Class 10 : Social Science (In Hindi) – Lesson 2. भारत में राष्ट्रवाद
पाठ का विश्लेषण एवं विवेचन
🔵 प्रस्तावना
यह पाठ बताता है कि भारत में राष्ट्रवाद किस प्रकार विकसित हुआ। भारत में राष्ट्रवाद केवल एक राजनीतिक विचार नहीं था, बल्कि यह विदेशी शासन के विरुद्ध साझे संघर्ष, साझे दुख, साझी आशाओं और सामूहिक भागीदारी से बना। महात्मा गांधी के नेतृत्व में यह भावना गाँवों, कस्बों, किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों, महिलाओं और व्यापारियों तक पहुँची। इसी प्रक्रिया में भारतीय लोग अपने आपको एक राष्ट्र के रूप में देखने लगे।
🟢 प्रथम विश्वयुद्ध और नई परिस्थितियाँ
🌿 प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत में आर्थिक और सामाजिक संकट बढ़ गया।
🔹 करों में वृद्धि हुई।
🔹 वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े।
🔹 गाँवों से सैनिक भर्ती का दबाव बढ़ा।
🔹 कई क्षेत्रों में फसल खराब हुई।
🔹 महामारी ने लोगों की कठिनाइयों को और बढ़ा दिया।
🧠 इन परिस्थितियों ने लोगों के भीतर असंतोष पैदा किया और विदेशी शासन के प्रति विरोध बढ़ाया। यही आगे चलकर राष्ट्रवादी आंदोलनों की जमीन बनी।
🔴 सत्याग्रह का विचार
🌿 महात्मा गांधी ने भारत में सत्याग्रह की नीति को अपनाया।
✏️ सत्याग्रह का अर्थ है — सत्य और अहिंसा के आधार पर अन्याय का विरोध।
🔹 इसमें हिंसा का स्थान नहीं था।
🔹 आत्मबल, नैतिक शक्ति और अनुशासन पर जोर था।
🧠 इस नीति ने राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा दी। इससे सामान्य लोग भी संघर्ष में शामिल हो सके, क्योंकि यह आंदोलन केवल हथियार या बल पर नहीं, बल्कि नैतिक साहस पर आधारित था।
🟡 प्रारंभिक आंदोलन
🌾 चंपारण
बिहार के चंपारण में किसानों को मजबूर किया जाता था कि वे नील की खेती करें। गांधीजी ने किसानों की समस्या को उठाया।
🧠 इससे यह सिद्ध हुआ कि राष्ट्रीय आंदोलन स्थानीय समस्याओं से जुड़ सकता है।
🌿 खेड़ा
गुजरात के खेड़ा में फसल खराब होने के कारण किसान लगान में राहत चाहते थे। गांधीजी ने उनका समर्थन किया।
🧠 इससे किसानों में राजनीतिक चेतना बढ़ी।
⚙️ अहमदाबाद
अहमदाबाद में कपड़ा मिल मजदूरों ने बेहतर शर्तों की माँग की। गांधीजी ने उनका साथ दिया।
🧠 इससे राष्ट्रवाद केवल शिक्षित वर्ग तक सीमित नहीं रहा; मजदूर भी उसमें शामिल होने लगे।
🔵 रॉलेट अधिनियम
🌿 1919 में अंग्रेज़ी शासन ने रॉलेट अधिनियम लागू किया।
✏️ इस कानून ने सरकार को बहुत अधिक दमनकारी अधिकार दे दिए।
🔹 बिना मुकदमे के गिरफ्तारी संभव थी।
🔹 राजनीतिक गतिविधियों को दबाने का रास्ता खुल गया।
❗ जनता ने इसे अन्यायपूर्ण माना।
🧠 इस अधिनियम ने लोगों के मन में यह स्पष्ट कर दिया कि विदेशी शासन न्यायपूर्ण नहीं है।
🔴 जलियाँवाला बाग हत्याकांड
⚡ 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक शांत सभा पर गोली चला दी गई।
🔹 जनरल डायर ने बाग के बाहर निकलने के रास्ते बंद करवा दिए।
🔹 सैकड़ों लोग मारे गए और बहुत से घायल हुए।
❗ यह घटना पूरे देश को झकझोर गई।
🧠 जलियाँवाला बाग भारतीय राष्ट्रवाद का बड़ा मोड़ बना। इससे अंग्रेज़ी शासन पर से विश्वास टूट गया और राष्ट्रीय भावना अधिक तीव्र हुई।
