Class 11 : BIology (In Hindi) – अध्याय 2: जीव जगत का वर्गीकरण
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔷 प्रस्तावना
🧠 पृथ्वी पर जैव विविधता इतनी विशाल है कि उसकी समुचित समझ के लिए वैज्ञानिकों ने वर्गीकरण की विभिन्न प्रणालियाँ विकसित कीं। ‘जैविक वर्गीकरण’ का यह पाठ हमें समझाता है कि किस प्रकार जीवों को वैज्ञानिक पद्धति से श्रेणीबद्ध किया जाता है और किस क्रम में उन्हें विभिन्न जगतों में बाँटा गया।
✏️ नोट: इस पाठ में हम पाँच-जगत प्रणाली से लेकर वायरस जैसे ऐविवेचित जीवों तक का अध्ययन करते हैं।
🟢 1. वर्गीकरण प्रणालियों का ऐतिहासिक विकास
🔵 प्राकृतिक प्रवृत्ति से कृत्रिम पद्धति तक:
प्रारंभ में जीवों को केवल उपयोगिता या बाह्य रूप के आधार पर बाँटा जाता था। बाद में, शरीर रचना, जनन प्रणाली और आनुवंशिक गुणों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रणाली बनी।
🔵 दो-जगत प्रणाली (प्लांटी व एनिमेलिया):
इसमें सभी जीवों को या तो पौधों या प्राणियों के अंतर्गत रखा गया, परंतु यह सूक्ष्मजीवों और जंतुओं के बीच स्पष्ट अंतर नहीं कर पाई।
🟡 2. पाँच-जगत प्रणाली (व्हिटेकर द्वारा)
🔴 प्रस्तावना:
१९६९ में आर.एच. व्हिटेकर ने पाँच-जगत प्रणाली प्रस्तुत की। इसमें निम्नलिखित जगत सम्मिलित थे:
🟢 मोनेरा
🟢 प्रोटिस्टा
🟢 फंजाइ
🟢 प्लांटी
🟢 एनिमेलिया
💡 सिद्धांत के आधार:
➡️ कोशिका संरचना (प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक)
➡️ शरीर संरचना (एककोशिकीय या बहुकोशिकीय)
➡️ पोषण विधि (स्वपोषी या परपोषी)
➡️ जनन विधि
➡️ जीवन शैली
🔵 3. मोनेरा (Monera)
🧬 प्रमुख विशेषताएँ:
✔️ प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ
✔️ कोशिका भित्ति उपस्थिति
✔️ न्यूक्लियस अनुपस्थित
✔️ डीएनए स्वतंत्र रूप से उपस्थित
🌿 उदाहरण:
🔹 जीवाणु (बैक्टीरिया)
🔹 आर्कीबैक्टीरिया
🔹 सायनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल)
✏️ नोट: सायनोबैक्टीरिया प्रकाश-संश्लेषण करने वाले जीवाणु होते हैं।

🔴 4. प्रोटिस्टा (Protista)
🌊 प्रमुख गुण:
✔️ यूकैरियोटिक एककोशिकीय जीव
✔️ कुछ स्वपोषी, कुछ परपोषी
✔️ जल में पाए जाते हैं
✔️ किलिए (cilia), कशाभ (flagella) द्वारा गति
🌱 उदाहरण:
🔹 ऐमीबा
🔹 परेमीशियम
🔹 यूग्लीना
💡 विशेष: यूग्लीना में पौधों एवं जंतुओं दोनों के लक्षण मिलते हैं।


🟢 5. फंजाइ (Fungi)
🧠 महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ:
✔️ यूकैरियोटिक बहुकोशिकीय
✔️ परपोषी (अपघटकों के रूप में)
✔️ कोशिका भित्ति में काइटिन
✔️ राइजॉइड द्वारा पोषण अवशोषण
🍄 उदाहरण:
