Class 8 : गणित – अध्याय 4 : चतुर्भुज
व्याख्या और विवेचन
🟣🔵 विस्तृत व्याख्या
🟢 ➜ हम अपने आसपास अनेक ऐसी आकृतियाँ देखते हैं जिनमें चार भुजाएँ होती हैं। जैसे खिड़की का ढाँचा, दरवाज़ा, पुस्तक का ऊपरी भाग, मेज़ की सतह, फर्श की कुछ टाइलें, पतंग आदि। इन सबमें एक समान बात यह है कि ये चार भुजाओं से बनी बंद आकृतियाँ हैं। ऐसी बंद समतलीय आकृति को चतुर्भुज कहा जाता है।
🟡 ➜ “चतुर्भुज” शब्द का अर्थ ही है — चार भुजाओं वाली आकृति। पर केवल चार रेखाखंड बना देना पर्याप्त नहीं है। वे रेखाखंड इस प्रकार जुड़े हों कि एक बंद आकृति बने, तभी वह चतुर्भुज कहलाती है।
🔴 ➜ किसी चतुर्भुज में सामान्यतः ये भाग होते हैं:
🔹 4 भुजाएँ
🔹 4 शीर्ष
🔹 4 कोण
🔹 2 विकर्ण
🟢 ➜ यदि किसी चतुर्भुज को ABCD से दिखाएँ, तो
🔹 इसकी भुजाएँ होंगी — AB, BC, CD, DA
🔹 इसके शीर्ष होंगे — A, B, C, D
🔹 इसके कोण होंगे — ∠A, ∠B, ∠C, ∠D
🔹 इसके विकर्ण होंगे — AC तथा BD
🔵 ➜ विकर्ण वे रेखाखंड हैं जो दो असन्निकट शीर्षों को मिलाते हैं।
अर्थात A और C पास-पास के शीर्ष नहीं हैं, इसलिए AC एक विकर्ण है।
उसी प्रकार B और D को मिलाने वाला BD दूसरा विकर्ण है।
✏️ नोट:
भुजा सन्निकट शीर्षों को मिलाती है, जबकि विकर्ण असन्निकट शीर्षों को मिलाता है।
🟣 ➜ अब चतुर्भुज का सबसे महत्त्वपूर्ण गुण समझते हैं। किसी भी चतुर्भुज के आंतरिक कोणों का योग 360° होता है। यह परिणाम इस अध्याय की आधारभूत बात है और आगे के लगभग सभी प्रश्नों में काम आता है।
🟡 ➜ इसे सरल ढंग से ऐसे समझ सकते हैं। किसी चतुर्भुज के एक शीर्ष से उसके सामने वाले शीर्ष तक एक विकर्ण खींच दीजिए। तब वह चतुर्भुज दो त्रिभुजों में विभाजित हो जाता है।
हम जानते हैं कि एक त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है।
यहाँ दो त्रिभुज बने हैं, इसलिए कुल कोण-योग होगा:
180° + 180° = 360°
🔴 ➜ अतः किसी भी चतुर्भुज ABCD के लिए
∠A + ∠B + ∠C + ∠D = 360°
💡 अवधारणा:
यदि चतुर्भुज के तीन कोण ज्ञात हों, तो चौथा कोण 360° में से शेष तीनों का योग घटाकर निकाला जाता है।
🟢 ➜ उदाहरण देखिए।
यदि किसी चतुर्भुज के तीन कोण 80°, 95° और 105° हैं, तो चौथा कोण होगा:
चौथा कोण = 360° − (80° + 95° + 105°)
चौथा कोण = 360° − 280°
चौथा कोण = 80°
✔️ अतः चौथा कोण 80° है।
🔵 ➜ अब हम चतुर्भुजों के भिन्न-भिन्न प्रकारों की ओर बढ़ते हैं। सभी चतुर्भुज एक जैसे नहीं होते। कुछ में समान्तर भुजाएँ होती हैं, कुछ में बराबर भुजाएँ, कुछ में समकोण, और कुछ में विकर्णों के विशेष गुण पाए जाते हैं। इन्हीं गुणों के आधार पर चतुर्भुजों का वर्गीकरण किया जाता है।
🟣 ➜ सबसे पहले सामान्य चतुर्भुज को समझिए।
यह केवल चार भुजाओं वाली बंद आकृति है। इसमें यह आवश्यक नहीं कि कोई भुजाएँ बराबर हों, कोई कोण बराबर हों, या कोई भुजाएँ समान्तर हों। इसलिए यह चतुर्भुजों की सबसे सामान्य श्रेणी है।
🟡 ➜ अब समलम्ब की बात करें।
वह चतुर्भुज जिसमें सम्मुख भुजाओं का केवल एक युग्म समान्तर हो, समलम्ब कहलाता है।
यदि ABCD में
AB || CD
लेकिन
BC || AD न हो
तो ABCD एक समलम्ब है।
🔴 ➜ समलम्ब की पहचान बहुत स्पष्ट है:
🔹 केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर
🔹 दूसरा युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर नहीं
✏️ नोट:
यदि दोनों युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर हो जाएँ, तो आकृति समलम्ब नहीं, बल्कि समांतर चतुर्भुज बन जाती है।
🟢 ➜ अब समांतर चतुर्भुज को समझते हैं।
वह चतुर्भुज जिसमें सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समान्तर हों, समांतर चतुर्भुज कहलाता है।
यदि ABCD एक समांतर चतुर्भुज है, तो
🔹 AB || CD
🔹 BC || AD
🔵 ➜ समांतर चतुर्भुज के बहुत महत्त्वपूर्ण गुण होते हैं। इन्हें ध्यान से समझना आवश्यक है।
🔹 सम्मुख भुजाएँ समान्तर होती हैं।
🔹 सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
🔹 क्रमागत कोणों का योग 180° होता है।
🔹 इसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🟣 ➜ “विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं” का अर्थ समझिए।
यदि विकर्ण AC और BD बिंदु O पर मिलते हैं, तो
AO = OC
BO = OD
अर्थात O, दोनों विकर्णों का मध्यबिंदु होता है।
💡 अवधारणा:
समांतर चतुर्भुज की पहचान के लिए विकर्णों का यह गुण बहुत उपयोगी है।
🟡 ➜ अब क्रमागत कोणों वाले गुण को समझिए।
यदि ∠A = 70° हो, तो ∠B उसका क्रमागत कोण होगा।
समांतर चतुर्भुज में
∠A + ∠B = 180°
अतः
∠B = 180° − 70° = 110°
और चूँकि सम्मुख कोण बराबर होते हैं, इसलिए
∠C = 70°
∠D = 110°
✔️ अतः कोण हुए: 70°, 110°, 70°, 110°
🔴 ➜ इससे स्पष्ट है कि समांतर चतुर्भुज में यदि एक कोण ज्ञात हो जाए, तो सभी कोण निकाले जा सकते हैं।
🟢 ➜ अब आयत की ओर बढ़ते हैं।
आयत एक विशेष समांतर चतुर्भुज है जिसमें चारों कोण समकोण होते हैं।
अर्थात आयत में प्रत्येक कोण 90° होता है।
🔵 ➜ आयत के गुण:
🔹 सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 सम्मुख भुजाएँ समान्तर होती हैं।
🔹 चारों कोण 90° होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण बराबर होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🟣 ➜ यदि किसी आयत के विकर्ण AC और BD हों, तो
AC = BD
और यदि वे O पर मिलते हों, तो
AO = OC
BO = OD
✏️ नोट:
हर आयत एक समांतर चतुर्भुज है, क्योंकि उसमें सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समान्तर होते हैं।
पर हर समांतर चतुर्भुज आयत नहीं होता, क्योंकि समांतर चतुर्भुज के सभी कोण 90° होना आवश्यक नहीं।
🟡 ➜ अब समचतुर्भुज को समझते हैं।
वह चतुर्भुज जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हों, समचतुर्भुज कहलाता है।
🔴 ➜ समचतुर्भुज के गुण:
🔹 चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 सम्मुख भुजाएँ समान्तर होती हैं।
🔹 सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔹 इसके विकर्ण परस्पर लम्ब होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण शीर्ष कोणों का समद्विभाजन करते हैं।
🟢 ➜ यहाँ यह ध्यान रखना आवश्यक है कि समचतुर्भुज में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं, पर चारों कोण 90° होना आवश्यक नहीं है।
यदि चारों कोण 90° भी हों, तब वह आकृति वर्ग बन जाती है।
💡 अवधारणा:
समचतुर्भुज को केवल “बराबर भुजाओं वाला चतुर्भुज” समझना पर्याप्त नहीं है। यह वास्तव में समांतर चतुर्भुज का एक विशेष रूप है।
🔵 ➜ अब वर्ग की चर्चा करते हैं।
वर्ग सबसे विशेष चतुर्भुजों में से एक है। इसमें
🔹 चारों भुजाएँ बराबर होती हैं
🔹 चारों कोण 90° होते हैं
इस प्रकार वर्ग में आयत और समचतुर्भुज दोनों के गुण मिलते हैं।
🟣 ➜ वर्ग के गुण:
🔹 चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 सम्मुख भुजाएँ समान्तर होती हैं।
🔹 चारों कोण 90° होते हैं।
🔹 विकर्ण बराबर होते हैं।
🔹 विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔹 विकर्ण परस्पर लम्ब होते हैं।
🔹 विकर्ण शीर्ष कोणों का समद्विभाजन करते हैं।