🟢 असहयोग आंदोलन
🌿 1920 में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया।
✏️ इसका अर्थ था — विदेशी शासन के साथ सहयोग वापस लेना।
प्रमुख रूप
🔹 उपाधियों का त्याग
🔹 सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों का बहिष्कार
🔹 न्यायालयों का बहिष्कार
🔹 विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
🔹 स्वदेशी के उपयोग पर बल
🧠 इस आंदोलन का विचार बहुत प्रभावशाली था। यदि भारतीय लोग अंग्रेज़ी संस्थाओं का सहारा छोड़ दें, तो विदेशी शासन कमजोर हो जाएगा।
🟡 अलग-अलग वर्गों की भागीदारी
🧑🌾 किसान
किसान चाहते थे कि करों का बोझ कम हो और जमींदारी व सरकारी अत्याचार घटे।
👷 मजदूर
कुछ क्षेत्रों में मजदूर हड़तालों और प्रदर्शनों में शामिल हुए।
🕌 खिलाफत का प्रश्न
मुस्लिम नेताओं ने खिलाफत आंदोलन चलाया, और गांधीजी ने उसका समर्थन किया। इससे कुछ समय के लिए हिंदू-मुस्लिम एकता मजबूत हुई।
🧠 यह बहुत महत्त्वपूर्ण बात है कि अलग-अलग समूह एक ही आंदोलन में जुड़े, पर उनकी अपेक्षाएँ अलग थीं। राष्ट्रवाद एक साझा मंच बना, लेकिन सभी समूह उसे अपने-अपने अनुभवों से समझते थे।
🔴 असहयोग आंदोलन की वापसी
❗ 1922 में चौरी-चौरा में हिंसा हुई, जिसमें पुलिस थाना जला दिया गया।
🌿 गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया।
🧠 इस निर्णय से स्पष्ट हुआ कि गांधीजी के लिए अहिंसा केवल रणनीति नहीं, बल्कि मूल सिद्धांत थी। इससे आंदोलन की नैतिक दिशा बनी रही, यद्यपि कई लोग निराश भी हुए।
🔵 साझी पहचान का निर्माण
राष्ट्रवाद केवल आंदोलनों से नहीं बनता; वह प्रतीकों, भावनाओं और सांस्कृतिक माध्यमों से भी बनता है।
🎨 भारत माता
भारत को भारत माता के रूप में चित्रित किया गया।
🧠 इससे देश एक पवित्र सामूहिक पहचान के रूप में सामने आया।
🧵 खादी और चरखा
खादी स्वावलंबन का प्रतीक बनी। चरखा विदेशी वस्त्रों के विरोध और स्वदेशी के समर्थन का चिन्ह बना।
🧠 इससे राष्ट्रवाद लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ गया।
🎶 लोकगीत और झंडे
लोकगीतों, मेलों, झंडों और जनसभाओं ने राष्ट्रीय भावना को फैलाया।
🧠 इन प्रतीकों ने लोगों में सामूहिकता की भावना उत्पन्न की।
🟢 सविनय अवज्ञा आंदोलन
🌿 1930 में गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया।
✏️ इसका अर्थ था — अन्यायपूर्ण कानूनों का खुले रूप में उल्लंघन करना।
🧂 नमक यात्रा
गांधीजी ने साबरमती से दांडी तक यात्रा की और नमक कानून तोड़ा।
🧠 नमक हर व्यक्ति की आवश्यकता थी, इसलिए यह आंदोलन जनता के बहुत निकट चला गया। नमक एक साधारण वस्तु होकर भी राष्ट्रीय प्रतिरोध का शक्तिशाली प्रतीक बन गया।
प्रमुख रूप
🔹 नमक कानून का उल्लंघन
🔹 विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार
🔹 शराब की दुकानों पर धरना
🔹 कुछ क्षेत्रों में कर न देने की माँग
🧠 यह आंदोलन असहयोग से आगे बढ़ा, क्योंकि इसमें अन्यायपूर्ण कानून को सीधी चुनौती दी गई।
🟡 विभिन्न सामाजिक वर्ग और उनकी अपेक्षाएँ
🧑🌾 समृद्ध किसान
वे भू-राजस्व में कमी चाहते थे।
🏭 व्यापारी और उद्योगपति
वे विदेशी वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा कम होना चाहते थे।
👩 महिलाएँ