🔹 खमीर
🔹 कवक
🔹 पेनिसिलियम
💡 सामाजिक उपयोग: खाद्य प्रसंस्करण, दवा निर्माण में महत्त्वपूर्ण

🟣 6. प्लांटी (Plantae)
🌿 मुख्य लक्षण:
✔️ यूकैरियोटिक, स्वपोषी
✔️ प्रकाश-संश्लेषण हेतु क्लोरोफिल
✔️ स्थायी कोशिका भित्ति
✔️ स्थिर जीवन शैली
🌼 उदाहरण:
🔹 शैवाल
🔹 ब्रायोफाइटा
🔹 टेरिडोफाइटा
🔹 नग्नबीज और आवृतबीज
✏️ नोट: यह जगत पूर्णतः प्रकाश संश्लेषण पर आधारित है।
🧬 7. एनिमेलिया (Animalia)
🧠 मुख्य विशेषताएँ:
✔️ यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय
✔️ कोशिका भित्ति अनुपस्थित
✔️ परपोषी
✔️ सक्रिय जीवन शैली
✔️ विभिन्न अंगतंत्रों का विकास
🐾 उदाहरण:
🔹 स्पंज
🔹 केंचुआ
🔹 कीट
🔹 स्तनधारी
💡 विविधता: इस जगत में सर्वाधिक विविधता पाई जाती है।
🟤 8. विषाणु (Virus) – जीव या अजीव?
🔴 विलक्षणता:
✔️ केवल न्यूक्लिक अम्ल (डीएनए या आरएनए) और प्रोटीन आवरण
✔️ जीवित कोशिका के बाहर निष्क्रिय
✔️ परजीवी स्वरूप में केवल पुनरुत्पादन करते हैं
🧪 उदाहरण:
🔹 एचआईवी
🔹 बैक्टीरियोफेज
🔹 इन्फ्लुएंज़ा वायरस
✏️ नोट: विषाणु न तो पूर्ण जीव हैं और न ही पूर्ण अजीव – ये संक्रमणकालीन अवस्था में माने जाते हैं।
🔶 9. वायरस-जैसे कण: विषाणु (Viroids) और प्रायोन
🌱 वाइरॉयड्स:
➡️ केवल आरएनए, कोई प्रोटीन आवरण नहीं
➡️ पौधों में रोग फैलाते हैं
🧬 प्रायोन:
➡️ केवल प्रोटीन, कोई डीएनए/आरएनए नहीं
➡️ मनुष्यों एवं अन्य जानवरों में तंत्रिका तंत्र संबंधी रोगों के लिए उत्तरदायी

✨ Why This Lesson Matters (यह पाठ क्यों महत्वपूर्ण है?)
🌿 यह पाठ छात्रों को जीवों की विविधता को समझने का आधार देता है।
🧠 जैविक वर्गीकरण विज्ञान को संरचना, पोषण, कोशिकीय संगठन और विकास के आधार पर जीवों को समझने में सहायक बनाता है।
📌 यह चिकित्सा, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि और पर्यावरण विज्ञान जैसे क्षेत्रों की मूलभूत नींव है।
📝 Quick Recap (स्मरण पुनरावलोकन):
🔹 जैव विविधता का वैज्ञानिक वर्गीकरण
🔹 पाँच-जगत प्रणाली: मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाइ, प्लांटी, एनिमेलिया
🔹 विषाणु – जीवित व अजीव के मध्य
🔹 वाइरॉयड्स व प्रायोन – विषाणु जैसे कण
🔹 प्रत्येक जगत की विशिष्ट संरचना व पोषण विधियाँ
📘 संक्षिप्त सारांश (300 शब्दों में)
📍 जैविक वर्गीकरण का यह अध्याय पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों को वैज्ञानिक रूप से समझने हेतु उन्हें समूहों में बाँटने की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।