🟡 ➜ यदि किसी वर्ग के विकर्ण AC और BD बिंदु O पर मिलते हैं, तो
AO = OC
BO = OD
AC = BD
AC ⟂ BD
🔴 ➜ अतः वर्ग में बहुत-से गुण एक साथ मिलते हैं। इसी कारण यह अत्यंत विशेष आकृति है।
✏️ नोट:
हर वर्ग आयत है।
हर वर्ग समचतुर्भुज है।
हर वर्ग समांतर चतुर्भुज है।
पर हर आयत वर्ग नहीं होता और हर समचतुर्भुज भी वर्ग नहीं होता।
🟢 ➜ अब पतंग की ओर बढ़ते हैं।
पतंग वह चतुर्भुज है जिसमें दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर होती हैं।
उदाहरण के लिए
AB = AD
और
BC = CD
तो ABCD पतंग हो सकता है।
🔵 ➜ पतंग के मुख्य गुण:
🔹 दो युग्म क्रमागत भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 एक युग्म सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण परस्पर लम्ब होते हैं।
🔹 एक विकर्ण दूसरे विकर्ण का समद्विभाजन करता है।
🟣 ➜ पतंग का अध्ययन करते समय यह याद रखना चाहिए कि इसमें बराबरी क्रमागत भुजाओं में होती है, सम्मुख भुजाओं में नहीं।
इसी कारण पतंग, समांतर चतुर्भुज से भिन्न होती है।
💡 अवधारणा:
पतंग में विकर्णों का व्यवहार समांतर चतुर्भुज जैसा नहीं होता। सामान्यतः केवल एक विकर्ण दूसरे का समद्विभाजन करता है।
🟡 ➜ अब हम इन सभी चतुर्भुजों की तुलना एक साथ करें।
🔹 सामान्य चतुर्भुज — केवल चार भुजाओं वाली बंद आकृति
🔹 समलम्ब — केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर
🔹 समांतर चतुर्भुज — दोनों युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर
🔹 आयत — समांतर चतुर्भुज जिसमें चारों कोण 90°
🔹 समचतुर्भुज — समांतर चतुर्भुज जिसमें चारों भुजाएँ बराबर
🔹 वर्ग — चारों भुजाएँ बराबर और चारों कोण 90°
🔹 पतंग — दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर
🔴 ➜ इस तुलना से स्पष्ट होता है कि किसी चतुर्भुज की पहचान उसके आकार को देखकर नहीं, बल्कि उसके गुणों को देखकर करनी चाहिए।
🟢 ➜ पहचान के लिए हमें ये प्रश्न पूछने चाहिए:
🔹 क्या कोई भुजाएँ समान्तर हैं?
🔹 कितनी भुजाएँ बराबर हैं?
🔹 क्या सभी कोण 90° हैं?
🔹 क्या सम्मुख कोण बराबर हैं?
🔹 क्या विकर्ण बराबर हैं?
🔹 क्या विकर्ण लम्ब हैं?
🔹 क्या विकर्ण समद्विभाजित करते हैं?
🔵 ➜ उदाहरण के रूप में:
यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं, तो वह समांतर चतुर्भुज है।
यदि उसी आकृति में सभी कोण 90° हों, तो वह आयत है।
यदि उसी आकृति में चारों भुजाएँ भी बराबर हों, तो वह वर्ग हो सकती है।
यदि केवल चारों भुजाएँ बराबर हों, तो वह समचतुर्भुज है।
🟣 ➜ इसी प्रकार यदि किसी आकृति में केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर हों, तो वह समलम्ब है।
यदि दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर हों, तो वह पतंग हो सकती है।
🟡 ➜ अब एक बार फिर कोण-योग के उपयोग को समझें।
यदि किसी चतुर्भुज के तीन कोण 90°, 85° और 100° हों, तो चौथा कोण होगा:
चौथा कोण = 360° − (90° + 85° + 100°)
चौथा कोण = 360° − 275°
चौथा कोण = 85°
✔️ अतः चौथा कोण 85° है।
🔴 ➜ इस प्रकार कोण-योग का नियम साधारण चतुर्भुज से लेकर विशेष चतुर्भुजों तक सबमें उपयोगी है।
🟢 ➜ चतुर्भुजों का अध्ययन केवल परिभाषाएँ याद करने तक सीमित नहीं है। यह हमें आकृतियों में छिपे संबंधों को समझना सिखाता है।
जब हम देखते हैं कि किसी आकृति में कौन-सी भुजाएँ समान्तर हैं, कौन-से कोण बराबर हैं, और विकर्ण कैसे व्यवहार कर रहे हैं, तब हम उसके बारे में सही निष्कर्ष निकाल पाते हैं।
🔵 ➜ यही कारण है कि यह अध्याय आगे की ज्यामिति के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। क्षेत्रफल, रचना, तर्क, प्रमाण और अनेक आगे के विचार इन्हीं आधारों पर टिके होते हैं।
🟣 ➜ वास्तविक जीवन में भी चतुर्भुजों का बड़ा महत्त्व है।
🔹 खिड़कियाँ और दरवाज़े आयताकार होते हैं।
🔹 फर्श की टाइलों में वर्ग और आयत दिखाई देते हैं।
🔹 पतंग का आकार पतंगीय चतुर्भुज जैसा होता है।
🔹 चौखटें, पटल, डिब्बे के पृष्ठ, चित्र-फ्रेम — सबमें चतुर्भुज मिलते हैं।
🟡 ➜ इसलिए यह अध्याय केवल पुस्तक का विषय नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन की आकृतियों को समझने का माध्यम भी है।
🔴 ➜ पूरे अध्याय की मुख्य सीख यह है कि चतुर्भुजों को समझने के लिए हमें चार बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
🔹 भुजाएँ
🔹 कोण
🔹 समान्तरता
🔹 विकर्ण
🟢 ➜ जब इन चारों बातों को ध्यान से देखते हैं, तो किसी भी चतुर्भुज की सही पहचान करना सरल हो जाता है।
🔵 ➜ अतः “चतुर्भुज” अध्याय हमें चार भुजाओं वाली आकृतियों की दुनिया से परिचित कराता है और यह सिखाता है कि गणित में आकृति का महत्व केवल उसके रूप में नहीं, बल्कि उसके गुणों और संबंधों में छिपा होता है।
🟣🔵 सारांश
🟢 ➜ चतुर्भुज चार भुजाओं वाली बंद समतलीय आकृति है। इसमें 4 भुजाएँ, 4 शीर्ष, 4 कोण और 2 विकर्ण होते हैं।
🟡 ➜ किसी भी चतुर्भुज के आंतरिक कोणों का योग 360° होता है। इसे एक विकर्ण खींचकर चतुर्भुज को दो त्रिभुजों में बाँटकर समझा जा सकता है।
🔴 ➜ समलम्ब वह चतुर्भुज है जिसमें सम्मुख भुजाओं का केवल एक युग्म समान्तर होता है।
🟢 ➜ समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समान्तर होते हैं। इसकी सम्मुख भुजाएँ और सम्मुख कोण बराबर होते हैं। क्रमागत कोणों का योग 180° होता है और विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔵 ➜ आयत एक विशेष समांतर चतुर्भुज है जिसमें चारों कोण 90° होते हैं। इसके विकर्ण बराबर और समद्विभाजित होते हैं।
🟣 ➜ समचतुर्भुज में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं। इसके विकर्ण लम्ब होते हैं, एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं और कोणों का समद्विभाजन भी करते हैं।
🟡 ➜ वर्ग में चारों भुजाएँ बराबर तथा चारों कोण 90° होते हैं। इसलिए उसमें आयत और समचतुर्भुज दोनों के गुण होते हैं।
🔴 ➜ पतंग में दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर होती हैं। इसके विकर्ण परस्पर लम्ब होते हैं और एक विकर्ण दूसरे का समद्विभाजन करता है।
🟢 ➜ चतुर्भुजों की पहचान भुजाओं, कोणों, समान्तरता और विकर्णों के गुणों से की जाती है।
🔵 ➜ यह अध्याय आगे की ज्यामिति के लिए मजबूत आधार बनाता है।
📝 त्वरित पुनरावृत्ति
🔹 चतुर्भुज के आंतरिक कोणों का योग 360° होता है।
🔹 समलम्ब में केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर होती हैं।
🔹 समांतर चतुर्भुज के सम्मुख भुजाएँ और सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
🔹 समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔹 आयत में चारों कोण 90° होते हैं।
🔹 समचतुर्भुज में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 वर्ग में चारों भुजाएँ बराबर और चारों कोण 90° होते हैं।
🔹 पतंग में दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 किसी भी चतुर्भुज की पहचान उसके गुणों से की जाती है, केवल आकार देखकर नहीं।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
🔒 ❓ प्रश्न 1.