महिलाओं ने जुलूसों, धरनों और सभाओं में बड़ी संख्या में भाग लिया।
🧠 फिर वही बात सामने आती है — राष्ट्रवाद सबको जोड़ता है, पर सबकी अपेक्षाएँ एक जैसी नहीं होतीं। यही इस अध्याय की एक मुख्य समझ है।
🔴 एकता की सीमाएँ
सामाजिक असमानता
दलित वर्गों के प्रश्न अलग रूप में सामने आए। उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान का प्रश्न भी महत्त्वपूर्ण था।
सांप्रदायिक दूरी
कुछ समय बाद कई क्षेत्रों में हिंदू-मुस्लिम एकता कमजोर पड़ने लगी। अलग राजनीतिक पहचान की भावना भी बढ़ी।
🧠 इससे स्पष्ट है कि भारतीय राष्ट्रवाद बहुत शक्तिशाली था, पर वह पूर्ण रूप से एकरूप नहीं था। समाज के भीतर अनेक अंतर्विरोध बने रहे।
🔵 गोलमेज सम्मेलन और समझौते
🌿 अंग्रेज़ी शासन ने संवैधानिक सुधारों पर बातचीत के लिए सम्मेलन बुलाए।
🔹 कुछ समय के लिए समझौते भी हुए।
❗ फिर भी पूर्ण स्वतंत्रता का प्रश्न हल नहीं हुआ।
🧠 इससे पता चलता है कि विदेशी शासन दबाव पड़ने पर वार्ता तो करता था, पर सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं था।
🟢 राष्ट्रीय आंदोलन का व्यापक प्रभाव
भारतीय राष्ट्रवाद केवल बड़े नेताओं के कारण नहीं बढ़ा। वह इसलिए मजबूत हुआ क्योंकि:
🔹 गाँवों तक राजनीतिक चेतना पहुँची
🔹 महिलाएँ जुड़ीं
🔹 विद्यार्थी सक्रिय हुए
🔹 किसान और मजदूर सहभागी बने
🔹 प्रतीक और सांस्कृतिक माध्यम व्यापक रूप से फैले
🧠 इस प्रकार राष्ट्रवाद जनता के जीवन का हिस्सा बन गया।
🔴 निष्कर्ष
भारत में राष्ट्रवाद विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष से विकसित हुआ। गांधीजी ने इसे जन-आधारित, नैतिक और अहिंसक रूप दिया। असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन जैसे प्रयासों ने राष्ट्रवादी भावना को व्यापक बनाया। प्रतीकों, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों और जनता की भागीदारी ने राष्ट्रवाद को मजबूत किया। यद्यपि सामाजिक और सांप्रदायिक सीमाएँ बनी रहीं, फिर भी स्वतंत्रता संघर्ष ने भारत को एक साझा राष्ट्रीय पहचान की ओर आगे बढ़ाया।
📝 सारांश
🔵 भारत में राष्ट्रवाद विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष से विकसित हुआ।
🟢 सत्याग्रह ने आंदोलन को नई दिशा दी।
🔴 रॉलेट अधिनियम और जलियाँवाला बाग ने जनता में गहरा रोष पैदा किया।
🟡 असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन राष्ट्रीय संघर्ष के बड़े चरण बने।
🔵 खादी, चरखा और भारत माता जैसे प्रतीकों ने साझा पहचान बनाई।
❗ अलग-अलग वर्गों ने आंदोलन में भाग लिया, पर उनकी अपेक्षाएँ भिन्न थीं।
🟢 फिर भी राष्ट्रीय भावना लगातार मजबूत होती गई।
📌 त्वरित पुनरावलोकन
🔵 गांधीजी ने राष्ट्रवाद को जनआंदोलन बनाया।
🟢 रॉलेट अधिनियम और जलियाँवाला बाग निर्णायक घटनाएँ थीं।
🟡 असहयोग और सविनय अवज्ञा मुख्य आंदोलन थे।
🔴 नमक राष्ट्रीय प्रतिरोध का प्रतीक बना।
🌍 भारत में राष्ट्रवाद संघर्ष, प्रतीक और जनता की भागीदारी से विकसित हुआ।
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पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
🔶 1. व्याख्या करें –
🔷 (क) उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों से जुड़ी हुई क्यों थी?