📍 आरंभ में दो-जगत प्रणाली थी – प्लांटी और एनिमेलिया। यह प्रणाली सूक्ष्मजीवों को समुचित स्थान नहीं दे पाई। इसी कारण १९६९ में आर.एच. व्हिटेकर ने पाँच-जगत प्रणाली प्रस्तुत की।
📍 पाँच जगत हैं:
🔹 मोनेरा: प्रोकैरियोटिक, जैसे जीवाणु
🔹 प्रोटिस्टा: एककोशिकीय यूकैरियोटिक, जैसे ऐमीबा
🔹 फंजाइ: परपोषी, कोशिका भित्ति में काइटिन
🔹 प्लांटी: स्वपोषी, बहुकोशिकीय
🔹 एनिमेलिया: परपोषी, कोशिका भित्ति अनुपस्थित
📍 विषाणु जीवों से भिन्न होते हैं – इनमें कोशिकीय संरचना नहीं होती। वे केवल अन्य जीवों की कोशिकाओं में परजीवी रूप से सक्रिय रहते हैं।
📍 इसके अतिरिक्त वाइरॉयड्स (केवल आरएनए) और प्रायोन (केवल प्रोटीन) जैसे कण भी अध्ययन में सम्मिलित हैं।
📍 यह अध्याय हमें यह सिखाता है कि जैव विविधता को समझने और उसका वैज्ञानिक प्रबंधन करने हेतु वर्गीकरण अनिवार्य है।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
❓ 1. वर्गीकरण की प्रणालियों में समय के साथ आए परिवर्तनों का व्याख्या कीजिए।
✅ उत्तर:
वर्गीकरण प्रणालियों में समय के साथ निम्नलिखित परिवर्तन हुए:
🔹 प्रारंभ में दो जगत प्रणाली – पादप जगत व प्राणी जगत
🔸 तीन जगत प्रणाली – प्रोटिस्टा को जोड़ा गया
🔹 चार जगत प्रणाली – मोनेरा को जोड़ा गया
🔸 पाँच जगत प्रणाली (Whittaker): मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप, प्राणी
🔹 नवीनतम – त्रिजगत प्रणाली (तीन डोमेन): आर्किया, यूबैक्टीरिया, यूकैरिया
📌 यह परिवर्तन सूक्ष्मजीवों, आणविक अध्ययन और डीएनए अनुक्रमण के आधार पर हुए।
❓ 2. निम्नलिखित के आर्थिक दृष्टि से दो महत्त्वपूर्ण उपयोगों को लिखें –
(क) परपोषी बैक्टीरिया
(ख) आर्क बैक्टीरिया
✅ उत्तर:
(क) परपोषी बैक्टीरिया:
🔹 दूध से दही, पनीर व सिरका बनाने में
🔸 अपशिष्ट निपटान व मृत जैव पदार्थों के विघटन में
(ख) आर्क बैक्टीरिया:
🔹 मिथेन जनक आर्किया (methanogens) → बायोगैस उत्पादन
🔸 उच्च तापीय और अम्लीय परिस्थितियों में उपयोगी एंज़ाइम स्रोत
❓ 3. डायटम के कोशिका भित्ति के क्या लक्षण हैं?
✅ उत्तर:
🔸 सिलिका से निर्मित
🔹 दो भागों वाली ढाँचा (साबुनदानी जैसा)
🔸 बहुत कठोर और अविनाशी
🔹 मृत कोशिका भित्तियाँ पृथ्वी की तलछट में → डायटोम मिट्टी बनाती हैं
❓ 4. ‘शैवाल पुष्प’ (Algal bloom) तथा ‘लाल तरंगें’ (red tides) क्या दर्शाते हैं?
✅ उत्तर:
🔹 शैवाल पुष्प: जल में पोषक तत्वों की अधिकता से शैवाल की तीव्र वृद्धि
🔸 ऑक्सीजन की कमी → जलीय जीवों की मृत्यु
🔹 लाल तरंगें: लाल डाइनोफ्लैजलेट्स (जैसे Gonyaulax) की वृद्धि → जल लाल रंग का हो जाता है
🔸 विषैले प्रभाव भी संभव
❓ 5. वायरस से वायरोइड्स कैसे भिन्न होते हैं?