4 सेंटीमीटर भुजा वाले दो समबाहु त्रिभुजों को जोड़कर प्राप्त चतुर्भुज के सभी कोणों और सभी भुजाओं को ज्ञात कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 एक समबाहु त्रिभुज की प्रत्येक भुजा = 4 सेंटीमीटर होती है।
🔹 एक समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण = 60° होता है।
🔹 अब 4 सेंटीमीटर भुजा वाले दो समबाहु त्रिभुजों को एक समान भुजा के सहारे जोड़ते हैं।
🔹 तब बाहरी आकृति एक चतुर्भुज बनाती है।
🔹 इस चतुर्भुज की सभी बाहरी भुजाएँ 4 सेंटीमीटर होंगी, क्योंकि दोनों त्रिभुजों की भुजाएँ समान हैं।
🔹 अतः चतुर्भुज की चारों भुजाएँ:
🔸 4 सेंटीमीटर
🔸 4 सेंटीमीटर
🔸 4 सेंटीमीटर
🔸 4 सेंटीमीटर
🔹 अब कोण ज्ञात करते हैं।
🔹 जिन दो शीर्षों पर केवल एक-एक त्रिभुज का कोण है, वहाँ कोण = 60° होगा।
🔹 जिन दो शीर्षों पर दोनों त्रिभुज मिलते हैं, वहाँ कोण
= 60° + 60°
= 120°
🔹 अतः चतुर्भुज के कोण हैं:
🔸 60°
🔸 120°
🔸 60°
🔸 120°
🔹 यह चतुर्भुज समचतुर्भुज होता है।
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 सभी भुजाएँ = 4 सेंटीमीटर
🔹 सभी कोण = 60°, 120°, 60°, 120°
🔒 ❓ प्रश्न 2.
एक पतंग की रचना कीजिए जिसके विकर्णों की लंबाई 6 सेंटीमीटर और 8 सेंटीमीटर हो।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 पतंग में एक विकर्ण दूसरे विकर्ण का लम्ब समद्विभाजक होता है।
🔹 हमें विकर्णों की लंबाइयाँ दी गई हैं:
🔸 एक विकर्ण = 8 सेंटीमीटर
🔸 दूसरा विकर्ण = 6 सेंटीमीटर
🔹 रचना के चरण:
🔹 चरण 1:
8 सेंटीमीटर लंबा रेखाखंड AC खींचिए।
🔹 चरण 2:
रेखाखंड AC का मध्यबिंदु O ज्ञात कीजिए।
🔹 चरण 3:
बिंदु O पर AC पर लम्ब रेखा खींचिए।
🔹 चरण 4:
इस लम्ब रेखा पर O के दोनों ओर 3 सेंटीमीटर की दूरी पर बिंदु B और D लीजिए।
क्योंकि दूसरा विकर्ण 6 सेंटीमीटर है, इसलिए
BD = 3 + 3 = 6 सेंटीमीटर
🔹 चरण 5:
अब A को B से, B को C से, C को D से और D को A से मिलाइए।
🔹 तब ABCD वांछित पतंग होगी।
🔹 जाँच:
🔸 AC = 8 सेंटीमीटर
🔸 BD = 6 सेंटीमीटर
🔸 AC, BD का लम्ब समद्विभाजक है
🔸 इसलिए आकृति पतंग है
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 ऊपर दिए गए चरणों से 6 सेंटीमीटर और 8 सेंटीमीटर विकर्णों वाली पतंग की रचना हो जाती है।
🔒 ❓ प्रश्न 3.
निम्नलिखित समलंब चतुर्भुज के शेष कोणों का मान ज्ञात कीजिए —
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समलंब चतुर्भुज में एक ही पार्श्व भुजा पर स्थित अंतःकोणों का योग 180° होता है।
🔹 अर्थात यदि ऊपर और नीचे की भुजाएँ समांतर हों, तो बाएँ पार्श्व के दोनों कोणों का योग 180° और दाएँ पार्श्व के दोनों कोणों का योग 180° होगा।
🔹 अब दोनों आकृतियों के लिए अलग-अलग हल करते हैं।
🔹 पहली आकृति:
🔸 दिए गए कोण:
एक निचला बायाँ कोण = 135°
एक निचला दायाँ कोण = 105°
🔹 बाएँ पार्श्व के दोनों कोणों का योग:
= 180°
🔸 अतः ऊपरी बायाँ कोण
= 180° – 135°
= 45°
🔹 दाएँ पार्श्व के दोनों कोणों का योग:
= 180°
🔸 अतः ऊपरी दायाँ कोण
= 180° – 105°
= 75°
✔️ पहली आकृति के शेष कोण:
🔹 45°
🔹 75°
🔹 दूसरी आकृति:
🔸 यह समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज है, क्योंकि उसकी असमांतर भुजाओं पर समानता के चिह्न बने हैं।
🔸 समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज में एक ही आधार पर स्थित दोनों कोण समान होते हैं।
🔹 ऊपरी बायाँ कोण = 100° दिया है।
🔹 अतः ऊपरी दायाँ कोण भी
= 100°
🔹 अब एक ही पार्श्व पर स्थित कोणों का योग 180° होता है।
🔸 अतः निचला बायाँ कोण
= 180° – 100°
= 80°
🔸 और निचला दायाँ कोण
= 180° – 100°
= 80°
✔️ दूसरी आकृति के शेष कोण:
🔹 100°
🔹 80°
🔹 80°
✏️ टिप्पणी:
🔹 यदि केवल “शेष” कोण पूछे जाएँ, तो दिए गए 100° के अतिरिक्त तीन कोणों के मान होंगे:
🔸 100°
🔸 80°
🔸 80°
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 पहली आकृति के शेष कोण = 45°, 75°
🔹 दूसरी आकृति के शेष कोण = 100°, 80°, 80°
🔒 ❓ प्रश्न 4.
एक वेन आरेख बनाइए जिसमें समांतर चतुर्भुज, पतंग, समलंब चतुर्भुज आयत और वर्गों के समूह को दर्शाया गया हो। तत्पश्चात निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए —
(i) वह कौन-सा चतुर्भुज है जो पतंग और समांतर चतुर्भुज दोनों है?
