
✔️ इसमें यौन जनन होता है – एन्थेरिडिया (नर) और आर्केगोनिया (मादा) बनते हैं।
✔️ निषेचन जल की उपस्थिति में होता है।
🔸 स्पोरोफाइट चरण (डिप्लॉयड):
✔️ निषेचन से बनी युग्मज कोशिका से स्पोरोफाइट बनता है।
✔️ यह गैमेटोफाइट से जुड़ा और पोषण पर निर्भर होता है।
✔️ स्पोरोफाइट में बीजाणु बनते हैं जो माइटोसिस द्वारा नए गैमेटोफाइट बनाते हैं।
✏️ निष्कर्ष: इस जीवनचक्र में पीढ़ियों का परावर्तन (alternation of generations) स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
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