🟢 उत्तर:
उपनिवेशों में राष्ट्रवाद का विकास वहाँ की जनता द्वारा विदेशी शासन के विरुद्ध चलाए गए आंदोलनों के कारण हुआ। उपनिवेशवाद ने शोषण, अन्याय और दमन को जन्म दिया, जिससे लोगों में जागरूकता आई और वे एकजुट होकर अपनी सांस्कृतिक पहचान और स्वतंत्रता के लिए संगठित हुए। इस विरोध ने राष्ट्रवाद को जन्म दिया।
🔷 (ख) पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?
🟢 उत्तर:
पहले विश्व युद्ध के दौरान करों में वृद्धि, सैनिकों की जबरन भर्ती और खाद्य वस्तुओं की भारी कमी ने जनता में असंतोष फैलाया। साथ ही, भारतीय नेताओं को स्वराज्य का आश्वासन दिया गया। युद्ध ने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर राष्ट्रवाद को तीव्र किया।
🔷 (ग) भारत के लोग रॉलेट एक्ट के विरोध में क्यों थे?
🟢 उत्तर:
रॉलेट एक्ट के अंतर्गत सरकार को बिना मुकदमा चलाए किसी को भी जेल में डालने का अधिकार था। यह कानून नागरिक स्वतंत्रता के विरुद्ध था। लोगों को डर था कि इससे उनके मौलिक अधिकार छिन जाएँगे, इसलिए पूरे भारत में इसका तीव्र विरोध हुआ।
🔷 (घ) गांधीजी ने असहयोग आंदोलन के समय विदेशी का बहिष्कार क्यों किया?
🟢 उत्तर:
गांधीजी ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार इसलिए किया क्योंकि वे मानते थे कि अंग्रेजी शासन भारतीयों की मेहनत की कमाई को लूट रहा था। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से अंग्रेजों की आर्थिक शक्ति कमजोर हो सकती थी। साथ ही, इससे स्वदेशी उद्योगों को बल मिलना था।
🔶 2. सत्याग्रह के विचार का क्या महत्व है?
🟢 उत्तर:
सत्याग्रह का अर्थ है – सत्य के लिए आग्रह। इसका उद्देश्य अहिंसा और आत्मबल के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना है। यह विरोध का नैतिक रूप था जिसमें शारीरिक शक्ति की बजाय नैतिक बल का प्रयोग होता था। गांधीजी ने इसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख साधन बनाया।
🔶 3. निम्नलिखित पर अनुच्छेद के लिए रिपोर्ट लिखें –
🔷 (क) जालियावालाबाग हत्याकांड
🟢 उत्तर:
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियाँ चलवा दीं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। यह हत्याकांड ब्रिटिश शासन की बर्बरता का प्रतीक बना। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और राष्ट्रीय आंदोलन को तेज कर दिया।
🔷 (ख) सायमन कमीशन
🟢 उत्तर:
सायमन कमीशन 1928 में भारत आया। इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था, जिससे भारतीयों को अपमान महसूस हुआ। इसका देशभर में बहिष्कार हुआ और ‘सायमन वापस जाओ’ के नारे लगे। इस घटना ने भारतीयों को आत्मनिर्भर संविधान बनाने की माँग पर बल दिया।
🔶 4. इस अध्याय में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय 1 में दी गई जर्मेनिया की छवि की तुलना कीजिए।
🟢 उत्तर:
भारत माता की छवि में एक देवी जैसी महिला चित्रित है जो भारतीय संस्कृति और एकता की प्रतीक है। जर्मेनिया की छवि में एक शक्तिशाली महिला योद्धा है जो राष्ट्र की रक्षा और बलिदान की भावना को दर्शाती है। दोनों ही छवियाँ अपने राष्ट्र के गौरव और स्वतंत्रता की भावना को दर्शाती हैं, लेकिन भारत माता की छवि में धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएँ अधिक गहराई से जुड़ी हैं।
🔷 1.