(ii) क्या ऐसा कोई चतुर्भुज हो सकता है जो एक पतंग और एक आयत दोनों हो?
(iii) क्या प्रत्येक पतंग एक समचतुर्भुज है? यदि नहीं, इन दो प्रकार के चतुर्भुजों के मध्य का संबंध क्या है?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 पहले संबंध समझते हैं:
🔸 वर्ग, आयत भी है और समचतुर्भुज भी है।
🔸 आयत, समांतर चतुर्भुज का विशेष रूप है।
🔸 समचतुर्भुज, समांतर चतुर्भुज का विशेष रूप है।
🔸 वर्ग, पतंग भी माना जा सकता है, क्योंकि उसमें दो-दो आसन्न भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔸 समचतुर्भुज में भी सभी भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए वह पतंग का एक विशेष रूप है।
🔹 अब प्रश्नों के उत्तर:
🔹 (i) वह कौन-सा चतुर्भुज है जो पतंग और समांतर चतुर्भुज दोनों है?
🔸 समचतुर्भुज
🔹 क्योंकि समचतुर्भुज में
🔸 सभी भुजाएँ बराबर होती हैं
🔸 विपरीत भुजाएँ समांतर होती हैं
इसलिए वह समांतर चतुर्भुज भी है और पतंग भी।
✔️ उत्तर (i): समचतुर्भुज
🔹 (ii) क्या ऐसा कोई चतुर्भुज हो सकता है जो एक पतंग और एक आयत दोनों हो?
🔸 हाँ, हो सकता है।
🔹 ऐसा चतुर्भुज वर्ग होता है।
🔹 क्योंकि वर्ग में
🔸 सभी कोण 90° होते हैं, इसलिए वह आयत है।
🔸 सभी भुजाएँ बराबर होती हैं, इसलिए वह पतंग भी है।
✔️ उत्तर (ii): हाँ, वर्ग।
🔹 (iii) क्या प्रत्येक पतंग एक समचतुर्भुज है? यदि नहीं, इन दो प्रकार के चतुर्भुजों के मध्य का संबंध क्या है?
🔸 नहीं, प्रत्येक पतंग समचतुर्भुज नहीं होती।
🔹 पतंग में केवल दो-दो आसन्न भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 जबकि समचतुर्भुज में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं और विपरीत भुजाएँ समांतर भी होती हैं।
🔹 अतः
समचतुर्भुज ⊂ पतंग
🔹 अर्थात प्रत्येक समचतुर्भुज एक पतंग है, पर प्रत्येक पतंग समचतुर्भुज नहीं है।
✔️ उत्तर (iii):
🔹 नहीं।
🔹 प्रत्येक समचतुर्भुज एक पतंग है, पर प्रत्येक पतंग समचतुर्भुज नहीं है।
🔒 ❓ प्रश्न 5.
यदि PAIR और RODS दो आयत हो तो ∠IOD ज्ञात कीजिए
📌 ✅ उत्तर:
🔹 चित्र में PAIR एक आयत है।
🔹 आयत में प्रत्येक कोण 90° होता है।
🔹 चित्र में R बिंदु पर 30° का कोण रेखाखंड RI और RO के बीच दिया गया है।
🔹 अतः
∠IRO = 30°
🔹 अब आयत PAIR में
RI ⟂ IO
🔹 इसलिए
∠RIO = 90°
🔹 अब त्रिभुज RIO में कोणों का योग 180° होता है।
🔹 अतः
∠ROI = 180° – (∠IRO + ∠RIO)
🔹 = 180° – (30° + 90°)
🔹 = 180° – 120°
🔹 = 60°
🔹 अब RODS भी एक आयत है।
🔹 इसलिए आयत के गुण के अनुसार
RO ⟂ OD
🔹 अतः
∠ROD = 90°
🔹 अब बिंदु O पर
🔸 ∠ROD = 90°
🔸 ∠ROI = 60°
🔹 चित्र के अनुसार OI, ∠ROD के भीतर स्थित है।
🔹 इसलिए
∠IOD = ∠ROD – ∠ROI
🔹 = 90° – 60°
🔹 = 30°
✔️ अंतिम उत्तर:
∠IOD = 30°
🔒 ❓ प्रश्न 6.
चाँदे (प्रोटेक्टर) का प्रयोग किए बिना 6 सेंटीमीटर विकर्ण वाले एक वर्ग की रचना कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 हमें 6 सेंटीमीटर विकर्ण वाला एक वर्ग बनाना है।
🔹 वर्ग के विकर्णों के मुख्य गुण:
🔸 दोनों विकर्ण बराबर होते हैं।
🔸 दोनों विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔸 दोनों विकर्ण परस्पर लम्ब होते हैं।
🔹 इन्हीं गुणों का उपयोग करके रचना करेंगे।
🔹 रचना के चरण:
🔹 चरण 1:
6 सेंटीमीटर लंबा रेखाखंड AC खींचिए।
यह वर्ग का एक विकर्ण होगा।
🔹 चरण 2:
रेखाखंड AC का मध्यबिंदु O ज्ञात कीजिए।
🔹 तब
AO = OC = 3 सेंटीमीटर
🔹 चरण 3:
बिंदु O पर AC पर एक लम्ब रेखा खींचिए।
🔹 चरण 4:
इस लम्ब रेखा पर O के दोनों ओर 3 सेंटीमीटर की दूरी पर बिंदु B और D लीजिए।
🔹 अतः
BO = OD = 3 सेंटीमीटर
🔹 इसलिए
BD = BO + OD
= 3 + 3
= 6 सेंटीमीटर
🔹 चरण 5:
अब A को B से, B को C से, C को D से, तथा D को A से मिलाइए।
🔹 तब ABCD एक चतुर्भुज प्राप्त होगा।
🔹 अब सत्यापन:
🔹 AC और BD
🔸 बराबर हैं
🔸 परस्पर लम्ब हैं
🔸 एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं
🔹 जिस चतुर्भुज के विकर्ण
🔸 बराबर हों,
🔸 परस्पर लम्ब हों,
🔸 तथा एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हों,
वह वर्ग होता है।
🔹 अतः ABCD वांछित वर्ग है।
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 ऊपर दिए गए चरणों से चाँदे का प्रयोग किए बिना 6 सेंटीमीटर विकर्ण वाला वर्ग निर्मित हो जाता है।
🔒 ❓ प्रश्न 7.
CASE एक वर्ग है। बिंदु U, V, W और X वर्ग की भुजाओं के मध्य बिंदु हैं। UVWX किस प्रकार का चतुर्भुज है? इसे ज्यामितीय तर्क, रचना और माप के उपयोग द्वारा ज्ञात कीजिए। एक वर्ग के अंतर्गत एक अन्य वर्ग की रचना करने की विधियाँ ज्ञात कीजिए। ध्यान रखिए कि आंतरिक वर्ग के शीर्ष बाहरी वर्ग की भुजाओं पर स्थित हों जैसा कि आकृति (b) में दर्शाया गया है।
📌 ✅ उत्तर:
🔵 भाग 1 : UVWX किस प्रकार का चतुर्भुज है?