✅ उत्तर:
विशेषता वायरस वायरोइड्स
अनुवांशिक पदार्थ डीएनए या आरएनए केवल आरएनए
प्रोटीन आवरण उपस्थित अनुपस्थित
आकार बड़ा अत्यंत लघु
खोज पुरानी (19वीं सदी) 1971, टी.ओ. डिनर द्वारा
❓ 6. प्रोटोजोआ के चार प्रमुख समूहों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
✅ उत्तर:
🔹 कृमिनुमा प्रोटोजोआ (Amoeba) – छद्मपाद होते हैं
🔸 कशाभधारी प्रोटोजोआ (Trypanosoma) – कशाभिका द्वारा संचलन
🔹 रिश्माभधारी प्रोटोजोआ (Paramecium) – रेशेदार कशाभिकाएँ
🔸 बीजाणुजनक प्रोटोजोआ (Plasmodium) – संचलन अंग नहीं, परजीवी
❓ 7. पौधे स्वपोषी हैं। क्या आप ऐसे कुछ पौधों को बता सकते हैं, जो आंशिक रूप से परपोषी हैं?
✅ उत्तर:
हाँ, कुछ पौधे आंशिक रूप से परपोषी होते हैं:
🔹 कसकटा – परजीवी
🔸 नेपेंथेस, ड्रोसेरा – कीटभक्षी पौधे
🔹 मोनोट्रोपा – कवक पर आश्रित
❓ 8. शैवाल तथा कवकों शब्दों का क्या तात्पर्य है?
✅ उत्तर:
🔸 शैवाल (Algae): स्वपोषी, फोटोसिंथेटिक, सरल शरीर वाले पादप
🔹 कवक (Fungi): परपोषी, बहुकोशकीय (अथवा एककोशकीय), कोशिका भित्ति में काइटिन
❓ 9. कवक (Fungi) जगत के वर्गों का तुलनात्मक विवरण निम्नलिखित बिंदुओं पर करें –
(क) पोषण की विधि
(ख) जनन की विधि
✅ उत्तर:
वर्ग पोषण की विधि जनन की विधि
फाइकोमाइसेटीज़ परपोषी या परजीवी बीजाणु व समलैंगिक युग्मन (isogamy)
ऐस्कोमाइसेटीज़ परपोषी या सहजीवी कोनिडिया (अलैंगिक), एस्कोस्पोर (लैंगिक)
बेसिडियोमाइसेटीज़ परपोषी या परजीवी लैंगिक – बेसिडियोस्पोर
ड्यूटेरोमाइसेटीज़ परपोषी केवल अलैंगिक – कोनिडिया
❓ 10. यूग्लीनीड के विशेष लक्षण कौन-कौन से हैं?
✅ उत्तर:
🔹 जल में पाये जाते हैं
🔸 कोशिका भित्ति नहीं, पेलिकिल होती है
🔹 प्रकाश में स्वपोषी, अंधेरे में परपोषी
🔸 दो कशाभिकाएँ
🔹 उदाहरण: Euglena
❓ 11. संरचना तथा अनुवांशिक पदार्थों के प्रकृति के संदर्भ में वायरस का संक्षिप्त विवरण दो। वायरस से होने वाली चार रोगों के नाम भी लिखो।
✅ उत्तर:
🦠 वायरस की विशेषताएँ:
🔹 अकोशकीय
🔸 केवल जीवित कोशिका में सक्रिय
🔹 अनुवांशिक पदार्थ: केवल डीएनए या आरएनए
🔸 प्रोटीन आवरण – कैप्सिड
🔹 उदाहरण: बैक्टीरियोफेज
✅ वायरस जनित रोग:
✔ पोलियो
✔ एड्स
✔ इन्फ्लुएंज़ा
✔ हेपेटाइटिस बी
❓ 12. अपनी कक्षा में इस शीर्षक पर “क्या वायरस सजीव हैं अथवा निर्जीव” पर चर्चा करें।
✅ उत्तर (सारांश बिंदु):
🔹 सजीव गुण: जनन, उत्परिवर्तन, अनुवांशिकता (होस्ट में)
🔸 निर्जीव गुण: कोशिका रहित, निष्क्रियता (बाह्य वातावरण में)
📌 निष्कर्ष: वायरस सजीव एवं निर्जीव दोनों के गुण दर्शाते हैं, अतः सीमांत सजीव (obligate parasites) कहलाते हैं।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
(CBSE MODEL प्रश्न पत्र)
सिर्फ इसी पाठ से निर्मित CBSE MODEL प्रश्न पत्र।
🟢 Section A – प्रश्न 1 से 16 (MCQs + कथन–कारण)
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।
🔹 Q1. पाँच-जगत प्रणाली किस वैज्ञानिक ने दी थी?