1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले सभी सामाजिक वर्गों की सूची बनाएँ। इसके बाद उनमें से किसी तीन को चुन कर उनकी आंदोलनों में भाग लेने की रूपरेखा दें और स्पष्ट करें कि उन्होंने किन कारणों से आंदोलन में भाग लिया।
🟢 उत्तर:
असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले प्रमुख सामाजिक वर्ग:
🔹 छात्र
🔹 शिक्षक
🔹 श्रमिक
🔹 किसान
🔹 व्यापारी
🔹 अधिवक्ता
🔹 महिलाओं
🔹 जनजातीय समुदाय
चयनित 3 वर्ग:
🌟 (1) छात्र वर्ग:
सरकारी विद्यालयों और कॉलेजों का बहिष्कार कर, वे राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों में गए। राष्ट्रभक्ति से प्रेरित होकर उन्होंने औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली का विरोध किया।
🌟 (2) किसान वर्ग:
भारी कर, जबरन वसूली और अत्याचारों से त्रस्त होकर किसानों ने आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने लगान न देने, कोर्ट बहिष्कार आदि में भाग लिया।
🌟 (3) वकील वर्ग:
गांधीजी के आह्वान पर कई प्रसिद्ध वकीलों ने अदालतों का बहिष्कार किया, जैसे – मोतीलाल नेहरू, सी. राजगोपालाचारी आदि। उन्होंने ब्रिटिश न्यायिक प्रणाली पर अविश्वास जताया।
🔷 2.
नमक यात्रा को वर्णन करें। स्पष्ट करें कि यह उपनिवेशवाद के विरुद्ध प्रतिरोध का एक अवसर क्यों था।
🟢 उत्तर:
1930 में गांधीजी ने डांडी यात्रा प्रारंभ की, जिसमें वे साबरमती आश्रम से 240 मील पैदल यात्रा कर डांडी पहुँचे और वहाँ नमक कानून तोड़ा। यह कार्य ब्रिटिश सत्ता के उस कानून के विरुद्ध था जिसमें भारतीयों को नमक बनाने या बेचने से रोका गया था।
✨ यह प्रतिरोध का प्रतीक बना क्योंकि –
🔸 नमक हर वर्ग की आवश्यकता थी, इस पर कर अन्यायपूर्ण था।
🔸 इससे आम जनता भी आंदोलन से जुड़ गई।
🔸 यह अहिंसक सत्याग्रह का उत्कृष्ट उदाहरण बना।
🔷 3.
कब्बनिगुंडू की दो अति विविध राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा लेने वाली महिलाओं से बातचीत का सारांश दें। बताएँ कि इस अनुभव का आपके जीवन में क्या महत्व हो सकता है?
🟢 उत्तर:
कब्बनिगुंडू की महिलाओं ने असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन दोनों में भाग लिया। एक महिला ने विदेशी वस्त्र जलाए, दूसरी ने नमक आंदोलन में भाग लिया। दोनों ने ब्रिटिश सत्ता की निंदा की और नारी शक्ति का परिचय दिया।
🌺 महत्त्व:
👉 यह हमें प्रेरणा देता है कि देशभक्ति के लिए साहस और संकल्प आवश्यक है।
👉 महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से सामाजिक समानता का संदेश मिलता है।
👉 यह अनुभव आज के युवाओं को राष्ट्रनिर्माण में भागीदारी की प्रेरणा देता है।
🔷 4.
राजनीतिक नेता पृष्ठभूमि चित्रण के सवाल पर क्यों हुए थे?