🔹 दिया है कि CASE एक वर्ग है।
🔹 U, V, W और X क्रमशः इसकी चारों भुजाओं के मध्यबिंदु हैं।
🔹 हमें ज्ञात करना है कि UVWX किस प्रकार का चतुर्भुज है।
🔹 मान लीजिए बाहरी वर्ग CASE की प्रत्येक भुजा = a
🔹 क्योंकि U, V, W और X मध्यबिंदु हैं, इसलिए
🔸 CU = UA = a/2
🔸 EV = VC = a/2
🔸 SW = WE = a/2
🔸 AX = XS = a/2
🔵 भाग 2 : भुजाओं का अध्ययन
🔹 अब त्रिभुज UCV पर विचार कीजिए।
🔸 CU = a/2
🔸 CV = a/2
🔸 ∠UCV = 90°
🔹 पायथागोरस प्रमेय से
UV² = (a/2)² + (a/2)²
🔹 = a²/4 + a²/4
🔹 = a²/2
🔹 अतः
UV = a/√2
🔹 इसी प्रकार,
VW = WX = XU = a/√2
🔹 इसलिए UVWX की चारों भुजाएँ बराबर हैं।
🔵 भाग 3 : कोणों का अध्ययन
🔹 अब कोण ज्ञात करते हैं।
🔹 वर्ग के प्रत्येक कोने का कोण 90° होता है।
🔹 मध्यबिंदुओं को मिलाने पर बनने वाली प्रत्येक भुजा, कोनों की भुजाओं से समान दूरी पर होती है।
🔹 इससे पास-पास की भुजाएँ परस्पर लम्ब बनती हैं।
🔹 अतः
∠U = ∠V = ∠W = ∠X = 90°
🔹 इसलिए UVWX में
🔸 चारों भुजाएँ बराबर हैं
🔸 चारों कोण 90° हैं
✔️ निष्कर्ष:
🔹 UVWX एक वर्ग है।
🔵 भाग 4 : माप द्वारा जाँच
🔹 यदि पैमाने से UV, VW, WX और XU मापे जाएँ, तो चारों समान मिलेंगी।
🔹 यदि कोणमापी से ∠U, ∠V, ∠W और ∠X मापे जाएँ, तो प्रत्येक 90° मिलेगा।
🔹 अतः माप द्वारा भी सिद्ध होता है कि UVWX एक वर्ग है।
🔵 भाग 5 : रचना द्वारा समझना
🔹 बाहरी वर्ग की प्रत्येक भुजा का मध्यबिंदु ज्ञात कीजिए।
🔹 उन मध्यबिंदुओं को क्रम से मिलाइए।
🔹 प्राप्त आकृति UVWX होगी।
🔹 रचना करने पर स्पष्ट दिखाई देगा कि यह एक वर्ग बनता है।
🔵 भाग 6 : एक वर्ग के भीतर दूसरा वर्ग बनाने की विधियाँ
🔸 विधि 1 : मध्यबिंदु विधि
🔹 बाहरी वर्ग की चारों भुजाओं के मध्यबिंदु ज्ञात कीजिए।
🔹 उन्हें क्रम से मिलाइए।
🔹 प्राप्त चतुर्भुज एक वर्ग होगा।
🔹 यही यहाँ UVWX के रूप में प्राप्त हुआ है।
🔸 विधि 2 : समान दूरी विधि
🔹 मान लीजिए बाहरी वर्ग ABCD है।
🔹 AB पर बिंदु P लीजिए।
🔹 BC पर बिंदु Q ऐसा लीजिए कि
BQ = AP
🔹 CD पर बिंदु R ऐसा लीजिए कि
CR = BQ
🔹 DA पर बिंदु S ऐसा लीजिए कि
DS = CR
🔹 अर्थात चारों भुजाओं पर समान लंबाई के खंड एक ही क्रम में लिए जाते हैं।
🔹 अब P, Q, R और S को क्रम से मिलाइए।
🔹 प्राप्त PQRS, बाहरी वर्ग के भीतर बना एक आंतरिक वर्ग होगा।
🔹 इसके शीर्ष बाहरी वर्ग की भुजाओं पर स्थित होंगे।
🔹 यदि चुनी गई दूरी भुजा के आधे के बराबर हो, तो मध्यबिंदुओं वाला वर्ग बनता है।
🔹 यदि दूरी कोई अन्य उपयुक्त मान हो, तो तिरछा आंतरिक वर्ग बनता है।
🔵 मुख्य विचार
🔹 किसी वर्ग की भुजाओं के मध्यबिंदुओं को मिलाने पर सदैव एक नया वर्ग बनता है।
🔹 वर्ग के भीतर दूसरा वर्ग बनाने के लिए
🔸 या तो मध्यबिंदु लिए जाते हैं,
🔸 या चारों भुजाओं पर समान क्रम में समान दूरी के बिंदु लिए जाते हैं।
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 UVWX एक वर्ग है।
🔹 यह बात ज्यामितीय तर्क, माप और रचना — तीनों से सिद्ध होती है।
🔹 बाहरी वर्ग के भीतर दूसरा वर्ग बनाने की प्रमुख विधियाँ हैं:
🔸 भुजाओं के मध्यबिंदुओं को मिलाना
🔸 चारों भुजाओं पर समान क्रम में समान दूरी के बिंदु लेकर उन्हें क्रम से मिलाना
🔒 ❓ प्रश्न 8.
यदि एक चतुर्भुज की चारों भुजाएँ समान हों और एक कोण 90° का हो तो क्या यह एक वर्ग होगा? ज्यामितीय तर्क, रचना और मापन के उपयोग द्वारा उत्तर ज्ञात कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 दिया है कि एक चतुर्भुज की
🔸 चारों भुजाएँ समान हैं
🔸 एक कोण 90° है
🔹 चारों भुजाएँ समान होने पर वह चतुर्भुज समचतुर्भुज हो सकता है।
🔹 अब समचतुर्भुज के गुण का उपयोग करते हैं:
🔸 समचतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज होता है।
🔸 समांतर चतुर्भुज में क्रमागत कोणों का योग 180° होता है।
🔸 विपरीत कोण समान होते हैं।
🔹 यदि एक कोण 90° है, तो उसके पास वाला कोण
= 180° – 90°
= 90°
🔹 विपरीत कोण भी 90° होंगे।
🔹 अतः चारों कोण 90° हो गए।
🔹 अब हमारे पास
🔸 चारों भुजाएँ समान हैं
🔸 चारों कोण 90° हैं
🔹 इसलिए वह चतुर्भुज वर्ग होगा।
🔵 ज्यामितीय तर्क:
🔹 समान भुजाओं वाला समांतर चतुर्भुज समचतुर्भुज होता है।
🔹 यदि समचतुर्भुज का एक कोण 90° हो जाए, तो उसके सभी कोण 90° हो जाते हैं।
🔹 इसलिए वह वर्ग बन जाता है।
🔵 रचना द्वारा समझ:
🔹 एक समचतुर्भुज बनाइए।
🔹 अब उसमें एक कोण 90° का लीजिए।
🔹 तब उसकी संलग्न भुजाएँ परस्पर लम्ब हो जाएँगी।
🔹 विपरीत भुजाएँ समांतर होने से शेष कोण भी 90° बनेंगे।
🔹 इस प्रकार आकृति वर्ग बन जाएगी।
🔵 मापन द्वारा जाँच:
🔹 पैमाने से चारों भुजाएँ मापिए — वे समान मिलेंगी।
🔹 कोणमापी से चारों कोण मापिए — वे 90°, 90°, 90°, 90° मिलेंगे।
🔹 इससे भी सिद्ध होता है कि आकृति वर्ग है।
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 हाँ, यदि किसी चतुर्भुज की चारों भुजाएँ समान हों और एक कोण 90° का हो, तो वह निश्चित रूप से एक वर्ग होगा।
🔒 ❓ प्रश्न 9.
वह चतुर्भुज किस प्रकार का है जिसमें सम्मुख भुजाएँ समान हों? अपने उत्तर का सत्यापन कीजिए।
संकेत — एक विकर्ण बनाइए और सर्वांगसम त्रिभुजों की जाँच कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 हमें ऐसे चतुर्भुज का प्रकार ज्ञात करना है जिसमें
🔸 सम्मुख भुजाएँ समान हों।
🔹 मान लीजिए चतुर्भुज ABCD में
AB = CD
और
BC = AD
🔹 अब इसमें विकर्ण AC खींचिए।
🔹 तब दो त्रिभुज बनते हैं:
🔸 त्रिभुज ABC
🔸 त्रिभुज CDA
🔹 अब जाँच कीजिए:
🔸 AB = CD (दिया है)
🔸 BC = AD (दिया है)
🔸 AC = AC (उभयनिष्ठ भुजा)
🔹 इसलिए
△ABC ≅ △CDA
भुजा-भुजा-भुजा नियम से
🔹 अब सर्वांगसमता से
∠BAC = ∠DCA
और
∠BCA = ∠DAC
🔹 ये एकांतर अंतःकोण हैं।
🔹 इसलिए
AB ∥ CD
और
BC ∥ AD
🔹 जब किसी चतुर्भुज की दोनों जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर हों, तो वह समांतर चतुर्भुज होता है।
🔵 सत्यापन:
🔹 हमने विकर्ण खींचकर दो त्रिभुज बनाए।
🔹 वे सर्वांगसम निकले।
🔹 उनसे एकांतर अंतःकोण समान मिले।
🔹 इसलिए सम्मुख भुजाएँ समांतर सिद्ध हुईं।
🔹 अतः चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है।
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 वह चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है जिसमें सम्मुख भुजाएँ समान हों।
🔒 ❓ प्रश्न 10.