(A) डार्विन
(B) लिनियस
(C) व्हिटेकर
(D) हक्सले
✅ उत्तर: (C) व्हिटेकर
🔹 Q2. यूग्लीना को किस वर्ग में रखा गया है?
(A) प्लांटी
(B) प्रोटिस्टा
(C) फंजाइ
(D) एनिमेलिया
✅ उत्तर: (B) प्रोटिस्टा
🔹 Q3. निम्नलिखित में से किसमें काइटिन युक्त कोशिका भित्ति होती है?
(A) मोनेरा
(B) प्लांटी
(C) प्रोटिस्टा
(D) फंजाइ
✅ उत्तर: (D) फंजाइ
🔹 Q4. कौन-सा जीव प्रकाश-संश्लेषण व परपोषण दोनों कर सकता है?
(A) ऐमीबा
(B) यूग्लीना
(C) खमीर
(D) परेमीशियम
✅ उत्तर: (B) यूग्लीना
🔹 Q5. मोनेरा में कोशिकाओं का प्रकार होता है—
(A) यूकैरियोटिक
(B) प्रोकेरियोटिक
(C) बहुकोशिकीय
(D) बिना न्यूक्लियस
✅ उत्तर: (B) प्रोकेरियोटिक
🔹 Q6. किस समूह में क्लोरोफिल नहीं होता है?
(A) ब्रायोफाइटा
(B) शैवाल
(C) कवक
(D) शैवाल व कवक दोनों
✅ उत्तर: (C) कवक
🔹 Q7. प्लांटी जगत के जीव किस प्रकार के पोषण करते हैं?
(A) परपोषी
(B) सहजीवी
(C) स्वपोषी
(D) मृतोपजीवी
✅ उत्तर: (C) स्वपोषी
🔹 Q8. विषाणु किस समय जीवित माने जाते हैं?
(A) केवल जब वे वातावरण में हों
(B) जब वे किसी जीवित कोशिका में हों
(C) हमेशा
(D) कभी नहीं
✅ उत्तर: (B) जब वे किसी जीवित कोशिका में हों
🔹 Q9. सायनोबैक्टीरिया का दूसरा नाम है—
(A) नीला कवक
(B) नील-हरित शैवाल
(C) जलकवक
(D) यूग्लीना
✅ उत्तर: (B) नील-हरित शैवाल
🔹 Q10. वाइरॉयड में कौन-सी संरचना नहीं होती?
(A) आरएनए
(B) प्रोटीन
(C) न्यूक्लियस
(D) कोशिका झिल्ली
✅ उत्तर: (B) प्रोटीन
🔹 Q11. पाँच-जगत प्रणाली में फंजाइ को पृथक जगत क्यों माना गया?
(A) बहुकोशिकीय होते हैं
(B) प्रकाश-संश्लेषण नहीं करते
(C) कोशिका भित्ति में काइटिन होता है
(D) सभी विकल्प सही हैं
✅ उत्तर: (D) सभी विकल्प सही हैं
🔹 Q12. प्रोटिस्टा जगत के अधिकांश जीव—
(A) जलवासी होते हैं
(B) परपोषी होते हैं
(C) केवल बहुकोशिकीय होते हैं
(D) मृतोपजीवी होते हैं
✅ उत्तर: (A) जलवासी होते हैं
🔹 Q13. मोनेरा में कौन-सा जीव पाया जाता है?