🟢 उत्तर:
राजनीतिक नेताओं को यह आपत्ति थी कि भारत माता की धार्मिक छवि कुछ समुदायों को अलग कर सकती है।
🔸 मुस्लिम नेता मानते थे कि यह हिन्दू देवी की तरह दिखती है।
🔸 इससे राष्ट्रीय एकता बाधित हो सकती थी।
🔸 इसलिए वे ऐसे धार्मिक प्रतीकों के स्थान पर धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र प्रतीकों के पक्षधर थे।
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अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न
🟩 10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) उत्तर सहित
प्रश्न 1: महात्मा गांधी कब भारत लौटे?
(अ) 1919
(ब) 1922
(स) 1915
(द) 1930
उत्तर: (स) 1915
प्रश्न 2: किस आंदोलन की शुरुआत डांडी यात्रा से हुई थी?
(अ) असहयोग आंदोलन
(ब) स्वदेशी आंदोलन
(स) सविनय अवज्ञा आंदोलन
(द) भारत छोड़ो आंदोलन
उत्तर: (स) सविनय अवज्ञा आंदोलन
प्रश्न 3: जलियांवाला बाग नरसंहार कब हुआ था?
(अ) 1919
(ब) 1920
(स) 1930
(द) 1942
उत्तर: (अ) 1919
प्रश्न 4: रोलेट एक्ट किस वर्ष पारित किया गया?
(अ) 1917
(ब) 1919
(स) 1921
(द) 1923
उत्तर: (ब) 1919
प्रश्न 5: किस नेता ने आंध्र प्रदेश के आदिवासियों के आंदोलन का नेतृत्व किया?
(अ) बाल गंगाधर तिलक
(ब) बाबा रामचंद्र
(स) अल्लूरी सीताराम राजू
(द) गांधीजी
उत्तर: (स) अल्लूरी सीताराम राजू
प्रश्न 6: किस घटना के बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया?
(अ) चंपारण सत्याग्रह
(ब) चौरी-चौरा कांड
(स) डांडी यात्रा
(द) जलियांवाला बाग
उत्तर: (ब) चौरी-चौरा कांड
प्रश्न 7: भारत माता की छवि सबसे पहले किसने बनाई?
(अ) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
(ब) बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
(स) अवनींद्रनाथ ठाकुर
(द) नंदलाल बोस
उत्तर: (स) अवनींद्रनाथ ठाकुर
प्रश्न 8: गांधी-इरविन समझौता किस वर्ष हुआ?
(अ) 1930
(ब) 1931
(स) 1929
(द) 1942
उत्तर: (ब) 1931
प्रश्न 9: ‘हरिजन सेवा संघ’ की स्थापना किसने की?
(अ) डॉ. भीमराव अंबेडकर
(ब) पंडित नेहरू
(स) गांधीजी
(द) सुभाष चंद्र बोस
उत्तर: (स) गांधीजी
प्रश्न 10: पूना समझौता किससे संबंधित था?
(अ) मुस्लिम प्रतिनिधित्व
(ब) दलितों के पृथक निर्वाचक मंडल
(स) हिंदू महासभा
(द) महिलाओं के अधिकार
उत्तर: (ब) दलितों के पृथक निर्वाचक मंडल
🟨 10 लघु उत्तरीय प्रश्न (1–2 वाक्य में) उत्तर सहित
प्रश्न 1: गांधीजी ने चंपारण में कौन-सा आंदोलन शुरू किया?
उत्तर: नील की खेती करने वाले किसानों के लिए सत्याग्रह आंदोलन।
प्रश्न 2: रोलेट एक्ट का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: बिना मुकदमा या सुनवाई के किसी को भी बंदी बनाने की शक्ति देना।
प्रश्न 3: जलियांवाला बाग में किसने गोली चलवाई थी?
उत्तर: जनरल डायर ने।
प्रश्न 4: असहयोग आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: ब्रिटिश शासन से सहयोग समाप्त कर स्वराज की दिशा में बढ़ना।
प्रश्न 5: डांडी यात्रा कितने किलोमीटर लंबी थी?
उत्तर: 240 किलोमीटर।
प्रश्न 6: पूना समझौता किसके बीच हुआ?
उत्तर: गांधीजी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच।
प्रश्न 7: सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत किस तिथि को हुई?
उत्तर: 12 मार्च 1930।
प्रश्न 8: दलितों को गांधीजी किस नाम से पुकारते थे?