क्या आकृति में दिए गए चतुर्भुज के सभी कोणों का योगफल 360° होगा? ज्यामितीय तर्क के साथ ही इस आकृति की रचना करके और मापन के उपयोग द्वारा अपना उत्तर ज्ञात कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 हाँ, इस आकृति में दिए गए चतुर्भुज के सभी कोणों का योगफल 360° होगा।
🔵 चरण 1 : आकृति को समझना
🔹 दी गई आकृति एक अवनत चतुर्भुज है।
🔹 इसमें A, B, C और D चार शीर्ष हैं।
🔹 यद्यपि इसका एक कोण भीतर की ओर धँसा हुआ दिखाई देता है, फिर भी यह एक चतुर्भुज ही है।
🔹 इसलिए इसके कोणों के योग के बारे में वही सामान्य नियम लागू होगा:
किसी भी चतुर्भुज के आंतरिक कोणों का योग 360° होता है।
🔵 चरण 2 : ज्यामितीय तर्क
🔹 इस आकृति में D पर जो भीतर की ओर धँसा हुआ शीर्ष है, वहाँ बना कोण बाहर की ओर बड़ा दिखाई देता है।
🔹 अब D पर बनने वाले बाह्य कोण और आंतरिक कोण को साथ में देखिए।
🔹 किसी बिंदु के चारों ओर कुल कोण
= 360°
🔹 यदि D पर भीतर की ओर बना कोण θ मान लें, तो शेष घुमाव 360° – θ होगा।
🔹 अब पूरे चतुर्भुज के चारों कोणों को क्रम से लेने पर, आकृति के चारों ओर एक पूरा घुमाव पूरा होता है।
🔹 इसलिए
∠A + ∠B + ∠C + ∠D = 360°
🔹 यही इस आकृति के लिए भी सत्य है।
🔵 चरण 3 : एक अन्य सरल तर्क
🔹 यदि आप इस आकृति की रचना करें और चारों कोणों को अलग-अलग मापें, तो पाएँगे कि तीन कोण सामान्य छोटे कोण होंगे और D पर एक बड़ा आंतरिक कोण होगा।
🔹 इन चारों का योग मिलाकर 360° प्राप्त होगा।
🔹 अतः अवनत चतुर्भुज में भी कोणों का कुल योग 360° ही रहता है।
🔵 चरण 4 : रचना द्वारा जाँच
🔹 कागज़ पर प्रश्न जैसी आकृति बनाइए।
🔹 चार बिंदु A, B, C और D इस प्रकार रखिए कि D भीतर की ओर धँसा हुआ शीर्ष बने।
🔹 अब रेखाखंड AB, BC, CD और DA मिलाइए।
🔹 इस प्रकार वही चतुर्भुज प्राप्त होगा।
🔵 चरण 5 : मापन द्वारा जाँच
🔹 अब कोणमापी से
∠A, ∠B, ∠C और ∠D
मापिए।
🔹 फिर उनका योग कीजिए:
∠A + ∠B + ∠C + ∠D
🔹 आपको योग 360° के बराबर मिलेगा।
🔵 निष्कर्ष
🔹 चतुर्भुज साधारण हो या अवनत, उसके सभी आंतरिक कोणों का योगफल 360° ही होता है।
✔️ अंतिम उत्तर:
🔹 हाँ, आकृति में दिए गए चतुर्भुज के सभी कोणों का योगफल 360° होगा।
🔒 ❓ प्रश्न 11.
बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। अपने उत्तर को सत्यापित कीजिए।
(i) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण समान लंबाई के हों और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हों वह निश्चित ही एक वर्ग होगा।
(ii) एक चतुर्भुज जिसके तीन कोण समकोण हैं निश्चित ही एक आयत हो।
(iii) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं निश्चित ही एक समांतर चतुर्भुज है।
(iv) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण एक-दूसरे पर लंबवत हो निश्चित ही एक समचतुर्भुज हो।
(v) एक चतुर्भुज जिसमें सम्मुख कोण समान हैं निश्चित ही एक समांतर चतुर्भुज हो।
(vi) एक चतुर्भुज एक आयत होगा यदि इसका प्रत्येक कोण समान हो।
(vii) समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज, समांतर चतुर्भुज होते हैं।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 (i) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण समान लंबाई के हों और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हों वह निश्चित ही एक वर्ग होगा।
🔸 यह कथन असत्य है।
🔹 कारण:
यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण
🔸 समान हों
🔸 और एक-दूसरे को समद्विभाजित करें,
तो वह आयत हो सकता है।
🔹 पर प्रत्येक आयत वर्ग नहीं होता।
🔸 उदाहरण:
एक आयत के विकर्ण बराबर होते हैं और एक-दूसरे को समद्विभाजित भी करते हैं, फिर भी उसकी सभी भुजाएँ समान होना आवश्यक नहीं है।
✔️ निष्कर्ष: असत्य
🔹 (ii) एक चतुर्भुज जिसके तीन कोण समकोण हैं निश्चित ही एक आयत हो।
🔸 यह कथन सत्य है।
🔹 कारण:
चतुर्भुज के कोणों का योगफल 360° होता है।
🔹 यदि तीन कोण 90° हैं, तो उनका योग
= 90° + 90° + 90°
= 270°
🔹 अतः चौथा कोण
= 360° – 270°
= 90°
🔹 अब चारों कोण 90° हो गए।
🔹 जिस चतुर्भुज के चारों कोण समकोण हों, वह आयत होता है।
✔️ निष्कर्ष: सत्य
🔹 (iii) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं निश्चित ही एक समांतर चतुर्भुज है।
🔸 यह कथन सत्य है।
🔹 कारण:
समांतर चतुर्भुज की एक प्रमुख पहचान यही है कि उसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔹 इसका विलोम भी सत्य है:
यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करें, तो वह समांतर चतुर्भुज होता है।
✔️ निष्कर्ष: सत्य
🔹 (iv) एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण एक-दूसरे पर लंबवत हो निश्चित ही एक समचतुर्भुज हो।
🔸 यह कथन असत्य है।
🔹 कारण:
पतंग के विकर्ण भी परस्पर लंबवत हो सकते हैं।
🔹 पर प्रत्येक ऐसी आकृति समचतुर्भुज नहीं होती।
🔸 अर्थात केवल विकर्णों का परस्पर लंबवत होना, समचतुर्भुज होने के लिए पर्याप्त शर्त नहीं है।
✔️ निष्कर्ष: असत्य
🔹 (v) एक चतुर्भुज जिसमें सम्मुख कोण समान हैं निश्चित ही एक समांतर चतुर्भुज हो।
🔸 यह कथन सत्य है।
🔹 कारण:
मान लीजिए चतुर्भुज ABCD में
∠A = ∠C
और
∠B = ∠D
🔹 चतुर्भुज के कोणों का योगफल 360° होता है।
🔹 इसलिए
∠A + ∠B + ∠C + ∠D = 360°
🔹 पर
∠A = ∠C
और
∠B = ∠D
🔹 अतः
2∠A + 2∠B = 360°
🔹 या
∠A + ∠B = 180°
🔹 इसी प्रकार
∠B + ∠C = 180°
🔹 अब यदि एक ही पार्श्व पर स्थित अंतःकोणों का योग 180° हो, तो संबंधित भुजाएँ समांतर होती हैं।
🔹 अतः दोनों जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर होंगी।
🔹 इसलिए वह चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज होगा।
✔️ निष्कर्ष: सत्य
🔹 (vi) एक चतुर्भुज एक आयत होगा यदि इसका प्रत्येक कोण समान हो।
🔸 यह कथन सत्य है।
🔹 कारण:
चतुर्भुज के कोणों का योगफल 360° होता है।
🔹 यदि चारों कोण समान हैं, तो प्रत्येक कोण
= 360°/4
= 90°
🔹 अतः वह चतुर्भुज चार समकोणों वाला होगा।
🔹 इसलिए वह आयत होगा।
✔️ निष्कर्ष: सत्य
🔹 (vii) समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज, समांतर चतुर्भुज होते हैं।
🔸 यह कथन असत्य है।
🔹 कारण:
समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज में केवल एक जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर होती हैं।
🔹 जबकि समांतर चतुर्भुज में दोनों जोड़ी सम्मुख भुजाएँ समांतर होती हैं।
🔹 इसलिए प्रत्येक समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज, समांतर चतुर्भुज नहीं होता।
✔️ निष्कर्ष: असत्य
🟣 संक्षिप्त सार:
🔹 (i) असत्य
🔹 (ii) सत्य
🔹 (iii) सत्य
🔹 (iv) असत्य
🔹 (v) सत्य
🔹 (vi) सत्य
🔹 (vii) असत्य
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
🔒 ❓ खंड अ : वस्तुनिष्ठ एवं अति लघु उत्तरीय प्रश्न
🔒 ❓ प्रश्न 1.