(A) परेमीशियम
(B) ऐमीबा
(C) आर्कीबैक्टीरिया
(D) यूग्लीना
✅ उत्तर: (C) आर्कीबैक्टीरिया
🔹 Q14. किस समूह में बहुकोशिकीय, गतिशील, कोशिका भित्तिरहित और परपोषी जीव आते हैं?
(A) मोनेरा
(B) एनिमेलिया
(C) फंजाइ
(D) प्रोटिस्टा
✅ उत्तर: (B) एनिमेलिया
🔹 Q15. निम्न में से कौन विषाणु जैसे कण हैं?
(A) प्रायोन
(B) जीवाणु
(C) सायनोबैक्टीरिया
(D) ऐमीबा
✅ उत्तर: (A) प्रायोन
🔹 Q16. कथन–कारण प्रकार प्रश्न:
कथन (A): प्रोटिस्टा में अधिकांश जीव एककोशिकीय होते हैं।
कारण (R): प्रोटिस्टा के जीव बहुकोशिकीय जीवन की पूर्वज इकाइयाँ माने जाते हैं।
(A) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
(B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(C) A सही है, पर R गलत है।
(D) A गलत है, पर R सही है।
✅ उत्तर: (B) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
🔷 Q17 – Q18 (MCQ से अलग)
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है
🔹 Q17. फंजाइ जगत के दो उदाहरण लिखिए।
✅ उत्तर: खमीर, पेनिसिलियम
🔹 Q18. मोनेरा जगत की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
✅ उत्तर:
🔹 प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ
🔹 न्यूक्लियस तथा झिल्ली-बद्ध कोशांग अनुपस्थित होते हैं
🟡 Section B – प्रश्न 19 से 21 (2 अंकों वाले अति लघु उत्तर प्रश्न)
प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।
🔹 Q19. सायनोबैक्टीरिया की दो विशेषताएँ लिखिए।
✅ उत्तर:
🔸 ये प्रकाश-संश्लेषण में सक्षम प्रोकैरियोटिक जीव होते हैं।
🔸 इनमें क्लोरोफिल ‘a’ पाया जाता है, लेकिन झिल्ली-बद्ध कोशांग नहीं होते।
🔹 Q20. प्रोटिस्टा जगत में पाए जाने वाले दो भिन्न पोषण प्रकार बताइए।
✅ उत्तर:
🔸 स्वपोषण (जैसे — यूग्लीना)
🔸 परपोषण (जैसे — ऐमीबा, परेमीशियम)
🔹 Q21. प्रायोन और वाइरॉयड में एक अंतर लिखिए।
✅ उत्तर:
🔸 प्रायोन केवल प्रोटीन से बने होते हैं जबकि वाइरॉयड केवल आरएनए से बने होते हैं।
🔸 प्रायोन प्राणियों में रोग फैलाते हैं जबकि वाइरॉयड पौधों में रोग उत्पन्न करते हैं।
🔷 Section C – प्रश्न 22 से 28 (3 अंकों वाले लघु उत्तर प्रश्न)
प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है।
🔹 Q22. मोनेरा जगत के अंतर्गत आने वाले तीन प्रकार के जीवों का उल्लेख कीजिए।
✅ उत्तर:
🔸 सामान्य जीवाणु (Eubacteria) — जैसे Escherichia coli
🔸 आर्कीबैक्टीरिया — जैसे Methanogens
🔸 सायनोबैक्टीरिया — जैसे Nostoc या Anabaena
🔹 Q23. यूग्लीना एक अनोखा प्रोटिस्ट है। स्पष्ट कीजिए।
✅ उत्तर:
🔸 यूग्लीना में पौधों और प्राणियों दोनों के गुण होते हैं।
🔸 प्रकाश होने पर यह क्लोरोप्लास्ट के माध्यम से प्रकाश-संश्लेषण करता है (स्वपोषी)।
🔸 अंधकार में यह परपोषी व्यवहार करता है और सूक्ष्म जीवों का भक्षण करता है।
🔹 Q24. व्हिटेकर की पाँच-जगत प्रणाली के आधार क्या थे? कोई तीन बिंदु लिखिए।
✅ उत्तर:
🔸 कोशिका संरचना (प्रोकैरियोटिक या यूकैरियोटिक)
🔸 शरीर की संरचना (एककोशिकीय या बहुकोशिकीय)
🔸 पोषण विधि (स्वपोषी या परपोषी)
🔹 Q25. फंजाइ जगत के जीव परपोषी कैसे होते हैं?