उत्तर: हरिजन।
प्रश्न 9: कौन-से वर्ग ने विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाया?
उत्तर: व्यापारी वर्ग और मध्यम वर्ग।
प्रश्न 10: ‘भारत माता’ का गीत किसने लिखा था?
उत्तर: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने।
🟧 5 मध्यम दीर्घ उत्तर प्रश्न (3–4 वाक्य में)
प्रश्न 1: असहयोग आंदोलन के प्रमुख कदम क्या थे?
उत्तर: इस आंदोलन में सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, अदालतों और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार शामिल था।
लोगों ने खादी पहनना शुरू किया और स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा दिया।
इसने जनता को राष्ट्रीयता से जोड़ा और ब्रिटिश शासन की नींव कमजोर की।
प्रश्न 2: डांडी यात्रा का महत्व क्या था?
उत्तर: डांडी यात्रा सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत थी, जिसमें गांधीजी ने नमक कानून तोड़ा।
यह यात्रा ब्रिटिश कानूनों की अवहेलना का प्रतीक बन गई।
लाखों भारतीयों ने इसमें भाग लिया और यह जन आंदोलन में बदल गया।
प्रश्न 3: जलियांवाला बाग नरसंहार के क्या प्रभाव पड़े?
उत्तर: इस घटना से पूरे देश में आक्रोश फैल गया।
लोगों का विश्वास ब्रिटिश शासन से उठ गया।
गांधीजी ने ‘कैसर-ए-हिंद’ की उपाधि लौटा दी और आंदोलन की गति तेज हो गई।
प्रश्न 4: अल्लूरी सीताराम राजू ने किस तरह आंदोलन चलाया?
उत्तर: उन्होंने आदिवासियों को अंग्रेजों के खिलाफ संगठित किया।
राजस्व कानूनों और जबरन श्रम का विरोध किया।
उन्होंने हिंसात्मक तरीके अपनाए और लोकनायक के रूप में पूजे गए।
प्रश्न 5: महिलाओं की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: महिलाओं ने रैलियों में भाग लिया, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया और घरों में चरखा चलाया।
हालांकि उन्हें समान राजनीतिक अधिकार नहीं मिले, लेकिन उनकी भागीदारी प्रेरणादायक रही।
🟥 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (6+ वाक्य में)
प्रश्न 1: असहयोग आंदोलन की शुरुआत से लेकर वापसी तक की घटनाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
असहयोग आंदोलन की शुरुआत 1920 में हुई, गांधीजी ने इसे अहिंसात्मक और जन-आधारित आंदोलन बनाया।
लोगों ने सरकारी संस्थाओं से त्यागपत्र दिए, विदेशी वस्त्र जलाए, खादी को अपनाया गया।
देशभर में किसानों, छात्रों, मजदूरों ने भागीदारी की।
आंदोलन में कई जगहों पर हिंसा भी हुई, जो गांधीजी की नीति के खिलाफ था।
1922 में उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में भीड़ ने पुलिस थाने को जला दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी मारे गए।
गांधीजी ने इस घटना के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया।
हालांकि इससे आंदोलन की गति थमी, लेकिन लोगों में राष्ट्रवाद की भावना और मजबूत हो गई।
प्रश्न 2: भारत में राष्ट्रवाद के प्रसार में प्रतीकों और संस्कृति की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में राष्ट्रवाद केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक आंदोलन भी था।
‘भारत माता’ की छवि अवनींद्रनाथ ठाकुर द्वारा बनाई गई, जिसने लोगों में मातृभूमि के लिए समर्पण की भावना भरी।
बंकिमचंद्र का गीत “वंदे मातरम्” स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा बना।
राष्ट्रीय ध्वज, चरखा, लोककला, लोकगीत और भाषणों ने राष्ट्र की अवधारणा को सुदृढ़ किया।
नाटक, कविताएं, लेख और समाचार पत्रों ने भी जनता को एकता का संदेश दिया।
इन सांस्कृतिक प्रतीकों ने जनता को भावनात्मक रूप से जोड़ा और राष्ट्रवाद की जड़ों को गहरा किया।
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