चार भुजाओं वाली बंद समतलीय आकृति को क्या कहते हैं?
🟢1️⃣ त्रिभुज
🔵2️⃣ चतुर्भुज
🟡3️⃣ वृत्त
🟣4️⃣ पंचभुज
✔️ उत्तर: 🔵2️⃣ चतुर्भुज
📌 ✅ उत्तर:
🔹 चार भुजाओं वाली बंद समतलीय आकृति को चतुर्भुज कहते हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 2.
किसी भी चतुर्भुज के आंतरिक कोणों का योग कितना होता है?
🟢1️⃣ 180°
🔵2️⃣ 270°
🟡3️⃣ 360°
🟣4️⃣ 90°
✔️ उत्तर: 🟡3️⃣ 360°
📌 ✅ उत्तर:
🔹 किसी भी चतुर्भुज के आंतरिक कोणों का योग 360° होता है।
🔒 ❓ प्रश्न 3.
चतुर्भुज में विकर्णों की संख्या कितनी होती है?
🟢1️⃣ 1
🔵2️⃣ 2
🟡3️⃣ 3
🟣4️⃣ 4
✔️ उत्तर: 🔵2️⃣ 2
📌 ✅ उत्तर:
🔹 चतुर्भुज में 2 विकर्ण होते हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 4.
जिस चतुर्भुज में केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर हों, उसे क्या कहते हैं?
🟢1️⃣ समचतुर्भुज
🔵2️⃣ समलम्ब
🟡3️⃣ वर्ग
🟣4️⃣ पतंग
✔️ उत्तर: 🔵2️⃣ समलम्ब
📌 ✅ उत्तर:
🔹 जिस चतुर्भुज में केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर हों, उसे समलम्ब कहते हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 5.
समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ कैसी होती हैं?
🟢1️⃣ केवल बराबर
🔵2️⃣ केवल समान्तर
🟡3️⃣ बराबर तथा समान्तर
🟣4️⃣ न बराबर, न समान्तर
✔️ उत्तर: 🟡3️⃣ बराबर तथा समान्तर
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर भी होती हैं और समान्तर भी।
🔒 ❓ प्रश्न 6.
आयत में प्रत्येक कोण कितना होता है?
🟢1️⃣ 60°
🔵2️⃣ 90°
🟡3️⃣ 120°
🟣4️⃣ 180°
✔️ उत्तर: 🔵2️⃣ 90°
📌 ✅ उत्तर:
🔹 आयत में प्रत्येक कोण 90° होता है।
🔒 ❓ प्रश्न 7.
समचतुर्भुज में कैसी भुजाएँ होती हैं?
🟢1️⃣ केवल दो भुजाएँ बराबर
🔵2️⃣ चारों भुजाएँ बराबर
🟡3️⃣ केवल सम्मुख भुजाएँ बराबर
🟣4️⃣ कोई भुजा बराबर नहीं
✔️ उत्तर: 🔵2️⃣ चारों भुजाएँ बराबर
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समचतुर्भुज में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 8.
वर्ग के विकर्णों के बारे में कौन-सा कथन सही है?
🟢1️⃣ बराबर नहीं होते
🔵2️⃣ केवल समद्विभाजित करते हैं
🟡3️⃣ बराबर होते हैं, समद्विभाजित करते हैं तथा परस्पर लम्ब होते हैं
🟣4️⃣ केवल लम्ब होते हैं
✔️ उत्तर: 🟡3️⃣ बराबर होते हैं, समद्विभाजित करते हैं तथा परस्पर लम्ब होते हैं
📌 ✅ उत्तर:
🔹 वर्ग के विकर्ण बराबर होते हैं।
🔹 वे एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔹 वे परस्पर लम्ब भी होते हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 9.
पतंग में कौन-सा गुण होता है?
🟢1️⃣ दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर
🔵2️⃣ चारों कोण 90°
🟡3️⃣ दोनों युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर
🟣4️⃣ चारों भुजाएँ बराबर
✔️ उत्तर: 🟢1️⃣ दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर
📌 ✅ उत्तर:
🔹 पतंग में दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 10.
यदि किसी चतुर्भुज के तीन कोण 80°, 70° और 110° हों, तो चौथा कोण कितना होगा?
🟢1️⃣ 90°
🔵2️⃣ 100°
🟡3️⃣ 110°
🟣4️⃣ 120°
✔️ उत्तर: 🔵2️⃣ 100°
📌 ✅ उत्तर:
🔹 चतुर्भुज के कोणों का योग = 360°
🔹 दिए गए कोणों का योग = 80° + 70° + 110° = 260°
🔹 चौथा कोण = 360° − 260° = 100°
🔒 ❓ प्रश्न 11.
रिक्त स्थान भरो — समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को ________ करते हैं।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समद्विभाजित
🔒 ❓ प्रश्न 12.
सत्य या असत्य लिखिए — हर वर्ग एक आयत होता है।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 सत्य
🔹 क्योंकि वर्ग में आयत के सभी गुण पाए जाते हैं।
🔒 ❓ खंड ब : लघु उत्तरीय प्रश्न
🔒 ❓ प्रश्न 13.
चतुर्भुज की परिभाषा लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 चार भुजाओं वाली बंद समतलीय आकृति को चतुर्भुज कहते हैं।
🔹 इसमें 4 शीर्ष, 4 कोण और 2 विकर्ण होते हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 14.
विकर्ण किसे कहते हैं?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 चतुर्भुज के दो असन्निकट शीर्षों को मिलाने वाले रेखाखंड को विकर्ण कहते हैं।
🔹 जैसे ABCD में AC और BD विकर्ण हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 15.
चतुर्भुज के कोणों का योग 360° क्यों होता है?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 किसी चतुर्भुज में एक विकर्ण खींचने पर वह दो त्रिभुजों में विभाजित हो जाता है।
🔹 एक त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है।
🔹 अतः दो त्रिभुजों के कोणों का योग = 180° + 180° = 360°
🔹 इसलिए चतुर्भुज के आंतरिक कोणों का योग 360° होता है।
🔒 ❓ प्रश्न 16.
समलम्ब की परिभाषा लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 वह चतुर्भुज जिसमें केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर हों, समलम्ब कहलाता है।
🔒 ❓ प्रश्न 17.
समांतर चतुर्भुज के कोई चार गुण लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 सम्मुख भुजाएँ समान्तर होती हैं।
🔹 सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
🔹 क्रमागत कोणों का योग 180° होता है।
🔹 विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 18.
आयत और समांतर चतुर्भुज में एक अंतर लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 आयत में चारों कोण 90° होते हैं।
🔹 समांतर चतुर्भुज में चारों कोण 90° होना आवश्यक नहीं है।
🔒 ❓ प्रश्न 19.