✅ उत्तर:
🔸 ये मृत जैविक पदार्थों को विघटित करते हैं और अवशोषण के माध्यम से पोषण प्राप्त करते हैं।
🔸 राइजॉइड जैसे संरचनाओं द्वारा पोषक तत्वों को सोखते हैं।
🔸 काइटिनयुक्त कोशिका भित्ति उन्हें कठोर बनाती है जिससे वे बाहरी वातावरण से सुरक्षित रहते हैं।
🔹 Q26. विषाणु को जीवित और अजीव दोनों क्यों कहा जाता है?
✅ उत्तर:
🔸 जीवित — जब वे किसी जीवित कोशिका में प्रवेश करते हैं, तो पुनरुत्पादन करते हैं।
🔸 अजीव — स्वतंत्र रूप से यह निष्क्रिय होते हैं और कोई चयापचय नहीं दिखाते।
🔸 इनमें कोशिकीय संरचना नहीं होती, केवल न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन आवरण होता है।
🔹 Q27. प्रोटिस्टा और मोनेरा में कोई तीन अंतर लिखिए।
✅ उत्तर:
🔹 प्रोटिस्टा —
➡️ यूकैरियोटिक
➡️ न्यूक्लियस झिल्ली-बद्ध
➡️ अधिकांश जलवासी
🔹 मोनेरा —
➡️ प्रोकैरियोटिक
➡️ न्यूक्लियस अनुपस्थित
➡️ सूक्ष्मजीव (जैसे जीवाणु)
🔹 Q28. फंजाइ के तीन प्रमुख उपयोग लिखिए।
✅ उत्तर:
🔸 खाद्य प्रसंस्करण (जैसे खमीर द्वारा ब्रेड बनाना)
🔸 औषधि निर्माण (जैसे पेनिसिलियम से पेनिसिलिन)
🔸 जैविक विघटन द्वारा पर्यावरण स्वच्छता में सहायक
🔶 Section D – प्रश्न 29 से 30 (केस आधारित प्रश्न)
प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का है।
🔹 Q29. नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
अनुच्छेद:
आर.एच. व्हिटेकर ने पाँच-जगत प्रणाली प्रस्तुत की जिसमें जीवों को कोशिका संरचना, पोषण विधि, शरीर संगठन, तथा जीवन शैली के आधार पर वर्गीकृत किया गया। इस प्रणाली ने सूक्ष्म जीवों को उचित स्थान देने में मदद की।
📌 प्रश्न:
(1) पाँच-जगत प्रणाली के दो आधार लिखिए।
(2) किस जगत में सभी प्रोकैरियोटिक जीव आते हैं?
(3) फंजाइ किस प्रकार के पोषक होते हैं?
(4) यूग्लीना को किस जगत में रखा गया है और क्यों?