समचतुर्भुज और वर्ग में एक अंतर लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समचतुर्भुज में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं, पर चारों कोण 90° होना आवश्यक नहीं है।
🔹 वर्ग में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं और चारों कोण 90° होते हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 20.
पतंग के कोई दो गुण लिखिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 पतंग में दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 इसके विकर्ण परस्पर लम्ब होते हैं।
🔹 एक विकर्ण दूसरे विकर्ण का समद्विभाजन करता है।
🔒 ❓ प्रश्न 21.
यदि समांतर चतुर्भुज का एक कोण 65° हो, तो शेष कोण ज्ञात कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समांतर चतुर्भुज में सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
🔹 क्रमागत कोणों का योग 180° होता है।
🔹 एक कोण = 65°
🔹 उसका सम्मुख कोण = 65°
🔹 शेष दो कोण = 180° − 65° = 115°
🔹 अतः चारों कोण = 65°, 115°, 65°, 115°
🔒 ❓ प्रश्न 22.
यदि किसी चतुर्भुज के तीन कोण 75°, 85° और 95° हों, तो चौथा कोण ज्ञात कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 चतुर्भुज के कोणों का योग = 360°
🔹 तीन कोणों का योग = 75° + 85° + 95° = 255°
🔹 चौथा कोण = 360° − 255° = 105°
🔹 अतः चौथा कोण 105° है।
🔒 ❓ खंड स : मध्यम उत्तरीय प्रश्न
🔒 ❓ प्रश्न 23.
सिद्ध कीजिए कि समांतर चतुर्भुज के क्रमागत कोणों का योग 180° होता है।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 मान लीजिए ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।
🔹 तब AB || CD तथा BC || AD
🔹 अब AB और CD समान्तर रेखाएँ हैं तथा AD एक छेदक है।
🔹 इसलिए ∠A + ∠D = 180°
🔹 इसी प्रकार AB और CD समान्तर रेखाएँ हैं तथा BC एक छेदक है।
🔹 इसलिए ∠B + ∠C = 180°
🔹 अब AD || BC तथा AB एक छेदक है।
🔹 इसलिए ∠A + ∠B = 180°
🔹 इसी प्रकार AD || BC तथा CD एक छेदक है।
🔹 इसलिए ∠C + ∠D = 180°
🔹 अतः समांतर चतुर्भुज के प्रत्येक क्रमागत कोणों का योग 180° होता है।
🔒 ❓ प्रश्न 24.
किन शर्तों के आधार पर आप कह सकते हैं कि कोई चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज है?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 यदि किसी चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समान्तर हों, तो वह समांतर चतुर्भुज होता है।
🔹 यदि किसी चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म बराबर हों, तो वह समांतर चतुर्भुज होता है।
🔹 यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करें, तो वह समांतर चतुर्भुज होता है।
🔹 अतः इन शर्तों के आधार पर किसी चतुर्भुज को समांतर चतुर्भुज पहचाना जा सकता है।
🔒 ❓ प्रश्न 25.
आयत के विकर्णों के बारे में क्या जानते हैं?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 आयत के विकर्ण बराबर होते हैं।
🔹 आयत के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔹 यदि AC और BD आयत के विकर्ण हों, तो AC = BD
🔹 यदि वे O पर प्रतिच्छेद करें, तो AO = OC तथा BO = OD
🔒 ❓ प्रश्न 26.
वर्ग में आयत और समचतुर्भुज दोनों के गुण क्यों पाए जाते हैं?
📌 ✅ उत्तर:
🔹 वर्ग में चारों कोण 90° होते हैं।
🔹 इसलिए वर्ग में आयत के गुण पाए जाते हैं।
🔹 वर्ग में चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 इसलिए वर्ग में समचतुर्भुज के गुण पाए जाते हैं।
🔹 वर्ग की सम्मुख भुजाएँ समान्तर होती हैं।
🔹 उसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔹 उसके विकर्ण बराबर भी होते हैं।
🔹 अतः वर्ग, आयत का भी और समचतुर्भुज का भी विशेष रूप है।
🔒 ❓ प्रश्न 27.
पतंग और समलम्ब में अंतर स्पष्ट कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 पतंग में दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 समलम्ब में केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर होती हैं।
🔹 पतंग के विकर्ण परस्पर लम्ब होते हैं।
🔹 समलम्ब की पहचान उसकी समान्तर भुजाओं से होती है।
🔹 अतः पतंग और समलम्ब दो भिन्न प्रकार के चतुर्भुज हैं।
🔒 ❓ प्रश्न 28.
यदि किसी चतुर्भुज के कोण 90°, 70°, 110° और x° हों, तो x ज्ञात कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 चतुर्भुज के कोणों का योग = 360°
🔹 90° + 70° + 110° + x = 360°
🔹 270° + x = 360°
🔹 x = 360° − 270°
🔹 x = 90°
🔹 अतः x = 90°
🔒 ❓ खंड द : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
🔒 ❓ प्रश्न 29.
समांतर चतुर्भुज, आयत, समचतुर्भुज और वर्ग का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समान्तर होते हैं।
🔹 इसकी सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 इसके सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
🔹 आयत, समांतर चतुर्भुज का विशेष रूप है।
🔹 इसमें सम्मुख भुजाएँ बराबर और समान्तर होती हैं।
🔹 इसके चारों कोण 90° होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण बराबर होते हैं और समद्विभाजित करते हैं।
🔹 समचतुर्भुज भी समांतर चतुर्भुज का विशेष रूप है।
🔹 इसमें चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 इसके सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण परस्पर लम्ब होते हैं और समद्विभाजित करते हैं।
🔹 वर्ग सबसे विशेष रूप है।
🔹 इसमें चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
🔹 इसके चारों कोण 90° होते हैं।
🔹 इसके विकर्ण बराबर भी होते हैं, परस्पर लम्ब भी होते हैं और समद्विभाजित भी करते हैं।
🔹 अतः हर वर्ग एक आयत भी है और एक समचतुर्भुज भी।
🔹 हर आयत और हर समचतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज होता है।
🔹 पर हर समांतर चतुर्भुज आयत या समचतुर्भुज नहीं होता।
🔒 ❓ प्रश्न 30.
चतुर्भुजों की पहचान करने की विधि समझाइए। उपयुक्त उदाहरण भी दीजिए।
📌 ✅ उत्तर:
🔹 किसी चतुर्भुज की पहचान करने के लिए केवल उसका आकार देखना पर्याप्त नहीं होता।
🔹 उसकी भुजाओं, कोणों और विकर्णों के गुणों को देखना आवश्यक होता है।
🔹 पहचान के लिए मुख्य बातें:
🔸 क्या सम्मुख भुजाएँ समान्तर हैं?
🔸 क्या भुजाएँ बराबर हैं?
🔸 क्या चारों कोण 90° हैं?
🔸 क्या विकर्ण बराबर हैं?
🔸 क्या विकर्ण परस्पर लम्ब हैं?
🔸 क्या विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं?
🔹 यदि केवल एक युग्म सम्मुख भुजाएँ समान्तर हों, तो वह समलम्ब है।
🔹 यदि सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समान्तर हों, तो वह समांतर चतुर्भुज है।
🔹 यदि समांतर चतुर्भुज के चारों कोण 90° हों, तो वह आयत है।
🔹 यदि समांतर चतुर्भुज की चारों भुजाएँ बराबर हों, तो वह समचतुर्भुज है।
🔹 यदि चारों भुजाएँ बराबर हों और चारों कोण 90° हों, तो वह वर्ग है।
🔹 यदि दो-दो क्रमागत भुजाएँ बराबर हों, तो वह पतंग है।
🔹 उदाहरण:
🔸 खिड़की का ढाँचा प्रायः आयत होता है।
🔸 शतरंज की एक खानेदार इकाई वर्ग होती है।
🔸 उड़ने वाली पतंग, पतंगाकार चतुर्भुज का उदाहरण है।
🔹 अतः किसी भी चतुर्भुज की सही पहचान उसके गुणों के आधार पर की जाती है।
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