✅ उत्तर:
(1) कोशिका संरचना, पोषण विधि
(2) मोनेरा
(3) परपोषी (अपघटक)
(4) प्रोटिस्टा; क्योंकि उसमें पौधों और जंतुओं दोनों के गुण होते हैं।
🔹 Q30. अनुच्छेद पढ़िए और उत्तर दीजिए:
अनुच्छेद:
विषाणु अद्वितीय होते हैं क्योंकि वे न तो पूर्ण रूप से जीवित होते हैं और न ही पूर्ण रूप से अजीव। जब वे किसी जीवित कोशिका में होते हैं, तो सक्रिय हो जाते हैं। वाइरॉयड और प्रायोन जैसे कण भी विषाणु जैसे होते हैं लेकिन संरचना में भिन्न होते हैं।
📌 प्रश्न:
(1) विषाणु को ‘जीव’ क्यों नहीं कहा जा सकता?
(2) वाइरॉयड किससे बने होते हैं?
(3) प्रायोन किस प्रकार के रोग उत्पन्न करते हैं?
(4) विषाणु में कौन-से दो घटक होते हैं?
✅ उत्तर:
(1) क्योंकि इनमें कोशिकीय संगठन नहीं होता और वे स्वतंत्र रूप से सक्रिय नहीं होते।
(2) केवल आरएनए
(3) तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग
(4) न्यूक्लिक अम्ल और प्रोटीन आवरण
🧾 Section E – प्रश्न 31 से 33 (दीर्घ उत्तर प्रश्न)
प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है।
🔹 Q31. व्हिटेकर द्वारा दी गई पाँच-जगत प्रणाली की व्याख्या कीजिए। प्रत्येक जगत का एक-एक उदाहरण सहित वर्णन करें।
✅ उत्तर:
आर.एच. व्हिटेकर ने जीवों को पाँच जगतों में वर्गीकृत किया:
🟢 1. मोनेरा:
✔️ प्रोकैरियोटिक, जैसे — जीवाणु, सायनोबैक्टीरिया
🟢 2. प्रोटिस्टा:
✔️ एककोशिकीय यूकैरियोटिक, जैसे — ऐमीबा, यूग्लीना
🟢 3. फंजाइ:
✔️ परपोषी, बहुकोशिकीय, जैसे — खमीर, पेनिसिलियम
🟢 4. प्लांटी:
✔️ स्वपोषी, बहुकोशिकीय, जैसे — शैवाल, ब्रायोफाइटा
🟢 5. एनिमेलिया:
✔️ परपोषी, गतिशील, जैसे — केंचुआ, मानव
✏️ नोट: यह प्रणाली कोशिका संरचना, पोषण विधि, और शरीर संगठन पर आधारित थी।
🔹 Q32. विषाणु जीव और अजीव के बीच संक्रमणकालीन क्यों माने जाते हैं? उनका निर्माण किन घटकों से होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
✅ उत्तर:
✔️ विषाणु में कोशिका नहीं होती, लेकिन जब वे जीवित कोशिका में प्रवेश करते हैं, तो अपने डीएनए/आरएनए द्वारा पुनरुत्पादन करते हैं।
✔️ कोशिकीय गतिविधियाँ नहीं दिखाते → अजीव
✔️ परजीवी रूप में जीवित कोशिकाओं में सक्रिय → जीव
📌 संरचना:
🔸 न्यूक्लिक अम्ल (डीएनए या आरएनए)
🔸 प्रोटीन आवरण (कैप्सिड)
📌 उदाहरण:
🔹 एचआईवी (मानव)
🔹 मोज़ेक वायरस (पौधे)
🔹 बैक्टीरियोफेज (जीवाणु)
🔹 Q33. मोनेरा, प्रोटिस्टा और फंजाइ के बीच पाँच अंतर लिखिए।
✅ उत्तर:
विशेषता मोनेरा प्रोटिस्टा फंजाइ
कोशिका प्रकार प्रोकैरियोटिक यूकैरियोटिक यूकैरियोटिक
कोशांग अनुपस्थित उपस्थित उपस्थित
पोषण स्वपोषी / परपोषी दोनों परपोषी
शरीर संगठन एककोशिकीय एककोशिकीय सामान्यतः बहुकोशिकीय
उदाहरण सायनोबैक्टीरिया ऐमीबा खमीर, कवक
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